चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
Medicine & Health
आयुर्वेद व आयुष तंत्र से लेकर आयुष्मान भारत, MAA योजना, टीबी-पोलियो-कुष्ठ उन्मूलन अभियानों और हाल की स्वास्थ्य पहलों तक — राजस्थान की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था की एक व्यापक झलक।
स्वास्थ्य प्रशासन, आयुर्वेद व आयुष
राज्य के चिकित्सा निदेशालयों से लेकर आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी और योग-प्राकृतिक चिकित्सा संस्थानों के बढ़ते नेटवर्क तक — यही प्रशासनिक ढाँचा राजस्थान में परंपरागत व आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों को साथ-साथ चलाए रखता है।
🏛️चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय
- जयपुर स्थित चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा निदेशालय राजस्थान भर में चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराता है, जबकि जिला स्तर पर सार्वजनिक स्वास्थ्य की जिम्मेदारी वहाँ नियुक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) की होती है।
- संविधान के तहत 'सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं अस्पताल' राज्य सूची का विषय है, इसलिए स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना मुख्यतः संबंधित राज्य/केंद्रशासित प्रदेश सरकार का दायित्व है।
- राजस्थान में आयुर्वेद विभाग की स्थापना 1950 में हुई थी और इसका आयुर्वेद निदेशालय अजमेर से संचालित होता है, वहीं यूनानी एवं होम्योपैथिक निदेशालय की स्थापना नवम्बर 2010 में जयपुर में की गई।
- ये सभी पृथक निदेशालय अब जयपुर के प्रतापनगर स्थित 'आयुष भवन' से संचालित होते हैं।
🎓आयुर्वेद विश्वविद्यालय, महाविद्यालय व प्रयोगशालाएँ
- डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना सितम्बर 2002 में जोधपुर के करवड़ में हुई थी, जबकि उदयपुर में सन् 1944 में स्थापित पं. मदनमोहन मालवीय राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय राज्य के सबसे पुराने आयुर्वेदिक संस्थानों में से एक है।
- राजस्थान राज्य आयुष अनुसंधान केन्द्र केकड़ी, अजमेर में संचालित है, तथा आयुर्वेद औषधि निर्माण इकाइयाँ (रसायनशालाएँ) वर्तमान में पाँच स्थानों — अजमेर, उदयपुर, जोधपुर, भरतपुर एवं केलवाड़ा (बाराँ) — में चल रही हैं।
- औषधियों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु जयपुर, उदयपुर, बीकानेर व जोधपुर में राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशालाएँ संचालित हैं, जिससे राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है जहाँ इस तरह की 4 प्रयोगशालाएँ हैं।
🌱नई आयुष संस्थाएँ (2025-26)
- अजमेर में नवीन आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा विश्वविद्यालय तथा महवा, दौसा में इससे जुड़ा महाविद्यालय स्थापित किया जा रहा है, साथ ही जयपुर में आयुष शिक्षा निदेशालय भी स्थापित होगा।
- कोटा में एक नया एकीकृत आयुर्वेद-योग-प्राकृतिक चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित हो रहा है, जिसका नामकरण पूर्व सांसद स्व. दाऊदयाल जोशी के नाम पर किया जाएगा, जिन्होंने कोटा में आयुर्वेद चिकित्सा की नींव रखी थी।
- राजस्थान आयुर्वेद एवं आयुष चिकित्सा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य माना जाता है।
🕉️राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान
- जयपुर के जोरावर सिंह गेट पर स्थित राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान की स्थापना मूलतः 7 फरवरी 1976 को एक प्रमुख आयुर्वेदिक संस्थान के रूप में हुई थी।
- आयुष मंत्रालय ने इसे मानित विश्वविद्यालय (डीम्ड यूनिवर्सिटी) का दर्जा प्रदान किया, जिसका औपचारिक उद्घाटन प्रधानमंत्री ने धन्वन्तरि दिवस, 13 नवम्बर 2020 को किया।
💧राजस्थान में होम्योपैथी
- केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान संस्थान का उद्घाटन 7 फरवरी 2019 को जयपुर के प्रतापनगर में हुआ, और जयपुर होम्योपैथी में स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने वाला देश का पहला शहर बना।
- भारत का पहला निजी क्षेत्र का होम्योपैथिक विश्वविद्यालय, डॉ. मदनप्रताप खुंटेटा होम्योपैथी विश्वविद्यालय, 2 अप्रैल 2010 को जयपुर के सांगानेर स्थित डिग्गी रोड पर स्थापित किया गया; राज्य में वर्तमान में 7 होम्योपैथिक अस्पताल संचालित हैं, तथा भरतपुर में एक नया होम्योपैथिक कॉलेज प्रस्तावित है।
🕌यूनानी चिकित्सा प्रणाली
- विश्व की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणालियों में गिनी जाने वाली यूनानी चिकित्सा की शिक्षा राज्य में 2 निजी महाविद्यालयों और टोंक स्थित 1 सरकारी महाविद्यालय में दी जाती है।
- राज्य में 12 यूनानी अस्पताल, 119 औषधालय, 7 मोबाइल यूनिट तथा 142 जिला अस्पताल/CHC/PHC इकाइयाँ संचालित हैं, साथ ही भरतपुर में एक समर्पित हिजामा चिकित्सा केन्द्र भी कार्यरत है।
⚖️चिकित्सा बोर्ड एवं परिषदें
- बोर्ड ऑफ इंडियन मेडिसिन, राजस्थान (बजाज नगर, जयपुर) का गठन 4 मार्च 1953 को हुआ था, तथा राजस्थान होम्योपैथिक मेडिकल बोर्ड, जयपुर की स्थापना 14 मई 1970 को हुई।
- राजस्थान राज्य औषधीय पादप बोर्ड (जयपुर, 2002) औषधीय पौधों की खेती व संरक्षण को बढ़ावा देता है; इलेक्ट्रोपैथी प्रणाली को विनियमित करने हेतु नए राजस्थान इलेक्ट्रोपैथी मेडिकल बोर्ड, जयपुर की अधिसूचना 15 अप्रैल 2025 को जारी की गई, जो 1 मई 2025 से प्रभावी हुई।
🌾आयुष संस्थान एवं आयुष ग्राम
- राजस्थान राज्य आयुष सोसायटी को 28 फरवरी 2015 को स्वीकृति मिली; राज्य में 6 एकीकृत आयुष अस्पताल (कायड़-अजमेर, भीलवाड़ा, बीकानेर, चूरू, सीकर एवं प्रतापनगर-जयपुर, जिसका उद्घाटन 2 नवम्बर 2021 को हुआ) तथा 6 एकीकृत आयुष महाविद्यालय (जयपुर, कोटा, भरतपुर, बीकानेर, सीकर व केकड़ी) संचालित हैं।
- 'आयुष ग्राम' पहल के तहत राज्य के 15 गाँवों — जिनमें कालेसरा व गुलगाँव (अजमेर), धानक्या (जयपुर), ऊँटवालिया (चूरू) तथा बाराँ जिले के चार गाँव शामिल हैं — में तल स्तर पर आयुष-आधारित स्वास्थ्य सेवा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- आयुष (AYUSH) संक्षिप्ताक्षर में A का अर्थ आयुर्वेद, Y का योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, U का यूनानी, S का सिद्ध तथा H का होम्योपैथी है।
📜रिम्स, RUHS व हील इन राजस्थान पॉलिसी
