राजस्थान के खनिज संसाधन
Mineral Resources of Rajasthan
पोटाश, सीसा-जस्ता व चाँदी में लगभग एकाधिकार से लेकर बाड़मेर के तेल क्षेत्रों तक - जानिए कैसे राजस्थान की धरती के नीचे भारत की सबसे विविध और आर्थिक रूप से अहम खनिज संपदा छिपी है।
खनिज मूल बातें और राजस्थान की स्थिति
अलग-अलग खनिजों में जाने से पहले बड़ी तस्वीर समझना जरूरी है - खनिज क्या होते हैं, उनका वर्गीकरण कैसे होता है, और भारत के खनिज उत्पादक राज्यों में राजस्थान कहाँ खड़ा है।
🧪भूपर्पटी की संरचना
- पृथ्वी अनेक तत्वों से बनी है, जो बाहरी भूपर्पटी में ठोस रूप में और भीतरी परतों में पिघली हुई अवस्था में मौजूद रहते हैं।
- मात्र आठ तत्व भूपर्पटी का लगभग 98% भाग बनाते हैं - सबसे अधिक हिस्सा ऑक्सीजन का (46%) है, इसके बाद सिलिकॉन (27%), फिर एलुमिनियम, लोहा, कैल्सियम, सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम आते हैं।
📂खनिजों का वर्गीकरण
- खनिजों को तीन बड़े वर्गों में बाँटा जाता है - धात्विक, अधात्विक और ईंधन खनिज; धात्विक खनिज आगे लौह खनिजों (लोहा, मैंगनीज, टंगस्टन, क्रोमाइट, निकिल, कोबाल्ट, टाइटेनियम, बोरोन) और अलौह खनिजों (ताँबा, सीसा, जस्ता, चाँदी, सोना, इल्मेनाइट, बेराइट, प्लेटिनम, मैग्नीशियम, बॉक्साइट) में बँटते हैं।
- अधात्विक खनिजों में अभ्रक, एस्बेस्टॉस, पाइराइट, नमक, जिप्सम, हीरा, रॉक फॉस्फेट, चूना पत्थर व डोलोमाइट शामिल हैं, जबकि ईंधन खनिजों में कोयला, खनिज तेल, प्राकृतिक गैस व यूरेनियम आते हैं।
🏆राजस्थान की राष्ट्रीय स्थिति
- राजस्थान भारत के अग्रणी खनिज उत्पादक राज्यों में शुमार है - कुल खनिज संपदा में यह झारखंड के बाद दूसरे स्थान पर है, जबकि खनिजों की विविधता में देश में प्रथम स्थान रखता है, यही कारण है कि इसे 'खनिजों का अजायबघर' भी कहा जाता है।
- वर्ष 2025-26 के लिए अनुमानित खनिज उत्पादन मूल्य (परमाणु, ईंधन व गौण खनिजों को छोड़कर) सबसे अधिक ओडिशा (38.37%) में है, इसके बाद राजस्थान (23.17%) और छत्तीसगढ़ (13.52%) का स्थान है।
- आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राजस्थान में 82 प्रकार के खनिजों के भंडार हैं, जिनमें से 57 का वर्तमान में वाणिज्यिक उत्पादन हो रहा है; यह कैल्साइट, चाँदी, जिप्सम, जिंक अयस्क, वोलेस्टोनाइट व सेलेनाइट का देश में एकमात्र उत्पादक राज्य है, और चूना पत्थर, सीसा-जस्ता, गार्नेट, बैराइट्स, सिलिका सैण्ड, ग्रेनाइट, संगमरमर व ताँबे का भी अग्रणी उत्पादक है।
📊राष्ट्रीय भंडारों में राजस्थान की हिस्सेदारी
- देश के कई खनिज भंडारों पर राजस्थान का दबदबा है: पोटाश भंडारों का लगभग 94%, सीसा-जस्ता अयस्क का 89%, चाँदी अयस्क व वोलास्टोनाइट का 88-88%, जिप्सम का 82%, गेरू का 81% और बेंटोनाइट का 75% हिस्सा राजस्थान में है।
- इसके अलावा फुलर्स अर्थ का लगभग 74%, डोलोमाइट का 72%, फेल्सपार का 66%, मार्बल का 63%, एस्बेस्टस का 61%, ताँबा अयस्क का 54%, कैल्साइट का 50%, टैल्क/स्टीएटाइट/सोपस्टोन का 49%, बॉल क्ले का 38%, रॉक फॉस्फेट का 31%, फ्लोराइट का 29% और टंगस्टन का 27% भंडार राजस्थान में मिलता है।
🔬अन्वेषण एवं नई खोजें (2024-25)
- वर्ष 2024-25 में राज्य ने रिकॉर्ड 34 प्रधान खनिज ब्लॉकों की नीलामी की, जो उस वर्ष देश में किसी भी राज्य द्वारा की गई सर्वाधिक नीलामी थी।
- आगे की योजना के तहत सरकार ने केंद्र की क्रिटिकल मिनरल स्ट्रैटेजी (2023-2047) व आत्मनिर्भर भारत अभियान के अनुरूप महत्वपूर्ण व सामरिक खनिजों के अन्वेषण को तेज करने हेतु आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व मशीन लर्निंग के उपयोग का प्रस्ताव रखा है; बेस मेटल, लाइमस्टोन, मैंगनीज व आयरन के लिए जियोफिजिकल सर्वे व ड्रिलिंग तथा GSI के सहयोग से 'स्टेट ऑफ आर्ट खनिज कोर लाइब्रेरी' की स्थापना की योजना है।
- 2024-25 में खान एवं भूविज्ञान विभाग ने अबाधखेड़ा, भेर, देवलापाल-अम्बाव और निमाना-दुनिया में सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन के नए भंडार खोजे, वहीं सोजत, श्यामगढ़, पाकरियावास, कानाखेड़ा व सम में डोलोमाइट लाइमस्टोन के नए भंडार पाए गए।
🗿जियो हेरिटेज साइट्स व भू-वैज्ञानिक स्मारक
