मुख्य सामग्री पर जाएं
🎓
राजस्थान GK

राजस्थान में शिक्षा

Education in Rajasthan

गुरुकुलों के युग से नई शिक्षा नीति 2020 तक — राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था, यहाँ के विश्वविद्यालयों, छात्रवृत्तियों व कल्याणकारी योजनाओं की पूरी कहानी एक ही जगह।

36 टॉपिक49 फ्लैशकार्ड14 MCQ
📜

इतिहास व नीतिगत विकास

History & Policy Evolution

गुरुकुलों के युग से आधुनिक दौर तक — जानिए कैसे भारत और राजस्थान में शिक्षा व्यवस्था ऐतिहासिक सुधारों, आयोगों व संवैधानिक प्रावधानों से गुजरते हुए आज के स्वरूप तक पहुँची।

🕉️प्राचीन व मध्यकालीन शिक्षा

  • प्राचीन भारत शिक्षा के क्षेत्र में विश्व में अग्रणी था; उस समय गुरुकुल, मठ व मंदिर शिक्षा के केन्द्र थे। प्रसिद्ध चीनी यात्री ह्वेनसांग ने नालन्दा विश्वविद्यालय में वर्षों अध्ययन किया था।
  • उस काल में गार्गी, लोपामुद्रा व मैत्रेयी जैसी विदुषी महिलाएँ दार्शनिक वाद-विवाद में भाग लेती थीं और वैदिक ऋचाओं की रचना करती थीं, जो स्त्री शिक्षा के महत्त्व को दर्शाता है; उस युग के प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों में तक्षशिला, काशी, नालन्दा, विक्रमशिला, वल्लभी, कांची व उद्यन्तपुर शामिल थे।
  • मध्यकाल में विदेशी आक्रमणों व कट्टर शासन ने इन बड़े शिक्षा केन्द्रों व पुस्तकालयों को नष्ट कर दिया, जिससे भारतीय शिक्षा का स्तर धीरे-धीरे गिरता गया।

🏛️औपनिवेशिक कालीन सुधार

  • ईस्ट इण्डिया कम्पनी के शासन में ईसाई मिशनरियों ने धार्मिक प्रचार हेतु अंग्रेजी पाठशालाएँ खोलीं और बालिका शिक्षा हेतु पृथक विद्यालय भी स्थापित किए, जिनमें बैथून विद्यालयों की शृंखला उल्लेखनीय थी।
  • 1835 में लॉर्ड मैकाले की 'मैकाले योजना' में पाश्चात्य शिक्षा व अंग्रेजी माध्यम को बढ़ावा दिया गया, जिसका उद्देश्य कम्पनी के प्रति वफादार अंग्रेजी-शिक्षित क्लर्क तैयार करना था।
  • चार्ल्स वुड के 1854 के घोषणा-पत्र को 'आधुनिक भारतीय शिक्षा का मैग्नाकार्टा' कहा गया; इसमें लंदन विश्वविद्यालय की तर्ज पर कलकत्ता, बम्बई व मद्रास में विश्वविद्यालय तथा प्राथमिक से विश्वविद्यालय स्तर तक श्रेणीबद्ध पाठशालाओं की स्थापना का प्रावधान था।
  • पश्चिमी प्रभाव को रोकने हेतु दयानन्द एंग्लो वैदिक (डी.ए.वी.) आन्दोलन ने लाहौर में डी.ए.वी. कॉलेज स्थापित किया, वहीं स्वामी विवेकानन्द के रामकृष्ण मिशन ने भी देशभर में अनेक शिक्षण संस्थाएँ खोलीं।

⚖️विधायी परिवर्तन व बुनियादी शिक्षा

  • भारत सरकार अधिनियम 1919 में शिक्षा विभाग प्रांतीय सरकारों के भारतीय मंत्रियों को सौंपा गया, जबकि भारत सरकार अधिनियम 1935 ने शिक्षा को पूर्णतः प्रांतीय विषय बना दिया, यद्यपि कुछ विश्वविद्यालय सीधे केन्द्रीय नियंत्रण में रहे।
  • महात्मा गांधी ने 1937 में अपने समाचार पत्र 'हरिजन' में लेखों की शृंखला के माध्यम से 'बुनियादी शिक्षा' (नई तालीम) का समर्थन किया, जिसका सिद्धांत था कि शिक्षा स्वावलम्बी होनी चाहिए; जाकिर हुसैन समिति की सिफारिश पर उसी वर्ष यह सात कांग्रेस शासित प्रांतों में लागू हुई।

