मुख्य सामग्री पर जाएं
राष्ट्रीय · राजव्यवस्था

खनिज और खनन (विकास और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026

14 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

खनिज कराधान को एकीकृत करने वाला विधेयक राज्य स्वायत्तता और संघवाद की परंपरागत व्यवस्था को चुनौती देता है।

क्या हुआ

यह विधेयक खनिज अधिकारों और खनिज-वहन भूमि पर राज्य करों और लेवी को प्रतिबंधित करके एक सुसंगत राजकीय ढांचा बनाने का प्रयास करता है। संशोधन धारा 2 में 'खनिज-वहन भूमि' को केंद्रीय नियंत्रण में लाता है और नई धारा 9D के तहत राज्यों को खनिज मूल्य या मात्रा पर कर लगाने से प्रतिबंधित करता है। विधेयक कराधान में अनिश्चितता को कम करके निवेश को प्रोत्साहित करता है, किंतु भारतीय संविधान के अनुच्छेद 49 और 50 के तहत राज्य कराधान शक्तियों से संबंधित संघवाद संबंधी चिंताएं उत्पन्न करता है। साथ ही, यह 2024 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के कानूनी परिणामों को बदलने का प्रयास करता है।

मुख्य तथ्य

  1. 1धारा 9D: राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने से प्रतिबंधित करता है, केवल केंद्रीय शर्तों के अधीन
  2. 2पूर्वव्यापी राहत: संशोधन से पहले अप्राप्त लेवी को अमान्य घोषित करता है किंतु भुगतान राशि की वापसी नहीं
  3. 32024 सर्वोच्च न्यायालय निर्णय: राज्यों को खनिज अधिकारों पर कर लगाने की शक्ति प्रदान करता है
  4. 4संघवाद संबंधी चिंताएं: राज्य सूची की प्रविष्टि 49 और 50 के तहत राज्य शक्तियों में हस्तक्षेप की आशंका

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

MMDR 2026 संशोधन में केंद्र-राज्य संबंधों, संघवाद, और संवैधानिक कराधान शक्तियों के संतुलन की परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण।

स्थायी GK: MMDR Act 1957 ने खनन क्षेत्र को विनियमित करने के लिए संसद को केंद्रीय विधायी नियंत्रण दिया; 2015 संशोधन ने विवेकाधीन अनुदान को विलोपित कर नीलामी विधि लागू की।

इसी विषय पर और

इस विषय को और गहराई से पढ़ें