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राजस्थान GK

राजस्थान की स्थिति, विस्तार, आकृति एवं भौतिक स्वरूप

Location, Extent, Shape & Physical Features

राजस्थान के भूगोल की नींव — देश में इसकी स्थिति व विस्तार से लेकर मरुस्थल, अरावली, मैदान और पठार तक फैली अनूठी भौतिक विविधता को एक साथ जानें।

24 टॉपिक32 फ्लैशकार्ड15 MCQ
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स्थिति, विस्तार एवं आकृति

Location, Extent & Shape

राजस्थान नक्शे पर ठीक कहाँ बसा है, इसका आकार कितना विशाल है और यह किस आकृति में फैला है — राज्य के भूगोल की हर पढ़ाई की शुरुआत यहीं से होती है।

📐क्षेत्रफल एवं राष्ट्रीय स्थान

  • राजस्थान का क्षेत्रफल लगभग 3,42,239 वर्ग किमी है, जो भारत के कुल क्षेत्रफल का 10.41% है; 1 नवम्बर 2000 को छत्तीसगढ़ के मध्यप्रदेश से अलग होने के बाद से यह देश का सबसे बड़ा राज्य बना हुआ है।
  • 2011 की जनगणना के अनुसार राज्य की जनसंख्या लगभग 6.85 करोड़ थी, जिसके आधार पर तेलंगाना के अलग राज्य बनने के बाद राजस्थान जनसंख्या की दृष्टि से देश का 7वां सबसे बड़ा राज्य बना।

🌐ग्लोब, एशिया व भारत के सापेक्ष स्थिति

  • विश्व मानचित्र पर राजस्थान ग्लोब के उत्तर-पूर्वी (ईशान) कोण में, एशिया के दक्षिण-पश्चिमी (नैऋत्य) कोण में तथा भारत के उत्तर-पश्चिमी (वायव्य) कोण में स्थित है।
  • राज्य की स्थिति 23°3' से 30°12' उत्तरी अक्षांश तथा 69°30' से 78°17' पूर्वी देशान्तर के बीच है, यानी इसका अक्षांशीय विस्तार लगभग 7 डिग्री 9 मिनट तथा देशान्तरीय विस्तार लगभग 8 डिग्री 47 मिनट है।

☀️कर्क रेखा

  • राज्य का अधिकांश भाग कर्क रेखा (23½° उत्तरी अक्षांश) के उत्तर में स्थित है; यह रेखा डूंगरपुर जिले के दक्षिणी भाग में गलियाकोट के पास से प्रवेश कर बाँसवाड़ा जिले को लगभग बीचोंबीच बाँटती है — इसीलिए बाँसवाड़ा शहर इस रेखा के सबसे नजदीक बसा है, जहाँ सूर्य की किरणें विशेषकर जून में सबसे सीधी पड़ती हैं।
  • कर्क रेखा से जितनी दूर जाते हैं, सूर्य की किरणें उतनी ही तिरछी होती जाती हैं; इसी वजह से कर्क रेखा से सबसे दूर स्थित श्रीगंगानगर जिले में सूर्य की किरणें राज्य में सबसे अधिक तिरछी पड़ती हैं।

📏लंबाई, चौड़ाई एवं चरम बिंदु

  • राज्य की उत्तर-दक्षिण लंबाई 826 किमी है — गंगानगर के हिन्दुमल कोट के पास कोणा गाँव से लेकर बाँसवाड़ा की कुशलगढ़ तहसील के बोरकुंड गाँव तक — जबकि पूर्व-पश्चिम चौड़ाई 869 किमी है, जैसलमेर की सम तहसील के कटरा गाँव से धौलपुर के पास जगमोहन का पुरा तक; दोनों में 43 किमी का अंतर है।
  • राज्य के दोनों विकर्णों की लंबाई भी अलग-अलग है — दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व विकर्ण 784 किमी का है जबकि उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व विकर्ण 850 किमी का, यानी 66 किमी का अंतर; ये दोनों रेखाएं नागौर जिले में लगभग समकोण पर एक-दूसरे को काटती हैं।
  • धौलपुर के पास जगमोहन का पुरा राज्य का सबसे पूर्वी (चरम) बिंदु है, जहाँ सूर्योदय-सूर्यास्त सबसे पहले होता है, जबकि जैसलमेर का कटरा गाँव सबसे पश्चिमी (चरम) बिंदु है, जहाँ ये सबसे बाद में होते हैं — दोनों स्थानों के स्थानीय समय में लगभग 36 मिनट का अंतर है।
दिशाचरम बिंदु (गाँव)जिला
उत्तरकोणा (हिन्दुमल कोट के पास)गंगानगर
दक्षिणबोरकुंड (कुशलगढ़ तहसील)बाँसवाड़ा
पूर्वजगमोहन का पुराधौलपुर
पश्चिमकटरा (सम तहसील)जैसलमेर

