राजस्थान के प्रमुख उद्योग
Major Industries
रीको के औद्योगिक पार्कों और RIPS 2024 जैसी प्रोत्साहन योजनाओं से लेकर सदियों पुरानी सूती मिलों व नमक की क्यारियों तक - जानिए कैसे राजस्थान की अर्थव्यवस्था विनिर्माण, खनिज व कृषि-उद्योग पर टिकी है।
उद्योग विभाग, पंचवर्षीय योजनाएँ एवं बड़ी तस्वीर
आज़ादी के समय गिनी-चुनी मिलों से लेकर 350 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक - राजस्थान की औद्योगिक यात्रा के पीछे का प्रशासनिक ढाँचा और प्रमुख आँकड़े यहाँ प्रस्तुत हैं।
🏢उद्योग विभाग एवं जिला उद्योग केंद्र
- राजस्थान के गठन के समय राज्य में केवल 11 बड़े उद्योग थे - 7 सूती वस्त्र, 2 सीमेंट व 2 चीनी इकाइयाँ - तथा 207 फैक्ट्रियाँ पंजीकृत थीं; 31 मार्च 2025 तक यह संख्या बढ़कर 233 वृहद् उद्योगों तक पहुँच गई, जिनमें 1,57,759.09 करोड़ रु. का संचयी पूँजी निवेश हुआ और 1,89,012 लोगों को रोजगार मिला।
- जिला उद्योग केन्द्रों की स्थापना 1978 में मोरारजी देसाई की जनता पार्टी सरकार ने पाँचवीं पंचवर्षीय योजना के तहत केंद्र प्रवर्तित योजना के रूप में की थी, जिन्हें 2021 में 'जिला उद्योग एवं वाणिज्य केन्द्र' नाम दिया गया; आज राज्य में 43 ऐसे केन्द्र तथा सुजानगढ़, फालना, आबूरोड़, किशनगढ़, मकराना व नीमराना में 6 उपकेन्द्र कार्यरत हैं।
- 19 अगस्त 2021 को राज्य सरकार ने 'उद्योग विभाग' का नाम भी बदलकर 'उद्योग व वाणिज्य विभाग' कर दिया, जिसका प्रशासनिक प्रमुख 'आयुक्त, उद्योग एवं वाणिज्य एवं कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व' है।
📈पंचवर्षीय योजनाएँ एवं औद्योगिक प्राथमिकताएँ
- राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) महालनोबिस मॉडल पर आधारित थी और इसमें औद्योगिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सार्वजनिक क्षेत्र को अहम भूमिका दी गई, जबकि राजस्थान की तृतीय योजना में औद्योगिक अवसंरचना के विकास को प्राथमिकता दी गई; आठवीं योजना (1992-97) में परियोजना व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा - 5.3% - औद्योगिक विकास पर ही खर्च हुआ।
- राज्य की चारों प्रमुख औद्योगिक नीतियाँ श्री भैरोंसिंह शेखावत के मुख्यमंत्रित्व काल में घोषित हुईं; एमएसएमई डी एक्ट 2006 के तहत राज्य में अब 14 लघु व सूक्ष्म उद्यम सुविधा परिषदें कार्यरत हैं - 2 राज्य स्तर पर व 12 संभाग स्तर पर।
💰बजट 2026-27: उद्योग संबंधी घोषणाएँ
- बजट 2026-27 में निवेशकों को दी जाने वाली प्रोत्साहन प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल बनाने हेतु IFMS को RIPS पोर्टल से जोड़ने की घोषणा की गई, साथ ही टेक्सटाइल उद्योग के लिए 'Asset Creation Incentive' नामक एक नई पेरोल-सब्सिडी योजना भी घोषित हुई।
- हरित रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए राज्य में एक 'Energy Transition Skilling Cluster' विकसित किया जाएगा; राजस्थान ODOP-2024 के तहत विस्तार हेतु ऋण लेने वाली इकाइयों को 10% मार्जिन मनी सहायता का प्रस्ताव है, तथा स्थापना व विस्तार दोनों के लिए सूक्ष्म व लघु इकाइयों हेतु 15 करोड़ रु. का अलग प्रावधान भी रखा गया है।
📊आर्थिक समीक्षा 2024-25: GVA व IIP
- स्थिर (2011-12) मूल्यों पर उद्योग क्षेत्र का सकल मूल्यवर्धन (GVA) वर्ष 2011-12 के 1.36 लाख करोड़ रु. से बढ़कर 2025-26 में 2.48 लाख करोड़ रु. हो गया - 4.36% CAGR - जबकि प्रचलित मूल्यों पर यह उसी 1.36 लाख करोड़ रु. आधार से बढ़कर 4.54 लाख करोड़ रु. तक पहुँचा, यानी 8.98% CAGR।
- औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आधार वर्ष 2011-12=100) एक समग्र सूचकांक है जो चयनित औद्योगिक उत्पादों की उत्पादन मात्रा में अल्पकालिक बदलाव को मापता है; यह विनिर्माण, खनन व विद्युत - तीन वृहद समूहों पर आधारित है।
🏭भारत में औद्योगिक सर्वेक्षण 2023-24 (ASI)
- उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार की ASI 2023-24 रिपोर्ट, जो 27 अगस्त 2025 को जारी हुई, के अनुसार राजस्थान में 10,868 फैक्ट्रियाँ पंजीकृत हैं जिनमें से 9,760 क्रियाशील हैं - देश की कुल का 4.58% - इस आधार पर राज्य का देश में 9वाँ स्थान है।
- इन फैक्ट्रियों में कार्यरत कुल व्यक्तियों की संख्या 6.53 लाख है, जो देश की कुल का 3.80% है और राज्यों में 11वाँ स्थान है; फैक्ट्रियों की संख्या व कार्यरत व्यक्ति दोनों में तमिलनाडु देश में प्रथम स्थान पर है।
🚢रीको एवं राज्य का निर्यात
