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राजस्थान GK

राजस्थान में ऊर्जा संसाधन

Energy Resources of Rajasthan

थर्मल व परमाणु संयंत्रों से लेकर देश की सबसे बड़ी सौर व पवन क्षमता तक — राजस्थान के ऊर्जा तंत्र, नीतियों और प्रमुख परियोजनाओं का समग्र अवलोकन।

30 टॉपिक34 फ्लैशकार्ड15 MCQ
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परिचय, वर्गीकरण एवं राज्य की ऊर्जा स्थिति

Introduction, Classification & Rajasthan's Power Landscape

ऊर्जा किसी भी बढ़ती अर्थव्यवस्था की रीढ़ है — यहाँ जानिए ऊर्जा स्रोतों का वर्गीकरण, राजस्थान के विद्युत क्षेत्र का गठन और आज इसकी क्षमता का हाल का चित्र।

🔋ऊर्जा का परिचय

  • एक अच्छा ऊर्जा स्रोत सस्ता, सहज उपलब्ध, भंडारण व परिवहन में आसान होना चाहिए, और प्रति इकाई आयतन या द्रव्यमान अधिकतम कार्य करने में सक्षम होना चाहिए।

🗂️ऊर्जा संसाधनों का वर्गीकरण

  • ऊर्जा संसाधन मुख्यतः दो वर्गों में बंटे हैं: परम्परागत स्रोत, जो एक बार उपयोग के बाद पुनः प्राप्त नहीं होते या जिनके नवीनीकरण में अरबों वर्ष लगते हैं (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, आणविक ईंधन), और गैर-परम्परागत (नवीकरणीय) स्रोत, जो उपभोग के साथ ही फिर से नवीनीकृत होते रहते हैं (सौर, पवन, बायोगैस, बायोमास)।
  • बांध बनाकर उत्पन्न की जाने वाली जलविद्युत को भी अब नवीकरणीय ऊर्जा की श्रेणी में गिना जाता है, और एनसीईआरटी की कक्षा-8 की पुस्तक 'संसाधन एवं विकास' (जनवरी 2021) में तो नाभिकीय ऊर्जा को भी गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन माना गया है।

📊राजस्थान की स्थापित ऊर्जा क्षमता

  • आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार दिसम्बर 2025 तक राजस्थान की कुल स्थापित ऊर्जा उत्पादन क्षमता 31,556.43 मेगावाट तक पहुँच चुकी है, जिसमें थर्मल पावर सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है।
  • तेज धूप तथा विशाल रेगिस्तानी व शुष्क भूमि के कारण राजस्थान सौर ऊर्जा उत्पादन में देश में अग्रणी है; 31 दिसम्बर 2025 तक यह स्थापित नवीकरणीय व सौर ऊर्जा क्षमता में देश में पहले, पवन ऊर्जा क्षमता में पाँचवें और कुल स्थापित क्षमता में दूसरे स्थान पर है।
  • दिसम्बर 2025 तक पवन व सौर ऊर्जा मिलकर राज्य की कुल स्थापित क्षमता का 45.36% हिस्सा बनाते हैं, और 2020-21 से 2024-25 के बीच राज्य के कुल ऊर्जा उत्पादन की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) 5.55% रही।
  • 'विकसित राजस्थान @2047' विज़न के तहत राज्य वर्ष 2047 तक सतत ऊर्जा, नवाचार व सुदृढ़ अवसंरचना में अग्रणी बनने और आर्थिक विकास को पर्यावरण संरक्षण के साथ संतुलित करने का लक्ष्य रखता है।

🏘️ग्रामीण विद्युतीकरण

  • दिसम्बर 2025 तक राज्य के कुल 44,672 गाँवों में से 43,965 गाँव (98.42%) विद्युतीकृत हो चुके थे, साथ ही 1.14 लाख ढाणियाँ व 111.15 लाख ग्रामीण परिवार भी बिजली सुविधा से जुड़ चुके थे।
  • 2021-22 में राजस्थान में प्रति व्यक्ति बिजली खपत 1345.30 किलोवाट-घंटा रही, जो राज्य को अखिल भारतीय औसत 1255.14 किलोवाट-घंटा की तुलना में देश में 11वें स्थान पर रखती है; सतत विकास लक्ष्य-7 सभी के लिए सस्ती, विश्वसनीय व आधुनिक ऊर्जा तक पहुँच सुनिश्चित करने की बात करता है।