🏢स्वतंत्रता पश्चात नीतिगत मील के पत्थर

  • संविधान के नीति-निर्देशक तत्त्वों के अनुच्छेद 45 में 14 वर्ष तक के सभी बच्चों को नि:शुल्क, अनिवार्य प्रारंभिक शिक्षा देने का वायदा था; 1964 में राजस्थान के प्रसिद्ध शिक्षाविद् डॉ. दौलतसिंह कोठारी की अध्यक्षता में भारतीय शिक्षा आयोग बना, जिसकी 1966 की रिपोर्ट पर देश की पहली राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनी।
  • 42वें संविधान संशोधन (1976) ने शिक्षा को राज्य सूची से समवर्ती सूची में डाला; राजीव गांधी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1986 जारी की, जिसे 1992 में नरसिंहराव सरकार ने संशोधित कर 10+2 को पूरे देश में स्कूली शिक्षा का हिस्सा बनाया और समग्र साक्षरता अभियान को अधिक बल दिया।
  • प्रो. यशपाल की राष्ट्रीय सलाहकार समिति की रिपोर्ट 'Learning Without Burden' (1992-93) में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने हेतु विद्यार्थियों के बस्ते का बोझ कम करने की सिफारिश की गई थी।

📘शिक्षा का अधिकार (RTE)

  • 86वें संविधान संशोधन (2002) ने अनुच्छेद 21क जोड़कर, अनुच्छेद 51क में नया कर्तव्य शामिल कर और अनुच्छेद 45 में संशोधन कर 6-14 वर्ष के बच्चों की नि:शुल्क व अनिवार्य शिक्षा को मूल अधिकार बनाया; इसी अनुपालना में शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 पूरे देश में 1 अप्रैल, 2010 से लागू हुआ।
  • राजस्थान ने अपने नियम 'राजस्थान नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम, 2011' बनाए, जो 29 मार्च, 2011 से लागू हुए; भारत के 2015 में अपनाए गए सतत विकास लक्ष्य-4 (SDG-4) में 2030 तक सबके लिए समावेशी, समान गुणवत्तायुक्त शिक्षा व जीवनपर्यंत शिक्षा के अवसरों का लक्ष्य रखा गया है।

🏫राजस्थान में आधुनिक शिक्षा का आरंभ

  • राजस्थान में आधुनिक शिक्षा की शुरुआत 1844 में स्थापित लोक शिक्षण विभाग से हुई; महाराजा सवाई रामसिंह ने 1846-47 में जयपुर में मेडिकल शिक्षा हेतु महाराजा स्कूल स्थापित किया।
  • गवर्नर जनरल लॉर्ड मेयो की पहल पर राजाओं-सामन्तों के बच्चों की शिक्षा हेतु मेयो कॉलेज, अजमेर की स्थापना हुई, जिसका विधिवत प्रारम्भ 1875 में हुआ; इसके प्रथम प्रिंसिपल सर ओलीवर सेंट जॉन तथा प्रथम छात्र अलवर के महाराजा मंगल सिंह थे।
  • महारानी गायत्री देवी ने 12 अगस्त, 1943 को जयपुर में लड़कियों का पहला पब्लिक स्कूल - एमजीडी स्कूल खोला; राजपूताना विश्वविद्यालय (वर्तमान राजस्थान विश्वविद्यालय) व सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज दोनों लगभग 1947 में जयपुर में अस्तित्व में आए।

📈राजस्थान की साक्षरता यात्रा

  • 1951 में राजस्थान की साक्षरता केवल 8.5% थी (पुरुष 13.88%, महिला 2.66%); जनगणना 2011 तक यह बढ़कर 66.1% (पुरुष 79.2%, महिला 52.1%) हो गई — छह दशकों में लगभग 7.8 गुना वृद्धि।
  • फिर भी राज्य का देश में पुरुष साक्षरता में 26वाँ तथा महिला साक्षरता में 35वाँ (नीचे से दूसरा) स्थान है; महिला साक्षरता में राजस्थान से नीचे केवल बिहार है।

🗂️प्रशासनिक तंत्र

  • 1950 में स्थापित बीकानेर स्थित प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को 1997 में अलग-अलग प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा निदेशालयों में विभाजित किया गया; प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय 1 जनवरी, 1998 से स्वतंत्र रूप से कार्य कर रहा है।
  • 2 अक्टूबर, 2010 से प्रारम्भिक शिक्षा पंचायती राज संस्थाओं को हस्तांतरित कर दी गई, जो राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद् व RSCERT जैसी संस्थाओं के साथ कार्यरत है; उच्च शिक्षा का विकास उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयुक्तालय, कॉलेज शिक्षा, जयपुर के माध्यम से संचालित होता है।
🎯

