निर्वाचन में काले धन को नियंत्रित करने की कानूनी व्यवस्था
18 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
RPA 1951, आचार संहिता, और cVIGIL ऐप निर्वाचन में काले धन को रोकने के मुख्य साधन हैं।
क्या हुआ
प्रतिनिधित्व जनता अधिनियम (1951) की धारा 123(1) रिश्वत को चुनावी भ्रष्ट कार्य के रूप में परिभाषित करती है। 1961 के निर्वाचन संचालन नियमों में उम्मीदवारों के व्यय की सीमा निर्धारित की गई है। Common Cause बनाम भारत संघ (1996) के बाद राजनीतिक दलों को चुनाव संबंधी वित्तीय विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य किया गया। भारत संघ बनाम Association for Democratic Reforms (2002) में मतदाताओं को उम्मीदवारों की आपराधिक पृष्ठभूमि, संपत्ति और योग्यता जानने का अधिकार दिया गया। निर्वाचन आयोग cVIGIL ऐप के माध्यम से नागरिकों को रियल-टाइम शिकायत दर्ज करने की सुविधा देता है।
मुख्य तथ्य
- 1धारा 123(1) RPA 1951 - रिश्वत को चुनावी भ्रष्ट कार्य माना
- 2धारा 29C RPA 1951 - 20,000 रुपये तक दान प्रकटीकरण अनिवार्य नहीं
- 3cVIGIL ऐप - आचार संहिता के उल्लंघन की रियल-टाइम रिपोर्टिंग
- 4Common Cause (1996) - दलों को वित्तीय विवरण प्रस्तुत करना अनिवार्य
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
निर्वाचन कानून की बहु-स्तरीय निगरानी व्यवस्था - संस्थागत, कानूनी और डिजिटल तंत्र।
स्थायी GK: प्रतिनिधित्व जनता अधिनियम (1951) - भारत में मुख्य निर्वाचन कानून; अनुच्छेद 324 - निर्वाचन आयोग को पूर्ण नियंत्रण।