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राजस्थान GK

राजस्थान के महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल

Important Tourist Places of Rajasthan

अजमेर की दरगाह से लेकर जैसलमेर के स्वर्णिम दुर्ग, उदयपुर की झीलों और हाड़ौती के प्राचीन मंदिरों तक — राजस्थान के हर कोने के प्रमुख पर्यटन स्थलों, महलों, मंदिरों व लोक-तीर्थों की सैर।

34 टॉपिक23 फ्लैशकार्ड15 MCQ
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अजमेर-मेरवाड़ा व अरावली हृदय क्षेत्र

Ajmer-Merwara & the Aravalli Heartland

अजमेर की सूफी दरगाह और पुष्कर की पावन झील से लेकर अरावली पट्टी के वस्त्र-नगरों तक, मध्य राजस्थान के इन जिलों में गहरी आस्था और जीवंत विरासत का अनूठा संगम मिलता है।

🕌अजमेर

  • अजमेर की स्थापना 1113 ई. में चौहान शासक अजयराज ने की थी; आज भी शहर की पहचान पहाड़ी पर बने तारागढ़ किले और सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह से होती है, जहाँ हर साल रजब माह की 1 से 6 तारीख तक लगने वाले उर्स में हर धर्म के श्रद्धालु पहुँचते हैं।
  • अढ़ाई दिन का झोंपड़ा मूल रूप से चौहान राजा बीसलदेव के समय बना संस्कृत विद्यालय था, जिसे बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने ढाई दिन में मस्जिद के रूप में परिवर्तित कर दिया — इसी वजह से इसका यह नाम पड़ा; यह हिन्दू-इस्लामी स्थापत्य के सबसे सुंदर मिश्रणों में से एक है।
  • अणासागर झील, जिसे पृथ्वीराज तृतीय के दादा अर्णोराज ने बनवाया और बाद में जहाँगीर के दौलत बाग तथा शाहजहाँ की संगमरमरी बारादरी ने सुंदर बनाया, के पास ही सोनी जी की नसियाँ स्थित है — एक भव्य जैन मंदिर जिसका स्वर्णनगरी हॉल जैन ब्रह्माण्ड-दर्शन को लघु रूप में दर्शाता है।

🪷पुष्कर

  • पुष्कर, जो अपनी पवित्र झील के 52 घाटों व 500 से अधिक मंदिरों के बीच बसा है, 14वीं सदी के ब्रह्मा मंदिर के लिए प्रसिद्ध है — यह ब्रह्मा जी का देश में इकलौता नियमित रूप से पूजित मंदिर है, जहाँ बायीं ओर गायत्री और दायीं ओर सावित्री विराजमान हैं तथा चतुर्मुखी ब्रह्मा प्रतिमा स्थापित है।
  • कार्तिक पूर्णिमा पर यहाँ 'दीपदान' की परंपरा निभाई जाती है; रत्नागिरि पर्वत पर स्थित सावित्री मंदिर, जहाँ रोपवे से पहुँचा जा सकता है, भाद्रपद शुक्ला सप्तमी को मेला भरता है, और पंचकुण्ड (सुधाबाय) वह स्थान माना जाता है जहाँ पांडवों ने अज्ञातवास में विश्राम किया था।

🏭ब्यावर

  • कर्नल जॉर्ज डिक्सन द्वारा 1836 में बसाया गया 'नया शहर' ब्यावर अगस्त 2023 में राजस्थान का नवीनतम जिला बना; यहीं 1889 में सेठ दामोदर दास ने राज्य की पहली सूती वस्त्र मिल भी स्थापित की थी।
  • राजस्थान का पहला ऐतिहासिक गिरजाघर, शूलब्रेड चर्च, ब्यावर में ही स्थित है, जबकि निकटवर्ती देवमाली वह स्थान माना जाता है जहाँ लोकदेवता देवनारायण जी ने शरीर त्यागा था।

🧵भीलवाड़ा

  • 'वस्त्र नगरी' और 'राजस्थान के मैनचेस्टर' के नाम से मशहूर भीलवाड़ा में शाहपुरा का रामद्वारा स्थित है — रामस्नेही संप्रदाय की प्रमुख गद्दी, जिसकी स्थापना 1751 में स्वामी रामचरण जी ने की थी, जिन्होंने सीताराम जी की बावड़ी की एक गुफा में 36 हज़ार दोहों की रचना की थी।
  • मांडलगढ़ के निकट मेनाल अपने नीलकंठेश्वर महादेव मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, तो वहीं कोठारी नदी के तट पर बसा बागोर 'महासतियों का टीला' नामक विश्वविख्यात प्रस्तर युगीन पुरास्थल है।
  • मांडल की बत्तीस खंभों की छतरी शाहजहाँ ने आमेर के जगन्नाथ कछवाहा की याद में बनवाई थी, जबकि जहाजपुर का गडोली महादेव भारत का शायद एकमात्र ऐसा शिव मंदिर है जहाँ महादेव सदैव वस्त्र धारण किए रहते हैं और वर्ष में दो बार महाशिवरात्रि मनाई जाती है।

