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राष्ट्रीय · विज्ञान

न्यूक्लिक एसिड एम्प्लीफिकेशन टेस्टिंग (NAT): रक्त बैंकों में अनिवार्य करने की माँग

3 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

NAT रक्त में वायरस के DNA/RNA को सीधे पकड़ता है, जिससे संक्रमण का 'विंडो पीरियड' घटता है।

क्या हुआ

NAT एक आणविक जाँच है जो रक्त में वायरस के DNA या RNA को लक्ष्य बनाकर उसकी प्रतियाँ बढ़ाती है, जिससे संक्रमण एंटीबॉडी बनने से पहले के 'विंडो पीरियड' में भी पकड़ा जा सकता है। सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन की याचिका में HIV, हेपेटाइटिस B व C, मलेरिया और सिफलिस के लिए सभी रक्त बैंकों में NAT अनिवार्य करने की माँग थी। फरवरी 2026 में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने सरकारी अस्पतालों में इसकी लागत और उपलब्धता का ब्योरा माँगा।

मुख्य तथ्य

  1. 1NAT: वायरस के DNA/RNA की प्रतियाँ बढ़ाकर पहचान
  2. 2एंटीबॉडी जाँच से पहले संक्रमण पकड़ता है (विंडो पीरियड)
  3. 3याचिका: HIV, HBV, HCV, मलेरिया, सिफलिस हेतु अनिवार्य NAT

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

प्रश्न आ सकता है कि NAT किस चीज़ का पता लगाता है या यह 'विंडो पीरियड' को कैसे कम करता है।

स्थायी GK: भारत में औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम व नियमों के तहत हर रक्त इकाई की HIV, हेपेटाइटिस B, हेपेटाइटिस C, मलेरिया और सिफलिस की जाँच अनिवार्य है; HIV जाँच 1988 और HCV जाँच 2001 में अनिवार्य हुई।

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