13 जनवरी 2026 · 13 January 2026अर्थव्यवस्था⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण
बढ़ता FTA व्यापार घाटा
Rising FTA trade deficit
FTA व्यापार घाटा — कुछ FTA भागीदारों से आयात निर्यात से अधिक; घरेलू उद्योग पर दबाव।
मुख्य तथ्य
- •FTA के तहत बढ़ता व्यापार घाटा।
- •कुछ FTA भागीदारों से आयात तेज़ी से बढ़ा।
- •व्यापार घाटा — आयात > निर्यात।
- •कारण — गैर-टैरिफ बाधाएँ, मूल देश नियम दुरुपयोग।
- •भारत — संतुलित व पारस्परिक FTA पर ज़ोर।
मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के तहत बढ़ते व्यापार घाटे की चर्चा हुई। FTA दो देशों के बीच टैरिफ घटाकर व्यापार बढ़ाते हैं, पर कभी-कभी भारत के कुछ FTA भागीदारों (जैसे ASEAN, कोरिया) के साथ आयात निर्यात से तेज़ी से बढ़े, जिससे व्यापार घाटा (आयात > निर्यात) बढ़ा। इसके कारण — गैर-टैरिफ बाधाएँ, मूल देश के नियमों का दुरुपयोग ('रूटिंग'), घरेलू प्रतिस्पर्धात्मकता की कमी व आपूर्ति-शृंखला निर्भरता। इसलिए भारत नए FTA (UAE, ऑस्ट्रेलिया, EFTA, UK) में संतुलित, पारस्परिक व सुरक्षा-उपाय युक्त प्रावधानों पर ज़ोर देता है। यह व्यापार नीति, आत्मनिर्भरता व आर्थिक रणनीति से जुड़ा है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
व्यापार घाटा, FTA व रूल्स ऑफ ओरिजिन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
FTA — टैरिफ घटाकर व्यापार। व्यापार घाटा — आयात > निर्यात। मूल देश नियम ('रूटिंग')। संतुलित/पारस्परिक FTA।
✨ RajAI— RAS Prelims Expert