- बाराँ में स्थित रामगढ़ क्रेटर भारत का तीसरा व राजस्थान का पहला उल्कापात क्रेटर है; अगस्त 2020 में कनाडा की 'अर्थ इंपैक्ट डाटा बेस सोसायटी' ने इसे 'विश्व भू-विरासत स्थल' के रूप में मान्यता दी, और यह महाराष्ट्र के लोनार व मध्यप्रदेश के ढला क्रेटर के बाद विश्व का 200वाँ भू-विरासत क्रेटर बनने जा रहा है।
- बाड़मेर व बालोतरा जिलों में लगभग 750 वर्ग किमी में फैला वृत्ताकार सिवाना रिंग कॉम्प्लेक्स एक प्राचीन ज्वालामुखी कुंड है, जिसके ग्रेनाइट में रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REE), हैवी रेयर अर्थ एलिमेंट्स (HREE) और नियोबियम, जिरकोनियम व हाफनियम जैसे क्रिटिकल रेयर मेटल्स मिले हैं - यह खोज भारत के स्वच्छ ऊर्जा व परमाणु लक्ष्यों को बल देगी, और यहाँ REE के लिए एक्सीलेंस सेंटर भी प्रस्तावित है।
- किशनगढ़ की नेफेलिन साइनाइट (1976 में राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक स्मारक घोषित) और ब्यावर के पास लगभग 90 करोड़ वर्ष पहले टेक्टॉनिक गतिविधि से बनी सेंदड़ा ग्रेनाइट (1977 में स्मारक घोषित) राज्य के संरक्षित भू-विरासत स्थलों में शामिल हैं; अन्य सूचीबद्ध स्मारकों में थार मरुस्थल, वेल्डेड टफ (जोधपुर), रामगढ़ स्ट्रक्चर (बाराँ), बर कांग्लोमेरेट (पाली), मलानी इग्निशियस सूट, द ग्रेट बाउंड्री फॉल्ट (बूँदी), गोसन-राजपुरा दरीबा (राजसमंद), आकल फॉसिल वुड पार्क (जैसलमेर) व झामरकोटड़ा का स्ट्रोमेटोलाइट पार्क (उदयपुर) शामिल हैं।
खनिज नीतियाँ, बजट व संस्थान
राजस्थान की खनिज संपदा को एक सक्रिय नीतिगत ढाँचे का समर्थन मिलता है - नए बजट प्रावधान, समर्पित खनिज व रेत नीतियाँ, और खोज, खनन व विपणन करने वाली संस्थाओं का एक पूरा तंत्र।
💰बजट 2026-27 की मुख्य घोषणाएँ
- प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण व बजरी पर निर्भरता घटाने हेतु M-Sand Policy 2024 के तहत राजकीय निर्माण कार्यों में एम-सैण्ड का न्यूनतम उपयोग तय किया गया है; 2026-27 के बजट में इसे 25% से बढ़ाकर 50% करने का प्रस्ताव है।
- खातेदारी भूमि पर खनन पट्टे के आवेदन पर देय प्रीमियम राशि को 40% से घटाकर 30% करने का प्रस्ताव है।
🏛️बजट 2025-26 की मुख्य घोषणाएँ
- जयपुर में मिनरल्स (माइनिंग सेक्टर) एक्सीलेंस सेंटर और उदयपुर में इंस्टीट्यूट ऑफ माइंस बनाने की योजना है, साथ ही जोधपुर की एमबीएम यूनिवर्सिटी में पेट्रो कैम्पस और राजस्थान मिनरल एक्सप्लोरेशन लिमिटेड के गठन की भी घोषणा हुई है।
- अनुसंधान व विकास हेतु बीकानेर में सेरेमिक्स तथा उदयपुर में रेयर अर्थ एलिमेंट्स के लिए उत्कृष्टता केंद्र प्रस्तावित हैं, साथ ही उदयपुर में ही बायोडीजल के लिए एक अलग उत्कृष्टता केंद्र भी बनेगा।
📋राजस्थान खनिज नीति 2024
- 8 नवम्बर 2024 को अनावरित और 4 दिसंबर 2024 को जारी इस नीति का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण व सामुदायिक कल्याण सुनिश्चित करते हुए राज्य की खनिज संपदा से टिकाऊ, पारदर्शी विकास को बढ़ावा देना है।
- इसका मुख्य लक्ष्य वर्ष 2047 तक खनिज निष्कर्षण को 58 से बढ़ाकर 70 खनिजों तक करना और जीडीपी में खनन क्षेत्र की मौजूदा 3.4% हिस्सेदारी को 2029-30 तक 5% व 2046-47 तक 8% तक ले जाना है।
🏗️एम-सैण्ड नीतियाँ - 2021 व 2024
- राजस्थान ने 25 जनवरी 2021 को अपनी पहली एम-सैण्ड नीति लागू कर एम-सैण्ड इकाइयों को उद्योग का दर्जा दिया; एम-सैण्ड नीति 2024 (8 नवम्बर घोषित, 4 दिसंबर 2024 जारी) का उद्देश्य नागरिकों को बजरी का सस्ता विकल्प देना, नदियों पर दबाव घटाना, ओवरबर्डन का बेहतर उपयोग करना, निर्माण मलबे को रिसाइकिल करना और रोजगार सृजित करना है।
- 2024 की नीति के तहत 50% रॉयल्टी छूट, 10 वर्षों तक 75% राज्य कर प्रतिपूर्ति, 7 वर्षों तक बिजली शुल्क में पूर्ण छूट, स्टाम्प शुल्क पर 75% छूट और स्थानीय कर्मचारियों के ईपीएफ/ईएसआई अंशदान की 50% प्रतिपूर्ति जैसे प्रोत्साहन दिए गए हैं, तथा 2028-29 तक सरकारी परियोजनाओं में 50% एम-सैण्ड उपयोग का लक्ष्य रखा गया है।
📅अन्य ऐतिहासिक नीतियाँ व उपलब्धियाँ
- राजस्थान की पहली खनिज नीति 1978 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत के कार्यकाल में घोषित हुई थी, जिन्होंने ही 16 अगस्त 1994 को खनिज नीति 1994 भी जारी की; ग्रेनाइट व मार्बल नीति चरणों में आई - पहली ग्रेनाइट नीति 1991 में, दूसरी जनवरी 1995 में, और संयुक्त मार्बल व ग्रेनाइट नीति 8 जनवरी 2002 को घोषित हुई।
