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📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

सर्वोच्च न्यायालय: गठन, नियुक्ति, क्षेत्राधिकार | Supreme Court

Supreme Court of India: Composition, Appointment, Jurisdiction

⏱ 14 मिनटadvanced✓ अपडेटेड: जुलाई 2026· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय

भारत का सर्वोच्च न्यायालय देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है, जो उच्च न्यायालयों और अधीनस्थ न्यायालयों वाली त्रि-स्तरीय व्यवस्था के शीर्ष पर स्थित है। संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ और सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन उसके दो दिन बाद 28 जनवरी 1950 को हुआ, जिससे स्वतंत्र न्यायपालिका ने गणतंत्र के जन्म के कुछ ही दिनों में कार्य आरंभ कर दिया। इसकी संरचना, शक्तियाँ और प्रक्रियाएँ संविधान के भाग V, अनुच्छेद 124-147 में निर्धारित हैं। संविधान के संरक्षक और अंतिम व्याख्याकार के रूप में, यह मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है, सरकारों के विवाद सुलझाता है, और यह सुनिश्चित करता है कि कोई कानून या कार्यपालिका कार्रवाई संविधान का उल्लंघन न करे। RAS परीक्षा की तैयारी में यह भारतीय राजव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण विषय है।

मुख्य अवधारणाएं

1. स्थापना और संवैधानिक आधार

सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत बने संघीय न्यायालय (Federal Court) और लंदन की प्रिवी काउंसिल का स्थान लेते हुए देश की सर्वोच्च अपीलीय अदालत का दर्जा प्राप्त किया। इसका उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को संसद भवन के चैंबर ऑफ प्रिंसेज़ में हुआ, और यह 1958 में नई दिल्ली के तिलक मार्ग स्थित वर्तमान भवन में स्थानांतरित हुआ। अनुच्छेद 124 इसकी स्थापना व गठन का प्रावधान करता है, जबकि बाद के अनुच्छेद नियुक्ति, कार्यकाल, हटाए जाने, स्थान, क्षेत्राधिकार और आदेशों की प्रवर्तनीयता से संबंधित हैं।

2. संरचना और न्यायाधीशों की नियुक्ति

न्यायालय में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और अन्य न्यायाधीश शामिल होते हैं। 1950 की मूल संख्या 1 CJI + 7 न्यायाधीश (कुल 8) थी, परंतु अनुच्छेद 124(1) के अंतर्गत संसद कानून बनाकर इसे बदल सकती है, और मुकदमों के बढ़ते बोझ के साथ इसे कई बार बढ़ाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन अधिनियम 2019 के बाद वर्तमान स्वीकृत संख्या 34 है (CJI सहित)।

सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या (CJI सहित)
  1. 19508
  2. 195611
  3. 196014
  4. 197818
  5. 198626
  6. 200831
  7. 201934

न्यायाधीशों की नियुक्ति अनुच्छेद 124(2) के अंतर्गत राष्ट्रपति द्वारा होती है। व्यवहार में यह कॉलेजियम प्रणाली (CJI + चार वरिष्ठतम न्यायाधीश नाम अनुशंसित करते हैं) के अनुसार होती है, जो तीन ऐतिहासिक निर्णयों से विकसित हुई:

  • प्रथम न्यायाधीश मामला (एस.पी. गुप्ता बनाम भारत संघ, 1981): CJI से "परामर्श" का अर्थ "सहमति" नहीं — कार्यपालिका को प्रधानता मिली।
  • द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993): इसे पलटते हुए CJI की राय (वरिष्ठ न्यायाधीशों से परामर्श कर बनी) को प्रधानता दी गई — कॉलेजियम अस्तित्व में आया।
  • तृतीय न्यायाधीश मामला (राष्ट्रपति संदर्भ, 1998): स्पष्ट किया कि कॉलेजियम में CJI सहित चार वरिष्ठतम न्यायाधीश हों, और विस्तृत मानदंड तय किए।

