राजस्थान की प्रमुख विकास परियोजनाएँ
Major Development Projects of Rajasthan
विकास प्राधिकरणों और आवासन मंडल से लेकर स्वच्छता मिशन, ग्रामीण योजनाओं और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं तक — राजस्थान को आकार देने वाली संस्थाओं, नीतियों व अभियानों की पूरी झलक इस गाइड में।
शहरी शासन संस्थाएँ, नीतियाँ एवं आवास
राजस्थान में शहरों के सुनियोजित विकास के लिए प्राधिकरणों, न्यासों, आवासन मंडल और कई नई नीतियों का जाल खड़ा किया गया है — यहाँ इन सबकी बनावट और हालिया बदलावों को समझें।
🏛️विकास प्राधिकरण एवं शहरी न्यास का ढाँचा
- शहरी आबादी की जरूरतें व्यवस्थित रूप से पूरी करने के लिए राज्य में विकास प्राधिकरण, शहरी विकास न्यास, नगर नियोजन कार्यालय, आवासन मंडल और मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन जैसी संस्थाएँ काम करती हैं।
- वर्तमान में राज्य में 7 विकास प्राधिकरण (जयपुर, अजमेर, जोधपुर, कोटा, उदयपुर, बीकानेर, भरतपुर) और 12 शहरी विकास न्यास (अलवर, आबू, बाड़मेर, बालोतरा, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, दौसा-बाँदीकुई, जैसलमेर, पाली, श्रीगंगानगर, सीकर, सवाईमाधोपुर) कार्यरत हैं।
- नागरिक सुविधाओं के विकास में राजस्थान आवासन मंडल, जयपुर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और भिवाड़ी एकीकृत विकास प्राधिकरण (बीआईडीए) भी योगदान देते हैं।
🕌अजमेर, जयपुर व जोधपुर विकास प्राधिकरण
- जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) का गठन 1982 में हुआ; ऊर्जा संरक्षण में उल्लेखनीय कार्य हेतु ऊर्जा विभाग ने इसे 'राजस्थान एनर्जी कन्जर्वेशन अवार्ड-2020' प्रदान किया।
- अजमेर विकास प्राधिकरण की स्थापना 25 सितम्बर, 2013 को पहले से मौजूद संस्था को क्रमोन्नत करके की गई।
- जोधपुर विकास प्राधिकरण का गठन राज्य सरकार ने 30 अगस्त, 2008 को किया था।
🏯कोटा, उदयपुर, बीकानेर व भरतपुर विकास प्राधिकरण
- कोटा विकास प्राधिकरण के लिए विधेयक विधानसभा से 24 जुलाई, 2023 को पारित हुआ और इसकी स्थापना 7 अक्टूबर, 2023 की अधिसूचना से हुई।
- उदयपुर विकास प्राधिकरण का गठन 2023 में विधानसभा से अधिनियम पारित कराकर किया गया; इसकी अधिसूचना 29 सितम्बर, 2023 को जारी हुई।
- बीकानेर विकास प्राधिकरण (बीडीए) का गठन 15 दिसंबर, 2024 को हुआ और वर्तमान में इसके अधिकार क्षेत्र में 188 राजस्व गाँव आते हैं।
- भरतपुर विकास प्राधिकरण विधेयक 2025, 12 मार्च, 2025 को पारित हुआ; इसमें भरतपुर शहर के साथ भरतपुर, कुम्हेर व रारह तहसीलों के 210 गाँव शामिल किए गए हैं।
🆕नए प्राधिकरण, नगर निगम विलय व NCR उपक्षेत्र
- मुख्यमंत्री ने 12 मार्च, 2025 को भिवाड़ी विकास प्राधिकरण, दौसा-बाँदीकुई नगर विकास न्यास (गठन मई 2025) और बालोतरा नगर विकास न्यास (गठन 21 मई, 2025) की घोषणा की थी।
- स्वायत्त शासन विभाग ने 28 मार्च, 2025 को जयपुर, जोधपुर व कोटा के दो-दो नगर निगमों को मिलाकर हर शहर में एक ही नगर निगम बनाने की अधिसूचना जारी की।
- राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के राजस्थान उपक्षेत्र में अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़ का आंशिक भाग तथा भरतपुर व डीग जिले शामिल हैं।
🏘️राजस्थान आवासन मंडल
- बढ़ते औद्योगीकरण व शहरीकरण से उपजी आवास समस्या के त्वरित हल के लिए 24 फरवरी, 1970 को राजस्थान आवासन मंडल की स्थापना हुई।
- मंडल ने निर्माण गुणवत्ता व निगरानी हेतु 'सजग' (22-8-2020), वृक्षारोपण निगरानी हेतु 'RHB Green' तथा आवास माँग आकलन हेतु 'RHB आवास' (2-10-2021) जैसे मोबाइल ऐप विकसित किए हैं।
- मुख्यमंत्री जन आवास योजना (1-9-2020 से) आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आवास देती है, जबकि मुख्यमंत्री शिक्षक एवं प्रहरी आवासीय योजना शिक्षकों व प्रहरियों के लिए आवास उपलब्ध कराती है।