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020

National Education Policy 2020

इक्कीसवीं सदी की पहली शिक्षा नीति ने स्कूली व उच्च शिक्षा को नए सिरे से गढ़ा — नए चरण, नई मूल्यांकन प्रणाली और भारत के लिए एक साहसिक विजन।

🌐नीति की पृष्ठभूमि व विजन

  • पूर्व इसरो अध्यक्ष के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर केन्द्रीय मंत्रिपरिषद ने 29 जुलाई, 2020 को इसे मंजूरी दी; राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 स्वतंत्र भारत की इक्कीसवीं सदी की पहली शिक्षा नीति है।
  • इसका विजन भारतीय मूल्यों में निहित शिक्षा प्रणाली स्थापित करना है, जो हर विद्यार्थी की सहज रचनात्मकता, तार्किक व समस्या-समाधान क्षमता तथा नैतिक-सामाजिक विकास को सँवारे; लक्ष्य भारत को 'वैश्विक ज्ञान महाशक्ति' के रूप में स्थापित करना है।

🧩नई 5+3+3+4 स्कूली संरचना

  • एनईपी-2020 पुरानी 10+2 व्यवस्था के स्थान पर 3 से 18 वर्ष की आयु हेतु चार-स्तरीय 5+3+3+4 व्यवस्था लाती है: पहला 5 वर्षीय फाउण्डेशन स्टेज, जिसमें प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल-शिक्षा (3-6 वर्ष) व कक्षा 1-2 शामिल हैं, फिर 3 वर्षीय प्रिपरेटरी स्टेज (कक्षा 3-5)।
  • 3 वर्षीय मिडिल स्टेज (कक्षा 6-8) में विषय-विशेषज्ञ शिक्षण शुरू होता है, जबकि 4 वर्षीय सेकण्डरी स्टेज (कक्षा 9-12) गहराई व विषय चयन में लचीलापन देता है; प्राथमिक स्तर पर सार्वभौमिक मूलभूत साक्षरता व संख्या ज्ञान का लक्ष्य 2025 रखा गया है, तथा कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा व कोडिंग शुरू होगी।

📝परीक्षा एवं मूल्यांकन

  • कक्षा 8 तक प्रतिवर्ष स्कूल परीक्षा समाप्त कर दी गई है, केवल कक्षा 3, 5 व 8 की परीक्षा होगी; कक्षा 10 व 12 की बोर्ड परीक्षाओं को नया रूप दिया जाएगा और ये वर्ष में दो बार दी जा सकेंगी।
  • एक नया राष्ट्रीय आकलन केन्द्र 'परख' (PARAKH) स्कूली मूल्यांकन के लिए मानक-निर्धारक निकाय के रूप में स्थापित किया जाएगा।

🎓उच्च शिक्षा सुधार

  • उच्च शिक्षा एक लचीली 4 वर्षीय बहु-विषयक संरचना अपनाएगी जिसमें कई निकास बिंदु होंगे — 1 वर्ष बाद सर्टिफिकेट, 2 वर्ष बाद डिप्लोमा, 3 वर्ष बाद स्नातक डिग्री तथा 4 वर्ष बाद मल्टी-डिसीप्लीनरी स्नातक डिग्री।
  • उच्च शिक्षा के नियमन हेतु एक शीर्ष निकाय 'उच्च शिक्षा काउंसिल ऑफ इंडिया (HECI)' बनेगी, जिसके अधीन चार संस्थाएँ — NHERC, NAC, HEGC व GEC — होंगी; साथ ही MPhil पाठ्यक्रम समाप्त किए जाएँगे और बालिकाओं की समान शिक्षा हेतु 'लिंग समावेशन कोष' बनेगा।

👩‍🏫शिक्षक प्रशिक्षण व प्रौद्योगिकी

  • NCTE, NCERT के परामर्श से अध्यापक शिक्षा हेतु नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढाँचा 'NCFTE 2021' तैयार करेगी; 2030 तक शिक्षण के लिए न्यूनतम योग्यता 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड होनी है, हालाँकि जून 2025 में NCTE ने आदेश दिया कि 2026 से 2 वर्षीय के स्थान पर 1 वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम होगा।
  • शिक्षा में प्रौद्योगिकी को मुख्यधारा में लाने हेतु नीति में 'राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (NETF)' का गठन होगा; राज्य 'स्टेट स्कूल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (SSSA)' बनाएँगे और SCERT 'स्कूल गुणवत्ता आकलन एवं प्रत्यायन संरचना (SQAAF)' विकसित करेगी।

