30 जनवरी 2026 · 30 January 2026
टंट्या मामा व भील जनजाति
Tantya Mama and the Bhil Tribe
टंट्या मामा (टंट्या भील) — भील जनजाति के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी; 'भारतीय रॉबिन हुड'।
मुख्य तथ्य
- •टंट्या मामा व भील जनजाति।
- •टंट्या भील (1842-1889) — 'भारतीय रॉबिन हुड'।
- •ब्रिटिश व साहूकार-शोषण के विरुद्ध संघर्ष।
- •भील — राजस्थान/मध्य भारत की बड़ी जनजाति।
- •भगोरिया उत्सव; पिथोरा चित्रकला; मानगढ़।
'टंट्या मामा' व भील जनजाति की चर्चा हुई। टंट्या भील ('टंट्या मामा', 1842-1889) एक भील आदिवासी क्रांतिकारी थे, जिन्हें 'भारतीय रॉबिन हुड' कहा जाता है — उन्होंने ब्रिटिश शासन व साहूकारों/ज़मींदारों के शोषण के विरुद्ध संघर्ष किया व गरीबों/आदिवासियों की मदद की (मध्य प्रदेश/निमाड़ क्षेत्र)। उन्हें ब्रिटिशों ने फाँसी दी; वे आदिवासी प्रतिरोध व सामाजिक न्याय के प्रतीक हैं ('मामा' — आदर-सूचक संबोधन)। 'भील' मध्य भारत (राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र) की एक प्रमुख व सबसे बड़ी जनजातियों में से एक है, जो अपनी विशिष्ट संस्कृति, भगोरिया उत्सव, पिथोरा चित्रकला व 1857 तथा भील आंदोलनों (मानगढ़, गोविंद गुरु) में योगदान के लिए जानी जाती है। यह कला-संस्कृति, जनजातीय इतिहास व स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है। यह कला-संस्कृति से जुड़ा है।
🎯 परीक्षा में कैसे आएगा
टंट्या मामा, भील जनजाति व जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम आधुनिक भारतीय इतिहास में पूछे जाते हैं।
📚 संबंधित स्थायी GK
टंट्या भील (1842-1889) — भील क्रांतिकारी; 'भारतीय रॉबिन हुड'; ब्रिटिश/शोषण विरोध। भील — मध्य भारत/राजस्थान बड़ी जनजाति; भगोरिया; पिथोरा; मानगढ़।
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