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राजस्थान GK

राजस्थान के लघु, कुटीर, खादी ग्रामोद्योग व हस्तशिल्प उद्योग

Small, Cottage, Khadi & Handicraft Industries of Rajasthan

राजस्थान के एमएसएमई ढाँचे, राज्य की खादी-हस्तशिल्प नीतियों, उद्यमियों-शिल्पियों के लिए कल्याण योजनाओं और GI-टैग प्राप्त पारंपरिक शिल्पों की पूरी तस्वीर - रोजगार के सबसे बड़े इंजनों में से एक को समझने के लिए।

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एमएसएमई: परिभाषा, वर्गीकरण व आँकड़े

MSME Foundations: Definitions & Data

योजनाओं व नीतियों में उतरने से पहले आधार समझ लें - राजस्थान में सूक्ष्म, लघु व कुटीर उद्यम की परिभाषा क्या है और यह क्षेत्र राष्ट्रीय स्तर पर कहाँ खड़ा है।

💼लघु व कुटीर उद्योगों का महत्त्व

  • बड़े उद्योगों की तुलना में बहुत कम पूँजी में चलने के कारण लघु व कुटीर उद्योग प्रति रुपये निवेश पर कहीं अधिक रोजगार पैदा करते हैं, जिससे राजस्थान की रोजगार रणनीति में इनकी केंद्रीय भूमिका है।
  • एमएसएमई क्षेत्र राजस्थान के कुल औद्योगिक उत्पादन का लगभग 45% तथा देश के कुल निर्यात का करीब 40% हिस्सा देता है - यह राज्य की अर्थव्यवस्था के मुख्य आधारों में से एक है।
  • श्रम-प्रधान होने के कारण ये उद्योग कृषि पर बढ़ती जनसंख्या के दबाव को कम करते हैं, औद्योगिक विकेन्द्रीकरण में मदद करते हैं, शीघ्र उत्पादन संभव बनाते हैं, परम्परागत-कलात्मक शिल्पों को जीवित रखते हैं, और आय वितरण में समानता व स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के जरिए बड़े उद्योगों के पूरक बनते हैं।

🏠कुटीर उद्योग की परिभाषा

  • प्रशुल्क आयोग (1949-50) के अनुसार कुटीर उद्योग वे धंधे हैं जो परिवार के सदस्यों की मदद से अंशकालिक या पूर्णकालिक रूप में चलाए जाते हैं, जिनमें पूँजी निवेश नाममात्र का होता है, उत्पादन मुख्यतः हाथ से होता है, और भाड़े के मजदूरों का प्रयोग न के बराबर होता है।
  • ग्रामीण कुटीर उद्योग दो धाराओं में बँटे हैं - किसानों के सहायक धंधे जैसे मुर्गीपालन, गाय-भैंस-सूअर-भेड़-बकरी पालन, रेशम कीटपालन, मधुमक्खी पालन, मछलीपालन, टोकरी-रस्सी निर्माण व कॉयर उद्योग; तथा कौशल आधारित ग्रामीण शिल्प जैसे मिट्टी के बर्तन, चमड़े के जूते और घानी से तेल निकालना।
  • शहरी कुटीर उद्योग शहरी क्षेत्रों में स्थापित होते हैं और इनमें खिलौना निर्माण, लकड़ी का फर्नीचर, साबुन निर्माण, हथकरघे पर बुनाई तथा कपड़ों पर कढ़ाई शामिल हैं।

📐एमएसएमईडी अधिनियम, 2006 का वर्गीकरण

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम 2 अक्टूबर 2006 से लागू हुआ, जिसने लघु उद्योगों को विनिर्माण उद्यम (वस्तु बनाने वाले) व सेवा उद्यम (सेवा देने वाले) में बाँटा और सभी को सूक्ष्म, लघु व मध्यम - तीन स्तरों में वर्गीकृत किया।
  • इस मूल वर्गीकरण में सूक्ष्म उद्यम का अर्थ था विनिर्माण में 25 लाख रु. तक व सेवा में 10 लाख रु. तक निवेश; लघु उद्यम में विनिर्माण में 5 करोड़ रु. तक व सेवा में 2 करोड़ रु. तक निवेश; और मध्यम उद्यम विनिर्माण में 10 करोड़ रु. तक व सेवा में 5 करोड़ रु. तक निवेश तक सीमित था।

🔄आत्मनिर्भर भारत: एकीकृत एमएसएमई परिभाषा

  • क्षेत्र में अधिक निवेश व रोजगार आकर्षित करने के लिए आत्मनिर्भर भारत योजना के प्रथम चरण (13 मई 2020 को घोषित) ने विनिर्माण व सेवा उद्यम के भेद को समाप्त कर दिया और निवेश व टर्नओवर के आधार पर एमएसएमई की एक समान परिभाषा दी।
  • 1 अप्रैल 2025 से लागू परिभाषा के अनुसार सूक्ष्म उद्यम में संयंत्र-मशीनरी निवेश 2.5 करोड़ रु. तक व टर्नओवर 10 करोड़ रु. तक; लघु उद्यम में निवेश 2.5 से 25 करोड़ रु. तक व टर्नओवर 10 से 100 करोड़ रु. तक; तथा मध्यम उद्यम में निवेश 25 से 125 करोड़ रु. तक व टर्नओवर 100 से 500 करोड़ रु. तक होता है।

🏢जिला उद्योग केंद्र व एमआईएफसी

  • जनता सरकार की औद्योगिक नीति के तहत पंचम पंचवर्षीय योजना में सन् 1978 में देशभर में राज्य स्तर पर जिला उद्योग केंद्र (DIC) स्थापित किए गए - स्थानीय उद्यमियों तक सुविधाएँ पहुँचाने के लिए एक ही जगह पर सेवाएँ देने वाला ढाँचा।
  • उद्यमियों की सुविधा के लिए हर जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र में अब एमएसएमई निवेशक सुविधा केंद्र (MIFC) भी है, जिसका उद्देश्य व्यवसाय स्थापित करना आसान बनाना और विभाग की भूमिका नियामक से बदलकर सुविधा-प्रदाता की करना है।

📈आँकड़ों में एमएसएमई

  • Statistical Year Book of Rajasthan, 2024 के अनुसार राज्य में केवल वर्ष 2023-24 में 4.7 लाख एमएसएमई पंजीकृत हुए, जिन्होंने 22.59 लाख लोगों को रोजगार दिया और 6,044.93 करोड़ रु. का निवेश आकर्षित किया।
  • NSS के 73वें दौर (2015-16) के सर्वेक्षण में राजस्थान देश के कुल 633.88 लाख एमएसएमई में से 4% हिस्सेदारी (26.87 लाख) के साथ 9वें स्थान पर रहा, जिसमें कुल 46.33 लाख लोग कार्यरत थे - 38.31 लाख पुरुष व 8.01 लाख महिलाएँ।
  • एमएसएमई से रोजगार सृजन व सूक्ष्म उद्योगों की संख्या - दोनों में उत्तर प्रदेश देश में शीर्ष पर है, जबकि रोजगार सृजन के मामले में राजस्थान 10वें स्थान पर है।

