पर्यटन
Tourism
राजस्थान के भव्य दुर्गों, रंगीले मेलों और नई पर्यटन नीतियों से लेकर ताज़ा आँकड़ों, विरासत स्थलों और तीर्थ योजनाओं तक — राज्य के पर्यटन तंत्र की पूरी झलक।
पर्यटन: एक परिचय व आँकड़े
राजस्थान के दुर्ग, उत्सव और लोक-संस्कृति उसे विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थायी स्थान दिलाते हैं — आज यह पहचान किन ठोस आँकड़ों में बदल चुकी है, यहाँ जानिए।
🌍वैश्विक पहचान
- अपनी समृद्ध विरासत, भव्य दुर्गों, धार्मिक स्थलों, सुरम्य भूदृश्यों और रंगीले लोक-जीवन के कारण राजस्थान को 'राजाओं की भूमि' कहा जाता है और यह विश्व पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट स्थान रखता है।
- अंग्रेज कवि रुडयार्ड किप्लिंग ने कहा था कि यदि कोई ऐसी भूमि है जहाँ हर मार्ग की धूल वीरों की हड्डियों से बनी हो, तो वह राजस्थान ही हो सकती है।
- 'टाइम' पत्रिका की वर्ष 2021 की विश्व की 100 सर्वश्रेष्ठ जगहों की सूची में केवल दो भारतीय शहर शामिल थे — जयपुर और नॉर्थ गोवा; 21 जनवरी 2021 को शुरू हुए 'नाईट स्काई टूरिज्म' नवाचार के चलते जयपुर को 'एस्ट्रोनोमिकल हेवन' नाम मिला।
- पर्यटन राज्य की अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बन चुका है, और भारत आने वाले हर तीन में से लगभग एक पर्यटक राजस्थान भी पहुँचता है।
📊पर्यटक आगमन: 2025 बनाम 2024
- स्वदेशी पर्यटकों की संख्या 2025 में बढ़कर 2525.03 लाख हो गई (9.74% वृद्धि), जबकि 2024 में यह 2300.84 लाख थी (28.50% वृद्धि); कुल पर्यटक 2025 में 2544.49 लाख रहे, जबकि 2024 में 2321.56 लाख थे।
- राजस्थान आने वाले विदेशी पर्यटक 2025 में घटकर 19.45 लाख रह गए (6.14% की कमी), जबकि 2024 में यह संख्या 20.72 लाख थी; स्वदेशी व कुल पर्यटक दोनों वर्ष दिसंबर में सर्वाधिक रहे, जबकि विदेशी पर्यटक 2025 में मार्च और 2024 में फरवरी-नवंबर में सर्वाधिक आए।
- यद्यपि 2025 में भारत में कुल विदेशी पर्यटकों की संख्या 37.8% गिरकर 61.90 लाख रह गई (मुख्यतः अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध के कारण), फिर भी इस घटती हुई संख्या में राजस्थान का हिस्सा 2024 के लगभग 20.8% से बढ़कर 2025 में 31.4% हो गया।
🚪शीर्ष जिले व प्रवेश द्वार
- सीकर, अजमेर और चित्तौड़गढ़ 2025 में स्वदेशी पर्यटकों के लिए शीर्ष जिले रहे, जबकि जयपुर, उदयपुर और जोधपुर, 2024 की तरह ही, विदेशी पर्यटकों की सूची में शीर्ष पर रहे।
- धार्मिक स्थलों में 2025 में सर्वाधिक स्वदेशी पर्यटक खाटूश्यामजी (सीकर) आए, जबकि हैरिटेज स्थलों में दोनों वर्ष सोनार दुर्ग (जैसलमेर) शीर्ष पर रहा और हवामहल (जयपुर) दूसरे स्थान पर; पूँछरी का लौठा (डीग) में स्वदेशी पर्यटकों की सर्वाधिक वृद्धि (51.61 लाख) दर्ज हुई।