- 2025-26 में मंडल के मुख्यालय भवन को ब्यूरो ऑफ एनर्जी एफिशिएंसी की 5-स्टार रेटिंग हेतु पुरस्कार मिला, और सुश्री रेणु सैनी को किफायती आवास क्षेत्र में चौथा माही एक्सीलेंस नेशनल (नारेडको) अवॉर्ड 2025-26 मिला।
🏢रुडसिको, CMAR व रेरा
- शहरी निकायों को योजना, परामर्श व वित्त पोषण में मदद के लिए 1 दिसम्बर, 2004 को RUIFDCO बना था, जिसका 19 नवम्बर, 2015 को नाम बदलकर 'राजस्थान शहरी पेयजल, सीवरेज व आधारभूत निगम (रुडसिको)' किया गया।
- राविल (12 अप्रैल, 2016) व RUIDP (13 अप्रैल, 2016) को क्रमशः रुडसिको में मिला दिया गया, जो अब शहरी पेयजल, सीवरेज व आधारभूत ढाँचे की निगरानी करता है।
- सिटी मैनेजर्स एसोसिएशन ऑफ राजस्थान (CMAR), जो 1958 के सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत है, USAID, US-AEP और ICMA के सहयोग से नगर निकायों को क्षमता वर्धन में तकनीकी सहायता देती है।
- रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डवलपमेंट) एक्ट-2016 के तहत राज्य ने 6 मार्च, 2019 को रेरा व रियल एस्टेट अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाया; MOHUA ने 4 सितंबर, 2025 को एकीकृत रेरा पोर्टल लॉन्च किया।
📜नगर नियोजन व ग्रामीण विकास विभाग का इतिहास
- 1964 में गठित नगर नियोजन विभाग शहरों-कस्बों के सुनियोजित विकास हेतु मास्टर प्लान तैयार करने का मुख्य कार्य करता है।
- ग्रामीण विकास के लिए 1971 में 'विशिष्ट योजना संगठन' बना था, जो 1979 में पुनर्गठित होकर 'विशिष्ट योजनाएँ एवं एकीकृत ग्रामीण विकास विभाग' बना और 1 अप्रैल, 1999 को 'ग्रामीण विकास विभाग' कहलाया।
- जनवरी 2024 में ग्रामीण विकास व पंचायतीराज विभाग अलग किए गए थे, पर मार्च 2026 में इन्हें फिर मिलाकर 'ग्रामीण विकास व पंचायतीराज विभाग' नाम दिया गया।
📋नई शहरी नीतियाँ (2024-26)
- राजस्थान टाउनशिप पॉलिसी 2024 को कैबिनेट ने 14 जुलाई, 2025 को मंजूरी दी और शहरी विकास विभाग ने 17 जुलाई, 2025 को अधिसूचित किया, ताकि संतुलित शहरी विस्तार व बेहतर जीवन स्तर सुनिश्चित हो सके।
- भूमि आवंटन नीति-2025 (1 सितंबर, 2025 से) उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन व संस्थागत उद्देश्यों के लिए सरकारी भूमि के पारदर्शी आवंटन का प्रावधान करती है।
- राज्य सीवरेज व अपशिष्ट जल नीति, 2025 को कैबिनेट ने 31 अगस्त, 2025 को स्वीकृति दी और यह 2030 तक पाँच वर्षों के लिए प्रभावी रहेगी; ट्रांजिट ओरिएंटेड डवलपमेंट पॉलिसी 10 दिसंबर, 2025 को भूमि उपयोग व सार्वजनिक परिवहन को जोड़ने के उद्देश्य से जारी हुई।
- अशांत क्षेत्र सम्पत्ति हस्तांतरण विधेयक 2026 (21 जनवरी, 2026 को कैबिनेट स्वीकृत) दंगा या हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में सक्षम प्राधिकारी की अनुमति बिना सम्पत्ति हस्तांतरण को अमान्य व दंडनीय बनाता है।
स्वच्छता मिशन एवं स्वच्छ सर्वेक्षण
शहरों-गाँवों को स्वच्छ बनाने के राष्ट्रीय अभियान से लेकर सालाना होने वाले स्वच्छ सर्वेक्षण तक — जानें राजस्थान ने इस मोर्चे पर क्या हासिल किया है।
🚽स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण)
- स्वच्छता राज्य सूची का विषय है; SBM-ग्रामीण का पहला चरण 2 अक्टूबर, 2014 से शुरू हुआ और राजस्थान में इसका शुभारंभ पं. दीनदयाल उपाध्याय के जन्मस्थान धनक्या गाँव (जयपुर) से हुआ था।
- 31 मार्च, 2018 तक पूरा राजस्थान खुले में शौच से मुक्त (ODF) हो चुका था; मिशन का दूसरा चरण 19 फरवरी, 2020 को स्वीकृत होकर 2026-27 तक बढ़ाया जा चुका है, जिसका लक्ष्य गाँवों को ODF प्लस मॉडल गाँव बनाना है।