- रीको अब तक 445 औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर चुका है; अकेले 2025-26 में (दिसम्बर तक) 19 नए क्षेत्र जोड़े गए और 7,654.63 एकड़ भूमि अधिगृहीत की गई; इंजीनियरिंग वस्तुएँ, रत्न व आभूषण, धातु, वस्त्र व हस्तशिल्प राज्य की शीर्ष पाँच निर्यातक श्रेणियाँ हैं, जो कुल निर्यात के 67% से अधिक हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।
- राजस्थान का निर्यात 2023-24 के 83,704.24 करोड़ रु. से बढ़कर 2024-25 में 97,171.66 करोड़ रु. हो गया, यानी 16.09% की वृद्धि; 2023-24 में भारत के कुल निर्यात में राज्य का हिस्सा 2.31% रहा और यह गुजरात, महाराष्ट्र व तमिलनाडु के बाद देश में 10वें स्थान पर रहा; जयपुर, जोधपुर व उदयपुर राज्य के शीर्ष निर्यातक जिले हैं।
औद्योगिक एवं निवेश नीतियाँ
राज्य की एक के बाद एक बनी नई नीतियाँ अब क्षेत्र-दर-क्षेत्र यह तय करती हैं कि किसी निवेशक को क्या प्रोत्साहन मिलेगा - कारखानों और स्टार्टअप्स से लेकर निर्यातकों और प्रवासी राजस्थानियों तक।
🎯विजन 'विकसित राजस्थान @2047' एवं औद्योगिक विकास नीति
- विजन स्टेटमेंट 'विकसित राजस्थान @2047' के अनुसार राज्य वर्ष 2047 तक MSME, पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण व न्यूनतम नियामक बाधाओं पर विशेष बल देते हुए समावेशी व प्रौद्योगिकी-संचालित औद्योगिकीकरण के जरिए भारत का अग्रणी औद्योगिक व निवेश केंद्र बनने का लक्ष्य रखता है।
- इसी विजन के अनुरूप 22 मई 2026 को मंत्रिमंडल ने नई राजस्थान औद्योगिक विकास नीति को मंजूरी दी; यह चार रणनीतिक स्तंभों - ग्रीन, गवर्नेंस, ग्रोथ व ग्लोबलाइजेशन (4G) - पर टिकी है, जिसका मुख्य लक्ष्य राज्य की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2028-29 तक 350 अरब डॉलर तक पहुँचाना है।
💵RIPS 2024 - राजस्थान निवेश प्रोत्साहन योजना
- RIPS 2024, 8 अक्टूबर 2024 से प्रभावी है और 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी; मुख्यमंत्री ने इसका अनावरण 17 अक्टूबर 2024 को लंदन में आयोजित रोड शो के दौरान 'Enabling Green, Global & Capable Rajasthan' थीम के साथ किया।
- इसमें 7 प्राथमिकताएँ हैं - विनिर्माण, सेवाएँ, सूर्योदय क्षेत्र, MSME, स्टार्टअप, औद्योगिक अवसंरचना व अनुसंधान-विकास तथा GCC व परीक्षण प्रयोगशालाएँ - साथ ही हरित विकास, निर्यात संवर्धन व क्षमता विकास संबंधी 3 राज्य प्राथमिकताएँ; न्यूनतम निवेश सीमा विनिर्माण के लिए 50 करोड़ रु. व MSME के लिए 25 करोड़ रु. रखी गई है।
- MSME इकाइयों को 10 वर्षों तक 75% तक SGST प्रतिपूर्ति व 7 वर्षों तक 6% ब्याज अनुदान मिलता है, जबकि राज्य सरकार स्थानीय कर्मचारियों के EPF/ESI अंशदान का 50% वहन करती है - यदि नियोक्ता के 75% कर्मचारी स्थानीय हों तो यह 100% हो जाता है; पूर्ववर्ती RIPS-2022, 31 मार्च 2027 तक वैध बनी हुई है।
🏗️औद्योगिक पार्क प्रोत्साहन नीति-2026
- 6 मार्च 2026 से पाँच वर्षों (या नई नीति आने तक) के लिए प्रभावी यह नीति विश्वस्तरीय औद्योगिक पार्कों के विकास, निवेश वृद्धि व बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन का लक्ष्य रखती है, जो प्रधानमंत्री मोदी के 'राइजिंग, रिलायबल एंड रिस्पॉन्सिव भारत' विजन के अनुरूप है।
- पात्रता के लिए न्यूनतम 50 एकड़ क्षेत्रफल व कम से कम 10 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना आवश्यक है; आधारभूत ढाँचे के लिए 20% पूँजी अनुदान दिया जाता है, जिसका वित्तपोषण राज्य सरकार व रीको के बीच 50:50 बँटा है, साथ ही CETP लागत की 50% (अधिकतम 12.5 करोड़ रु. प्रति पार्क) की हरित प्रोत्साहन राशि भी मिलती है।
🛒राजस्थान ट्रेड प्रमोशन पॉलिसी, 2025
- 3 दिसंबर 2025 को मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत, 7 दिसंबर से लागू, 10 दिसंबर को लॉन्च तथा 30 जनवरी 2026 को अधिसूचित यह नीति सूक्ष्म व्यापार उद्यमों सहित लगभग 10.5 लाख खुदरा व्यापारियों को रियायती दरों पर संस्थागत ऋण दिलाने का लक्ष्य रखती है।
- नई सूक्ष्म व्यापार इकाइयों को 1 करोड़ रु. तक के ऋण पर 6% ब्याज अनुदान (1-2 करोड़ रु. पर 4%), CGTMSE गारंटी शुल्क की 5 वर्षों तक 50% प्रतिपूर्ति तथा एक वर्ष तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म शुल्क की 75% प्रतिपूर्ति मिलती है; महिलाओं, अनुसूचित जाति/जनजाति व दिव्यांग स्वामित्व वाली इकाइयों को 1% अतिरिक्त ब्याज अनुदान मिलता है।
🚚राजस्थान लॉजिस्टिक्स पॉलिसी, 2025