🔷आकृति एवं आकार की तुलना

  • ब्रिटिश प्रशासक टी.एच. हेण्डले ने सबसे पहले राजस्थान की आकृति को विषमकोणीय चतुर्भुज बताया, जो रोम्बस या पतंग के समान दिखती है।
  • आकार की दृष्टि से राजस्थान जापान से थोड़ा छोटा है और कांगो, फिनलैण्ड, नॉर्वे, इटली, पोलैंड या जर्मनी जैसे देशों के लगभग बराबर है — यह ग्रेट ब्रिटेन से लगभग 1.4 गुना, नेपाल से 2.5 गुना तथा इजरायल से करीब 17 गुना बड़ा है।
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सीमाएं एवं सीमावर्ती जिले

Boundaries & Neighbouring Districts

इतने विशाल राज्य की सीमा भी उतनी ही लंबी है — एक ओर पाकिस्तान तो दूसरी ओर पांच भारतीय राज्य — और इस सीमा पर बसे जिलों से जुड़े कई दिलचस्प व परीक्षोपयोगी तथ्य सामने आते हैं।

🛡️कुल स्थलीय सीमा

  • राजस्थान की कुल स्थलीय सीमा लगभग 5,920 किमी लंबी है, जिसमें 1,070 किमी अंतरराष्ट्रीय सीमा (पाकिस्तान से) तथा 4,850 किमी अंतरराज्यीय सीमा (पांच राज्यों से) शामिल है।
  • पाकिस्तान से लगती सीमा को 'रेडक्लिफ लाइन' कहा जाता है, जो उत्तर में गंगानगर के हिन्दुमल कोट के पास से शुरू होकर बीकानेर, फलौदी व जैसलमेर होते हुए दक्षिण में बाड़मेर के भालगाँव तक जाती है; फलौदी जिला बनने के बाद अब इस सीमा से 5 जिले मिलते हैं, पहले केवल 4 जिले मिलते थे।

🗺️अंतरराज्यीय सीमाएं

  • राजस्थान की सबसे छोटी अंतरराज्यीय सीमा पंजाब से (केवल 89 किमी) है, जबकि सबसे लंबी सीमा — कुल मिलाकर सबसे लंबी सीमा भी — मध्यप्रदेश से (लगभग 1,600 किमी) है; अन्य पड़ोसी हैं हरियाणा (1,262 किमी), उत्तरप्रदेश (877 किमी) व गुजरात (1,022 किमी)।
  • जिलों के स्तर पर सबसे लंबी अंतरराज्यीय सीमा झालावाड़ की है (मध्यप्रदेश से, लगभग 520 किमी), जबकि सबसे कम लंबी सीमा बाड़मेर की है (गुजरात से मामूली-सी सीमा)।
पड़ोसी राज्य/देशसीमा-लंबाई (किमी)
पाकिस्तान (अंतरराष्ट्रीय)≈1,070
मध्यप्रदेश≈1,600
हरियाणा≈1,262
गुजरात≈1,022
उत्तरप्रदेश≈877
पंजाब≈89

🔀दो-दो सीमाओं वाले जिले

  • बाड़मेर एक अनूठा जिला है जिसकी सीमा पाकिस्तान (सिंध प्रांत, अंतरराष्ट्रीय) और गुजरात (अंतरराज्यीय) दोनों से मिलती है; इसी तरह गंगानगर की सीमा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत तथा भारत के पंजाब राज्य — दोनों से लगती है।
  • चार जिले ऐसे हैं जिनकी सीमा एक साथ दो राज्यों से मिलती है: बाँसवाड़ा (मध्यप्रदेश व गुजरात), धौलपुर (मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश), डीग (हरियाणा व उत्तरप्रदेश) तथा हनुमानगढ़ (हरियाणा व पंजाब); कोटा व चित्तौड़गढ़ की सीमा मध्यप्रदेश से दो अलग-अलग जगहों पर लगती है, और चित्तौड़गढ़ ही एकमात्र ऐसा जिला है जो दो अलग भू-भागों में बंटा हुआ है।

