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राजस्थान विधान सभा: गठन, शक्तियाँ, विधेयक प्रक्रिया | RAS

Rajasthan Legislative Assembly: Powers, Bill Process | RAS

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

राज्य विधानमंडल (State Legislature) भारतीय संविधान के भाग VI में वर्णित राज्य की विधायी संस्था है। कुछ राज्यों में यह द्विसदनीय और अधिकांश में एकसदनीय होती है; राजस्थान का विधानमंडल एकसदनीय है और इसमें केवल विधान सभा है। यह राज्य स्तर पर कानून निर्माण, बजट अनुमोदन और कार्यपालिका पर निरीक्षण का कार्य करती है। RPSC RAS परीक्षा में राजस्थान की राजनीतिक व्यवस्था विशेष महत्व रखती है। राज्य विधानमंडल से संबंधित प्रश्न सामान्य ज्ञान, भारतीय राजनीति और राजस्थान की प्रशासनिक व्यवस्था के अंतर्गत पूछे जाते हैं। यह विषय राजस्थान की शासन व्यवस्था को समझने के लिए अत्यावश्यक है क्योंकि इससे उम्मीदवारों को राज्य के संवैधानिक ढांचे की समझ प्राप्त होती है।

मुख्य अवधारणाएं

1. विधानमंडल की संरचना और गठन

राजस्थान का विधानमंडल एकसदनीय है, अर्थात इसमें केवल विधान सभा है; राजस्थान में विधान परिषद नहीं है। संसद द्विसदनीय है, किंतु राज्यों में विधान परिषद केवल 6 राज्यों में है: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश। विधान सभा के सदस्य जनता द्वारा सीधे निर्वाचित होते हैं। राजस्थान विधान सभा में 200 सीटें हैं। विधान सभा के प्रत्येक सदस्य को विधायक कहा जाता है। विधान सभा का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है (पहली बैठक की तिथि से), जब तक उसे पहले भंग न कर दिया जाए।

बिंदुविधान सभाविधान परिषद
स्वरूपनिम्न सदन; सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष निर्वाचितउच्च सदन; सदस्य अप्रत्यक्ष निर्वाचित/मनोनीत
कार्यकाल5 वर्ष (भंग हो सकती है)स्थायी सदन; सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष, एक-तिहाई सदस्य प्रति दो वर्ष में सेवानिवृत्त
न्यूनतम आयु25 वर्ष30 वर्ष
राजस्थान में स्थिति200 सदस्यनहीं है (राजस्थान एकसदनीय)

2. विधानसभा की शक्तियां और कार्य

विधानसभा को राज्य स्तर पर विधायी शक्तियां प्रदान की गई हैं। इसका मुख्य कार्य राज्य के विषयों पर कानून बनाना है। विधानसभा राज्य के बजट को मंजूरी देती है और राजस्व से संबंधित विधेयकों पर विचार करती है। धन विधेयक केवल विधान सभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है। मंत्रिपरिषद विधान सभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है और विधान सभा अविश्वास प्रस्ताव द्वारा उसे हटा सकती है। राज्यपाल का चुनाव नहीं होता; उसे राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं (अनुच्छेद 155)। राजस्थान के विधायक राष्ट्रपति के निर्वाचन में मतदान करते हैं।

3. विधान परिषद (अन्य राज्यों में) और राजस्थान की स्थिति

विधान परिषद राज्य का उच्च सदन है, जो केवल कुछ राज्यों में है। यह एक स्थायी सदन है; इसके सदस्यों का कार्यकाल छह वर्ष होता है और एक-तिहाई सदस्य प्रत्येक दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं। इसके सदस्य विधायकों, स्थानीय निकायों, स्नातकों और शिक्षकों द्वारा निर्वाचित होते हैं तथा कुछ राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं। परिषद की अधिकतम सदस्य संख्या विधान सभा की एक-तिहाई और न्यूनतम 40 होती है। राजस्थान में विधान परिषद नहीं है, इसलिए यहाँ विधेयक केवल विधान सभा में पारित होता है।

4. सदन के अधिकारी और संचालन

विधान सभा का अध्यक्ष (स्पीकर) सदन का पीठासीन अधिकारी होता है जो विधान सभा के सदस्यों द्वारा अपने में से चुना जाता है (अनुच्छेद 178)। अध्यक्ष की सहायता के लिए उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) होता है। (विधान परिषद वाले राज्यों में परिषद का पीठासीन अधिकारी सभापति कहलाता है।) ये अधिकारी सदन के नियमों को लागू करते हैं और संसदीय प्रक्रिया को सुचारु रूप से चलाते हैं। सदन के संचालन के लिए विभिन्न स्थायी समितियां होती हैं जो विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा करती हैं।