- रिम्स (राजस्थान आयुर्विज्ञान संस्थान) विधेयक 2025 विधानसभा में 8 सितम्बर 2025 को ध्वनिमत से पारित हुआ; रिम्स एक स्वायत्त संस्थान-सह-विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करेगा जिसके अध्यक्ष राज्य के मुख्य सचिव होंगे।
- राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2025, जो 3 सितम्बर 2025 को पारित हुआ, राज्य सरकार को RUHS के किसी घटक या सम्बद्ध महाविद्यालय को सरकारी महाविद्यालय घोषित करने की शक्ति देता है।
- चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु 15 दिसम्बर 2025 को जयपुर में जारी हील इन राजस्थान पॉलिसी 2025 का क्रियान्वयन चिकित्सा शिक्षा सचिव की अध्यक्षता वाली एक तकनीकी समिति करेगी।
स्वास्थ्य बीमा एवं कल्याणकारी योजनाएँ
राज्य की अपनी MAA योजना व RGHS से लेकर आयुष्मान भारत जैसी राष्ट्रीय छत्रछाया तक — यही कैशलेस कवर, दुर्लभ रोग कोष व ऐतिहासिक स्वास्थ्य कानूनों का जाल राजस्थान के परिवारों की रक्षा करता है।
💳मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (MAA) योजना
- राजस्थान की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना, जो पहले मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना कहलाती थी, को 19 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य (MAA) योजना के रूप में पुनः शुरू किया गया।
- इस योजना के तहत लगभग 1.36 करोड़ परिवार पंजीकृत हैं, जिसे राजस्थान राज्य स्वास्थ्य बीमा एजेंसी (RSHAA) संचालित करती है; योजना का नया चरण 30 जनवरी 2025 से शुरू हुआ।
📋MAA योजना — श्रेणियाँ व कवरेज
- निःशुल्क श्रेणी में सरकार SECC-2011 पात्र व NFSA परिवारों, लघु व सीमांत किसानों, संविदा एवं असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, कोविड-प्रभावित परिवारों, 8 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले EWS परिवारों, 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों तथा बजट 2026-27 में जोड़े गए निराश्रित मरीजों का पूरा प्रीमियम स्वयं वहन करती है।
- सशुल्क श्रेणी में परिवार प्रति वर्ष 850 रुपये का भुगतान करते हैं, जबकि शेष 1,520 रुपये का प्रीमियम राज्य सरकार वहन करती है।
- यह योजना प्रति परिवार प्रति वर्ष 25 लाख रुपये तक का कैशलेस कवर देती है — बीमा मोड में 5 लाख (सामान्य बीमारियों हेतु 50,000 व गंभीर बीमारियों हेतु 4.5 लाख) तथा ट्रस्ट मोड में 20 लाख — कुल 2,179 उपचार पैकेजों (2,002 बीमा + 177 ट्रस्ट मोड) के साथ; बजट 2025-26 में 132 नए पैकेज जोड़े गए।
🔄MAA योजना — अंतर्राज्यीय पोर्टेबिलिटी
- 18 अप्रैल 2025 से लागू इनबाउंड पोर्टेबिलिटी के तहत अन्य राज्यों के मरीज राजस्थान आकर इस योजना के अंतर्गत कैशलेस इलाज ले सकते हैं।
- 19 दिसम्बर 2025 को धौलपुर में एक राज्य-स्तरीय महिला सम्मेलन में शुरू की गई आउटबाउंड पोर्टेबिलिटी (15 दिसम्बर 2025 से प्रभावी) के साथ राजस्थान ऐसा पहला राज्य बना जहाँ के पात्र परिवार तमिलनाडु व कर्नाटक को छोड़कर किसी भी अन्य राज्य के सूचीबद्ध अस्पताल में कैशलेस इलाज ले सकते हैं।
🚼मातृत्व, नेत्र व अंत्येष्टि संबंधी कल्याणकारी योजनाएँ
- शिशु मृत्यु दर घटाने के उद्देश्य से शुरू मुख्यमंत्री मा-वाउचर योजना का पायलट 8 मार्च 2024 से बाराँ, भरतपुर व फलोदी में हुआ, तथा 17 सितम्बर 2024 को जयपुर से इसे सभी गर्भवती महिलाओं के लिए राज्यभर में विस्तारित किया गया।
- बजट 2025-26 में घोषित MAA नेत्र वाउचर योजना ट्रक/बस चालकों तथा कारीगर, दर्जी, बढ़ई व नाई जैसे कामगारों को निःशुल्क नेत्र जाँच व मुफ्त चश्मा उपलब्ध कराती है।
- मोक्ष वाहिनी योजना के तहत दुर्घटना में मृत व्यक्ति के शव को अस्पताल की मोर्चरी से सम्मानपूर्वक निःशुल्क घर तक पहुँचाया जाता है।
🏥राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना (RGHS)
- केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना (CGHS) की तर्ज पर बजट 2021-22 में घोषित RGHS ने 1 जुलाई 2021 से कैशलेस चिकित्सा सुविधाएँ देना शुरू किया।
- इसके लाभार्थियों में राज्य के मंत्री, विधायक व पूर्व विधायक, कार्यरत व सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी व अखिल भारतीय सेवा अधिकारी, राज्य सरकार के कर्मचारी व पेंशनभोगी तथा उनके आश्रित, और राज्य/अर्द्ध-सरकारी बोर्ड-निगमों के कर्मचारी शामिल हैं।
- लाभार्थियों को सामान्य बीमारी के लिए प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तथा गंभीर बीमारी के लिए अतिरिक्त 5 लाख रुपये मिलते हैं; 1 अप्रैल 2023 से 30,000 रुपये वार्षिक आउटडोर (OPD) उपचार लाभ भी जोड़ा गया, जिसे 16 जुलाई 2024 से पेंशनभोगियों के लिए बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया।
- 30 नवम्बर 2023 तक RGHS का संचालन राज्य बीमा एवं भविष्य निधि विभाग करता था; 5-6 जून 2025 के आदेशों से इसका नोडल दायित्व RSHAA को दिया गया तथा प्रशासनिक विभाग वित्त (बीमा) से बदलकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग कर दिया गया।
📰राजस्थान पत्रकार स्वास्थ्य योजना (RJHS)
- राजस्थान पत्रकार स्वास्थ्य योजना (RJHS) का शुभारंभ 28 मार्च 2025 को भीलवाड़ा में हुआ, तथा इसकी औपचारिक अधिसूचना 4 अप्रैल 2025 को जारी की गई।
🛡️दुर्घटना व दुर्लभ रोग कवर (MADBY, बाल सम्बल)
- 1 मई 2022 को मुख्यमंत्री चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना के रूप में शुरू हुई और बाद में मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना (MADBY) नाम पाई इस योजना का बीमा लाभ बजट 2023-24 में 5 लाख से बढ़ाकर 10 लाख रुपये किया गया; इसे राज्य बीमा एवं भविष्य निधि विभाग के अधीन एक समर्पित परियोजना निदेशक कार्यालय संचालित करता है।
- 15 दिसम्बर 2024 को अपने पोर्टल के साथ शुरू हुई मुख्यमंत्री आयुष्मान बाल सम्बल योजना दुर्लभ रोगों से ग्रस्त 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को दुर्लभ रोग उपचार कोष से 50 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज तथा 5,000 रुपये मासिक सहायता देती है, जिसका प्रथम चरण जेके लोन अस्पताल जयपुर व एम्स जोधपुर से शुरू हुआ।
- सरकार द्वारा संचालित राज सम्बल पोर्टल दुर्लभ बीमारियों से ग्रस्त बच्चों व वयस्कों के लिए क्राउडफंडिंग की सुविधा देता है।
🇮🇳आयुष्मान भारत-PMJAY (राष्ट्रीय योजना)