- जनवरी 2016 में राजस्थान खान ब्लॉकों की ई-नीलामी करने वाला देश का पहला राज्य बना, और 16 जुलाई 2025 को जारी राजस्थान सिटी गैस वितरण (सी.जी.डी.) नीति 2025 गैस पाइपलाइन अवसंरचना को मजबूत करने व पीएनजी/सीएनजी उपलब्धता बढ़ाने पर केंद्रित है।
🏢प्रमुख राज्य संस्थान
- उदयपुर मुख्यालय वाले खान एवं भूविज्ञान विभाग की स्थापना 1949 में व्यवस्थित खनिज अन्वेषण हेतु हुई थी; राजस्थान राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्ट को 15 सितंबर 2020 को जारी नियमों से औपचारिक रूप मिला, और खनन-प्रभावित क्षेत्रों के हित के लिए 2016 के नियमों के तहत जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) बनाए गए।
- आरएसएमएमएल की जड़ें 1947 में बनी बीकानेर जिप्सम लिमिटेड से जुड़ी हैं, इसे 1974 में राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड के रूप में पुनर्गठित किया गया और 2003 में इसमें आरएसएमडीसी (स्थापना 1979) का विलय हुआ; इसका पंजीकृत कार्यालय जयपुर व मुख्यालय उदयपुर में है, और यह जैसलमेर में पवन ऊर्जा से बिजली भी बनाती है।
- 20 सितंबर 2013 को बनी राजस्थान स्टेट गैस लिमिटेड राज्य में खुदरा गैस वितरण की नोडल एजेंसी है और नीमराणा व कूकस स्टेशनों के जरिए दिल्ली-जयपुर-दिल्ली सीएनजी कॉरिडोर बनाया, जबकि 10 जुलाई 2008 को बनी राजस्थान स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन राज्य में पेट्रोलियम अन्वेषण, परिशोधन व वितरण संभालती है।
🏭राष्ट्रीय खनन व ऊर्जा उपक्रम
- भारतीय खान ब्यूरो (1948) और खनिज अन्वेषण निगम लिमिटेड (1972) दोनों का मुख्यालय नागपुर में है; हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (1967, कोलकाता) मिनी रत्न कंपनी है, जबकि ओएनजीसी (महारत्न, स्थापना 1959) व गेल इंडिया (2013 से महारत्न, स्थापना 1984) देश के तेल-गैस क्षेत्र का आधार हैं।
- 10 जनवरी 1966 को बनी हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड (मुख्यालय उदयपुर) का 2002 में निजीकरण हुआ जब इसके 26% शेयर स्टरलाइट ऑपरचूनिटीज एंड वेंचर्स को बेचे गए, और अब यह वेदांता लिमिटेड का हिस्सा है; ऑयल इंडिया लिमिटेड (1959, असम) को अप्रैल 2010 में नवरत्न का दर्जा मिला।
🎪कार्यक्रम, समिट व सम्मान
- आरएसएमएमएल का इनोवेटिव संगतराश कार्यक्रम झामरकोटड़ा खनन क्षेत्र के ओवरबर्डन व वेस्ट मटेरियल को रिसाइकिल कर आधुनिक व समकालीन मूर्तिकला में बदलता है, और ग्लोबल इंडिया स्टोनमार्ट में इसके पवेलियन को प्रथम पुरस्कार मिला।
- राइजिंग राजस्थान-माइंस व पेट्रोलियम सेक्टर प्री समिट 8 नवम्बर 2024 को जयपुर में आयोजित हुई, और राष्ट्रीय खनन सम्मेलन 23-24 मार्च 2026 को दिल्ली में आकांक्षी जिला व ब्लॉक कार्यक्रम के तहत DMF निधि के प्रभावी उपयोग पर केंद्रित हुआ; संपीड़ित जैव गैस (CBG) को बढ़ावा देने वाली सतत (SATAT) योजना 1 अक्टूबर 2018 को शुरू हुई थी।
राजस्थान के धात्विक खनिज
राजस्थान सिर्फ लोहा व ताँबा ही नहीं निकालता, बल्कि देश के सीसा-जस्ता व चाँदी उत्पादन पर इसका लगभग एकाधिकार भी है, और यह यूरेनियम व दुर्लभ भविष्योन्मुखी तत्वों के नए मोर्चे भी खोल रहा है।
⚙️लौह अयस्क
- मुख्यतः जलज व आग्नेय चट्टानों से प्राप्त लौह अयस्क का बेहतर किस्म हेमेटाइट है, हालाँकि राजस्थान में मुख्यतः मैग्नेटाइट किस्म पाई जाती है।
- राजस्थान मैग्नेटाइट भंडारों में देश में तीसरे व हेमेटाइट भंडारों में 11वें स्थान पर है; कुल लौह अयस्क उत्पादन में यह सातवें, पर सांद्र उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, और इसके प्रमुख स्रोत जयपुर-मोरीजा बानोला, दौसा, झुंझुनूँ व उदयपुर में हैं।
🔩सीसा-जस्ता
- उदयपुर का जावर खान समूह (मोचिया, बल्लारिया, जावरमाला, बरोई) चार भूमिगत सीसा-जस्ता खानें चलाता है, साथ ही राजसमंद की भूमिगत रजपुरा-दरीबा खान व अजमेर की कायड़ खान भी हैं; जिंक का सबसे बड़ा उपभोक्ता गेल्वेनाइजिंग उद्योग है और सीसे का बैटरी उद्योग है, और दोनों धातुएँ सामान्यतः चाँदी के साथ ही मिलती हैं।
- राजस्थान में भारत के सीसा-जस्ता भंडारों का लगभग 89.32% हिस्सा है (आंध्रप्रदेश से आगे प्रथम स्थान) और उत्पादन में इसका लगभग एकाधिकार है; सीसा कन्संट्रेट सर्वाधिक राजसमंद में व जस्ता कन्संट्रेट भीलवाड़ा में बनता है, जबकि रामपुरा आगूचा (भीलवाड़ा) विश्व की दूसरी सबसे बड़ी और सिंदेसर खुर्द (राजसमंद) भारत की सबसे बड़ी भूमिगत सीसा-जस्ता खान है।
- हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड चंदेरिया (चित्तौड़गढ़, कमीशन 1991, विधिवत उद्घाटन 25 जून 2025), दरीबा (राजसमंद - सीसा स्मेल्टर 2011, जस्ता स्मेल्टर 2010) व देबारी (उदयपुर, 1968 से) में जिंक स्मेल्टर संचालित करती है; भारत सीसे के भंडारों में 8वें व जिंक भंडारों में छठे स्थान पर है, और 2023 में विश्व जिंक उत्पादन में चौथे व सीसा उत्पादन में पाँचवें स्थान पर रहा।
🥈चाँदी
- चाँदी अक्सर सीसा, जस्ता, ताँबा या सोने के अशुद्ध अयस्कों के साथ मिलती है; इसके मुख्य अयस्क अर्गेनाटाइट, पाइराजाइराइट व हार्न सिल्वर हैं।
- चाँदी अयस्क भंडार और चाँदी उत्पादन दोनों में राजस्थान प्रथम है (कर्नाटक दूसरे स्थान पर), और भारत का अधिकांश उत्पादन हिन्दुस्तान जिंक की सिंदेसर खुर्द खान (राजसमंद) व चंदेरिया संयंत्र (चित्तौड़गढ़) से आता है; मेटल कंटेंट के आधार पर भारत के सर्वाधिक चाँदी भंडार राजस्थान में हैं, इसके बाद मध्यप्रदेश।
🟠ताँबा
- लाल-भूरे रंग का ताँबा आग्नेय, अवसादी व कायांतरित चट्टानों से मिलता है; झुंझुनूँ को राजस्थान का 'ताँबा जिला' कहा जाता है (यहीं चाँदमारी ताम्र परियोजना है), गणेश्वर (सीकर) को ताम्र सभ्यता की जननी और आहड़ (उदयपुर) को 'ताम्र नगरी' कहते हैं।
- 2023-24 में ताँबा उत्पादन में मध्यप्रदेश सबसे आगे था, राजस्थान दूसरे व झारखंड तीसरे स्थान पर, लेकिन 1.4.2020 को भंडारों के हिसाब से राजस्थान मध्यप्रदेश व झारखंड से आगे प्रथम स्थान पर था; खेतड़ी ताँबा स्मेल्टर संयंत्र की स्थापना 1974 में हुई थी।
🔧टंगस्टन
- टंगस्टन के अयस्क वुल्फ्राम्राइट व शीलाइट हैं; भंडारों में राजस्थान का कर्नाटक के बाद दूसरा स्थान है, पर यह देश का प्रमुख टंगस्टन उत्पादक राज्य है, जो डेगाना (नागौर), नाना कराब (पाली), आबू, रेवदर व बाल्दा (सिरोही) में मिलता है।
⚫मैंगनीज
- 'जैक ऑफ ऑल ट्रेड्स' कहलाने वाला मैंगनीज अवसादी शैलों से मिलता है (मुख्य अयस्क साइलोमैलीन), इसका रंग सिल्वरी ग्रे होता है और यह बहुत कठोर पर भंगुर होता है; इसका मुख्य स्रोत बाँसवाड़ा (लीलवानी, तलवाड़ा, नरडिया आदि) है।
- 2025-26 में मैंगनीज अयस्क का सर्वाधिक उत्पादन महाराष्ट्र में हुआ, जबकि राजस्थान भंडारों में 10वें व उत्पादन में सातवें स्थान पर रहा।
🟡स्वर्ण
- फरवरी 2007 में ऑस्ट्रेलियाई कंपनी इंडो गोल्ड ने बाँसवाड़ा के भूकिया-जगपुरा में 3.85 करोड़ टन के विशाल स्वर्ण भंडार की खोज की; इसके अलावा बाँसवाड़ा में घाटोल, तिमारन माता, डागूचा आदि तथा उदयपुर के रायपुर-खेड़ा में भी भंडार मिले हैं, हालाँकि राज्य में खनन अभी शुरू नहीं हुआ है।
- 1.4.2020 की स्थिति में सोने के अयस्क भंडार में बिहार प्रथम व राजस्थान दूसरे स्थान पर था, जबकि सर्वाधिक उत्पादन कर्नाटक की कोलार गोल्ड माइन्स से होता है; मेटल कंटेंट के लिहाज से भारत के सबसे बड़े स्वर्ण भंडार कर्नाटक व उसके बाद राजस्थान में हैं।
☢️यूरेनियम
- 'येलो केक' के नाम से भी मशहूर रेडियोएक्टिव यूरेनियम (अयस्क: पैगमेटाइट्स, मोनोजाइट, चैरेलाइट) परमाणु ऊर्जा व हथियारों में प्रयुक्त होता है; UCIL व परमाणु ऊर्जा विभाग खण्डेला (सीकर) में विस्तृत अन्वेषण कर रहे हैं, और रोहिल क्षेत्र में खनन हेतु UCIL को LOI जारी किया गया है।
- बाराँ के रामगढ़ तथा जोधपुर के आगोलाई-बिनावास में भी यूरेनियम भंडार मिले हैं; अन्य प्रमुख स्रोतों में उमरा (उदयपुर) व भूणास (भीलवाड़ा) शामिल हैं।
☣️थोरियम
- भारत के थोरियम भंडार (दक्षिणी व पूर्वी तटों पर मोनाजाइट रेत के रूप में) विश्व में सबसे बड़े हैं, जिनमें आंध्रप्रदेश व केरल अग्रणी हैं; राजस्थान में यह पाली (भद्रावन, भीतवाड़ा) व सरदारपुरा (भीलवाड़ा) में मिलता है।
⬛ग्रेफाइट
- 'ब्लैक हेड' या 'मिनरल कार्बन' भी कहलाने वाले ग्रेफाइट के सर्वाधिक भंडार अरुणाचल प्रदेश में हैं, राजस्थान का स्थान आठवाँ है, और यह अजमेर, अलवर, बाँसवाड़ा व जोधपुर में पाया जाता है।
🧊बिस्मथ
- मुख्यतः चिकित्सा कार्यों में प्रयुक्त बिस्मथ के मुख्य अयस्क बिस्मथीनाइट व बिस्माइट हैं, जो झुंझुनूँ जिले के नोरदा से प्राप्त होते हैं।
अधात्विक व औद्योगिक खनिज
चमकते संगमरमर और विश्वप्रसिद्ध ग्रेनाइट से लेकर साँभर झील के नमक और दुर्लभ रत्न-श्रेणी के पत्थरों तक, राजस्थान के अधात्विक खनिज सीमेंट से लेकर कॉस्मेटिक्स तक कई उद्योगों को चुपचाप गति देते हैं।