⚖️सुविधा परिषदें (एमएसईएफसी)

  • सूक्ष्म व लघु उद्यमों के विलंबित भुगतान विवादों को सुलझाने के लिए राजस्थान में 14 सुविधा परिषदें (MSEFC) गठित हैं - 2 राज्य स्तरीय व 12 संभाग स्तरीय।
  • आयुक्त, उद्योग व वाणिज्य की अध्यक्षता वाली प्रथम राज्य स्तरीय परिषद 75 लाख रु. से अधिक के विवाद सुनती है; वरिष्ठ अतिरिक्त निदेशक की अध्यक्षता वाली द्वितीय परिषद 25-75 लाख रु. के मामले देखती है; और संभाग स्तरीय परिषदें 25 लाख रु. तक के मामले सुनती हैं - जयपुर संभाग में अकेले 6 परिषदें हैं जबकि बाकी हर संभाग में एक-एक।

⚠️लघु व कुटीर उद्योगों की समस्याएँ

  • इन उद्योगों को अक्सर कच्चे माल, तकनीक, वित्त व विपणन से जुड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ता है, साथ ही बड़े उद्योगों से कड़ी प्रतिस्पर्धा भी झेलनी पड़ती है।
  • सूचना व परामर्श की कमी, कमजोर प्रबंधकीय क्षमता, सीमित अनुसंधान तथा उद्योगों के बीच आपसी संगठन की कमी इनकी परेशानियों को और बढ़ा देती है।
  • परिवहन व विज्ञापन सुविधाओं की कमी, सामान्य व तकनीकी शिक्षा का अभाव, प्रमापीकरण व बिजली आपूर्ति की कमी, तथा स्थानीय स्तर पर ऊँचे कर इस क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।
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राजस्थान की एमएसएमई, ओडीओपी व हस्तशिल्प नीतियाँ

Rajasthan's MSME, ODOP & Handicraft Policies

राजस्थान की लघु उद्योग, जिला-विशेष उत्पाद व हस्तशिल्प नीतियों के सफर को देखें - 2015 की पहली एमएसएमई नीति से लेकर 2024 के व्यापक सुधारों तक।

🎉एमएसएमई नीति, 2015

  • राजस्थान की पहली सूक्ष्म व लघु उद्यम नीति 20 नवंबर 2015 को रिसर्जेंट राजस्थान सम्मेलन के अवसर पर जारी की गई।

📝एमएसएमई नीति, 2022

  • राज्य की एमएसएमई नीति 2022, 17 सितंबर 2022 को जारी हुई और 2022-27 की पाँच वर्षीय अवधि के लिए प्रभावी रही।

🚀राजस्थान एमएसएमई नीति, 2024

  • क्षेत्र के संतुलित व समावेशी विकास के लक्ष्य के साथ राजस्थान एमएसएमई नीति 2024 का लोकार्पण मुख्यमंत्री ने 4 दिसंबर 2024 को किया, यह 8 दिसंबर 2024 से लागू हुई, 31 मार्च 2029 तक प्रभावी रहेगी, तथा MSME नीति 2022 का स्थान लेकर RIPS-2024 के अनुरूप राज्य के सभी प्रोत्साहनों के लिए 'वन स्टॉप शॉप' की भूमिका निभाती है।
  • नई व विस्तार करने वाली इकाइयों को 50 करोड़ रु. तक के ऋण पर RIPS-2024 के ऊपर 2% तक अतिरिक्त ब्याज अनुदान मिल सकता है, साथ ही NSE/BSE/MSE प्लेटफॉर्म से समता पूँजी जुटाने पर 15 लाख रु. तक की एकमुश्त सहायता भी।
  • यह प्रौद्योगिकी/सॉफ्टवेयर व्यय की 50% (अधिकतम 5 लाख रु.), मानक प्रमाणन व आईपीआर व्यय की 50% (अधिकतम 3 लाख रु.), व्यापार मेलों में स्टॉल-यात्रा व्यय की 75% (अधिकतम 1.5 लाख रु.), तथा डिजिटलीकरण व ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म व्यय की 75% (प्रत्येक में अधिकतम 50,000 रु.) राशि की प्रतिपूर्ति भी करती है।

🗺️एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) नीति, 2024

  • जिलों को निर्यात हब के रूप में विकसित करने के लिए ओडीओपी नीति 2024, 4 दिसंबर 2024 को जारी हुई, इसकी अधिसूचना 8 दिसंबर 2024 को हुई और क्रियान्वयन दिशा-निर्देश 19 फरवरी 2025 को जारी हुए; यह वास्तव में 18 फरवरी 2025 से लागू है और 31 मार्च 2029 तक चलेगी, तथा हर जिले की मूल क्षमता के इर्द-गिर्द सरकारी योजनाओं को एकीकृत करती है।
  • इस नीति में पात्र सूक्ष्म उद्यमों को परियोजना लागत की 25% (अधिकतम 15 लाख रु.) व लघु उद्यमों को 15% (अधिकतम 20 लाख रु.) मार्जिन मनी अनुदान मिलती है; 35 वर्ष से कम उम्र के SC/ST, महिला, PwBD या युवा उद्यमियों द्वारा चलाई जा रहीं ओडीओपी इकाइयों को 5% (अधिकतम 5 लाख रु.) का अतिरिक्त अनुदान मिलता है।
  • 1 अप्रैल 2026 से एक संशोधन के तहत मार्जिन मनी अनुदान ओडीओपी इकाइयों के विस्तार पर भी दिया जाने लगा - सूक्ष्म इकाइयों के लिए 10% (अधिकतम 15 लाख रु.) व लघु इकाइयों के लिए 10% (अधिकतम 20 लाख रु.); जबकि 20 मई 2026 के आदेश ने 50% (अधिकतम 5 लाख रु.) की प्रौद्योगिकी-उन्नयन सहायता को निजी संस्थानों के जरिए भी उपलब्ध करा दिया।
  • नीति में प्रमाणन/आईपीआर व्यय की 75% (अधिकतम 3 लाख रु.) प्रतिपूर्ति, ओडीओपी विपणन आयोजनों में स्टॉल किराए व यात्रा हेतु 2 लाख रु. तक सहायता, दो वर्षों तक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म शुल्क की 75% (अधिकतम 1 लाख रु./वर्ष) प्रतिपूर्ति, तथा पूर्ण कार्यात्मक ई-कॉमर्स वेबसाइट बनाने हेतु 60% (अधिकतम 75,000 रु.) की एकमुश्त सहायता भी शामिल है।