- आयुष्मान भारत के दो मुख्य घटक हैं — प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) व आयुष्मान आरोग्य मंदिर (पूर्व में हेल्थ एण्ड वेलनेस सेंटर); प्रधानमंत्री ने 23 सितम्बर 2018 को झारखण्ड के राँची से AB-PMJAY का शुभारंभ करते हुए इसे 'विश्व की सबसे बड़ी सरकार-प्रायोजित स्वास्थ्य बीमा योजना' बताया।
- यह गरीब व वंचित परिवारों को प्रति परिवार प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य कवर देती है, इसने पूर्ववर्ती RSBY व वरिष्ठ नागरिक स्वास्थ्य बीमा योजना को समाहित किया, और यह SDG-3 (अच्छा स्वास्थ्य) के साथ-साथ SDG-1 व SDG-10 से भी जुड़ी है।
- अधिकांश राज्यों के लिए वित्त पोषण केन्द्र व राज्य के बीच 60:40 अनुपात में साझा होता है, पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में 90:10 तथा विधानसभा रहित केंद्रशासित प्रदेशों में यह पूर्णतः केन्द्र-वित्तपोषित है।
📲डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (ABDM) व PM-ABHIM
- प्रधानमंत्री ने 27 सितम्बर 2021 को देशभर में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) का शुभारंभ किया, जिसके तहत हर नागरिक को डिजिटल हेल्थ आईडी मिलती है; इसे राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) चार रजिस्ट्रियों — आभा, हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्टर, हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्री व ड्रग रजिस्ट्री — के जरिए लागू करता है; आरोग्य सेतु ऐप से 14 अंकों की आभा संख्या बनाई जा सकती है।
- देशभर की सबसे बड़ी स्वास्थ्य अवसंरचना योजना PM-ABHIM का शुभारंभ प्रधानमंत्री ने 25 अक्टूबर 2021 को वाराणसी से किया, जिसका उद्देश्य प्राथमिक, द्वितीयक व तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करना है; इसके तहत जोधपुर के लिए 150 बेड का क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल ब्लॉक स्वीकृत किया गया है।
💊निरोगी राजस्थान (निःशुल्क दवा/जाँच) व जन औषधि
- मुख्यमंत्री निःशुल्क निरोगी राजस्थान योजना 1 अप्रैल 2022 से राज्यभर में लागू हुई, जो 2 अक्टूबर 2011 (गांधी जयंती) को शुरू हुई निःशुल्क दवा योजना (केन्द्र-राज्य 60:40 वित्त पोषण, जिसे अपनाने वाला राजस्थान आंध्रप्रदेश के बाद 14वाँ राज्य बना) तथा 7 अप्रैल 2013 को SMS अस्पताल, जयपुर से शुरू निःशुल्क जाँच योजना का विस्तार है; निःशुल्क दवाइयों, सर्जिकल्स व सूचर्स उपलब्ध कराने में राजस्थान अब देश में प्रथम स्थान पर है।
- निःशुल्क जाँचों के लिए हब एवं स्पोक मॉडल 15 दिसम्बर 2025 से राज्यभर में शुरू हुआ, जिसमें सैंपल संग्रहण से रिपोर्टिंग तक का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन रखा जाता है ताकि मरीजों को घर बैठे रिपोर्ट मिल सके।
- प्रधानमंत्री जन औषधि योजना का राष्ट्रीय शुभारंभ नवम्बर 2008 में हुआ (पहला केन्द्र अमृतसर में 25 नवम्बर 2008 को खुला), और नवम्बर 2016 में इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (PMBJP) कर दिया गया; राजस्थान का पहला जन औषधि केन्द्र मथुरादास माथुर अस्पताल, जोधपुर में खुला।
⚖️प्रमुख स्वास्थ्य कानून व नीतियाँ
- राजस्थान विधानसभा ने 21 मार्च 2023 को स्वास्थ्य का अधिकार अधिनियम पारित किया (राज्यपाल की स्वीकृति 12 अप्रैल 2023), जिससे राजस्थान इस अधिकार को कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना; इससे पहले ही राज्य 'राइट टू साइट विजन' उद्देश्य के तहत अंधता नियंत्रण नीति (13 जनवरी 2023) लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका था।
- 3 अक्टूबर 2019 को जारी राजस्थान न्यूमोकोनिसिस (सिलिकोसिस) नीति के साथ राजस्थान खनिक श्रमिकों के लिए ऐसी नीति बनाने वाला पहला राज्य बना; राज्य ने REHAB (राजस्थान पर्यावरण एवं स्वास्थ्य प्रशासन बोर्ड) भी गठित किया और सिलिकोसिस को अधिसूचित रोग घोषित करने वाला पहला राज्य बना; अजमेर, भीलवाड़ा व बाड़मेर सहित 10 से अधिक जिले इससे प्रभावित हैं।
- दौसा जिला प्रशासन ने सिलिकोसिस की रोकथाम, नियंत्रण व उपचार के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु 'कवच' मोबाइल ऐप विकसित किया; राजस्थान को सिलिकोसिस पहचान में टेली-रेडियोलॉजी व कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रयोग तथा पीड़ितों की राहत हेतु स्वतः स्वीकृत DBT पोर्टल के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस (गोल्ड) पुरस्कार 2024-25 मिला।
📊दुर्लभ रोग नीति व स्वास्थ्य बीमा पहुँच
- मार्च 2021 में जारी राष्ट्रीय दुर्लभ रोग नीति (NPRD), 2021 ने शुरुआत में 57 पहचाने गए दुर्लभ रोगों को 3 समूहों में बाँटा था; अब सभी दुर्लभ रोग इसके दायरे में हैं, तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राष्ट्रीय आरोग्य निधि से 50 लाख रुपये तक की सहायता मिलती है।
- राजस्थान में स्वास्थ्य बीमा कवरेज 2015-16 के 19% से बढ़कर NFHS-5 के अनुसार 88% हो गया है, जो 41% के राष्ट्रीय औसत से काफी अधिक है, और इस मामले में राज्य देश में पहले स्थान पर है।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम व रोग नियंत्रण
टीकाकरण व टीबी उन्मूलन से लेकर कुष्ठ रोग, अंधता, एड्स व तम्बाकू नियंत्रण तक — राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशनों का यह जाल, जिनमें से कई राजस्थान में अग्रणी रूप से शुरू हुए, राज्य में रोगों की तस्वीर बदल चुका है।
💉सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP)
- भारत का सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम 1978 में शुरू हुआ और 1985 में श्रीमती इंदिरा गांधी की स्मृति में इसे वर्तमान नाम दिया गया; यह विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण कार्यक्रम है, और भारत में सबसे पहला टीका BCG लगाया गया था।
- UIP के तहत 0-16 वर्ष के बच्चों को 12 बीमारियों के टीके निःशुल्क दिए जाते हैं, जिनमें हाल ही में HPV टीका (28 फरवरी 2026) व स्वदेशी TD टीका (21 फरवरी 2026) जोड़े गए; राष्ट्रीय स्तर पर पूर्ण टीकाकरण दर 2015 के 62% से बढ़कर जनवरी 2026 तक 98.4% हो गई।
