समाज कल्याण
Social Welfare
संविधान की गारंटी से लेकर महिला, बाल, दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक व श्रमिक कल्याण की सैकड़ों योजनाओं तक — राजस्थान के सामाजिक सुरक्षा तंत्र की संपूर्ण झलक।
संवैधानिक ढांचा, आरक्षण एवं बजट
राजस्थान के कल्याण अभियान की नींव — संवैधानिक गारंटी व आरक्षण के मील के पत्थरों से लेकर राज्य के अपने बजटों में किए गए ताज़ा वादों तक।
📜समाज कल्याण हेतु संवैधानिक प्रावधान
- अनुच्छेद 46 (नीति निदेशक तत्व, भाग 4) राज्य को कमजोर व पिछड़े वर्गों के शैक्षिक-आर्थिक हितों को बढ़ावा देने और उन्हें अन्याय-शोषण से बचाने का निर्देश देता है; राजस्थान में यह कार्य सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग, जयपुर द्वारा निभाया जाता है।
- अनुच्छेद 15(1), 15(3) व 15(4) मिलकर धर्म-जाति-लिंग आदि आधार पर भेदभाव रोकते हैं, फिर भी राज्य को महिलाओं, बच्चों तथा सामाजिक-शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े नागरिकों (शैक्षणिक प्रवेश सहित) के लिए विशेष प्रावधान बनाने की छूट देते हैं।
- अनुच्छेद 16 व 16(4) सार्वजनिक नियोजन में समान अवसर की गारंटी देते हुए पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की अनुमति देते हैं, और अनुच्छेद 15(6)/16(6) आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) को भी यही सुविधा देते हैं।
- अनुच्छेद 17 अस्पृश्यता को समाप्त करता है, अनुच्छेद 23 मानव तस्करी व बलात् श्रम को निषिद्ध करता है, तथा अनुच्छेद 24, 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को कारखानों, खदानों या खतरनाक कार्यों में लगाने पर रोक लगाता है।
- अनुच्छेद 29 व 30 अल्पसंख्यकों के हितों व शिक्षा संस्थान चलाने के अधिकार की रक्षा करते हैं, अनुच्छेद 41 बेरोजगारी-वृद्धावस्था-बीमारी-विकलांगता में कार्य/शिक्षा/लोक सहायता का प्रावधान करता है, अनुच्छेद 45, 6 वर्ष तक बाल्यावस्था देखभाल पर केंद्रित है, और अनुच्छेद 51(ट) 6-14 वर्ष के बच्चों को शिक्षा देना माता-पिता का कर्तव्य बताता है।
📖पिछड़े एवं कमजोर वर्गों की परिभाषाएँ
- पिछड़ा वर्ग वे सामाजिक-शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े वर्ग हैं जिन्हें अनुच्छेद 342A व अनुच्छेद 366 के तहत मान्यता प्राप्त है; अनुसूचित जातियाँ वे हैं जिन्हें अनुच्छेद 341 (अनुच्छेद 366, खंड 24) के तहत अधिसूचित किया गया है।
- आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) अनुच्छेद 15(6) के तहत परिवार की आय व अन्य आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर राज्य द्वारा अधिसूचित होते हैं; अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), SC/ST के अतिरिक्त वे वर्ग हैं जिन्हें केंद्र सरकार नौकरी व शिक्षा में आरक्षण हेतु सूचीबद्ध करती है।
🏛️103वां संविधान संशोधन एवं EWS आरक्षण
- संविधान (103वां संशोधन) अधिनियम, 2019 को 12 जनवरी 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति मिली और यह 14 जनवरी 2019 से लागू हुआ; मूलतः 124वें संशोधन विधेयक के रूप में लाए गए इस संशोधन ने अनुच्छेद 15(6) व 16(6) जोड़कर उच्च शिक्षा व सरकारी नौकरियों में EWS को 10% आरक्षण दिया।
- EWS का लाभ उन व्यक्तियों को मिलता है जो SC/ST/OBC आरक्षण के दायरे से बाहर हैं और जिनकी सकल वार्षिक पारिवारिक आय 8 लाख रुपये से कम है; केंद्र ने संपत्ति संबंधी सीमाएँ भी तय की थीं, पर राज्य सरकार ने केवल 8 लाख रुपये की आय सीमा को ही बनाए रखा है।
⚖️मंडल आयोग एवं ओबीसी आरक्षण
- अनुच्छेद 340 के तहत गठित पिछड़ा वर्ग (मंडल) आयोग ने 1980 में अपनी रिपोर्ट सौंपी थी; इसी पर अमल करते हुए केंद्र ने 13 अगस्त 1990 को केंद्रीय पदों में 27% OBC आरक्षण का आदेश दिया, जिसे 1992 के इंदिरा साहनी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 'क्रीमी लेयर' को बाहर रखने की शर्त पर बरकरार रखा।
- 13 सितंबर 2017 के आदेश से OBC क्रीमी लेयर की आय सीमा 6 लाख रुपये से बढ़ाकर 8 लाख रुपये कर दी गई।
🎯राजस्थान ओबीसी/एमबीसी आरक्षण
- राजस्थान पिछड़ा वर्ग (शिक्षा व सेवाओं में आरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2019, जो 13 फरवरी 2019 से लागू हुआ, ने अति पिछड़ा वर्ग (MBC) का शिक्षा व सेवाओं में आरक्षण 1% से बढ़ाकर 5% कर दिया; MBC में मुख्यतः बंजारा, गाड़िया लुहार, गुर्जर, रायका व गडरिया जैसी जातियाँ शामिल हैं।
👩⚖️नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 (106वां संशोधन)
- यह महिला आरक्षण अधिनियम (128वें संशोधन विधेयक के रूप में लाया गया) 20 सितंबर 2023 को लोकसभा (452-2) और अगले दिन राज्यसभा से पारित हुआ; राष्ट्रपति की स्वीकृति के साथ यह 28 सितंबर 2023 को अधिसूचित हुआ, जो लोकसभा व राज्य विधानसभाओं की प्रत्यक्ष निर्वाचित सीटों में एक-तिहाई महिलाओं के लिए आरक्षित करता है।
- यह आरक्षण राज्यसभा/विधान परिषदों पर लागू नहीं होगा, अगली जनगणना के बाद पहले परिसीमन के बाद ही प्रभावी होगा, 15 वर्ष तक (नए कानून से विस्तार योग्य) चलेगा, और लोकसभा की 543 में से 181 सीटें आरक्षित करेगा; इसने अनुच्छेद 239AA में उपखंड और नए अनुच्छेद 330A, 332A व 334A जोड़े।
💹जेंडर बजटिंग
- भारत ने 2005-06 में जेंडर बजटिंग अपनाई (ओडिशा 2004-05 में अपनाने वाला पहला राज्य था); राजस्थान ने 2011 में इसे अपनाया और 2012-13 में अपना पहला जेंडर बजट पेश किया।
📅बजट 2026-27 — समाज कल्याण मुख्य बिंदु
- 'नशा मुक्त राजस्थान' हेतु राज-सवेरा (Raj-SAVERA) नशा-रोधी कार्यक्रम शुरू होगा, और राज पहल (Raj PAHAL) पहल के तहत हर जिले में घुमंतू व श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए 'स्कूल ऑन व्हील्स' व अस्थायी शिक्षा शिविर मिलेंगे।
- 16 लाख से अधिक महिलाएँ 'लखपति दीदी' श्रेणी में पहुँच चुकी हैं; जिला स्तर पर ग्रामीण महिला BPO और मिड-डे मील में सहयोगी 11,000 अमृत पोषण वाटिकाएँ स्थापित की जाएँगी।
- एक नई राजस्थान राज्य प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल, विकास एवं शिक्षा नीति बनेगी, 7,500 आँगनवाड़ी केंद्रों को 'नंद घर' में उन्नत किया जाएगा, और पात्र सहरिया/खैरवा/कथोड़ी जनजातीय परिवारों को घी-तेल-दाल के बदले DBT से 1,200 रु./माह मिलेंगे।
📆बजट 2025-26 — समाज कल्याण मुख्य बिंदु
- सामाजिक सुरक्षा पेंशन बढ़ाकर 1,250 रु./माह की गई, और 'गिग वर्कर्स व असंगठित क्षेत्र श्रम विकास कोष' सहित विमुक्त-घुमंतू समुदायों के लिए दादूदयाल घुमन्तू सशक्तीकरण योजना की घोषणा हुई।
- युवा दिव्यांगजनों के लिए स्कूटी की संख्या बढ़ाकर 2,500 और कालीबाई भील स्कूटी योजना में 35,000 की गई; 10 जिला मुख्यालयों पर बालिका गृह देखभाल संस्थान की घोषणा हुई, और मुख्यमंत्री सुपोषण न्यूट्री किट योजना शुरू की गई।
- राजस्थान महिला निधि क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी को NBFC में उन्नत करने का प्रावधान किया गया, और NLU जोधपुर व राज्य सरकार के अधीन विधिक शोध व आर्थिक-वित्तीय प्रबंधन के उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए गए।
🏢कल्याण आयोग एवं बोर्ड
- राजस्थान ने अनुसूचित जाति आयोग और अनुसूचित जनजाति आयोग एक ही दिन, 30 नवंबर 2011 को गठित किए, जबकि पिछड़ा वर्ग आयोग की स्थापना 24 अक्टूबर 2016 को हुई।