99वें संविधान संशोधन (2014) से बना राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (NJAC) अधिनियम 2014 सर्वोच्च न्यायालय ने 2015 में (चौथे न्यायाधीश मामले में) असंवैधानिक घोषित कर दिया, इसलिए कॉलेजियम प्रणाली जारी है।

न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक पद पर रहता है (अनुच्छेद 124(2)), राष्ट्रपति को लिखकर त्यागपत्र दे सकता है, या केवल अनुच्छेद 124(4)-(5) की महाभियोग प्रक्रिया (सिद्ध कदाचार/अक्षमता + संसद के प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत) से ही हटाया जा सकता है।

3. सर्वोच्च न्यायालय का क्षेत्राधिकार

  • मूल (अनुच्छेद 131): केंद्र और एक/अधिक राज्यों, या राज्यों के बीच विवादों की सीधे सुनवाई का अनन्य अधिकार — जैसे नदी जल बंटवारा या सीमा विवाद।
  • अपीलीय: उच्च न्यायालयों के संवैधानिक, सिविल व आपराधिक निर्णयों के विरुद्ध अपीलें, तथा अनुच्छेद 136 की "विशेष अनुमति याचिका" — किसी भी न्यायालय/अधिकरण (सैन्य न्यायालय छोड़कर) के आदेश के विरुद्ध अपील की विवेकाधीन शक्ति।
  • रिट (अनुच्छेद 32): मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन हेतु "संवैधानिक उपचारों का अधिकार", पाँच रिट — बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार-पृच्छा। अंबेडकर ने इसे संविधान की "आत्मा और हृदय" कहा।
  • परामर्शदात्री (अनुच्छेद 143): राष्ट्रपति सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर न्यायालय की राय मांग सकते हैं; यह राय परामर्शदात्री है, बाध्यकारी नहीं, पर लगभग हमेशा मानी जाती है।
क्षेत्राधिकारअनुच्छेदविषय
मूल131केंद्र-राज्य और राज्यों के बीच विवाद
अपीलीय132-136उच्च न्यायालयों आदि के निर्णयों के विरुद्ध अपील; विशेष अनुमति याचिका (136)
रिट32मौलिक अधिकारों का प्रवर्तन
परामर्शदात्री143राष्ट्रपति को सार्वजनिक महत्व के प्रश्न पर राय

4. न्यायिक समीक्षा और मूल ढांचा सिद्धांत

न्यायिक समीक्षा — कानूनों व कार्यपालिका आदेशों की संवैधानिकता जांचने और असंगत होने पर रद्द करने की शक्ति — अनुच्छेद 13, 32, 131-136, 143, 226 व 246 जैसे प्रावधानों से प्राप्त होती है, और स्वयं मूल ढांचे का हिस्सा है। इसका सबसे प्रसिद्ध रूप मूल ढांचा सिद्धांत है, जो केशवानंद भारती बनाम केरल राज्य (1973) में 13-न्यायाधीशों की पीठ ने दिया: अनुच्छेद 368 की व्यापक संशोधन शक्ति संविधान का "मूल ढांचा" नष्ट नहीं कर सकती। इसके तत्वों में संविधान की सर्वोच्चता, विधि का शासन, शक्ति पृथक्करण, न्यायिक समीक्षा, संघवाद, पंथनिरपेक्षता और निष्पक्ष चुनाव शामिल हैं — परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण विषय।