- राजस्थान देश का पहला राज्य है जिसने SBM-ग्रामीण के लिए बेसिक शेड्यूल ऑफ रेट (BSR) जारी किया; राज्य में 2.78 लाख व्यक्तिगत तथा 4,000 से अधिक सामुदायिक शौचालय बनाए जा चुके हैं।
- 'मिशन पिंक टॉयलेट' के तहत हर ग्राम पंचायत के सर्वाधिक छात्रा-नामांकन वाले सरकारी स्कूल में बालिकाओं के लिए 'पिंक टॉयलेट' बनाए जा रहे हैं; स्वच्छता ही सेवा अभियान 2025 में राजस्थान लक्ष्य पूर्ति में देश में प्रथम रहा।
🏙️स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)
- SBM-शहरी का पहला चरण 2 अक्टूबर, 2014 से 1 सितंबर, 2021 तक चला, जिसका लक्ष्य शहरों को खुले में शौच से मुक्त करना व ठोस कचरे का 100% वैज्ञानिक प्रबंधन करना था।
- प्रधानमंत्री ने SBM (शहरी) 2.0 का शुभारंभ 1 अक्टूबर, 2021 को किया, जिसकी अवधि 2 अक्टूबर, 2026 तक है और लक्ष्य 2026 तक 'कचरा-मुक्त' शहरी भारत बनाना है।
- SBM 2.0 का जोर ठोस कचरे के पृथक्करण, 3R सिद्धांत (कम करना, पुनर्चक्रण, पुनः उपयोग) और लीगेसी डंपसाइट के उपचार पर है; निधि का बँटवारा जनसंख्या वर्ग के अनुसार केंद्र, राज्य व 15वें वित्त आयोग/नगरीय निकाय के हिस्से में तय है।
📊स्वच्छ सर्वेक्षण — इतिहास व संरचना
- दुनिया का सबसे बड़ा शहरी स्वच्छता सर्वे 'स्वच्छ सर्वेक्षण' 2016 में मात्र 73 नगरीय निकायों से शुरू हुआ था और अब 4,500 से अधिक शहरों — 4,589 ULB, 58 छावनी बोर्ड व 88 गंगा शहरों — को कवर करता है।
- स्वच्छ सर्वेक्षण 2024-25 (9वाँ संस्करण) पूरी तरह डिजिटल हुआ, जिसका टूलकिट केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने 17 जनवरी, 2025 को नए रूप में लॉन्च किया; इसमें शहरों को पहली बार पाँच जनसंख्या-वर्गों में बाँटा गया।
- शीर्ष प्रदर्शन बनाए रखने वाले शहरों के लिए 'सुपर स्वच्छ लीग' श्रेणी शुरू की गई; राष्ट्रपति ने 17 जुलाई, 2025 को 4 श्रेणियों में कुल 78 पुरस्कार प्रदान किए।
🥇राजस्थान का प्रदर्शन व राष्ट्रीय पहचान
- छोटे शहर वर्ग (20,000-50,000 आबादी) में डूँगरपुर 'सुपर स्वच्छ लीग' विजेता बना, जबकि जयपुर ग्रेटर 'प्रॉमिसिंग स्वच्छ शहर' श्रेणी में शामिल हुआ; 10 लाख से ऊपर आबादी वर्ग में जयपुर ग्रेटर 16वें व जयपुर हैरिटेज 20वें स्थान पर रहे।
- पूर्व डूँगरपुर नगर परिषद अध्यक्ष के.के. गुप्ता को उनके 'डूँगरपुर मॉडल' के लिए स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) का राज्य ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया; उनके नेतृत्व में डूँगरपुर राज्य का पहला खुले में शौच-मुक्त शहर बना था।
- गारबेज फ्री सिटी 2024 रेटिंग में जयपुर नगर निगम व जयपुर हैरिटेज नगर निगम को 3-स्टार तथा डूँगरपुर व सीकर नगर परिषद को 1-स्टार रेटिंग मिली।
🤝स्वच्छ शहर जोड़ी व अन्य स्वच्छता अभियान
- MOHUA ने 27 सितंबर, 2025 को सोनीपत से 'स्वच्छ शहर जोड़ी (SSJ)' पहल शुरू की, जिसमें करीब 72 मेंटर शहरों को लगभग 200 मेंटी शहरों से जोड़कर पारस्परिक सीख को बढ़ावा दिया जाता है।
- स्वच्छोत्सव (स्वच्छता ही सेवा) 2025, 17 सितंबर से 2 अक्टूबर, 2025 तक मनाया गया, जिसमें 25 सितंबर को राष्ट्रव्यापी श्रमदान कार्यक्रम 'एक दिन, एक घंटा, एक साथ' भी हुआ।
- मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती (सुशासन दिवस) पर 14 मार्च, 2026 को अल्बर्ट हॉल, जयपुर से राज्यव्यापी 'स्वच्छता संकल्प एवं जागरूकता कार्यक्रम' शुरू किया, जबकि 'क्लीन अजमेर ग्रीन अजमेर मुहिम' 21 मार्च, 2026 से जवाहर फाउंडेशन द्वारा अजमेर को पॉलिथीन-मुक्त बनाने हेतु चलाई गई।
🌬️स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025
- राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत 130 शहरों का वार्षिक स्वच्छ वायु सर्वेक्षण होता है, जिसके पुरस्कार 9 सितंबर, 2025 को दिए गए।