- राजस्थान ने 19 नवम्बर 1985 को छह बीमारियों के विरुद्ध व्यापक टीकाकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें बाद में हेपेटाइटिस-बी (2011), पेंटावेलेंट (2014), IPV (2016), रोटावायरस (2017) व PCV (2018) जोड़े गए — यानी बच्चों के लिए 10 टीके तथा गर्भवती महिलाओं के लिए TD टीका; राज्य की अपनी पूर्ण टीकाकरण दर लगभग तीन दशक पहले के 21.1% से बढ़कर 2024-25 में 91.8% हो गई।
- प्रधानमंत्री ने 29 अक्टूबर 2024 को गर्भवती महिलाओं व शिशुओं के टीकाकरण रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल बनाने हेतु यू-विन पोर्टल शुरू किया; 7 अप्रैल 2015 को जयपुर से शुरू मिशन इंद्रधनुष, जो 2 वर्ष से कम आयु के अ-टीकाकृत बच्चों को 7 बीमारियों से बचाता था, अब 5 नए टीके जुड़ने के बाद कुल 12 टीके कवर करता है।
🧪प्रमुख व्यक्तिगत टीके
- खसरा-रूबेला (MR) टीकाकरण अभियान फरवरी 2017 में शुरू हुआ, जिसका लक्ष्य 2026 तक खसरे का उन्मूलन है; इसने पूर्व एकल खसरा टीके की जगह दो खुराकें (9-12 माह व 16-24 माह) दीं, और राजस्थान 1 जनवरी 2019 से इसे निःशुल्क दे रहा है। टी.डी. वैक्सीन ने 1 सितम्बर 2019 से गर्भवती महिलाओं तथा 10 व 16 वर्ष के बच्चों के लिए पुराने टीटी वैक्सीन का स्थान लिया।
- भारत की पोलियो-मुक्त स्थिति बनाए रखने हेतु इंजेक्टेबल निष्क्रिय पोलियो वैक्सीन (IPV) 30 नवम्बर 2015 को राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई (राजस्थान में 1 अप्रैल 2016 से); निमोनिया व मेनिनजाइटिस से बचाने वाली न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (PCV) जून 2017 में भारत में शुरू हुई।
- हेपेटाइटिस-बी टीका 15 दिसम्बर 2011 से राजस्थान में 0-1 वर्ष के बच्चों के नियमित टीकाकरण का हिस्सा है; पेंटावेलेंट वैक्सीन, जो 1 नवम्बर 2014 से जोड़ी गई, हिब-जनित निमोनिया व मस्तिष्क ज्वर सहित 5 बीमारियों से बचाती है; रोटावायरस वैक्सीन, जो 23 मार्च 2017 से जोड़ी गई, शिशुओं को 6, 10 व 14 सप्ताह की आयु पर तीन खुराकों में दी जाती है।
- महिला एवं बाल विकास विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग तथा यूनिसेफ द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाने वाला विटामिन 'ए' कार्यक्रम वर्ष में दो बार (29 मई-29 जून व 29 नवम्बर-29 दिसम्बर) आँगनवाड़ी केन्द्रों के माध्यम से आयोजित होता है, जिसमें 9 माह से 5 वर्ष के बच्चों को पोषण परामर्श के साथ विटामिन ए की खुराक दी जाती है।
🩹पोलियो उन्मूलन व टिटेनस उन्मूलन
- WHO ने 1988 में वैश्विक पोलियो उन्मूलन का संकल्प पारित किया; भारत का पल्स पोलियो अभियान 2 अक्टूबर 1994 को दिल्ली से 'दो बूँद जिंदगी की' नारे के साथ शुरू हुआ, 1995 में देशव्यापी हुआ (पहली OPV खुराक 16 मार्च 1995 को दी गई, जिसे अब राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के रूप में मनाया जाता है), और WHO ने 24 फरवरी 2012 को स्थानिक सूची से हटाने के बाद 27 मार्च 2014 को भारत को पोलियो-मुक्त घोषित किया।
- प्रतिरक्षा बनाए रखने हेतु भारत हर वर्ष 1 राष्ट्रीय व 2 उप-राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस आयोजित करता है; राजस्थान हर वर्ष पल्स पोलियो के दो चरण चलाता है, जिसमें बाड़मेर, जोधपुर, अलवर व भरतपुर में उप-राष्ट्रीय चरण शामिल हैं, और राज्य में अंतिम वाइल्ड पोलियो मामला नवम्बर 2009 में दर्ज हुआ था।
- भारत को मई 2015 में मातृत्व एवं प्रसवपूर्व टिटेनस (MNTE) मुक्त घोषित किया गया और 14 जुलाई 2016 को WHO/यूनिसेफ से आधिकारिक प्रमाणन मिला, जिसी दिन भारत विश्व का पहला यॉज-मुक्त प्रमाणित देश भी बना; आंध्रप्रदेश MNTE-मुक्त प्रमाणित होने वाला पहला राज्य था, और नागालैंड अंतिम (17 अप्रैल 2015)।
🫁राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP)
- भारत का राष्ट्रीय क्षय नियंत्रण कार्यक्रम 1962 में शुरू हुआ (राजस्थान में 1966 से); डॉट्स रणनीति 1995 से जयपुर शहर में परखी गई और 2001 में राज्यभर विस्तारित हुई, तथा 1 जनवरी 2020 से इस कार्यक्रम का नाम बदलकर NTEP कर दिया गया; अजमेर में राज्य क्षय प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण केन्द्र स्थित है।
- निक्षय पोषण योजना के तहत प्रत्येक पंजीकृत टीबी मरीज को 1 नवम्बर 2024 से पोषण सहायता हेतु सीधे बैंक खाते में 1,000 रुपये मासिक मिल रहे हैं; राजस्थान निक्षय सम्बल योजना 16 मई 2022 को शुरू हुई, और निक्षय संपर्क हेल्पलाइन नम्बर 1800-11-6666 है।
- 97% टीबी स्क्रीनिंग कवरेज के साथ राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है (राज्य में बांसवाड़ा शीर्ष पर है); टीबी उन्मूलन के लिए एआई-आधारित पहल का राज्यव्यापी शुभारंभ 19 सितम्बर 2025 को जयपुर में हुआ।
- 'टीबी मुक्त ग्राम पंचायत' अभियान (15 अगस्त 2022 से, नारा 'म्हारे गाँव टीबी ना पसारे पाँव') '4T' रणनीति — टेस्ट, ट्रैक, ट्रीट, टेक्नोलॉजी — पर आधारित है; 2025 तक राज्य की 6,547 पंचायतें टीबी-मुक्त घोषित हो चुकी हैं, और विश्व टीबी दिवस 2025 पर राजस्थान को इस अभियान में देश में तीसरा स्थान मिला। ग्लोबल टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार भारत में टीबी के मामलों में 21% गिरावट आई, तथा घटना दर 2015 के 237 से घटकर 2024 में 187 प्रति लाख तथा मृत्यु दर 28 से घटकर 21 प्रति लाख रह गई।
🤲राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम
- भारत का कुष्ठ नियंत्रण कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर 1955 में तथा राजस्थान में 1970-71 से शुरू हुआ (1983 में इसका नाम राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम रखा गया); भारत ने 2005 में राष्ट्रीय उन्मूलन का दर्जा हासिल किया, और दिसम्बर 2025 तक राजस्थान की प्रसार दर (प्रति 10,000 पर 0.14) राष्ट्रीय दर (0.57) से काफी कम थी।
- 30 जनवरी 2023 को निकुष्ठ 2.0 पोर्टल के साथ शुरू हुआ राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (2023-27) का लक्ष्य 2027 तक शून्य संक्रमण है; हर महीने का अंतिम बुधवार 'कुष्ठ रोग कार्य दिवस' तथा 30 जनवरी 'राष्ट्रीय कुष्ठरोधी दिवस' के रूप में मनाया जाता है।
- छिपे हुए मरीजों की खोज हेतु 'कुष्ठ रोगी खोजी अभियान' 2025-26 में राज्य के 8 जिलों — अलवर, बांसवाड़ा, बाराँ, भरतपुर, झालावाड़, जोधपुर, कोटा व पाली — में चलाया गया।
👁️राष्ट्रीय अंधता नियंत्रण कार्यक्रम व नेत्र सेवाएँ
- 1976 से चल रहे इस केन्द्र प्रायोजित कार्यक्रम का लक्ष्य भारत की अंधता दर को 2020 तक 1.4% से घटाकर 0.30% करना था (राजस्थान का अपना लक्ष्य 2.24% से 0.30% था), जिसका वित्त पोषण केन्द्र-राज्य के बीच 60:40 अनुपात में साझा होता है।