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 31 मार्च 2025 को राजस्थान दिवस समारोह के दौरान यह नीति जारी की (मंत्रिमंडल स्वीकृति 4 फरवरी 2025); इसका लक्ष्य वर्ष 2030 तक 350 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था तथा राज्य को लॉजिस्टिक्स हब बनाना है, जिसके पीछे राज्य के 9 इनलैंड कंटेनर डिपो, 7 हवाई अड्डे, एक एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स तथा देश का तीसरा सबसे बड़ा राजमार्ग व दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क आधार हैं।
- वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज, ICD व ड्राई पोर्ट को 5-50 करोड़ रु. के निवेश पर दस वर्षों तक 25% तक पूँजी सब्सिडी मिलती है, निजी लॉजिस्टिक्स पार्क डेवलपर्स को 7 वर्षों तक 7% ब्याज अनुदान मिलता है, तथा ETP/CETP व अपशिष्ट-रीसाइक्लिंग लागत की 50% (अधिकतम 12.5 करोड़ रु.) की हरित प्रोत्साहन राशि दी जाती है - ये सभी लाभ RIPS-2024 के अनुरूप हैं।
🧵राजस्थान वस्त्र एवं परिधान नीति, 2025
- 4 फरवरी 2025 को अनुमोदित व 31 मार्च 2029 तक प्रभावी यह नीति 'सूती से समृद्धि' और 'फाइबर से फैशन तक' के दृष्टिकोण पर आधारित है; इसका लक्ष्य पाँच वर्षों में 10,000 करोड़ रु. का निवेश आकर्षित करना व 2 लाख अतिरिक्त रोजगार सृजित करना है; पहली बार इसमें गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग को भी शामिल किया गया है, राज्य में पहले से कार्यरत 1,800 से अधिक वस्त्र-परिधान इकाइयों के साथ।
- इसमें 10 वर्षों तक 80 करोड़ रु. तक का वार्षिक पूँजी सृजन प्रोत्साहन, स्टाम्प शुल्क में लगभग 75% छूट व 25% प्रतिपूर्ति, 7 वर्षों तक विद्युत शुल्क में 100% छूट, तथा राज्य के ICD या एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स से निर्यात पर 25% (अधिकतम 25 लाख रु.) फ्रेट सब्सिडी जैसे लाभ शामिल हैं।
📦राजस्थान निर्यात संवर्द्धन नीति, 2024
- 8 दिसंबर 2024 को अधिसूचित व 31 मार्च 2029 तक प्रभावी यह नीति राज्य के उत्पादों व सेवाओं को वैश्विक बाजारों से जोड़ने तथा 2029 तक निर्यात को 1.5 लाख करोड़ रु. तक पहुँचाने का लक्ष्य रखती है; यह PUSH फ्रेमवर्क पर आधारित है - मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन, अवसंरचना का उन्नयन, निर्यात प्रक्रिया का सरलीकरण व डिजिटल तकनीक का सशक्तीकरण।
- निर्यातकों को दो वर्ष में एक बार विदेशी व्यापार मेलों में भागीदारी पर 75% प्रतिपूर्ति (आवागमन हेतु अधिकतम 3 लाख रु.), उत्पाद प्रमाणीकरण पर 75% प्रतिपूर्ति, तथा प्रौद्योगिकी उन्नयन पर 75% प्रतिपूर्ति (24 मई 2026 से अधिकतम सीमा 50 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रु.) मिलती है; 'लोकल टू ग्लोबल' अवधारणा के तहत ब्रांडिंग व मार्केटिंग हेतु एक विशेष निर्यात विकास कोष भी बनाया गया है।
🌍राजस्थान की प्रवासी राजस्थानी नीति, 2025
- 10 दिसंबर 2025 को जारी व 23 दिसंबर 2025 से लागू यह नीति विश्वभर में बसे राजस्थानी प्रवासियों के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक व आर्थिक संबंध सुदृढ़ करने तथा राजस्थान को विशिष्ट वैश्विक पहचान देने के उद्देश्य से बनाई गई है; यह A से E तक पाँच प्रमुख स्तंभों पर आधारित है।
✈️राजस्थान एयरो स्पेस एवं डिफेंस पॉलिसी 2026
- वाणिज्य व उद्योग विभाग द्वारा 12 मार्च 2026 को अधिसूचित तथा मुख्यमंत्री द्वारा 18 मार्च 2026 को लॉन्च की गई यह नीति रक्षा व अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने और राजस्थान को एयरोस्पेस-डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए है; यह 5 वर्षों तक प्रभावी रहेगी।
- पात्र विनिर्माण इकाइयों को न्यूनतम 50 करोड़ रु. तथा MSME को न्यूनतम 25 करोड़ रु. का निवेश करना होगा; आयुक्त, उद्योग व वाणिज्य विभाग इसका नोडल प्राधिकरण है।
♻️अन्य क्षेत्रीय नीतियाँ
- राजस्थान वाहन स्क्रैपिंग नीति-2025, 2 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2029 तक लागू है और सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट के आधार पर नए वाहन की खरीद पर मोटर वाहन कर में 50% तक (अधिकतम 1 लाख रु.) की छूट देती है; इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 1 सितम्बर 2022 से पाँच वर्षों के लिए प्रभावी है।
- बौद्धिक सम्पदा अधिकार नीति लागू करने वाला राजस्थान देश का दूसरा राज्य बना; यह 9 मार्च 2021 से प्रभावी है; जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विकास हेतु राजस्थान जैव प्रौद्योगिकी नीति, 2015, 4 अक्टूबर 2015 को जारी की गई थी।