🌏भाषा व वैश्विक जुड़ाव

  • कक्षा 5 तक, और संभव हो तो उससे आगे भी, शिक्षा का माध्यम मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा होगा तथा किसी विशेष भाषा को पढ़ने का दबाव नहीं होगा; पालि, फारसी व प्राकृत हेतु 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रांसलेशन एंड इंटरप्रिटेशन' की योजना है।
  • शीर्ष रैंकिंग वाले विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर खोलने की अनुमति दी जाएगी, तथा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी विश्वविद्यालय प्रवेश हेतु साझा प्रवेश परीक्षा CUET का आयोजन करेगी।

🚀राजस्थान में NEP का क्रियान्वयन

  • राजस्थान ने 29 मार्च, 2025 को कोटा में मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान शुरू किया, ताकि एनईपी-चाइल्ड, एनईपी-टीचर व एनईपी-स्कूल रणनीतियों के जरिए एनईपी-2020 लागू हो सके; इसे दक्षता-आधारित आकलन CBA-1 व CBA-2 का सहयोग मिलता है।
  • इस अभियान के सहयोगी कार्यक्रमों में कक्षा 1-2 की मूलभूत साक्षरता हेतु निपुण राजस्थान अभियान, पठन कौशल हेतु प्रखर राजस्थान 2.0 और कक्षा 9-12 के 21वीं सदी के जीवन व करियर कौशल हेतु प्रबल कार्यक्रम शामिल हैं; बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय तकनीकी शिक्षा में नई नीति लागू करने वाला राज्य का प्रथम विश्वविद्यालय बना।
🏛️

राज्य प्रशासन, बोर्ड व शिक्षक प्रशिक्षण

State Administration, Boards & Teacher Training

हर कक्षा के पीछे निदेशालयों, बोर्डों, परिषदों व प्रशिक्षण संस्थानों का एक जाल है, जो राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था की योजना बनाता, नियमन करता है और उसे चलाए रखता है।

🗃️शिक्षा निदेशालय व बोर्ड

  • बीकानेर में प्रारम्भिक व माध्यमिक शिक्षा के पृथक निदेशालय कार्यरत हैं, वहीं उच्च शिक्षा विभाग का आयुक्तालय, कॉलेज शिक्षा जयपुर में है।
  • माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, राजस्थान की स्थापना 1957 में जयपुर में हुई और 1961 में यह अजमेर स्थानांतरित हुआ; यह कक्षा 10 व 12 की बोर्ड परीक्षा, REET व विभिन्न प्रतिभा-खोज परीक्षाएँ आयोजित करता है; राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक मंडल (1973 से) कक्षा 1-12 की पुस्तकें उपलब्ध कराता है, तथा पृथक मदरसा बोर्ड (2003) मदरसा शिक्षा के आधुनिकीकरण हेतु कार्य करता है।

🔬SCERT व DIET नेटवर्क

  • 1978 में उदयपुर में SIERT के रूप में स्थापित यह परिषद् 2018 में SCERT स्तर पर क्रमोन्नत हुई; यह राज्य को पाठ्यक्रम व गुणवत्ता पर सलाह देती है और RTE की समुचित शैक्षिक प्राधिकारी के रूप में कार्य करती है, जो पाठ्यक्रम, अनुसंधान, शिक्षक शिक्षा, ICT, सामाजिक न्याय व प्रशासन से जुड़े छह प्रभागों में बँटी है।
  • कोठारी आयोग की सिफारिशों पर 33 जिलों में स्थापित जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), SCERT के मार्गदर्शन में प्रारम्भिक शिक्षकों हेतु सेवापूर्व D.El.Ed./BSTC कार्यक्रम चलाते हैं, जिनका खर्च केन्द्र व राज्य 60:40 अनुपात में वहन करते हैं।

👩‍🎓शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान

  • NCERT (स्थापना 1961) व NCTE (स्थापना 1973, 1995 से वैधानिक दर्जा) मिलकर देशभर में शिक्षक शिक्षा नीति तय करते हैं; राजस्थान में अजमेर व बीकानेर में सरकारी IASE तथा आठ शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय (CTE) संचालित हैं।
  • NCERT द्वारा संचालित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान, अजमेर में समेकित B.A./B.Sc. B.Ed. कार्यक्रम चलते हैं और इसका क्षेत्राधिकार राजस्थान से लेकर जम्मू-कश्मीर व लद्दाख तक फैला है; पं. जनार्दन राय नागर द्वारा गांधीवादी बुनियादी शिक्षा की तर्ज पर 1937 में उदयपुर में स्थापित 'हिंदी विद्यापीठ' बाद में राजस्थान विद्यापीठ बना।