- SC, OBC व EBC वर्गों के लिए वित्त-विकास निगमों को 2020-22 की अधिसूचनाओं से पुनर्गठित किया गया (ROBCFDC की स्थापना 29 मई 2000 को हुई थी), और राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 2001 के तहत राजस्थान राज्य अल्पसंख्यक आयोग बनाया गया।
- राजस्थान राज्य समाज कल्याण बोर्ड का गठन 3 मार्च 2022 की अधिसूचना से हुआ, जिसकी अध्यक्ष डॉ. अर्चना शर्मा को नामित किया गया।
🕊️अंबेडकर योजनाएँ एवं पुरस्कार
- डॉ. अंबेडकर की 114वीं जयंती (2005) से हर 14 अप्रैल को अंबेडकर पुरस्कार शिक्षा (SC/ST कक्षा 10वीं/12वीं में शीर्ष अंक), सामाजिक सेवा, महिला कल्याण व न्याय (विधिक सहायता) जैसी श्रेणियों में दिए जाते हैं — अंतिम तीन में 51,000 से 1 लाख रुपये नकद व प्रशस्ति पत्र मिलता है।
- 125वीं जयंती (14 अप्रैल 2016) पर घोषित अंबेडकर संबल योजना दलित समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण हेतु है; 14 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री ने 200 अंबेडकर ई-लाइब्रेरी, एक अंबेडकर पीठ व मुंडला में आवासीय कोचिंग केंद्र की भी घोषणा की।
🏆स्कॉच अवॉर्ड
- सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के छह नवाचारों ने स्कॉच अवॉर्ड जीते हैं: पालनहार योजना (गोल्ड), उत्तर मैट्रिक छात्रवृत्ति व मुख्यमंत्री कन्यादान योजना (सिल्वर), तथा कोरोना सहायता, सामाजिक सुरक्षा पेंशन व अनुप्रति योजना (ऑर्डर ऑफ मेरिट)।
📌समाज कल्याण से जुड़े महत्त्वपूर्ण दिवस
- राष्ट्रीय महिला दिवस (13 फरवरी, सरोजिनी नायडू जयंती) और अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (8 मार्च) के साथ महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती (11 अप्रैल) व मजदूर दिवस (1 मई) भी कैलेंडर में दर्ज हैं।
- अन्य महत्त्वपूर्ण तिथियों में विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस (15 मार्च), विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून), अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून), शिक्षक दिवस (5 सितंबर), सरदार पटेल जयंती/राष्ट्रीय एकता दिवस (31 अक्टूबर), विश्व मानवाधिकार दिवस (10 दिसंबर), यूनिसेफ दिवस (11 दिसंबर) व निर्भया दिवस (16 दिसंबर) शामिल हैं।
महिला सशक्तिकरण — योजनाएँ एवं आजीविका
जन्म से बचत खातों तक और ड्रोन पायलट से सौर तकनीशियन तक — राजस्थान की महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता व सम्मान देने के लिए बुना गया योजनाओं का व्यापक जाल।
🏢विभाग परिचय एवं हालिया पहलें
- राजस्थान का महिला एवं बाल विकास विभाग 1985 से कार्यरत है, और 18 जून 2007 को एक अलग महिला अधिकारिता निदेशालय बनाया गया; 2020-21 से 2023-24 के बीच राज्य ने SDG-5 (लैंगिक समानता) में 13 अंक व SDG-10 (असमानता में कमी) में 4 अंक का सुधार किया।
- हाल के प्रमुख आयोजनों में अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर 2025 का महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन, जवाहर कला केंद्र में 'शक्ति वंदन महोत्सव', और महिला सुरक्षा हेतु हर जिले में एंटी-रोमियो स्क्वॉड शामिल हैं।
🌐मिशन पोषण 2.0, वात्सल्य व शक्ति
- महिला व बाल कल्याण की केंद्रीय योजनाएँ तीन छत्र मिशनों में बँटी हैं: पोषण 2.0 कुपोषण से निपटता है (60:40 वित्तपोषण), वात्सल्य बाल संरक्षण-कल्याण को कवर करता है (60:40), और शक्ति अपने संबल (100% केंद्रीय-वित्तपोषित सुरक्षा तंत्र — वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन 181, नारी अदालत) व समर्थ्य (60:40; PM मातृ वंदना, शक्ति सदन, सखी निवास, पालना क्रेच) उपयोजनाओं से महिलाओं को सशक्त बनाता है।
- किशोरी बालिका योजना (SAG) को 2019-20 से इस छत्र संरचना में शामिल किया गया।
🎒किशोरी बालिका योजना (SAG)
- 1 अप्रैल 2022 से 14-18 वर्ष की बालिकाओं के लिए शुरू SAG शुरुआत में पाँच आकांक्षी जिलों — जैसलमेर, बारां, धौलपुर, करौली व सिरोही — में लागू थी, जो आँगनवाड़ी के जरिए वर्ष में 300 दिन 18-20 ग्राम प्रोटीन/600 कैलोरी पूरक पोषण देती है (50:50 वित्तपोषण); बजट 2026-27 इसे राज्य के सभी 27 आकांक्षी ब्लॉकों तक विस्तारित करता है।
💍मुख्यमंत्री कन्यादान योजना
- 12 अक्टूबर 2020 को 'सहयोग व उपहार योजना' का नाम बदलकर बनी यह योजना (जो स्वयं 2016-17 में 1997-98 की विधवा-पुत्री विवाह अनुदान व 2005 की सहयोग योजना के विलय से बनी थी) BPL/अंत्योदय/आस्था परिवारों, आर्थिक रूप से कमजोर विधवाओं, दिव्यांगजनों, पालनहार लाभार्थियों व महिला खिलाड़ियों को कवर करती है — प्रति परिवार अधिकतम 2 बेटियों (18+) के लिए, आवेदन अवधि विवाह से 1 वर्ष तक बढ़ाई गई (31 जनवरी 2025 का परिपत्र)।
- SC/ST/अल्पसंख्यक BPL कन्याओं को 31,000 रु. मूल राशि (हथलेवा) मिलती है, जो 10वीं पास पर 41,000 रु. और स्नातक पर 51,000 रु. हो जाती है; शेष वर्गों व महिला खिलाड़ियों को 21,000 रु. मूल राशि मिलती है, जो 31,000 व 41,000 रु. तक बढ़ती है।
💐सामूहिक विवाह एवं विधवा पुनर्विवाह योजनाएँ
- मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह नियमन व अनुदान योजना (13 जुलाई 2021) सामूहिक विवाह के नियम तय करती है — 10 से 500 जोड़े, वर 21+/वधू 18+ — और 1 अप्रैल 2023 से प्रति जोड़ा 25,000 रु. (वधू को 21,000 रु., आयोजक को 4,000 रु.) देती है, जो पहले 18,000 रु. थी।
- विधवा विवाह उपहार योजना, जो 1 अप्रैल 2017 से लागू है, विधवा पेंशन लाभार्थियों के पुनर्विवाह को प्रोत्साहित करती है और 30 जुलाई 2019 से 51,000 रु. सहायता राशि देती है।
🤝अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना
- 1 अगस्त 2017 से चली आ रही और 1 अप्रैल 2023 से 'डॉ. सविता बेन अंबेडकर अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना, 2023' के नाम से पुनर्नामित इस योजना ने SC-उच्च जाति हिंदू विवाह की प्रोत्साहन राशि 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये (केंद्र-राज्य हिस्सा 12.5:87.5) कर दी; इसमें से 5 लाख रु. संयुक्त 8-वर्षीय सावधि जमा और 5 लाख रु. नकद गृहस्थी बसाने हेतु दिया जाता है।
👧सुकन्या समृद्धि योजना
- 2014 में शुरू हुई और अब 2019 के नियमों (12 दिसंबर 2019 से प्रभावी) के तहत चलने वाली इस योजना में 10 वर्ष से कम आयु की बालिका के नाम एक खाता (प्रति परिवार अधिकतम 2) खोला जा सकता है, जिसमें 250 रु. से 1.5 लाख रु. तक वार्षिक जमा 15 वर्ष तक वर्तमान 8.2% ब्याज दर पर होता है; 18 वर्ष या 10वीं पास पर 50% तक निकासी शिक्षा हेतु हो सकती है, और खाता 21 वर्ष पूर्ण होने या धारक के विवाह (18+ पर) पर परिपक्व होता है, धारा 80C के तहत कर छूट के साथ।
🌟शुभशक्ति योजना
- 1 जनवरी 2016 से लागू यह योजना कल्याण लाभार्थियों (हितग्राहियों) की वयस्क/विवाहित पुत्रियों या अविवाहित महिलाओं को 55,000 रु. देती है, जिसका उपयोग शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, व्यवसाय शुरू करने, कौशल विकास या स्वयं के विवाह हेतु किया जा सकता है।
🌸कालीबाई भील उड़ान योजना
- पूर्व में 'आईएम शक्ति उड़ान योजना' नाम से जानी जाने वाली यह योजना दो चरणों (19 दिसंबर 2021 व 26 अगस्त 2022) में शुरू हुई, जो राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन व राजीविका के जरिए 10-45 वर्ष की बालिकाओं/महिलाओं को मासिक 12 मुफ्त सैनिटरी नैपकिन देकर स्वच्छ मासिक धर्म प्रबंधन को बढ़ावा देती है।
💰बालिका एवं महिला बचत/प्रशिक्षण योजनाएँ