🏛️ऊर्जा क्षेत्र का ऐतिहासिक विकास

  • राजस्थान के गठन के समय राज्य में केवल 15 छोटे विद्युतगृह थे जिनकी कुल स्थापित क्षमता मात्र 13.27 मेगावाट थी; 1 जुलाई 1957 को राजस्थान राज्य विद्युत मंडल की स्थापना के साथ ऊर्जा विकास के सार्थक प्रयास शुरू हुए।
  • राजस्थान अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी निविदा के आधार पर विद्युत उत्पादन में राष्ट्रीय व बहुराष्ट्रीय कंपनियों को इरादा पत्र जारी करने वाला देश का पहला राज्य है, और विश्व बैंक से 18 करोड़ डॉलर के ऋण सहयोग से एकल चरण में विद्युत क्षेत्र सुधार कार्यक्रम अपनाने वाला भी पहला राज्य है।
  • केंद्र के विद्युत नियामक आयोग अधिनियम, 1998 के तहत 2 जनवरी 2000 को राजस्थान विद्युत नियामक आयोग बना (प्रथम अध्यक्ष श्री अरुण कुमार), और राजस्थान विद्युत क्षेत्र सुधार अधिनियम, 1999, 1 जून 2000 से प्रभावी हुआ।
  • 19 जून 2000 को राज्य सरकार ने पाँच विद्युत कंपनियों का गठन किया, और 19 जुलाई 2000 को अधिसूचित 'राजस्थान विद्युत क्षेत्र सुधार स्थानांतरण योजना, 2000' के तहत पूर्ववर्ती विद्युत मंडल को इन कंपनियों में पुनर्गठित कर दिया गया।

🏢पुनर्गठित पाँच विद्युत निगम

  • राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लि. (RVUNL, मुख्यालय जयपुर) राज्य में विद्युत उत्पादन का कार्य देखता है, जबकि राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम लि. (RVPNL, मुख्यालय जयपुर) ग्रिड स्टेशनों, लाइनों व प्रसारण तंत्र के संधारण व संचालन का कार्य करता है।
  • तीन वितरण निगम राज्य को बाँटकर काम करते हैं: जयपुर विद्युत वितरण निगम (JVVNL) पूर्वी-दक्षिणपूर्वी 15 जिलों (जयपुर, कोटा, भरतपुर आदि) में, अजमेर विद्युत वितरण निगम (AVVNL) मध्य-दक्षिणी 14 जिलों (अजमेर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़ आदि) में, और जोधपुर विद्युत वितरण निगम (JdVVNL) उत्तर-पश्चिमी 12 जिलों (जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर आदि) में विद्युत वितरण करता है।

🏦ऊर्जा विकास हेतु प्रमुख संस्थाएँ

  • सस्ती बिजली सुनिश्चित करने हेतु 4 दिसम्बर 2015 को राजस्थान ऊर्जा विकास निगम लि. (RUVNL) बना, जिसे 9 अक्टूबर 2023 को 'राजस्थान ऊर्जा विकास एवं आईटी सर्विसेज लि. (RUVTIL)' नाम दिया गया; पाँचों विद्युत कंपनियों को वित्त पोषण देने हेतु राजस्थान राज्य पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (RSPFCL) 21 दिसम्बर 2012 को पंजीकृत हुआ।
  • 9 अगस्त 2002 को REDA व RSPCL के विलय से राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम (RREC/RRECL) बना, जो राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्र स्थापित करता है, निजी निवेशकों की सहायता करता है, ऊर्जा दक्षता कार्यक्रम चलाता है, और ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी (BEE) की राज्य की नामित एजेंसी भी है।
  • राजस्थान सोलर पार्क डवलपमेंट कंपनी लि., RREC की सहायक कंपनी, सोलर पार्कों का विकास व प्रबंधन करती है; गिराल लिग्नाइट पावर लि. (RVUNL की सहायक) गिराल लिग्नाइट संयंत्र के नवीनीकरण व एक नई 1100 मेगावाट की लिग्नाइट परियोजना पर काम कर रही है, जबकि मैसर्स राजवेस्ट पावर लि. बाड़मेर में 1080 मेगावाट का लिग्नाइट आधारित विद्युतगृह संचालित करती है।
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ऊर्जा नीतियाँ एवं जन-कल्याणकारी योजनाएँ

Energy Policies & Public Schemes

राज्य व केंद्र सरकार की नीतियाँ ही तय करती हैं कि राजस्थान अपनी विशाल ऊर्जा क्षमता को कैसे साकार करेगा — यहाँ प्रमुख नीतियों व जन-कल्याणकारी योजनाओं पर एक नज़र है।

📋प्रमुख राज्य ऊर्जा नीतियाँ

  • 4 दिसम्बर 2024 को जारी 'राजस्थान समेकित स्वच्छ ऊर्जा नीति 2024' का लक्ष्य 2029-30 तक 125 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाएँ (90 GW सौर + 25 GW पवन-हाइब्रिड + 10 GW भंडारण) स्थापित करना है, जो देश के 2030 तक 500 GW नवीकरणीय क्षमता के लक्ष्य में योगदान देगा; इसका रणनीतिक कार्यकाल मार्च 2030 तक बढ़ाया जा चुका है और नोडल एजेंसी राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम है।
  • 1 अक्टूबर 2023 को स्वीकृत 'राजस्थान नवीकरणीय ऊर्जा नीति 2023' का लक्ष्य 2029-30 तक 90 गीगावाट नवीकरणीय परियोजनाएँ (65 GW सौर, 15 GW पवन-हाइब्रिड, 10 GW जलविद्युत/PSP/BESS) स्थापित करना है; इससे पहले सौर नीतियाँ (2011, 2014, 2019) व पवन-हाइब्रिड नीति (2019) क्रमशः 30,000 मेगावाट सौर तथा 4000 मेगावाट पवन + 3500 मेगावाट हाइब्रिड के लक्ष्य रख चुकी थीं — 19 अप्रैल 2011 को सौर ऊर्जा नीति अपनाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बना।
  • 20 सितंबर 2023 को स्वीकृत 'राजस्थान बायोमास एवं वेस्ट टू एनर्जी नीति-2023' बायोमास व अपशिष्ट से बिजली उत्पादन तथा ताप विद्युत संयंत्रों में बायोमास सह-दहन को बढ़ावा देती है, जबकि उसी माह स्वीकृत 'राजस्थान ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2023' का लक्ष्य 2030 तक 2000 KTPA हरित हाइड्रोजन उत्पादन तथा भारत के हरित हाइड्रोजन निर्यात में कम से कम 20% हिस्सेदारी है, जिसकी नोडल एजेंसी RRECL है।