🏷️ओडीओपी: जिलेवार प्रमुख उत्पाद

  • राजस्थान के 41 जिलों में से हर एक को एक प्रमुख ओडीओपी उत्पाद दिया गया है - सूची में पत्थर, मार्बल व ग्रेनाइट उत्पादों का दबदबा है (अजमेर, बाँसवाड़ा, बूँदी का सैंडस्टोन, चित्तौड़गढ़, दौसा, डीग, धौलपुर, जैसलमेर का पीला पत्थर, राजसमंद, सवाईमाधोपुर, सिरोही, टोंक का स्लेट स्टोन और उदयपुर आदि)।
  • अन्य उल्लेखनीय प्रमुख उत्पादों में जयपुर के लिए जेम्स व ज्वैलरी, कोटा के लिए कोटा डोरिया, प्रतापगढ़ के लिए थेवा ज्वैलरी, बीकानेर के लिए बीकानेरी नमकीन, तथा अलवर, खैरथल-तिजारा व कोटपूतली-बहरोड़ के लिए ऑटोमोबाइल पार्ट्स शामिल हैं।

🧶राजस्थान हस्तशिल्प नीति, 2022

  • 17 सितंबर 2022 (MSME दिवस) को जारी राजस्थान की पहली हस्तशिल्प नीति के साथ राज्य असम व ओडिशा के बाद अपनी अलग हस्तशिल्प नीति जारी करने वाला देश का तीसरा राज्य बना - इससे पहले RIPS-2019 में हैंडीक्राफ्ट सेक्टर को थ्रस्ट सेक्टर में रखा जा चुका था; यह नीति 31 मार्च 2026 तक प्रभावी है।
  • इसके उद्देश्यों में राज्य के हस्तशिल्पियों का आर्थिक उत्थान, उनके उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग व निर्यात हिस्सेदारी, विलुप्त होती परंपरागत हस्तकलाओं का पुनरुद्धार, तथा पाँच वर्षों में हस्तशिल्प क्षेत्र में 50,000 नए रोजगार सृजित करना शामिल है।

🏛️हस्तशिल्प नीति के मुख्य प्रावधान

  • सरकारी विभाग पंजीकृत हस्तशिल्पियों से गुणवत्तापूर्ण उत्पादों की 10 लाख रु. तक की खरीद बिना टेंडर के करेंगे, साथ ही एक नए हस्तशिल्प व हथकरघा निदेशालय की स्थापना होगी।
  • राजस्थान हाट, जलमहल, जयपुर में एक राज्य-स्तरीय हस्तशिल्प म्यूजियम बनेगा - जयपुर को वर्ल्ड क्राफ्ट काउंसिल पहले ही 'वर्ल्ड क्राफ्ट सिटी' घोषित कर चुका है।
  • नीति में राजस्थान हाट में एक हस्तशिल्प डिजाइन बैंक, दस्तकारों को 3 लाख रु. तक के ऋण पर 100% राज्य-वहित ब्याज, हर दिसंबर राजस्थान हाट में राष्ट्रीय स्तर के हस्तशिल्प सप्ताह का आयोजन, ओडीओपी के तहत हर जिले में कम से कम एक हस्तशिल्प उत्पाद की पहचान, तथा 18-50 वर्ष के दस्तकारों व बुनकरों के लिए समूह बीमा का प्रावधान भी है।

🧩एकीकृत क्लस्टर विकास योजना, 2024

  • मुख्यमंत्री द्वारा 4 दिसंबर 2024 को अनावृत और 8 दिसंबर 2024 को अधिसूचित यह योजना (31 मार्च 2029 तक प्रभावी) तीन वर्षों में हथकरघा, हस्तशिल्प व एमएसएमई क्षेत्रों में कुल 50 क्लस्टर विकसित करने का लक्ष्य रखती है।
  • यह क्लस्टरों में सॉफ्ट इंटरवेंशन गतिविधियों के लिए 50 लाख रु. तक सहायता, कच्चे माल के डिपो हेतु 8% तक ब्याज अनुदान, तथा ई-कॉमर्स अपनाने को बढ़ावा देने के लिए 20% तक (अधिकतम 50,000 रु. प्रति उद्यम/शिल्पी) की विक्रय सहायता देती है।
  • सूक्ष्म व लघु उद्यमों के लिए सामूहिक सुविधा केंद्रों (CFC) हेतु यह 10 करोड़ रु. तक की परियोजना लागत का 80% (SC/ST, महिला व ओडीओपी उद्यमों के लिए 90%) वहन करती है, और रीको क्षेत्रों से बाहर मौजूदा क्लस्टरों में बुनियादी सुविधाएँ सुधारने पर भी यही सहायता देती है।
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उद्यमी व शिल्पी कल्याण योजनाएँ

Entrepreneur & Artisan Welfare Schemes

युवा उद्यमियों के लिए बिना प्रतिभूति ऋण से लेकर वृद्धावस्था में शिल्पियों के लिए पेंशन तक - ये योजनाएँ राजस्थान के लघु-उद्योग कार्यबल के लिए सुरक्षा-कवच व संबल दोनों हैं।

🔨विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना

  • 23 अगस्त 2025 को अनुमोदित व 3 सितंबर 2025 से 31 मार्च 2029 तक प्रभावी इस योजना में 18-45 वर्ष के युवाओं को वित्तीय संस्थानों के जरिए कम ब्याज दर पर ऋण व मार्जिन मनी अनुदान मिलता है, जो ऋण का 25% या 5 लाख रु., जो भी कम हो, के बराबर होती है।
  • 1 करोड़ रु. तक के ऋण पर 8% तथा 1-2 करोड़ रु. के ऋण पर 7% ब्याज अनुदान मिलता है; महिलाओं, SC/ST, दिव्यांग उद्यमियों, ग्रामीण इकाइयों तथा कार्डधारी बुनकरों-शिल्पियों को 1-2 करोड़ रु. के ऋण पर 1% अतिरिक्त अनुदान मिलता है।
  • व्यक्तिगत के साथ-साथ संस्थागत आवेदक (HUF/सोसायटी/भागीदारी-एलएलपी फर्म/कंपनी) भी पात्र हैं बशर्ते 51% या अधिक स्वामित्व 18-45 वर्ष आयु वालों के पास हो; योजना का क्रियान्वयन जिला उद्योग व वाणिज्य केंद्र करता है, इसमें कोई प्रतिभूति नहीं माँगी जाती और मामलों को CGTMSE से भी जोड़ा जा सकता है।