🧂डीडवाना-कुचामन

  • अगस्त 2023 में नागौर से अलग होकर बना डीडवाना-कुचामन 'शेखावाटी के सिंहद्वार' के नाम से जाना जाता है और यहाँ राज्य की सर्वाधिक खारे पानी की झीलें हैं; यहीं का मकराना कस्बा वह संगमरमर देता है जिससे ताजमहल, दिलवाड़ा मंदिर और विक्टोरिया मेमोरियल बने हैं।
  • लाडनूँ स्थित जैन विश्व भारती, जिसकी स्थापना 1971 में मूर्तिपूजा-रहित श्वेतांबर तेरापंथ के आचार्य तुलसी की प्रेरणा से हुई, अब एक मान्यता-प्राप्त विश्वविद्यालय है; वहीं कुचामन शहर कभी मारवाड़ राज्य की टकसाल था, जिसके सिक्के 'कुचामनी सिक्के' कहलाते थे।

🐎नागौर

  • प्राचीन काल में अहिच्छत्रपुर के नाम से जाना जाने वाला नागौर जांगलदेश के चौहानों की राजधानी था; यहीं से अकबर के दरबारी बीरबल, अबुल फजल व फैजी थे, और 1994 में मेड़ता से मेड़ता रोड के बीच देश की पहली रेल-बस सेवा भी यहीं शुरू हुई थी।
  • प्राचीन मेदिनीपुर, यानी मेड़ता, वह स्थान है जहाँ भक्त-कवयित्री मीराबाई ने अपना जीवन बिताया — यहाँ उनका मंदिर, महल व एक पैनोरमा स्थित है; वहीं नागौर की सुल्तानुत-तारकीन दरगाह चिश्ती सूफी संत काजी हमीदुद्दीन नागौरी को समर्पित है।
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मारवाड़ — जोधपुर, पाली, बाड़मेर व जालौर

Marwar — Jodhpur, Pali, Barmer & Jalore

नीला शहर जोधपुर और उसके रेगिस्तानी पड़ोसी जिले राठौड़ों के किलों, जैन संगमरमरी वैभव और थार की सीमांत लोक-आस्था को एक साथ बुनते हैं।

🔵जोधपुर

  • थार के प्रवेशद्वार पर बसे 'नीले शहर' जोधपुर की स्थापना 1459 में राव जोधा ने की थी, जिन्होंने भव्य मेहरानगढ़ किला बनवाया; निकट स्थित जसवंत थड़ा, जो 1899-1906 के बीच महाराजा जसवंतसिंह द्वितीय की स्मृति में बना श्वेत संगमरमर का स्मारक है, 'मारवाड़ का ताजमहल' कहलाता है।
  • उम्मेद भवन पैलेस, जिसे 1929 में महाराजा उम्मेद सिंह ने अकाल-राहत कार्य के रूप में शुरू करवाया था, बनने में लगभग 16 वर्ष लगे; वहीं मंडोर उद्यान, जो मारवाड़ की पूर्व राजधानी था, राजसी छतरियों, तैंतीस करोड़ देवताओं की हवेली तथा अनूठे एकस्तंभ महल को समेटे है।
  • खेजड़ली गाँव अमृता देवी व उनकी साथियों के बलिदान के लिए विश्वप्रसिद्ध है, जिन्होंने 1730 में खेजड़ी वृक्षों को कटने से बचाने के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए — इस घटना की स्मृति में आज भी हर वर्ष भाद्रपद सुदी दशमी को शहीद मेला लगता है।

🐘पाली

  • महान दानवीर भामाशाह की जन्मभूमि पाली, रणकपुर की देहरी पर बसा है — यह 15वीं सदी का चौमुखा जैन मंदिर 1,444 बारीक नक्काशीदार खंभों पर टिका है, जिसे महाराणा कुम्भा के संरक्षण में सोमसुंदर सूरि के मार्गदर्शन में बनवाया गया था।
  • फालना का स्वर्ण जैन मंदिर, जो शंखेश्वर पार्श्वनाथ को समर्पित है, राजस्थान का पहला स्वर्ण मंदिर है और 'गोडवाड़ का प्रवेशद्वार' कहलाता है, जबकि पाली नगर का सोमनाथ मंदिर गुजरात के राजा कुमारपाल सोलंकी ने विक्रम संवत् 1209 में बनवाया था।