🌾पीएम कुसुम योजना

  • 8 मार्च 2019 को शुरू पीएम कुसुम (किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) योजना का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना है, जिसके तीन घटक हैं — घटक-ए: उपकेंद्रों के निकट 500 किलोवाट-2 मेगावाट क्षमता के विकेंद्रीकृत ग्रिड-कनेक्टेड सौर संयंत्र, घटक-बी: 14 लाख स्टैंडअलोन सौर कृषि पंप, और घटक-सी: 35 लाख ग्रिड-कनेक्टेड कृषि पंपों का सौरीकरण।
  • वित्त पोषण ढाँचा है: 30% तक केंद्रीय अनुदान, 30% तक राज्य अनुदान व शेष 40% बैंक ऋण या किसान अंशदान से; योजना की समय-सीमा अब 31 मार्च 2027 तक बढ़ाई जा चुकी है, और घटक ए व सी का क्रियान्वयन विद्युत वितरण निगम करते हैं।
  • 23 अप्रैल 2026 की जानकारी अनुसार राजस्थान घटक-ए में देश में प्रथम, जबकि घटक-सी में गुजरात व महाराष्ट्र के बाद तीसरे स्थान पर है; घटक ए व सी के अंतर्गत कुल 10.7 गीगावाट के स्वीकृत लक्ष्य में से राज्य ने अब तक 1808 स्थापित संयंत्रों के साथ 4000 मेगावाट क्षमता हासिल कर ली है।

🏠पीएम सूर्यघर व मुफ्त बिजली योजनाएँ

  • 13 फरवरी 2024 को ₹75,021 करोड़ की लागत से घोषित पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लक्ष्य 2026-27 तक देशभर के 1 करोड़ घरों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देना है, जिसके लिए एक 3 किलोवाट संयंत्र पर केंद्र ₹78,000 अनुदान देता है; आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार दिसम्बर 2025 तक राजस्थान में 1.22 लाख रूफटॉप संयंत्र (493 मेगावाट) स्थापित हो चुके थे, जिसमें जयपुर सबसे आगे रहा।
  • राज्य के बजट 2025-26 में घोषित '150 यूनिट नि:शुल्क बिजली योजना' के तहत मुख्यमंत्री नि:शुल्क बिजली योजना के पंजीकृत लाभार्थी 1.1 किलोवाट रूफटॉप संयंत्र लगवाने पर अब 100 की बजाय 150 यूनिट मुफ्त बिजली पाते हैं — पीएम सूर्यघर के ₹33,000 अनुदान के साथ राज्य सरकार अतिरिक्त ₹17,000 सहायता व मुफ्त स्मार्ट मीटर भी देती है, जिससे ₹50,000 का पूरा संयंत्र मुफ्त हो जाता है।
  • मुख्यमंत्री नि:शुल्क बिजली योजना (घरेलू) में 100 यूनिट तक मासिक खपत पर बिल शून्य होता है, जबकि किसान मित्र ऊर्जा योजना (17 जुलाई 2021) को 2023-24 के बजट में मुख्यमंत्री नि:शुल्क बिजली योजना (कृषि) से मिला दिया गया, जिससे 1 मई 2023 से कृषि उपभोक्ताओं को 2000 यूनिट प्रतिमाह तक मुफ्त बिजली मिल रही है।

🇮🇳अन्य राष्ट्रीय योजनाएँ

  • घाटे में चल रहे विद्युत वितरण निगमों को सहारा देने हेतु 20 नवंबर 2015 को शुरू हुई उदय (उज्ज्वल डिस्कॉम एश्योरेंस योजना) को सबसे पहले झारखंड ने, फिर छत्तीसगढ़ व राजस्थान ने अपनाया; 20 जुलाई 2021 को अधिसूचित पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) का लक्ष्य डिस्कॉम की AT&C हानियाँ घटाकर 12-15% तक लाना है, जिसकी समय-सीमा अब 31 मार्च 2028 तक बढ़ाई जा चुकी है।
  • 5 जनवरी 2015 को शुरू राष्ट्रीय LED कार्यक्रम के दो अंग हैं — घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उजाला (UJALA) योजना और सड़क बत्तियों के लिए विश्व का सबसे बड़ा प्रतिस्थापन कार्यक्रम स्ट्रीट लाइटिंग नेशनल प्रोग्राम (SLNP), जो 9 जनवरी 2017 को राष्ट्र को समर्पित हुआ; अटल ज्योति योजना (सोलर स्ट्रीट लाइट) और दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना (25 जुलाई 2015 को बिहार में, 26 जुलाई 2016 को राजस्थान में शुरू) ग्रामीण विद्युत सुदृढ़ीकरण के लिए काम करती हैं।

