पेट्रोडॉलर प्रणाली
12 जनवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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पेट्रोडॉलर — तेल का अमेरिकी डॉलर में व्यापार; डॉलर की वैश्विक आरक्षित मुद्रा स्थिति का आधार।
क्या हुआ
'पेट्रोडॉलर प्रणाली' (Petrodollar System) की चर्चा हुई। पेट्रोडॉलर प्रणाली वह वैश्विक व्यवस्था है जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का व्यापार मुख्यतः अमेरिकी डॉलर में होता है (1970 के दशक में अमेरिका-सऊदी अरब समझौते से उद्भूत)। इससे डॉलर की वैश्विक 'आरक्षित मुद्रा' (reserve currency) के रूप में मांग व प्रभुत्व बना रहता है (तेल-निर्यातक देश डॉलर अर्जित कर अमेरिकी प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं)। हाल में कुछ देश (रूस, चीन, ब्रिक्स) 'डी-डॉलराइज़ेशन' (स्थानीय मुद्राओं/अन्य मुद्राओं में व्यापार) की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे पेट्रोडॉलर के भविष्य पर बहस है। भारत भी कुछ व्यापार रुपये/स्थानीय मुद्राओं में करने का प्रयास कर रहा है। यह अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, मुद्रा व भू-राजनीति से जुड़ता है। यह अर्थव्यवस्था से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1पेट्रोडॉलर प्रणाली।
- 2कच्चे तेल का व्यापार मुख्यतः अमेरिकी डॉलर में।
- 31970s — अमेरिका-सऊदी अरब समझौता।
- 4डॉलर आरक्षित-मुद्रा प्रभुत्व; अमेरिकी प्रतिभूति निवेश।
- 5डी-डॉलराइज़ेशन (रूस/चीन/ब्रिक्स); भारत रुपया-व्यापार।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
पेट्रोडॉलर, डॉलर वर्चस्व व डी-डॉलरीकरण अर्थव्यवस्था में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: पेट्रोडॉलर — कच्चे तेल का व्यापार मुख्यतः डॉलर में (1970s; US-सऊदी)। डॉलर आरक्षित-मुद्रा प्रभुत्व। डी-डॉलराइज़ेशन (रूस/चीन/ब्रिक्स)। भारत — रुपया-व्यापार प्रयास।