- राज्य में 7 नेत्र बैंक हैं — 6 सरकारी (जयपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर व जोधपुर मेडिकल कॉलेजों में) तथा 1 निजी (आई बैंक सोसायटी ऑफ राजस्थान, जयपुर); निम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़) में एक टेली-नेत्र केन्द्र संचालित है, तथा क्षेत्रीय नेत्र चिकित्सा संस्थान जयपुर में स्थित है।
- स्कूल नेत्र जाँच कार्यक्रम 6-18 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क चश्मे देता है; सरकारी संस्थानों को प्रति मोतियाबिन्द ऑपरेशन 1,000 रुपये तथा NGO/निजी चिकित्सकों को निःशुल्क ऑपरेशन पर 2,000 रुपये अनुदान दिया जाता है; WHO ने भारत को ट्रेकोमा-मुक्त घोषित कर दिया है।
🎗️राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम व HIV रुझान
- भारत का एड्स नियंत्रण कार्यक्रम 1987 में शुरू हुआ, जिसे NACO के माध्यम से लागू किया जाता है; राजस्थान का अपना कार्यक्रम 1992 में शुरू हुआ, जो राजस्थान राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी (जयपुर, स्थापना 19 दिसम्बर 1998) के माध्यम से संचालित है; राष्ट्रीय कार्यक्रम का चरण-V 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 तक चला, और राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1097 है।
- इंडिया HIV एस्टीमेशन रिपोर्ट 2025 (आँकड़े वर्ष 2024 के) के अनुसार वयस्कों में HIV प्रसार राष्ट्रीय स्तर पर 2010 के 0.33% से घटकर 2024 में 0.20% रह गया — जो 0.7% के वैश्विक औसत से काफी कम है — जबकि राजस्थान की प्रसार दर मात्र 0.13% है (राज्यों में 25वाँ स्थान); भारत में HIV/एड्स से मृत्यु 2010 के 1.73 लाख से घटकर 2024 में 32,200 रह गई, यानी 81.4% की कमी।
- राजस्थान ने देश में सबसे अधिक HIV घटना दर (45%) दर्ज की, इसके बाद पंजाब (9%) व त्रिपुरा (7%) रहे; राज्य में मेडिकल कॉलेज अस्पतालों व जिला मुख्यालयों पर 53 STI/RTI क्लिनिक संचालित हैं, जिन्हें NACO ने 'सुरक्षा क्लिनिक' नाम दिया है।
🧠मानसिक स्वास्थ्य, बाल व किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम राष्ट्रीय स्तर पर 1982 में शुरू हुआ (राजस्थान में 2014-15 से); मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम 2017 के बाद राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण का गठन 5 जुलाई 2023 को हुआ, जिसे 'मनदर्पण' व 'राजममता' अभियानों, जयपुर स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा मनसंवाद हेल्पलाइन (1800-180-0018) का सहयोग मिलता है।
- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK), जो 14 नवम्बर 2014 से लागू है, जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केन्द्रों के माध्यम से 18 वर्ष तक के बच्चों की '4D' ढाँचे — जन्मजात दोष, कमियाँ, बीमारियाँ व विकासात्मक देरी — के तहत जाँच करता है।
- राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK), जो 7 जनवरी 2014 को 10-19 वर्ष के किशोरों के लिए शुरू हुआ, सभी जिलों में 'उजाला' क्लिनिक तथा 6 जिलों — बूँदी, करौली, जालौर, उदयपुर, सलूम्बर व बांसवाड़ा — में पीयर एजुकेटर कार्यक्रम चलाता है; इसका स्कूल स्वास्थ्य व कल्याण कार्यक्रम, जो 3 फरवरी 2021 से शुरू हुआ, अब सभी जिलों में लागू है।
🩺गैर-संचारी रोग नियंत्रण, कैंसर देखभाल व वृद्धजन स्वास्थ्य
- कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग व स्ट्रोक हेतु 2010-11 में राष्ट्रीय स्तर पर (राजस्थान में उसी वर्ष से) शुरू NPCDCS का नाम 3 मई 2023 को बदलकर NP-NCD कर दिया गया; 'स्वस्थ नारी चेतना' अभियान महिलाओं में स्तन व सर्वाइकल कैंसर की जाँच करता है, और 'सर्वावैक' सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए भारत का पहला स्वदेशी टीका है।
- राज्य में 8 कैंसर स्क्रीनिंग वैन संचालित हैं (जयपुर में 2, तथा 6 जोनल मुख्यालयों में 1-1); SMS अस्पताल, जयपुर बोनमैरो ट्रांसप्लांट सुविधा देने वाला देश का 8वाँ तथा राजस्थान का पहला अस्पताल बना; कोटा का दूसरा कैंसर अस्पताल 28 अप्रैल 2007 से कार्यरत है, जबकि राज्य का पहला कैंसर अस्पताल जयपुर का महावीर कैंसर अस्पताल है।
- राष्ट्रीय वृद्धजन स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम (अक्टूबर 2010 से, राज्यभर 2020-21 से) के तहत रामाश्रय वार्डों की स्थापना हुई, जिनका उद्घाटन 14 मार्च 2024 को हुआ — राजस्थान अपने सभी 61 जिला अस्पतालों में ऐसे वार्ड बनाने वाला देश का इकलौता राज्य है।
- राष्ट्रीय पेलिएटिव केयर कार्यक्रम राजस्थान में 2017-18 से चल रहा है और अब राज्य के 95 संस्थानों में संचालित है; 12 मार्च 2024 को शुरू राष्ट्रीय स्नेक बाइट एनवीनोमिंग कार्ययोजना का लक्ष्य 2030 तक साँप के काटने से होने वाली मौतों को आधा करना है।
🦟वेक्टर-जनित, आयोडीन, फ्लोरोसिस व बहरापन कार्यक्रम
- राष्ट्रीय वेक्टर-जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम मलेरिया व समान बीमारियों को लक्षित करता है (जून को एंटी-मलेरिया माह मनाया जाता है; राष्ट्रीय मलेरिया नियंत्रण कार्यक्रम 1955 से है); नारू रोग राजस्थान से (अंतिम मामला 1996, राज्य को 1999 में सूची से हटाया) व भारत से (फरवरी 2000 में मुक्त घोषित) पूरी तरह समाप्त हो चुका है।
- आयोडीन अल्पता विकार कार्यक्रम की जड़ प्रो. वी. रामलिंगास्वामी के 1954 के उस शोध में है जिसने हर राज्य में घेंघा रोग की पुष्टि की थी; राष्ट्रीय घेंघा नियंत्रण कार्यक्रम (1962) का नाम 1992 में बदला गया, उसी वर्ष राजस्थान ने गैर-आयोडीनयुक्त नमक पर प्रतिबंध लगाया (5 दिसम्बर 1992); राज्य की अपनी IDD सेल 1993-94 में शुरू हुई, और 4 जिले — बीकानेर, भरतपुर, कोटा, उदयपुर — अब भी आयोडीन अल्पता से प्रभावित हैं (वैश्विक IDD निवारण दिवस: 21 अक्टूबर)।
- फ्लोरोसिस कार्यक्रम (2008-09 से) पेयजल में 1 ppm से अधिक फ्लोराइड वाले क्षेत्रों को लक्षित करता है; दिसम्बर 2025 तक राज्य के 1,020 गाँव फ्लोराइड-प्रभावित चिन्हित किए जा चुके हैं।
- राष्ट्रीय बहरापन नियंत्रण व रोकथाम कार्यक्रम, जो राष्ट्रीय स्तर पर 2006-07 में तथा राजस्थान में 2014-15 में शुरू हुआ, 2020-21 से राज्य के सभी जिलों में लागू है।
🚭तम्बाकू, मुख स्वास्थ्य, कृमि नियंत्रण, डायलिसिस व AMR