🛠️पीएम विश्वकर्मा योजना

  • केंद्रीय बजट 2023-24 में घोषित व विश्वकर्मा जयंती (17 सितंबर 2023) को लॉन्च की गई इस योजना में दस्तकारों को दो किस्तों में रियायती 5% दर पर बिना प्रतिभूति ऋण मिलता है - पहली किस्त 1 लाख रु. (18 माह) और दूसरी 2 लाख रु. (30 माह) - जिसमें केंद्र सरकार 8% तक ब्याज वहन करती है; 14 नवंबर 2024 के राजस्थान सरकार के आदेश से 2% अतिरिक्त अनुदान जुड़ने पर दस्तकार का बोझ घटकर केवल 3% रह गया।
  • चयनित दस्तकारों को पीएम विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र व आई-कार्ड मिलते हैं, बेसिक (5-7 दिन) व एडवांस (15 दिन) दोनों प्रशिक्षणों में 500 रु./दिन का स्टाइपेंड, प्रति डिजिटल लेनदेन 1 रु. प्रोत्साहन (अधिकतम 100/माह), और कौशल विकास व उद्यमिता मंत्रालय से 15,000 रु. की टूल-किट सहायता मिलती है।
  • पात्रता के लिए पंजीकरण की तिथि पर आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए और पिछले 5 वर्षों में समान केंद्रीय/राज्य ऋण योजना (जैसे PMEGP, पीएम स्वनिधि या मुद्रा योजना) का लाभ न लिया गया हो; 18 मान्यताप्राप्त पारंपरिक व्यवसायों में से फिलहाल केवल पाँच में नामांकन खुला है - अस्त्र निर्माता, नाव निर्माता, मोची, सुनार व ताला बनाने वाला।
  • राजस्थान ऋण स्वीकृति व वितरण में देश में दूसरे, टूलकिट वितरण व कारीगर प्रशिक्षण में तीसरे, तथा सुनार, हथौड़ा व टूलकिट निर्माता, कुम्हार व मूर्तिकार ट्रेड्स में पंजीकरण की संख्या में देश में पहले स्थान पर है।

👴मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना, 2024

  • 26 नवंबर 2024 से प्रभावी यह स्वैच्छिक अंशदायी योजना, जिसका संचालन राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग करता है, पात्र अभिदाताओं को 60 वर्ष की आयु से मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन के अतिरिक्त 3,000 रु. मासिक पेंशन देती है।
  • पात्र लाभार्थी राजस्थान के 18-45 वर्षीय असंगठित श्रमिक, स्ट्रीट वेंडर या लोक कलाकार होने चाहिए, जिनकी मासिक आय 15,000 रु. से कम हो, बैंक खाता व आधार हो, और वे आयकरदाता न हों।
  • अभिदाता 60 वर्ष तक 40-100 रु./माह (आयु अनुसार) जमा करते हैं, जिसके बराबर राज्य सरकार 15-400 रु./माह देती है, यानी कुल अंशदान 55-500 रु. तक होता है; 18-40 आयु वर्ग के लिए यह केंद्र की PMSYM योजना से भी जुड़ती है, जिसमें केंद्र 55-200 रु. जोड़ता है और संयुक्त अंशदान 500 रु. तक पहुँच जाता है।
  • पेंशनर की मृत्यु पर उसके जीवनसाथी को पारिवारिक पेंशन के रूप में 50% पेंशन मिलती है; 3 वर्ष के लॉक-इन के बाद पर 10 वर्ष से पहले योजना छोड़ने पर अंशदान व बैंक ब्याज वापस मिलता है, जबकि 10 वर्ष बाद (60 वर्ष से पहले) छोड़ने पर अंशदान व निर्धारित या बैंक ब्याज दर में जो अधिक हो, वह वापस मिलता है।

🧰विश्वकर्मा कामगार कल्याण योजना

  • बजट घोषणा 2023-24 के अनुरूप स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए 7 जुलाई 2023 को अधिसूचित इस योजना में आवेदक की आयु 18-40 वर्ष, जनआधार कार्ड, परिवार की आय 3 लाख रु. से कम, तथा पहले केंद्र/राज्य से टूल-किट सहायता न ली हो, यह शर्तें अनिवार्य हैं।
  • पात्र लाभार्थियों में शिल्प व माटी कला बोर्ड, केशकला बोर्ड तथा विमुक्त-घुमन्तू-अर्ध्द घुमन्तू कल्याण बोर्ड के पहचान-पत्र धारक, साथ ही राजीविका/NULM द्वारा चिह्नित महिलाएँ व श्रम विभाग की चयनित कामगार शामिल हैं।

🤝डॉ. भीमराव अंबेडकर राजस्थान दलित, आदिवासी उद्यम प्रोत्साहन योजना

  • गैर-कृषि क्षेत्रों में SC/ST की भागीदारी बढ़ाने के लिए उद्योग विभाग द्वारा 8 सितंबर 2022 को अधिसूचित (31 मार्च 2027 तक प्रभावी) यह योजना आवेदक का राजस्थान निवासी व 18+ वर्ष का होना, तथा फर्मों/कंपनियों में 51% या अधिक SC/ST स्वामित्व अनिवार्य करती है।
  • इसमें स्तरीय ब्याज अनुदान मिलता है - 25 लाख रु. से कम पर 9%, 25 लाख-5 करोड़ रु. पर 7%, तथा 5-10 करोड़ रु. पर 6% - साथ ही परियोजना लागत का 25% या 25 लाख रु., जो भी कम हो, मार्जिन मनी अनुदान भी।
  • परियोजना लागत व ऋण सीमा गतिविधि के अनुसार बदलती है - विनिर्माण में अधिकतम 10 करोड़ रु., सेवा में 5 करोड़ रु., व वाणिज्यिक में 1 करोड़ रु. - जिसमें ऋण 85-90% व लाभार्थी अंशदान 10-15% होता है; राज्य सरकार CGTMSE गारंटी शुल्क भी वहन करती है, और वित्त वर्ष 2026-27 का लक्ष्य 30,000 युवाओं को सहायता देना है।

🎓मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना (MYSY), 2026

  • 18-45 वर्षीय 1 लाख युवाओं को नए रोजगार अवसर देने के लिए 12 जनवरी 2026 को शुरू हुई (अधिसूचना 15 जनवरी 2026, प्रभावी 31 मार्च 2029 तक) इस योजना में शैक्षणिक योग्यता के अनुसार ऋण सीमा तय है: 8वीं-12वीं पास के लिए सेवा-व्यापार में 3.5 लाख रु. या विनिर्माण में 7.5 लाख रु., और स्नातक/ITI धारकों के लिए सेवा-व्यापार में 5 लाख रु. या विनिर्माण में 10 लाख रु.।
  • मार्जिन मनी सहायता ऋण की 10% होती है (8वीं-12वीं वर्ग में अधिकतम 35,000 रु., स्नातक/ITI वर्ग में 50,000 रु.), और यह योजना CGTMSE शुल्क की प्रतिपूर्ति भी करती है; पात्रता अन्य युवा योजनाओं जैसी ही है - महिला, SC/ST, दिव्यांग व बेरोजगार युवा, व्यक्तिगत या संस्थागत, बशर्ते वे ऋण चूककर्ता न हों।