- 2025 में विदेशी पर्यटकों के शीर्ष तीन स्रोत देश संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड और फ्रांस रहे, जबकि लगभग सभी प्रमुख स्थलों पर विदेशी पर्यटकों की संख्या घटी — सबसे अधिक गिरावट अजमेर (लगभग 20%) और जयपुर (लगभग 10%) में रही।
🏆रैंकिंग व सूचकांक
- घरेलू व अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संयुक्त संख्या के आधार पर 2024 में राजस्थान भारत का पाँचवाँ सबसे अधिक भ्रमण किया जाने वाला राज्य रहा।
- विश्व आर्थिक मंच के यात्रा एवं पर्यटन विकास सूचकांक (TTDI) 2024 के अनुसार भारत 119 देशों में 39वें स्थान पर है, जो 2021 के 54वें स्थान (संशोधित कार्यप्रणाली के बाद 38वाँ) से बड़ी छलाँग है।
- अक्टूबर 2025 में जारी वैश्विक पर्यटन क्षमता सूचकांक 2025 में भारत विश्व में शीर्ष (प्रथम) स्थान पर पहुँच गया।
पर्यटन नीतियाँ व निवेश प्रोत्साहन
पर्यटन नीति के नए स्वरूप से लेकर फिल्म सब्सिडी और सरल होमस्टे व्यवस्था तक — नीतियों की नई पीढ़ी राजस्थान में पर्यटकों और निवेशकों दोनों को आकर्षित करने का तरीका बदल रही है।
🎯राजस्थान पर्यटन नीति 2025
- 10 दिसंबर 2025 की अधिसूचना द्वारा 2020 की नीति के स्थान पर लागू 'राजस्थान पर्यटन नीति 2025' का लक्ष्य राज्य को पर्यटन, कला व संस्कृति के अग्रणी गंतव्य के रूप में स्थापित करना और संधारणीय विकास के साथ आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत को सहेजना है।
- इसके 2030 के लक्ष्यों में राज्य के GVA में पर्यटन का योगदान 8.5% तक ले जाना, कुल रोजगार में इसका हिस्सा 13% करना, पर्यटक संख्या के आधार पर राजस्थान को देश में तीसरे स्थान पर पहुँचाना, ₹50,000 करोड़ का नया निजी निवेश आकर्षित करना तथा 19.52 लाख विदेशी व 25.19 करोड़ स्वदेशी पर्यटक आगमन का लक्ष्य शामिल है।
- नीति के क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय पर्यटन परामर्श समिति, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति तथा हर 3 माह में प्रगति रिपोर्ट देने वाली एक समर्पित Policy Implementation Unit काम करेंगी; डिजिटल पहलों में टूरिज्म AI चैटबॉट, डिजिटल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट सिस्टम व प्रोजेक्ट स्वीकृति तथा व्यवसाय लिस्टिंग/ग्रेडिंग हेतु सिंगल विंडो पोर्टल शामिल हैं।
- निवेशकों को पूँजी सब्सिडी, SGST प्रतिपूर्ति और सावधि ऋणों पर ब्याज सब्सिडी (RIPS के अनुसार) के साथ-साथ स्टांप ड्यूटी व बिजली शुल्क में छूट दी जाती है; यह नीति केंद्र के विकसित भारत मिशन @2047 को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है और 5 वर्ष या नई नीति आने तक, जो भी पहले हो, लागू रहेगी।
🎬फिल्म पर्यटन प्रोत्साहन नीति 2025