🌱हरित हाइड्रोजन व जैव-ऊर्जा नीतियाँ

  • 4 जनवरी 2023 को स्थापित राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2070 तक भारत को नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन तक पहुँचाना है; 2 नवंबर 2022 को अधिसूचित राष्ट्रीय जैव ऊर्जा कार्यक्रम (NBP) में वेस्ट-टू-एनर्जी, बायोमास व बायोगैस — तीन उप-योजनाएँ शामिल हैं।
  • 7 मार्च 2019 को अधिसूचित पीएम जी-वन योजना दूसरी पीढ़ी के इथेनॉल प्रोजेक्ट्स को वित्तीय सहायता देती है (इसका पहला 2G इथेनॉल संयंत्र IOCL ने 10 अगस्त 2022 को राष्ट्र को समर्पित किया); सितंबर 2023 में जी-20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का शुभारंभ किया।
  • 30 जुलाई 2018 को राजस्थान केंद्र की राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति, 2018 लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना; गोबरधन योजना (2018-19 बजट में घोषित) गाँवों को स्वच्छ रखते हुए पशु व जैविक अपशिष्ट से अतिरिक्त आय व ऊर्जा उत्पन्न करती है।
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तापीय एवं परमाणु ऊर्जा

Thermal & Nuclear Power

कोयला, लिग्नाइट, गैस व परमाणु ईंधन से चलने वाले संयंत्र आज भी राजस्थान की बिजली आपूर्ति की रीढ़ बने हुए हैं — राज्य की प्रमुख परम्परागत विद्युत परियोजनाओं की झलक।

🔥कोयला व लिग्नाइट आधारित ताप विद्युत परियोजनाएँ

  • कोटा बैराज पर स्थित कोटा सुपर थर्मल पावर परियोजना राज्य का पहला कोयला आधारित विद्युतगृह व दूसरा सुपर थर्मल प्रोजेक्ट है (7 इकाइयाँ, कुल 1240 मेगावाट, चरण 1 सन् 1983 में और चरण 5, 31 मई 2009 को कमीशन); सूरतगढ़ (गंगानगर) राज्य का पहला सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट है, और इसकी मूल 1500 मेगावाट क्षमता में दो बाद की सुपर-क्रिटिकल इकाइयाँ (7वीं व 8वीं, 2×660=1320 मेगावाट, 2019-2021 में कमीशन) जुड़ने से यह अब राज्य की सबसे बड़ी एकल विद्युत परियोजना (कुल 2820 मेगावाट) बन चुकी है।
  • छबड़ा (बारां) राज्य का तीसरा सुपर थर्मल पावर स्टेशन है (4×250=1000 मेगावाट, 2010-14 में कमीशन); इसकी 5वीं व 6वीं इकाइयों (2×660=1320 मेगावाट, 2017-18 में कमीशन) ने छबड़ा को राज्य की पहली सुपर-क्रिटिकल परियोजना भी बना दिया — किसी विद्युतगृह की एकल इकाई की क्षमता 500 मेगावाट से अधिक होने पर उसे 'सुपर-क्रिटिकल' कहा जाता है।
  • कालीसिंध ताप विद्युत परियोजना, झालावाड़ (2×600=1200 मेगावाट, 2014-15 में कमीशन) और बरसिंगसर, बीकानेर (नैवेली लिग्नाइट कॉर्पोरेशन द्वारा संचालित, 2×125=250 मेगावाट लिग्नाइट आधारित) राज्य की अन्य प्रमुख अपनी तापीय परियोजनाएँ हैं; गिराल (बाड़मेर, GLPL, 125×2=250 मेगावाट) राज्य की पहली लिग्नाइट-गैसीकरण आधारित परियोजना थी, जबकि बाड़मेर के भाद्रेश-जालीपा में मैसर्स राजवेस्ट पावर लि. 100% राज्य स्वामित्व वाला 8×135=1080 मेगावाट का लिग्नाइट आधारित विद्युतगृह चलाती है।

गैस आधारित विद्युत परियोजनाएँ

  • रामगढ़ (जैसलमेर) राज्य द्वारा स्वयं स्थापित पहली गैस आधारित परियोजना है, जो 1994 में एक छोटी इकाई से शुरू होकर चरणों में बढ़ते हुए अब 273.5 मेगावाट (सक्रिय क्षमता 270.5 मेगावाट) तक पहुँच चुकी है; अंता (बारां) केंद्र सरकार द्वारा राज्य में स्थापित प्रथम गैस आधारित परियोजना है, जिसे NTPC HBJ पाइपलाइन की गैस से चलाता है (कुल क्षमता 419.33 मेगावाट, राज्य अंश 19.81%)।
  • धौलपुर कम्बाइंड साइकिल गैस परियोजना (330 मेगावाट, 110×3) राज्य की दूसरी गैस आधारित परियोजना है, जिसकी तीनों इकाइयों का वाणिज्यिक उत्पादन 1 मार्च 2008 से पूरी तरह जारी है।