- पूर्णतः केंद्र-वित्तपोषित बालिका समृद्धि योजना (2 अक्टूबर 1997 से) 15 अगस्त 1997 के बाद जन्मी BPL परिवार की अधिकतम दो बेटियों के लिए 500 रु. जमा करती है, साथ ही 10वीं तक 300-1,000 रु. वार्षिक छात्रवृत्ति देती है, जो वयस्क होने पर जारी होती है (शर्त: 18 वर्ष बाद ही विवाह)।
- राजस्थान अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास सहकारी निगम की महिला समृद्धि योजना 20 महिलाओं के समूह को छह माह हस्तशिल्प व्यवसाय में प्रशिक्षित करती है, जिसके बाद बना स्वयं सहायता समूह लघु ऋण तक पहुँच पाता है।
👵महिला पेंशन योजनाएँ
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (राजस्थान में 7 अक्टूबर 2009 से) 40+ आयु की BPL विधवाओं को कवर करती है, जो 1,250 रु./माह (40 से 75 वर्ष से कम) व 1,500 रु./माह (75+) देती है, जिसमें से केंद्र आयु अनुसार 300/500 रु. वहन करता है।
- मुख्यमंत्री एकल नारी सम्मान पेंशन योजना 18+ आयु की विधवा, परित्यक्ता या तलाकशुदा महिलाओं को कवर करती है जिनकी वार्षिक आय 48,000 रु. से कम है, यह भी 1,250 रु./माह (18 से 75 वर्ष से कम) व 1,500 रु./माह (75+) देती है।
🎓महिलाओं हेतु कौशल एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण
- मुख्यमंत्री नारी शक्ति प्रशिक्षण एवं कौशल संवर्द्धन योजना (31 जनवरी 2025 से, पहले 2019-20 की इंदिरा महिला शक्ति योजना) महिलाओं के सभी कौशल-प्रशिक्षण को 'एक छत के नीचे' लाती है, जिसमें निःशुल्क RS-CIT (10वीं पास, 16-40 वर्ष), निःशुल्क RS-CFA (12वीं पास, 16-40 वर्ष) और स्पोकन इंग्लिश-व्यक्तित्व विकास (12वीं पास, 16-45 वर्ष) प्रशिक्षण शामिल हैं।
- कालीबाई भील महिला संबल शिक्षा सेतु योजना (17 दिसंबर 2019 से शुरू, 31 जनवरी 2025 को पुनर्नामित) राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय के जरिए स्कूल छोड़ चुकी बालिकाओं-महिलाओं को शिक्षा से जोड़ती है; राजीव गांधी किशोरी बालिका सशक्तिकरण योजना (राष्ट्रीय शुभारंभ 19 नवंबर 2010, राजस्थान में 24 जनवरी 2011) 10 जिलों में 11-18 वर्ष की बालिकाओं को साप्ताहिक आयरन-फोलिक एसिड गोली देती है।
💼महिला उद्यमिता एवं रोजगार योजनाएँ
- मुख्यमंत्री नारी शक्ति उद्यम प्रोत्साहन योजना (31 जनवरी 2025 से, पहले 18 दिसंबर 2019 की इंदिरा महिला शक्ति उद्यम प्रोत्साहन) महिला उद्यमियों को 50 लाख रु. तक (SHG समूहों को 1 करोड़ रु.) ऋण देती है, SC/ST महिलाओं को 25% व विधवा/परित्यक्ता/हिंसा-पीड़ित/दिव्यांग महिलाओं को 30% सब्सिडी (अधिकतम 15 लाख रु.) के साथ; इंदिरा महिला शक्ति निधि (18 दिसंबर 2019 से) महिलाओं के समग्र विकास हेतु 1,000 करोड़ रु. का कोष है।
- मुख्यमंत्री वर्क फ्रॉम होम-जॉब वर्क योजना (26 अगस्त 2022 से) महिलाओं को घर से कमाई का अवसर देती है, जबकि जागृति-बैक टू वर्क योजना, जो 'जॉब्स फॉर हर फाउंडेशन' के साथ 4 जनवरी 2022 को पायलट रूप में शुरू हुई, विवाह के बाद नौकरी छोड़ चुकी कुशल महिलाओं को फिर से रोजगार में लौटने में मदद करती है।
🚁दीदी एवं सखी ग्रामीण आजीविका योजनाएँ
- नमो ड्रोन दीदी (राजस्थान शुभारंभ 11 मार्च 2024, कोटा) महिला स्वयं सहायता समूहों को फसल-छिड़काव किराया आय हेतु ड्रोन पर 80% केंद्रीय सहायता (8 लाख रु. तक) देती है; लखपति दीदी योजना (15 अगस्त 2023 को घोषित) महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर 1 लाख रु./वर्ष से अधिक आय दिलाने का लक्ष्य रखती है, राजस्थान में 20 लाख लखपति दीदी व 1.5% ब्याज पर 1.5 लाख रु. तक ऋण का लक्ष्य है।
- सोलर दीदी योजना (PM शुभारंभ 13 फरवरी 2024; राजस्थान ने 2025-26 में 2,000 रु./माह मानदेय पर 12 माह हेतु 25,000 महिलाओं को प्रशिक्षित किया) महिलाओं को सौर उपकरण स्थापना में प्रशिक्षित करती है; कृषि सखी, पशु सखी व बैंक सखी क्रमशः ग्रामीण महिलाओं को कृषि-तकनीक मार्गदर्शक, पशुपालन सलाहकार व घर-द्वार बैंकिंग एजेंट के रूप में प्रशिक्षित करती हैं।
🤲महिला स्वयं सहायता समूह कार्यक्रम एवं विपणन संस्थाएँ
- 'एक सबके लिए, सब एक के लिए' के सिद्धांत पर 1997-98 से चल रहा महिला स्वयं सहायता समूह कार्यक्रम सभी जिलों में 10-20 महिलाओं के समूह बनाकर बचत व आत्मनिर्भरता की आदत विकसित करता है।
- स्वयं सहायता समूहों के इर्द-गिर्द बनी विपणन/सहयोग संस्थाओं में 'सोनचिरैया' (शहरी SHG उत्पाद ब्रांड, 13 अगस्त 2021 को लॉन्च), 81 धन लक्ष्मी महिला समृद्धि केंद्र (2012-13 के बजट से) व मिशन ग्राम्यशक्ति योजना (2011-12 का बजट) — जो समूहों को संस्थागत रूप व वित्तपोषण देती है — शामिल हैं।
📋राज्य एवं राष्ट्रीय महिला नीतियाँ
- राजस्थान की पहली महिला नीति 8 मार्च 2000 को घोषित हुई थी; वर्तमान राज्य महिला नीति 2021 (11 अप्रैल 2021 को लॉन्च, SDG-2030 के अनुरूप) जन्म-स्वास्थ्य से लेकर सुरक्षा व जलवायु सहनशीलता तक छह फोकस क्षेत्र तय करती है, जिसमें महिला अधिकारिता निदेशालय का जेंडर सेल नोडल एजेंसी है।
- महिला सशक्तिकरण हेतु राष्ट्रीय नीति 20 मार्च 2001 को जारी हुई, और राजस्थान राज्य बालिका नीति — राष्ट्रीय बालिका दिवस, 24 जनवरी 2013 को घोषित — के साथ राजस्थान बालिका नीति बनाने वाला देश का पहला राज्य बना।
🏅महिला पुरस्कार एवं वैश्विक रैंकिंग
- हर 8 मार्च को पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान योजना किसी विशिष्ट महिला को 51,000 रु. सहित राज्य/जिला स्तरीय पुरस्कारों से सम्मानित करती है, जबकि नारी शक्ति पुरस्कार (महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, 8 मार्च को भी) में 2 लाख रु. नकद मिलता है — जयपुर की मांड-भजन गायिका बेतुल-बेगम को 2021 का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
- WEF की ग्लोबल जेंडर गैप इंडिया रिपोर्ट 2025 में भारत ने 64.1% अंक के साथ 148 देशों में 131वां स्थान पाया (2024 के 129वें स्थान से गिरावट), जबकि आइसलैंड 92.6% के साथ शीर्ष पर रहा।
🧾आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय
- 2024-25 व 2025-26 दोनों बजटों में 10% वृद्धि के बाद, वर्तमान मासिक मानदेय आँगनवाड़ी कार्यकर्ता को 9,581 रु., सहायिका को 5,590 रु., क्रेच/शिशुपालना गृह कार्यकर्ता को 4,554 रु. व आशा सहयोगिनी को 4,508 रु. है।
महिला सुरक्षा, कानूनी अधिकार एवं सहायता संस्थाएँ
हेल्पलाइन, गश्ती दल, आयोग व कानूनों का वह जाल — दहेज-रोधी नियमों से लेकर भीड़ हिंसा-रोधी विधेयकों तक — जो महिलाओं को सुरक्षित रखने व कानूनी सहारा देने हेतु बनाया गया।
🏥महिला सुरक्षा एवं परामर्श केंद्र I
- 'वन स्टॉप सेंटर'/सखी केंद्र योजना (1 अप्रैल 2015 से, राजस्थान में 2016-17 से निर्भया फंड से वित्तपोषित) हिंसा-पीड़ित महिलाओं को एक ही स्थान पर चिकित्सा, पुलिस, कानूनी व आश्रय सहायता देती है — अभी राज्यभर में 52 ऐसे केंद्र कार्यरत हैं; 'अपराजिता' संकट प्रबंधन केंद्र 30 अगस्त 2013 से जयपुरिया अस्पताल, जयपुर में चल रहा है।
- पन्नाधाय सुरक्षा एवं सम्मान केंद्र, जो 2021-22 के बजट के अनुसार हर जिला मुख्यालय पर स्थापित हैं, महिलाओं को मनोवैज्ञानिक, आर्थिक व सामाजिक समस्याओं पर मुफ्त परामर्श देते हैं; कालिका पेट्रोलिंग यूनिट (15 दिसंबर 2024 को शुरू, मार्च 2026 तक लक्ष्य बढ़ाकर 600) सार्वजनिक स्थानों पर उत्पीड़न रोकने हेतु गश्त करती हैं।
🧭महिला सुरक्षा एवं परामर्श केंद्र II