- राजस्थान तम्बाकू नियंत्रण में अग्रणी रहा है — 2 अक्टूबर 2008 से राज्यव्यापी धूम्रपान प्रतिबंध, 18 जुलाई 2012 से गुटखा प्रतिबंध, 4 अक्टूबर 2013 से नए सरकारी कर्मचारियों के लिए तम्बाकू-रहित शपथ अनिवार्य (देश में पहला ऐसा आदेश), तथा 16 मई 2017 से सभी सरकारी चिकित्सा संस्थान तम्बाकू-मुक्त घोषित; राज्य ने WHO के वर्ल्ड नो टोबैको डे-2026 पुरस्कार में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में तथा पूर्व में भी राष्ट्रीय तम्बाकू-नियंत्रण सम्मानों में शीर्ष स्थान पाया।
- राष्ट्रीय मुख स्वास्थ्य कार्यक्रम राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में 2014-15 में शुरू हुआ और अब सभी जिलों में लागू है; राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस (10 फरवरी व 10 अगस्त) पर 1-19 वर्ष के बच्चों को एल्बेंडाजोल की गोलियाँ दी जाती हैं, जबकि NIPI एनीमिया रोकथाम हेतु आयरन सिरप (6-59 माह) व गुलाबी WIFS-जूनियर गोलियाँ (कक्षा 1-5) उपलब्ध कराता है।
- प्रधानमंत्री निःशुल्क नेशनल डायलिसिस कार्यक्रम (2016-17 से) अब 41 जिलों के 61 जिला अस्पतालों में हेमोडायलिसिस सेवा देता है, जिसमें 7 अप्रैल 2025 को 50 और संस्थानों में हेमोडायलिसिस वार्ड जोड़े गए; दवाओं के दुरुपयोग व अत्यधिक उपयोग से बढ़ता एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) हर वर्ष 18-24 नवम्बर को जागरूकता सप्ताह के रूप में चिन्हित होता है।
🏨PMSSY, एम्स नेटवर्क व एनीमिया कार्यक्रम
- प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY, 2003) के तहत एम्स जैसे संस्थान बनाए गए तथा सरकारी मेडिकल कॉलेजों का उन्नयन हुआ; तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 6 नए एम्स — भुवनेश्वर, रायपुर, पटना, भोपाल, जोधपुर व ऋषिकेश — की घोषणा की, जो सितम्बर 2012 तक कार्यरत हो गए; जोधपुर का एम्स 'मीराबाई एम्स' कहलाता है।
- भारत का पहला एम्स 1956 में नई दिल्ली में स्थापित हुआ था; देश में वर्तमान में 20 एम्स कार्यरत हैं, जिनमें सबसे नया मदुरै में है।
- एनीमिया मुक्त भारत (2018) '6x6x6' रणनीति — 6 गतिविधियाँ, 6 लक्षित समूह व 6 संस्थागत तंत्र — पर आधारित है, जो NFHS-5 में 6-59 माह के 67.1% बच्चों व 59.1% किशोरियों में एनीमिया पाए जाने के बाद लागू हुई; एनीमिया मुक्त राजस्थान कार्यक्रम आशा/आँगनवाड़ी केन्द्रों से आयरन सिरप (6-59 माह) तथा स्कूलों से साप्ताहिक गुलाबी आयरन गोलियाँ (5-9 वर्ष) उपलब्ध कराता है।
स्वास्थ्य अवसंरचना, संस्थान व चिकित्सा उपलब्धियाँ
ऊँचे आईपीडी टावर, ऊतक बैंक, रोबोटिक प्रत्यारोपण और अंतिम गाँव तक पहुँचती टेलीमेडिसिन — यही हार्डवेयर व 'प्रथम' उपलब्धियाँ राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान देती हैं।
🏗️बजट 2026-27 व SMS आईपीडी टावर
- राज्य बजट 2026-27 में स्वास्थ्य एवं कल्याण क्षेत्र हेतु 32,526 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो 2023-24 से 53% अधिक है; इसका लक्ष्य 2047 तक 'समृद्ध राजस्थान-स्वस्थ राजस्थान' के तहत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, 77 वर्ष से अधिक जीवन प्रत्याशा, 15 प्रति लाख मातृ मृत्यु दर तथा 10 प्रति हजार से कम शिशु मृत्यु दर है।
- इसमें जेके लोन अस्पताल, जयपुर में 500 बेड के आईपीडी टावर (75 करोड़ रुपये), पाँच प्रमुख अस्पतालों में 12 मॉड्यूलर ऑपरेशन थियेटर, इंटीग्रेटेड राज स्वास्थ्य ऐप तथा चिकित्सा महाविद्यालयों से सम्बद्ध अस्पतालों में अटल आरोग्य फूड कोर्ट की घोषणा की गई है।
- इसके अलावा SMS अस्पताल, जयपुर परिसर में 24-मंजिला, 588 करोड़ रुपये लागत का आईपीडी टावर एवं हृदय रोग संस्थान (इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोवैस्कुलर साइंसेज) बन रहा है (शिलान्यास 5 अप्रैल 2022, वास्तुकार अनूप बर्तरिया); 121 मीटर ऊँचाई के साथ यह राजस्थान की सबसे ऊँची इमारत होगी तथा इसमें राज्य का पहला बिल्डिंग-भीतर हेलीपैड होगा।
🎓नए मेडिकल व नर्सिंग कॉलेज, आरोग्य शिविर
- बाराँ, बांसवाड़ा, नागौर, झुंझुनूं, सवाईमाधोपुर, टोंक व जैसलमेर में 7 नए मेडिकल कॉलेज खुले हैं, साथ ही भीलवाड़ा, धौलपुर, प्रतापगढ़, नाथद्वारा व बूँदी में नए नर्सिंग कॉलेज स्थापित हुए हैं।
- 15 दिसम्बर 2025 से चल रहे राज्यव्यापी आरोग्य शिविरों में 30 वर्ष से अधिक आयु के हर व्यक्ति की BMI, रक्तचाप, शुगर व सामान्य कैंसर की जाँच की जा रही है; मुख्यमंत्री आयुष्मान आदर्श ग्राम पंचायत योजना, जो 7 अप्रैल 2025 से लागू है, 18 स्वास्थ्य संकेतकों में पूर्ण अनुपालन करने वाली पंचायतों को 11 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि देती है।
🩸विशेष 'प्रथम' उपलब्धियाँ — ऊतक बैंक व प्रत्यारोपण
- उत्तर भारत का पहला स्किन बैंक 18 जून 2022 को SMS अस्पताल में खुला; राज्य का पहला बोन बैंक 19 दिसम्बर 2021 को कोटा मेडिकल कॉलेज में खुला; तथा भारत का पहला श्वास बैंक 7 मई 2021 को जोधपुर में खुला।
- एम्स जोधपुर ने 28 जनवरी 2025 को सभी एम्स संस्थानों में पहला तथा राजस्थान के सरकारी क्षेत्र का पहला रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट किया; SMS मेडिकल कॉलेज, जयपुर में राज्य मानव अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (SOTTO) कार्यरत है, और राजस्थान अंग प्रत्यारोपण में उत्तर भारत में अग्रणी तथा डिजिटल अंगदान संकल्पों में देश में प्रथम स्थान पर है।
- देश का पहला अत्याधुनिक इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) 7 अप्रैल 2026 को SMS अस्पताल में शुरू हुआ; सांगानेरी गेट महिला अस्पताल, जयपुर ने गर्भस्थ शिशु में दुर्लभ रोग जाँच हेतु राज्य की पहली एम्नियोसेंटेसिस प्रक्रिया की, जिससे राजस्थान सरकारी अस्पताल में यह जाँच शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बना।
🧬सिकल सेल एनीमिया संबंधी पहलें
- भारत का पहला सिकल सेल वेलनेस हब 29 मार्च 2025 को उदयपुर के बाल चिकित्सालय स्थित सिकल सेल एक्सीलेंस सेंटर में शुरू हुआ; एक समर्पित सिकल सेल हेल्पलाइन (8690088847) 19 जून 2025 को शुरू की गई।
- 1 जुलाई 2023 को मध्यप्रदेश के शहडोल से शुरू राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 17 राज्यों के 278 जिलों को कवर करता है, जिनमें राजस्थान के 8 जनजातीय जिले — उदयपुर, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, सिरोही, पाली व पीएम-जनमन जिला बाराँ — शामिल हैं; इस मिशन के तहत स्क्रीनिंग में राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है।