🏺बाड़मेर व बालोतरा

  • 'भारत के दुबई' के नाम से जाना जाने वाला बाड़मेर, किराडू का घर है — 10वीं-11वीं सदी के मंदिरों का यह समूह 'राजस्थान का खजुराहो' कहलाता है, जिसमें सोमेश्वर मंदिर सबसे बड़ा व भव्य है और महामारु-गुर्जर शैली में निर्मित है।
  • अगस्त 2023 में बाड़मेर से अलग होकर बना बालोतरा अजरक व मलीर छपाई के लिए प्रसिद्ध है; निकटवर्ती तिलवाड़ा का मल्लीनाथ मंदिर संत मल्लीनाथ जी की समाधि-स्थली है, जबकि बालोतरा की संगमरमरी बाटाडू बावड़ी को काव्यात्मक रूप से 'रेगिस्तान का जल महल' कहा जाता है।
  • दोनों जिलों में रानी भटियाणी (जिन्हें प्यार से 'भुआसा' कहा जाता है) की गहरी आस्था है — यह भाटी राजकुमारी थीं जिन्हें ईर्ष्यावश अन्याय सहने के बाद देवी रूप में पूजा जाने लगा; उनका मुख्य मंदिर जसोल गाँव में है, जहाँ मुख्यतः ढोली समुदाय पूजा करता है।

⛰️जालौर

  • 'ग्रेनाइट का शहर' कहलाने वाला जालौर, जो कभी प्रतिहार शासक नागभट्ट प्रथम की राजधानी था, खगोलशास्त्री ब्रह्मगुप्त की जन्मभूमि है, जिन्होंने 628 ई. में 'ब्रह्मस्फुटसिद्धांत' की रचना की थी, तथा प्राचीन श्रीमाल (भीनमाल) के कवि माघ की भी जन्मस्थली है।
  • भीनमाल में देश का पहला ऐसा भव्य तीर्थ स्थित है जिसे एक ही परिवार ने बनवाया — श्री लक्ष्मीवल्लभ पार्श्वनाथ 72 जिनालय — जहाँ जैन इतिहास में पहली बार भूत, वर्तमान व भविष्य के 24-24 तीर्थंकरों के मंदिर एक ही परिसर में स्थापित किए गए।
  • सुण्डा माता मंदिर, सुण्डा पर्वत पर 1,220 मीटर ऊँची एक प्राचीन गुफा में स्थित है, जहाँ चामुंडा माता केवल सिर के रूप में पूजी जाती हैं; यहीं 20 दिसंबर 2006 को राजस्थान का पहला रोपवे शुरू हुआ था।

🦩फलौदी

  • अगस्त 2023 में जोधपुर से अलग होकर बना फलौदी का खींचन गाँव सर्दियों में यहाँ पहुँचने वाले हज़ारों प्रवासी कुर्जा (डेमोइज़ेल क्रेन) पक्षियों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, साथ ही यहाँ गोलेछा व टाटिया परिवारों की सुंदर हवेलियाँ भी हैं।
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स्वर्णिम थार — जैसलमेर व बीकानेर

The Golden Thar — Jaisalmer & Bikaner

राजस्थान के दो महान मरुस्थलीय राज्य रेत से उठते सुनहरे किलों, ऊँटों की धरती और सीमा-मंदिरों के रूप में सदियों से थार की रखवाली करते आए हैं।

🏰जैसलमेर

  • रावल जैसल द्वारा 12 जुलाई 1155 को बसाया गया स्वर्णनगरी जैसलमेर — जिसे नेहरू ने 'दुनिया का आठवाँ अजूबा' कहा था — के जीवंत किले में पटवों की हवेली (गुमानचंद पटवा द्वारा 1805 में अपने पाँच पुत्रों के लिए बनवाई गई पाँच हवेलियों का समूह) और अपनी पत्थर की जालियों के लिए मशहूर सलीम सिंह की हवेली स्थित हैं।
  • तनोट माता का मंदिर — जिसकी पूजा 1965 के युद्ध के बाद से सीमा सुरक्षा बल करता आया है और जिसे 'थार की वैष्णो देवी' कहा जाता है — लोंगेवाला युद्ध में भारत की विजय की स्मृति में बने विजय स्तम्भ के साथ खड़ा है।
  • कुलधरा, जिसके निवासी रातोंरात गायब हो गए थे और जो आज एक रहस्यमयी भूतिया गाँव बना हुआ है, अमरसागर झील और उसके 1871 के जैन मंदिर के निकट स्थित है; वहीं रावल घड़सी (1343-1361) द्वारा बनवाया गया गड़सीसर सरोवर शहर की भव्य कृत्रिम झील है।

🐫बीकानेर

  • जोधपुर के राव जोधा के पुत्र राव बीका ने करणी माता के आशीर्वाद से 1488 में बीकानेर बसाया; यह देशनोक के करणी माता मंदिर — 'चूहों का मंदिर' — तथा महाराजा गंगासिंह द्वारा दुलमेरा के लाल पत्थर से बनवाए गए लालगढ़ पैलेस (डिज़ाइनर: सर स्विंटन जैकब) के लिए प्रसिद्ध है।
  • 1411 में व्यापारी भण्डाशाह द्वारा बनवाया गया भण्डाशाह जैन मंदिर, जिसे निर्माण में पानी की जगह घी के प्रयोग की कथा के कारण 'घी वाला मंदिर' कहा जाता है, उस शहर में स्थित है जिसकी पूरी परकोटा-सीमा एक ही निरंतर छत के नीचे होने की विशिष्टता रखती है।
  • नोखा के निकट मुकाम-तालवा बिश्नोई संप्रदाय का प्रमुख तीर्थ है, जहाँ संप्रदाय के संस्थापक जांभोजी की समाधि है; वहीं देवीकुण्ड सागर में राव कल्याणसिंह से लेकर महाराजा दूंगरसिंह तक बीकानेर के शासकों की राजसी छतरियाँ सुरक्षित हैं।
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शेखावाटी व उत्तरी मैदान