🌱राजस्थान युवा उद्यमिता प्रोत्साहन योजना

  • राजस्थान वित्त निगम द्वारा 2013-14 में शुरू व 2015-16 में विस्तारित यह योजना अब 45 वर्ष तक के उद्यमियों को 5 करोड़ रु. तक ऋण स्वीकृत करती है, तथा 2 करोड़ रु. तक (पूर्व में 1.5 करोड़) के ऋण पर 6% ब्याज अनुदान (अधिकतम 12 लाख रु./वर्ष) देती है।

🏗️PMEGP - प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम

  • 14 अगस्त 2008 को पूर्ववर्ती प्रधानमंत्री रोजगार योजना व ग्रामीण रोजगार सृजन कार्यक्रम के विलय से बना PMEGP ग्रामीण व शहरी दोनों क्षेत्रों के पारंपरिक कारीगरों व बेरोजगार युवाओं को गैर-कृषि सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने में मदद करता है।
  • 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति (साथ ही स्वयं सहायता समूह, पंजीकृत सोसायटी, उत्पादन सहकारी समिति व चैरिटेबल ट्रस्ट भी) इस ऋण-संबद्ध सब्सिडी योजना के लिए पात्र है, जो व्यापार-सेवा में 20 लाख रु. व विनिर्माण में 50 लाख रु. तक की परियोजनाओं को वित्तपोषित करती है - बशर्ते वह KVIC की निषिद्ध सूची में न हो और अधिक लागत की परियोजनाओं के लिए कम से कम 8वीं पास हो।
  • बैंक ऋण पर 15-35% मार्जिन मनी अनुदान मिलती है; सामान्य श्रेणी में 10% स्वयं अंशदान पर शहरी में 15% व ग्रामीण में 25% अनुदान मिलता है, जबकि विशेष श्रेणी (SC/ST/OBC/अल्पसंख्यक/महिला/भूतपूर्व सैनिक/दिव्यांग/सीमावर्ती-पहाड़ी-पूर्वोत्तर क्षेत्र) में केवल 5% स्वयं अंशदान पर शहरी में 25% व ग्रामीण में 35% अनुदान मिलता है, और 10 लाख रु. तक की परियोजनाओं में कोई प्रतिभूति नहीं चाहिए।
  • इसे हर जिले में तीन अभिकरण लागू करते हैं - खादी व ग्रामोद्योग आयोग, राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, तथा जिला उद्योग एवं वाणिज्य केंद्र - नोडल एजेंसी KVIC मुंबई के अधीन, राष्ट्रीयकृत, क्षेत्रीय ग्रामीण, सहकारी, RBI-अनुमोदित निजी बैंकों व SIDBI के माध्यम से।

🎗️वाहन, स्वास्थ्य व मेलों हेतु अन्य सहायता योजनाएँ

  • मुख्यमंत्री लघु वाणिज्यिक वाहन स्वरोजगार योजना, जो 1 दिसंबर 2022 को शुरू हुई (अधिसूचना 11 अक्टूबर 2022), 15 लाख रु. तक के लघु वाणिज्यिक वाहन पर ऑन-रोड कीमत की 10% या 60,000 रु. (जो भी कम हो) अनुदान देती है, जिसके बराबर या अधिक अनुदान वाहन निर्माता कंपनी भी देती है।
  • राजीव गांधी शिल्पी स्वास्थ्य बीमा योजना एक दस्तकार परिवार के चार सदस्यों को 1.5 लाख रु. तक का मेडिक्लेम कवर देती है, जबकि आर्टीजन क्रेडिट कार्ड पूँजी व उत्पादन जरूरतों के लिए 2 लाख रु. तक ऋण उपलब्ध कराता है।
  • खादी कारीगर जनश्री बीमा योजना (15 अगस्त 2003 से) मात्र 100 रु. वार्षिक प्रीमियम पर 30,000-75,000 रु. का बीमा कवर देती है, जबकि एकीकृत बाजार सहायता योजना कुशल शिल्पियों को दैनिक-यात्रा भत्ता (राज्य में 450 रु., राज्य से बाहर 600 रु.) व स्टॉल शुल्क में 50% रियायत (प्रति आयोजन अधिकतम 5,000 रु., वार्षिक 25,000 रु.) देती है।
  • मुख्यमंत्री लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना (MLUPY) 2019 ने सभी वर्गों के लिए उद्यम स्थापना व रोजगार आसान बनाने हेतु 5-9% ब्याज अनुदान के साथ 10 करोड़ रु. तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया, और यह 17 दिसंबर 2019 से 31 मार्च 2024 तक प्रभावी रही।
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खादी, हथकरघा व हस्तशिल्प विरासत

Khadi, Handloom & Handicraft Heritage

चरखे से लेकर GI-टैग प्राप्त शिल्पों तक - राजस्थान की वस्त्र व हस्तशिल्प परंपराओं, उन्हें सहेजने वाली योजनाओं और उन्हें मनाने वाले उत्सवों की यात्रा।

🧶राजस्थान का खादी व हथकरघा

  • खादी राजस्थान के सबसे पुराने कुटीर उद्योगों में से एक है, और कृषि के बाद हथकरघा बुनाई राज्य में रोजगार का सबसे बड़ा स्रोत है।
  • चतुर्थ हथकरघा गणना (2019-20) में राज्य में 8,770 बुनकर पाए गए, जिनमें करीब दो-तिहाई ग्रामीण और अधिकांश अनुसूचित जाति व मुस्लिम समुदाय से हैं; ये कोटा डोरिया व साड़ियों से लेकर पट्टू, कम्बल, शॉल तथा बगरू-सांगानेरी प्रिंटेड चादरों तक विविध उत्पाद बुनते हैं।
  • राज्य मुख्यतः सूती व ऊनी खादी बनाता है, सिल्क व ऊनी किस्में खासकर पश्चिमी राजस्थान में केंद्रित हैं - जहाँ से देश के कुल ऊन उत्पादन का लगभग 45% आता है - जबकि रेजी, खेस, दरी व दोसूती इसके प्रमुख सूती खादी उत्पाद हैं।