🏢उच्च शिक्षा प्रशासन

  • केन्द्र प्रवर्तित राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA, 2013 से, 60:40 वित्तपोषण) राजकीय महाविद्यालयों में NAAC मूल्यांकन के माध्यम से गुणवत्ता सुधार लाता है, जिसकी निगरानी 2016 में गठित राजस्थान राज्य उच्च शिक्षा परिषद् करती है; इसका उत्तराधिकारी पीएम-उषा एनईपी-2020 के पाँच स्तम्भों — सुलभता, समानता, जवाबदेही, सामर्थ्य व गुणवत्ता — पर आधारित है।
  • राज-सेस (राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी) जैसी संस्थाएँ तथा ज्ञानसुधा, ज्ञानदूत व राजीव गांधी ई-कन्टेंट बैंक जैसी पहलें महाविद्यालय प्रशासन व डिजिटल अध्ययन सामग्री में सहयोग करती हैं।

📚साक्षरता व सतत शिक्षा संस्थान

  • राष्ट्रीय साक्षरता मिशन के तहत 1988 में गठित राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण ने समग्र साक्षरता अभियान से लेकर साक्षर भारत मिशन और अब पढ़ना-लिखना अभियान तक अनेक कार्यक्रम संचालित किए; अजमेर 1990-91 में उत्तर भारत का पहला सम्पूर्ण साक्षर जिला बना, और डूँगरपुर 1993 में देश का पहला जनजाति बहुल सम्पूर्ण साक्षर जिला घोषित हुआ।
  • ब्रिटेन व केन्द्र सरकार के सहयोग से वित्त-पोषित महिला समाख्या योजना 1988 से राजस्थान के नौ जिलों के कम साक्षरता वाले ब्लॉकों में कार्यरत है, वहीं झालावाड़ में महिला शिक्षण विहार वंचित महिलाओं को आवासीय शिक्षा के साथ व्यावसायिक कौशल देता है।

📖पुस्तकालय व शोध संस्थान

  • जयपुर का महाराजा सार्वजनिक पुस्तकालय महाराजा मानसिंह द्वारा 1652 में आमेर में शुरू किए गए निजी संग्रह से जुड़ा है, जो 1866 में जनता के लिए खोला गया; डॉ. राधाकृष्णन राज्य केन्द्रीय पुस्तकालय की स्थापना 1956 में जयपुर में हुई।
  • राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी (1969) उच्च शिक्षा हेतु हिन्दी माध्यम की अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराती है, वहीं राष्ट्रीय साक्षरता मिशन को स्वयं 1999 में यूनेस्को का नोमा साक्षरता पुरस्कार मिला था।
🎓

विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान

Universities & Higher Education Institutions

1947 में राज्य के पहले विश्वविद्यालय से लेकर आज के विशिष्ट कौशल, खेल व दिव्यांग विश्वविद्यालयों तक — राजस्थान में उच्च शिक्षा गढ़ने वाली संस्थाओं की एक झलक।

🏛️प्रमुख सामान्य शिक्षा विश्वविद्यालय

  • राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर, जो 8 जनवरी, 1947 को राजपूताना विश्वविद्यालय के नाम से स्थापित हुआ और 1956 में जिसका नाम बदला गया, राज्य का सबसे पुराना विश्वविद्यालय है; जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर व मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर दोनों 1962 में स्थापित हुए।
  • महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर की शुरुआत 1987 में अजमेर विश्वविद्यालय के रूप में हुई, जिसका वर्तमान नाम 1992 में रखा गया; इन पुराने विश्वविद्यालयों में से हर एक का अपना बहु-जिला क्षेत्राधिकार आसपास के संभाग तक फैला है।