☢️राजस्थान परमाणु शक्ति स्टेशन, रावतभाटा

  • कनाडा के सहयोग से 1972 में रावतभाटा (चित्तौड़गढ़) में स्थापित यह स्टेशन तारापुर के बाद भारत का दूसरा और राजस्थान का पहला परमाणु ऊर्जा स्टेशन है; इसे देश का पहला व सर्वाधिक रिएक्टरों वाला सबसे बड़ा न्यूक्लियर पार्क भी कहा जाता है, और इसकी इकाई 3 व 4 का लोकार्पण पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 18 मार्च 2001 को किया था।
  • इकाई-VII, भारत का 25वाँ परमाणु रिएक्टर (राज्य अंश 50%, 350 मेगावाट अनुबंधित), 15 अप्रैल 2025 से वाणिज्यिक उत्पादन में आई, जबकि इसी दौरान संयंत्र की मूल इकाई-I को 30 अप्रैल 2025 से पूर्णतः बंद कर दिया गया; इकाई VII व VIII देश के स्वदेशी रूप से डिज़ाइन किए गए दूसरे 700-700 मेगावाट के दाबित भारी जल रिएक्टर हैं, और इकाई-VIII अभी निर्माणाधीन है।
  • स्टेशन की वर्तमान कुल स्थापित क्षमता 1780 मेगावाट है, जिसमें राज्य का अंश 762.74 मेगावाट है; रावतभाटा में देश का दूसरा (हैदराबाद के बाद) न्यूक्लियर फ्यूल कॉम्प्लेक्स भी निर्माणाधीन है, और यहाँ का हैवी वाटर प्लांट 1 अप्रैल 1985 को कमीशन हुआ था।

⚛️माही-बाँसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना

  • पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती, 25 सितंबर 2025, को प्रधानमंत्री ने बाँसवाड़ा जिले के नाप्ला में ₹42,000 करोड़ की माही बाँसवाड़ा राजस्थान परमाणु ऊर्जा परियोजना (MBRAPP) की आधारशिला रखी, जिसे अणुशक्ति विद्युत निगम लि. (अश्विनी) संचालित करेगा; यह राज्य की दूसरी परमाणु परियोजना होगी, जिसमें 4 स्वदेशी 700 मेगावाट क्षमता के दाबित भारी जल रिएक्टर (कुल 2800 मेगावाट) लगेंगे।
  • यह परियोजना भारत के व्यापक 'फ्लीट मोड' अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत देशभर में एक समान डिज़ाइन व खरीद योजना के साथ 10 समरूप 700 मेगावाट क्षमता के रिएक्टर बनाए जा रहे हैं; परियोजना की पहली इकाई का वाणिज्यिक संचालन मई 2032 से प्रस्तावित है।

🥇भारत का प्रथम परमाणु ऊर्जा संयंत्र

  • भारत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र महाराष्ट्र स्थित तारापुर परमाणु शक्ति स्टेशन था, जिसकी पहली इकाई 1969 में स्थापित हुई; देश में वर्तमान में 25 परमाणु रिएक्टरों से कुल 8880 मेगावाट क्षमता स्थापित है, पर RAPS की एक 100 मेगावाट इकाई बंद होने से अब 24 सक्रिय रिएक्टरों से 8780 मेगावाट क्षमता उपलब्ध है।
  • नरौरा परमाणु शक्तिगृह (उत्तर प्रदेश) की कुल क्षमता 440 मेगावाट है, जिसमें राजस्थान का अंश 10% (44 मेगावाट) है।
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जल विद्युत एवं सौर ऊर्जा

Hydropower & Solar Energy

राजस्थान की अपनी व साझा जल विद्युत परियोजनाओं से लेकर देश की सबसे बड़ी स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता तक — राज्य के जल व सूर्य से जुड़े ऊर्जा स्रोतों की कहानी।

🌊राजस्थान की अपनी व साझा जल विद्युत परियोजनाएँ

  • 1972-73 में पूर्ण रूप से कमीशन हुई चम्बल घाटी परियोजना राजस्थान की पहली जल विद्युत परियोजना है; मध्यप्रदेश-राजस्थान की इस संयुक्त परियोजना (राज्य अंश 50%, 193 मेगावाट) में तीन विद्युतगृह — गांधी सागर (मध्यप्रदेश), राणाप्रताप सागर (रावतभाटा) व जवाहर सागर (कोटा) — शामिल हैं, जिनकी संयुक्त क्षमता 386 मेगावाट है।
  • बागीदौरा, बाँसवाड़ा में गुजरात-राजस्थान की संयुक्त माही परियोजना में माही बजाज सागर बांध पर दो चरणों में कुल 140 मेगावाट क्षमता स्थापित है (100% राज्य अंश); प्रतापगढ़ स्थित जाखम बांध पर राज्य की अपनी परियोजना से 5.50 मेगावाट उत्पन्न होती है, जबकि हिमाचल प्रदेश की व्यास परियोजना (देहर व पौंग विद्युतगृह) में राजस्थान का संयुक्त हिस्सा 429.66 मेगावाट है।