- 20 दिसंबर 2025 को 2022 की नीति के स्थान पर अधिसूचित इस नीति का उद्देश्य राजस्थान को प्रमुख वैश्विक फिल्म शूटिंग गंतव्य बनाना, फिल्म उद्योग से जुड़े रोजगार सृजित करना और निर्माताओं की मदद के लिए एक समर्पित फिल्म निर्देशिका व पोर्टल शुरू करना है।
- निर्माता शूटिंग खर्च पर अधिकतम 30% तक की सब्सिडी ले सकते हैं, जिसकी सीमा फॉर्मेट के अनुसार तय है — फीचर फिल्म के लिए 3 करोड़, वेब सीरीज के लिए 2 करोड़, टीवी सीरियल के लिए 1.5 करोड़ और डॉक्यूमेंट्री के लिए 2 करोड़ रुपये — साथ ही सरकारी नियंत्रण वाले स्थानों पर अनुमति शुल्क (अधिकतम 5 दिन) की 100% प्रतिपूर्ति भी मिलती है।
- अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रतिष्ठा और कवरेज की गहराई दोनों को पुरस्कृत करते हैं: यहाँ फिल्माई गई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्मों को 1 करोड़ रुपये तक (राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं को 50 लाख तक) मिल सकते हैं, जबकि राजस्थान को 5-15%, 16-30% या 30% से अधिक स्क्रीन टाइम देने वाली फिल्मों को क्रमशः 10%/20%/30% सब्सिडी मिलती है; कुल शूटिंग दिवसों के 50% राजस्थान में शूट कर न्यूनतम 2 करोड़ रुपये खर्च करने पर 30% तक सब्सिडी मिलती है।
💰बजट घोषणाएँ 2025-27
- बजट 2026-27 में राजस्थान पर्यटन अवसंरचना एवं क्षमता निर्माण कोष (RTICF), पुष्कर, खाटूश्यामजी, नाथद्वारा, केशोरायपाटन, डीग व चित्तौड़गढ़ में हेरिटेज वॉक-वे, जयपुर में विश्वस्तरीय 'राजस्थान मंडपम' एक्जीबिशन स्पेस, तथा जैसलमेर-जोधपुर-बीकानेर-बाड़मेर-जालौर को जोड़ने वाला नया 'थार सांस्कृतिक सर्किट' शामिल है।
- इसमें संत दुर्बलनाथ जी (बाँदीकुई, दौसा), वीर दुर्गादास (सिवाना-बालोतरा) और हाड़ी रानी (सलूम्बर) के नए पैनोरमा, झुंझुनूँ में वार म्यूजियम, खुड़ी (जैसलमेर) में अल्ट्रा-लक्जरी स्पेशल टूरिज्म जोन तथा सीकर-झुंझुनूँ व भरतपुर-डीग क्षेत्रों में नए एयरपोर्ट हेतु फिजिबिलिटी स्टडी की घोषणाएँ भी शामिल हैं।
- इससे पहले बजट 2025-26 में क्षेत्र की ऐतिहासिक हवेलियों हेतु शेखावाटी हवेली संरक्षण योजना व हेरिटेज वॉक योजना, बीकानेर में लोक कलाकारों के लिए गवरी देवी कला केन्द्र, तथा त्रिपुर सुंदरी-मानगढ़धाम-बेणेश्वरधाम को जोड़ने वाला ट्राइबल टूरिस्ट सर्किट शुरू किया गया था।
🏡होमस्टे, यूनिट नीति व निवेश सुविधा
- 20 फरवरी 2026 से लागू 'राजस्थान होमस्टे (पेइंग गेस्ट) योजना 2026' में संपत्तियों को सिल्वर व गोल्ड श्रेणी में बाँटा गया है, कमरों की सीमा 5 से बढ़ाकर 8 (24 बेड) कर दी गई है, मालिक के परिसर में रहने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है, तथा पूर्णतः ऑनलाइन व समयबद्ध पंजीकरण (7 कार्यदिवस में अस्थाई फॉर्म-B प्रमाणपत्र, 3 माह की निरीक्षण अवधि बाद स्थाई फॉर्म-C, और हर 2 वर्ष में फॉर्म-D नवीनीकरण) रखा गया है।