5. अभिलेख न्यायालय और अन्य शक्तियाँ

अनुच्छेद 129 सर्वोच्च न्यायालय को "अभिलेख न्यायालय" बनाता है, जिसे स्वयं की अवमानना दंडित करने की शक्ति है। अनुच्छेद 141 इसकी घोषित विधि को भारत के सभी न्यायालयों पर बाध्यकारी बनाता है। अनुच्छेद 142 इसे लंबित मामले में "पूर्ण न्याय" हेतु आदेश पारित करने की अद्वितीय शक्ति देता है। अनुच्छेद 129, 141 और 142 मिलकर न्यायालय को प्राधिकार और प्रभावी प्रवर्तन साधन दोनों देते हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू; सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को; अनुच्छेद 124-147 (भाग V) द्वारा शासित।
  • संघीय न्यायालय और प्रिवी काउंसिल का स्थान लिया।
  • पहले चैंबर ऑफ प्रिंसेज़ में बैठा; 1958 में तिलक मार्ग भवन में स्थानांतरित हुआ।
  • मूल संख्या (1950): 1 CJI + 7 न्यायाधीश; अनुच्छेद 124(1) से संसद इसे बदल सकती है।
  • कॉलेजियम प्रणाली प्रथम (1981), द्वितीय (1993) व तृतीय (1998) न्यायाधीश मामलों से विकसित।
  • न्यायाधीश 65 वर्ष तक पद पर; हटाना केवल महाभियोग (अनुच्छेद 124(4)-(5)) से संभव।
  • अनुच्छेद 131: केंद्र-राज्य/अंतर-राज्य विवादों पर अनन्य मूल क्षेत्राधिकार।
  • अनुच्छेद 32: पाँच रिट — बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, अधिकार-पृच्छा।
  • अनुच्छेद 143: परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार, राष्ट्रपति की गैर-बाध्यकारी राय-याचना।
  • मूल ढांचा सिद्धांत: केशवानंद भारती (1973), 13-न्यायाधीश पीठ, अनुच्छेद 368 सीमित।
  • अनुच्छेद 129 (अभिलेख न्यायालय), 141 (बाध्यकारी पूर्वनिर्णय), 142 (पूर्ण न्याय) प्रवर्तन शक्तियाँ देते हैं।

परीक्षा के सुझाव

  • संविधान लागू होने की तिथि (26 जनवरी 1950) और सर्वोच्च न्यायालय के उद्घाटन की तिथि (28 जनवरी 1950) में अंतर याद रखें।
  • तीनों न्यायाधीश मामलों का क्रम (1981 → 1993 → 1998) और प्रत्येक का बदलाव सीखें।
  • न्यायाधीश संख्या: संसद अनुच्छेद 124(1) से कानून द्वारा तय करती है; वर्तमान संख्या 34 (CJI सहित, 2019 अधिनियम)।
  • चार क्षेत्राधिकार (मूल, अपीलीय, रिट, परामर्शदात्री) और उनके अनुच्छेद संख्या में अंतर स्पष्ट रखें।
  • पाँचों रिट, उनका अर्थ, और किसके विरुद्ध लागू होती हैं याद रखें (जैसे अधिकार-पृच्छा केवल सार्वजनिक पद पर)।
  • केशवानंद भारती (1973) को मूल ढांचा सिद्धांत से जोड़ें और 4-5 तत्व बताने के लिए तैयार रहें।
  • अनुच्छेद 129, 141 और 142 को अलग-अलग नोट करें — अक्सर स्वतंत्र प्रश्नों में पूछे जाते हैं।
🧠 स्मरण ट्रिक — अनुच्छेद 32 के अंतर्गत 5 रिट

अंग्रेज़ी वाक्यांश "His Mother Prohibited Certain Questions" याद रखें — प्रत्येक शब्द का पहला अक्षर क्रम में एक रिट से मेल खाता है: Habeas Corpus/बंदी प्रत्यक्षीकरण (हिरासत में व्यक्ति को प्रस्तुत करना), Mandamus/परमादेश (प्राधिकरण को कर्तव्य निभाने का आदेश), Prohibition/प्रतिषेध (निचली अदालत को क्षेत्राधिकार से बाहर जाने से रोकना), Certiorari/उत्प्रेषण (पारित आदेश रद्द करना), Quo Warranto/अधिकार-पृच्छा (सार्वजनिक पद के अधिकार पर प्रश्न)।