Shekhawati & the Northern Plains

भित्ति-चित्रों से सजी हवेलियाँ, ऊँटों की धरती के रेगिस्तान और उत्तर का नहर-सिंचित अन्नागार — यह सब राजस्थान की शेखावाटी व सीमांत पट्टी में एक साथ मिलते हैं।

🦚सीकर

  • जयपुर रियासत की सबसे बड़ी ठिकाना रही सीकर के खाटू गाँव में खाटू श्यामजी का मंदिर है, जो महाभारत के बर्बरीक को समर्पित कृष्ण-रूप है; इसका मूल मंदिर 1027 ई. में रूपसिंह चौहान व उनकी पत्नी नर्मदा कँवर ने बनवाया था।
  • चौहान राजा विग्रहराज के समय शैव आचार्य अल्लट द्वारा निर्मित हर्षनाथ मंदिर में 10वीं सदी की एक लिंगोद्भव मूर्ति है, जिसमें ब्रह्मा व विष्णु शिवलिंग की परिक्रमा करते दिखाए गए हैं; वहीं रेवासा के दक्षिण में स्थित जीणमाता मंदिर 8वीं सदी का है।

🎨झुंझुनूं व शेखावाटी की हवेलियाँ

  • शेखावाटी क्षेत्र — भित्ति-चित्रों से सजी हवेलियों की राजस्थान की मशहूर खुली-हवा कला-दीर्घा — के अग्रणी जिले झुंझुनूं में बहुमंजिला खेतड़ी महल (हवा महल) स्थित है, जो महाराजा भोपालसिंह के लिए बना था और खिड़की-दरवाज़ों के बिना होने के कारण 'झुंझुनूं का हवा महल' कहलाता है।
  • भारत की 'ताँबा नगरी' खेतड़ी का स्वामी विवेकानंद से गहरा नाता है — शिकागो की धर्म संसद जाने से पहले उन्हें यहीं यह मठवासी नाम मिला था; वहीं BITS व CEERI का घर पिलानी में देश का पहला उद्योग व तकनीकी संग्रहालय स्थित है, जो 1954 में खुला।

🐐चूरू

  • 'थार का सिंहद्वार' कहलाने वाले चूरू में सालासर बालाजी स्थित है — दाढ़ी-मूँछोंवाली हनुमान प्रतिमा, जो 1755 में स्थापित हुई थी और अपनी तरह का देश का पहला मंदिर है — इसे मुस्लिम कारीगरों नूर मोहम्मद व दाऊ ने मिलकर बनाया था, जो सांप्रदायिक सद्भाव का प्रतीक है।
  • तालछापर काले हिरणों का प्राकृतिक अभयारण्य है, जबकि शहर की सूराणा हवेली (1870) में एक ही दोहरी हवेली के भीतर 1,111 खिड़की-दरवाज़ों वाला लघु 'हवा महल' समाया हुआ है।

🌾हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर

  • हनुमानगढ़ के कालीबंगा में दुनिया के सबसे पुराने जुते हुए खेत के प्रमाण मिले हैं, जबकि लोकदेवता गोगाजी की समाधि 'गोगामेड़ी' की सेवा एक ब्राह्मण व एक मुस्लिम पुजारी मिलकर करते हैं — यह हिन्दू-मुस्लिम सद्भाव का स्थायी प्रतीक है।
  • बीकानेर के महाराजा गंगासिंह द्वारा बसाया गया व उनके नाम पर रखा गया श्रीगंगानगर, जिन्होंने 1927 में गंगनहर बनवाई थी, राजस्थान का सर्वाधिक सिंचित जिला है और 'राजस्थान का अन्नागार' कहलाता है।
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ढूंढाड़ — जयपुर, दौसा, टोंक व कोटपूतली-बहरोड़

Dhundhar — Jaipur, Dausa, Tonk & Kotputli-Behror

गुलाबी नगरी जयपुर और उसके ढूंढाड़ पड़ोसी महलों, वेधशालाओं, बावड़ियों तथा राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत की राजधानी को एक ही जीवंत क्षेत्र में समेटे हैं।

