राजस्थान में परिवहन
Transport in Rajasthan
सड़कों, रेल व हवाई यात्रा के जरिए राजस्थान को जोड़ने वाले नेटवर्क, नीतियों और सुरक्षा पहलों की सैर — एक्सप्रेसवे से लेकर मेट्रो और उड़ान योजना तक।
सड़क तंत्र एवं राजमार्ग
1949 में महज़ 13,553 किमी सड़कों वाला राजस्थान आज देश के सबसे बड़े राजमार्ग तंत्रों में गिना जाता है, और नए एक्सप्रेसवे व रिंग रोड इसे लगातार विस्तार दे रहे हैं।
📏सड़कों का विस्तार
- 31 मार्च 2025 तक राजस्थान की कुल सड़क लम्बाई 335,306.33 किमी पहुँच गई — 1949 के मात्र 13,553 किमी से बहुत बड़ी छलाँग, जबकि एक साल पहले (31 मार्च 2024) यह 317,121 किमी थी।
- आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार सड़क घनत्व बढ़कर 97.97 किमी प्रति 100 वर्ग किमी हो गया (2024 में यह 92.65 किमी था), फिर भी यह राष्ट्रीय औसत 166.10 किमी प्रति 100 वर्ग किमी से पीछे है।
- 31 मार्च 2024 तक लगभग 39,408 गाँव (91.09%) सड़क से जुड़ चुके थे, जिनमें गंगानगर, जयपुर और भीलवाड़ा सबसे बेहतर सड़क-संपर्क वाले जिलों में शीर्ष पर रहे।
🚏राष्ट्रीय व राज्य राजमार्ग
- राजस्थान से होकर 54 राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरते हैं जिनकी कुल लम्बाई 10,789.94 किमी है, वहीं 193 राज्य राजमार्ग 17,316 किमी लम्बाई में फैले हैं।
- सर्वाधिक NH लम्बाई वाले जिलों में बाड़मेर, बीकानेर, जैसलमेर व जोधपुर शीर्ष पर हैं, जबकि करौली व प्रतापगढ़ में यह सबसे कम है; राज्य का सबसे लंबा NH 52 (793.55 किमी) है और सबसे व्यस्त NH 48 है।
- राष्ट्रीय राजमार्गों की संख्या में राजस्थान देश में पाँचवें स्थान पर है (महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, बिहार व आंध्र प्रदेश से पीछे), पर कुल लम्बाई के लिहाज़ से यह महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश के बाद तीसरे स्थान पर आ जाता है।
🛤️एक्सप्रेसवे व रिंग रोड
- दिल्ली-मुम्बई-वडोदरा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (NH-148N) अलवर, दौसा, भरतपुर, सवाई माधोपुर, टोंक, बूँदी व कोटा से गुजरता हुआ 373.63 किमी लंबा है; 17 दिसंबर 2024 को इसका लोकार्पण हुआ, जो राजस्थान को दिल्ली, वडोदरा व मुंबई जैसे औद्योगिक केंद्रों से जोड़ता है।
- अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर (917 किमी, 6 लेन) का हिस्सा संगरिया-साँचौर-संथालपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे (NH-754K) राजस्थान के छह जिलों से होकर 637 किमी लंबा है और उत्तर भारतीय उद्योगों को कांडला व मूंदड़ा बंदरगाहों से जोड़ेगा।
- बजट 2025-26 में 2,750 किमी से अधिक लम्बाई के 9 नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए 60,000 करोड़ रुपये रखे गए, तथा पहले चरण में बालोतरा, जैसलमेर, सीकर, झालावाड़, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा व डीग सहित 15 शहरों में 'रिंग रोड' प्रस्तावित किए गए।
⛰️सड़क सुरंगें
- राजस्थान की सबसे लंबी सड़क सुरंग (1.076 किमी) बूँदी जिले में कोटा-बूँदी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनी है, जो 15 अक्टूबर 2015 से चालू है।
