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राजस्थान GK

राजस्थान की पशु सम्पदा एवं डेयरी विकास

Livestock Wealth & Dairy Development

राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की धड़कन — पशुगणना के आंकड़ों से लेकर देशी नस्लों, बीमा योजनाओं और 'सरस' के डेयरी सफर तक, यह अध्याय राज्य के पशुधन तंत्र को पूरी तरह खंगालता है।

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पशुधन की गिनती एवं आर्थिक महत्व

Livestock Count & Economic Importance

राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ पशुपालन है — जानिए यह राज्य के लिए कितना जरूरी है और हर पाँच साल में होने वाली पशुगणना क्या बताती है।

💰पशुपालन का आर्थिक महत्व

  • पशुपालन राजस्थान की करीब 75.1% ग्रामीण आबादी की आर्थिक, सामाजिक व पोषण संबंधी जरूरतें पूरी करता है और खेती के अलावा आय का अतिरिक्त जरिया भी देता है।
  • यह क्षेत्र, पशु उत्पाद प्रसंस्करण के साथ मिलकर राज्य के राजस्व में करीब 9-10% और सकल घरेलू आय में लगभग 12-14% का योगदान देता है।
  • अकेला राजस्थान भारत के कुल दूध उत्पादन का लगभग 12-15% और कुल ऊन उत्पादन का 40-48% हिस्सा पैदा करता है।

🗓️पशुगणना: इतिहास एवं प्रक्रिया

  • भारत की सबसे पहली पशुगणना दिसंबर 1919 से अप्रैल 1920 के दौरान हुई थी।
  • राजस्थान में हर पाँचवें साल राजस्व मंडल, अजमेर पशुगणना करवाता है।
  • 21वीं पशुगणना 25 अक्टूबर 2024 से 30 अप्रैल 2025 के बीच पूरी हुई, जिसमें भेड़-गाय से लेकर याक, खच्चर व मुर्गी तक 15 पालतू प्रजातियों की गिनती हुई; इसके आंकड़े अभी आने बाकी हैं।

🌍20वीं पशुगणना 2019: राजस्थान बनाम भारत

  • 2019 की गणना के अनुसार राजस्थान का पशुधन 568.01 लाख रहा, जो 2012 के 577.32 लाख से 1.61% कम है — जबकि भारत का कुल पशुधन 4.82% बढ़कर 5367.61 लाख हो गया और भारत विश्व में पशुधन के मामले में प्रथम स्थान पर बना रहा।
  • कुल पशुधन में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है (राष्ट्रीय हिस्सा 10.60%, प्रथम उत्तरप्रदेश), पर ऊँट (84.43% हिस्सा), बकरी (14%) व गधे (18.9%) में देश में अव्वल है।
  • राज्य का औसत पशु घनत्व घटकर 166 प्रति वर्ग किमी रह गया, जिसमें डूंगरपुर सर्वाधिक घनत्व वाला (433) और जैसलमेर न्यूनतम घनत्व वाला (62) जिला है।

📈प्रजातिवार रुझान (2012-2019)

  • दोनों गणनाओं के बीच भैंसवंश सबसे तेजी से बढ़ा (+5.53%), उसके बाद गौवंश (+4.60%); वहीं गधे 71.31%, खच्चर 60.33%, सूअर 34.87% व ऊँट 34.69% तक घट गए।
  • इसके उलट कुक्कुट पालन में जबरदस्त उछाल आया और यह 82.23% बढ़कर 146.23 लाख तक पहुँच गया।
  • बकरियाँ राजस्थान की सबसे बड़ी पशु श्रेणी बनी हुई हैं — 208.40 लाख (राज्य के कुल पशुधन का 36.69%) — और इस प्रजाति में राज्य देश में प्रथम स्थान पर है।

🗺️जिलेवार विशेषताएं

  • 2019 की गणना के अनुसार बाड़मेर (पुनर्गठन से पूर्व), जोधपुर, जयपुर व उदयपुर में सबसे ज्यादा पशुधन था, जबकि धौलपुर, कोटा, सवाई माधोपुर व बाराँ में सबसे कम।
  • गौवंश में बीकानेर, भैंस व सूअर में जयपुर सबसे आगे है, जबकि गधे, खच्चर व ऊँट में जैसलमेर और बकरी-भेड़ दोनों में बाड़मेर राज्य में अग्रणी है।
  • अश्व पालन में जालौर राज्य के सभी जिलों में सबसे आगे है।
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उत्पादन एवं राष्ट्रीय-वैश्विक स्थान