🏯जयपुर — नगर व महल

  • 18 नवंबर 1727 को सवाई जयसिंह द्वितीय ने वास्तुकार विद्याधर भट्टाचार्य के निर्देशन में जयपुर बसाया; 'गुलाबी नगरी' नाम का श्रेय सवाई रामसिंह द्वितीय को जाता है, जिन्होंने 1876 में इंग्लैंड के प्रिंस अल्बर्ट एडवर्ड के स्वागत हेतु पूरे शहर को गुलाबी रंग से रंगवा दिया था।
  • 1799 में सवाई प्रतापसिंह ने वास्तुकार लालचंद उस्ता के निर्देशन में हवामहल बनवाया — 953 खिड़कियों वाली यह पाँच मंजिला मधुमक्खी के छत्ते जैसी इमारत रानियों को बिना दिखे बाज़ार की चहल-पहल देखने के लिए बनाई गई थी; सिटी पैलेस के सात मंजिला चंद्रमहल में गिनीज बुक में दर्ज विश्व के सबसे बड़े चाँदी के मर्तबान भी रखे हैं।
  • सवाई जयसिंह द्वारा 1734-38 में बनवाई गई जंतर-मंतर, उनकी पाँच वेधशालाओं में सबसे बड़ी है और 2010 में यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हुई तथा यहाँ विश्व की सबसे बड़ी पत्थर की धूपघड़ी है; आमेर का जगत शिरोमणि मंदिर राजा मानसिंह प्रथम की रानी कनकावती ने अपने पुत्र जगतसिंह की स्मृति में बनवाया था।

🦚जयपुर — गलता, संग्रहालय व उद्यान

  • गलता, जिसे 'जयपुर की बनारस' कहा जाता है और जो कभी गालव ऋषि का आश्रम था, में सात मंदिर हैं जिनमें सबसे ऊँचे स्थान पर सूर्य मंदिर है; यहाँ रहने वाले लंगूरों के कारण इसे 'मंकी वैली' भी कहा जाता है।
  • इंडो-सारसेनिक शैली में बना भारत का पहला विशेष रूप से निर्मित सरकारी संग्रहालय अल्बर्ट हॉल सर स्विंटन जैकब ने डिज़ाइन किया था और यह 1887 में उद्घाटित हुआ; वहीं मानसागर झील में स्थित जलमहल, जिसका श्रेय सवाई जयसिंह को जाता है, की पाँच में से चार मंज़िलें जल में डूबी रहती हैं।
  • राजस्थान की सबसे बड़ी खारे पानी की झील साम्भर, जो शाकंभरी के चाहमान (चौहान) वंश की प्रारंभिक राजधानी स्थल भी रही, फुलेरा तहसील में स्थित है; यहाँ उत्खनन में इंडो-ग्रीक शासक एंटियोकस के सिक्के व कुषाणकालीन अवशेष मिले हैं।

🛕दौसा व कोटपूतली-बहरोड़

  • दुल्हराय द्वारा लगभग 1137 में स्थापित कछवाहा वंश की पहली राजधानी दौसा में प्रसिद्ध मेहंदीपुर बालाजी मंदिर स्थित है; निकटवर्ती आभानेरी की चाँद बावड़ी — 13 मंजिला व 64 फुट गहरी — 8वीं सदी के हर्षत माता मंदिर के साथ खड़ी है।
  • अगस्त 2023 में जयपुर व अलवर जिलों के हिस्सों को मिलाकर बना कोटपूतली-बहरोड़, साबी, सोता व बाणगंगा नदियों से होकर गुजरता है और यहाँ अहीरवाटी/राठी बोली बोली जाती है।

🕌टोंक

  • राजस्थान की एकमात्र मुस्लिम रियासत और अंग्रेज़ों द्वारा बनाई गई पहली रियासत टोंक को 'राजस्थान का लखनऊ' कहा जाता है; नवाब अमीर खान द्वारा शुरू व नवाब इब्राहिम खान द्वारा पूर्ण की गई सुनहरी कोठी, जो स्वर्ण-जड़ित पच्चीकारी व मीनाकारी के लिए मशहूर है, को 1996 में महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारक घोषित किया गया।
  • बनास नदी पर बना बीसलपुर बाँध, जो 1999 में पूर्ण हुआ, इस क्षेत्र की जीवनरेखा है; वहीं डिग्गी का प्राचीन कल्याणजी मंदिर, जिसे लगभग 5,600 वर्ष पुराना माना जाता है, ऐसे श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है जो जयपुर के तारकेश्वर मंदिर से दंडवत करते हुए यहाँ पहुँचते हैं।
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पूर्वी राजस्थान — अलवर, भरतपुर व ब्रज पट्टी

Eastern Rajasthan — Alwar, Bharatpur & the Braj Belt

बाघ अभयारण्य, जल महल और जाटकालीन किले इस पूर्वी सीमांत क्षेत्र की पहचान हैं, जहाँ राजस्थान ब्रज सांस्कृतिक क्षेत्र से मिलता है।