- खैरथल-तिजारा जिले में अलवर-बहरोड़ रोड पर स्थित जिन्दोली सुरंग राजस्थान की पहली सड़क यातायात सुरंग है, जिसकी लम्बाई 500 मीटर है।
सड़क सुरक्षा और जन-कल्याण योजनाएँ
देश की पहली दस-वर्षीय शून्य-दुर्घटना योजना से लेकर मददगार नागरिकों को नकद पुरस्कार तक, राजस्थान ने अपनी सड़कों के इर्द-गिर्द एक व्यापक सुरक्षा तंत्र खड़ा किया है।
🎯10-वर्षीय सड़क सुरक्षा रणनीति
- 26 जुलाई 2024 को राजस्थान ने 10-वर्षीय सड़क सुरक्षा रणनीति एवं कार्य-योजना तैयार की; 'आपणो अग्रणी राजस्थान' के संकल्प के तहत सड़क दुर्घटना मृत्यु दर को शून्य करने का लक्ष्य रखने वाला यह देश का पहला राज्य बना।
- राज्य सड़क सुरक्षा प्रकोष्ठ ने RKCL के साथ मिलकर एक सड़क सुरक्षा वेब पोर्टल शुरू किया, और जयपुर स्थित हरिश्चंद्र माथुर लोक प्रशिक्षण संस्थान में 'स्टेट रोड सेफ्टी इंस्टीट्यूट' ने 11 जनवरी 2023 से काम शुरू कर दिया।
- सड़क सुरक्षा प्रयासों में '6E' फार्मूला अपनाया जाता है — शिक्षा, इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, आपातकालीन देखभाल, मूल्यांकन व सहभागिता — ताकि दुर्घटनाओं पर हर कोण से काबू पाया जा सके।
🚑जीवन-रक्षक योजनाएँ
- सड़क दुर्घटना में घायलों को अस्पताल पहुँचाने वाले 'गुड सेमेरिटन्स' को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि 5,000 रुपये से बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दी गई।
- पहले मुख्यमंत्री चिरंजीवी रक्षा योजना (जिसमें 5,000 रुपये मिलते थे) के नाम से चली यह योजना अब मुख्यमंत्री आयुष्मान जीवन रक्षा योजना कहलाती है, जो 21 अगस्त 2024 से लागू है; इसमें गंभीर घायलों को समय पर अस्पताल पहुँचाने वाले सहायक को 10,000 रुपये व प्रशस्ति-पत्र दिया जाता है।
- राज्य सरकार की एंबुलेंस सेवा-108 का NHAI की 1033 एंबुलेंस सेवा के साथ एकीकरण किया जा रहा है, ताकि आपातकालीन सहायता और तेज़ी से मिल सके।
⚡इलेक्ट्रिक वाहन नीति
- राजस्थान इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति 2022, जिसकी अधिसूचना 31 अगस्त 2022 को जारी हुई और जो 1 सितम्बर 2022 से पाँच वर्षों के लिए प्रभावी है, इस अवधि में प्रति वर्ष 35 लाख EV यूनिट्स के विनिर्माण का लक्ष्य रखती है।
- 14 नवंबर 2024 के आदेश से 200 करोड़ रुपये का 'ई-व्हीकल प्रमोशन फंड' गठित हुआ, जो फेम-2 दिशा-निर्देशों के अनुरूप 1 सितम्बर 2022 से राजस्थान में खरीदे व पंजीकृत आधुनिक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्टेट जीएसटी की प्रतिपूर्ति और एकमुश्त अनुदान देता है।
📢जन-जागरूकता अभियान
- 'सुरक्षित सड़क मार्ग (सुस्मा) अभियान' युवाओं में हेलमेट के प्रयोग व सुरक्षित सड़क निर्माण के प्रति जागरूकता बढ़ाता है; 3 सितंबर 2025 को इसे 'सबसे बड़े युवा नेतृत्व वाले सड़क सुरक्षा अभियान' के रूप में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया, जिसमें करौली प्रथम, सीकर द्वितीय व डूँगरपुर तृतीय स्थान पर रहा।
