SHANTI Act, 2025 और परमाणु दायित्व संबंधी चिंताएँ
19 अगस्त 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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SHANTI Act, 2025 के दायित्व की सीमा संवैधानिक अधिकारों और पूर्ण दायित्व सिद्धांत का उल्लंघन कर सकती है।
क्या हुआ
SHANTI (सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया) Act, 2025 ने 2010 के पूर्ववर्ती CLND Act को प्रतिस्थापित किया है। यह निजी और विदेशी भागीदारी को सुगम बनाता है लेकिन दायित्व की सीमा 300 मिलियन SDR (लगभग 3,900-4,000 करोड़ रुपये) है। सर्वोच्च न्यायालय की चिंता यह है कि यह सीमा चेरनोबिल (235-700 अरब डॉलर) और फुकुशिमा (400-445 अरब डॉलर) जैसी आपदाओं की तुलना में अपर्याप्त है। अदालत ने AERB में नियुक्तियों पर सरकारी नियंत्रण से उत्पन्न संघर्ष की भी जांच की है।
मुख्य तथ्य
- 1SHANTI Act CLND Act, 2010 को प्रतिस्थापित करता है और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देता है।
- 2दायित्व की सीमा 300 मिलियन SDR है; रिएक्टर क्षमता के आधार पर ऑपरेटर दायित्व ₹100-₹3,000 करोड़ तक होता है।
- 3सर्वोच्च न्यायालय ने Article 21, पूर्ण दायित्व सिद्धांत और RTI अधिकारों के उल्लंघन की चिंता व्यक्त की है।
- 4भारत ने 2016 में Convention on Supplementary Compensation (CSC) की पुष्टि की है।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन का अधिकार) और पूर्ण दायित्व सिद्धांत के विरुद्ध SHANTI Act की वैधता तथा परमाणु नियामक स्वतंत्रता।
स्थायी GK: M.C. Mehta (1987) वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अनिवार्य रूप से हानिकारक गतिविधियों में निरपेक्ष दायित्व का सिद्धांत स्थापित किया था।