🏗️नवगठित संभागीय विश्वविद्यालय

  • 2003 से राज्य में नए विश्वविद्यालयों की एक शृंखला बनी: महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर व कोटा विश्वविद्यालय (दोनों 2003), फिर राजर्षि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय (अलवर), महाराजा सूरजमल ब्रज विश्वविद्यालय (भरतपुर), पं. दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय (सीकर) व गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय (बाँसवाड़ा) — सभी लगभग 2012 में स्थापित हुए और 2014-16 के बीच वर्तमान नाम पाए।
  • गोविंद गुरु जनजातीय विश्वविद्यालय, जो मूलतः उदयपुर में राजीव गांधी जनजातीय विश्वविद्यालय के नाम से बना था, 2016 में अपना मुख्यालय बाँसवाड़ा ले गया; वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय, कोटा (1987 में कोटा खुला विश्वविद्यालय के रूप में शुरू) पूरे राज्य में दूरस्थ शिक्षा उपलब्ध कराता है।

🌾कृषि विश्वविद्यालय

  • स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर (1987) मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कृषि संकाय को अलग कर बनाया गया, फिर महाराणा प्रताप कृषि एवं तकनीकी विश्वविद्यालय, उदयपुर (1999) स्थापित हुआ।
  • सितंबर 2013 में तीन और कृषि विश्वविद्यालय बने — जोबनेर (जयपुर), मंडोर (जोधपुर) व बोरखेड़ा (कोटा) में — जिनमें से हर एक का क्षेत्राधिकार आसपास के निर्धारित जिलों तक है।

🩺चिकित्सा एवं पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय

  • राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS), जयपुर (2005) राज्य का पहला मेडिकल विश्वविद्यालय था, 2023 में मारवाड़ मेडिकल यूनिवर्सिटी, जोधपुर बनने से अब राजस्थान में दो मेडिकल विश्वविद्यालय हो गए।
  • डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय, जोधपुर (2002) जामनगर के बाद देश का दूसरा आयुर्वेद विश्वविद्यालय है; पशु चिकित्सा शिक्षा राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर (2010) व जोबनेर स्थित RAJUVAS (2023) द्वारा दी जाती है।

⚙️तकनीकी, विधि व विशिष्ट विश्वविद्यालय

  • राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय, कोटा (2006), राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, जोधपुर (1999) व जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय, जयपुर (कार्य 2001 से) क्रमशः तकनीकी, विधि व संस्कृत शिक्षा के मुख्य स्तंभ हैं।
  • हालिया विश्वविद्यालयों में बीकानेर तकनीकी विश्वविद्यालय (2017), विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय, जयपुर (2017, नाम 2023 में बदला, देश का पहला कौशल विश्वविद्यालय), हरिदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर (2019) तथा राज्य का पहला व दूसरा दिव्यांग विश्वविद्यालय — बाबा आम्टे व महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय (2023) शामिल हैं।
  • राज्य का एकमात्र केन्द्रीय विश्वविद्यालय बांदरसिंदरी, किशनगढ़, अजमेर में स्थित है, जो संसद के अधिनियम द्वारा 2009 में बना; राजस्थान खेल विश्वविद्यालय, झुंझुनूँ 2013 में अधिसूचित हुआ पर अब तक शुरू नहीं हुआ, जबकि महाराणा प्रताप खेलकूद विश्वविद्यालय, जयपुर हेतु अगस्त 2025 में अधिनियम पारित हुआ।

राष्ट्रीय महत्त्व के संस्थान

  • राजस्थान में छह केन्द्रीय महत्त्व के संस्थान हैं: मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, जयपुर (1963 में शुरू, 2002 में NIT दर्जा); IIT जोधपुर (2008); केन्द्रीय विश्वविद्यालय, किशनगढ़ (2009); IIM उदयपुर (2011-12); AIIMS जोधपुर (2012); तथा रानपुर, कोटा स्थित IIIT — यह PPP मोड पर बना संस्थान 2017 के संसदीय अधिनियम से राष्ट्रीय महत्त्व का दर्जा पा गया।
  • राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति विशेष रूप से राजस्थान उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश होते हैं, जबकि राज्य के शेष सभी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति राज्यपाल होते हैं।

🏫डीम्ड विश्वविद्यालय

  • वनस्थली विद्यापीठ, जिसे प्रथम मुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री ने 1935 में महिला शिक्षा हेतु स्थापित किया था, को 1983 में डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिला; बिड़ला समूह द्वारा 1964 में स्थापित BITS पिलानी को उसी वर्ष डीम्ड दर्जा मिल गया था।
  • अन्य डीम्ड विश्वविद्यालयों में जैन विश्व भारती, लाडनूँ (स्थापना 1970, डीम्ड दर्जा 1991); IIS यूनिवर्सिटी, जयपुर; JRN राजस्थान विद्यापीठ, उदयपुर; गांधी विद्या मन्दिर, सरदारशहर; तथा उद्योगपति एल.एन. मित्तल द्वारा 2006 में स्थापित एल.एन.एम. सूचना एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, जयपुर शामिल हैं।
🎒