- 10 लाख से अधिक आबादी वर्ग में राजस्थान के जयपुर को 26वाँ, जोधपुर को 35वाँ और कोटा को 37वाँ स्थान मिला; 3-10 लाख आबादी वर्ग में उदयपुर 15वें स्थान पर रहा।
ग्रामीण विकास योजनाएँ एवं जनसहभागी अभियान
गाँव-गाँव तक योजनाओं की पहुँच सुनिश्चित करने वाले शिविरों से लेकर पंचायत नियोजन और आदर्श गाँव योजनाओं तक — राजस्थान के ग्रामीण विकास तंत्र की झलक।
⛺ग्राम उत्थान व सेवा शिविर
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 22 जनवरी, 2026 को सिरोही से 'ग्राम उत्थान शिविर' राज्यव्यापी शुरू किया, जो 13 विभागों की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए दो चरणों में 2,839 गिरदावर सर्किलों में आयोजित हुए।
- मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर, 2025 से 'शहरी सेवा शिविर' (मालवीय नगर, जयपुर से) और 'ग्रामीण सेवा शिविर' (बस्सी तहसील से) एक साथ शुरू किए, ताकि नागरिकों को योजनाओं की पहुँच और साफ-सुरक्षित शहर-गाँव सुनिश्चित हो सकें।
- LED वैन आधारित 'ग्राम रथ अभियान' 27 अप्रैल से 16 मई, 2026 तक चला और किसानों-पशुपालकों तक 13 विभागों की योजनाओं की जानकारी पहुँचाई; रथ पड़ावों पर होने वाली 'संध्या चौपाल' अब 'ग्राम विकास चौपाल' के रूप में जारी रहेगी।
🗣️जनसहभागी अभियान (वार्ड, संसद, दूरस्थ क्षेत्र)
- 'मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-शहरी वार्ड अभियान' (19 मार्च-15 मई, 2026) के तहत राज्य के 457 पंचायत समितियों की 14,403 ग्राम पंचायतों और 309 नगरीय निकायों के 10,245 वार्डों के लिए विकास रोडमैप बनाया गया।
- 'ग्राम संसद-राजस्थान सरपंच संवाद' 23 फरवरी, 2026 को आयोजित हुआ, जिसमें राज्यपाल ने सरपंचों से संवाद कर नियोजित ग्राम विकास का आह्वान किया।
- 'जन भागीदारी-सबसे दूर, सबसे पहले अभियान' 18-25 मई, 2026 तक जयपुर जिले के 10 ब्लॉकों की 105 ग्राम पंचायतों के 177 जनजाति-बहुल गाँवों में जनजातीय गरिमा उत्सव के तहत चलाया गया।
💻पंचायत नियोजन व डिजिटल पहलें
- पंचायत विकास योजना (पीडीपी) 2015 से हर साल तैयार होती है, जिसमें ग्राम सभाएँ जरूरतों के आधार पर प्रस्ताव स्वीकृत कर काम की योजना ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर अपलोड करती हैं; 'जन योजना अभियान 2025-26' (2 अक्टूबर, 2025-31 मार्च, 2026) 2026-27 की पीडीपी बनाने हेतु चला।
- स्वामित्व योजना (राष्ट्रीय पंचायत दिवस, 24 अप्रैल 2020 को शुरू) में भारतीय सर्वेक्षण विभाग के ड्रोन सर्वे से गाँवों के आबादी क्षेत्र के डिजिटल नक्शे बनाकर संबंधित ग्राम पंचायत को सौंपे जाते हैं।
- विभागीय योजनाओं की निगरानी सुधारने हेतु e-वर्क 2.0 पोर्टल व मोबाइल ऐप 27 मार्च, 2025 को लॉन्च कर 1 अप्रैल, 2025 से प्रभावी किया गया; 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर 2018-19 से 'आपणी योजना आपणो विकास' के तहत सहायता राशि सीधे ग्राम पंचायत के खाते में भेजी जाती है।
🏡आदर्श ग्राम व सामाजिक न्याय योजनाएँ
- राजस्थान 23 जुलाई, 2010 को श्रीगंगानगर के गाँव 18 बीबी से प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना; यह अब 40% या अधिक अनुसूचित जाति आबादी वाले गाँवों के लिए पीएम-अजय योजना के 'आदर्श ग्राम' घटक के रूप में चलती है, जिसमें राज्य के 32 जिलों के 2,009 गाँव चुने गए हैं।
- सांसद आदर्श ग्राम योजना (11 अक्टूबर, 2014 से) में राजस्थान में दिसंबर 2025 तक 8 चरणों में कुल 190 ग्राम पंचायतें चुनी जा चुकी हैं; बाबा साहेब अम्बेडकर संबल योजना (14 अप्रैल, 2025) 40% से अधिक अनुसूचित जाति आबादी वाले गाँवों में आधारभूत ढाँचा विकसित करती है।