🏞️भाखड़ा नांगल व टिहरी परियोजनाएँ

  • सतलुज नदी पर हिमाचल प्रदेश में बना भाखड़ा नांगल प्रोजेक्ट (कुल क्षमता 1570.3 मेगावाट) पंजाब, हरियाणा व राजस्थान की संयुक्त परियोजना है (राजस्थान का अंश 15.22%, यानी 238.99 मेगावाट); निर्माण अक्टूबर 1962 में पूरा हुआ, और प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 22 अक्टूबर 1963 को इसे राष्ट्र को समर्पित करते हुए 'नए भारत का नया मंदिर' कहा था।
  • उत्तराखंड के टिहरी में भागीरथी-भिलंगना नदियों के संगम पर बना यह परिसर — राजस्थान, उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश की संयुक्त परियोजना — भारत के सबसे ऊँचे बांध (260.5 मीटर) सहित कुल 2400 मेगावाट क्षमता समेटे है; इसका मुख्य 1000 मेगावाट प्लांट (राज्य अंश 7.50%) 2007 से, 400 मेगावाट का कोटेश्वर HEP 2012 से चालू है, और भारत का पहला परिवर्तनीय-गति पम्प स्टोरेज प्लांट, 1000 मेगावाट का टिहरी PSP, 2025-26 के दौरान चरणबद्ध रूप से चालू हुआ।

🔌केन्द्रीय क्षेत्र से आवंटित अन्य जल विद्युत परियोजनाएँ

  • राजस्थान को हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर व उत्तराखंड की कई केंद्रीय जल विद्युत परियोजनाओं से भी अनुबंधित हिस्सा मिलता है, जैसे नाथपा झाकड़ी (1500 मेगावाट, राज्य अंश 7.47%), पारबती चरण-II व III, चमेरा चरण I-III, उड़ी चरण I-II, दुलहस्ती, सलाल व टनकपुर — इन सबसे मिलाकर राज्य को कई सौ मेगावाट अनुबंधित क्षमता प्राप्त होती है।

लघु जल विद्युत परियोजनाएँ

  • राजस्थान में 10 लघु जल विद्युत इकाइयाँ हैं, जिनकी कुल क्षमता 23.85 मेगावाट है और सभी पर 100% राज्य का स्वामित्व है; इनमें सबसे बड़ी अनूपगढ़ (9 मेगावाट), मांगरोल-चम्बल दायीं नहर, बाराँ (6 मेगावाट) व सूरतगढ़ (4 मेगावाट) हैं, जबकि शेष इकाइयाँ पूगल, चारणवाला, बिरसलपुर व माही दायीं मुख्य नहर पर स्थित हैं।

🌡️सौर ऊर्जा की क्षमता व वर्तमान स्थिति

  • नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार राजस्थान की अनुमानित सौर ऊर्जा क्षमता 142.31 गीगावाट है — देश में सर्वाधिक (इसके बाद जम्मू-कश्मीर व महाराष्ट्र का स्थान है), जो प्रतिदिन लगभग 6-7 kWh प्रति वर्ग मीटर सौर विकिरण और वर्ष में 325 से अधिक स्पष्ट धूप वाले दिनों के कारण संभव है।
  • आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार दिसम्बर 2025 तक राजस्थान में रूफटॉप व ऑफ-ग्रिड सहित कुल 36,658 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके थे; सौर ऊर्जा की सर्वाधिक संभाव्यता वाला क्षेत्र परंपरागत रूप से जोधपुर (नए जिलों के गठन से पूर्व) माना जाता रहा है।

🎖️पहली व ऐतिहासिक सौर परियोजनाएँ

  • राजस्थान की पहली सरकारी सौर परियोजना फागी (जयपुर) में 23 मार्च 2012 को 1 मेगावाट क्षमता के साथ कमीशन हुई, जबकि राज्य की पहली निजी परियोजना — रिलायंस इंडस्ट्रीज का नागौर के खींवसर स्थित 5 मेगावाट संयंत्र — 31 मार्च 2011 को कमीशन हुई थी।
  • गोदावरी ग्रीन एनर्जी लि. ने 19 जून 2013 को नोख (फलौदी) में राज्य का पहला 50 मेगावाट का सौर संयंत्र कमीशन किया; इससे पहले दहानु सोलर पावर (रिलायंस पावर की सहायक) ने 31 मार्च 2012 को जैसलमेर में राज्य का पहला 40 मेगावाट का संयंत्र और राजस्थान सन टेक्निक एनर्जी ने 17 नवंबर 2014 को पहला 125 मेगावाट का संयंत्र कमीशन किया।