निवेश प्रोत्साहन, संस्थाएँ एवं अवसंरचना
इन नीतियों के पीछे समिट्स, पोर्टल्स, वित्तीय संस्थाओं व भौतिक अवसंरचना का एक कार्यशील तंत्र है जो निवेश की मंशा को धरातल पर वास्तविक कारखानों में बदलता है।
🌐राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट, 2024
- 9-11 दिसंबर 2024 को जेईसीसी, जयपुर में आयोजित इस समिट में 32 देशों ने भाग लिया (17 पार्टनर कंट्री व 15 पार्टिसिपेटिंग कंट्री); इसका आयोजन उद्योग व वाणिज्य विभाग ने ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन (BIP) व रीको के साथ किया, और 35 लाख करोड़ रु. से अधिक के एमओयू हुए।
- कुल 35,30,225 करोड़ रु. के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनमें से दिसंबर 2025 तक 8,01,048 करोड़ रु. के निवेश की ग्राउंड-ब्रेकिंग हो चुकी थी; सर्वाधिक प्रस्ताव ऊर्जा क्षेत्र में (28,27,421 करोड़ रु.) आए, इसके बाद उद्योग क्षेत्र (2,25,575 करोड़ रु.) का स्थान रहा; निवेशकों की सुविधा हेतु 'सिंगल प्वॉइंट इनवेस्टर इंटरफेस' भी लॉन्च किया गया।
🏳️राजस्थान फाउंडेशन, DORA एवं प्रवासी राजस्थानी दिवस
- देश-विदेश में बसे राजस्थानियों से निरंतर संवाद हेतु डिपार्टमेंट ऑफ डोमेस्टिक एंड ओवरसीज राजस्थानी अफेयर्स (DORA) का गठन किया गया; राजस्थान फाउंडेशन के वर्तमान में 26 सक्रिय चैप्टर हैं तथा दक्षिण अफ्रीका, बहरीन, कुवैत, ओमान, न्यूजीलैंड व कनाडा सहित पंजाब व केरल जैसे भारतीय राज्यों में 14 नए चैप्टर खोलने की योजना है।
- प्रथम प्रवासी राजस्थानी दिवस 10 दिसंबर 2025 को जेईसीसी, सीतापुरा में 'Connect, Collaborate, Contribute' थीम के साथ मनाया गया, जिससे पहले हैदराबाद, सूरत व कोलकाता में क्षेत्रीय मीट आयोजित हुई थीं; नौ गणमान्य व्यक्तियों को प्रवासी राजस्थानी सम्मान मिला, तथा इस आयोजन में प्रवासी राजस्थानी नीति, ट्रेड प्रमोशन नीति व ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर नीति के साथ RDS पोर्टल भी लॉन्च हुआ।
⚖️ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधार
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के मामले में राजस्थान केंद्र सरकार द्वारा चिह्नित सभी 23 प्राथमिक क्षेत्रों में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है तथा पूरी निवेश प्रक्रिया को कागज-रहित व ऑनलाइन बना दिया गया है; MSME हेतु भूमि रूपांतरण स्वीकृति समयसीमा 60 से घटाकर 30 कार्यदिवस की गई, तथा CTE/CTO की समयसीमा 120 दिनों से घटाकर 21 दिन (रेड व वृहद् श्रेणी के लिए 60 दिन) कर दी गई।
- अप्रदूषणकारी 'व्हाइट कैटेगरी' उद्योगों की सूची 104 से बढ़ाकर 877 सेक्टर की गई, शॉप्स एंड कॉमर्शियल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट में कर्मचारी सीमा 0 से बढ़ाकर 10 की गई, तथा 'राजस्थान जन विश्वास अध्यादेश, 2025' के जरिए कई आपराधिक प्रावधानों को आर्थिक दंड से बदलकर व्यापार को सुगम व अपराध को कम किया गया।
🏅BRAP एवं DPIIT रैंकिंग
- बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) प्रतिवर्ष DPIIT, भारत सरकार द्वारा राज्यों के लिए जारी किया जाता है; BRAP-2024 (क्रियान्वयन अवधि 1 फरवरी 2024 से 30 अप्रैल 2025) में राजस्थान को 'Business Entry, Labour Regulation Enablers, Environment Registration and Services Sector' श्रेणी में टॉप अचीवर्स अवॉर्ड मिला, तथा BRAP-2026 15 नवंबर 2025 से 15 जुलाई 2026 तक क्रियान्वित किया जा रहा है।
💻राज निवेश पोर्टल एवं बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट
- राज निवेश पोर्टल ('वन स्टॉप शॉप') की स्थापना निवेश संवर्द्धन ब्यूरो ने एकल खिड़की प्रणाली को सुदृढ़ करने हेतु की; 2 मई 2024 को एकल खिड़की व्यवस्था तथा वन स्टॉप शॉप पोर्टल को 'राजनिवेश' नाम से एकीकृत किया गया, जिस पर अब 19 विभागों की 181 सेवाएँ जुड़ी हैं।
- मुख्य सचिव (राज्य स्तर) व जिला कलेक्टर (जिला स्तर) की अध्यक्षता में एक विवाद निवारण तंत्र (DRM) निवेशकों की शिकायतों का समाधान करता है, जबकि 100 करोड़ रु. या अधिक के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी देने हेतु मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में 'बोर्ड ऑफ इन्वेस्टमेंट' (BIO) का गठन 3 नवंबर 2020 को किया गया।
🏘️रीको - राज्य की औद्योगिक क्षेत्र विकास एजेंसी
- रीको की उत्पत्ति राजस्थान उद्योग व खनिज विकास निगम (RIMDC, स्थापना 28 मार्च 1969) से हुई, जिसका 1979 में विभाजन कर राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम (27 सितंबर 1979) व रीको (1 जनवरी 1980) बनाए गए।