छात्रवृत्ति, कल्याण योजनाएँ व महत्वपूर्ण तथ्य

Scholarships, Welfare Schemes & Notable Facts

मुफ्त साइकिल-स्कूटी, मध्याह्न भोजन, डिजिटल कक्षाएँ और टॉपर्स के लिए पुरस्कार — वे योजनाएँ जो राजस्थान की शिक्षा नीति को विद्यार्थियों के लिए रोज़मर्रा की मदद में बदलती हैं।

👧बालिका शिक्षा योजनाएँ

  • कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV), जो 2004 में देशभर में शुरू हुए और अब समग्र शिक्षा के तहत चलते हैं, 2025-26 में राजस्थान में 364 आवासीय विद्यालय संचालित करते हैं, जिनमें 75% सीटें SC/ST बालिकाओं के लिए आरक्षित हैं और वंचित पृष्ठभूमि की बालिकाओं को नि:शुल्क आवास, भोजन व शिक्षा दी जाती है।
  • बालिकाओं को कक्षा 9 में प्रवेश पर नि:शुल्क साइकिल योजना (2007-08 से), लंबी दूरी के लिए ट्रांसपोर्ट वाउचर, तथा कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना का भी लाभ मिलता है, जिसके तहत अकेले बजट 2025-26 में 35,000 नि:शुल्क स्कूटियाँ वितरित की गईं।
  • देवनारायण गुरुकुल योजना व देवनारायण छात्रा स्कूटी वितरण योजना विशेष रूप से अति पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को सहायता देती हैं, जबकि रानी लक्ष्मीबाई 'सक्षम' आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम राजस्थान पुलिस अकादमी के सहयोग से बालिकाओं को प्रशिक्षित करता है।

🏅छात्रवृत्ति योजनाएँ

  • मुख्यमंत्री अनुप्रति कोचिंग योजना (2021 से) UPSC, RPSC, REET व इंजीनियरिंग/मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क कोचिंग हेतु प्रतिवर्ष 30,000 आरक्षित वर्ग के विद्यार्थियों को सहायता देती है, तथा बाहर कोचिंग लेने पर अतिरिक्त रहन-सहन भत्ता भी देती है।
  • केन्द्रीय पीएम यशस्वी छात्रवृत्ति (2023 से) OBC, DNT व EBC विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 1,25,000 रु. तक सहायता देती है, वहीं राज्य की अपनी योजना — जिसे 2024 में स्वामी विवेकानन्द स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस नाम दिया गया — मेधावी युवाओं को देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में भेजती है, जिसमें 30% स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
  • अन्य लक्षित छात्रवृत्तियों में शीर्ष विज्ञान विद्यार्थियों हेतु इन्स्पायर स्कॉलरशिप, बीमित BPL परिवारों के बच्चों हेतु पन्नाधाय जीवन अमृत योजना, तथा विदेश में पढ़ने वाले अल्पसंख्यक विद्यार्थियों हेतु पढ़ो परदेस योजना शामिल हैं।

🥛पोषण योजनाएँ

  • मध्याह्न भोजन योजना, जो 1995 में NP-NSPE के नाम से शुरू हुई और 2021 में प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना नाम मिला, समस्त राजकीय विद्यालयों, संस्कृत विद्यालयों व मदरसों में प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों को भोजन देती है, जिसमें आयु-वर्ग अनुसार निश्चित कैलोरी-प्रोटीन मानक व भोजन पकाने की लागत का 60:40 केन्द्र-राज्य अंशदान है।
  • पन्नाधाय बाल गोपाल योजना (2022 में मुख्यमंत्री बाल गोपाल योजना के नाम से शुरू, 2024 में नाम बदला) अब प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक के विद्यार्थियों को सप्ताह में छह दिन पाउडर दूध देती है, जो राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन से खरीदा जाता है और विद्यालय प्रबंधन समितियों के माध्यम से पहुँचाया जाता है।

