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राष्ट्रीय · कला-संस्कृति

सम्मक्का-सरलम्मा जतारा

21 जनवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

सम्मक्का-सरलम्मा (मेदाराम) जतारा — कोया समुदाय का द्विवार्षिक जनजातीय उत्सव; एशिया का सबसे बड़ा।

क्या हुआ

'सम्मक्का-सरलम्मा जतारा' (Sammakka-Saralamma Jatara) की चर्चा हुई। यह तेलंगाना (मेडारम, मुलुगु ज़िला) में हर दो वर्ष में आयोजित होने वाला एक विशाल जनजातीय (कोया जनजाति) त्योहार/मेला है, जिसे एशिया के सबसे बड़े आदिवासी समागमों में से एक माना जाता है (करोड़ों श्रद्धालु एकत्र होते हैं)। यह देवी 'सम्मक्का' व उनकी पुत्री 'सरलम्मा' (अथवा सरक्का) की पूजा में मनाया जाता है, जिन्हें (किंवदंती के अनुसार) कोया समुदाय की रक्षा हेतु अन्यायपूर्ण कर/शासकों के विरुद्ध लड़ने वाली वीर-योद्धा देवियाँ माना जाता है। यह जनजातीय संस्कृति, लोक-परंपरा, स्त्री-शक्ति व सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। यह कला-संस्कृति व जनजातीय परंपरा से जुड़ा है। यह कला-संस्कृति से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1सम्मक्का-सरलम्मा जतारा।
  2. 2तेलंगाना (मेडारम, मुलुगु); कोया जनजाति।
  3. 3द्विवार्षिक; एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी मेला।
  4. 4देवी सम्मक्का व पुत्री सरलम्मा की पूजा।
  5. 5वीर-योद्धा देवियाँ; जनजातीय संस्कृति/स्त्री-शक्ति।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

मेदाराम जतारा, कोया जनजाति व जनजातीय उत्सव कला-संस्कृति में पूछे जाते हैं।

स्थायी GK: सम्मक्का-सरलम्मा जतारा — तेलंगाना (मेडारम); कोया जनजाति; द्विवार्षिक। एशिया का सबसे बड़ा आदिवासी मेला। वीर-योद्धा देवियाँ; जनजातीय संस्कृति।

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