🎗️कैंसर देखभाल संस्थान
- जयपुर का महावीर कैंसर अस्पताल राज्य का पहला कैंसर अस्पताल था; कोटा का कैंसर अस्पताल, राज्य का दूसरा, 28 अप्रैल 2007 से कार्यरत है; जयपुर के प्रतापनगर में एक नया राज्य कैंसर संस्थान निर्माणाधीन है।
- आदिनाथ कैंसर मेडिसिटी का शुभारंभ 31 अगस्त 2024 को अजमेर के चाचियावास में हुआ; चार प्रस्तावित टरशियरी कैंसर सेंटर डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज जोधपुर, तथा कोटा व झालावाड़ के मेडिकल कॉलेजों व आचार्य तुलसी रीजनल कैंसर सेंटर, बीकानेर में बनेंगे।
🔬अनुसंधान केन्द्र, जीनोम सिक्वेंसिंग व चिकित्सा उपकरण
- डेजर्ट मेडिसिन रिसर्च सेंटर की स्थापना 1984 में जोधपुर में हुई थी; नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय संचारी रोग केन्द्र (NCDC) की देशभर की 8 शाखाओं में से एक अलवर में है।
- SMS मेडिकल कॉलेज, जयपुर में 15 जून 2021 से भारत की इस प्रकार की पहली जीनोम सिक्वेंसिंग सुविधा शुरू हुई, जिससे राजस्थान ऐसी सुविधा विकसित करने वाला देश का पहला राज्य बना।
- कृत्रिम अंग 'जयपुर फुट' का विकास प्रसिद्ध अस्थि रोग सर्जन डॉ. पी.के. सेठी के मार्गदर्शन में हुआ था; पॉलीयुरेथेन-आधारित 'महावीर इसरो फुट' भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति व इसरो के संयुक्त प्रयास से विकसित हुआ; राजस्थान बायोक्लस्टर परियोजना के तहत केन्द्रीय विश्वविद्यालय राजस्थान, बांदर सिन्दरी (अजमेर) में राज्य की पहली महामारी-अनुसंधान प्रयोगशाला बन रही है।
📡टेलीमेडिसिन, ई-स्वास्थ्य व मोबाइल आउटरीच
- राजस्थान की टेलीमेडिसिन सेवा 14 फरवरी 2006 को SMS अस्पताल, जयपुर से शुरू हुई तथा झालावाड़ जिला अस्पताल से जोड़ी गई (कोटा जिले का काथून गाँव राज्य का पहला टेलीमेडिसिन-सम्बद्ध गाँव बना); क्लाउड-कम्प्यूटिंग सॉफ्टवेयर से एक्स-रे विश्लेषण करने वाली टेलीरेडियोलॉजी सेवा 1 अगस्त 2019 से शुरू हुई।
- ई-संजीवनी टेलीकंसल्टेशन सेवा (Esanjeevaniopd.in के माध्यम से, 4 मई 2020 से) ने राज्य में टेलीमेडिसिन का स्थान लिया, साथ ही ई-संजीवनी HWC हब-एण्ड-स्पोक रेफरल प्रणाली PHC, CHC व मेडिकल कॉलेजों को आपस में जोड़ती है।
- मोबाइल मेडिकल सेवा योजना (2008-09) के तहत 28 मोबाइल वाहन मरुस्थलीय, जनजातीय व पिछड़े क्षेत्रों में हर माह 20 निःशुल्क शिविर लगाते हैं; 'डॉक्टर आपके द्वार' व 'चरक आपके द्वार' योजनाएँ (दोनों 2007-08) भी दूरस्थ गाँवों तक डॉक्टर व मोबाइल सर्जिकल यूनिट पहुँचाती हैं, साथ ही मुख्यमंत्री पंचामृत अभियान (26 जनवरी 2006 से) भी लगातार जारी है।
🏨विशेष अस्पताल व संस्थान
- इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रोमेटोलॉजी एण्ड ऑर्थोपेडिक्स तथा इंस्टीट्यूट ऑफ ऑर्गन ट्रांसप्लांट दोनों SMS अस्पताल, जयपुर में संचालित हैं; राज्य का पहला GI सर्जरी संस्थान SIDSS सांतोकबा दुर्लभजी अस्पताल में 7 जून 2014 से शुरू हुआ।
- मानसरोवर स्थित मेट्रोमास हार्टकेयर एण्ड मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल राज्य का इकलौता अस्पताल है जो सरकार के साथ निजी साझेदारी में चलता है; जयपुर जिले का भानपुर कलाँ गाँव भारत के पहले मॉडल रूरल हेल्थ रिसर्च सेंटर का स्थान है; जयपुर का पूर्व टीबी एवं चेस्ट डिजीज अस्पताल अब इंस्टीट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीजेज कहलाता है।
🧾कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) व औषधि नियमन
- 2 दिसम्बर 1956 से लागू ESI योजना 21,000 रुपये मासिक तक कमाने वाले 10 या अधिक कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों को कवर करती है, जिसका लाभ जीवनसाथी, आश्रित बच्चों व माता-पिता तक फैलता है; नियोक्ता वेतन का 3.25% तथा कर्मचारी 0.75% (कुल 4%) अंशदान देते हैं, और ESI कॉर्पोरेशन-राज्य के बीच वित्त पोषण 7:1 अनुपात में बँटता है; राज्य में 3 ESI अस्पताल (जोधपुर, भीलवाड़ा, पाली) व 76 औषधालय संचालित हैं।
- जयपुर, उदयपुर, बीकानेर व जोधपुर स्थित राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं के साथ राजस्थान 4 ऐसी प्रयोगशालाओं वाला देश का पहला राज्य है; FSSAI ने खाद्य प्रयोगशाला अवसंरचना (11 जनस्वास्थ्य प्रयोगशालाएँ) में राज्य को देश में पहला स्थान दिया, हालांकि स्टेट फूड सेफ्टी इन्डेक्स 2023-24 में यह छठे स्थान (54.75 अंक) पर रहा; राजस्थान ड्रग्स एण्ड फार्मास्यूटिकल लिमिटेड (RDPL) को राज्य सार्वजनिक उपक्रम के रूप में पुनर्जीवित किया जा रहा है।
हाल की पहलें, पुरस्कार व समसामयिकी
बजट 2026-27 की नई योजनाएँ, राष्ट्रीय पुरस्कार, अंगदान के कीर्तिमान और महामारी के वर्ष — यही समसामयिक परत राजस्थान की स्वास्थ्य गाथा को आज तक जोड़ती है।
🆘राज-सुरक्षा व राज-ममता (बजट 2026-27)
- राज-सुरक्षा (Rajasthan System for Urgent Response, Accident Stabilization and Hospital Access) के तहत अजमेर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा व जोधपुर में बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किए जाएंगे, ताकि सड़क दुर्घटना, प्रसव व हृदयाघात जैसी आपात स्थितियों में त्वरित उपचार सुनिश्चित हो सके।
- राज-ममता (Rajasthan Mental Awareness, Mentoring and Treatment for All) कार्यक्रम के तहत SMS मेडिकल कॉलेज में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस इन मेंटल हेल्थ, जिला स्तर पर मेंटल हेल्थ केयर सेल तथा उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अनिवार्य मासिक काउंसलिंग सत्र शुरू किए जाएंगे, ताकि अवसाद, चिन्ता व आत्महत्या पर अंकुश लगाया जा सके।
📢अन्य नई कल्याणकारी घोषणाएँ
- टाइप-1 डायबिटीज की देखभाल हेतु देश का पहला समर्पित कार्यक्रम मिशन मधुहारी 29 नवम्बर 2024 को जिला चिकित्सालय, नागौर में शुरू हुआ; जंक फूड से जुड़ी युवाओं में बढ़ती फैटी लिवर बीमारी को रोकने हेतु मिशन लिवर स्माइल के तहत सभी 61 जिला अस्पतालों में लिवर स्माइल क्लिनिक स्थापित किए गए हैं।