🤝केंद्र प्रायोजित एकीकृत अभियान

  • समग्र शिक्षा अभियान (2018 से) ने तीन पूर्व कार्यक्रमों — सर्वशिक्षा अभियान (2001), राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (2008) व शिक्षक शिक्षा — को प्री-स्कूल से कक्षा 12 तक की एक सतत श्रृंखला में समाहित किया, जिसे 2021-26 के लिए बढ़ाया गया, जिसका राष्ट्रीय बजट प्रावधान 2.94 लाख करोड़ रु. से अधिक है।
  • पूरक मिशनों में विश्व बैंक वित्त-पोषित स्टार्स (2020-21 से, राजस्थान सहित छह राज्यों में), शिक्षक प्रशिक्षण हेतु निष्ठा (2019 से, अब चौथे चरण में), तथा निपुण भारत मिशन (2021 से) शामिल हैं, जिसका लक्ष्य 2026-27 तक हर कक्षा 3 के बच्चे को मूलभूत साक्षरता व संख्या ज्ञान दिलाना है।

💻डिजिटल शिक्षा पहलें

  • शाला दर्पण पोर्टल (2020 में शुरू) हर राजकीय विद्यालय, विद्यार्थी व शिक्षक की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराता है, वहीं प्रोजेक्ट स्माइल (अप्रैल 2020 से) ने राजस्थान को महामारी के लॉकडाउन में वाट्सऐप से पढ़ाने वाला पहला राज्य बनाया, जो बाद में स्माइल 2.0 व 3.0 तक विकसित हुआ।
  • अब हर विद्यार्थी को दाखिले पर 12 अंकों की अपार (APAAR) आईडी मिलती है, e-कक्षा कक्षा 6-12 के लिए शिक्षकों द्वारा बनाए वीडियो पाठों का भंडार है, और मिशन बुनियाद ने अपने मूल छह पायलट जिलों से आगे बढ़कर पूरे राज्य में डिजिटल शिक्षा सहायता का विस्तार किया है।

🏆पुरस्कार व प्रोत्साहन

  • गार्गी पुरस्कार (1998 से) व इंदिरा प्रियदर्शिनी पुरस्कार (2019-20 से, पूर्व नाम पद्माक्षी पुरस्कार) दोनों जिला व राज्य स्तर पर उच्च अंक लाने वाली बालिकाओं को सम्मानित करते हैं, बाद वाले में जिला टॉपर को नि:शुल्क स्कूटी भी मिलती है; अम्बेडकर शिक्षा पुरस्कार हर 14 अप्रैल को SC/ST वर्ग के शीर्ष अंक लाने वाले बोर्ड विद्यार्थियों को सम्मानित करता है।
  • राजस्थान स्टेट ओपन स्कूल में मीरा व एकलव्य पुरस्कार क्रमशः शीर्ष महिला व पुरुष अभ्यर्थियों को दिए जाते हैं, वहीं RBSE 2017 से हर वर्ष शिक्षा रत्न, विद्यार्थी खेल रत्न व विद्यार्थी कला रत्न पुरस्कार देता आ रहा है।

✍️साक्षरता अभियान

  • उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम (2022 से), जो NEP-2020 व SDG-4 के अनुरूप है, ULLAS ऐप पर पंजीकृत स्वयंसेवी शिक्षकों के माध्यम से 15 वर्ष व अधिक आयु वालों को बुनियादी साक्षरता व संख्या ज्ञान देता है; भारत का अपना पहला सम्पूर्ण साक्षर जिला अर्नाकुलम, केरल (1990) था, जो राजस्थान के अजमेर व डूँगरपुर से काफी पहले था।
  • 'एक-एक को पढ़ाये' योजना विद्यार्थियों को घर के असाक्षर सदस्यों को साक्षर बनाने हेतु प्रोत्साहित करती है, वहीं राज्य-स्तरीय वीरबाला कालीबाई महिला साक्षरता उन्नयन पुरस्कार (2005-06 से) साक्षरता के क्षेत्र में महिलाओं के उल्लेखनीय कार्य को सम्मानित करता है।

📅महत्वपूर्ण दिवस व नवाचार

  • विश्व विद्यार्थी दिवस 15 अक्टूबर को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जन्मदिन पर मनाया जाता है; शिक्षक दिवस 5 सितम्बर को तथा अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस 8 सितम्बर को पड़ता है — यह दिवस यूनेस्को ने 1966 में घोषित किया था।
  • राजस्थान ने 'नो बैग डे' की शुरुआत की (बजट 2020-21 में हर शनिवार के लिए घोषित, अब माह के दूसरे व चौथे शनिवार को मनाया जाता है) तथा नामांकन बढ़ाने हेतु सार्वजनिक स्थानों पर सामुदायिक बालसभाएँ आयोजित करने वाला पहला राज्य बना — दोनों नवाचारों को बाद में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।