मुख्य सामग्री पर जाएं
25 अगस्त 2026 · 25 August 2026⭐ परीक्षा में महत्वपूर्ण

सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय श्रम कानून में 'उद्योग' की परिभाषा पर पुनर्विचार किया

Supreme Court Revisits Definition of 'Industry' in Indian Labour Law

सर्वोच्च न्यायालय ने निर्णय दिया कि नई औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के लिए 1978 की व्यापक परिभाषा स्वचालित रूप से लागू नहीं होगी।

मुख्य तथ्य

  • 1978 के बेंगलुरु जल आपूर्ति निर्णय ने 'त्रिपक्षीय परीक्षण' स्थापित किया जो मुनाफे की परवाह किए बिना कल्याण संस्थाओं को उद्योग मानता था
  • नई संहिता, 2020 दान, परोपकार और सामाजिक संस्थाओं को 'उद्योग' की परिभाषा से स्पष्ट रूप से बाहर करती है
  • केंद्रीय ट्रेड यूनियनें आशंकित हैं कि लाखों कर्मचारी सामूहिक सौदेबाजी अधिकार खो सकते हैं
  • अनुच्छेद 43 और 43A के साथ संविधान के निर्देशक सिद्धांतों के अनुसार संतुलन की आवश्यकता
राज्य (उत्तर प्रदेश) बनाम जय बीर सिंह मामले में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने श्रम कानून में 'उद्योग' की परिभाषा पर महत्वपूर्ण निर्णय दिया। 1978 के बेंगलुरु जल आपूर्ति फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने 'त्रिपक्षीय परीक्षण' स्थापित किया था जो क्रमबद्ध गतिविधि, नियोक्ता-कर्मचारी सहयोग और मानव आवश्यकताओं को पूरा करने वाली वस्तु या सेवाओं के उत्पादन को 'उद्योग' मानता था। हालांकि, नई संहिता, 2020 के तहत न्यायालय ने निर्णय दिया कि नई व्याख्या स्वतंत्र रूप से की जानी चाहिए। यह निर्णय केंद्रीय ट्रेड यूनियनों की गंभीर चिंता का विषय बन गया है क्योंकि इससे दाता, धर्मार्थ संस्थाओं और सार्वजनिक कल्याण केंद्रों के लाखों कर्मचारियों को सामूहिक सौदेबाजी अधिकार और न्यूनतम मजदूरी से वंचित होने का खतरा है।

🎯 परीक्षा में कैसे आएगा

भारतीय श्रम कानून के विकास में संवैधानिक न्यायालयों की भूमिका और औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के तहत कर्मचारी सुरक्षा का विषय।

📚 संबंधित स्थायी GK

औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 को व्यापार संघ अधिनियम, 1926 और औद्योगिक रोजगार (स्थायी आदेश) अधिनियम, 1946 के साथ 2020 में एकीकृत किया गया।

✨ RajAI— RAS Prelims Expert

संबंधित समसामयिकी

इस विषय को और गहराई से पढ़ें →