Production & National-Global Standing

दूध, ऊन, अंडा व मांस उत्पादन में राजस्थान और भारत की स्थिति — ऐसे आंकड़े जो बताते हैं कि यह क्षेत्र वाकई कितना महत्वपूर्ण है।

📦राजस्थान का उत्पादन रुझान (2022-25)

  • राजस्थान में दुग्ध उत्पादन 2024-25 में बढ़कर 36,741 हजार टन हो गया (पिछले साल से 5.78% ज्यादा), जिससे राज्य 14.82% हिस्सेदारी के साथ देश में दूसरे स्थान पर बना रहा।
  • 2024-25 में ऊन उत्पादन 16,542.6 हजार किग्रा तक पहुँचा, जिसमें राजस्थान 47.85% हिस्सेदारी के साथ आराम से देश में प्रथम रहा।
  • इसके उलट अंडा व मांस उत्पादन में राजस्थान का स्थान काफी नीचे है — अंडे में 12वाँ व मांस में 13वाँ।

🏆अग्रणी उत्पादक जिले

  • दुग्ध उत्पादन में सीकर राज्य में सबसे आगे है (9.9% हिस्सा), उसके बाद जयपुर व बीकानेर आते हैं।
  • ऊन उत्पादन में बाड़मेर का दबदबा है (23.2% हिस्सा), उसके बाद दौसा व जालौर हैं।
  • अंडा उत्पादन में अजमेर स्पष्ट रूप से सबसे आगे है (74.7% हिस्सा), जबकि मांस उत्पादन में नागौर अव्वल है।

🌐भारत का विश्व में स्थान

  • पशुधन संख्या व दुग्ध उत्पादन दोनों में भारत विश्व में शीर्ष पर है और विश्व के कुल दूध उत्पादन का करीब एक-चौथाई भारत में होता है।
  • उत्तरप्रदेश, राजस्थान, मध्यप्रदेश व गुजरात इसी क्रम में भारत के शीर्ष चार दुग्ध उत्पादक राज्य हैं।
  • अंडा उत्पादन में भारत विश्व में दूसरे (चीन के बाद) और मांस उत्पादन में चौथे स्थान पर है (चीन, अमेरिका व ब्राजील के बाद); मांस में सबसे बड़ा हिस्सा मुर्गियों का है (49.3%)।

📋BAHS-2025 के मुख्य तथ्य

  • बुनियादी पशुपालन सांख्यिकी 2025 (BAHS-2025) — इस शृंखला की 26वीं रिपोर्ट — राष्ट्रीय दुग्ध दिवस पर 26 नवंबर 2025 को जारी हुई।
  • देश में सर्वाधिक प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता पंजाब में (1318 ग्राम/दिन), अंडा उपलब्धता आंध्रप्रदेश में (514 अंडे/वर्ष) और मांस उपलब्धता तेलंगाना में (28.78 किग्रा/वर्ष) है।
  • 2024-25 में राजस्थान की प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता बढ़कर 1229 ग्राम/दिन हो गई — जो राष्ट्रीय औसत 485 ग्राम/दिन से काफी ज्यादा है।
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पशुपालक कल्याण एवं बीमा योजनाएं

Schemes for Pastoralist Welfare & Insurance

बड़े संकट में राहत से लेकर बेटियों की शादी तक — राजस्थान सरकार की योजनाएं पशुपालकों के हर मोड़ पर उनके साथ खड़ी हैं।

🛡️मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना

  • वित्त वर्ष 2024-25 के बजट में घोषित यह प्रमुख निःशुल्क पशु बीमा योजना, ऊँट संरक्षण एवं विकास मिशन के साथ 13 दिसंबर 2024 को कायड़, अजमेर में शुरू हुई।
  • शुरुआत में इसमें कुल 21 लाख पशुओं का मुफ्त बीमा हुआ — 5-5 लाख दुधारू गाय, भैंस, भेड़ व बकरी तथा 1 लाख ऊँट।
  • बजट 2025-26 में योजना का दायरा दोगुना कर करीब 42 लाख पशुओं तक बढ़ाया गया; इसका लाभ जनआधार कार्डधारकों को मिलता है, जबकि गोपाल क्रेडिट कार्डधारक व 'लखपति दीदी' पशुपालकों को प्राथमिकता दी जाती है।

