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राष्ट्रीय · विज्ञान

विशाखापत्तनम उच्च-ऊर्जा प्रोटॉन त्वरक हेतु चयनित

12 मार्च 2026 · Raj Study संपादकीय टीम

याद रखें · एक पंक्ति में

उच्च-ऊर्जा प्रोटॉन त्वरक — ADS के माध्यम से थोरियम के दोहन हेतु; RRCAT इंदौर द्वारा विकसित।

क्या हुआ

विशाखापत्तनम को उच्च-ऊर्जा प्रोटॉन त्वरक (high-energy proton accelerator) हेतु चुने जाने की चर्चा हुई। कण-त्वरक (particle accelerator) वैज्ञानिक उपकरण हैं जो आवेशित कणों (जैसे प्रोटॉन) को अत्यधिक उच्च गति/ऊर्जा तक त्वरित करते हैं, जिनका उपयोग मूलभूत भौतिकी अनुसंधान, पदार्थ-विज्ञान, चिकित्सा (कैंसर की प्रोटॉन-बीम थेरेपी), समस्थानिक-उत्पादन व उद्योग में होता है। ऐसी सुविधा भारत की बड़ी-विज्ञान (big science) क्षमता, अनुसंधान-अवसंरचना व आत्मनिर्भरता को बढ़ाती है (DAE/BARC, इंटरनेशनल सहयोग जैसे CERN, FAIR)। यह क्षेत्रीय विकास व उन्नत वैज्ञानिक क्षमता का प्रतीक है। यह विज्ञान व प्रौद्योगिकी से जुड़ा है।

मुख्य तथ्य

  1. 1विशाखापत्तनम — उच्च-ऊर्जा प्रोटॉन त्वरक हेतु चयनित।
  2. 2कण-त्वरक — कणों को उच्च गति/ऊर्जा तक।
  3. 3उपयोग — भौतिकी, प्रोटॉन-बीम थेरेपी, समस्थानिक।
  4. 4DAE/BARC; अनुसंधान-अवसंरचना।
  5. 5बड़ी-विज्ञान क्षमता; आत्मनिर्भरता।

परीक्षा में ऐसे पूछा जा सकता है

ADS, त्रि-चरणीय परमाणु कार्यक्रम व थोरियम विज्ञान में पूछे जाते हैं।

स्थायी GK: प्रोटॉन त्वरक — कणों को उच्च ऊर्जा तक; भौतिकी, प्रोटॉन-बीम थेरेपी, समस्थानिक। विशाखापत्तनम चयनित। DAE/BARC; बड़ी-विज्ञान क्षमता।

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