🧵लघु खादी परियोजना

  • 2007-08 में 'फैशन फॉर डेवलपमेंट - ए न्यू खादी इनिशिएटिव' के रूप में शुरू हुई इस पहल का लक्ष्य कत्तिनों-बुनकरों को साल में 250-300 दिन काम देना, उनकी दैनिक मजदूरी को दो से चार गुना बढ़ाना, तथा उत्पादन गुणवत्ता व कार्यस्थल की स्थिति सुधारना था।
  • वित्त वर्ष 2011-12 में इसे कार्यशील पूँजी के प्रावधान के साथ 'लघु खादी परियोजना' नाम दिया गया, फिर 2022-23 में इसे लघु खादी परियोजना-I व II में बाँटा गया, जो क्रमशः 16.50 लाख रु. व 12.50 लाख रु. तक की पूँजीगत सहायता देती हैं, साथ ही 10 लाख रु. का ब्याज-रहित कार्यशील पूँजी ऋण भी उपलब्ध है।

💵खादी हेतु प्रोत्साहन व निधियाँ

  • खादी कामगार आर्थिक प्रोत्साहन योजना (13 जुलाई 2022 से) कत्तिनों-बुनकरों को निर्धारित दरों से ऊपर प्रति घुण्डी/प्रति वर्ग मीटर प्रोत्साहन देती है, जिसे बजट 2023-24 के तहत 1 अप्रैल 2023 से दोगुना कर दिया गया।
  • बजट 2019-20 के बाद खादी के कच्चे माल हेतु रिवॉल्विंग फण्ड को 3 करोड़ रु. से बढ़ाकर 10 करोड़ रु. किया गया, और खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ने 'खादी इंडिया' ब्रांड के तहत 2 अक्टूबर 2025 से 30 जनवरी 2026 तक खादी वस्त्रों पर 50% छूट दी।

🗺️जिलों में हथकरघा क्लस्टर

  • कोटा, झालावाड़ व बूँदी कोटा डोरिया साड़ी व रनिंग क्लॉथ के लिए जाने जाते हैं; जैसलमेर राजीव व लेडिज शॉल, बरडी, कम्बल व पट्टू के लिए; तथा बीकानेर व जोधपुर ऊनी शॉल, लोई, कम्बल, पट्टू व दरियों के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • अजमेर व पाली खेस-तौलिए में विशेषज्ञता रखते हैं, भीलवाड़ा दरी-रेजी में, बाड़मेर रेजी-कम्बल-पट्टू में, तथा श्रीगंगानगर, नागौर, जालौर, भरतपुर, अलवर, सीकर व दौसा - सभी के अपने खेस, शॉल, दरी व रनिंग क्लॉथ क्लस्टर हैं।

🏅राजस्थान के GI-टैग प्राप्त उत्पाद

  • भौगोलिक संकेत (GI) उन उत्पादों पर लगता है जिनकी विशिष्ट गुणवत्ता किसी खास मूल स्थान से जुड़ी होती है; भारत की GI रजिस्ट्री (GIR), जो चेन्नई स्थित एक सांविधिक संस्था है और वस्तुओं के भौगोलिक संकेतक अधिनियम 1999 को लागू करती है, 15 सितंबर 2003 से काम कर रही है।
  • कोटा डोरिया राजस्थान का पहला GI टैग (2005-06) बना, इसके बाद 2008-11 में जयपुर की ब्ल्यू पॉटरी, मोलेला क्ले वर्क, कठपुतली, सांगानेरी हैण्ड ब्लॉक प्रिंटिंग, बीकानेरी भुजिया व फुलकारी (पंजाब-हरियाणा के साथ संयुक्त रूप से) को यह दर्जा मिला।
  • इसके बाद बगरू हैण्ड ब्लॉक प्रिंट (2011-12), थेवा आर्ट वर्क (2013-14), मकराना मार्बल (2014-15), पोकरण पॉटरी (2017-18) व सोजत मेहँदी (2021-22) को यह दर्जा मिला; अगस्त 2023 में एक साथ नाथद्वारा पिछवाई पेंटिंग, उदयपुर कोफ्तगिरी मेटल क्राफ्ट, बीकानेर की कशीदाकारी कला व उस्ता कला, तथा जोधपुरी बंधेज को भी GI टैग मिला।
  • सबसे नए GI टैग कैर सांगरी (29 मई 2025) व नागौरी अश्वगंधा (Withania somnifera, 24 नवंबर 2025) को मिले हैं।

🏛️नए हस्तशिल्प केंद्र व पहलें

  • सीमावर्ती क्षेत्र के युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए पोकरण (जैसलमेर) में टेराकोटा स्किल सेंटर बन रहा है, साथ ही बोरानाडा में जोधपुर हैंडीक्राफ्ट मेगा क्लस्टर तथा डूंगरपुर में प्रस्तावित शिल्पग्राम भी।
  • जयपुर में ब्ल्यू पॉटरी के संरक्षण व निर्यात बढ़ाने के लिए 'ब्ल्यू पॉटरी सेंटर फॉर एक्सीलेंस एण्ड लॉजिस्टिक पार्क' बनेगा, जबकि जोधपुर जिले में वुडन हैंडीक्राफ्ट कॉमन फैसिलिटी सेंटर राज्य के प्रसिद्ध फर्नीचर उद्योग को आधुनिक बना रहा है।
  • राजस्थान के कोटा डोरिया व पूर्वोत्तर भारत के प्रसिद्ध एरी सिल्क को मिलाकर एक नया प्रीमियम फैब्रिक विकसित किया जा रहा है - यह पहल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 5F विजन (फार्म से फाइबर, फैब्रिक, फैशन और फॉरेन तक) को आगे बढ़ाती है।

🎪मेले, उत्सव व प्रदर्शनियाँ

  • 44वें भारतीय अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले (14-27 नवंबर 2025, थीम 'एक भारत श्रेष्ठ भारत') में राजस्थान को पार्टनर स्टेट का दर्जा मिला और राजस्थान मंडल को उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
  • अन्य हालिया आयोजनों में भिवाड़ी में 12वां इंडिया इंडस्ट्रियल फेयर (19-21 सितंबर 2025), सीकर में शेखावाटी पंच गौरव राजसखी मेला (13-20 मार्च 2026, महिला-केंद्रित ओडीओपी थीम पर), बोरानाडा-जोधपुर में हैंडीक्राफ्ट एक्सपो (15-19 जनवरी 2026), तथा जयपुर सहित सभी जिलों में आयोजित 'रत्नम जयपुर' ओडीओपी प्रदर्शनी (15-19 मार्च 2026) शामिल हैं।
  • 35वां पश्चिमी राजस्थान उद्योग हस्तशिल्प उत्सव जोधपुर में 25 दिसंबर 2025 से 4 जनवरी 2026 तक चला, जिसका उद्घाटन मुख्यमंत्री ने 26 दिसंबर को किया, और इसका समापन 4 जनवरी 2026 को प्रदेश स्तरीय महिला उद्यमी सम्मेलन के साथ हुआ।