🏆भड़ला सोलर पार्क

  • फलौदी जिले के भड़ला (तहसील बाप) में चार चरणों में विकसित भड़ला सोलर पार्क फरवरी 2020 तक 2245 मेगावाट क्षमता तक पहुँच गया, जिससे यह विश्व का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा पार्क बन गया (इसके बाद कर्नाटक का पावागड़ा सौर पार्क आता है)।
  • फेज-1 (65 मेगावाट) राजस्थान सोलर पार्क डवलपमेंट कंपनी ने स्वतंत्र रूप से विकसित किया, जबकि फेज-2, 3 व 4 (क्रमशः 680, 1000 व 500 मेगावाट) भारत सरकार की सोलर पार्क योजना के तहत विभिन्न संयुक्त उद्यमों, जिनमें अडानी व राज्य सरकार का जेवी भी शामिल है, द्वारा विकसित किए गए।

🌇अन्य प्रमुख सोलर पार्क व परियोजनाएँ

  • बीकानेर में RSDCL द्वारा तीन चरणों में विकसित हो रहा पूगल सोलर पार्क मूल रूप से 2450 मेगावाट का था, जिसे कोल इंडिया की सहायक कंपनी NIRL द्वारा 'राजस्थान रिन्यूएबल्स लि.' नामक संयुक्त उद्यम बनाए जाने के बाद बढ़ाकर 3310 मेगावाट कर दिया गया है, जिससे यह देश का सबसे बड़ा सोलर पार्क बनने की राह पर है।
  • 750 मेगावाट का पोकरण-फलौदी सोलर पार्क (एस्सेल सौर्य ऊर्जा कंपनी द्वारा विकसित) और 1500 मेगावाट का फतेहगढ़, जैसलमेर फेज-1B पार्क (अडानी रिन्यूएबल एनर्जी पार्क द्वारा विकसित, जिसमें से 1496 मेगावाट पहले ही स्थापित हो चुकी है) राज्य के अन्य बड़े सोलर पार्कों में शामिल हैं; 925 मेगावाट का नोख (फलौदी) सोलर पार्क 25 सितंबर 2025 को उद्घाटित हुआ, और नाचना, जैसलमेर में 2000 मेगावाट का बोदाना सोलर पार्क विकसित हो रहा है।
  • केंद्र सरकार ने NTPC व SECI को राजस्थान में 5000-5000 मेगावाट के अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क विकसित करने की अनुमति दी है (500 मेगावाट से अधिक क्षमता की किसी भी परियोजना को अल्ट्रा मेगा सोलर पार्क कहा जाता है); जैसलमेर की पोकरण-भणियाणा तहसीलों में फैला सेकी का अब तक का सबसे बड़ा सौर फार्म, 1300 मेगावाट क्षमता के साथ, 17 अप्रैल 2025 को उद्घाटित हुआ।
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पवन एवं जैव ऊर्जा तथा अन्य विविध तथ्य

Wind & Bioenergy, and Other Highlights

जैसलमेर की तेज हवाओं से लेकर गाँव के गोबर से बनती बिजली तक, और माउंट आबू की दूरबीनों से लेकर पोखरण के परमाणु परीक्षणों तक — राजस्थान की ऊर्जा-गाथा के शेष रंग यहाँ जानिए।

💨पवन ऊर्जा की क्षमता

  • हवा से जुड़ी गतिज ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहा जाता है — पवन चक्की पहले इसे यांत्रिक ऊर्जा में और फिर जनरेटर विद्युत ऊर्जा में बदलता है; MNRE के 150 मीटर ऊँचाई सर्वेक्षण के अनुसार राजस्थान की अनुमानित पवन ऊर्जा क्षमता 2,84,000 मेगावाट है, जबकि इसी ऊँचाई पर देश की कुल अनुमानित क्षमता 11,64,000 मेगावाट है।
  • 120 मीटर ऊँचाई पर राजस्थान की अनुमानित पवन ऊर्जा क्षमता 1,27,756 मेगावाट है, जो गुजरात के बाद देश में दूसरे स्थान पर है (100 मीटर ऊँचाई पर भी गुजरात सबसे आगे है); पवन ऊर्जा में भारत विश्व में चौथे स्थान पर है।
  • भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान ने राजस्थान में पवन ऊर्जा विकास हेतु 26 स्थल चिन्हित किए हैं, जिनमें हर्षनाथ (सीकर), जैसलमेर, देवगढ़ (प्रतापगढ़), जसवंतगढ़ (उदयपुर), धर्मोतर (चित्तौड़गढ़), खडोल (बाड़मेर), मोहनगढ़ (जैसलमेर) व फलौदी प्रमुख हैं।

🌀पवन ऊर्जा का विकास व प्रमुख परियोजनाएँ

  • RSPCL ने 14 अगस्त 1999 को जैसलमेर के अमरसागर में राज्य का प्रथम पवन ऊर्जा संयंत्र (2 मेगावाट) कमीशन किया; NHPC ने 30 सितंबर 2016 को जैसलमेर के लखमाना (तहसील फतेहगढ़) में अपने नाम की राज्य की पहली पवन परियोजना (50 मेगावाट) स्थापित की, जबकि मैसर्स कालानी इंडस्ट्रीज ने मार्च 2001 में बड़ा बाग (जैसलमेर) में राज्य की पहली निजी पवन परियोजना (2.76 मेगावाट) लगाई।
  • दिसंबर 2025 तक राज्य में कुल 5229 मेगावाट क्षमता के पवन ऊर्जा संयंत्र स्थापित हो चुके थे, साथ ही 2140 मेगावाट हाइब्रिड क्षमता (जिसमें 885.60 मेगावाट पवन ऊर्जा है) भी कमीशन हो चुकी है; राज्य ने 2030 तक 25 गीगावाट पवन व हाइब्रिड क्षमता का लक्ष्य रखा है, और जैसलमेर जिला राज्य में सर्वाधिक पवन ऊर्जा उत्पन्न करता है।
  • बड़ा बाग, जैसलमेर स्थित 102.9 मेगावाट क्षमता का संयंत्र (ओएनजीसी द्वारा 29 अक्टूबर 2014 को कमीशन, डवलपर सुजलॉन) राज्य का सबसे बड़ा एकल पवन ऊर्जा संयंत्र है।