💳राजस्थान सहकारी गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना

  • 8 फरवरी 2024 को अंतरिम बजट 2024-25 में घोषित इस योजना के जरिए राजस्थान गोपालक परिवारों को अल्पकालीन ब्याजमुक्त ऋण देने वाला देश का पहला राज्य बना।
  • पहले चरण में 5 लाख ग्रामीण गोपालक परिवारों को एक साल के लिए 1 लाख रुपये तक का ऋण मिला, जो समय पर चुकाने पर ब्याजमुक्त रहता है।
  • बजट 2025-26 में ऋण की सीमा बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दी गई और लाभार्थियों की संख्या भी और बढ़ाई गई।

🐫उष्ट्र संरक्षण योजना

  • 1 नवंबर 2022 को शुरू हुई और 9 फरवरी 2023 को विधिवत लोकार्पित यह योजना राजस्थान के मूल निवासी ऊँटपालकों को हर नवजात ऊँट-शावक (टोडिया, उम्र 0-2 माह) पर प्रोत्साहन देती है।
  • पहले पालकों को टोडिया के जन्म पर 5,000 रुपये और एक साल बाद 5,000 रुपये यानी कुल 10,000 रुपये मिलते थे; बजट 2024-25 में यह राशि बढ़ाकर 20,000 रुपये कर दी गई।
  • यह ऊँट संरक्षण एवं विकास मिशन के साथ मिलकर काम करती है, जो ऊँटों की तेजी से घटती संख्या को थामने के लिए बनाया गया है।

🩺पशु स्वास्थ्य एवं देखभाल योजनाएं

  • ए-हेल्प योजना पहली बार 14 अगस्त 2023 को गुजरात के नर्मदा जिले से शुरू हुई और राजस्थान में 1 जुलाई 2024 से लागू हुई; इसमें प्रशिक्षित 'पशु सखी' पशुपालकों के दरवाजे तक पशु चिकित्सा जानकारी पहुँचाती हैं।
  • बजट 2023-24 में घोषित पशुमित्र योजना के तहत 5,000 प्रशिक्षित बेरोजगार पशुधन सहायकों को पशुमित्र बनाकर घर पर ही टैगिंग, टीकाकरण, बीमा व कृत्रिम गर्भाधान जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
  • पशुधन निःशुल्क आरोग्य योजना के तहत सरकारी पशु स्वास्थ्य संस्थानों में 15 अगस्त 2012 से मुफ्त दवा वितरण हो रहा है; बजट 2025-26 में मुफ्त दवाओं की सूची बढ़ाकर 200 कर दी गई।

🐄गौशाला एवं नंदीशाला योजनाएं

  • नंदी गोशाला जन सहभागिता योजना हर पंचायत समिति स्तर पर नंदीशाला अनिवार्य कर निराश्रित नर-गायों की समस्या हल करती है; 29 अगस्त 2019 को बाड़मेर में देश की पहली पंचायत-समिति-स्तरीय नंदी गोशाला बनी।
  • राजस्थान देश का इकलौता राज्य है जो गौशालाओं को 9 महीने और नंदीशालाओं को पूरे 12 महीने का अनुदान देता है।
  • राजस्थान का पहला गौ अभयारण्य बीकानेर जिले की डूँगरपुर तहसील के गाँव नापासर में बनाया जा रहा है।

🏅गोपाल रत्न व कामधेनु पुरस्कार

  • ये राष्ट्रीय सम्मान हर साल 26 नवंबर (दुग्ध दिवस) को दिए जाते हैं और 2017-18 से जारी हैं; ये सर्वश्रेष्ठ देशी नस्ल संरक्षक (गोपाल रत्न) व संस्थाओं (कामधेनु) को तीन श्रेणियों में क्रमशः 5 लाख, 3 लाख व 1 लाख रुपये देकर सम्मानित करते हैं।
  • गोपाल रत्न अवॉर्ड 2025 में राजस्थान को किसी भी राज्य से सबसे ज्यादा — कुल तीन — राष्ट्रीय पुरस्कार मिले, जिनमें सीकर की एक डेयरी किसान, जयपुर की एक दुग्ध सहकारी समिति व एक कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन शामिल हैं।
  • इसके अलावा RCDF को डेयरी क्षेत्र के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान गोपाल रत्न पुरस्कार की तीनों श्रेणियों में चुना गया है।
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राष्ट्रीय मिशन, शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान

National Missions, Education & Research Institutions

नस्ल सुधार से लेकर पशु चिकित्सा शिक्षा तक — मिलिए उन मिशन, विश्वविद्यालयों व शोध केंद्रों से जो राजस्थान के पशुधन क्षेत्र को आगे बढ़ा रहे हैं।

🧬राष्ट्रीय गोकुल मिशन

  • दिसंबर 2014 में केंद्र सरकार द्वारा शुरू यह मिशन चयनित संकरण के जरिए देशी नस्लों का संरक्षण-विकास करता है; इसमें दो उप-योजनाएं शामिल हैं — नेशनल प्रोग्राम फॉर बोवाइन ब्रीडिंग व नेशनल मिशन ऑन बोवाइन प्रोडक्टिविटी (पशु संजीवनी योजना)।
  • इसी छतरी के तहत 2023-24 में स्वीकृत मिशन उत्कर्ष जैसलमेर, जैसलमेर जिले में कृत्रिम गर्भाधान की पहुँच खासतौर पर बढ़ाता है।
  • मिशन के तहत मैत्री केंद्र बेरोजगार युवाओं को तीन माह के प्रशिक्षण से बहुउद्देशीय कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन के रूप में तैयार करते हैं; राजस्थान में यह योजना 2018-19 से चल रही है।

🏫पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय

  • 13 मई 2010 को बीकानेर में स्थापित राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, राज्य का पहला समर्पित वेटरनरी विश्वविद्यालय था।
  • दूसरा ऐसा विश्वविद्यालय जोबनेर (जयपुर) में बना — इस तरह राजस्थान देश का इकलौता ऐसा राज्य है जहाँ दो पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हैं।
  • राज्य का एकमात्र दुग्ध विज्ञान एवं टेक्नोलॉजी महाविद्यालय उदयपुर में महाराणा प्रताप कृषि व तकनीकी विश्वविद्यालय के तहत चलता है, जबकि सिरोही, सीकर, बस्सी, लालसोट, कोटपूतली, भरतपुर व मलसीसर में नए पशु चिकित्सा महाविद्यालय स्वीकृत हुए हैं।

⚖️प्रमुख बोर्ड एवं आयोग

  • राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड (RLDB) का गठन 25 मार्च 1998 को जामडोली, जयपुर में हुआ; अब यह पशुधन भवन, लालकोठी, जयपुर से काम करता है।
  • 21 फरवरी 2019 को नई दिल्ली में स्थापित राष्ट्रीय कामधेनु आयोग, जिसके पहले अध्यक्ष वल्लभ भाई कथीरिया थे, राष्ट्रीय स्तर पर गौवंश संरक्षण के लिए काम करता है।
  • 13 फरवरी 2022 को तीन साल के कार्यकाल के लिए गठित राज्यस्तरीय राजस्थान गो सेवा आयोग भी गौवंश कल्याण व गोपालकों की आजीविका के लिए काम करता है।

🔬अनुसंधान केंद्र एवं प्रयोगशालाएं

  • अविकानगर (मालपुरा, टोंक) स्थित केन्द्रीय भेड़ व ऊन अनुसंधान संस्थान की स्थापना ICAR ने 1962 में की थी, और राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केंद्र, जोहड़बीड (बीकानेर) ने 5 जुलाई 1984 को काम शुरू किया।
  • राज्य की पहली उन्नत दूध परीक्षण व अनुसंधान प्रयोगशाला 7 अक्टूबर 2014 को मानसरोवर, जयपुर में शुरू हुई — करनाल स्थित राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान के बाद देश की दूसरी ऐसी अत्याधुनिक प्रयोगशाला।
  • राज्य की पहली सेक्स सॉर्टेड सीमन लैब 11 अगस्त 2025 को RCDF के बस्सी स्थित फ्रोजन सीमन बैंक में शुरू हुई, जो सालाना 10 लाख डोज बनाती है और पशुपालकों को 75% अनुदानित दर पर कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा देती है।
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नस्लें एवं डेयरी ढाँचा

Breeds & Dairy Infrastructure

राजस्थान की देशी नस्लों की पहचान से लेकर 'सरस' ब्रांड तक पहुँचने वाली दूध की यात्रा तक — यही है राज्य के पशुधन तंत्र की बुनियाद।