🏆स्मृति दिवस व शिल्प पुरस्कार

  • राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस 7 अगस्त को मनाया जाता है, जो 1905 में इसी तिथि को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की याद में है; राजस्थान MSME दिवस विश्वकर्मा जयंती (17 सितंबर) को मनाया जाता है, जिसमें राज्य स्तरीय समारोह में उत्कृष्ट उद्यमियों, बुनकरों व हस्तशिल्पियों को सम्मानित किया जाता है।
  • राजस्थान उद्योग रत्न पुरस्कार योजना (17 सितंबर 2016 को घोषित) हर वर्ष 12 उद्यमियों को सम्मानित करती है - टर्नओवर वृद्धि, व्यावसायिक नवाचार, महिला उद्यमी व रुग्ण उद्योग पुनरुद्धार श्रेणियों में 4-4; जबकि राष्ट्रीय पुरस्कार पा चुके बुनकर व हस्तशिल्पी को अलग से राजस्थान बुनकर रत्न व हस्तशिल्प रत्न पुरस्कार मिलता है, जिसमें हर विजेता को 1 लाख रु., एक शॉल व प्रशस्ति पत्र दिया जाता है।
  • 2005-06 से चल रही बुनकर पुरस्कार योजना कुशल बुनकरों व सहकारी समितियों को जिला स्तर (1,100-5,100 रु.) व राज्य स्तर (3,100-21,000 रु.) दोनों पर प्रथम, द्वितीय, तृतीय व सांत्वना पुरस्कार श्रेणियों में नकद पुरस्कार देती है।

✂️स्थानीय शिल्प विशेषताएँ व कार्यक्रम

  • जसोल (बालोतरा) बकरी के बालों से जट पट्टियाँ बुनने का प्रमुख केंद्र है, अलवर का किशोरी गाँव कागजी टैराकोटा के लिए प्रसिद्ध है, और टोडारायसिंह (टोंक) के पास मेहरकला गाँव चटाई व टोकरी उद्योग के लिए जाना जाता है।
  • UNDP-NLDP की सहायता से रूडा 'ऑपरेशन मोजड़ी' कार्यक्रम चला रहा है, जो जयपुर, नागौर, जोधपुर, जालौर व पाली जिलों में चमड़ा उद्योग का विकास करता है।
  • याद रखने योग्य शिल्प-भूगोल जोड़ियों में जयपुर की ब्ल्यू पॉटरी व मीनाकारी-कुंदन कार्य, प्रतापगढ़ की थेवा ज्वैलरी, शाहपुरा (भीलवाड़ा) की फड़ चित्रकला, मोलेला की मिट्टी की मूर्तियाँ व नाथद्वारा की पिछवाई पेंटिंग्स, बीकानेर की उस्ता कला, तथा सोजत की मेहँदी शामिल हैं।
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संस्थाएँ, व्यापार अवसंरचना व संसाधन-आधारित क्लस्टर

Institutions, Trade Infrastructure & Resource Clusters

राजस्थान के लघु उद्योगों को गढ़ने, वित्तपोषित करने व बाजार दिलाने वाली संस्थाओं से मिलें - और देखें कि राज्य के संसाधन-आधारित शिल्प मानचित्र पर कहाँ केंद्रित हैं।

🏢राजसिको - राजस्थान लघु उद्योग निगम

  • राजसिको की स्थापना 3 जून 1961 को कंपनी अधिनियम 1956 के तहत एक सीमित दायित्व कंपनी के रूप में हुई, जिसका दायित्व राज्य के हस्तशिल्पियों व हस्तशिल्प के लिए कल्याणकारी योजनाएँ बनाना व चलाना है।
  • यह राजस्थान के हस्तशिल्प को प्रदर्शनियों, मेलों व राजस्थली विक्रय केंद्रों के जरिए बाजार दिलाता है, शिल्पियों को नए बाजार खोजने में मदद करता है, लघु इकाइयों को सरकारी खरीद व खुले बाजार में विपणन सहायता देता है, और राजस्थानी शिल्प के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रचार को आगे बढ़ाता है।

🛍️राजसिको - केंद्र, प्रशिक्षण व खरीद

  • राजसिको जयपुर, दिल्ली, गरियाहाट-कोलकाता व जगदीश चौक-उदयपुर में राजस्थली विक्रय केंद्र चलाता है, साथ ही गलीचा प्रशिक्षण केंद्र व एक ट्राइबल प्रशिक्षण केंद्र भी; अजमेरी गेट, जयपुर के निकट इसका राजस्थली शोरूम मार्च 2007 से चल रहा है और फरवरी 2025 से पीपीपी मोड पर संचालित है।
  • GFAR भाग-2 के नियम 30 व राजस्थान लोक उपापन में पारदर्शिता अधिनियम 2012 के तहत सरकारी संस्थाएँ पॉलिथीन बैग, कँटीले तार, टेंट-तिरपाल, स्टील फर्नीचर व एंगल आयरन पोस्ट जैसी सामग्री बिना निविदा राजसिको से खरीद सकती हैं; निगम चार शिल्प प्रशिक्षण केंद्र भी चलाता है - शाहपुरा (भीलवाड़ा) में फड़ चित्रकला, कोटा में कोटा-बूँदी शैली, जोधपुर में मारवाड़-जोधपुर शैली, तथा बीकानेर में लकड़ी-ऊँट की खाल पर उस्ता कला।

🚢निर्यात व व्यापार अवसंरचना

  • निर्यात अवसंरचना में जयपुर में एयर कार्गो सुविधा तथा जयपुर, जोधपुर, भिवाड़ी व भीलवाड़ा में इनलैंड कंटेनर डिपो शामिल हैं; जोधपुर के सालावास रेलवे स्टेशन के निकट तनावड़ा गाँव में पीएम गतिशक्ति योजना के तहत नया डिपो बन रहा है, और उदयपुर, बीकानेर व पचपदरा (बालोतरा) में नए एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स प्रस्तावित हैं।
  • जोधपुर में 1999 में स्थापित सौर-ऊर्जा आधारित वुड सीजनिंग प्लांट व कॉमन फेसिलिटी सेंटर को अब 'नेशनल ट्रेनिंग सेंटर फॉर वुड टेक्नोलॉजी एंड डिजाइन' के रूप में पुनः शुरू किया गया है।