- 4 दिसंबर 2024 को जारी 'राजस्थान पर्यटन इकाई नीति 2024' 5 वर्ष के लिए लागू है और इको-टूरिज्म इकाइयों व हेरिटेज होटलों से लेकर फिल्म सिटी, रोपवे और MICE सेंटर तक 24 प्रकार की पर्यटन इकाइयों को मान्यता देती है; नई इकाई के लिए न्यूनतम 100 करोड़ रुपये का निवेश आवश्यक है।
- RIPS 2024 के तहत नई पर्यटन इकाइयों को औद्योगिक दर्जा मिलता है — यानी बिजली दर, यूडी टैक्स व भवन योजना शुल्क औद्योगिक इकाइयों जैसी दरों पर लगेंगे — साथ ही स्टांप ड्यूटी व कन्वर्जन चार्ज में छूट, 10 वर्ष का होटल/रेस्टोरेंट संचालन लाइसेंस तथा रियायती दर पर कंपोजिट बार लाइसेंस भी मिलता है।
- मोहम्मद युनुस समिति की सिफारिश पर मार्च 1989 में पर्यटन को देशव्यापी रूप से 'उद्योग' का दर्जा मिला था, और राजस्थान में बजट घोषणा 2022-23 के अनुसार 1 अप्रैल 2022 से यह दर्जा प्रभावी हुआ।
सर्किट व तीर्थ यात्रा योजनाएँ
केंद्रीय योजनाएँ और राज्य के अपने सर्किट राजस्थान के बिखरे मंदिरों, दुर्गों व मरुस्थलों को थीम आधारित यात्रा मार्गों में पिरोते हैं, वहीं राज्य की कल्याणकारी योजनाएँ नागरिकों को स्वयं तीर्थयात्रा करने में मदद करती हैं।
🕉️स्वदेश दर्शन व प्रसाद योजना
- 9 मार्च 2015 को शुरू हुई स्वदेश दर्शन योजना अब देशभर में 15 थीमेटिक सर्किट (हिमालयन, पूर्वोत्तर, कृष्ण, बौद्ध, तटीय, डेजर्ट, ट्राइबल, इको, वाइल्डलाइफ, ग्रामीण, आध्यात्मिक, रामायण, हेरिटेज, तीर्थंकर व सूफी) तक विस्तृत हो चुकी है; इसके 2.0 संस्करण में राजस्थान की स्वीकृत परियोजना बूँदी के केशोरायपाटन में 'आध्यात्मिक अनुभव' है।
- राजस्थान की केंद्र को भेजी परियोजनाओं में वाइल्डलाइफ, संशोधित ट्राइबल, डेजर्ट, इको-एडवेंचर, डीग-कुम्हेर-भरतपुर व शेखावाटी सर्किट शामिल हैं, जबकि पूर्व में कृष्ण सर्किट (गोविन्द देव जी मंदिर जयपुर, खाटूश्याम जी सीकर, नाथद्वारा), विभिन्न बालाजी मंदिरों का आध्यात्मिक सर्किट, तथा कुंभलगढ़, जैसलमेर, चित्तौड़गढ़ व गागरोन जैसे दुर्गों का हेरिटेज सर्किट विकसित किया गया।
- 'प्रशाद योजना' (तीर्थाटन, संरक्षण और आध्यात्मिक अभिवृद्धि पर राष्ट्रीय अभियान), जो 9 मार्च 2015 को शुरू हुई और अक्टूबर 2017 में 'प्रसाद' से 'प्रशाद' नाम पाई, ने पुष्कर/अजमेर (2015-16) व करणी माता मंदिर देशनोक (2024-25) की परियोजनाओं को वित्तपोषित किया है, तथा सूर्य मंदिर (कोटा), मालासेरी डूँगरी (भीलवाड़ा) व कपिल सरोवर (बीकानेर) की परियोजनाएँ स्वीकृत की हैं।
🧭राजस्थान के भीतर पर्यटन सर्किट
- दस परंपरागत सर्किट राज्य को विषयगत रूप से बाँटते हैं: ढूँढाड़ (जयपुर-आमेर-सामोद), अलवर, भरतपुर, मेरवाड़ा (अजमेर-पुष्कर), शेखावाटी, मरुस्थल (बीकानेर-जैसलमेर-जोधपुर), मेवाड़ (उदयपुर-कुम्भलगढ़-चित्तौड़गढ़), रणथम्भौर, माउंट आबू/गौड़वाड़, और हाड़ौती (कोटा-बूँदी-झालावाड़)।