⚪वोलेस्टोनाइट
- चमकीले सफेद रंग के वोलेस्टोनाइट के भारत के भंडारों का लगभग 89% राजस्थान में है, गुजरात कहीं पीछे दूसरे स्थान पर है; लगभग समूचा राष्ट्रीय उत्पादन राज्य से ही (मुख्यतः उदयपुर के खारतरला व कोटड़ा से) आता है।
🪨रॉक फॉस्फेट
- आरएसएमएमएल द्वारा झामरकोटड़ा (उदयपुर) और हिन्दुस्तान जिंक द्वारा माटोन में खनन किया जाने वाला रॉक फॉस्फेट अवसादी शैलों में मिलता है; उत्पादन में राजस्थान देश में प्रथम (मध्यप्रदेश दूसरे) स्थान पर है, जबकि भंडारों में झारखंड अग्रणी है, फिर राजस्थान व मध्यप्रदेश।
🧂जिप्सम व सेलेनाइट
- हरसौंठ भी कहलाने वाले जिप्सम की किस्मों में सेलेनाइट, अलाबास्टर व साटिन स्पर शामिल हैं; देश में सबसे बड़े जिप्सम भंडार व उत्पादन राजस्थान में हैं, और आरएसएमएमएल की बीकानेर स्थित बल्लार खान से पूरे राज्य का सेलेनाइट उत्पादन होता है।
- 'रक्त मणि' या फिरोजा कहलाने वाला रत्न-श्रेणी सेलेनाइट केवल राजस्थान में, बालोतरा जिले के थोब में मिलता है।
🧵एस्बेस्टॉस
- राजस्थान में क्राइसोटाइल (सबसे उत्तम किस्म) व ट्रेमोलाइट किस्म का एस्बेस्टॉस पाया जाता है, तथा एम्फीबोल किस्म मुख्यतः उदयपुर (ऋषभदेव, खैरवाड़ा, झाड़ेल) में मिलती है; भारत के सर्वाधिक भंडार राजस्थान में हैं, इसके बाद कर्नाटक।
🔷फेल्सपार
- राजस्थान फेल्सपार का देश में सबसे बड़ा उत्पादक व भंडारक दोनों है, जो सिरेमिक, काँच व टाइल अपघर्षक उद्योगों में प्रयुक्त होता है; अजमेर उत्पादन में अग्रणी है, भीलवाड़ा, ब्यावर व जयपुर का भी योगदान है।
🟣फ्लोर्सपार / फ्लोराइट
- फ्लोराइट की लोकप्रिय बैंगनी किस्म मुख्यतः लोहा-इस्पात उद्योग में प्रयुक्त होती है; वर्तमान में राष्ट्रीय उत्पादन में राजस्थान अग्रणी है (भंडार में गुजरात प्रथम, राजस्थान द्वितीय), 2023-24 में जालौर में सर्वाधिक उत्पादन हुआ - वहीं विश्व में चीन व मैक्सिको उत्पादन में आगे हैं।
⬜कैल्साइट
- 'कैल्क स्पार' या 'आइसलैंड स्पार' भी कहलाने वाला कैल्साइट आग्नेय, अवसादी व कायांतरित चट्टानों में मिलता है; भारत के भंडार व उत्पादन दोनों में राजस्थान अग्रणी है, यह पूरी तरह निजी क्षेत्र में होता है, तथा उदयपुर व सिरोही (विशेषकर पिंडवाड़ा तहसील की बेलका पहाड़ व खैरथला खानें) प्रमुख उत्पादक हैं।
✨अभ्रक
- अभ्रक ईंट उद्योग के केंद्र भीलवाड़ा में राजस्थान का सर्वाधिक अभ्रक उत्पादन होता है; 1 अप्रैल 2015 को भारत के सबसे बड़े अभ्रक भंडार आंध्रप्रदेश में थे, फिर राजस्थान व ओडिशा, पर 2020-21 तक राष्ट्रीय उत्पादन में राजस्थान ने आंध्रप्रदेश को पीछे छोड़ दिया।
🪨डोलोमाइट
- लोहा-इस्पात उद्योग डोलोमाइट का सबसे बड़ा उपभोक्ता है (चूना बनाने में भी प्रयुक्त); राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान भंडार में छठे व उत्पादन में पाँचवें स्थान पर है, राज्य में उदयपुर फिर राजसमंद अग्रणी हैं, तथा बाँसवाड़ा के गैनेर व मोजिन में नए भंडार मिले हैं।
🟨पाइराइट्स
- भारत के सर्वाधिक पाइराइट्स भंडार अमझोर (बिहार) व राजस्थान में हैं, और राष्ट्रीय उत्पादन मुख्यतः सीकर जिले के सलादीपुरा में केंद्रित है।
🔴गार्नेट
- टोंक में जेम गार्नेट के सर्वाधिक भंडार हैं, जबकि भीलवाड़ा एब्रेसिव गार्नेट के उत्पादन व भंडार में अग्रणी है; राजस्थान 2023-24 में एब्रेसिव गार्नेट उत्पादन में देश में प्रथम व 1.4.2020 को भंडार में पाँचवें स्थान पर था, इसकी खानें सरवाड़ (अजमेर), कोडुकोटा व कोचरिया (भीलवाड़ा) तथा टोंक में हैं।
⬛चूना पत्थर
- 'लाइमस्टोन डिस्ट्रिक्ट' कहलाने वाला चित्तौड़गढ़ सीमेंट ग्रेड में, जैसलमेर स्टील ग्रेड में और नागौर केमिकल ग्रेड में अग्रणी है; राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान सीमेंट व स्टील ग्रेड लाइमस्टोन उत्पादन में प्रथम और केमिकल ग्रेड में गुजरात के बाद द्वितीय स्थान पर है।
- जैसलमेर का जुरासिक युग का पीला लाइमस्टोन 'पीला मार्बल' भी कहलाता है, और प्रमुख खानों में निम्बेती (पाली, श्री सीमेंट), आदित्य (चित्तौड़गढ़, अल्ट्राटेक) व भाटकोटड़ी (चित्तौड़गढ़) शामिल हैं।
🟤वर्मीक्यूलाइट
- भारत के सर्वाधिक वर्मीक्यूलाइट भंडार तमिलनाडु, आंध्रप्रदेश व कर्नाटक में हैं, राजस्थान चौथे स्थान पर है; राज्य में यह हट्टूंडी, लच्छीपुरा व भोराज (अजमेर) तथा सिमलिया (बालोतरा) में मिलता है।