- इंदिरा महिला शक्ति केंद्र योजना (12 जुलाई 2021 से) जिला मुख्यालयों पर ग्रामीण-शहरी महिलाओं की समस्याएँ सुनती है, जबकि केंद्रीय महिला शक्ति केंद्र योजना (राजस्थान में 26 फरवरी 2019 से) के तहत आँगनवाड़ी केंद्र सामुदायिक स्तर पर महिला शक्ति केंद्र का भी काम करते हैं; महिला शक्ति आत्मरक्षा केंद्र, जो राजस्थान पुलिस द्वारा 1 जनवरी 2020 से चलाए जा रहे हैं, महिलाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण देते हैं।
- त्रिस्तरीय महिला समाधान समिति — संभागीय आयुक्त (संभाग स्तर), जिला कलेक्टर (जिला स्तर) व उपजिला मजिस्ट्रेट (उपजिला स्तर) की अध्यक्षता में — असंगठित/अनौपचारिक क्षेत्र की महिलाओं की सुरक्षा करती है, जबकि गैर-सरकारी संगठनों के जरिए चलने वाले महिला सुरक्षा व सलाह केंद्र परामर्श, कानूनी, पुलिस व चिकित्सा सहायता देते हैं।
☎️हेल्पलाइन नंबर एवं पैनिक बटन नियम
- राजस्थान में महिला हेल्पलाइन 181 है और देशभर में आपातकालीन प्रतिक्रिया नंबर 112 है; 2016 के 'पैनिक बटन व GPS नियम' हर मोबाइल हैंडसेट में पैनिक बटन अनिवार्य करते हैं, और शी-बॉक्स (2017 से) कार्यस्थल यौन उत्पीड़न शिकायतों का ऑनलाइन पोर्टल है।
📘महिलाओं की सुरक्षा हेतु केंद्रीय कानून I
- घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 (26 अक्टूबर 2006 से लागू) घरेलू हिंसा से तत्काल राहत देता है, राजस्थान में जिला उपनिदेशक व CDPO संरक्षण अधिकारी की भूमिका निभाते हैं; कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 (9 दिसंबर 2013 से प्रभावी, 1997 के विशाखा फैसले के बाद) 10+ कर्मचारियों वाले हर संस्थान में आंतरिक शिकायत समिति अनिवार्य करता है।
- दहेज निषेध अधिनियम, 1961 पूरे देश में लागू है (राजस्थान दहेज निषेध नियम 19 जुलाई 2004 से प्रभावी), जबकि आपराधिक विधि (संशोधन) अधिनियम, 2018 (21 अप्रैल 2018 से देशभर में) 12 वर्ष से कम आयु की बालिका के सामूहिक बलात्कार पर मृत्युदंड की अनुमति देता है।
📕महिलाओं की सुरक्षा हेतु केंद्रीय कानून II
- बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (1 नवंबर 2007 से) बालिकाओं के लिए 18 वर्ष व बालकों के लिए 21 वर्ष न्यूनतम विवाह आयु तय करता है, साथ ही 2 वर्ष तक कठोर कारावास या 1 लाख रु. जुर्माना; अनैतिक व्यापार (प्रतिषेध) अधिनियम, 1956 (1 मई 1958 से देशभर में) व्यावसायिक-यौन शोषण हेतु तस्करी रोकता है, और महिलाओं का अश्लील रूपण (निषेध) अधिनियम, 1986 (2 अक्टूबर 1987 से) मीडिया में महिलाओं के अश्लील चित्रण पर रोक लगाता है।
- मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 — 31 जुलाई 2019 को राष्ट्रपति की स्वीकृति, प्रभावी 19 सितंबर 2018 से मानी गई — ने तत्काल तीन तलाक को अवैध घोषित कर 3 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया, यह सुप्रीम कोर्ट के अगस्त 2017 के उस फैसले के बाद आया जिसने इस प्रथा को असंवैधानिक घोषित किया था।
📗महिला संरक्षण हेतु राजस्थान के कानून एवं विधेयक
- राजस्थान डायन प्रताड़ना निवारण अधिनियम, 2015 (17 अगस्त 2015 से; नियम 22 जनवरी 2016 से) डायन करार दी गई महिलाओं की रक्षा करता है; राजस्थान सम्मान और परंपरा विधेयक, 2019 (एंटी-खाप बिल, 5 अगस्त 2019 को पारित) अंतरजातीय-अंतरसामुदायिक विवाहों के खिलाफ जाति पंचायतों के फरमानों पर अंकुश लगाता है।
- राजस्थान लिंचिंग से संरक्षण विधेयक, 2019 (5 अगस्त 2019 को पारित) पीड़ित की मृत्यु होने पर आजीवन कठोर कारावास व 1-5 लाख रु. जुर्माने के साथ भीड़ हिंसा को गैर-जमानती, संज्ञेय अपराध बनाता है — राजस्थान भीड़ हिंसा विरोधी कानून बनाने वाला देश का दूसरा राज्य है।
🚓विशेष जाँच इकाइयाँ एवं कमांड सेंटर
- 'स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट फॉर क्राइम अगेंस्ट विमन' हर जिले में महिलाओं व बच्चों के विरुद्ध अपराधों की जाँच व निगरानी करती है, जबकि अभय कमांड सेंटर, कोटा — राज्य का दूसरा ऐसा स्मार्ट पुलिसिंग केंद्र — 18 अगस्त 2017 को शुरू हुआ।
⚖️राजस्थान एवं राष्ट्रीय महिला आयोग
- राजस्थान राज्य महिला आयोग, जो 15 मई 1999 को जयपुर में प्रथम अध्यक्ष श्रीमती कांता खतूरिया के साथ बना, में एक अध्यक्ष व चार सदस्य होते हैं (एक SC/ST व एक OBC वर्ग से अनिवार्य); राष्ट्रीय महिला आयोग को इसके 1990 के अधिनियम के तहत सांविधिक निकाय के रूप में 31 जनवरी 1992 को स्थापित किया गया।
🕊️बचाव एवं पुनर्वास योजनाएँ
- उज्ज्वला योजना तस्करी-यौन शोषण की पीड़ित महिलाओं व उनके बच्चों का बचाव-पुनर्वास करती है (केंद्र, राज्य व स्वैच्छिक संस्थाओं से 60:30:10 वित्तपोषित); चिराली - 'साथ सदा के लिए' (26 सितंबर 2017 से, UNFPA सहयोग से) सात जिलों में लैंगिक हिंसा से निपटती है; देवनारायण योजना पाँच जिलों में स्कूल न जाने वाली गुर्जर समुदाय की किशोरियों हेतु 'बालिका मंडल' बनाती है।
🏠महिला सदन एवं महिला स्वयंसिद्धा
- प्रताप नगर, जयपुर स्थित राज्य महिला सदन — जिसे 'भारत रत्न मदर टेरेसा महिला सदन' कहा जाता है — 1957 से चल रहा है, जबकि महिला स्वयंसिद्धा योजना (2006-07 से) विधवा, निराश्रित व आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को व्यवसायों में प्रशिक्षित कर वित्तीय आत्मनिर्भरता देती है।
🕯️निर्भया फंड
- 16 दिसंबर 2012 के व्यापक रूप से चर्चित दिल्ली सामूहिक बलात्कार मामले के बाद 2013 में केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा स्थापित निर्भया फंड देशभर में महिला सुरक्षा पहलों को वित्तपोषित करता है, जिसमें 2016-17 से राजस्थान के वन स्टॉप सेंटर भी शामिल हैं।
📑महिलाओं हेतु अन्य कानूनी एवं प्रशासनिक प्रावधान
- महिलाओं को सरकारी नौकरियों व उचित मूल्य दुकानों में 30% आरक्षण मिलता है, तलाकशुदा बेटियाँ अनुकंपा नियुक्ति व पारिवारिक पेंशन की हकदार मानी गई हैं, और अब स्कूल प्रवेश फॉर्म व कच्ची बस्ती पट्टों पर दोनों माता-पिता का नाम अनिवार्य है; मृत्यु प्रमाण पत्र पर अब विधवा का नाम अंकित करना अनिवार्य है।
- राजनीतिक सशक्तिकरण प्रावधानों के तहत पंचायती राज संस्थाओं में 50% व शहरी स्थानीय निकायों में एक-तिहाई स्थान महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।
🚀महिला रोजगार कार्यालय एवं अग्रणी उपलब्धियाँ
- जयपुर में एक समर्पित महिला रोजगार कार्यालय महिलाओं को रोजगार व स्वरोजगार योजनाओं की जानकारी देता है; राज्य का पहला संपूर्ण महिला थाना 8 मार्च 2017 को गांधीनगर, जयपुर में खुला, और राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम ने SMS स्टेडियम में राज्य का पहला पूर्णतः महिला इंजीनियर संचालित ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित किया।
बाल विकास, पोषण एवं संरक्षण
आँगनवाड़ी के दूध व पोषण किट से लेकर फोस्टर होम व बाल अधिकार आयोगों तक — राजस्थान के बच्चों को पोषण, शिक्षा व संरक्षण देने के लिए बनी बहुस्तरीय व्यवस्था।
👶ICDS — परिचय एवं जनसांख्यिकी
- राजस्थान की लगभग 41% जनसंख्या (राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 41.1%) 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की है, जो भारत को 'दुनिया का सबसे युवा देश' का दर्जा देती है; समेकित बाल विकास सेवाओं का एक अलग निदेशालय विभागों में बाल अधिकार संरक्षण व मुख्यधारा में लाने का समन्वय करता है।