- विकासाधीन नए सर्किटों में दिल्ली-आगरा-जयपुर स्वर्णिम त्रिकोण से जुड़ा NCR सर्किट (अलवर, बैराठ, भरतपुर, धौलपुर), तीर्थ सर्किट (अजमेर, पुष्कर, नाथद्वारा, महावीरजी), उत्तर प्रदेश सीमा पर ब्रज भूमि रिलीजन सर्किट, जयपुर-झालावाड़ का बुद्ध सर्किट, तथा महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट (चावंड, हल्दीघाटी, गोगुंदा, कुंभलगढ़, दिवेर, उदयपुर) शामिल हैं, जिसमें हल्दीघाटी में चेतक का भव्य स्मारक भी बनेगा।
- जोधपुर, जैसलमेर व बीकानेर के 'मरु त्रिकोण' (बाद में बाड़मेर भी जुड़ा) का विकास जापान की JBIC संस्था की वित्तीय सहायता से हो रहा है, वहीं दिल्ली-आगरा-जयपुर का सुप्रसिद्ध 'स्वर्णिम त्रिकोण' पहले से ही है; अजमेर व भरतपुर को जोड़ने से राज्य के पुरातत्त्व सर्किटों की संख्या भी बढ़कर सात हो गई है।
🚂तीर्थ यात्रा योजनाएँ
- 2013 से जारी वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना राज्य के 60+ आयु के निवासियों को जीवन में एक बार, राज्य के बाहर किसी चुने हुए तीर्थ स्थल की सरकारी सहायता प्राप्त यात्रा कराती है (2016 से हवाई यात्रा भी जुड़ी); 2025-26 संस्करण में वातानुकूलित रेल से 50,000 और वायुयान से 6,000 यात्रियों की सीमा है, जबकि काठमांडू का पशुपतिनाथ मंदिर एकमात्र हवाई गंतव्य है।
- पहली वातानुकूलित 'राजस्थान वाहिनी भारत गौरव पर्यटक ट्रेन' 6 जून 2025 को जयपुर के दुर्गापुरा से रवाना हुई, जिसमें 800 वरिष्ठ नागरिकों ने रामेश्वरम् व मदुरई की आठ दिवसीय तीर्थयात्रा की।
- देवस्थान विभाग सिंधु दर्शन यात्रा (2016 से, 200 तीर्थयात्री, व्यय का 50% अधिकतम 10,000 रुपये प्रतिपूर्ति) और कैलाश मानसरोवर यात्रा (2011 से, 100 तीर्थयात्री) भी संचालित करता है; 14 अप्रैल 2025 को शुरू हुई बाबा साहब भीमराव अंबेडकर पंचतीर्थ भ्रमण योजना अनुसूचित जाति के चयनित 1,000 लाभार्थियों को डॉ. अंबेडकर के जीवन से जुड़े पंचतीर्थों की यात्रा कराती है।
विरासत स्थल, स्मारक व संस्थान
यूनेस्को-सूचीबद्ध दुर्गों से लेकर नई कीर्तिमानी प्रतिमाओं और आने वाली पीढ़ी के होटल-प्रबंधकों को प्रशिक्षित करने वाले संस्थानों तक — राजस्थान का विरासत ढाँचा गहरा और विस्तृत है।
🏛️यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल
- राजस्थान के पास यूनेस्को की चार विश्व धरोहर प्रविष्टियाँ हैं: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, भरतपुर (1985); जंतर-मंतर, जयपुर (2010); छह पहाड़ी दुर्ग — चित्तौड़गढ़, कुंभलगढ़, रणथम्भौर, जैसलमेर, आमेर व गागरोन (2013); तथा जयपुर परकोटा शहर, जिसे 6 जुलाई 2019 को बाकू में यूनेस्को के 43वें सत्र में सूचीबद्ध किया गया।
