आधुनिक कक्षीय संघर्ष
5 मई 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
केसलर सिंड्रोम — मलबे की श्रृंखला टक्कर; बाह्य अंतरिक्ष संधि (1967); भारत का प्रोजेक्ट नेत्र (SSA)।
क्या हुआ
आधुनिक कक्षीय (orbital) संघर्ष व अंतरिक्ष युद्ध की चर्चा हुई। अंतरिक्ष अब एक रणनीतिक 'युद्धक्षेत्र' बन रहा है — उपग्रह संचार, नौवहन (GPS/NavIC), निगरानी व मिसाइल चेतावनी के लिए महत्वपूर्ण हैं। खतरों में उपग्रह-रोधी (ASAT) हथियार, जैमिंग, साइबर हमले व अंतरिक्ष मलबा शामिल हैं। भारत ने 2019 में 'मिशन शक्ति' के तहत ASAT परीक्षण कर इस क्षमता वाले चुनिंदा देशों (अमेरिका, रूस, चीन) में स्थान बनाया। बाह्य अंतरिक्ष संधि 1967 अंतरिक्ष में परमाणु हथियारों पर रोक लगाती है।
मुख्य तथ्य
- 1आधुनिक कक्षीय संघर्ष व अंतरिक्ष युद्ध।
- 2अंतरिक्ष — रणनीतिक युद्धक्षेत्र; उपग्रह महत्वपूर्ण।
- 3खतरे — ASAT हथियार, जैमिंग, साइबर, मलबा।
- 4मिशन शक्ति (2019) — भारत का ASAT परीक्षण।
- 5बाह्य अंतरिक्ष संधि 1967।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
बाह्य अंतरिक्ष संधि, केसलर सिंड्रोम, PAROS व प्रोजेक्ट नेत्र विज्ञान/अंतरराष्ट्रीय में महत्वपूर्ण हैं।
स्थायी GK: मिशन शक्ति (2019) — भारत का ASAT परीक्षण। बाह्य अंतरिक्ष संधि 1967 — अंतरिक्ष में परमाणु हथियार निषेध। NavIC — भारतीय नौवहन प्रणाली। अंतरिक्ष मलबा।