शेखावाटी के चित्रित हवेली कस्बे यूनेस्को की संभावित (टेंटेटिव) सूची में शामिल
13 सितंबर 2026 · Raj Study संपादकीय टीम · सरकारी स्रोत से तथ्य मिलाए गए
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शेखावाटी के 14 चित्रित हवेली कस्बे (झुंझुनूं, सीकर, चूरू) यूनेस्को की संभावित सूची में शामिल हुए।
क्या हुआ
यह एक श्रृंखलाबद्ध (सीरियल) प्रस्ताव है, जिसमें अलसीसर, बिसाऊ, चिड़ावा, चूरू, डूंडलोद, फतेहपुर, झुंझुनूं, खेतड़ी, लक्ष्मणगढ़, मंडावा, महनसर, नवलगढ़, रामगढ़ और सीकर के ऐतिहासिक हिस्से शामिल हैं। यूनेस्को के विवरण के अनुसार व्यापार मार्गों पर बसे व्यापारी 19वीं सदी में कोलकाता और मुंबई गए और 19वीं सदी के मध्य से 1930 के दशक तक अपनी कमाई से गृहनगरों में भित्तिचित्रित हवेलियाँ, मंदिर और सार्वजनिक भवन बनवाए। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने तीन अन्य भारतीय स्थलों के साथ इसकी घोषणा की। संभावित सूची में आना पहला कदम है, इससे विश्व धरोहर का दर्जा नहीं मिलता।
मुख्य तथ्य
- 114 कस्बों का सीरियल प्रस्ताव: झुंझुनूं, सीकर और चूरू जिले
- 2मंडावा, नवलगढ़, फतेहपुर, रामगढ़, खेतड़ी और चूरू शामिल
- 3हवेलियाँ व्यापारी पूँजी से 19वीं सदी के मध्य से 1930 के दशक तक बनीं
- 4अंडमान की औपनिवेशिक दंड बस्ती सहित 3 अन्य भारतीय स्थल भी जुड़े
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
प्रश्न शेखावाटी के जिलों या कस्बों की पहचान पर, या संभावित सूची और विश्व धरोहर सूची के अंतर पर आ सकता है।
स्थायी GK: किसी स्थल को विश्व धरोहर हेतु नामांकित करने से पहले उसे देश की संभावित सूची में होना चाहिए। राजस्थान के विश्व धरोहर स्थलों में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (1985), जंतर-मंतर जयपुर (2010) और जयपुर शहर (2019) शामिल हैं।
स्रोत: whc.unesco.org (आधिकारिक)