5. विधायी प्रक्रिया और पारित होने की प्रक्रिया

कोई भी विधेयक राज्य विधानमंडल में विभिन्न चरणों से गुजरता है। सामान्यतः विधेयक को तीन बार पढ़ा जाता है। प्रथम वाचन में विधेयक प्रस्तुत किया जाता है, द्वितीय वाचन में इस पर विस्तृत चर्चा होती है और तृतीय वाचन में इसे मतदान के लिए रखा जाता है। राजस्थान में केवल एक सदन होने के कारण विधेयक का विधान सभा में पारित होना ही पर्याप्त है। धन विधेयक केवल विधान सभा में प्रस्तुत होता है। विधेयक पारित होने के बाद इसे राज्यपाल की स्वीकृति के लिए भेजा जाता है; राज्यपाल स्वीकृति दे सकता है, पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है (धन विधेयक को छोड़कर) या राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित कर सकता है (अनुच्छेद 200-201)।

साधारण विधेयक के पारित होने की प्रक्रिया (राजस्थान)
  1. प्रथम वाचनविधेयक सदन में प्रस्तुत
  2. द्वितीय वाचनविस्तृत चर्चा
  3. तृतीय वाचनमतदान और पारित
  4. राज्यपाल की स्वीकृतिअनुच्छेद 200
बिंदुसाधारण विधेयकधन विधेयक
प्रस्तुतिविधान सभा में (विधान परिषद वाले राज्यों में किसी भी सदन में)केवल विधान सभा में, राज्यपाल की सिफारिश से (अनुच्छेद 198-199)
विधान परिषद की भूमिकाविलंब या संशोधन सुझा सकती है14 दिन में केवल सिफारिश कर सकती है
राजस्थान मेंकेवल विधान सभा में पारितकेवल विधान सभा में पारित
राज्यपालस्वीकृति दे सकता है, पुनर्विचार के लिए लौटा सकता है या राष्ट्रपति के लिए आरक्षित कर सकता हैस्वीकृति दे सकता है या आरक्षित कर सकता है; पुनर्विचार के लिए नहीं लौटा सकता

महत्वपूर्ण तथ्य

• राजस्थान विधानसभा में 200 सदस्य होते हैं।

• राजस्थान में विधान परिषद नहीं है; यहाँ केवल विधान सभा (200 सदस्य) है।

• विधायकों का कार्यकाल पाँच वर्ष होता है।

• विधानसभा का अध्यक्ष और उपाध्यक्ष विधायकों द्वारा निर्वाचित होते हैं।

• धन विधेयक केवल विधान सभा में प्रस्तुत होता है (अनुच्छेद 198-199)।

• विधानमंडल के सदस्यों को संविधान द्वारा निर्दिष्ट सुविधाएं और छूट प्राप्त होती हैं।

• प्रथम राजस्थान विधान सभा का गठन 1952 के पहले आम चुनावों के बाद मार्च 1952 में हुआ; तब सदस्य संख्या 160 थी, जो 1977 से 200 है।

• विधानमंडल का बजट विधानसभा में पारित होता है।

राजस्थान विशेष

राजस्थान विधान सभा में 200 सदस्य हैं, जो मध्यम आकार की विधान सभा मानी जाती है (उत्तर प्रदेश में 403 और महाराष्ट्र में 288 सदस्य हैं)। पहली विधान सभा (1952) में 160 सदस्य थे; 1977 से सदस्य संख्या 200 है। विधान सभा का चुनाव हर पाँच वर्ष में होता है; पिछला आम चुनाव 2023 में हुआ। राजस्थान में एकसदनीय व्यवस्था है, इसलिए विधेयक केवल विधान सभा में पारित होकर राज्यपाल के पास जाते हैं। राजस्थान विधान सभा की कार्यवाही हिंदी में होती है, जिससे यह आम जनता के लिए सुलभ है। विधान सभा में महिला सदस्य भी हैं जो समाज के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा में राज्य विधानमंडल से संबंधित प्रश्न विभिन्न रूपों में पूछे जाते हैं। बहुविकल्पीय प्रश्नों में विधानसभा की संरचना, कार्यकाल, शक्तियां और विधायी प्रक्रिया से संबंधित प्रश्न आते हैं। परीक्षा में राजस्थान विधानमंडल के इतिहास और विकास से भी प्रश्न पूछे जाते हैं। सामान्य ज्ञान खंड में विधानमंडल की संरचना, विधानसभा के अधिकारियों की भूमिका और विधायी शक्तियों के बारे में पूछा जा सकता है। मुख्य परीक्षा में वर्णनात्मक प्रश्नों के माध्यम से राजस्थान की विधायी प्रक्रिया और विधानमंडल की भूमिका के बारे में विस्तृत ज्ञान की अपेक्षा की जाती है।