- 1974 की राष्ट्रीय बाल नीति के बाद, ICDS 1975 में शुरू हुई (राजस्थान की पहली परियोजना 2 अक्टूबर 1975 को गढ़ी पंचायत समिति, बांसवाड़ा में) जो 0-6 वर्ष के बच्चों के पोषण-स्वास्थ्य में सुधार और कुपोषण, मृत्यु दर व ड्रॉपआउट कम करने हेतु है; राज्य में अभी 363 बाल विकास परियोजनाएँ व 63,048 आँगनवाड़ी केंद्र कार्यरत हैं।
🍎ICDS की छह मुख्य सेवाएँ
- ICDS छह सेवाएँ विभिन्न लाभार्थी समूहों को देती है: पूरक पोषाहार (6 वर्ष तक के बच्चे, गर्भवती-धात्री महिलाएँ, व 5 आकांक्षी जिलों की किशोरियाँ), बचपन व शाला-पूर्व शिक्षा (3-6 वर्ष), पोषण-स्वास्थ्य शिक्षा (15-45 वर्ष की महिलाएँ/किशोरियाँ), टीकाकरण (0-6 वर्ष व गर्भवती महिलाएँ), स्वास्थ्य जाँच व रेफरल सेवाएँ (0-6 वर्ष व गर्भवती-धात्री महिलाएँ)।
🏫आँगनवाड़ी केंद्र
- शहरी/ग्रामीण क्षेत्रों में प्रति 400-800 जनसंख्या (जनजातीय क्षेत्रों में 300-800) पर एक आँगनवाड़ी केंद्र स्वीकृत है, जिसमें ग्राम सभा द्वारा चुनी गई एक कार्यकर्ता, एक सहायिका व एक आशा सहयोगिनी मानदेय पर कार्यरत होती हैं; कार्यकर्ता-सहायिका के लिए न्यूनतम 12वीं पास, विवाहित, स्थानीय निवासी व 21-35 वर्ष आयु आवश्यक है।
🧸प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE)
- ECCE सभी आँगनवाड़ियों में पंजीकृत 3-6 वर्ष के बच्चों हेतु रोज़ 4 घंटे (गर्मी में 8-12, सर्दी में 10-2) खेल, कहानी व गीतों के जरिए चलती है, जिसका मार्गदर्शन 'आँगनवाड़ी मार्गदर्शिका-इंद्रधनुष' पुस्तिका करती है; आयु-अनुसार दर्कबुक हैं किलकारी (3-4 वर्ष), उमंग (4-5 वर्ष), तरंग (5-6 वर्ष) व मेरी फुलवारी (3-6 वर्ष), 12 अक्टूबर 2013 को अधिसूचित राष्ट्रीय ECCE नीति के तहत।
🤝नंद घर एवं यूनिसेफ कार्यक्रम
- नंद घर पहल — सामाजिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी से चलने वाली उन्नत आँगनवाड़ी — का औपचारिक शुभारंभ वेदांता समूह ने 11 मई 2015 को पाली में किया; यूनिसेफ-समर्थित प्रयासों में 'आँचल से आँगन तक-II' कार्यक्रम (बारां, डूंगरपुर, पाली, टोंक) व 8 मार्च 2006 को शुरू पोषण मिशन शामिल हैं।
🥗पोषण अभियान 1.0 एवं 2.0
- प्रधानमंत्री ने विश्व बैंक सहयोग से राष्ट्रीय पोषण मिशन (पोषण अभियान) — 'सही पोषण, देश रोशन' — 8 मार्च 2018 को झुंझुनू से शुरू किया, जो 2021-22 तक राजस्थान के सभी जिलों में फैला, इसका लक्ष्य 2022 तक बाल ठिगनेपन (स्टंटिंग) को 38.4% से घटाकर 25% करना था।
- पोषण अभियान 2.0, जो अब सक्षम आँगनवाड़ी व पोषण 2.0 का हिस्सा है (60:40 वित्तपोषण), गर्भवती-धात्री महिलाओं, 6 वर्ष तक के बच्चों व 14-18 वर्ष की किशोरियों में कुपोषण समाप्त करने और सक्रिय पोषण पंचायतों के जरिए 'कुपोषण मुक्त गाँव' बनाने का लक्ष्य रखता है।
📚पोषण भी पढ़ाई भी, सुपोषित ग्राम पंचायत एवं मिशन उत्कर्ष
- पोषण भी, पढ़ाई भी (10 मई 2023 से) आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को बाल्यावस्था देखभाल, शिक्षा व पोषण में कौशल-प्रशिक्षित करती है; प्रधानमंत्री का सुपोषित ग्राम पंचायत अभियान (26 दिसंबर 2024) सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली 1,000 पंचायतों को प्रत्येक को 1 लाख रु. से पुरस्कृत करता है।
- मिशन उत्कर्ष, जो आयुष व महिला-बाल विकास मंत्रालयों द्वारा संयुक्त रूप से 'एनीमिया मुक्त भारत' हेतु चलाया जाता है, 14-18 वर्ष की एनीमिया-ग्रस्त बालिकाओं को तीन माह आयुर्वेदिक औषधि देता है; इसके पहले चरण में धौलपुर (राजस्थान) के अलावा धुबरी, बस्तर, पश्चिम सिंहभूम व गढ़चिरौली शामिल हैं।
🥛पोषण योजनाएँ — अमृत आहार, बाल-गोपाल एवं लाडेसर
- मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना (14 दिसंबर 2024 को उदयपुर में शुरू) 1 अप्रैल 2025 से आँगनवाड़ी के 3-6 वर्ष के बच्चों को सप्ताह में 5 दिन (पहले 3 दिन) RCDF की गर्म दूध देती है; पन्नाधाय बाल-गोपाल योजना सरकारी स्कूलों की कक्षा 1-8 के छात्रों को मीठा दूध देती है — पूर्व-प्राथमिक से कक्षा 5 तक 15 ग्राम दूध पाउडर/8.4 ग्राम चीनी, और कक्षा 6-8 को 20 ग्राम/10.2 ग्राम।
- जयपुर जिला प्रशासन का लाडेसर अभियान (13 जनवरी 2025 से) कुपोषित व अति-कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार पर केंद्रित है।
💊मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल संबल योजना
- 16 जुलाई 2024 को घोषित (पोर्टल 15 दिसंबर 2024 से सक्रिय) यह योजना 56 सूचीबद्ध दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को समर्पित निधि से 50 लाख रु. तक निःशुल्क उपचार व 5,000 रु./माह सहायता देती है; जे.के. लोन अस्पताल, जयपुर व AIIMS, जोधपुर पहले अधिकृत उपचार केंद्र हैं।
🚫बाल विवाह उन्मूलन एवं शिशु देखभाल केंद्र
- उप-मुख्यमंत्री दीया कुमारी ने बाल विवाह समाप्त करने हेतु 2 मई 2025 को 'बाल विवाह मुक्त राजस्थान अभियान' शुरू किया; अलग से, सरकारी कार्यालयों में 'मुख्यमंत्री शिशु वात्सल्य सदन' शिशु देखभाल केंद्र कार्यालय समय में कर्मचारियों के 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल करेंगे।
🏡पालन-पोषण देखभाल योजनाएँ
- गोराधाय ग्रुप फोस्टर केयर योजना (23 अप्रैल 2021 को स्वीकृत, बाल अधिकार पर संयुक्त राष्ट्र संधि से प्रेरित) प्रति इकाई अधिकतम 8 अनाथ/उपेक्षित बच्चों को रखती है, जिला बाल संरक्षण इकाई प्रति बच्चा 4,000 रु./माह, प्रति देखभालकर्ता 20,000 रु./माह (दो देखभालकर्ता) व 10,000 रु./माह परिचालन व्यय देती है; व्यक्तिगत फोस्टर केयर योजना (2020) इसी तरह 0-18 वर्ष के बच्चों को पारिवारिक देखभाल देती है।
🤲पालनहार योजना
- 8 फरवरी 2005 को अनाथ SC बच्चों हेतु शुरू (अब HIV/AIDS-ग्रस्त, कुष्ठ-ग्रस्त या सिलिकोसिस-ग्रस्त माता-पिता के बच्चों सहित 10 श्रेणियाँ कवर, प्रति परिवार अधिकतम 3 बच्चे), पालनहार के परिवार की आय 1.20 लाख रु. से अधिक नहीं होनी चाहिए और बच्चे का आँगनवाड़ी (3-6 वर्ष) या स्कूल (6-18 वर्ष) में पंजीकरण अनिवार्य है।
- अनुदान राशि है 1,500 रु./माह (अनाथ, 0-6 वर्ष), 2,500 रु./माह (अनाथ, 6-18 वर्ष), 750 रु./माह (अन्य श्रेणी, 0-6 वर्ष), 1,500 रु./माह (अन्य श्रेणी, 6-18 वर्ष), साथ ही वस्त्र-जूतों हेतु 2,000 रु. वार्षिक एकमुश्त।
🌈संक्रमण एवं सहायता योजनाएँ
- समर्थ योजना (13 नवंबर 2020 से) संस्थागत देखभाल छोड़ रहे 18-21 वर्ष के युवाओं को मुख्यधारा में लाती है, जबकि मुख्यमंत्री हुनर विकास योजना (19 जनवरी 2012 से, संशोधित नियम 1 अप्रैल 2021 से) बाल गृहों के निवासियों व 17-21 वर्ष के पालनहार लाभार्थियों को व्यावसायिक-उच्च शिक्षा कौशल देती है।
- मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना (25 जून 2021 से) कोविड-अनाथ बच्चों व विधवाओं की सहायता करती है, जबकि 'माँ-बच्चा सुरक्षा कार्ड' (ममता कार्ड) गर्भवती-धात्री माताओं व बच्चों की वृद्धि निगरानी को WHO मानकों के अनुरूप बनाता है।
⚖️बाल संरक्षण कानून — किशोर न्याय अधिनियम एवं पॉक्सो
- किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 (15 जनवरी 2016 से लागू) कानून के विरुद्ध बच्चों व देखभाल-संरक्षण चाहने वाले 18 वर्ष तक के बच्चों को कवर करता है, जघन्य अपराधों में 16-18 वर्ष के किशोरों पर वयस्कों जैसा मुकदमा चलाने की अनुमति देता है, और हर जिले में किशोर न्याय बोर्ड व बाल कल्याण समिति अनिवार्य करता है।
- पॉक्सो अधिनियम, 2012 (14 नवंबर 2012 से प्रभावी, नियम 9 मार्च 2020 से, संशोधन 2019) 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध यौन अपराधों पर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान करता है।