- करौली, सवाईमाधोपुर, धौलपुर, बाराँ, प्रतापगढ़, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर व सिरोही जैसे पिछड़े व जनजाति बाहुल्य जिलों को लक्षित योजनाओं के जरिए रीको ने कम विकसित क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित किया है, और दिसंबर 2025 तक राज्यभर में कुल 445 औद्योगिक क्षेत्र विकसित कर चुका है।
🏦राजस्थान वित्त निगम (RFC)
- RFC की स्थापना राज्य वित्त निगम अधिनियम, 1951 के तहत 17 जनवरी 1955 को हुई; इसका मुख्यालय उद्योग भवन, जयपुर में है और अधिकृत अंश पूँजी 500 करोड़ रु. है; यह उद्योगों की स्थापना, विस्तार व आधुनिकीकरण हेतु 20 करोड़ रु. तक का ऋण देता है।
🏛️सार्वजनिक उपक्रम
- सार्वजनिक उपक्रम वह होता है जिसकी प्रदत्त पूँजी का 50% या अधिक हिस्सा सरकार के पास होता है; राजस्थान का राजकीय उपक्रम ब्यूरो, जिसकी स्थापना सितंबर 1984 में हुई, अब 34 राज्य सरकारी उपक्रम इकाइयों की देखरेख करता है, जो वैधानिक बोर्ड/निगम (जैसे RFC), कंपनी अधिनियम के तहत कंपनियाँ (जैसे रीको), या विभागीय उपक्रमों के रूप में चलते हैं।
- 1 जुलाई 1956 को राज्य द्वारा अधिगृहीत राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स को राज्य सरकार का प्राचीनतम सार्वजनिक उपक्रम माना जाता है; 1978 में जयपुर में स्थापित व बाद में बंद हो चुकी राजस्थान ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लि. को राज्य सरकारी कंपनी के रूप में पुनर्जीवित करने की घोषणा 17 मार्च 2023 को हुई।
🆓विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ)
- राजस्थान ने राष्ट्रीय सेज कानून के परिपक्व होने से पहले ही 13 मार्च 2003 को अपनी सेज नीति जारी कर दी थी, और राजस्थान सेज विधेयक 6 अप्रैल 2015 को विधानसभा में पारित हुआ; रीको ने सीतापुरा, जयपुर में दो सेज स्थापित किए - जेम्स एंड ज्वैलरी प्रथम व द्वितीय (अब बहुउत्पाद सेज) - जहाँ जेम्स बोर्स हेतु भूमि भी दी गई है।
- निजी क्षेत्र में महेन्द्रा ग्रुप ने रीको के साथ संयुक्त उपक्रम में बहुउत्पाद सेज 'महेन्द्रा वर्ल्ड सिटी (जयपुर) लि.' की स्थापना की है, जबकि धौलपुर में एक सैनिक समूह द्वारा मल्टी प्रोडक्ट सेज स्थापित किए जाने की योजना है।
⚓शुष्क बंदरगाह एवं इनलैंड कंटेनर डिपो
- रीको ने राज्य का पहला एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स सांगानेर हवाई अड्डा, जयपुर में 1979 में स्थापित किया था; वर्तमान में यह जयपुर, भीलवाड़ा व जोधपुर के ICD में ड्राई पोर्ट सुविधा देता है, तथा उदयपुर, बीकानेर व पचपदरा (बालोतरा) में नए एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स प्रस्तावित हैं।
- CONCOR खाटूवास व मन्थान (नीमराणा) में ICD संचालित करता है, केंद्रीय भण्डारण निगम 1998 से उदयपुर व कोटा में कंटेनर फ्रेट स्टेशन चला रहा है, तथा अडानी समूह ने सांचौर के भवतड़ा गाँव में सूखा बंदरगाह बनाने का प्रस्ताव रखा है।
🛤️दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC)
- जापान के सहयोग से दिसंबर 2006 के समझौते के तहत विकसित पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर दादरी से जवाहरलाल नेहरू पोर्ट तक 1,504 किमी लंबा है; राजस्थान से इसका सबसे बड़ा हिस्सा - करीब 39% (लगभग 568 किमी) - जयपुर, अजमेर व पाली सहित 9 जिलों से गुजरता है, जबकि व्यापक DMIC औद्योगिक कॉरिडोर राज्य के 28 जिलों से होकर गुजरता है और फरवरी 2020 में इसका नाम बदलकर NICDC लि. कर दिया गया।
- राजस्थान में DMIC के तहत 5 नोड्स चिह्नित किए गए हैं, जिनमें 165.6 वर्ग किमी का खुशखेड़ा-भिवाड़ी-नीमराणा निवेश क्षेत्र (KBNIR, 43 गाँव) व जोधपुर-पाली-मारवाड़ औद्योगिक क्षेत्र (अधिसूचना 12 अक्टूबर 2020) शामिल हैं, दोनों में रीको विकास प्राधिकरण है; 27 फरवरी 2018 को गठित भिवाड़ी इंटीग्रेटेड विकास प्राधिकरण (बीडा) भिवाड़ी इंटीग्रेटेड टाउनशिप को 1 लोकसभा व 5 विधानसभा क्षेत्रों में कवर करता है।
🎓विशेष संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र
- CIPET (केंद्रीय पेट्रो रसायन इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान) की शुरुआत 1968 में चेन्नई में UNDP के सहयोग से हुई थी और इसे यह नाम 2020 में मिला; इसका जयपुर परिसर, जो 2006 में सीतापुरा में केंद्र-राज्य की 50:50 साझेदारी से बना, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 'सिपेट' के रूप में 30 सितंबर 2021 को उद्घाटित हुआ।