स्मरण युक्तियां

• "200 और शून्य परिषद": राजस्थान विधान सभा में 200 सदस्य हैं और विधान परिषद नहीं है।

• "5 वर्ष": विधान सभा का सामान्य कार्यकाल पाँच वर्ष है; दो सत्रों के बीच 6 माह से अधिक अंतर नहीं हो सकता (अनुच्छेद 174)।

• "तीन वाचन का नियम": सभी विधेयकों को तीन बार पढ़ने के बाद पारित किया जाता है।

• "धन विधेयक पहले विधान सभा में": धन विधेयक केवल विधान सभा में प्रस्तुत होता है।

• "अध्यक्ष": विधान सभा का अध्यक्ष (स्पीकर) सदन का पीठासीन अधिकारी होता है और सदन की कार्यवाही का संचालन करता है।

• "निम्न और उच्च सदन": विधान सभा = निम्न सदन (Lower House), विधान परिषद = उच्च सदन (Upper House)

• "1952 और 1977": पहली विधान सभा 1952 में बनी (160 सदस्य); 1977 से सदस्य संख्या 200 है।

• "समितियों की भूमिका": स्थायी समितियां विधानमंडल के कार्यों की देखरेख और समीक्षा करती हैं।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
  • •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
  • •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
  • •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
  • •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
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इस टॉपिक से जुड़े पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

आधिकारिक प्रश्नपत्रों के असली प्रश्न, उत्तर सहित।

  1. RAS 2021

    राज्य विधान परिषद के उन्मूलन के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 169 के अंतर्गत किसी राज्य विधान सभा द्वारा पारित संकल्प के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

    1. (A) यह राज्यपाल पर संकल्प को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करने का दायित्व आरोपित करता है।
    2. (B) यह संघ सरकार पर संसद में विधायन प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करने का दायित्व आरोपित नहीं करता है।
    3. (C) यह राज्यपाल पर संकल्प को राष्ट्रपति के विचारार्थ आरक्षित करने का दायित्व आरोपित नहीं करता है।
    4. (D) यह संघ सरकार पर संसद में विधायन प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करने का दायित्व आरोपित करता है।

    उत्तर: (B) यह संघ सरकार पर संसद में विधायन प्रारंभ करने हेतु कार्रवाई करने का दायित्व आरोपित नहीं करता है।

  2. RAS 2024

    किस राजनीतिक दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने संविधान सभा को भंग करने तथा वयस्क मताधिकार द्वारा इसके पुनर्निर्वाचन का आह्वान किया था ?

    1. (A) हिंदू महासभा
    2. (B) सोशलिस्ट पार्टी
    3. (C) स्वराज पार्टी
    4. (D) मुस्लिम लीग

    उत्तर: (B) सोशलिस्ट पार्टी

  3. RAS 2023

    भारत की संविधान सभा के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: (I) संविधान सभा का अंतिम सत्र 24 जनवरी, 1950 को आयोजित किया गया था। (II) इसी अंतिम सत्र में डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के राष्ट्रपति पद पर विधिवत निर्वाचित घोषित किया गया था।

    1. (A) न तो (I) और न ही (II) सही है।
    2. (B) (I) और (II) दोनों सही हैं।
    3. (C) केवल (II) सही है।
    4. (D) केवल (I) सही है।

    उत्तर: (B) (I) और (II) दोनों सही हैं।

  4. RAS 2021

    सूची-I का सूची-II से मिलान कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर पहचानिए- सूची-I (संविधान सभा समिति): (a) मौलिक अधिकार (b) संचालन (c) संघ शक्ति (d) प्रारूप सूची-II (अध्यक्ष): (I) बी. आर. अंबेडकर (II) जवाहरलाल नेहरू (III) के. एम. मुंशी (IV) सरदार पटेल

    1. (A) a-IV, b-III, c-II, d-I
    2. (B) a-II, b-IV, c-III, d-I
    3. (C) a-III, b-IV, c-II, d-I
    4. (D) a-II, b-III, c-IV, d-I

    उत्तर: यह प्रश्न आयोग/बोर्ड ने अंतिम उत्तर-कुंजी में हटा दिया था।

  5. RAS 2018

    लोक सभा के प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमों के नियम 377 के अंतर्गत, लोक सभा सदस्यों द्वारा एक दिन में अधिकतम कितने मामले उठाए जा सकते हैं?

    1. (A) 19
    2. (B) 20
    3. (C) 21
    4. (D) 22

    उत्तर: (B) 20

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