परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
महाधिवक्ता (एडवोकेट जनरल) राज्य सरकार का सर्वोच्च विधि अधिकारी होता है। इस पद की व्यवस्था भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 में की गई है। हर राज्य के लिए महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल करता है। RAS परीक्षा की तैयारी में राजस्थान की राजनीतिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत इस पद की संवैधानिक स्थिति, नियुक्ति, कार्य और शक्तियाँ तथा भारत के महान्यायवादी (अनु. 76) से इसका अंतर जानना आवश्यक है।
मुख्य अवधारणाएं
1. महाधिवक्ता की परिभाषा एवं संवैधानिक आधार
महाधिवक्ता राज्य का सर्वोच्च कानूनी अधिकारी होता है जो राज्य सरकार को कानूनी सलाह देता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 165 में महाधिवक्ता के पद की व्यवस्था है। यह पद राज्य की कार्यपालिका से जुड़ा है। महाधिवक्ता को संक्षेप में 'एजी' (AG) कहा जाता है।
2. नियुक्ति प्रक्रिया एवं योग्यताएं
महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल करता है (अनुच्छेद 165(1)); इसके लिए राष्ट्रपति की सहमति आवश्यक नहीं है। व्यवहार में राज्यपाल राज्य सरकार (मुख्यमंत्री) की सलाह पर नियुक्ति करता है। नियुक्ति के लिए योग्यताएं: (1) व्यक्ति भारत का नागरिक हो, (2) वह उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता रखता हो - अर्थात भारत में 10 वर्ष तक न्यायिक पद धारण किया हो या उच्च न्यायालय में 10 वर्ष तक अधिवक्ता रहा हो।
3. शक्तियां एवं कर्तव्य
अनुच्छेद 165(2) के अनुसार महाधिवक्ता के कर्तव्य हैं:
क) कानूनी सलाह देना: राज्य सरकार को ऐसे कानूनी विषयों पर सलाह देना जो राज्यपाल उसे सौंपे।
ख) अन्य विधिक कार्य: राज्यपाल द्वारा सौंपे गए अन्य विधिक कर्तव्य निभाना। व्यवहार में वह न्यायालयों में राज्य सरकार का पक्ष रखता है।
ग) संवैधानिक कार्य: संविधान या किसी अन्य विधि द्वारा प्रदत्त कृत्यों का निर्वहन करना।
घ) विधानमंडल में भाग (अनुच्छेद 177): महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन, संयुक्त बैठक और उन समितियों की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार है जिनका वह सदस्य नामित हो, किंतु वह मतदान नहीं कर सकता।
4. कार्यकाल एवं सेवा शर्तें
संविधान में महाधिवक्ता का कोई निश्चित कार्यकाल तय नहीं है। वह राज्यपाल के प्रसादपर्यंत (इच्छा तक) पद धारण करता है और राज्यपाल उसे हटा सकता है। वह स्वयं भी त्यागपत्र दे सकता है। उसका पारिश्रमिक राज्यपाल निर्धारित करता है (अनुच्छेद 165(3)); यह उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के वेतन से संविधान में जुड़ा नहीं है। अनुच्छेद 194 के अंतर्गत उसे विधानमंडल के सदस्यों जैसे विशेषाधिकार और उन्मुक्तियाँ प्राप्त हैं।
| बिंदु | भारत का महान्यायवादी (अनु. 76) | राज्य का महाधिवक्ता (अनु. 165) |
|---|---|---|
| नियुक्ति | राष्ट्रपति | राज्यपाल |
| योग्यता | सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता | उच्च न्यायालय का न्यायाधीश बनने की योग्यता |
| कार्यकाल | निश्चित नहीं; राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत | निश्चित नहीं; राज्यपाल के प्रसादपर्यंत |
| पारिश्रमिक | राष्ट्रपति निर्धारित करता है | राज्यपाल निर्धारित करता है |
| सदन में अधिकार | संसद के सदनों व समितियों में बोलने का अधिकार, मतदान नहीं (अनु. 88) | राज्य विधानमंडल के सदनों व समितियों में बोलने का अधिकार, मतदान नहीं (अनु. 177) |
| न्यायालयों में | भारत के सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार (अनु. 76(3)) | राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखता है |
5. राजस्थान में महाधिवक्ता की भूमिका
राजस्थान में महाधिवक्ता राज्य सरकार का प्रमुख विधि सलाहकार है और न्यायालयों में राज्य का पक्ष रखता है। राजस्थान उच्च न्यायालय का मुख्य पीठ जोधपुर में तथा एक पीठ जयपुर में है। महाधिवक्ता की सहायता के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता और अन्य सरकारी अधिवक्ता नियुक्त किए जाते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
संवैधानिक प्रावधान: राज्य के महाधिवक्ता की व्यवस्था अनुच्छेद 165 में है। (अनुच्छेद 76 भारत के महान्यायवादी से तथा अनुच्छेद 244 अनुसूचित क्षेत्रों के प्रशासन से संबंधित है।)
नियुक्ति प्राधिकार: महाधिवक्ता की नियुक्ति राज्यपाल करता है; राष्ट्रपति की सहमति या अनुमोदन आवश्यक नहीं है।
कार्यकाल: संविधान में कोई निश्चित कार्यकाल या आयु-सीमा नहीं; पद राज्यपाल के प्रसादपर्यंत रहता है।
विधान सभा में भाग: महाधिवक्ता को राज्य विधानमंडल के सदनों और उनकी समितियों (जिनका वह सदस्य नामित हो) में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, लेकिन वह मतदान नहीं कर सकता (अनुच्छेद 177)।
परीक्षा पैटर्न
RAS प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्र में राज्य की कार्यपालिका से जुड़े इस विषय पर अनुच्छेद संख्या, नियुक्ति करने वाला अधिकारी, योग्यता, कार्यकाल और महान्यायवादी से तुलना जैसे बिंदुओं से प्रश्न बन सकते हैं। मुख्य परीक्षा में इस पद की भूमिका और शक्तियों पर वर्णनात्मक प्रश्न संभव हैं।
स्मरण युक्तियां
1. दो अनुच्छेद: देश का AG = अनुच्छेद 76 (राष्ट्रपति नियुक्त करता है); राज्य का AG = अनुच्छेद 165 (राज्यपाल नियुक्त करता है)।
2. प्रसादपर्यंत: दोनों का कार्यकाल तय नहीं - जो नियुक्त करे, उसकी इच्छा तक पद।
3. बोलना है, वोट नहीं: सदन की कार्यवाही में भाग ले सकता है, मतदान नहीं - राज्य के लिए अनुच्छेद 177।
4. योग्यता: राज्य का AG = उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी योग्यता; देश का AG = सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश जैसी योग्यता।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
- •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
- •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
- •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
- •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।