- NIFT का जोधपुर परिसर ग्राम करवड़ में 2010 में स्थापित हुआ, ग्वारगम व हस्तशिल्प के लिए ब्रह्मगुप्त अनुसंधान एवं विकास केंद्र बोरानाड़ा, जोधपुर में बनाया जा रहा है, और वास्तुकार प्रमोद जैन द्वारा डिज़ाइन किया गया राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (RIC) झालाना, जयपुर में 17 अप्रैल 2023 को लोकार्पित हुआ।
🎪प्रमुख आयोजन, मेले एवं हरित पहलें
- इंडिया स्टोन मार्ट 2026, 5-8 फरवरी 2026 को जेईसीसी, सीतापुरा में हुआ, जिसमें पहली बार 26 से अधिक अंतरराष्ट्रीय भाषाओं में वेबसाइट व एक समर्पित 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट पेवेलियन' रहा; ज्वैलरी एसोसिएशन शो 2025, 4-6 जुलाई 2025 को 'Connect to Source' थीम पर हुआ, जिसने जयपुर की 'विश्व की रत्न राजधानी' पहचान को और मजबूत किया।
- 30 दिसंबर 2025 को मंत्रिमंडल-स्वीकृत ग्रीन क्रेडिट वाउचर इनिशिएटिव-2025 के तहत RIPS-2024 के हरित प्रोत्साहन पाने वाले निवेशकों को 1 करोड़ रु. तक के हरित निवेश पर 5% व 10 करोड़ रु. से अधिक पर 10% (अधिकतम 2.5 करोड़ रु.) मूल्य के वाउचर मिलते हैं; नीति आयोग के निर्यात तैयारी सूचकांक (EPI) 2024 में राजस्थान को 47.31 स्कोर के साथ 'आकांक्षी' श्रेणी में रखा गया, जो 17 बड़े राज्यों में 15वें स्थान पर है।
- जयपुर में 19,880 वर्गमीटर भूमि पर 'मेक इन इंडिया' व ODOP के तहत स्वदेशी उत्पादों को प्रदर्शित करने हेतु एक यूनिटी मॉल बन रहा है, जिसके लिए केंद्र ने 202 करोड़ रु. स्वीकृत किए हैं और रीको क्रियान्वयन एजेंसी है; रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना, जो 15 मार्च 2025 से प्रभावी है और 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ाई गई है, आरक्षित दरों पर औद्योगिक भूखंड देती है और इसके 10वें चरण की ई-लॉटरी 19 मई 2026 को हुई।
कृषि-आधारित एवं परंपरागत उद्योग
सूती वस्त्र, ऊन, गन्ने की चीनी, खाद्य तेल, दूध व चमड़ा - राजस्थान की सबसे पुरानी फैक्ट्रियाँ आज भी उन्हीं चीजों पर चलती हैं जो इसके खेत व चरागाह पैदा करते हैं।
🧶सूती वस्त्र उद्योग
- सूती वस्त्र उद्योग राजस्थान का सबसे पुराना उद्योग है और यहाँ सर्वाधिक रोजगार देता है; राज्य की पहली मिल 'दी कृष्णा मिल लि.' सेठ दामोदर दास ने 17 जून 1889 को ब्यावर में स्थापित की, इसके बाद ब्यावर में ही एडवर्ड मिल्स (1906) व महालक्ष्मी मिल्स (1925) तथा भीलवाड़ा में मेवाड़ टेक्सटाइल मिल्स (1935) स्थापित हुईं।
- राज्य में आज 23 सूती मिलें कार्यरत हैं - 17 निजी, 3 सार्वजनिक व 3 सहकारी क्षेत्र में; एल.एन. झुनझुनवाला द्वारा स्थापित RSWM लि. की सात कस्बों में इकाइयाँ हैं, जबकि महाराजा उम्मेद मिल्स, पाली (1939) को सबसे बड़ी मिल तथा कार्यशील करघों की दृष्टि से कृष्णा मिल्स, ब्यावर को सबसे बड़ी माना जाता है।
- 'वस्त्र नगरी' व 'राजस्थान के मानचेस्टर' के उपनाम से मशहूर भीलवाड़ा को 'टाउन ऑफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस फॉर टेक्सटाइल' व 'वस्त्र निर्यातक नगर' (2009) घोषित किया गया; 1,500 से अधिक फैक्ट्रियों के साथ राज्य पॉलिएस्टर विस्कोस यार्न व ऊन उत्पादन में देश में अग्रणी तथा कपास उत्पादन में चौथे स्थान पर है, जबकि कोटा-बूँदी-बाराँ की मशहूर कोटाडोरिया साड़ियाँ व पाली-बालोतरा-सांगानेर-बगरू के रंगाई-छपाई क्लस्टर उद्योग के नक्शे को पूरा करते हैं।
🐑ऊनी वस्त्र एवं गलीचा उद्योग
- राजस्थान भारत की कुल ऊन का 40-45% उत्पादित करता है, जिसके प्रमुख केंद्र बीकानेर, जोधपुर व ब्यावर हैं; अकेले जैसलमेर, बाड़मेर व बीकानेर देश की 30% से अधिक ऊन आपूर्ति पूरी करते हैं; जयपुर, अलवर, टोंक, जोधपुर, बीकानेर व जैसलमेर में गलीचा उद्योग फला-फूला है, तथा मालपुरा के ऊनी 'नमदे' विश्वप्रसिद्ध हैं।
- बीकानेर में एशिया की सबसे बड़ी ऊन मंडी तथा केंद्रीय ऊन विश्लेषण प्रयोगशाला (1965) दोनों स्थित हैं; अविकानगर, मालपुरा (टोंक) में केंद्रीय भेड़ व ऊन अनुसंधान संस्थान की स्थापना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने 1962 में की, तथा केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड की स्थापना 1987 में जोधपुर में हुई।
🍬चीनी उद्योग