- पीएम-अजय (1 जुलाई, 2021 से) प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना, अनुसूचित जाति उपयोजना विशेष केंद्रीय सहायता और बाबू जगजीवन राम छात्रावास योजना को मिलाकर बनी 100% केंद्र-पोषित योजना है, जो 28 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में लागू है।
🖋️विधायक व सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम
- MLALAD (1999-2000 से) पूर्णतः राज्य-पोषित है; 2021-22 से हर विधायक 5 करोड़ रुपये तक के कार्यों की सिफारिश कर सकता है, और जिला स्तर पर स्वीकृति सीमा 20 लाख से बढ़ाकर 50 लाख रुपये की गई है।
- MPLAD (23 दिसंबर, 1993 से) पूर्णतः केंद्र-पोषित है और राज्य के 25 लोकसभा व 10 राज्यसभा सांसदों के क्षेत्रों में लागू है; 2011-12 से हर सांसद को सालाना 5 करोड़ रुपये मिलते हैं और सिफारिशें अब e-साक्षी पोर्टल से ऑनलाइन भेजी जाती हैं।
- दोनों योजनाओं में जिला परिषद की ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ नोडल एजेंसी है; MLALAD में हर वर्ष कम-से-कम 20% राशि SC/ST बस्तियों-संबल गाँवों तथा 25% मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना हेतु आवंटित करना अनिवार्य है।
🏜️थार सीमा क्षेत्र व वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम
- मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (2025-26 बजट घोषणा, दिशानिर्देश 26 मार्च, 2025) अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास 5 जिलों के 18 ब्लॉकों के 1,206 गाँवों पर लागू है, जिसका सालाना बजट 150 करोड़ रुपये है।
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-II को 2 अप्रैल, 2025 को मंजूरी दी; राजस्थान के 5 सीमावर्ती जिलों के 184 सामरिक गाँव (श्रीगंगानगर 68, बीकानेर 46, बाड़मेर 36, जैसलमेर 30, फलौदी 4) इसमें चुने गए हैं।
- वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम-I अरुणाचल प्रदेश के 'किबिथू' गाँव से 10 अप्रैल, 2023 को शुरू हुआ था; 184 चयनित गाँवों में से 123 में 232.82 करोड़ रुपये से अधिक के 515 कार्य स्वीकृत हो चुके हैं।
🎯जिला-ब्लॉक स्तरीय उत्थान योजनाएँ
- डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी जिला उत्थान योजना (जून 2025 से) क्षेत्रीय असंतुलन दूर कर जिलों का सर्वांगीण विकास करती है; 2025-26 हेतु 500 करोड़ रुपये आवंटित हैं और सार्वजनिक योगदान से बने कार्यों में दानदाता का नाम अंकित कराने पर 51% योगदान अनिवार्य है।
- गुरु गोलवलकर आकांक्षी ब्लॉक विकास योजना, केंद्र की आकांक्षी जिला योजना की तर्ज पर 2025-26 बजट में लाई गई; 17 अप्रैल, 2025 के दिशानिर्देशों के बाद यह 35 की जगह 41 पिछड़े ब्लॉकों पर लागू है और 24 अक्टूबर, 2025 को औपचारिक रूप से शुरू हुई।
- यह योजना स्वास्थ्य-पोषण, शिक्षा, आधारभूत ढाँचा, कृषि व कौशल विकास जैसे पाँच क्षेत्रों में काम करती है, जहाँ तिमाही रैंकिंग में शीर्ष तीन ब्लॉकों को क्रमशः 50, 35 व 25 लाख रुपये के वार्षिक पुरस्कार मिलते हैं।
📚अटल ज्ञान केन्द्र व बर्तन बैंक योजना
- सुशासन दिवस (25 दिसंबर, 2024) पर मुख्यमंत्री ने हर ग्राम पंचायत में अटल ज्ञान केन्द्र बनाने की घोषणा की; 2025-26 बजट में चरणबद्ध निर्माण तय हुआ और 29 मार्च, 2025 को दिशानिर्देश जारी हुए।
- बर्तन बैंक योजना (दिशानिर्देश 25 मार्च, 2025) में हर ग्राम पंचायत को न्यूनतम 400 बर्तन सेट मिलते हैं, जिन्हें शादी-समारोहों के लिए केवल 3 रुपये में किराए पर लिया जा सकता है; BPL, SC-ST व दिव्यांगजनों को किराए में 50% छूट मिलती है।
- राज्य का पहला स्टील बर्तन बैंक मार्च 2025 में कोटा जिले की रामगंजमंडी विधानसभा के खैराबाद पंचायत समिति में शुरू हुआ; इसे राजीविका महिला स्वयं सहायता समूह ग्राम पंचायत के साथ मिलकर संचालित करते हैं।
क्षेत्रीय, जनजातीय एवं विशेष क्षेत्र विकास कार्यक्रम