🧴टैल्क/स्टीटाइट/सोपस्टोन
- भीलवाड़ा के घेवरिया भंडार देश के सबसे बड़े एकल सोपस्टोन भंडार हैं, और जयपुर-दौसा सीमा पर स्थित झरना-डागोटा बेल्ट विश्वप्रसिद्ध है; फरवरी 2015 में 'लघु खनिज' घोषित इस खनिज के भंडार व उत्पादन दोनों में राजस्थान देश में प्रथम है (आंध्रप्रदेश द्वितीय)।
- राज्य के लगभग 45% उत्पादन का स्रोत सलूम्बर व उदयपुर हैं, और सलूम्बर-वेन-सन्जेला-लोहागढ़-पाडला-देवला बेल्ट राज्य की सबसे महत्वपूर्ण सोपस्टोन बेल्ट है।
🟫पाइरोफिलाइट
- 10 फरवरी 2015 को 'लघु खनिज' घोषित पाइरोफिलाइट के सबसे बड़े भंडार मध्यप्रदेश, ओडिशा व उत्तरप्रदेश में हैं, जबकि उत्पादन में राजस्थान व आंध्रप्रदेश अग्रणी हैं - इसके स्रोत भीलवाड़ा व उदयपुर हैं।
🔺कोरंडम व सेफायर
- फरवरी 2015 में कोरंडम को लघु खनिज घोषित किया गया (सेफायर अब भी मेजर मिनरल है); भारत के सर्वाधिक कोरंडम भंडार कर्नाटक, तेलंगाना फिर राजस्थान में हैं, टोंक जिले के जुआली गाँव में रूबी के भंडार मिलते हैं।
🏜️डायटोमाइट व सिलिसियस अर्थ
- 2019-20 में बाड़मेर व जैसलमेर जिलों में राजस्थान का सर्वाधिक सिलिसियस अर्थ उत्पादन हुआ; राष्ट्रीय स्तर पर भारत का सिलिसियस अर्थ मुख्यतः राजस्थान (72%) व गुजरात (28%) से आता है, इसकी खानें मोखब (बाड़मेर) व सजीत (जैसलमेर) में हैं।
🌾पोटाश
- भारत में अभी पोटाश का वाणिज्यिक उत्पादन नहीं होता, फिर भी देश के लगभग 89-95% पोटाश भंडार राजस्थान में हैं, मुख्यतः नागौर, चूरू, बीकानेर, हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर में।
- हनुमानगढ़ के सतीपुरा सब बेसिन के जोखिया साउथ व खुनजा नॉर्थ ब्लॉक में 2024 में 340 मिलियन टन पोटाश का भंडार मिला, जिसका मुख्य उपयोग उर्वरक के रूप में होता है।
🧱लैटेराइट
- भारत के सर्वाधिक लैटेराइट भंडार मध्यप्रदेश (55%) में हैं, राजस्थान लगभग 17% के साथ दूसरे स्थान पर है, इसका खनन मुख्यतः चित्तौड़गढ़, बाराँ व झालावाड़ में होता है।
🟠बेंटोनाइट
- 'ब्लीचिंग क्ले' भी कहलाने वाला बेंटोनाइट सोडियम बेंटोनाइट व कैल्सियम बेंटोनाइट (मुल्तानी मिट्टी) रूप में मिलता है; इसका सबसे बड़ा उपभोक्ता ऑयल वेल ड्रिलिंग उद्योग है।
- राजस्थान अब राष्ट्रीय बेंटोनाइट उत्पादन में अग्रणी है और भारत के लगभग 73% भंडार यहीं हैं (गुजरात 25% के साथ दूसरे स्थान पर), बाड़मेर राज्य का प्रमुख स्रोत है।
🏖️सिलिका रेत
- काँच उद्योग व धातु प्रगलन में प्रयुक्त सिलिका रेत के मामले में राजस्थान देश का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है, जिसमें जयपुर जिला अग्रणी है।
⬜संगमरमर
- किशनगढ़ भारत की प्रसिद्ध मार्बल मंडी है और राजनगर (राजसमंद) की खानों से सबसे अधिक मार्बल निकलता है; लघु खनिज श्रेणी में आने वाले मार्बल के सबसे बड़े भंडार व उत्पादन दोनों राजस्थान में हैं।
- राज्य में सफेद मार्बल मकराना, मोरवड़ व राजनगर से, हरा-काला डूँगरपुर व कोटा से, लाल धौलपुर से, पीला जैसलमेर से, बैंगनी बाँसवाड़ा से और नीला देसूरी (पाली) से प्राप्त होता है।
🪨ग्रेनाइट
- लघु खनिज ग्रेनाइट के सबसे बड़े भंडार कर्नाटक फिर राजस्थान में हैं, पर उत्पादन में राजस्थान भारत में सबसे आगे है और उत्तर भारत का यह एकमात्र राज्य है जहाँ इतने विविध रंगों में विशाल भंडार हैं - जालौर समग्र उत्पादन में अग्रणी है।
- गुलाबी व मरकरी लाल ग्रेनाइट सिवाणा-बालोतरा से, पीला पींथला (जैसलमेर) से और काला कालाडेरा (जयपुर) से मिलता है; ब्लैक/रंगीन ग्रेनाइट का सर्वाधिक उत्पादन राज्य में ही होता है।
🔷क्वार्ट्ज
- चीनी मिट्टी व इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में प्रयुक्त क्वार्ट्ज का सर्वाधिक राष्ट्रीय उत्पादन राजस्थान में होता है, जो चित्तौड़गढ़, सवाईमाधोपुर, बूँदी, भीलवाड़ा व दौसा से आता है।
🏺बॉलक्ले व फायरक्ले
- बीकानेर क्ले भी कहलाने वाली बॉलक्ले एक लघु खनिज है जिसके सबसे बड़े भंडार ओडिशा में हैं (राजस्थान छठे स्थान पर), मुख्य स्रोत बीकानेर, नागौर व पाली हैं; चमकदार पॉलिश, अपघर्षकता व श्यानता वाली फायरक्ले मुख्यतः बीकानेर, जैसलमेर व अलवर से मिलती है।
⬜चीनी मिट्टी (केओलिन)
- नीम का थाना में चीनी-मिट्टी की धुलाई का कारखाना है; 2019-20 में राजस्थान भारत के केओलिन उत्पादन में अग्रणी रहा, हालाँकि सबसे बड़े भंडार केरल में हैं, इसका स्रोत जयपुर, उदयपुर, बाड़मेर, सवाईमाधोपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, नागौर व बीकानेर है।