- चीनी उद्योग सूती वस्त्र के बाद राजस्थान का दूसरा प्रमुख कृषि आधारित उद्योग है, जो मुख्यतः गंगानगर, चित्तौड़गढ़ व बूँदी के गन्ने पर चलता है; राज्य में केवल तीन चीनी मिलें हैं, और दी मेवाड़ शुगर मिल, भोपालसागर (चित्तौड़गढ़, 1932) को पहली माना जाता है, हालाँकि इसकी शुरुआत मुश्किल रही - मूल 'मेवाड़ इंडस्ट्रीज लि.' में उत्पादन शुरू ही नहीं हो सका और इसे धांदणिया बंधुओं को बेचा गया, जिन्होंने 1940 में इसे 'मेवाड़ शुगर मिल्स' के रूप में फिर से शुरू किया।
- राजस्थान स्टेट गंगानगर शुगर मिल्स (RSGSM), जो मूलतः बीकानेर इंडस्ट्रियल कॉर्पोरेशन (1945) थी, को 1 जुलाई 1956 को राज्य ने अधिगृहीत किया, जिससे यह राजस्थान का प्राचीनतम सार्वजनिक उपक्रम बनी; चीनी के अलावा यह रॉयल हैरिटेज लिकर ब्रांड बनाने वाली 17 मदिरा भट्टियाँ भी चलाती है, तथा 2016 में इसका संयंत्र गंगानगर शहर से चक 23-एफ (कमीनपुरा) स्थानांतरित हुआ।
🫒वनस्पति घी एवं खाद्य तेल उद्योग
- वनस्पति घी (हाइड्रोजनीकृत तेल) राज्य का तीसरा प्रमुख कृषि आधारित उद्योग है; इसकी पहली फैक्ट्री 1964 में भीलवाड़ा में खुली, इसके बाद जयपुर, चित्तौड़गढ़ व उदयपुर में इकाइयाँ लगीं; भरतपुर का सरसों तेल, विशेषकर 'इंजन ब्रांड', देशभर में प्रसिद्ध है, तथा मूँगफली, तिल, सरसों, तारामीरा व सूरजमुखी की ऑयल प्रोसेसिंग इकाइयाँ अधिकांश जिलों में हैं।
🌶️अन्य कृषि आधारित उद्योग
- ग्वार गम के दानों में 28-30% गोंद होता है, जो कपड़ा, दवा, खाद्य व सौंदर्य प्रसाधन उद्योगों में उपयोग होता है; राजस्थान की जीरा, मिर्च, धनिया, मेथी, सौंफ व अजवायन जैसी मसाला उपज को जोधपुर के रामपुरा भाटियान स्थित राज्य के पहले व भारत के तीसरे मसाला पार्क तथा रामगंज मंडी, कोटा के दूसरे मसाला पार्क में प्रोसेस किया जाता है।
- जर्मन कंपनी 'डॉ. ओएटकर' ने खैरथल-तिजारा जिले के कहरानी में दुनिया की सबसे बड़ी चटनी बनाने वाली इकाई लगाई है; वनस्पति तेल, पशु वसा व अपशिष्ट खाना पकाने के तेल से बनने वाले बायोडीजल को राजस्थान बायोफ्यूल प्राधिकरण बढ़ावा देता है, जबकि राइस मिलें बूँदी-कोटा में तथा पापड़-भुजिया उद्योग मुख्यतः बीकानेर संभाग में केंद्रित है।
🥛डेयरी उद्योग
- 1975 में स्थापित राजस्थान राज्य डेयरी विकास निगम से आज का राजस्थान सहकारी डेयरी संघ (RCDF) विकसित हुआ, जो गुजरात के आनन्द/अमूल मॉडल का अनुसरण करते हुए तीन स्तरीय सहकारी ढाँचे के जरिए ऑपरेशन फ्लड जैसे कार्यक्रमों की नोडल एजेंसी है।
👞चमड़ा उद्योग
- राजस्थान भारत के कुल कच्चे चमड़े का लगभग 13% उत्पादित करता है और रोजगार सृजन की दृष्टि से देश के अग्रणी उद्योगों में गिना जाता है; संयुक्त राष्ट्र संगठन ने नागौर के बड़ु गाँव को चर्म उद्योग विकास कार्यक्रम हेतु चुना, तथा चर्म शिल्पी भीनमाल (जालौर), बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर, जयपुर, अलवर व चित्तौड़गढ़ में सक्रिय हैं।
- राज्य सरकार ने जयपुर के मानपुरा माचेड़ी में एक समर्पित चर्म औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया है, तथा राज्य का पहला फुटवियर डिजाइन एवं डवलपमेंट इंस्टीट्यूट जोधपुर-नागौर मार्ग पर मंडोर में 1 सितंबर 2013 को शुरू किया।
खनिज-आधारित एवं इंजीनियरिंग उद्योग
सीमेंट, नमक, काँच व भारी इंजीनियरिंग संयंत्र राजस्थान के खनिज भंडार को बड़े पैमाने के विनिर्माण में बदलते हैं, जिनकी नींव देश के कुछ सबसे पुराने औद्योगिक नामों ने रखी।
🏗️सीमेंट उद्योग
- राजस्थान की पहली सीमेंट फैक्ट्री 1917 में लाखेरी (बूँदी) में शुरू हुई थी, और अपने समय की एशिया की सबसे बड़ी सीमेंट फैक्ट्री 'जयपुर उद्योग लि.' (1953, सवाई माधोपुर, अब बंद) यहीं थी; राज्य उत्पादन के लिहाज से देश का दूसरा सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक है, पर संयंत्रों की संख्या में सबसे आगे है - श्री सीमेंट लि. के ब्यावर, रास, खुशखेड़ा, सूरतगढ़, नवलगढ़ व जोबनेर में छह संयंत्र इसका नेतृत्व करते हैं।
- सफेद सीमेंट में अल्ट्राटैक की बिरला व्हाइट देश में पहले तथा जे.के. सीमेंट दूसरे स्थान पर है; गोटन (नागौर) की जे.के. व्हाइट सीमेंट इकाई, जो 1984 में शुरू हुई, भारत का पहला सफेद सीमेंट संयंत्र मानी जाती है, जबकि बिरला व्हाइट की खारियाखंगार (भोपालगढ़, जोधपुर) इकाई 1988 में शुरू हुई।
- चित्तौड़गढ़ राज्य में सीमेंट उत्पादन में अव्वल है, जबकि जैसलमेर एक नए हब के रूप में उभर रहा है - जे.के. सीमेंट ने 5 सितंबर 2025 को वहाँ 3,000 करोड़ रु. के ग्रीनफील्ड संयंत्र की आधारशिला रखी, तथा 22 मई 2026 को मंत्रिमंडल ने डालमिया सीमेंट के जैसलमेर के रामगढ़ में 3,047 करोड़ रु. के, 3.6 मिलियन टन क्षमता के संयंत्र हेतु भूमि को मंजूरी दी।
🧂नमक उद्योग