🐅अलवर

  • 'राजस्थान का स्कॉटलैंड' कहलाने वाला अलवर 2004 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में शामिल होने वाला राज्य का पहला जिला बना; महाराजा विनयसिंह द्वारा 1844-45 में रूपारेल नदी पर बनाई गई सिलीसेढ़ झील, जिसे 'राजस्थान का नंदन कानन' कहा जाता है, एक घोषित रामसर आर्द्रभूमि है।
  • राजस्थान का सबसे रहस्यमयी पर्यटन स्थल भांगढ़ तथा सरिस्का टाइगर रिज़र्व के भीतर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर — जो खजुराहो शैली में बना गुर्जर-प्रतिहार कालीन मंदिर है — इसी जिले में हैं, जो मूसी महारानी की छतरी की इंडो-इस्लामिक व बंगाल-शैली की छत के लिए भी प्रसिद्ध है।
  • सरिस्का अभयारण्य में स्थित पांडुपोल, जहाँ लेटी हुई हनुमान प्रतिमा है, तथा भर्तृहरि — उज्जैन के त्यागी राजा भर्तृहरि की तपोभूमि, जिन्होंने गुरु गोरखनाथ से दीक्षा ली थी — जिले की नाथ-संप्रदाय विरासत के मुख्य स्तंभ हैं।

🦢भर्तृहरि नगर व भरतपुर

  • 2023 में अलवर से अलग होकर बना भर्तृहरि नगर (खैरथल-तिजारा) में तिजारा का चंद्रप्रभु जैन मंदिर स्थित है — 8वें तीर्थंकर का एक अतिशय क्षेत्र; वहीं 1733 में महाराजा सूरजमल द्वारा स्थापित भरतपुर राजस्थान की पहली जाट रियासत थी।
  • यूनेस्को विश्व प्राकृतिक धरोहर स्थल केवलादेव घना अभयारण्य, भरतपुर के गंगा मंदिर के निकट है, जिसे महाराजा बलवंतसिंह ने राजपूत, मुग़ल, बौद्ध व द्रविड़ शैलियों के मिश्रण में चौरासी खंभों पर बनवाया था।
  • गंभीर नदी के तट पर स्थित खानवा वह स्थान है जहाँ 1527 में बाबर ने मेवाड़ के महाराणा सांगा को पराजित किया था; इस निर्णायक युद्ध की स्मृति में 2015 में एक पैनोरमा शुरू किया गया।

डीग

  • 'जल महलों के शहर' के नाम से प्रसिद्ध डीग — जो भरतपुर से पहले भरतपुर के जाटों की राजधानी थी — के अधिकांश भवन 1755-1765 के बीच महाराजा सूरजमल व उनके पुत्र जवाहरसिंह ने बंसी पहाड़पुर के बादामी बलुआ पत्थर से बनवाए थे; इसके गोपाल भवन में शाहजहाँ का संगमरमरी झूला-सिंहासन रखा है।
  • डीग के उद्यान मुग़ल चारबाग शैली में बने हैं, और निकटवर्ती कामां कस्बे में पुष्टिमार्ग वल्लभ संप्रदाय की दो गद्दियाँ — गोकुल चंद्रमा जी व मदन मोहन जी मंदिर — तथा 1222 ई. का 'चौरासी खम्भा' स्मारक सुरक्षित हैं।

🐯धौलपुर, करौली व सवाई माधोपुर

  • अपने विशिष्ट लाल बलुआ पत्थर के लिए मशहूर 'रेड डायमंड सिटी' धौलपुर में 1908 से राजस्थान की एकमात्र नैरो-गेज रेलगाड़ी — 'बच्चा गाड़ी' — चलती रही, जो 89 किमी लंबी है और आज भी राज्य में अपनी तरह की इकलौती है।
  • 1040 में विजयपाल द्वारा स्थापित यदुवंशी राजवंश की राजधानी करौली में कालीसिल नदी के तट पर कुलदेवी कैला देवी का मंदिर है, तथा गंभीर नदी पर चंदनपुर में विश्वप्रसिद्ध जैन तीर्थ श्री महावीर जी स्थित है।
  • जयपुर के सवाई माधोसिंह प्रथम द्वारा 1763 में स्थापित सवाई माधोपुर 'बाघों की शरणस्थली' है, जहाँ रणथम्भौर के त्रिनेत्र गणेश मंदिर में केवल त्रिनेत्री गणपति के मुख की पूजा होती है।
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मेवाड़ — उदयपुर, चित्तौड़गढ़ व दक्षिणी अरावली

Mewar — Udaipur, Chittorgarh & the Aravalli South

झीलों का शहर, उसकी दुर्ग-राजधानी और अरावली की सबसे ऊँची चोटियाँ मेवाड़ के वीरता, भक्ति और कला के सबसे गौरवशाली प्रसंगों को सहेजे हुए हैं।

🏞️उदयपुर

  • 'झीलों का शहर' उदयपुर, जिसे 1559 में महाराणा उदयसिंह ने बसाया था, पिछोला झील के इर्द-गिर्द बसा है, जहाँ सिटी पैलेस परिसर — जिसे इतिहासकार फर्ग्युसन ने 'राजस्थान के विंडसर महल' कहा — जगमंदिर द्वीप-महल को निहारता है, जहाँ राजकुमार खुर्रम (बाद में शाहजहाँ) ने कभी शरण ली थी।
  • मेवाड़ के अधिष्ठाता देव एकलिंगजी का मंदिर कैलाशपुरी में 8वीं सदी में बप्पा रावल ने बनवाया था; वहीं महाराणा जयसिंह द्वारा बनवाई गई और बाद में महाराणा फतहसिंह द्वारा पुनर्निर्मित फतहसागर झील के बीच नेहरू द्वीप स्थित है।
  • धुलेव का ऋषभदेव मंदिर, जिसे केसर चढ़ाने की परंपरा के कारण 'केसरियाजी' भी कहा जाता है, हिन्दुओं व भीलों दोनों में समान रूप से पूजनीय है — भील इस विशाल श्यामवर्णी मूर्ति को 'कालाजी' कहकर पुकारते हैं।