🏫राजस्थान की अन्य शिल्प व खादी संस्थाएँ

  • जयपुर में नवंबर 1995 में स्थापित रूडा (ग्रामीण गैर-कृषि विकास अभिकरण) ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका के लिए लघु उद्यमों के क्लस्टर विकसित करता है, और इसी की पहल से कोटा डोरिया, बगरू हैण्ड ब्लॉक प्रिंट, ब्ल्यू पॉटरी, सांगानेरी प्रिंट व पोकरण पॉटरी को GI पंजीकरण मिला।
  • कुम्हारों के लिए बोर्ड 3 अक्टूबर 2008 को बना, 2009 में 'शिल्प व माटी कला बोर्ड' और 6 अक्टूबर 2023 को 'श्री यादे माटी कला बोर्ड' नाम मिला; 1955 के अधिनियम के तहत बना राजस्थान खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड जयपुर में ग्राम्या व संकुल जैसे केंद्र तथा पुष्कर, अजमेर, माउंट आबू, सिरोही व सांगानेर में प्रशिक्षण केंद्र चलाता है।
  • अगस्त 2023 में जोधपुर के लिए अधिसूचित हस्तशिल्प एवं हथकरघा निदेशालय, जिसके पदेन निदेशक आयुक्त उद्योग हैं, विलुप्त होती हस्तकलाओं को पुनर्जीवित करने के लक्ष्य से बना; राज्य का मूल लघु उद्योग सेवा संस्थान (SISI) - अब MSME विकास संस्थान - जयपुर में 14 जनवरी 1958 को स्थापित हुआ था।

🇮🇳राष्ट्रीय स्तर की एमएसएमई संस्थाएँ

  • प्रमुख राष्ट्रीय संस्थाओं में SIDBI (स्थापना 2 अप्रैल 1990), NSIC (1955), तथा KVIC अधिनियम 1956 के तहत बना सांविधिक खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) शामिल हैं।
  • क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर सरकार को सलाह देने वाला शीर्ष निकाय, राष्ट्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम बोर्ड, 15 मई 2007 को बना व 27 मई 2013 को पुनर्गठित हुआ; फोर्ड फाउंडेशन की सिफारिश पर 1954 में बना लघु उद्योग विकास संगठन (सीडो) MSMED अधिनियम 2006 के बाद 'MSME-DO' कहलाया।
  • असंगठित क्षेत्र में उद्यमों का राष्ट्रीय आयोग (NCEUS) डॉ. अर्जुन सेनगुप्ता की अध्यक्षता में 20 सितंबर 2004 को तीन वर्ष के लिए बना; तीन राष्ट्रीय उद्यमिता संस्थान इस तंत्र को पूरा करते हैं - निसबड, नोएडा (1983), निम्समे, हैदराबाद (1960 में दिल्ली में CIETI के रूप में शुरू, 1962 में हैदराबाद में SIET बना, 2006 अधिनियम के तहत नाम बदला), तथा भारतीय उद्यमिता संस्थान, गुवाहाटी (1993)।

💻पोर्टल व डिजिटल पहलें

  • उद्योग मित्र पोर्टल (rajudhyogmitra.rajasthan.gov.in), जो 12 जून 2019 को शुरू हुआ, राजस्थान MSME अधिनियम की 'उद्यम स्थापना का आशय' व्यवस्था लागू करता है - प्राप्ति प्रमाण-पत्र मिलते ही एक नया उद्यम 5 वर्षों तक विभागीय स्वीकृतियों व निरीक्षणों से मुक्त रहता है।
  • केंद्रीय उद्यम पंजीयन पोर्टल (udyamregistration.gov.in) 1 जुलाई 2020 को शुरू हुआ, और उद्योग आधार पंजीयन शुरू करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य था; 19 नवंबर 2025 की वित्त विभाग अधिसूचना ने राज्य विभागों में MSME उत्पादों की खरीद भी अनिवार्य की।
  • अन्य डिजिटल पहलों में महिला उद्यमियों हेतु उद्यम सखी पोर्टल (8 मार्च 2018), MSME सम्पर्क रोजगार पोर्टल (27 जून 2018), इंडियन बैंक का 'MSME प्रेरणा' मेंटरिंग कार्यक्रम (6 अक्टूबर 2020), तथा RIIPP-2010 के तहत ट्रेन टू गेन योजना शामिल हैं, जो नियोजकों को प्रशिक्षणार्थियों के वेतन की 50% (अधिकतम 2,000 रु./माह) प्रतिपूर्ति करती है, बशर्ते वे कम से कम आधे प्रशिक्षणार्थियों को स्थायी रोजगार दें।

🏪हाट बाजार व विपणन केंद्र

  • उद्यम प्रोत्साहन संस्थान 4 अरबन हाट बाजार चलाता है - जयपुर, जोधपुर, अजमेर व सीकर (सीकर वाला 12 जनवरी 2025 को लोकार्पित हुआ) - तथा भरतपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, झुंझुनूं, कोटा, दौसा, राजसमंद व उदयपुर में 10 ग्रामीण हाट बाजार; अलवर व पुष्कर में नए ग्रामीण हाट के लिए DPR तैयार है।
  • देश का पहला MSME प्रौद्योगिकी सेंटर पथरेड़ी, भिवाड़ी (खैरथल-तिजारा) में स्थापित हो चुका है, और शिल्पियों को तकनीकी प्रशिक्षण व सहायता देने के लिए 'राजस्थान सेंटर ऑफ क्राफ्ट्स एंड डिजाइन मैनेजमेंट' बनाया जा रहा है।

🌾संसाधन-आधारित लघु उद्योग - कहाँ केंद्रित हैं

  • कृषि-उत्पाद आधारित उद्योग कच्चे माल के अनुसार केंद्रित हैं - तेल घाणी भरतपुर, कोटा, जयपुर, श्रीगंगानगर, अलवर व पाली में; वनस्पति घी भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, भरतपुर, जयपुर, अलवर, धौलपुर, कोटा व टोंक में; गुड़-खाँडसारी कोटा, बूँदी व चित्तौड़गढ़ में; तथा नमकीन-भुजिया-पापड़ के लिए बीकानेर प्रसिद्ध है।
  • पशु-उत्पाद आधारित उद्योगों में चमड़ा उद्योग टोंक, अजमेर, जयपुर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर व नागौर में केंद्रित है, तथा ऊन उद्योग बीकानेर, ब्यावर, टोंक, चूरू, जोधपुर व जैसलमेर में।
  • वनोपज आधारित उद्योगों में लकड़ी-फर्नीचर निर्माण जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, नागौर, नीमराणा व भिवाड़ी में होता है, तथा हस्तनिर्मित कागज उद्योग कोटा, उदयपुर, सांगानेर व अजमेर में।
  • खनिज आधारित उद्योगों में संगमरमर-ग्रेनाइट मकराना (डीडवाना-कुचामन), किशनगढ़ (अजमेर), राजसमंद, उदयपुर, कोटा, जालौर, जयपुर, चित्तौड़गढ़ व अलवर में, तथा मिट्टी के बर्तन उद्योग बीकानेर, सीकर, अलवर, भीलवाड़ा व चित्तौड़गढ़ में केंद्रित हैं।