- नमक मुख्यतः सांभर, डीडवाना व पचपदरा झीलों से निकलता है, जिनमें सांभर सबसे बड़ा स्रोत है - यह 1990 से रामसर स्थल (साइट संख्या 464) है और यहाँ एक साल्ट म्यूजियम भी है; सांभर साल्ट्स लि., जो हिन्दुस्तान साल्ट्स लि. की सहायक कंपनी है और 30 सितंबर 1964 को स्थापित हुई, वहाँ उत्पादन संभालती है।
- राजस्थान भूमिगत जल से नमक उत्पादन तथा खारी झीलों से नमक उत्पादन दोनों में देश में प्रथम है, परंतु कुल नमक उत्पादन में तीसरे स्थान पर है; लवणीय क्षेत्र छह जिलों - अजमेर, बालोतरा, चूरू, जैसलमेर, डीडवाना-कुचामन व फलौदी - में फैले हैं, जहाँ गुड्डी रिन, बाप रिन व मलार रिन क्षेत्र फलौदी में स्थित हैं, जो राज्य की नमक परीक्षण प्रयोगशाला का भी घर है।
- डीडवाना व पचपदरा नमक स्रोत, जो 1964 में उद्योग विभाग से राजकीय उपक्रम विभाग को हस्तांतरित हुए थे, बाद में निजीकृत किए गए - डीडवाना का 27 जनवरी 2000 से आंशिक तथा पचपदरा का अगस्त 1992 से; परंपरागत रूप से पचपदरा की नमक क्यारियों में खारवाल जाति व डीडवाना में 'देवल' संस्थाएँ काम करती हैं, हालाँकि वहाँ के नमक में सोडियम सल्फेट अधिक होने से यह खाने योग्य नहीं है।
🍶काँच एवं सिरेमिक उद्योग
- सेंट गोबेन ग्लास इंडिया का भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा) स्थित फ्लोट ग्लास संयंत्र, जो 27 अक्टूबर 2014 को उद्घाटित हुआ, भारत का सबसे बड़ा, विश्व का सबसे आधुनिक तथा एशिया का सबसे बड़ा फ्लोट ग्लास संयंत्र माना जाता है; सेलो ग्रुप ने पाली के फालना में 500 करोड़ रु. का ग्लासवेयर प्लांट जोड़ा है।
- सिरेमिक हब घिलोठ (राज्य का पहला सिरेमिक इंडस्ट्रियल जोन, 9 दिसंबर 2014 को शुरू), बीकानेर का खारा सिरेमिक्स पार्क, भीलवाड़ा में रीको का उखलिया जोन, तथा ब्यावर का सथाना विशेष क्षेत्र (2015) में विकसित हुए हैं; इसके कच्चे माल - सिरेमिक मिनरल्स, बालक्ले, सिलिका सैंड, क्वार्ट्ज, चाइना क्ले व फेल्सपार - बीकानेर, अजमेर, भीलवाड़ा जैसे जिलों में प्रचुर मिलते हैं, तथा जयपुर बोन चाइना उत्पादन का बड़ा केंद्र है।
🧪रासायनिक एवं उर्वरक उद्योग
- RSMML व राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लि. के संयुक्त उपक्रम ने चित्तौड़गढ़ के कपासन में उत्तर भारत का पहला डीएपी खाद कारखाना स्थापित किया; हिन्दुस्तान जिंक शाहपुरा जिले के बिलिया गाँव में खाद कारखाना लगाने की योजना बना रही है, और उदयपुर के कालड़वास औद्योगिक क्षेत्र में 64 एकड़ में एक फार्मास्युटिकल जोन विकसित किया गया है।
⚙️इंजीनियरिंग उद्योग
- नेशनल इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज लि. (NEI), जिसे बी.एम. बिरला ने ब्रिटेन की हॉफमैन के साथ 1946 में 'नेशनल बियरिंग कंपनी' के नाम से शुरू किया था, ने 1958 में यह नया नाम अपनाया पर ट्रेडमार्क 'NBC' रखा; बाद में इसने निवाई (1981), मानेसर (2006) व सांवली (2014) में संयंत्र खोले; हीरो मोटोकॉर्प की नीमराणा टू-व्हीलर इकाई व ग्लोबल पार्ट्स सेंटर, कूकस (जयपुर) के ग्लोबल आरएंडडी सेंटर (शिलान्यास 9 सितंबर 2013) के साथ मिलकर इसे एक ही राज्य में दो ग्लोबल सेंटर रखने वाली पहली कंपनी बनाती है।
- रक्षा व एयरोस्पेस कंपनियाँ भी राज्य में आ रही हैं - DRDO पिलानी (झुंझुनूं) में ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की असेंबलिंग करेगा, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लि. जोधपुर के कांकाणी में सैन्य MRO इकाई लगाने की योजना बना रहा है, और जर्मन रक्षा कंपनी अल्बाट्रॉस जोधपुर के तिंवरी औद्योगिक क्षेत्र में 42 करोड़ रु. का निवेश करेगी; अशोक लीलैंड (अलवर) ट्रक-बस बनाती है, जबकि किशनगढ़ की आशिका कमर्शियल 2010 से भेल को रेलवे बोगी फ्रेम की आपूर्ति कर रही है।
💡विविध तथ्य एवं विज्ञान संस्थान
- अलवर को राजस्थान का शराब उत्पादक 'स्कॉटलैंड' कहा जाता है, जबकि भीलवाड़ा व धनबाद (झारखंड) देश के एकमात्र दो स्थान हैं जहाँ अभ्रक की ईंटें बनाई जाती हैं; इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स की स्थापना 1925 में राजस्थान के सुपुत्र घनश्यामदास बिड़ला की पहल पर हुई थी।
- विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग, जिसकी स्थापना 1983 में हुई और जिसका निदेशालय जयपुर में तथा क्षेत्रीय कार्यालय छह शहरों में हैं, राज्य रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (जोधपुर), क्षेत्रीय विज्ञान केंद्र (जयपुर, जहाँ 23 सितंबर 2024 को इनोवेशन हब शुरू हुआ) तथा जयपुर, झालरापाटन व नवलगढ़ में विज्ञान उद्यान संचालित करता है।