🧑⚖️बाल अधिकार आयोग एवं वकालत
- बाल अधिकार संरक्षण राज्य आयोग (23 फरवरी 2010 को जयपुर में, 2005 के अधिनियम के तहत गठित) में 1 अध्यक्ष व 6 सदस्य हैं जिनके पास सिविल न्यायालय की शक्तियाँ हैं, और यह किशोर न्याय अधिनियम, पॉक्सो अधिनियम व शिक्षा अधिकार अधिनियम की निगरानी करता है — राजस्थान ऐसा आयोग बनाने वाला 7वां राज्य (राज्यों में 6वां) था; राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (5 मार्च 2007) की प्रथम अध्यक्ष श्रीमती शांता सिन्हा थीं।
- वकालत/सहायता पहलों में बाल मित्र योजना व उत्कर्ष स्पॉन्सरशिप कार्यक्रम (दोनों 2021) शामिल हैं जो न्याय प्रणाली में बच्चों व पारिवारिक पुनर्मिलन चाहने वाले बच्चों की मदद करते हैं, और बाल हक ई-बॉक्स (16 अगस्त 2023 से) बच्चों के विरुद्ध हिंसा या शोषण की रिपोर्ट हेतु है।
🎖️पीएम केयर्स, सक्षम एवं राष्ट्रीय बाल पुरस्कार
- पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन (29 मई 2021 को शुरू) उन बच्चों के लिए सावधि जमा खाता खोलती है जिन्होंने कोविड में (11 मार्च 2020 या बाद में) माता-पिता/अभिभावक दोनों को खोया, जो 18 वर्ष की आयु पर 10 लाख रु. के कोष में परिपक्व होता है; सक्षम किशोर बालकों के समग्र विकास हेतु एक योजना है।
- प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार (2018 से) की दो श्रेणियाँ हैं — बाल शक्ति पुरस्कार (5-18 वर्ष, 1 लाख रु. नकद) व बाल कल्याण पुरस्कार (7+ वर्ष सेवा वाले व्यक्तियों को 1 लाख रु.; 10+ वर्ष सेवा वाली संस्थाओं को 5 लाख रु.)।
🚸तस्करी-रोधी एवं कानूनी पहचान अभियान
- राजस्थान पुलिस का 'उमंग-VII' (1-30 जून 2026) बाल श्रम, बंधुआ मजदूरी व तस्करी को निशाना बनाता है; RAJ-PAHAL 'स्कूल ऑन व्हील्स' कार्यक्रम हर जिले में घुमंतू-अर्द्धघुमंतू बच्चों की सेवा करता है; राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण का 'साथी अभियान' बच्चों को शिक्षा-स्वास्थ्य सेवा तक पहुँच आसान बनाने हेतु उनकी कानूनी पहचान बहाल करता है।
दिव्यांगजन, वरिष्ठ नागरिक एवं वंचित समुदाय कल्याण
दिव्यांगजनों, वरिष्ठ नागरिकों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, घुमंतू-जनजातीय समुदायों, असंगठित श्रमिकों व सैनिकों — सभी के लिए पेंशन, विश्वविद्यालय, आवास व कानूनी संरक्षण।
⚖️दिव्यांगजनों हेतु कानूनी एवं नीतिगत ढांचा
- निःशक्तजन निदेशालय (19 अक्टूबर 2011) को 6 मार्च 2012 को विशेष योग्यजन निदेशालय नाम दिया गया; दिव्यांगता राज्य सूची में है, और अनुच्छेद 243-G/243-W की अनुसूची प्रविष्टियाँ उनके कल्याण का प्रावधान करती हैं — 3 अप्रैल 2025 के परिपत्र ने 'दिव्यांगजन' जैसे सम्मानजनक शब्द भी निर्धारित किए।
- दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 (केंद्र में 19 अप्रैल 2017 से लागू) ने मान्यता प्राप्त दिव्यांगता श्रेणियाँ बढ़ाकर 21 कीं; राजस्थान के 2018 नियम (24 जनवरी 2019 से) प्रत्यक्ष भर्ती में 4% आरक्षण देते हैं, और 2021 संशोधन ने 5 वर्ष आयु छूट, 5% अंक छूट व 4% पदोन्नति आरक्षण जोड़ा।
- दिव्यांगजनों हेतु समान अवसर नीति 2025 (मंत्रिमंडल स्वीकृति 8 मार्च 2025, भरतपुर में 27 मार्च 2025 को जारी) सरकारी कार्यालयों में बाधा-मुक्त पहुँच सुनिश्चित करती है; 2016 अधिनियम की धारा 79(1) विशेष योग्यजन राज्य आयुक्त के 3-वर्षीय कार्यकाल (या 65 वर्ष तक) का प्रावधान करती है।
🏛️दिव्यांगजन संस्थान, विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय पुरस्कार
- राजस्थान दो समर्पित दिव्यांग विश्वविद्यालयों वाला पहला राज्य है: बाबा आम्टे दिव्यांग विश्वविद्यालय, जयपुर (विधेयक 20 मार्च 2023 को पारित, 12 अप्रैल 2023 को स्वीकृत) व महात्मा गांधी दिव्यांग विश्वविद्यालय, जोधपुर (2023-24 बजट, 25 सितंबर 2023 को शुभारंभ)।
- लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 19 मई 2025 को कोटा के MBS अस्पताल में प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र (ALIMCO पहल) का उद्घाटन किया — राज्य का तीसरा ऐसा केंद्र; डूंगरपुर व सलूंबर जिलों ने राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार-2024 (3 दिसंबर 2024) जीता, जो सुगम्य भारत अभियान के नौ वर्ष पूर्ण होने का भी अवसर था।
- अन्य महत्त्वपूर्ण संस्थानों में जोधपुर में गूंगे-बहरे/दृष्टिबाधितों हेतु दो कॉलेज, जामडोली (जयपुर) में राजस्थान का पहला समग्र क्षेत्रीय केंद्र व बौद्धिक दिव्यांग गृह, ब्रेल प्रेस (श्रीगंगानगर, 1993-94), ब्रेल लाइब्रेरी (जयपुर, 1999) व जामडोली में राज्य का पहला सांकेतिक भाषा दुभाषिया प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं।
🛵मुख्यमंत्री स्कूटी एवं सहायक उपकरण योजनाएँ
- मुख्यमंत्री दिव्यांग स्कूटी योजना 2024 (दिशानिर्देश 24 सितंबर 2024, 15 दिसंबर 2024 को जयपुर में शुभारंभ) 40%+ अस्थि-दिव्यांगता वाले स्व-गतिशीलता-बाधित कॉलेज छात्रों/कार्यरत युवाओं को लक्षित करती है, परिवार की आय 20 लाख रु. तक; मुख्यमंत्री ने 12 मार्च 2025 को स्कूटी संख्या 2,000 से बढ़ाकर 2,500 करने की घोषणा की।
- 2024-25 के बजट में मांसपेशी क्षय (मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) से ग्रस्त विशेष योग्यजनों को इलेक्ट्रिक पावर व्हीलचेयर हेतु 1 लाख रु. सहायता की घोषणा भी हुई, जो 1 अक्टूबर 2024 से प्रभावी है।
💑आर्थिक सहायता, विवाह एवं राष्ट्रीय अभियान
- संयुक्त सहायता अनुदान योजना (1986 से) 40%+ दिव्यांगता वाले राजस्थान निवासी को कृत्रिम अंग/उपकरण हेतु 20,000 रु. तक देती है; विशेष योग्यजन सुखी वैवाहिक जीवन योजना (1997 से) प्रति जोड़ा 50,000 रु. देती है, जो 80%+ दिव्यांगता होने पर (2023-24 बजट से) 5 लाख रु. तक बढ़ती है।
- सुगम्य भारत अभियान (3 दिसंबर 2015 से) तीन स्तंभों पर आधारित है — निर्मित पर्यावरण, सार्वजनिक परिवहन, ICT; SIPDA बाधा-मुक्त बुनियादी ढांचे को वित्तपोषित करती है, आस्था योजना (2004-05 से) 40%+ दिव्यांगता वाले 2+ सदस्यों वाले परिवारों को BPL-समकक्ष कार्ड देती है, और दीनदयाल दिव्यांग पुनर्वास योजना (1999 से) पुनर्वास कार्य में जुटे NGO का सहयोग करती है।
💵पेंशन योजनाएँ एवं हॉफ-वे होम
- मुख्यमंत्री विशेष योग्यजन सम्मान पेंशन योजना में, 60,000 रु. तक वार्षिक आय वाले 40%+ दिव्यांग राजस्थान निवासी को पेंशन मिलती है (सामान्यतः 1,250 रु./माह, कुष्ठ-मुक्त या अन्य छूट-प्राप्त श्रेणी में 2,500 रु./माह, सिलिकोसिस में 1,500 रु./माह); इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांगजन पेंशन योजना (राजस्थान में 24 नवंबर 2009 से) 80%+ दिव्यांगता वाले 18+ आयु के BPL सदस्यों को कवर करती है, और 2022-23 की योजना 100% दिव्यांगजनों को अतिरिक्त 1,000 रु./माह देती है।
- ADIP योजना (1981 से, मुख्य एजेंसी ALIMCO कानपुर) जयपुर व उदयपुर में कृत्रिम अंग/उपकरण वितरण शिविरों हेतु 100% अनुदान देती है; 2019-20 के बजट के अनुसार, मानसिक बीमारी से उबर रहे लोगों हेतु 50-क्षमता वाले हॉफ-वे होम स्वैच्छिक संस्थाओं के माध्यम से जयपुर व जोधपुर संभागीय मुख्यालयों पर चलते हैं।
📜राज्य/राष्ट्रीय दिव्यांगजन नीति एवं उपलब्धियाँ
- राजस्थान राज्य विशेष योग्यजन नीति 2012 (22 जून 2012 से प्रभावी) समान अवसर, गरिमा, सामुदायिक भागीदारी व बाधा-मुक्त कार्यस्थल का लक्ष्य रखती है; दिव्यांगजनों हेतु राष्ट्रीय नीति 2006 में लागू हुई थी।
- मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 (2 अगस्त 2018 से) ने चिकित्सा बीमा में मानसिक बीमारी को शामिल करने की अनुमति दी; देश का पहला कृत्रिम हाथ प्रत्यारोपण केंद्र 27 मई 2018 को बापू नगर, जयपुर में खुला, और अटल बिहारी वाजपेयी दिव्यांग खेल प्रशिक्षण केंद्र 2 अक्टूबर 2023 को ग्वालियर में शुरू हुआ।
🏳️⚧️ट्रांसजेंडर एवं सिलिकोसिस कल्याण
- राजस्थान ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड (29 अप्रैल 2016 को गठित, प्रथम अध्यक्ष पुष्पा माई) ट्रांसजेंडर नीति पर सलाह देता है, जिसे ट्रांसजेंडर उत्थान कोष (2021-22 बजट) व गरिमा गृह आश्रय घरों का समर्थन मिलता है; ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 (5 दिसंबर 2019 को स्वीकृत) 10 जनवरी 2020 से लागू हुआ।
- राजस्थान सिलिकोसिस नीति (3 अक्टूबर 2019) के परिणामस्वरूप 16 दिसंबर 2019 से एक पेंशन योजना शुरू हुई, जो न्यूमोकोनियोसिस नीति के तहत प्रमाणित सिलिकोसिस-ग्रस्त व्यक्तियों को 1,500 रु./माह देती है।
👴वरिष्ठ नागरिक — परिभाषा, नीति एवं देखभाल गृह
- वरिष्ठ नागरिक 60+ आयु का भारतीय नागरिक है; राजस्थान ने अनुच्छेद 41 के तहत 8 दिसंबर 2004 को अपनी वृद्धावस्था नीति घोषित की (भारत सरकार की जनवरी 1999 की वृद्धजन राष्ट्रीय नीति के बाद), और 2022-23 के बजट ने 60+ निवासियों की संपत्ति खरीद पर स्टाम्प ड्यूटी 6% से 5% व पंजीकरण शुल्क 1% से 0.5% कर दिया।
- भक्त श्रवण कुमार कल्याण सेवा आश्रम नियम, 2004 स्वैच्छिक संस्थाओं के जरिए प्रति आश्रम 25 निराश्रित वृद्ध पुरुष (60+) व 25 महिलाएँ (55+) भर्ती करते हैं, और पुष्कर (अजमेर) में एक सरकारी वृद्धाश्रम भी चलता है; राजस्थान राज्य वृद्धजन कल्याण बोर्ड (5 जून 2002 को गठित) व माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक देखभाल-कल्याण अधिनियम, 2007 (1 अगस्त 2008 से लागू) इस ढांचे को सहारा देते हैं, साथ ही 15 जुलाई 2019 से जामडोली, जयपुर में एक सरकारी गृह भी है।
💴वृद्धावस्था पेंशन योजनाएँ
- इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (19 नवंबर 2007 से) 60+ आयु के BPL सदस्यों को कवर करती है, वर्तमान में 1,250 रु./माह (2026-27 में 1,400 रु. होगी), केंद्र 200 रु. (80 वर्ष से कम) या 500 रु. (80+) वहन करता है; मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन योजना 48,000 रु. से कम वार्षिक आय वाली 55+ महिलाओं/58+ पुरुषों को कवर करती है (BPL/अंत्योदय/आस्था परिवारों व सहरिया/कथोड़ी/खैरवा समुदाय हेतु आय शर्त माफ), यह भी 1,250 रु./माह देती है, 2026-27 में 1,400 रु. होगी।
🌇अव्यय एवं केंद्रीय वरिष्ठ नागरिक योजनाएँ
- NAPSRC को अप्रैल 2021 में अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY) में बदला गया, जो वृद्धाश्रम/देखभाल सुविधाओं को वित्तपोषित करती है; इसका राज्य वरिष्ठ नागरिक कार्य योजना (SAPSr.C) घटक वृद्धाश्रम चलाता है, जबकि SAGE पहल (4 जून 2021 से) वरिष्ठ-अनुकूल उत्पादों हेतु निजी नवाचार को बढ़ावा देती है।
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY, दिसंबर 2016 से, ALIMCO द्वारा क्रियान्वित) BPL/कम आय वाले वरिष्ठ नागरिकों को सहायक उपकरण देती है — योजना के 325 चयनित राष्ट्रीय जिलों में से 13 राजस्थान में हैं; चिरायु योजना (2008-09 से) PPP-आधारित वृद्धाश्रम बनाती है।
🌿जनजातीय कल्याण एवं धरोहर अभियान
- धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (2 अक्टूबर 2024 से, 17 मंत्रालयों की 25 गतिविधियाँ) 37 जिलों/208 ब्लॉकों के 6,019 गाँवों को कवर करता है, जिसका लक्ष्य अनुसूचित जनजाति विकास कार्य योजना के तहत पक्के मकान, आयुष्मान कार्ड, सड़कें, स्वास्थ्य, पोषण, कौशल व होमस्टे हैं।
- सौंध माटी आदि धरोहर प्रलेखन योजना (2025-26 बजट, बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर 15 नवंबर 2025 को डूंगरपुर में शुभारंभ) जनजातीय-बहुल क्षेत्रों की कला, व्यंजन, संगीत, नृत्य व शिल्प का दस्तावेजीकरण करती है।
🛠️विश्वकर्मा पेंशन योजनाएँ — राज्य एवं केंद्र
- स्वैच्छिक मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना (26 नवंबर 2024 से राज्यव्यापी) 18-45 वर्ष के श्रमिकों/पथ विक्रेताओं/लोक कलाकारों को 60 वर्ष तक 40-100 रु./माह अंशदान की सुविधा देती है, जिसमें राज्य (15-400 रु.) व केंद्र (55-200 रु.) का योगदान जुड़ता है, 60 वर्ष बाद 3,000 रु./माह गारंटीड पेंशन — साथ ही जीवित पति/पत्नी को 50% पारिवारिक पेंशन।
- पीएम विश्वकर्मा योजना (17 सितंबर 2023 से, नोडल मंत्रालय MSME) 18+ आयु के कारीगरों हेतु 18 पारंपरिक व्यवसायों को कवर करती है, 5+15 दिन प्रशिक्षण के साथ 500 रु./दिन वृत्तिका, उपकरणों हेतु 15,000 रु., व रियायती (राज्य की 2% सब्सिडी के बाद अब 3%) ब्याज दर पर बिना जमानत ऋण — पहली किस्त 1 लाख रु., दूसरी किस्त 2 लाख रु. तक।
🏘️मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह, घुमन्तू आवास एवं जातियाँ सूची
- मुख्यमंत्री पुनर्वास गृह योजना (1 अप्रैल 2022 से) बेघर, वृद्ध, कामकाजी महिलाओं व निराश्रितों को आवास देती है; मुख्यमंत्री घुमन्तू आवास योजना 2024 (22 अक्टूबर 2024 से) विमुक्त/घुमंतू/अर्द्धघुमंतू परिवारों के लिए तीन किस्तों में कुल 1,20,000 रु. से पक्के मकान बनवाती है, साथ ही शौचालय हेतु 12,000 रु. व 90 मनरेगा श्रम-दिवस।
- राज्य वर्तमान में 9 विमुक्त (जैसे कंजर, सांसी, नट), 10 घुमंतू (जैसे बलदिया/बंजारा, गाड़िया लुहार, कालबेलिया) व 13 अर्द्धघुमंतू (जैसे रायबारी, जोगी) समुदायों को मान्यता देता है।
🌳पीएम जनमन, PVTG मिशन एवं वनधन योजना
- पीएम जनमन 15 नवंबर 2023 (जनजातीय गौरव दिवस) को खूंटी, झारखंड से शुरू हुआ; मंत्रिमंडल ने इसे 29 नवंबर 2023 को 24,104 करोड़ रु. के परिव्यय (केंद्र 15,336 करोड़, राज्य 8,768 करोड़) के साथ स्वीकृत किया, जो 18 राज्यों में फैले 75 विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG) को लक्षित करता है — बारां जिले की 8 पंचायत समितियों में बेघर सहरिया परिवारों को आवास हेतु 2 लाख रु. व शौचालय हेतु 12,000 रु. मिलते हैं।
- वनधन योजना (2019-20 से, 9 जिलों में) 300-सदस्यीय वनधन विकास केंद्र (60% जनजातीय सदस्यता) बनाती है ताकि जनजातीय समुदाय लघु वनोपज का उचित विपणन कर सकें; PVTG संस्करण 2023-24 से बारां जिले के सहरिया क्षेत्र में 90% PVTG सदस्यता के साथ चलता है।
🎯स्माइल योजना, पीएम-दक्ष एवं पीएम-सूरज
- स्माइल योजना (12 फरवरी 2022 से, 31 मार्च 2028 तक विस्तारित) दो उप-योजनाओं के जरिए ट्रांसजेंडर व्यक्तियों व भिखारियों के पुनर्वास को कवर करती है; स्माइल-75 पहल (12 अगस्त 2022) 75 नगर निगमों में भिखारियों का पुनर्वास करती है।
- पीएम-दक्ष (2020-21 से) 18-45 वर्ष के SC/OBC/DNT/EWS युवाओं व सफाई कर्मियों को रोजगार-योग्य बनाने हेतु कौशल-प्रशिक्षित करता है; पीएम-सूरज पोर्टल (13 मार्च 2024 से) समाज के सबसे वंचित वर्गों का सहयोग करता है।
🧵DNT सशक्तिकरण — दादूदयाल योजना, गाड़िया लुहार एवं SEED
- दादूदयाल घुमन्तू सशक्तीकरण योजना (दिशानिर्देश 27 मार्च 2025) विमुक्त/घुमंतू/अर्द्धघुमंतू परिवारों को 25,000 भूमि पट्टे देगी, साथ ही उनके लिए आवासीय स्कूल, छात्रावास, साइकिल व स्कूटी वितरण चलाएगी; इन समुदायों हेतु एक शोध व संरक्षण केंद्र जैसलमेर में कार्यरत है।