- राजस्थान में दुपहिया वाहन चालकों व पीछे बैठने वाली सवारियों के लिए हेलमेट 28 अक्टूबर 2015 से अनिवार्य कर दिया गया, और हर वर्ष नवंबर के तीसरे रविवार को 'वर्ल्ड रिमेम्बरेंस डे' के साथ-साथ 'राज्य सड़क सुरक्षा दिवस' भी मनाया जाता है।
- सार्वजनिक निर्माण विभाग की 'सगुनी' सड़क गुणवत्ता निरीक्षण यात्रा 30 मार्च 2025 को श्रीगंगानगर से शुरू होकर सभी 33 जिला मुख्यालयों से गुजरी और इसमें तय की गई दूरी को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।
ग्रामीण सड़कें, नीतियाँ और संस्थाएँ
हर नई सड़क के पीछे योजनाओं, निधियों और संस्थाओं का एक जाल काम करता है — गाँवों को जोड़ने वाली PMGSY से लेकर ADB समर्थित राजमार्ग निवेश कार्यक्रमों तक।
🌾प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
- 25 दिसंबर 2000 को शुरू हुई PMGSY सामान्य क्षेत्रों में 500 से अधिक (और मरु/जनजातीय क्षेत्रों में 2001 की जनगणना अनुसार 250 से अधिक) आबादी वाले गाँवों को हर मौसम में चलने योग्य सड़कों से जोड़ती है; 2015-16 से केंद्र-राज्य वित्तीय योगदान 60:40 है।
- PMGSY-III के तहत 8,662.50 किमी ग्रामीण सड़कों को उन्नयन हेतु चुना गया है, जिनमें से ग्रामीण विकास मंत्रालय ने 8,658.34 किमी को स्वीकृति दी है।
- केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषित PMGSY चतुर्थ चरण के तहत देशभर में 25,000 ग्रामीण बसावटों को जोड़ा जाना है; राजस्थान के प्रथम चरण में 1,205 सड़कों व 1 पुल की निविदाएँ जारी हो चुकी हैं, और अकेले 2026-27 में राज्य में 1,216 किमी पक्की सड़कें बनेंगी।
🛤️गौरव पथ व अन्य सड़क योजनाएँ
- ग्रामीण गौरव पथ योजना (2014-15 में शुरू) के तहत हर पंचायत मुख्यालय पर 0.5-2 किमी (औसतन 1 किमी) की एक सड़क को 'ग्रामीण गौरव पथ' के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहीं शहरी गौरव पथ योजना नगरीय क्षेत्रों की 1-2 किमी लंबी प्रमुख सड़क को इसी तरह संवारती है।
- नाबार्ड व विश्व बैंक की सहायता से शुरू महात्मा गांधी राज्य सड़क योजना (2012-13) सामान्य क्षेत्रों में 250 से 499 तक की आबादी वाले शेष 2,900 गाँवों को पक्की सड़कों से जोड़ने के लिए बनाई गई थी।
- सामरिक महत्त्व वाली चेतक परियोजना राज्य के सीमावर्ती इलाकों — बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर, फलौदी व गंगानगर आदि — में सड़क सुरक्षा से जुड़ी है।
📜कानून और नीतिगत पड़ाव
- सड़क नीति घोषित करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है — इसकी पहली नीति 1994 में आई; दूसरी राज्य सड़क विकास नीति सितंबर 2013 में घोषित हुई, और अलग से सड़क सुरक्षा नीति 21 मार्च 2017 को जारी हुई।
- राजस्थान राज्य सड़क विकास निधि अधिनियम, 2004 (10 अगस्त 2004 को पारित) राज्य में पेट्रोल पर 1.50 रुपये व डीजल पर 1.75 रुपये प्रति लीटर का सेस लगाकर सड़क विकास हेतु संसाधन जुटाता है, जबकि राजस्थान राज्य राजमार्ग अधिनियम, 2014 (8 मई 2015 से लागू) ने राज्य राजमार्ग प्राधिकरण की स्थापना की, जो 1 सितम्बर 2023 से क्रियाशील हुआ।