🐮गौवंश की प्रमुख नस्लें

  • बीकानेर व श्रीगंगानगर के आसपास मिलने वाली राठी नस्ल, जो लाल सिंधी व साहीवाल की मिश्रित है, इतनी अच्छी दुधारू है कि इसे 'राजस्थान की कामधेनु' कहा जाता है।
  • गुजरात के गिर वन की मूल गीर गाय अजमेर व भीलवाड़ा के आसपास आम है और अधिक दूध के लिए प्रसिद्ध है, वहीं सिंध व मालानी गाँव (बाड़मेर) से उत्पन्न थारपारकर पश्चिमी जिलों की एक और अग्रणी दुधारू नस्ल है।
  • गुजरात के कच्छ के रन से आई कांकरेज और नागौर की मूल नागौरी नस्लें दोहरे उपयोग की हैं — भारवहन व दूध दोनों के लिए समान रूप से मूल्यवान।

🐏भैंस, भेड़ व बकरी की नस्लें

  • जयपुर, अलवर व भरतपुर में व्यापक रूप से मिलने वाली मुर्रा (खुण्डी) भैंस, अपनी उपज और दूध में 7-8% वसा दोनों के लिए प्रसिद्ध है।
  • भेड़ों में शेखावाटी क्षेत्र की चोकला नस्ल अपनी खास मुलायम व बारीक ऊन के लिए 'भारत की मेरिनो' कहलाती है, जबकि मारवाड़ी राज्य में सबसे ज्यादा संख्या वाली भेड़ नस्ल है।
  • बकरियों में सिरोही मांस के लिए अग्रणी नस्ल है, जबकि झखराना गाँव (बहरोड़) की जखराना नस्ल अधिक दूध के लिए जानी जाती है।

🐫ऊँट व अश्व की नस्लें

  • बीकानेर व नागौर में मिलने वाली बीकानेरी ऊँट नस्ल भारी बोझ ढोने की क्षमता के लिए जानी जाती है, जबकि जैसलमेरी ऊँट रेत में गति व सवारी के लिए प्रसिद्ध है — जैसलमेर का नाचना ऊँट पूरे भारत में मशहूर है।
  • ऊँट व बकरी पालन में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है, पर घोड़े-टट्टू पालन में केवल तीसरे स्थान पर है, उत्तरप्रदेश व जम्मू-कश्मीर के बाद।
  • मालाणी व काठियावाड़ी नस्लें क्रमशः घुड़दौड़ व घुड़सवारी के लिए देश की सर्वश्रेष्ठ नस्लों में गिनी जाती हैं, दोनों मुख्यतः सिवाणा (बालोतरा) क्षेत्र में मिलती हैं।

🥛डेयरी विकास का इतिहास एवं ढाँचा

  • भारत की श्वेत क्रांति 1970 में 'ऑपरेशन फ्लड' से शुरू हुई, जो राजस्थान समेत दस राज्यों में डॉ. वर्गीज कूरियन के नेतृत्व में दूध उत्पादन बढ़ाने व उत्पादकों को उचित मूल्य दिलाने के लिए चलाया गया था।
  • 1977-78 में डेयरी विकास निगम के विलय से बनी राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF), गुजरात के आणंद (अमूल) सहकारी मॉडल पर चलते हुए 'सरस' ब्रांड के तहत राज्य के डेयरी क्षेत्र की शीर्ष संस्था बनी।
  • यह क्षेत्र अब त्रिस्तरीय ढाँचे पर चलता है: शीर्ष पर RCDF, बीच में 24 जिला दुग्ध संघ, और गाँव स्तर पर 19,600 से ज्यादा प्राथमिक दुग्ध सहकारी समितियाँ जो उत्पादकों से दूध जमा करती हैं।

🦠पशुधन के प्रमुख रोग

  • विषाणु जनित रोगों में खुरपका-मुँहपका (FMD) मुख्यतः गौवंश को, शीप पॉक्स भेड़-बकरी-भैंस को और ब्लू टंग विशेष रूप से भेड़ को प्रभावित करता है।
  • प्रमुख जीवाणु जनित रोगों में एन्थ्रेक्स (प्लीहा ज्वर) व गलघोंटू (सभी पशुओं को प्रभावित करते हैं), थनैला (दुधारू पशुओं में) और ग्लैंडर्स (अश्व में) शामिल हैं।
  • सर्रा नाम का प्रोटोजोआ जनित रोग मुख्यतः ऊँटों को प्रभावित करता है, जबकि थिलेरिएसिस, बेबिसियोसिस व एनाप्लाज्मोसिस मुख्यतः गाय-भैंस को प्रभावित करते हैं।