🧽मुल्तानी मिट्टी
- 'ब्लीचिंग क्ले' कहलाने वाली मुल्तानी मिट्टी के सबसे बड़े भंडार राजस्थान में हैं (तेलंगाना दूसरे स्थान पर), हालाँकि उत्पादन में तेलंगाना थोड़ा आगे है, फिर राजस्थान; राज्य में इसका मुख्य स्रोत बाड़मेर है।
🧂नमक (सोडियम क्लोराइड)
- नमक का खनिज रूप हेलाइट (रासायनिक नाम सोडियम क्लोराइड) है; भारत के लगभग 82% नमक उत्पादन का स्रोत समुद्री जल है, पर झीलों से नमक केवल राजस्थान में मिलता है, जहाँ अकेले साँभर झील देश के लगभग 8.7% उत्पादन में योगदान देती है।
- कुल सामान्य नमक उत्पादन में राजस्थान गुजरात व तमिलनाडु के बाद तीसरे और आयोडीन नमक में गुजरात के बाद दूसरे स्थान पर है; हिन्दुस्तान साल्ट्स लि. की स्थापना 1958 में जयपुर में हुई।
🟢पन्ना
- अजमेर के बुबानी-मुहामी से लेकर गमगुढ़ा-नाथद्वारा तक एक संकरी पट्टी में मखमली हरे रंग का बारीक पन्ना (एमराल्ड) मिलता है; जयपुर इसकी अंतरराष्ट्रीय कटाई मंडी है, और पन्ना भंडार में राजस्थान झारखंड के बाद देश में दूसरे स्थान पर है।
💠हीरा
- आग्नेय व किम्बरलाइट चट्टानों में मिलने वाला बहुमूल्य हीरा केसरपुरा (प्रतापगढ़) व मानपुरा से प्राप्त होता है।
⬛बेराइट्स
- बेराइट्स के उत्पादन व भंडारों में आंध्रप्रदेश (92% भंडार) के बाद राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर है, राज्य में इसका सर्वाधिक उत्पादन अलवर फिर रेलपातलिया (उदयपुर) से होता है, जहाँ राज्य के सबसे बड़े भंडार हैं।
🟫सैण्ड स्टोन व कोटा स्टोन
- सैण्डस्टोन के भंडार व उत्पादन दोनों में राजस्थान भारत में अग्रणी है - धौलपुर का गुलाबी और करौली का लाल-चित्तीदार सैण्डस्टोन विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं, जबकि कोटपूतली-बहरोड़ राज्य का प्रमुख स्लेट स्टोन उत्पादक है।
- कोटा जिले के नाम पर हरे-भूरे रंग का प्रसिद्ध कोटा स्टोन जाना जाता है।
🔵एक्वामैरीन व जास्पर
- हल्के नीले रंग का मूल्यवान पत्थर एक्वामैरीन मुख्यतः टोंक, तथा भीलवाड़ा व अजमेर में मिलता है; जास्पर जोधपुर के मथानिया, ओसियाँ, रूण्डिया सोपरा व मोगरा क्षेत्रों में पाया जाता है।
⚪मैग्नेसाइट
- भारत के सबसे बड़े मैग्नेसाइट भंडार उत्तराखंड व तमिलनाडु में हैं (राजस्थान तीसरे स्थान पर), उत्पादन में तमिलनाडु अग्रणी है; 2023-24 में राजस्थान में मैग्नेसाइट का कोई उत्पादन नहीं हुआ, और विश्व में सबसे बड़े भंडार रूस में हैं (भारत आठवें स्थान पर)।
पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस व ऊर्जा अवसंरचना
बाड़मेर के तेल क्षेत्रों व जैसलमेर के गैस बेसिनों ने राजस्थान को एक सच्चा ऊर्जा केंद्र बना दिया है, जिसके पास अपनी रिफाइनरी, पाइपलाइन नेटवर्क और विश्वस्तरीय खोजों की बढ़ती सूची है।
🛢️कच्चा तेल व गैस - राजस्थान की राष्ट्रीय स्थिति
- राजस्थान स्थलीय (ऑनशोर) प्राकृतिक गैस उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है और भारत के कुल कच्चे तेल उत्पादन में लगभग 12% योगदान देता है, यह भारत के 28.70 एमएमटीपीए वार्षिक उत्पादन में से लगभग 3.42 एमएमटीपीए योगदान करता है।
- 1 अप्रैल 2025 को कच्चे तेल के भंडारों में राजस्थान (136.46 एमटी, कुल का 20.30%) पश्चिमी ऑफशोर व असम के बाद देश में तीसरे स्थान पर था; 2024-25 के उत्पादन में यह पश्चिमी ऑफशोर, गुजरात व असम के बाद चौथे स्थान पर रहा, जिसका योगदान लगभग 12% (3428.5 टीएमटी) रहा।
🗺️राजस्थान के पेट्रोलियम बेसिन
- राज्य में लगभग 150,000 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले चार पेट्रोलियम-युक्त बेसिन हैं: राजस्थान शेल्फ (जैसलमेर) बेसिन, बाड़मेर-साँचौर बेसिन, बीकानेर-नागौर बेसिन, और कोटा, बाराँ, झालावाड़, धौलपुर व करौली में फैला विन्ध्यन बेसिन।
⛽बाड़मेर-साँचौर बेसिन व प्रमुख तेल क्षेत्र
- केयर्न वेदांता लिमिटेड ने बाड़मेर-साँचौर बेसिन में 38 तेल व गैस क्षेत्र चिन्हित किए हैं, जिनमें से लगभग 15 क्षेत्रों से लगभग 182 मिलियन बैरल के सिद्ध भंडार में से प्रतिदिन करीब 57,000-59,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन हो रहा है; अकेले मंगला क्षेत्र, जिसकी खोज 2004 में हुई और जिसे 29 अगस्त 2009 को राष्ट्र को समर्पित किया गया, देश के सबसे बड़े ऑनशोर कच्चे तेल प्रसंस्करण टर्मिनल का घर है।