- जंतर-मंतर, आमेर फोर्ट व परकोटा शहर के साथ जयपुर आगरा के बाद तीन विश्व धरोहर स्थल रखने वाला भारत का दूसरा शहर बना; यूनेस्को ने जयपुर को उसकी शिल्प व लोक-कला परंपराओं के लिए अलग से 'क्रिएटिव सिटी' भी घोषित किया है।
- यूनेस्को ने राजस्थान के कालबेलिया लोकनृत्य को 2010 में अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया; इसके अलावा आमेर फोर्ट पर्यटन मंत्रालय की 19 राष्ट्रीय 'आइकोनिक पर्यटन स्थलों' में चुना गया है, और 2019 के एक यूनेस्को समझौते के तहत जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर व बीकानेर में 10 नए सांस्कृतिक पर्यटन स्थल विकसित किए जाने हैं।
🗽प्रमुख स्मारक व प्रतिमाएँ
- नाथद्वारा में 29 अक्टूबर 2022 को लोकार्पित 'विश्वास स्वरूपम्' (Statue of Belief) बनास नदी के किनारे गणेश टेकरी पहाड़ी पर स्थित 369 फुट ऊँची ताँबे के रंग की शिव प्रतिमा है — स्टेच्यू ऑफ यूनिटी, स्प्रिंग टेम्पल बुद्ध व लायकुन सेटक्यार के बाद विश्व की चौथी सबसे बड़ी प्रतिमा, जिसका त्रिशूल 315 फुट लंबा है और साथ में 25x37 फुट की नंदी प्रतिमा भी है; इसे मूर्तिकार नरेश कुमावत ने मिराज ग्रुप के संस्थापक मदन पालीवाल के सहयोग से बनाया।
- उदयपुर में भील सरदार राणा पूँजा की 13 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण हुआ, जिन्होंने हल्दीघाटी में चंदावल दस्ते के भाग के रूप में मुगलों से युद्ध किया था; महाराणा प्रताप जयन्ती 2025 (29 मई) पर चित्तौड़गढ़ के भूपालसागर में महाराणा प्रताप, पन्नाधाय व राणा पूँजा की प्रतिमाओं का संयुक्त अनावरण हुआ, जबकि हल्दीघाटी में चेतक का भव्य स्मारक प्रस्तावित है।
- कोटा का हैरिटेज चम्बल रिवर फ्रंट, भारत का पहला हैरिटेज रिवरफ्रंट (12 सितंबर 2023 को उद्घाटित), देश के पहले एलईडी गार्डन को 9 मीटर की घंटी, चम्बल माता की 225 फुट ऊँची संगमरमर प्रतिमा और 40 फुट ऊँची नदी-प्रतिमा के साथ जोड़ता है — दोनों को अपनी श्रेणी में विश्व की सबसे ऊँची बताया जाता है।
🚡रोपवे व विशेष स्थल
- राजस्थान का पहला रोपवे 2006 में सुण्डा पर्वत, भीनमाल (जालौर) में शुरू हुआ था और 800 मीटर के साथ अब भी राज्य का सबसे लंबा है; खोले के हनुमानजी, जयपुर का अन्नपूर्णा माता रोपवे (2023) राज्य का पहला स्वचालित व सबसे बड़ा यात्री रोपवे है, और सीकर का जीणमाता रोपवे (2024) शेखावाटी क्षेत्र का पहला रोपवे था।
- राजस्थान का पहला हेरिटेज होटल 'अजीत भवन, जोधपुर' है — यह उस योजना के तहत आता है जो 1950 से पूर्व बने किलों, गढ़ों व हवेलियों को हेरिटेज होटल में परिवर्तित करने की अनुमति देती है।