बीहड़, मरुस्थल, पहाड़ी व जनजातीय इलाकों की खास जरूरतों के लिए राजस्थान में दशकों से चल रहे क्षेत्र-विशेष विकास कार्यक्रमों और हाल के जनजातीय अभियानों पर एक नजर।
🏞️डांग, मगरा व मेवात क्षेत्रीय विकास
- मेव-बहुल मेवात क्षेत्र में यह कार्यक्रम 1986-87 में अलवर व भरतपुर जिलों में शुरू हुआ था; अब यह अलवर, खैरथल-तिजारा व डीग के 14 पंचायत समितियों की 310 ग्राम पंचायतों में 807 गाँवों तक फैला 100% राज्य-पोषित कार्यक्रम है।
- डांग क्षेत्र (सवाईमाधोपुर, करौली, कोटा, बूँदी, बाराँ, धौलपुर, भरतपुर व झालावाड़) का कार्यक्रम मूलतः 1994-95 में शुरू हुआ और 2005-06 से फिर चलाया जा रहा है; मगरा क्षेत्र (ब्यावर, भीलवाड़ा, पाली, चित्तौड़गढ़, राजसमंद) का कार्यक्रम 2 अगस्त, 2005 को शुरू हुआ।
- 27 मार्च, 2025 को भरतपुर के अंत्योदय कल्याण समारोह में मुख्यमंत्री ने डांग, मगरा व मेवात - तीनों क्षेत्रीय विकास योजनाओं का बजट 50-50 करोड़ से बढ़ाकर 100-100 करोड़ रुपये (कुल 300 करोड़) कर दिया।
⛰️बीहड़ व कंदरा सुधार कार्यक्रम
- बीहड़ सुधार कार्यक्रम (RRP), 2013-14 बजट घोषणा के अनुसार कोटा, बूँदी, धौलपुर, करौली व सवाईमाधोपुर में चंबल की बीहड़ भूमि समतल कर भूमिहीन किसानों को आवंटित करने और डकैती जैसे अपराधों पर लगाम कसने के लिए शुरू हुआ।
- कंदरा सुधार कार्यक्रम, 1987-88 से चल रहा 100% केंद्र-पोषित कार्यक्रम है, जो कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़, सवाईमाधोपुर, करौली, डीग व धौलपुर - 8 डकैत-प्रभावित जिलों में बीहड़ों के फैलाव को रोककर उत्पादन क्षमता बहाल करता है।
🌵मरुगोचर, चरागाह व बायोफ्यूल संस्थाएँ
- मरुगोचर योजना 2003-04 बजट में 13 मरुस्थलीय जिलों (बीकानेर, बाड़मेर, बालोतरा, चूरू, जालोर, जैसलमेर, झुंझुनूं, जोधपुर, पाली, ब्यावर, नागौर, डीडवाना-कुचामन, सीकर) में पारंपरिक जलस्रोत बहाल कर सूखा-राहत हेतु शुरू हुई।
- राजस्थान बंजर भूमि विकास बोर्ड 7 अगस्त, 2009 को बना, जिसे 22 दिसंबर, 2016 को 'बंजर भूमि एवं चरागाह विकास बोर्ड' नाम दिया गया और 11 फरवरी, 2022 को पुनर्गठित किया गया।
- बंजर भूमि पर रतनजोत जैसे तेल-बीज पौधों से बायोडीजल उत्पादन बढ़ाने हेतु 2007 में बायोफ्यूल प्राधिकरण बना; राजस्थान बायोडीजल (B-100) की खुदरा बिक्री नियंत्रित करने के लिए बायोफ्यूल नियम 2019 लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
🐪मारवाड़ विकास बोर्ड, अरावली सोसाइटी व झील संरक्षण
- जोधपुर संभाग के मादा, मादा क्लस्टर व बिखरे जनजातीय इलाकों में अनुसूचित जनजाति समुदाय के विकास हेतु मारवाड़ क्षेत्रीय विकास बोर्ड 2 फरवरी, 2021 को बना।
- अरावली सोसाइटी की स्थापना राज्य सरकार ने 1994 के बजट घोषणा से की और 23 जुलाई, 1994 को इसे सोसाइटी के रूप में पंजीकृत किया, ताकि सरकार व गैर-सरकारी संगठनों के बीच साझेदारी मजबूत हो।
- राष्ट्रीय झील संरक्षण परियोजना के तहत आनासागर (अजमेर), पुष्कर सरोवर, फतेहसागर-पिछोला (उदयपुर) व नक्की झील (माउंट आबू) - इन पाँच धार्मिक-पर्यटन महत्व की झीलों के संरक्षण कार्य 70:30 केंद्र-राज्य अनुपात में पूरे हो चुके हैं।
📈आकांक्षी जिला कार्यक्रम व स्मार्ट विलेज
- आकांक्षी जिला कार्यक्रम 5 जनवरी, 2018 को 27 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के 112 पिछड़े जिलों के लिए शुरू हुआ; इसमें राजस्थान के जैसलमेर, धौलपुर, करौली, बाराँ व सिरोही - 5 जिले शामिल हैं, जिन्हें नीति आयोग हर महीने 5 क्षेत्रों के 49 संकेतकों पर रैंक करता है।
- आकांक्षी जिलों का ट्रांसफॉर्मेशन कार्यक्रम 28 राज्यों के 115 आकांक्षी जिलों में चलता है, जिसमें राजस्थान के उपरोक्त 5 जिले भी शामिल हैं।