🧩सर्वाधिक सीमावर्ती एवं अंतर्वर्ती जिले

  • जयपुर, पाली, चित्तौड़गढ़ व नागौर — ये चार जिले राज्य में सबसे अधिक (7-7) अन्य जिलों से सीमा साझा करते हैं, जबकि 2024 के जिला पुनर्गठन के बाद जयपुर अब किसी भी अंतरराज्यीय सीमा से नहीं जुड़ा है।
  • राज्य के 13 जिले पूर्णतः 'अंतर्वर्ती' हैं यानी उनकी सीमा किसी अन्य राज्य या देश से नहीं मिलती — जैसे अजमेर, जोधपुर, पाली, बूँदी, टोंक व दौसा; वहीं 28 दिसंबर 2024 के पुनर्गठन के बाद अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित जिलों की संख्या 25 हो गई है।
  • दिसंबर 2024 के पुनर्गठन के बाद राजस्थान में अब 41 जिले व 7 संभाग हैं — जयपुर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर व भरतपुर — तथा राज्य का जनसंख्या घनत्व (2011 जनगणना) 200 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी है।

🆕जिला पुनर्गठन एवं फलौदी

  • 7 अगस्त 2023 को जोधपुर जिले का पुनर्गठन कर फलौदी नामक नया जिला बनाया गया, जिसमें बाप तहसील (नोख, तवरीवाला, जालूवाला, मदासर व बडौना पटवार सर्किल सहित) शामिल की गई।
  • जालूवाला सर्किल के रायचंदवाला व मालासर गाँवों की सीमा पाकिस्तान (रेडक्लिफ लाइन) से लगभग 20 किमी में मिलती है, जिससे फलौदी भी अब एक अंतरराष्ट्रीय सीमा वाला जिला बन गया है — राज्य में यह सबसे छोटी अंतरराष्ट्रीय सीमा है।
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भूगर्भिक संरचना एवं वर्गीकरण

Geological Foundations & Classification

नाम मिलने से बहुत पहले यह धरती एक ओर प्राचीन टेथिस सागर और दूसरी ओर गोंडवाना महाद्वीप की उथल-पुथल से गढ़ी गई — और भूगोलवेत्ता तभी से इस गहरे इतिहास को सुव्यवस्थित प्रदेशों में बाँटने की कोशिश करते रहे हैं।

🌋प्राचीन उद्गम: गोंडवाना एवं टेथिस सागर

  • राजस्थान की भूमि गोंडवाना लैंड (प्राचीन पैंजिया महाद्वीप का हिस्सा) के अवशेषों तथा गोंडवाना व अंगारालैंड को अलग करने वाले प्राचीन टेथिस सागर के अवशेष भाग से मिलकर बनी है।
  • राज्य की अरावली पहाड़ियाँ व दक्षिणी-पूर्वी पठार गोंडवाना लैंड से जुड़े हैं, जबकि उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल व पूर्वी मैदान को प्राचीन टेथिस सागर की तली माना जाता है, जिसे बाद में नदियों की लाई मिट्टी ने पाट दिया; राज्य का पहला व्यवस्थित भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ए.एम. हैरोन ने किया था।

🧱पूर्व-कैंब्रियन शैल समूह

  • अरावली पर्वतमाला का उत्थान पूर्व-कैंब्रियन काल में लगभग 65 करोड़ (650 मिलियन) वर्ष पूर्व हुआ था और यह दो बड़े शैल महासमूहों से बनी है — अरावली सुपर ग्रुप (मुख्यतः क्वार्टजाइट व फाइलाइट जैसी कायांतरित चट्टानें) तथा दिल्ली सुपर ग्रुप (रायलो, अलवर व अजबगढ़ समूह)।
  • आद्य महाकल्प की ये चट्टानें राज्य में आर्थिक दृष्टि से सबसे मूल्यवान मानी जाती हैं, जिनमें मैंगनीज, लौह अयस्क, ताँबा, अभ्रक, संगमरमर व ग्रेनाइट जैसे खनिज मिलते हैं; रायलो समूह का संगमरमर मकराना में प्रसिद्ध रूप से खनन किया जाता है।