- लोक देवताओं व स्थानीय नायकों को समर्पित पैनोरमा हर जिले में फैले हैं — पाबूजी (कोलू, जोधपुर) व तेजाजी (खरनाल, नागौर) से लेकर हाड़ी रानी (सलूम्बर) व महाराणा प्रताप (चावंड) तक; महावीरजी, भामाशाह व राव चंद्रसेन जैसे कई और पैनोरमा राजस्थान धरोहर प्राधिकरण द्वारा निर्मित किए जाने प्रस्तावित हैं।
- अक्सर 'राजस्थान का जलियाँवाला बाग' कहलाने वाला मानगढ़ धाम (बाँसवाड़ा) 1913 में गोविंद गुरु की सभा में गोलीबारी में मारे गए लगभग 1,500 आदिवासियों की स्मृति में है; यहाँ अब शहीद स्मारक, गुरु स्मृतिवन व गोविंद गुरु राष्ट्रीय जनजाति संग्रहालय स्थापित हैं, और हर वर्ष मार्गशीर्ष पूर्णिमा को यहाँ मेला लगता है।
🏫पर्यटन संस्थान
- राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC), स्थापना 24 नवंबर 1978, पर्यटकों के लिए आवास, भोजन व परिवहन सेवाएँ चलाता है; राजस्थान राज्य होटल निगम (स्थापना 7 जून 1965) होटल खासा कोठी (जयपुर), होटल आनंद भवन (उदयपुर) व होटल जयपुर का संचालन करता है।
- RITTMAN (राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म एंड ट्रेवल मैनेजमेंट), जयपुर में 29 अक्टूबर 1996 को स्थापित एक स्वायत्तशासी संस्थान, पर्यटन क्षेत्र में मानव संसाधन विकसित करता है, जबकि राज्य होटल प्रबंध संस्थान अब जोधपुर, जयपुर, उदयपुर, धौलपुर, सवाई माधोपुर व झालावाड़ में संचालित हैं — कई पूर्व के फूड क्राफ्ट संस्थानों से क्रमोन्नत हुए।
- राजस्थान पर्यटन पुलिस तैनात करने वाला भारत का पहला राज्य बना, जो 1 अगस्त 2000 को जयपुर में शुरू होकर अब 19 जिलों में सक्रिय है और भूतपूर्व सैनिकों को पर्यटक सहायता बल (TAF) में शामिल करता है; उदयपुर में पश्चिमी क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्र भी है, जो पटियाला, प्रयागराज, कोलकाता, दीमापुर, नागपुर व तंजावुर के साथ भारत के सात क्षेत्रीय सांस्कृतिक केन्द्रों में से एक है।
उत्सव, पुरस्कार व नई पहलें
भरा-पूरा उत्सव कैलेंडर और 2025 की पुरस्कारों की झड़ी दिखाती है कि राजस्थान अपनी संस्कृति को कैसे पहचान में बदलता है — वहीं नई पहलें पर्यटन को चिकित्सा, साहसिक व सीमावर्ती क्षेत्रों तक भी ले जा रही हैं।
🏅पर्यटन पुरस्कार 2025
- 2025 में सम्मानों की झड़ी लगी: इंडिया ओटीटी अवार्ड (फरवरी) में फिल्म 'रोमांस ऑफ राजस्थान' के लिए बेस्ट क्रिएटिव फिल्म अवार्ड; ITB बर्लिन (मार्च) में डेस्टिनेशन ऑफ द ईयर-रॉयल एक्सपीरियंस व दीया कुमारी के लिए वुमन टूरिज्म मिनिस्टर ऑफ द ईयर; तथा इंडिया टुडे टूरिज्म अवार्ड्स (मार्च) में बेस्ट हैरिटेज डेस्टिनेशन (आमेर फोर्ट), बेस्ट माउंटेन डेस्टिनेशन (कुंभलगढ़ फोर्ट) व बेस्ट कलिनरी डेस्टिनेशन (बीकानेर)।
