तिरुमंगई आलवार की मूर्ति भारत लौटाई गई
6 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम
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तिरुमंगई आलवार — 12वें व अंतिम आलवार संत; मूर्ति सौंदरराज पेरुमल मंदिर (तमिलनाडु) से।
क्या हुआ
'थिरुमंगई आळवार' की मूर्ति भारत वापस लाने की चर्चा हुई। आळवार (Alvars) तमिल वैष्णव संत-कवि थे (6ठी-9वीं सदी), जिन्होंने भक्ति आंदोलन में भगवान विष्णु की भक्ति का प्रचार किया; उनकी रचनाएँ 'दिव्य प्रबंधम' में संकलित हैं (12 आळवार)। थिरुमंगई आळवार इनमें प्रमुख थे। चोल/पल्लव काल की ऐसी कांस्य/प्रस्तर मूर्तियाँ अक्सर तस्करी कर विदेश ले जाई गई थीं। भारत सरकार (ASI + विदेश मंत्रालय) चुराई गई प्राचीन कलाकृतियों/मूर्तियों की 'स्वदेश वापसी' (repatriation) के लिए सक्रिय रही है (अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया आदि से सैकड़ों कलाकृतियाँ लौटीं)। यह सांस्कृतिक विरासत-संरक्षण, सॉफ्ट पावर व अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जुड़ा है। यह कला-संस्कृति से जुड़ा है।
मुख्य तथ्य
- 1थिरुमंगई आळवार की मूर्ति भारत वापस।
- 2आळवार — तमिल वैष्णव संत-कवि (12 आळवार)।
- 3दिव्य प्रबंधम; भक्ति आंदोलन; विष्णु-भक्ति।
- 4चोल/पल्लव-कालीन तस्करी मूर्तियाँ।
- 5मूर्ति-स्वदेश वापसी (repatriation); ASI/MEA।
परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है
आलवार संत, भक्ति आंदोलन व कलाकृति वापसी कला-संस्कृति में पूछे जाते हैं।
स्थायी GK: आळवार — तमिल वैष्णव संत-कवि (12); दिव्य प्रबंधम; भक्ति आंदोलन। थिरुमंगई आळवार। मूर्ति-स्वदेश वापसी (repatriation); ASI/MEA।