🏗️जैसलमेर विंड पार्क व हाइब्रिड परियोजनाएँ

  • सुजलॉन एनर्जी द्वारा बड़ा बाग में विकसित जैसलमेर विंड पार्क (1100 मेगावाट) राज्य का सबसे बड़ा और तमिलनाडु के मुप्पंडल (अरलवायमोझी) पार्क के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा पवन पार्क है — विश्व का सबसे बड़ा पवन पार्क चीन का गान्सू विंड फार्म है।
  • अडानी ग्रीन एनर्जी लि. ने जैसलमेर में कुल 1440 मेगावाट के पवन-सौर हाइब्रिड संयंत्र कमीशन किए हैं — मई 2022 में 390 मेगावाट (भारत का पहला हाइब्रिड ऊर्जा संयंत्र), सितंबर 2022 में 600 मेगावाट (विश्व का सबसे बड़ा हाइब्रिड ऊर्जा संयंत्र) व 5 दिसंबर 2022 को 450 मेगावाट।

🌾बायोमास व वेस्ट-टू-एनर्जी

  • राजस्थान में बायोमास ऊर्जा के मुख्य स्रोत सरसों की भूसी, चावल की भूसी व प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा (विलायती बबूल) हैं; दिसंबर 2025 तक राज्य में 20 बायोमास संयंत्र (कुल 207.50 मेगावाट) स्थापित हो चुके थे, और 4 और संयंत्र (39 मेगावाट) निर्माणाधीन हैं — प्रमुख संयंत्रों में बिरला कॉर्पोरेशन (चंदेरिया, चित्तौड़गढ़, 15 मेगावाट) व ट्रांसटेक ग्रीन पावर (कछेला-बागसरी, जालौर, 12 मेगावाट) शामिल हैं।
  • देश का सबसे बड़ा गोबर गैस (बायोगैस) संयंत्र कोटा में स्थापित है; बायोगैस में 55-70% मीथेन होने के कारण यह ज्वलनशील होती है; वेस्ट-टू-एनर्जी को बढ़ावा देने हेतु जयपुर के लांगड़ियावास में 14.9 मेगावाट का संयंत्र पहले से चालू है, और जोधपुर के सुरसागर में 8 मेगावाट की परियोजना पंजीकृत है।

🔭वेधशालाएँ, परमाणु परीक्षण एवं अन्य विविध तथ्य

  • डॉ. अरविंद भटनागर द्वारा 1976 में फतेहसागर झील पर स्थापित उदयपुर सौर वेधशाला (USO) में देश की सबसे बड़ी व बहुउपयोगी सौर दूरबीन 'मास्ट' है, जिसका उद्घाटन 4 अगस्त 2015 को हुआ; भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र की अंतरराष्ट्रीय स्तर की 'ग्रेस' संस्था माउंट आबू में TACTIC, MACE, BEST व MISTIC नामक चार दूरबीनें संचालित करती है।
  • 18 मई 1974 को भारत ने राजस्थान के रेगिस्तान में पोखरण में 'स्माइलिंग बुद्धा' नामक अपना पहला शांतिपूर्ण भूमिगत परमाणु परीक्षण किया; इसके 24 वर्ष बाद, 11 व 13 मई 1998 को, 'ऑपरेशन शक्ति' के तहत पाँच और सफल परमाणु परीक्षण किए गए।
  • सीमापार सांस्कृतिक अतिक्रमण रोकने के लिए जैसलमेर के सीमावर्ती गाँव रामगढ़ में एशिया का सबसे ऊँचा टीवी टावर बनाया गया है; इस क्षेत्र की तेज सौर क्षमता को देखते हुए जोधपुर, जैसलमेर व बाड़मेर के हिस्सों को 'सौर ऊर्जा उद्यम क्षेत्र' (SEEZ) घोषित किया गया है, और राज्य का पहला सौर ऊर्जा संचालित रेफ्रिजरेटर जैसलमेर के जवाहर अस्पताल में लगाया गया था।
  • राजीव गांधी अक्षय ऊर्जा दिवस 20 अगस्त (राजीव गांधी की जयंती) को, ऊर्जा संरक्षण दिवस 14 दिसंबर को और अर्थ ऑवर डे 26 मार्च को मनाया जाता है; ऊर्जा खपत में उद्योग क्षेत्र सबसे आगे है, इसके बाद क्रमशः घरेलू, कृषि व वाणिज्यिक क्षेत्र आते हैं।