- 31 मार्च 2025 को जारी राजस्थान लॉजिस्टिक्स पॉलिसी 2025 का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स लागत घटाकर राजस्थान को 2030 तक 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की राह में एक लॉजिस्टिक्स हब के रूप में स्थापित करना है।
🏢प्रमुख संस्थाएँ
- राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) 1 अक्टूबर 1964 से जयपुर में बस सेवाएँ चला रहा है, वहीं अक्टूबर 2004 में राज्य सरकार व IL&FS की 50:50 भागीदारी से बना रिडकोर (RIDCOR) जुलाई 2005 से मेगा हाइवे परियोजना का क्रियान्वयन कर रहा है।
- 1962 में शुरू हुई सीमा सड़क संगठन, जिसका मुख्यालय बीछवाल (बीकानेर) में है, राजस्थान, पंजाब व गुजरात की लगभग 4,600 किमी सामरिक महत्त्व की सड़कों की देखरेख करती है।
- अन्य प्रमुख संस्थाओं में राष्ट्रीय राजमार्गों व एक्सप्रेस-वे के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), 1 जुलाई 2015 से प्रवृत्त राजस्थान राज्य बस टर्मिनल डवलपमेंट अथॉरिटी, और 2001 में राजस्थान स्टेट ब्रिज लिमिटेड (स्थापना 1979) से नाम बदलकर बनी राजस्थान राज्य सड़क विकास एवं निर्माण निगम शामिल हैं।
💰फंडिंग परियोजनाएँ (RSHIP व RSHDP)
- ADB वित्त-पोषित राजस्थान राज्य राजमार्ग निवेश परियोजना (RSHIP) का ट्रेंच-I 30 सितंबर 2022 को 2,452 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ, जबकि आगे के ट्रेंच व RSHIP-2/RSHIP-3 राज्य राजमार्गों व प्रमुख जिला सड़कों को 2026 तक सुधारने का काम जारी रखे हुए हैं।
- विश्व बैंक समर्थित राजस्थान राज्य राजमार्ग विकास परियोजना (RSHDP-II ट्रेंच-I), जो अक्टूबर 2019 से प्रभावी है, 2,996.70 करोड़ रुपये की कुल लागत से 891 किमी लम्बाई के 13 राजमार्ग विकसित कर रही है; इसे राजस्थान राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है।
रेल परिवहन और मेट्रो
आगरा फोर्ट व बाँदीकुई के बीच 19वीं सदी की एक रेल-लाइन से लेकर आज की वंदे भारत ट्रेनों और विस्तार पाती जयपुर मेट्रो तक, राजस्थान में रेल यात्रा ने लंबा सफर तय किया है।
🕰️रेल नेटवर्क का इतिहास व ढाँचा
- राजस्थान (तत्कालीन जयपुर रियासत) में पहली रेल सेवा अप्रैल 1874 में आगरा फोर्ट व बाँदीकुई के बीच शुरू हुई, और राज्य का पहला लोको कारखाना 11 अगस्त 1879 को अजमेर में स्थापित हुआ, जहाँ 1895 में पहला इंजन तैयार हुआ।
- 31 मार्च 2025 तक राजस्थान के रेलमार्गों की कुल लम्बाई 6,135 किमी थी — उत्तर प्रदेश के बाद देश में दूसरे स्थान पर (महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश व गुजरात से आगे) — जबकि बाँसवाड़ा व प्रतापगढ़ अब भी बिना रेलमार्ग वाले एकमात्र जिले हैं।
- 1 अक्टूबर 2002 को बना उत्तर-पश्चिम रेलवे जोन, जिसका मुख्यालय जयपुर में है, चार मंडलों — जयपुर, अजमेर, बीकानेर व जोधपुर — की देखरेख करता है, जबकि कोटा मंडल अलग पश्चिम मध्य रेलवे के अधीन आता है, इस तरह राजस्थान में कुल पाँच रेल मंडल काम करते हैं।
🚄आधुनिक रेल परियोजनाएँ