- मिशन मधुनेत्र मधुमेह रोगियों में डायबिटिक रेटिनोपैथी की जाँच करता है, जिसकी शुरुआत पाली, ब्यावर, करौली, जालौर व देशनोक (बीकानेर) के 5 संस्थानों से हुई; साँस अभियान 12 नवम्बर 2025 से 28 फरवरी 2026 तक चला, तथा एनसीडी स्क्रीनिंग महाअभियान (जयपुर, 31 अक्टूबर-1 नवम्बर 2025) में हृदय रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप व कैंसर की जाँच की गई।
📶डिजिटल स्वास्थ्य व राष्ट्रीय रैंकिंग
- मार्च 2026 तक राजस्थान में 6.82 करोड़ से अधिक निवासियों की आभा आईडी बन चुकी है (देश में तीसरा स्थान) तथा 5.43 करोड़ से अधिक आभा-सम्बद्ध इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार हो चुके हैं (चौथा स्थान); दिसम्बर 2025 तक ही 6.52 करोड़ से अधिक आभा आईडी जारी हो चुकी थीं।
- राजस्थान ने केन्द्र सरकार के योग संगम पोर्टल पर प्रतिभागी पंजीकरण में देश में प्रथम स्थान हासिल किया, तथा तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के लिए WHO के 'वर्ल्ड नो टोबैको डे-2026 अवॉर्ड' में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में शीर्ष स्थान पाया।
💚अंगदान को मिलती गति
- NOTTO के 15वें भारतीय अंगदान दिवस समारोह (नई दिल्ली, 2 अगस्त 2025) में राजस्थान को 'एक्सीलेंस इन प्रमोशन ऑफ ऑर्गन डोनेशन' व 'इमर्जिंग स्टेट इन ऑर्गन डोनेशन' — दो राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, तथा अलवर की स्व. सुमित्रा देवी के परिवार को उनके प्रेरणादायी अंगदान के लिए सम्मानित किया गया।
- ई-अंगदान शपथ अभियान (31 जुलाई 2025 तक) में हनुमानगढ़ ने 8,000 से अधिक शपथकर्ताओं के साथ राज्य में शीर्ष स्थान पाया; अंगदान अभियान 'जीवांजलि' का शुभारंभ 15 सितम्बर 2025 को आबू रोड में हुआ, तथा अंगदान पर आधारित फिल्म 'ऐ जिंदगी' को राज्य में कर-मुक्त किया गया।
🏅सम्मान, शोध व दुर्लभ मामले (2025)
- जयपुर के झोटवाड़ा निवासी वैद्य बनवारी लाल गौड़ को आयुर्वेद शिक्षा, अनुसंधान व लेखन में योगदान हेतु 23 सितम्बर 2025 को धन्वन्तरि अवॉर्ड 2025 से सम्मानित किया गया; आईआईटी जोधपुर के प्रो. अमित मिश्रा को न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों पर शोध हेतु INSA एसोसिएट फैलोशिप 2025 मिली।
- पेलिएटिव केयर सेवाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए राजस्थान को राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान मिला (भुवनेश्वर में 11 अक्टूबर 2025 को सम्मानित); उसी दिन उदयपुर के खैरवाड़ा में राज्य का पहला कंगारू मदर केयर लाउंज शुरू हुआ; तथा जेके लोन अस्पताल में 13 वर्षीय बालक में अति-दुर्लभ जेनेटिक रोग कार्मिल-2 डिफेक्ट (विश्व में अब तक केवल 89 मामले दर्ज) का पहला भारतीय मामला सामने आया।
🦠कोविड-19 व उसके परिणाम
- नए कोरोनावायरस का पहला मामला 17 नवम्बर 2019 को चीन के वुहान में सामने आया; भारत में पहला मामला 30 जनवरी 2020 को (वुहान से लौटी त्रिशूर की एक छात्रा में) तथा राजस्थान में पहला मामला 2 मार्च 2020 को (एक इतालवी पर्यटक में) दर्ज हुआ; ZyCoV-D विश्व का पहला DNA-आधारित कोविड-19 टीका बना, जो भारत में स्वदेशी रूप से विकसित हुआ।
- मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना (25 जून 2021 से) के तहत अनाथ बच्चों को तत्काल 1 लाख रुपये, फिर 18 वर्ष तक 2,500 रुपये मासिक व 2,000 रुपये वार्षिक, तथा 18 वर्ष पूर्ण होने पर 5 लाख रुपये की एकमुश्त राशि मिलती है; ब्लैक फंगस (म्यूकोरमाइकोसिस) को राजस्थान में 19 मई 2021 को महामारी घोषित किया गया, जिसका इलाज एम्फोटेरिसिन इंजेक्शन से होता है; देश का पहला प्लाज्मा बैंक 2 जुलाई 2020 को दिल्ली में खुला, जबकि राजस्थान के अपने बैंक जयपुर (24 जुलाई 2020) व कोटा (1 अगस्त 2020) में खुले।
🏛️स्वास्थ्य प्रशासन व नीतिगत उपलब्धियाँ
- संविधान की राज्य सूची के तहत 'सार्वजनिक स्वास्थ्य एवं अस्पताल' राज्यों का विषय है, यानी स्वास्थ्य सेवा मुख्यतः राज्य की जिम्मेदारी है, और राजस्थान में हर जिले का नेतृत्व एक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी करता है; सरपंच/वार्डपंच की अध्यक्षता में 43,440 ग्राम स्वास्थ्य एवं स्वच्छता समितियाँ तल स्तर पर सहयोग करती हैं।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 (स्वीकृति 15 मार्च 2017) का लक्ष्य औसत जीवन प्रत्याशा को 67.5 से बढ़ाकर 70 वर्ष करना था; भारत की पहली राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य नीति 10 अक्टूबर 2014 को शुरू हुई; भारत ने 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य रखा है, तथा 9 अप्रैल 2007 से सरकारी अस्पतालों के डॉक्टरों के लिए जेनेरिक दवाएँ लिखना अनिवार्य है।
📅स्वास्थ्य दिवस कैलेंडर
- स्वास्थ्य कैलेंडर के प्रमुख वैश्विक/राष्ट्रीय दिवसों में विश्व कैंसर दिवस (4 फरवरी), विश्व क्षय रोग दिवस (24 मार्च), विश्व स्वास्थ्य दिवस (7 अप्रैल — WHO 1950 से मनाता आ रहा है), विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (31 मई), विश्व रक्तदान दिवस (14 जून), अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (21 जून), विश्व हेपेटाइटिस दिवस (28 जुलाई), विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर) व विश्व एड्स दिवस (1 दिसम्बर) शामिल हैं।
- राजस्थान अपने कुछ नियमित स्वास्थ्य दिवस भी मनाता है — शक्ति दिवस (हर माह का पहला मंगलवार, एनीमिया-मुक्ति अभियान, घोषणा 6 जून 2022), आरोग्य दिवस (पहला गुरुवार, होम्योपैथी जागरूकता) व आयुर्वेद जागरूकता दिवस (पहला शनिवार), राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस (23 सितम्बर) के अतिरिक्त; निरोगी राजस्थान दिवस 17 दिसम्बर को मनाया जाता है।
⭐चुनिंदा राज्य व राष्ट्रीय प्रथम उपलब्धियाँ (संक्षिप्त)
- गर्भाशय ग्रीवा कैंसर के विरुद्ध राज्यव्यापी निःशुल्क HPV टीकाकरण अभियान 28 फरवरी 2026 को अजमेर से शुरू होकर 90 दिनों तक चला; ग्रेटर नोएडा से 24 मार्च 2026 को शुरू हुए 100-दिवसीय राष्ट्रव्यापी टीबी उन्मूलन अभियान के साथ 'टीबी मुक्त भारत' ऐप भी लॉन्च हुआ, जिसमें 'खुशी' नामक एआई चैटबॉट है।
- SMS अस्पताल का देश का पहला अत्याधुनिक इंस्टीट्यूट ऑफ डर्मेटोलॉजी, सरकारी अस्पताल में राजस्थान की पहली एम्नियोसेंटेसिस प्रक्रिया, तथा 4 सरकारी औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं वाला पहला राज्य होने का दर्जा — ये सब दर्शाते हैं कि हाल के वर्षों में राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र ने कितनी राष्ट्रीय 'प्रथम' उपलब्धियाँ हासिल की हैं।