🛢️विंध्यन, मध्यजीवी व तृतीयक निक्षेप

  • विन्ध्यन महासमूह की पुराजीव कालीन चट्टानें पूर्वी राजस्थान के विन्ध्यन बेसिन में करौली-धौलपुर से निम्बाहेड़ा तक फैली हैं; वहीं पश्चिम में जैसलमेर-बाड़मेर में जमी मध्यजीवी कालीन जुरैसिक व क्रिटेशियस चट्टानें उन मालानी आग्नेय चट्टानों पर टिकी हैं जो अरावली के किनारों पर हुए प्राचीन लावा विस्फोटों से बनीं।
  • बाड़मेर व जैसलमेर के आसपास मिलने वाली इन्हीं तृतीयक कालीन चट्टानों में राज्य के विशाल तेल, प्राकृतिक गैस व लिग्नाइट भंडार पाए जाते हैं, साथ ही जैसलमेर के आकल वुड फॉसिल पार्क जैसे जीवाश्म भंडार भी यहीं मिलते हैं।

🗂️भौतिक प्रदेशों का वर्गीकरण

  • प्रो. वी.सी. मिश्रा का 1968 का अग्रणी वर्गीकरण राज्य को 7 भौतिक प्रदेशों में बाँटता है, जबकि हरिमोहन सक्सेना व प्रो. तिवारी के 1994 के वर्गीकरण में इससे आगे बढ़कर प्रमुख, गौण, तृतीयक व सूक्ष्म प्रदेश तय किए गए।
  • वर्तमान उच्चावच के आधार पर राज्य को चार व्यापक भौतिक विभागों में बाँटा जाता है: उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल (61.11% क्षेत्रफल, 40% जनसंख्या), मध्यवर्ती अरावली पर्वतीय प्रदेश (9% क्षेत्रफल, 10% जनसंख्या), पूर्वी मैदान (23% क्षेत्रफल, 39% जनसंख्या) तथा दक्षिणी-पूर्वी पठार (6.89% क्षेत्रफल, 11% जनसंख्या)।
भौतिक प्रदेशक्षेत्रफल %जनसंख्या %
उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल61.11%40%
मध्यवर्ती अरावली पर्वतीय प्रदेश9%10%
पूर्वी मैदान23%39%
दक्षिणी-पूर्वी पठार6.89%11%
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उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल एवं थार

The North-Western Desert & the Thar

राजस्थान का लगभग तीन-पांचवां हिस्सा मरुस्थल है — बदलते बालुका स्तूपों, खारी झीलों और अप्रत्याशित जैव विविधता से भरी यह भूमि विश्व के सबसे घने बसे मरुस्थलों में गिनी जाती है।

🐫विस्तार एवं सीमाएं

  • यह शुष्क पट्टी राज्य के लगभग 61.11% क्षेत्रफल को घेरती है और 2024 के पुनर्गठन के बाद 16 जिलों में फैली हुई है; इसकी पश्चिमी सीमा रेडक्लिफ लाइन, पूर्वी सीमा अरावली पर्वतमाला व 50 सेमी सम वर्षा रेखा, दक्षिणी सीमा गुजरात तथा उत्तरी सीमा पंजाब-हरियाणा बनाते हैं।
  • अरावली की वृष्टि छाया में होने के कारण यहाँ वार्षिक वर्षा मात्र 20-50 सेमी रहती है, गर्मियों में तापमान 49° सेल्सियस तक तथा सर्दियों में -3° सेल्सियस तक चला जाता है; इसे 25 सेमी सम वर्षा रेखा के आधार पर रेतीले शुष्क मैदान (पश्चिम में) व अर्द्धशुष्क मैदान (पूर्व में) में बाँटा जाता है।

🧂खारी झीलें एवं टेथिस सागर की विरासत

  • जैसलमेर की चट्टानों में मिले समुद्री जीवाश्म बताते हैं कि टेथिस सागर अपर टर्शियरी काल तक इस भाग पर फैला था; इसके पीछे हटने पर उजागर हुई समुद्री तली ऊपर उठकर आज का मरुस्थल बनी, और खारी झीलें इसके प्रमाण के रूप में बची रहीं।
  • इन झीलों के खारे रहने का कारण गहराई में मौजूद माइकायुक्त नमकीन चट्टानें हैं, जिनका नमक केशाकर्षण से सतह पर आता है, और नदियाँ भी बहते हुए नमक के कण जोड़ती रहती हैं — साँभर, पचपदरा, डीडवाना व लूणकरणसर इस क्षेत्र के प्रमुख नमक स्रोत हैं।