- अन्य प्रमुख खोजों में ऐश्वर्या (खोज 2004, उत्पादन 23 मार्च 2013 से), भाग्यम (खोज 2004, उत्पादन 21 जनवरी 2012 से), गुढ़ा (शैल इंडिया द्वारा खोजा राज्य का पहला लाइट क्रूड ऑयल क्षेत्र) व सरस्वती (केयर्न एनर्जी द्वारा 2000-01 में खोजा, उत्पादन जुलाई 2011 से) शामिल हैं - रागेश्वरी क्षेत्र से 23 मार्च 2013 से राज्य में प्राकृतिक गैस का पहला वाणिज्यिक उत्पादन भी शुरू हुआ।
💨डांडेवाला गैस खोज (जैसलमेर)
- ऑयल इंडिया लिमिटेड ने जैसलमेर के डांडेवाला फील्ड में 'सानू फॉर्मेशन' में प्राकृतिक गैस के एक नए, समृद्ध स्रोत की खोज की है, जिसमें विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 75 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस संसाधन का अनुमान है; इस नए पे-जोन से वर्तमान में लगभग 25,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है।
🏭पचपदरा तेल रिफाइनरी, बालोतरा
- बालोतरा जिले के पचपदरा में एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) के तहत 9 एमएमटीपीए क्षमता की देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी-सह-पेट्रोकेमिकल परियोजना बन रही है - इस संयुक्त उद्यम में राजस्थान की 26% व एचपीसीएल की 74% हिस्सेदारी है। इसका शिलान्यास सोनिया गांधी ने 22 सितंबर 2013 को किया था और नरेंद्र मोदी ने 16 जनवरी 2018 को इसे पुनः शुरू किया।
- 79,459 करोड़ रुपए की संशोधित लागत वाली यह देश की पहली इको-फ्रेंडली रिफाइनरी होगी जो बीएस-6 ईंधन उपलब्ध कराएगी, और रिफाइनरी व पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स को एक ही स्थान पर जोड़ने वाली भारत की पहली परियोजना भी होगी; मूल रूप से 21 अप्रैल 2026 के लिए प्रस्तावित इसका उद्घाटन स्थल पर आग लगने के कारण स्थगित कर दिया गया।
🔧कच्चे तेल व गैस की पाइपलाइनें
- केयर्न द्वारा संचालित मंगला डवलपमेंट पाइपलाइन - विश्व की सबसे लम्बी व देश की पहली हीटेड कच्चे तेल पाइपलाइन - बाड़मेर से भोगात (जामनगर, गुजरात) तक लगभग 660-705 किमी लम्बी है, जिसका उद्घाटन 4 फरवरी 2009 को हुआ; बाड़मेर-पाली गैस पाइपलाइन तथा फोकस एनर्जी द्वारा बिछाई जा रही लंगतला-मेहसाणा गैस पाइपलाइन राज्य के गैस क्षेत्रों को राष्ट्रीय बाजारों से और जोड़ती हैं।
- विश्व की सबसे लम्बी एलपीजी पाइपलाइन जामनगर-लोनी पाइपलाइन (1414 किमी) को अटल बिहारी वाजपेयी ने 9 मई 2001 को राष्ट्र को समर्पित किया था, जो सिरोही, जयपुर व अजमेर से गुजरती है; 1987 में शुरू हुई हाजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (एचवीजे) पाइपलाइन भारत की पहली व सबसे लम्बी प्राकृतिक गैस पाइपलाइन है और यह राजस्थान की भी सेवा करती है।
🛣️ग्रीन लाइन हाइवे व खनिज हॉटस्पॉट
- भारतमाला परियोजना के तहत भटिंडा (पंजाब), पंचपदरा (बालोतरा) व जामनगर (गुजरात) रिफाइनरियों को जोड़ने वाला 1,316 किमी लम्बा 6-लेन 'ग्रीन लाइन हाइवे' बनाया जा रहा है, जो बीकानेर, नागौर, जोधपुर व बाड़मेर से होकर गुजरेगा; तेल व लिग्नाइट भंडारों की बदौलत बाड़मेर जिला देश की खनिज आधारित आर्थिक राजधानी बनता जा रहा है।
- भीलवाड़ा का शाहपुरा सीसा-जस्ता, चाँदी, ग्रेनाइट-मार्बल, लोहा, सोना व ताँबे के भंडारों का खजाना बनकर उभरा है - अकेले कोटड़ी के देवतलाई क्षेत्र के नए ब्लॉक से 600 किलो सोना व 25 लाख टन ताँबे के भंडार मिले हैं; करौली की हिण्डौन तहसील के खोहरा, डेडरोली, टोडपुरा व लिलोटी में भी लौह खनिज के बड़े भंडार मिले हैं।
🔥लिग्नाइट खनन
- 2025 में राजस्थान के पास भारत के लिग्नाइट भंडारों का 14.06% हिस्सा था - तमिलनाडु के बाद दूसरा स्थान - और उत्पादन में यह तमिलनाडु व गुजरात के बाद तीसरे स्थान पर रहा; राज्य के सबसे बड़े लिग्नाइट भंडार व उत्पादन का केंद्र बाड़मेर जिला है।
- आरएसएमएमएल की गिराल खान (1994 से बाड़मेर के थुम्बली में क्रियाशील) राजस्थान की पहली क्रियाशील ओपनकास्ट लिग्नाइट खान थी; बाड़मेर की कपूरड़ी व जालीपा खानें बाड़मेर लिग्नाइट माइनिंग कंपनी (BLMCL) द्वारा संचालित हैं (उत्पादन क्रमशः अक्टूबर 2011 व नवम्बर 2017 से), जबकि NLC इंडिया बीकानेर में बरसिंगसर ओपनकास्ट खान के साथ 250 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट भी चलाती है।