- गाड़िया लुहार समुदाय हेतु, भूखंड (ग्रामीण में 150 वर्गगज/शहरी में 50 वर्गगज) व 1,20,000 रु. गृह-निर्माण अनुदान (2013-14 से, महाराणा प्रताप भवन-निर्माण योजना) स्थायी बसावट सुनिश्चित करते हैं; SEED योजना (16 फरवरी 2022 से, 2021-22 से 2026-27 तक) DNT समुदायों को चार स्तंभों — शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका व आवास — पर सशक्त बनाती है।
🛡️बीमा योजनाएँ — पीएमजेजेबीवाई, पीएमएसबीवाई एवं आम आदमी बीमा योजना
- 1 जून 2015 को (कोलकाता से) एक साथ शुरू हुई PMJJBY (18-50 वर्ष, 2022 से 436 रु./वर्ष प्रीमियम, 2 लाख रु. मृत्यु लाभ) व PMSBY (18-70 वर्ष, 2022 से 20 रु./वर्ष प्रीमियम, दुर्घटना मृत्यु/पूर्ण दिव्यांगता पर 2 लाख रु., आंशिक दिव्यांगता पर 1 लाख रु.) ने 2025 में BPL/आस्था परिवारों की सेवा करते हुए एक दशक पूरा किया।
- पन्नाधाय जीवन अमृत योजना (2013 में आम आदमी बीमा योजना से पुनर्नामित, 14 मई 2024 से निष्क्रिय) 51-59 वर्ष के BPL/आस्था सदस्यों को 200 रु./वर्ष प्रीमियम पर कवर करती थी, सामान्य मृत्यु पर 30,000 रु., दुर्घटना मृत्यु/पूर्ण दिव्यांगता पर 75,000 रु. देती थी, साथ ही कक्षा 9-12 के अधिकतम 2 बच्चों को 300 रु. त्रैमासिक छात्रवृत्ति।
👷असंगठित श्रमिक पेंशन — पीएम-एसवाईएम एवं PMLVMY
- पीएम-एसवाईएम (राष्ट्रीय स्तर पर 15 फरवरी 2019 से प्रभावी, 5 मार्च 2019 को वस्त्राल, गुजरात से शुभारंभ) 15,000 रु./माह तक कमाने वाले असंगठित श्रमिकों को 60 वर्ष पर 3,000 रु./माह पेंशन देती है, 18-40 वर्ष प्रवेश आयु अनुसार 55-200 रु./माह के बराबर अंशदान से, LIC द्वारा प्रबंधित, जीवित पति/पत्नी को 50% पारिवारिक पेंशन के साथ।
- PMLVMY (शुभारंभ रांची, 12 सितंबर 2019) 1.5 करोड़ रु. से कम टर्नओवर वाले 18-40 वर्ष के छोटे व्यापारियों को 60 वर्ष पर 3,000 रु./माह पेंशन गारंटी देती है, 50:50 लाभार्थी-केंद्र प्रीमियम हिस्सेदारी पर; भीलवाड़ा के व्यापारी राहुल मेहता राजस्थान के पहले मानधन कार्ड प्राप्तकर्ता थे।
💹अटल पेंशन योजना (APY)
- APY (2015-16 का बजट, शुभारंभ कोलकाता 9 मई 2015, प्रभावी 1 जून 2015) 18-40 वर्ष के भारतीय नागरिकों हेतु है, जो अंशदान अनुसार 60 वर्ष बाद 1,000-5,000 रु. मासिक पेंशन की गारंटी देती है, PFRDA द्वारा प्रशासित; यदि अभिदाता की मृत्यु 60 वर्ष से पहले होती है तो पति/पत्नी अंशदान जारी रख सकते हैं या संचित राशि ले सकते हैं।
- 18 वर्ष की प्रवेश आयु पर 42 रु./माह अंशदान 1,000 रु./माह पेंशन सुनिश्चित करता है (नॉमिनी को 1.7 लाख रु. कोष मिलता है), जबकि 210 रु./माह 5,000 रु./माह पेंशन सुनिश्चित करता है (8.5 लाख रु. कोष) — प्रत्येक 1,000 रु. पेंशन स्लैब हेतु अंशदान आनुपातिक रूप से बढ़ता है।
🧱निर्माण श्रमिक कल्याण एवं EPFO
- निर्माण श्रमिकों को मृत्यु/चोट पर आर्थिक सहायता (सामान्य मृत्यु 2 लाख, दुर्घटना मृत्यु 5 लाख, पूर्ण दिव्यांगता 3 लाख, आंशिक दिव्यांगता 1 लाख रु.) व बच्चों के IAS/RAS प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने (1 लाख/50,000 रु.) या अंतरराष्ट्रीय खेल पदक जीतने (स्वर्ण पर 11 लाख रु. तक) पर प्रोत्साहन मिलता है।
- EPFO का 'निधि आपके निकट 2.0' (NAN 2.0) एक समावेशी, एकीकृत आउटरीच कार्यक्रम है जो EPFO की उपस्थिति देशभर के हर जिले तक फैलाता है।
📱गिग वर्कर्स, चिरंजीवी एवं आश्रित सेवा सामाजिक सुरक्षा
- राजस्थान गिग वर्कर्स सामाजिक सुरक्षा कानून बनाने वाला पहला राज्य बना — राजस्थान प्लेटफॉर्म आधारित गिग वर्कर्स (पंजीकरण एवं कल्याण) अधिनियम (24 जुलाई 2023 को पारित) के जरिए कल्याण बोर्ड (श्रम मंत्री पदेन अध्यक्ष) व 200 करोड़ रु. का सामाजिक सुरक्षा-कल्याण कोष बना।
- मुख्यमंत्री चिरंजीवी श्रमिक सम्बल योजना (2023-24 का बजट, 14 जून 2023 को स्वीकृत) 25-60 वर्ष के अस्पताल में भर्ती पंजीकृत श्रमिकों/पथ विक्रेताओं को 200 रु./दिन (अधिकतम 7 दिन) देती है; मुख्यमंत्री आश्रित सेवा योजना (20 मार्च 2023 से) व सामाजिक सुरक्षा निवेश प्रोत्साहन योजना, 2023 (2 मई 2023 से, 2021 की SSIPS के स्थान पर) आश्रितों व अन्य उपेक्षित समूहों को सहयोग पूरा करती हैं।
🚭भिखारियों एवं मादक द्रव्य पीड़ितों का पुनर्वास
- स्वाभिमान योजना (जयपुर विकास प्राधिकरण) भिखारी परिवारों को 45 वर्ग मीटर भूखंड पर पक्का मकान व मुफ्त स्वरोजगार किओस्क देती है; भोर कार्यक्रम (RSLDC द्वारा संचालित) भिखारियों को कैटरिंग, खाना पकाने व सिलाई जैसे व्यवसायों में प्रशिक्षित कर भीख माँगने से मुक्त कराता है।
- नशा मुक्त भारत अभियान (15 अगस्त 2020) रोकथाम, उपचार व पुनर्वास के जरिए देशभर में नशाखोरी से निपटता है; राज्य के प्रयासों में राज-सवेरा, MANAS हेल्पलाइन-1933 (18 जुलाई 2024 से), ई-शपथ पोर्टल (जयपुर, 3 दिसंबर 2024) व 2019 से हुक्का बार, ई-सिगरेट व चुनिंदा पान मसाला-सुपारी पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल हैं।
☪️अल्पसंख्यक कल्याण
- पाँच समुदाय — मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी — 1992 के अधिनियम के तहत अल्पसंख्यक अधिसूचित हैं, 27 जनवरी 2014 को जैन समुदाय जोड़ा गया; राजस्थान 20 बालक व 12 बालिका 'राजकीय अल्पसंख्यक आवासीय विद्यालय' (कक्षा 6-12) चलाता है, जिनमें से एक अंग्रेजी-माध्यम है, 8 लाख रु. से कम आय वाले अल्पसंख्यक परिवारों के बच्चों हेतु।
- नई रोशनी योजना अल्पसंख्यक महिलाओं का नेतृत्व विकसित करती है (100% केंद्र-वित्तपोषित, कोई आय सीमा नहीं); मुख्यमंत्री आदर्श मदरसा योजना मदरसों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित करती है; प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (1 अप्रैल 2018 से, 1 अप्रैल 2022 से सभी जिलों में) व साइबर ग्राम योजना (कक्षा 6-10 हेतु डिजिटल साक्षरता) अल्पसंख्यक कल्याण प्रयासों को पूरा करते हैं।
👔कार्मिक कल्याण
- राजस्थान ने 1 अप्रैल 2022 से पुरानी पेंशन योजना बहाल की (ऐसा करने वाला पहला राज्य), और 1 जनवरी 2024 से केंद्र के बराबर उन्नत ग्रेच्युटी लागू की; नई पेंशन योजना 1 जनवरी 2004 से नए राज्य कर्मचारियों हेतु अनिवार्य थी।
- अवकाश प्रावधानों में शिशु देखभाल अवकाश (नियम 103C, 2018 संशोधन — कुल अधिकतम 730 दिन, एक बार में अधिकतम 120 दिन, 18 वर्ष से कम या 40%+ दिव्यांगता होने पर 22 वर्ष तक के बच्चे हेतु), मातृत्व अवकाश बढ़ाकर 180 दिन (2018 अधिसूचना), व पितृत्व अवकाश 15 दिन, अधिकतम दो बार (नियम 103A, 2004 में जोड़ा गया) शामिल हैं।
🎖️सैनिक कल्याण एवं कारगिल पैकेज
- राजस्थान लोकतंत्र सेनानी सम्मान विधेयक 2024 (21 मार्च 2025 को पारित) आपातकाल (25 जून 1975-21 मार्च 1977) के दौरान बंदी बनाए गए लोगों को 20,000 रु./माह पेंशन व 4,000 रु./माह चिकित्सा सहायता से सम्मानित करता है; राज्य का पहला एकीकृत सैनिक कल्याण परिसर डीडवाना (24 मार्च 2026) में खुला, और राज्यपाल राज्य सैनिक कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
- कारगिल पैकेज (14 फरवरी 2019 को घोषित) के तहत, शहीद की पत्नी 25 लाख रु. + 25 बीघा भूमि, 25 लाख रु. + MIG आवास, या 50 लाख रु. नकद में से चुन सकती है; माता-पिता को 5 लाख रु. सावधि जमा मिलता है, और स्थायी रूप से युद्ध-दिव्यांग सैनिकों को 5 लाख रु. तत्काल सहायता व 25 बीघा भूमि या 30 लाख रु. तक नकद मिलता है।