- 2017-18 बजट घोषणा के बाद 27 मार्च, 2017 को 3,000 से अधिक आबादी वाले गाँवों को स्मार्ट विलेज बनाने की योजना बनी, जिसके तहत 3,169 गाँव विकसित हो रहे हैं; धौलपुर का धनौरा राज्य का पहला स्मार्ट विलेज है।
🏹जनजातीय विकास मिशन व वनधन योजनाएँ
- गोविन्द गुरु जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना 15 नवम्बर, 2024 से सामुदायिक वन अधिकार क्षेत्रों में विकास-संरक्षण कार्य करती है; धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान प्रधानमंत्री ने 2 अक्टूबर, 2024 को झारखंड के हजारीबाग से शुरू किया, जो 30 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों के जनजाति-बहुल गाँवों को कवर करता है।
- राजस्थान में धरती आबा अभियान 40 जिलों के 208 ब्लॉकों के 6,019 गाँवों में लागू है और राज्य इस अभियान में देशभर में प्रथम रहा, जिसके लिए राष्ट्रपति ने 17 अक्टूबर, 2025 को जनजातीय विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव कुँजीलाल मीणा को पुरस्कार सौंपा।
- पीएम-जनमन (PVTG समुदायों के लिए) बाराँ जिले के 8 पंचायत समितियों में सहरिया परिवारों को घर हेतु 2 लाख व शौचालय हेतु 12,000 रुपये देता है; पीएम जनजाति विकास मिशन के तहत वनधन योजना (2019-20 से) उदयपुर, सलूम्बर, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा, प्रतापगढ़, सिरोही, बाराँ, कोटा व झालावाड़ - 9 जिलों में चल रही है।
- वनधन विकास केंद्र में 15 स्वयं सहायता समूहों (औसतन 20 सदस्य) के 300 सदस्य होते हैं, जिनमें कम-से-कम 60% जनजातीय समुदाय से हों; PVTG वनधन योजना (2023-24 से) बाराँ जिले के शाहाबाद, किशनगंज, अटरू व बाराँ ब्लॉक में सहरिया परिवारों के लिए है, जिसमें TRIFED हर केंद्र को 15 लाख रुपये देता है।
🏘️रुर्बन मिशन
- श्यामा प्रसाद मुखर्जी रुर्बन मिशन (SPMRM) 21 फरवरी, 2016 को छत्तीसगढ़ के कुरुभाठा-मरमुंडा गाँव से शुरू हुआ, जिसका लक्ष्य गाँवों के समूह को उनकी ग्रामीण पहचान बनाए रखते हुए शहरी सुविधाओं से लैस 'रुर्बन' क्लस्टर बनाना है।
- राष्ट्रीय रुर्बन मिशन के तहत देशभर में करीब 300 क्लस्टर बनाने का लक्ष्य था; राजस्थान में तीन चरणों में 13 जिलों के 15 क्लस्टर स्वीकृत हुए, और यह योजना राज्य में 31 मार्च, 2021 तक प्रभावी रही।
शहरी अवसंरचना मिशन, पुरस्कार एवं महत्वपूर्ण दिवस
पानी-सीवरेज से लेकर स्मार्ट सिटी और सार्वजनिक परिवहन तक — राजस्थान के शहरों को बदलने वाली बड़ी अवसंरचना परियोजनाओं और जुड़े पुरस्कारों-दिवसों पर एक नजर।
🚰राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (RUIDP)
- एशियाई विकास बैंक से वित्त-पोषित RUIDP का पहला चरण 18 जनवरी, 2000 को जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, बीकानेर व उदयपुर - 6 शहरों में शुरू हुआ; परियोजना ने 18 जनवरी, 2025 को अपने 25 वर्ष पूरे किए।
- दूसरे चरण RUSDIP (2000-2019) ने 15 शहरों को कवर किया; तीसरे चरण RUSDP (25 नवंबर, 2015 से) की लागत 3,660 करोड़ रुपये है और यह प्रोजेक्ट व प्रोग्राम ऋण के तहत 12 शहरों में चला।
- चौथे चरण RSTDP (जनवरी 2021 से, पूर्णता नवंबर 2027) में दो ट्रांशों में कुल 42 शहर (रतनगढ़ व भवानीमंडी दोनों में शामिल) कवर होते हैं, जिसका लक्ष्य पेयजल व स्वच्छता सुधारना है।
- पाँचवें चरण में 296 शहरों में 19,000 करोड़ रुपये के विकास कार्य होंगे, जिनमें से 13,000 करोड़ रुपये एडीबी व विश्व बैंक ऋण से और शेष 6,000 करोड़ रुपये राज्य सरकार से आएँगे।
🏙️UIDSSMT व शहरी जन सहभागी योजना
- लघु व मध्यम कस्बों में शहरी आधारभूत ढाँचा विकास योजना (UIDSSMT), IDSMT व AUWSP को मिलाकर बनी; यह जयपुर व अजमेर-पुष्कर को छोड़कर बाकी शहरों में लागू है, जहाँ 1 अप्रैल, 2015 से केंद्र का हिस्सा 60%, राज्य का 20% व नोडल एजेंसी (अब रुडसिको) का 20% है।