- आगे 2025 में मिली सफलताओं में IITM बेंगलुरु (जुलाई) का बेस्ट सस्टेनेबल ट्रेवल एक्सपीरियंस इन इंडिया, आउटलुक ट्रेवलर अवॉर्ड (नवंबर) में उदयपुर के लिए बेस्ट वेडिंग डेस्टिनेशन, IITM पुणे (नवंबर) का हैरिटेज डेस्टिनेशन ऑफ द ईयर, तथा IITM हैदराबाद (दिसंबर) का 'द कल्चरल कैलिडोस्कोप अवार्ड' शामिल हैं।
- सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम पुरस्कार में देवमाली गाँव (ब्यावर) ने विश्व पर्यटन दिवस 2024 पर समुदाय-आधारित पर्यटन श्रेणी में पुरस्कार जीता, इससे पहले 2023 के प्रथम संस्करण में मेनार गाँव (उदयपुर) को रजत व नौरंगाबाद गाँव (करौली) को कांस्य पदक मिला था।
🎪मेले व सांस्कृतिक आयोजन
- पर्यटन विभाग का उत्सव-कैलेंडर पूरे वर्ष फैला है — जनवरी में ऊँट महोत्सव (बीकानेर) व पतंग उत्सव (जयपुर), जनवरी-फरवरी में मरु महोत्सव (जैसलमेर), मार्च में हाथी महोत्सव (जयपुर), मार्च-अप्रैल में गणगौर (जयपुर) व मेवाड़ महोत्सव (उदयपुर), जुलाई-अगस्त में तीज (जयपुर), तथा अक्टूबर-नवंबर में मारवाड़ महोत्सव (जोधपुर) व पुष्कर मेला (अजमेर), और दिसंबर में कुंभलगढ़ महोत्सव (राजसमंद) व शरद महोत्सव (माउंट आबू) के साथ यह चक्र पूरा होता है।
- पहला 'घूमर फेस्टिवल 2025' 15 नवंबर 2025 को जयपुर में आयोजित हुआ, जिसका उद्देश्य राजस्थान की लोक संस्कृति व महिला सशक्तीकरण को नई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है।
- मुख्य कैलेंडर के अलावा शेखावाटी महोत्सव व बाड़मेर बैलून महोत्सव से लेकर चन्द्रभागा मेला (झालरापाटन), विभिन्न शहरों के स्थापना दिवस, क्राफ्ट बाजार व रणथम्भौर म्यूजिक फेस्टिवल जैसे दर्जनों स्थानीय आयोजन भी वर्षभर होते रहते हैं।
✨नई पहलें व विशेष पर्यटन
- राष्ट्रीय 'पर्यटन मित्र/पर्यटन दीदी' पहल 15 अगस्त 2024 से जोधपुर सहित 6 स्थलों पर पायलट रूप में शुरू हुई, और विश्व पर्यटन दिवस, 27 सितंबर 2024 को इसे औपचारिक रूप से 50 गंतव्यों (जयपुर सहित) तक विस्तारित किया गया, जिसमें महिलाओं व युवाओं को पर्यटक अनुभव बेहतर बनाने हेतु प्रशिक्षित किया जाता है।
- 14 जुलाई 2025 को स्वीकृत 'हील इन राजस्थान' नीति (मेडिकल वैल्यू ट्रेवल पॉलिसी) का प्रारूप राज्य को घरेलू व अंतरराष्ट्रीय रोगियों हेतु विश्वस्तरीय उपचार सुविधाओं वाला अग्रणी मेडिकल टूरिज्म हब बनाने का लक्ष्य रखता है।
- विशिष्ट पर्यटन भी विस्तार पा रहा है: हर्ष पर्वत (सीकर) राज्य का पहला पैराग्लाइडिंग स्पॉट है, माउंट आबू (सिरोही) में एरो स्पोर्ट्स शुरू होंगे, और भारत-पाकिस्तान सीमा पर हिंदुमलकोट (श्रीगंगानगर) तथा खरूला व मारुति चौकियाँ (बीकानेर) बॉर्डर टूरिज्म के लिए पर्यटकों हेतु खोली गई हैं।
- शिल्पग्राम कारीगरों को पुष्कर, उदयपुर, सवाई माधोपुर व पाल (जोधपुर) में सीधा बाजार उपलब्ध कराते हैं, जबकि 2010 में आमेर के निकट बसाया गया हाथी गाँव एशिया का ऐसा केवल तीसरा समर्पित हाथी गाँव है।