DTAA पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय
23 जनवरी 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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DTAA — दो देशों के बीच एक ही आय पर दोहरे कराधान से बचने का समझौता।
क्या हुआ
DTAA पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की चर्चा हुई। DTAA (Double Taxation Avoidance Agreement / दोहरा कराधान बचाव समझौता) दो देशों के बीच एक संधि है जो किसी की एक ही आय पर दोनों देशों में दोहरे कर से बचाती है। एक प्रमुख कानूनी मुद्दा 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) खंड का रहा है — क्या किसी DTAA का MFN लाभ स्वतः लागू होता है, या उसके लिए सरकार द्वारा एक अलग अधिसूचना आवश्यक है। सर्वोच्च न्यायालय ने (नेस्ले मामले में) निर्णय दिया कि DTAA व उसका MFN-लाभ लागू होने के लिए आयकर अधिनियम की धारा 90 के तहत एक औपचारिक अधिसूचना आवश्यक है। यह अंतरराष्ट्रीय कराधान, संधि-व्याख्या, कर-निश्चितता व विदेशी निवेश से जुड़ा है। यह अर्थव्यवस्था व विधि से जुड़ा है। यह अर्थव्यवस्था से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1DTAA पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला।
- 2DTAA — दोहरा कराधान बचाव समझौता।
- 3मुद्दा — MFN खंड स्वतः लागू या अधिसूचना आवश्यक।
- 4SC (नेस्ले) — धारा 90 अधिसूचना आवश्यक।
- 5अंतरराष्ट्रीय कराधान; कर-निश्चितता; विदेशी निवेश।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
DTAA, MFN खंड व अंतरराष्ट्रीय कराधान अर्थव्यवस्था में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: DTAA — दोहरा कराधान बचाव; MFN खंड। SC (नेस्ले मामला) — MFN लाभ हेतु धारा 90 अधिसूचना आवश्यक। कर-निश्चितता; विदेशी निवेश।