- शहरी जन सहभागी योजना (8 दिसंबर, 2004 से, 2005-06 में सभी निकायों तक विस्तारित) में किसी काम की लागत का 50% राज्य सरकार, 30% स्थानीय जनसहयोग व 20% नगरीय निकाय वहन करता है।
💧अमृत मिशन व स्मार्ट सिटीज मिशन
- प्रधानमंत्री ने 25 जून, 2015 को AMRUT 1.0 शुरू किया, जिसमें राजस्थान के 29 शहर चुने गए; इसकी अवधि दिसंबर 2025 तक बढ़ाई जा चुकी है, जबकि AMRUT 2.0 (1 अक्टूबर, 2021 से राष्ट्रीय स्तर पर, राजस्थान में 26 अक्टूबर, 2021 से) मार्च 2026 तक चलेगा।
- उसी दिन (25 जून, 2015) शुरू हुए स्मार्ट सिटीज मिशन में देशभर के 100 चुने शहरों में राजस्थान के अजमेर, जयपुर, उदयपुर व कोटा शामिल थे; प्रति शहर 1,000 करोड़ रुपये (केंद्र 500, राज्य 300, स्थानीय निकाय व विकास प्राधिकरण 100-100 करोड़) का प्रावधान था, और केंद्र की रैंकिंग में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा।
- सिटीज 2.0 कार्यक्रम को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 31 मई, 2023 को 2023-27 के लिए मंजूरी दी; इसकी चुनौती में चुने गए जयपुर व उदयपुर को ठोस कचरा प्रबंधन हेतु 100 करोड़ रुपये का ऋण-सह-अनुदान मिलेगा।
⭐पंच गौरव योजना
- राज्य सरकार के एक वर्ष पूरे होने पर 15 दिसंबर, 2024 को घोषित पंच गौरव कार्यक्रम हर जिले के लिए पाँच पहचान तय करता है - एक जिला-एक उपज, एक वनस्पति, एक उत्पाद, एक पर्यटन स्थल व एक खेल; इसे 2025-26 में फ्लैगशिप योजना के रूप में लागू किया गया।
- इसके क्रियान्वयन हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य-स्तरीय व जिला कलक्टरों की अध्यक्षता में जिला-स्तरीय समितियाँ बनी हैं; कृषि, वन, उद्योग, पर्यटन व खेल विभाग पाँचों घटकों के लिए क्रमशः नोडल विभाग हैं।
- उदाहरण के लिए जयपुर की पहचान आँवला (उपज), आमेर दुर्ग (पर्यटन) व कबड्डी (खेल) से जुड़ी है, जबकि जोधपुर की मेहरानगढ़ दुर्ग व जिम्नास्टिक से और उदयपुर की फतेहसागर-पिछोला झील व तैराकी से।
🛰️नक्शा प्रोजेक्ट व नागरिक-केंद्रित डिजिटल पहलें
- डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत 'नक्शा' प्रोजेक्ट 18 फरवरी, 2025 को देश के 152 नगरीय निकायों में शुरू हुआ; राजस्थान की भिवाड़ी, किशनगढ़, ब्यावर, सवाईमाधोपुर, जैसलमेर, पुष्कर, बगरू, बहरोड़, नवलगढ़ व नाथद्वारा - 10 नगरपालिकाएँ चुनी गई हैं, जहाँ ड्रोन सर्वे से डिजिटल भू-मानचित्रण होगा।
- नागरिक शिकायतें दर्ज व ट्रैक करने के लिए मुख्यमंत्री ने 17 सितंबर, 2024 को जयपुर नगर निगम हेरिटेज द्वारा विकसित 'जयपुर 311' ऐप और 'रीसायकल ऐप' लॉन्च किए।
🚌शहरी परिवहन व सार्वजनिक स्थल
- जेएनएनयूआरएम के तहत जयपुर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड (जेसीटीएसएल) फरवरी 2008 में बनी और जुलाई 2010 से शहरी बस सेवा शुरू की, जिसे रूट डिजाइन व एकीकृत किराया प्रणाली के लिए 'बेस्ट इमर्जिंग इनिशिएटिव अवॉर्ड' मिला था।
- पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत राजस्थान के 9 शहरों (जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, अजमेर, बीकानेर, भीलवाड़ा, कोटा, अलवर, सीकर) के लिए 1,150 इलेक्ट्रिक बसें स्वीकृत हुई हैं।
- एशिया की सबसे बड़ी आवासीय योजना, मानसरोवर (जयपुर) का 52 एकड़ में विकसित सिटी पार्क 21 अक्टूबर, 2022 को खुला; प्रताप नगर-मानसरोवर की चौपाटी 1 नवंबर, 2021 को और कोटा की कुन्हाड़ी योजना की चौपाटी 9 जुलाई, 2023 को जनता के लिए शुरू हुई।
📅महत्वपूर्ण दिवस
- 2 अक्टूबर को स्वच्छ भारत दिवस मनाया जाता है, जो महात्मा गांधी की जयंती के साथ मेल खाकर स्वच्छ भारत मिशन की वर्षगाँठ भी है।
- 19 नवम्बर को विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है, जो स्वच्छता व सुरक्षित शौचालय पहुँच को लेकर वैश्विक जागरूकता बढ़ाने के लिए समर्पित है।