🌬️बालुका स्तूप: आकार एवं गति

  • हवा के अपरदन व निक्षेपण से बने बालुका स्तूप महान मरुस्थल के लगभग 58.5% भाग को ढकते हैं और मार्च से जुलाई के बीच सर्वाधिक स्थानांतरित होते हैं; इनके अनेक आकार मिलते हैं — अर्द्धचन्द्राकार बरखान (चूरू-बीकानेर के पास आम), हवा की दिशा के समानांतर बनने वाले रेखीय/सीफ स्तूप (जैसलमेर, जोधपुर) तथा स्थिर हवा के लंबवत बनने वाले अनुप्रस्थ स्तूप।
  • अन्य प्रकारों में हेयरपिन आकार के पेराबोलिक स्तूप, बहु-नुकीले ताराबालुका स्तूप (मोहनगढ़-पोकरण के पास), आपस में जुड़े नेटवर्क स्तूप (हनुमानगढ़ से हरियाणा की ओर), किसी अवरोध (चट्टान/झाड़ी) के इर्द-गिर्द बनने वाले अवरोधी स्तूप तथा झाड़ियों के गुच्छों के आसपास बनने वाले निचले झाड़ी-स्तूप (श्रब-कॉपिस डयून्स) शामिल हैं।

🏞️अर्द्धशुष्क उप-प्रदेश

  • अर्द्धशुष्क मैदान (राजस्थान बांगड़) रेतीले मरुस्थल व अरावली के बीच स्थित है, जिसका उत्तरी भाग घग्घर का मैदान है (कभी हिमालय से निकलने वाली अब सूख चुकी घग्घर, सरस्वती, सतलज व चौतांग नदियों से बना), उत्तर-पूर्वी भाग शेखावाटी का आंतरिक जल प्रवाह क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिमी भाग लूनी-जवाई (गौड़वाड़) बेसिन तथा मध्यवर्ती भाग नागौरी उच्च भूमि है।
  • नागौरी उच्च भूमि की खारी मिट्टी तथा डीडवाना-कुचामन, साँभर व नावा की झीलों से व्यावसायिक नमक उत्पादन होता है, जबकि यहाँ के भूजल में अत्यधिक फ्लोराइड से फ्लोरोसिस रोग होता है — इसी वजह से जायल से पुष्कर तक फैली इस पट्टी को 'कूबड़ पट्टी' कहा जाता है।

🦎थार मरुस्थल एवं राष्ट्रीय मरु उद्यान

  • संपूर्ण थार (महान भारतीय) मरुस्थल का लगभग 62% भाग अकेले राजस्थान में स्थित है, और यह विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला व सर्वाधिक जैव विविधता वाला मरुस्थल माना जाता है — विश्व का एकमात्र ऐसा मरुस्थल भी जिसके निर्माण का मुख्य श्रेय दक्षिण-पश्चिमी मानसूनी हवाओं को जाता है।
  • इसकी प्रमुख नदी लूनी है, जो अजमेर के पास से निकलकर कच्छ के रन में विलीन हो जाती है; राज्य का सबसे बड़ा वन्यजीव अभयारण्य राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर व बाड़मेर में फैला) भी इसी में स्थित है, जिसमें जीवाश्मों से भरपूर आकल वुड फॉसिल पार्क शामिल है।
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अरावली पर्वत, पूर्वी मैदान एवं हाड़ौती पठार

The Aravalli Hills, Eastern Plains & Hadoti Plateau

मरुस्थल से आगे बढ़ते ही राजस्थान हरा-भरा हो जाता है — प्राचीन वलित पहाड़ियों के बाद उपजाऊ नदी बेसिन और अंत में दक्षिण-पूर्व का लावा-ढका पठार शुरू होता है।

🏔️अरावली पर्वतमाला

  • लगभग 650 मिलियन वर्ष पुरानी अरावली विश्व के प्राचीनतम वलित पर्वतों में गिनी जाती है और कभी वर्तमान हिमालय से भी ऊँची थी, पर युगों के क्षरण से अब काफी नीची हो गई है; यह गुजरात के खेड़ ब्रह्म से दिल्ली के रायसीना पहाड़ी तक लगभग 692 किमी कर्णवत फैली है, जिसमें से 550 किमी (80%) राजस्थान में है।
  • भारत की महान जल विभाजक रेखा के रूप में यह सिंधु बेसिन को गंगा बेसिन से अलग करती है — इसके पूर्व में गिरने वाला पानी बंगाल की खाड़ी तक तथा पश्चिम का पानी अरब सागर तक पहुँचता है; अबुल फजल ने इसकी पहाड़ियों को 'ऊँट की गर्दन' कहा तो कर्नल जेम्स टॉड ने इसे राजपूताने की 'सुरक्षा दीवार' बताया।