- राजस्थान की पहली वंदे भारत रेल जयपुर से दिल्ली के बीच 12 अप्रैल 2023 को शुरू हुई थी; अब राज्य में चार वंदे भारत ट्रेनें चलती हैं (अजमेर-चंडीगढ़, जोधपुर-साबरमती, उदयपुर सिटी-जयपुर, उदयपुर सिटी-आगरा कैंट), जिनमें से दो 25 सितंबर 2025 को मिलीं।
- अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत राजस्थान के 85 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है; प्रधानमंत्री मोदी ने देशनोक, गोगामेड़ी, बूँदी व फतेहपुर शेखावाटी सहित पहले 8 स्टेशनों का वर्चुअल लोकार्पण 22 मई 2025 को देशनोक, बीकानेर से किया।
- भारतीय रेलवे देश का पहला RDSO डेडिकेटेड टेस्ट ट्रैक (64 किमी) डीडवाना-कुचामन जिले की गुढ़ा-ठठाना मीठड़ी के बीच बना रहा है, जहाँ हाई-स्पीड रोलिंग स्टॉक का परीक्षण होगा; राज्य की ब्रॉडगेज लाइन (5,703 किमी) का 97% अब विद्युतीकृत हो चुका है।
🏅रिकॉर्ड और विशेष स्टेशन
- जयपुर मंडल का गांधीनगर स्टेशन देश का पहला पूर्णतः महिला-संचालित रेलवे स्टेशन है, और फुलेरा जंक्शन एशिया का सबसे बड़ा मीटरगेज रेलवे यार्ड है।
- धौलपुर जिले में राजस्थान की एकमात्र नैरोगेज रेल लाइन है, जो राजा रामसिंह (1908-29) के शासनकाल में शुरू हुई थी; राज्य की सबसे लंबी रेल सुरंग दौसा-गंगापुर सिटी लाइन पर स्थित 2.2 किमी लंबी डिडवाना-इंदावा सुरंग है, जहाँ सेवा 9 मार्च 2024 से शुरू हुई।
- भारत-पाकिस्तान के बीच मुनाबाव-खोखरापार मार्ग पर 17 फरवरी 2006 से चलने वाली थार एक्सप्रेस अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद उपजे तनाव के चलते 9 अगस्त 2019 से अब तक बंद है।
🚇जयपुर मेट्रो
- जयपुर मेट्रो का चरण-1ए (मानसरोवर-चाँदपोल, 9.63 किमी, 9 स्टेशन) 3 जून 2015 से संचालित है, और चरण-1बी ने 2020 में राज्य के पहले भूमिगत रेलवे ट्रैक के जरिए इसे 2.01 किमी बढ़ाकर बड़ी चौपड़ तक पहुँचाया।
- जयपुर मेट्रो चरण-2 (टोडी मोड़ से सीतापुरा, लगभग 42.8 किमी, 36 स्टेशन) की DPR को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 21 मई 2025 को मंज़ूरी दी, और केंद्र सरकार ने मई 2026 में 13,037.66 करोड़ रुपये की इस परियोजना को स्वीकृति दे दी।
- कोलकाता, दिल्ली, बेंगलुरु, मुम्बई व गुरुग्राम के बाद जयपुर मेट्रो वाला भारत का छठा शहर बना; इसका अजमेर पुलिया-सोडाला खंड देश का पहला 'डबल एलीवेटेड स्ट्रक्चर' है, जहाँ मेट्रो रेल एक एलीवेटेड सड़क के ऊपर से गुजरती है।
वायु परिवहन
एक नई नागरिक विमानन नीति, बढ़ता हवाई अड्डा नेटवर्क और उड़ान योजना के तहत क्षेत्रीय संपर्क का विस्तार राजस्थान के आसमान को धीरे-धीरे और सुलभ बना रहे हैं।
📋नागरिक विमानन नीति 2024
- 2 जुलाई 2024 को राज्य मंत्रिमंडल से स्वीकृत और 20 मार्च 2025 को औपचारिक रूप से जारी नागरिक विमानन नीति 2024 का उद्देश्य मौजूदा विमानन ढाँचे का उन्नयन-आधुनिकीकरण कर क्षेत्रीय हवाई संपर्क व पर्यटन बढ़ाना है।
- नीति के प्रथम चरण में उत्तरलाई (बाड़मेर) व उदयपुर हवाई अड्डों का उन्नयन होगा, और चकचैनपुरा (सवाईमाधोपुर), नागौर, हमीरगढ़ (भीलवाड़ा), आबूरोड (सिरोही) व लालगढ़ जाटान (श्रीगंगानगर) की हवाई पट्टियों को रात्रि उड़ानों योग्य बनाया जाएगा।
