जनसंख्या नियंत्रण और परिसीमन में उत्तर-दक्षिण विभाजन
12 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
याद रखें · एक पंक्ति में
जनसंख्या नियंत्र करने वाले दक्षिणी राज्यों को परिसीमन से दंड मिल रहा है।
क्या हुआ
भारत के दक्षिणी राज्य—विशेषकर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश—ने राष्ट्रीय परिवार नियोजन नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया है और अपनी जनसंख्या को स्थिर किया है। इसके विपरीत, उत्तर भारत के राज्य—उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान—में ऐतिहासिक रूप से अधिक जनसंख्या वृद्धि दर रही है। यदि परिसीमन सख्ती से वर्तमान जनसंख्या आंकड़ों पर आधारित होगा, तो उत्तरी राज्यों को काफी संख्या में नई सीटें मिलेंगी जबकि दक्षिणी राज्यों को नुकसान होगा। यह न केवल सीटों का वितरण बदलेगा, बल्कि राष्ट्रीय नीति निर्माण, संवैधानिक संशोधन और संसाधन आवंटन में शक्ति भी स्थानांतरित करेगा।
मुख्य तथ्य
- 142वें संशोधन ने 1971 के आधार पर सीटें फ्रीज कीं ताकि जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों को दंड न मिले
- 2दक्षिणी राज्यों की कम जनसंख्या वृद्धि दर नीति सफलता को दर्शाती है
- 3उत्तरी राज्यों में अधिक जनसंख्या वृद्धि से नई सीटें बढ़ेंगी
- 4यह शक्ति संतुलन को उत्तर की ओर स्थानांतरित करेगा
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
संघवाद में जनसंख्या-आधारित प्रतिनिधित्व बनाम क्षेत्रीय संतुलन का द्वंद्व।
स्थायी GK: भारत में लोकसभा की कुल निर्वाचित शक्ति 543 है, जबकि संविधान 550 तक बढ़ाने की अनुमति देता है।