🚩तीन विभाजन एवं गुरु शिखर

  • यह पर्वतमाला उत्तर-पूर्व की ओर संकरी व नीची तथा दक्षिण-पश्चिम की ओर चौड़ी व ऊँची होती जाती है, इसीलिए भूगोलवेत्ता इसे तीन भागों में बाँटते हैं: उत्तरी-पूर्वी पहाड़ी प्रदेश (जयपुर से खेतड़ी-झुंझुनूं, औसत ऊँचाई 450 मी.), मध्यवर्ती अरावली (अजमेर-ब्यावर-भीलवाड़ा पट्टी, औसत 550 मी.) तथा दक्षिणी अरावली (सिरोही से राजसमंद, औसत 950 मी.)।
  • दक्षिणी अरावली में राज्य की सबसे ऊँची चोटियाँ हैं — गुरु शिखर (1722 मी., सिरोही के आबू खंड में) हिमालय व नीलगिरि के बीच सबसे ऊँचा स्थान है, इसके बाद सेर (1597 मी.), दिलवाड़ा (1442 मी.) व जरगा (1431 मी., उदयपुर के पास भोराठ पठार पर) आते हैं; कर्नल टॉड ने गुरु शिखर को 'संतों का शिखर' तथा माउंट आबू को ही 'हिन्दू ओलम्पस' कहा।

⛏️दर्रे, बेसिन एवं खनिज

  • मेवाड़ क्षेत्र में अरावली को काटते हुए 'नाल' या 'घाट' नाम के तंग दर्रे हैं — जैसे देसूरी की नाल, हल्दीघाटी व सोमेश्वर की नाल — जो ऐतिहासिक रूप से मारवाड़ को मेवाड़ से जोड़ते थे, जबकि पहाड़ियों से घिरे अजमेर, पुष्कर, उदयपुर व राजसमंद जैसे बेसिन कटकों के बीच स्थित हैं।
  • ताँबा, सीसा, जस्ता, अभ्रक, चाँदी, लोहा, मैंगनीज, संगमरमर व ग्रेनाइट जैसे खनिज अरावली पट्टी से भरपूर मात्रा में निकाले जाते हैं, जो राज्य की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देते हैं, जबकि भील, मीणा, गरासिया व डामोर जैसी जनजातियाँ इसके पहाड़ी इलाकों में रहती हैं।

🌾पूर्वी मैदान: बनास, चम्बल एवं छप्पन

  • अरावली के पूर्व स्थित यह मैदान राज्य के लगभग 23% क्षेत्रफल व 39% जनसंख्या को समेटे है और तीन बेसिनों में बँटा है: बनास-बाणगंगा बेसिन (बनास व खारी, मोरेल, बेड़च जैसी सहायक नदियों से सिंचित), चम्बल बेसिन (धौलपुर, करौली व सवाई माधोपुर में अपने नाटकीय बीहड़ों के लिए प्रसिद्ध), तथा दक्षिण में छप्पन/माही बेसिन, जिसे स्थानीय भाषा में वागड़ कहा जाता है।
  • इस मैदान का सामान्य ढाल पश्चिम से पूर्व की ओर है, इसलिए अधिकांश नदियाँ बंगाल की खाड़ी की ओर बहती हैं — केवल सुदूर दक्षिण में धरातल का ढाल उलटा होने से माही नदी इसके बजाय अरब सागर की खम्भात की खाड़ी में जा गिरती है।

🌋हाड़ौती (दक्षिण-पूर्वी) पठार

  • कोटा, बूँदी, झालावाड़, बाराँ व चित्तौड़गढ़ में फैला यह पठार राज्य के लगभग 6.89-7% क्षेत्रफल को घेरता है और मूलतः मालवा पठार का उत्तरी विस्तार है, जो विन्ध्यन बलुआ पत्थर के कागारों व दक्कन ट्रेप लावा से बना है; यहाँ राज्य की सबसे अधिक वार्षिक वर्षा (80-120 सेमी) होती है।
  • चम्बल तथा इसकी सहायक काली सिंध, परवन व पार्वती नदियाँ इस पठार को सींचती हैं, और बाराँ जिले का रामगढ़ राजस्थान के एकमात्र ज्ञात उल्कापिंड-प्रहार क्रेटर (रामगढ़ एस्ट्रोब्लेम) का घर है।