⚠️ कन्फ्यूज़न बस्टर — मूल क्षेत्राधिकार बनाम रिट क्षेत्राधिकार

दोनों को कभी-कभी "मूल" शक्तियाँ कहा जाता है, पर उद्देश्य अलग हैं। मूल क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 131) केवल केंद्र-राज्य या राज्यों के विवादों से संबंधित है — सामान्य नागरिक इसके तहत नहीं जा सकते, और मौलिक अधिकार का मुद्दा आवश्यक नहीं। रिट क्षेत्राधिकार (अनुच्छेद 32) नागरिकों के लिए मौलिक अधिकार सीधे लागू कराने हेतु है, केंद्र-राज्य विवादों से इसका कोई संबंध नहीं। याद रखें: "131 = सरकारें, 32 = नागरिक"।

भारत के सर्वोच्च न्यायालय के चार क्षेत्राधिकारसर्वोच्च न्यायालय, अनुच्छेद 124-147सर्वोच्च न्यायालय(अनु. 124-147)मूल क्षेत्राधिकार से संबंधपरामर्शदात्री क्षेत्राधिकार से संबंधरिट क्षेत्राधिकार से संबंधअपीलीय क्षेत्राधिकार से संबंधमूल क्षेत्राधिकार: केंद्र-राज्य/अंतर-राज्य विवाद, अनु. 131मूल (अनु. 131)परामर्शदात्री क्षेत्राधिकार: अनु. 143परामर्शदात्री (अनु. 143)रिट क्षेत्राधिकार: अनु. 32रिट (32)अपीलीय क्षेत्राधिकार: अनु. 133-136अपीलीय
📝 अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1. सर्वोच्च न्यायालय का उद्घाटन किस तिथि को हुआ?

✅ 28 जनवरी 1950 — संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था।

प्रश्न 2. किस मामले ने CJI की राय को प्रधानता देकर कॉलेजियम प्रणाली स्थापित की?

✅ द्वितीय न्यायाधीश मामला (1993)।

प्रश्न 3. सार्वजनिक पद धारण के अधिकार पर प्रश्न उठाने वाली रिट कौन-सी है?

✅ अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto)।

प्रश्न 4. मूल ढांचा सिद्धांत किस मामले से आया, और किस अनुच्छेद को सीमित करता है?

✅ केशवानंद भारती (1973); अनुच्छेद 368 (संशोधन शक्ति) सीमित करता है।

प्रश्न 5. "पूर्ण न्याय" हेतु आदेश किस अनुच्छेद से मिलता है, और "अभिलेख न्यायालय" किस अनुच्छेद से घोषित है?

✅ अनुच्छेद 142 (पूर्ण न्याय); अनुच्छेद 129 (अभिलेख न्यायालय)।

सारांश

भारत का सर्वोच्च न्यायालय, जिसका उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को हुआ और जो अनुच्छेद 124-147 से शासित है, देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था और संविधान का अंतिम संरक्षक है। इसकी संरचना — CJI व अन्य न्यायाधीश, जिनकी संख्या संसद कानून से बदल सकती है — और नियुक्ति प्रक्रिया, जो प्रथम, द्वितीय व तृतीय न्यायाधीश मामलों से आज की कॉलेजियम प्रणाली में विकसित हुई, भारत में न्यायिक स्वतंत्रता समझने के लिए केंद्रीय है। इसका चार-आयामी क्षेत्राधिकार (मूल, अपीलीय, रिट, परामर्शदात्री) इसे संघीय विवाद सुलझाने, अपील सुनने, मौलिक अधिकार लागू करने और राष्ट्रपति को परामर्श देने में सक्षम बनाता है, जबकि अनुच्छेद 129, 141 व 142 इसे अभिलेख न्यायालय, बाध्यकारी पूर्वनिर्णय व पूर्ण न्याय की शक्तियाँ देते हैं। सबसे बढ़कर, न्यायिक समीक्षा और केशवानंद भारती (1973) के मूल ढांचा सिद्धांत के माध्यम से, यह सुनिश्चित करता है कि संसद की संशोधन शक्ति भी संविधान की मूल पहचान नष्ट न कर सके — जो इसे भारत के संवैधानिक लोकतंत्र का सर्वोच्च संरक्षक बनाता है।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
  • •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
  • •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
  • •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
  • •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
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  1. RAS 2021

    राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग से संबंधित किस संविधान संशोधन अधिनियम को उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ द्वारा असंवैधानिक घोषित किया गया था?