🔥चित्तौड़गढ़

  • 'राजस्थान का गौरव' और कीर्ति स्तंभ व विजय स्तंभ की धरती चित्तौड़गढ़ में कालिका माता मंदिर स्थित है — मूलतः यह 8वीं सदी का सूर्य मंदिर था जिसे 1301 में अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण में नष्ट कर दिया गया था और 14वीं सदी में राणा हम्मीर ने इसका पुनर्निर्माण करवाया।
  • भैंसरोड़गढ़ के निकट बाडोली मंदिर समूह, जिसे जेम्स टॉड ने 1821 में पहली बार प्रकाश में लाया, नौ मंदिरों का पंचायतन समूह है और गुर्जर-प्रतिहार कला के सर्वश्रेष्ठ उदाहरणों में गिना जाता है; इसके घटेश्वर मंदिर में शिव को नटराज रूप में उकेरा गया है।

⚔️राजसमंद व सलूम्बर

  • किसी झील के नाम पर रखा गया राज्य का इकलौता जिला राजसमंद, नाथद्वारा के श्रीनाथजी मंदिर का घर है — पुष्टिमार्गी वैष्णवों की प्रमुख गद्दी — जिसके निकट ही नवनिर्मित 'विश्वास स्वरूपम्' प्रतिमा है, जो 369 फुट ऊँची विश्व की चौथी सबसे ऊँची प्रतिमा है और शिव के आसनस्थ रूप को दर्शाती है।
  • हल्दीघाटी, जहाँ 18/21 जून 1576 को महाराणा प्रताप व अकबर की सेनाओं में युद्ध हुआ था — जिसे कर्नल टॉड ने 'मेवाड़ का थर्मोपाइले' कहा — बलीचा स्थित चेतक की समाधि तथा दिवेर के निकट है, जिसे टॉड ने प्रताप की बाद की छापामार विजय के लिए 'मेवाड़ का मैराथन' कहा था।
  • अगस्त 2023 में उदयपुर से अलग होकर बना सलूम्बर, चाँदी उत्पादन में राज्य का अग्रणी जिला है; यहाँ जगत का अंबिका मंदिर — 'मेवाड़ का खजुराहो' कहा जाने वाला 10वीं सदी का मंदिर — तथा महाराजा जयसिंह द्वारा बनवाई गई भारत की दूसरी सबसे बड़ी कृत्रिम झील जयसमंद (ढेबर झील) स्थित हैं।

🎨प्रतापगढ़

  • 2008 में गठित राज्य का 33वाँ जिला, 'कांठल नगरी' कहलाने वाला प्रतापगढ़, अपनी नाज़ुक थेवा स्वर्ण-काँच कला और तरल हींग के लिए प्रसिद्ध है; ऊँचाई में यह माउंट आबू के बाद राज्य का दूसरा सबसे ऊँचा नगर है।
  • अरनोद में गौतमेश्वर महादेव का विशाल मेला, जिसे 'आदिवासियों का हरिद्वार' कहा जाता है, हर वर्ष बैसाख पूर्णिमा से दो दिन तक चलता है, जहाँ श्रद्धालु पापनाशिनी मंदाकिनी गंगाकुंड में स्नान करने पहुँचते हैं।

⛰️सिरोही व माउंट आबू

  • अरावली की सबसे ऊँची चोटी गुरुशिखर (1722 मी.) पर बसा और कर्नल टॉड द्वारा 'हिन्दू ओलंपस' कहा गया माउंट आबू, दिलवाड़ा के जैन मंदिरों का घर है — पाँच श्वेत संगमरमरी श्वेतांबर मंदिर, जिनमें विमल वसाही मंदिर (1031 ई.) व लूणा वसाही मंदिर (1230-31 ई.) भारत की सर्वश्रेष्ठ संगमरमर नक्काशी में गिने जाते हैं।
  • देवताओं द्वारा अपने नाखूनों से खोदी गई मानी जाने वाली नक्की झील के पास टॉड रॉक व नन रॉक स्थित हैं; 1948 में यहाँ महात्मा गांधी की अस्थियों का एक भाग विसर्जित किया गया था, जिसकी स्मृति में गांधी घाट बना है।
  • 1425 में सहस्रमल द्वारा प्राचीन चंद्रावती के स्थान पर बसाया गया सिरोही नगर, अंग्रेज़ों से संधि करने वाली राजस्थान की अंतिम रियासत थी (1823), और इसकी तलवारें आज भी क्षेत्र में विख्यात हैं।
⛰️