- नीति में किशनगढ़, झालावाड़ व भीलवाड़ा में नए फ्लाइंग स्कूल, जयपुर हवाई अड्डे पर एयरोसिटी व कार्गो कॉम्प्लेक्स, तथा AAI के सहयोग से कोटा में एक नया ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा भी प्रस्तावित है।
🛫हवाई अड्डों का जाल
- राजस्थान में कुल 33 हवाई अड्डे/हवाई पट्टियाँ हैं: 4 (जयपुर, उदयपुर, कोटा, किशनगढ़) AAI के अधीन, 6 वायुसेना/सेना के नियंत्रण में (जिनमें से केवल जैसलमेर, जोधपुर व नाल-बीकानेर में नागरिक उड़ानें मिलती हैं), 4 निजी संचालन में (कांकरोली, पिलानी, वनस्थली, बारौं), और शेष 19 राज्य सरकार के अधीन।
- बीकानेर का नाल हवाई अड्डा एशिया का सबसे बड़ा भूमिगत हवाई अड्डा है, वहीं जयपुर के सांगानेर हवाई अड्डे को 29 दिसंबर 2005 को अंतरराष्ट्रीय दर्जा मिला (देश का 14वाँ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) और अक्टूबर 2021 में इसे 50 वर्षों के लिए अडानी समूह को लीज पर दिया गया।
- कोटा-बूँदी ग्रीनफील्ड हवाई अड्डे को मई 2025 में केंद्र की सैद्धांतिक सहमति मिली और अगस्त 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली; यह बूँदी के तुलसी, कैथुडा, बालाथुरा व देवरिया राजस्व गाँवों में बनेगा।
🛩️उड़ान क्षेत्रीय संपर्क योजना
- राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन नीति, 2016 के तहत परिकल्पित उड़ान 1.0 का शुभारंभ 21 अक्टूबर 2016 को हुआ, जिसकी पहली उड़ान 27 अप्रैल 2017 को शिमला-दिल्ली के बीच भरी गई; राजस्थान ने इस योजना में 20 मार्च 2017 को हुए एमओयू के जरिए भाग लिया।
- आगे के चरणों में उड़ान का दायरा बढ़ता गया — 2.0 (2018) में 73 कम-सेवा वाले हवाई अड्डे व हेलीपेड जुड़े, 3.0 (2019) में पर्यटन मार्ग व समुद्री विमान शामिल हुए, और 4.0 (2020) में पहाड़ी, पूर्वोत्तर व द्वीप क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित हुआ।
- अप्रैल 2025 में यह योजना अपने नौवें वर्ष में प्रवेश कर गई और वर्तमान में समुद्री विमान सेवाओं पर केंद्रित उड़ान 5.5 चरण चल रहा है, जबकि सहयोगी कृषि उड़ान योजना कृषि उपज की हवाई ढुलाई करती है, जो अभी 58 हवाई अड्डों को कवर करती है।
🗼प्रोजेक्ट ईशान व अन्य पहलें
- भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की योजना प्रोजेक्ट ईशान दिल्ली, मुंबई, कोलकाता व चेन्नई के उड्डयन क्षेत्रों को नागपुर की एक एकीकृत इकाई में समेकित कर देशभर में हवाई यातायात नियंत्रण को तेज़ बनाना चाहती है।
- किशनगढ़ हवाई अड्डे पर निजी क्षेत्र का फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गेनाइजेशन कार्यरत है, और वहाँ 4 अगस्त 2024 को शुरू हुआ अक्याना एविएशन एकेडमी का फ्लाइंग स्कूल राज्य का पहला उड़ान प्रशिक्षण केंद्र है।
- राजस्थान राज्य उड्डयनशाला 1975 से प्रशिक्षणार्थियों को उड़ान प्रशिक्षण दे रही है, और झालावाड़ की पं. दीनदयाल उपाध्याय हवाई पट्टी — उत्तर भारत का तीसरा सबसे चौड़ा रन-वे — का लोकार्पण पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 12 अप्रैल 2025 को किया।