    1. (A) 98वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
    2. (B) 97वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
    3. (C) 99वाँ संविधान संशोधन अधिनियम
    4. (D) 100वाँ संविधान संशोधन अधिनियम

    उत्तर: (C) 99वाँ संविधान संशोधन अधिनियम

  2. RAS 2018

    राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही हैं? (I) इसका गठन राजस्थान सरकार द्वारा जारी अधिसूचना द्वारा 18 जनवरी, 1999 को किया गया था। (II) आयोग मार्च, 2000 से कार्यशील हुआ। (III) मानव अधिकार संरक्षण (संशोधन) अधिनियम, 2006 के प्रावधान के अनुसार राजस्थान मानवाधिकार आयोग में एक अध्यक्ष और 3 सदस्य होते हैं। (IV) इसके एक पूर्व अध्यक्ष भारत के उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश रहे हैं। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए: कूट:

    1. (A) I, II और III
    2. (B) I, II और IV
    3. (C) II, III और IV
    4. (D) II और III

    उत्तर: (B) I, II और IV

  3. RAS 2023

    मेनका गांधी मामले, 1978 में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के पश्चात अनुच्छेद 21 की न्यायिक व्याख्या के संबंध में असत्य कथन की पहचान कीजिए।

    1. (A) यह सिद्ध करने का भार याचिकाकर्ता पर है कि विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया, जो उसे उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करती है, मनमानी है।
    2. (B) ‘विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया’ मोटे तौर पर अमेरिका में प्रचलित ‘प्रक्रियात्मक सम्यक प्रक्रिया’ का पर्यायवाची है।
    3. (C) अनुच्छेद 21, 19 और 14 परस्पर अपवर्जी नहीं हैं।
    4. (D) ‘जीवन का अधिकार’ में ‘सम्मान के साथ जीने का अधिकार’ शामिल है।

    उत्तर: (A) यह सिद्ध करने का भार याचिकाकर्ता पर है कि विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया, जो उसे उसके जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करती है, मनमानी है।

  4. RAS 2023

    संविधान के अनुच्छेद 217 (1) के अनुसार, राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के अतिरिक्त किसी न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा किससे परामर्श के बाद की जाती है?

    1. (A) राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, भारत के महान्यायवादी और राजस्थान के राज्यपाल।
    2. (B) राजस्थान के राज्यपाल, भारत के मुख्य न्यायाधीश और राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।
    3. (C) केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री और राजस्थान के राज्यपाल।
    4. (D) भारत के मुख्य न्यायाधीश और राजस्थान के राज्यपाल।

    उत्तर: (B) राजस्थान के राज्यपाल, भारत के मुख्य न्यायाधीश और राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश।

  5. RAS 2021

    भारत के उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीशों का सही क्रम है-

    1. (A) बी.पी. सिन्हा, पी.बी. गजेंद्रगडकर, एस.आर. दास
    2. (B) के.जी. बालकृष्णन, एस.एच. कपाड़िया, एच.एल. दत्तू
    3. (C) रंजन गोगोई, एन.वी. रमन, दीपक मिश्रा
    4. (D) एच.एल. दत्तू, टी.एस. ठाकुर, जगदीश सिंह केहर

    उत्तर: (D) एच.एल. दत्तू, टी.एस. ठाकुर, जगदीश सिंह केहर

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