वागड़ व हाड़ौती — बाँसवाड़ा, डूंगरपुर, कोटा, बूँदी, बाराँ व झालावाड़

Vagad & Hadoti — Banswara, Dungarpur, Kota, Bundi, Baran & Jhalawar

वागड़ की आदिवासी हृदयस्थली से लेकर हाड़ौती के मंदिरों से सजे पठारों तक, यह दक्षिण-पूर्वी पट्टी स्वतंत्रता-संग्राम की स्मृति को राजस्थान के कुछ सबसे प्राचीन मंदिरों के साथ जोड़ती है।

🎋बाँसवाड़ा व डूंगरपुर (वागड़)

  • 'सौ द्वीपों का शहर' बाँसवाड़ा, जिससे कर्क रेखा गुजरती है, मानगढ़ धाम का घर है — राजस्थान का अपना 'जलियाँवाला बाग' — जहाँ 17 नवंबर 1913 को गोविंद गिरि के नेतृत्व में एकत्र लगभग 1,500 भील आदिवासियों को अंग्रेज़ सेना ने गोलियों से भून दिया था।
  • 1358 में दुंगरसिंह द्वारा स्थापित 'पहाड़ियों का शहर' डूंगरपुर, बेणेश्वर धाम को संजोए है — माही-सोम-जाखम के संगम पर स्थित 'वागड़ का प्रयाग/पुष्कर' — जहाँ का स्वयंभू शिवलिंग पाँच भागों में विभक्त है और जिसका माघ पूर्णिमा मेला राजस्थान का सबसे बड़ा आदिवासी मेला है।
  • बाँसवाड़ा की गढ़ी तहसील में स्थित प्राचीन अर्थूणा (उत्थुनका), 1080 ई. में चामुण्डराज द्वारा बनवाया गया परमारकालीन शिव-पंचायतन मंदिर समूह संजोए है; वहीं डूंगरपुर का जूना महल, 13वीं सदी का परेवा पत्थर से बना महल, धनमाता पहाड़ी पर स्थित है।

🎓कोटा

  • 1631 में शाहजहाँ द्वारा बूंदी रियासत से अलग किया गया कोटा, जो आज 'कोचिंग नगरी' के रूप में मशहूर है, चंबल रिवर फ्रंट का भी घर है — भारत का पहला हेरिटेज रिवर फ्रंट, जो 2023 में खुला और यहाँ विश्व की सबसे बड़ी नदी-प्रतिमा व सबसे बड़ी घंटी स्थापित है।
  • 8वीं सदी का कंसुआ शिव मंदिर, जो ऋषि कण्व के पौराणिक आश्रम के निकट स्थित है, अपने दुर्लभ चतुर्मुखी शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है; वहीं किशोर सागर झील के बीचोंबीच 1743-45 में मेवाड़ की ब्रिज कँवर द्वारा बनवाया गया जगमंदिर महल तैरता प्रतीत होता है।

🪜बूँदी

  • 'छोटी काशी' व 'बावड़ियों का शहर' कहलाने वाला बूँदी, हाड़ा चौहान राव देवा द्वारा मीणा शासक जैता को हराकर लगभग 1241 में स्थापित किया गया था; इसकी रानी जी की बावड़ी, जो 1699 में राव राजा अनिरुद्धसिंह की रानी नाथावती जी ने बनवाई तीन मंजिला बावड़ी है, यहाँ की सबसे उत्कृष्ट मानी जाती है।
  • राव राजा उम्मेदसिंह द्वारा बनवाई गई चित्रशाला व राजमहल (गढ़ पैलेस) बूँदी शैली की प्रसिद्ध लघु चित्रकला को प्रदर्शित करते हैं; जैतसागर झील के किनारे राजा विष्णुसिंह द्वारा बनवाया गया सुख महल स्थित है।

🛕बाराँ व झालावाड़ (हाड़ौती)

  • बाराँ के रामगढ़ स्थित भांड देवरा शिव मंदिर, जिसे मेदवंशी राजा मलयवर्मा ने 10वीं सदी में नागर शैली में बनवाया था, अपनी उत्कृष्ट पंचायतन व भूमिज शैली की नक्काशी के लिए 'हाड़ौती का खजुराहो' कहलाता है।
  • 1838 में झाला मदनसिंह के अधीन अंग्रेज़ों द्वारा गठित अंतिम रियासत झालावाड़ में झालरापाटन का शीतलेश्वर महादेव मंदिर (689 ई.) स्थित है — राजस्थान का सबसे पुराना दिनांकित मंदिर — साथ ही कोलवी, विनायका व हाथियागौड़ के 7वीं-8वीं सदी के बौद्ध गुफा समूह भी यहीं हैं।
  • आहू-कालीसिंध के संगम पर डोड परमारों द्वारा बनवाया गया दुर्लभ जल-दुर्ग गागरोन किला, सूफी संत हमीदुद्दीन चिश्ती की दरगाह तथा संत पीपा के जन्मस्थान — दोनों को समेटे है, जो क्षेत्र की साझा आस्था का एक और प्रतीक है।