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राजस्थान GK

गरीबी एवं बेरोजगारी

Poverty & Unemployment

निर्धनता को मापने के तरीकों व बहुआयामी गरीबी सूचकांक से लेकर बेरोजगारी के प्रकारों, राजस्थान की रोजगार-कौशल नीतियों, रोजगार गारंटी कानूनों और सार्वजनिक वितरण प्रणाली तक — भारत व राजस्थान की गरीबी-विरोधी यात्रा का सम्पूर्ण अध्ययन गाइड।

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निर्धनता — अवधारणा, मापन एवं बहुआयामी सूचकांक (MPI)

Poverty — Concepts, Measurement & the MPI

भारत और राजस्थान में गरीबी को परिभाषित, मापने और ट्रैक करने का तरीका — कैलोरी आधारित गरीबी रेखा से लेकर वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के दृष्टिकोण तक।

🪙निर्धनता का अर्थ एवं प्रकार

  • मूल रूप से निर्धनता वंचन (deprivation) को दर्शाती है — जीवन की कुछ बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति न कर पाना ही निर्धनता कहलाती है।
  • निरपेक्ष निर्धनता में व्यक्ति भोजन, वस्त्र, आवास व स्वास्थ्य जैसी न्यूनतम आवश्यकताएँ भी नहीं जुटा पाता; भारत में इसे प्रति व्यक्ति कैलोरी उपभोग या न्यूनतम उपभोग व्यय से मापा जाता है, और नीति आयोग (1 जनवरी 2015 से पहले योजना आयोग) सदैव इसी निरपेक्ष दृष्टिकोण का पक्षधर रहा है।
  • इसके विपरीत सापेक्ष निर्धनता केवल यह दर्शाती है कि कोई व्यक्ति समाज के अन्य लोगों की तुलना में कम आय अर्जित कर रहा है।
  • जिस परिवार का व्यय न्यूनतम आवश्यकता से कम हो वह निर्धनता रेखा से नीचे (BPL) माना जाता है; जिसकी क्रय शक्ति इसके बराबर या अधिक हो वह ऊपर (APL) माना जाता है। निर्धनता अनुपात को ही 'Head Count Ratio' (HCR) कहते हैं — निर्धन व्यक्तियों की संख्या को कुल जनसंख्या से भाग देकर 100 से गुणा करने पर यह प्राप्त होता है।

🌾गरीबी रेखा का मापन

  • भारत में निर्धनता मापने के दो प्रमुख आधार हैं - न्यूनतम कैलोरी उपभोग तथा प्रति व्यक्ति प्रतिमाह उपभोग व्यय।
  • जुलाई 2014 की रंगराजन समिति की सिफारिशों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्र में प्रतिदिन 2155 कैलोरी से तथा शहरी क्षेत्र में 2090 कैलोरी से कम पोषण पाने वाला व्यक्ति निर्धन माना गया, जो ग्रामीण क्षेत्र में 972 रु. तथा शहरी क्षेत्र में 1407 रु. मासिक प्रति व्यक्ति उपभोग व्यय के बराबर है।

📜भारत में गरीबी अनुमान का संक्षिप्त इतिहास

  • भारत में गरीबी का सबसे पहला अध्ययन 1870 में दादाभाई नौरोजी ने किया, जिन्होंने 'पॉवर्टी एंड अनब्रिटिश रूल इन इंडिया' पुस्तक लिखी; बाद में नेहरू की अध्यक्षता वाली नेशनल प्लानिंग कमेटी (1938) तथा बॉम्बे प्लान (1944) के लेखकों ने भी गरीबी अनुमान प्रस्तुत किए।
  • स्वतंत्रता के बाद बी.एस. मिन्हास ने, जिन्होंने 'Planning the Poor' पुस्तक लिखी, 1958-59 से 1967-68 के बीच ग्रामीण निर्धनता में कमी के संकेत दिए; 'गरीबी हटाओ' नारे पर सर्वप्रथम पाँचवीं पंचवर्षीय योजना में बल दिया गया।
  • गरीबी का अनुमान दीर्घकाल से लगभग हर पाँच वर्ष में NSSO के सर्वेक्षणों के आधार पर लगाया जाता रहा है, जिसमें कैलोरी ऊर्जा को आधार माना गया; 23 मई 2019 को NSSO का स्थान राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (NSO) ने ले लिया।

🧑‍⚖️गरीबी अनुमान हेतु गठित समितियाँ

  • गरीबी मापने के लिए योजना आयोग ने समय-समय पर विभिन्न समितियाँ गठित कीं - टास्क समूह (1962), दांडेकर-रथ समिति (1971), डॉ. वाई.के. अलघ समिति (1977), डी.टी. लकड़ावाला टास्क समूह (1989), प्रो. सुरेश तेंदुलकर समिति (2005) तथा सी. रंगराजन समिति (जून 2012)।
  • डॉ. एस. महेन्द्र देव व सी. रवि ने अलग से स्वास्थ्य व शिक्षा सूचकों का उपयोग करते हुए गरीबी रेखा के संशोधित अनुमान प्रस्तुत किए; तेंदुलकर समिति ने नवंबर 2009 में तथा रंगराजन समिति ने जून 2014 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

📊तेंदुलकर बनाम रंगराजन: राष्ट्रीय व राज्य आँकड़े

  • दोनों समितियों ने 2009-10 के लिए भिन्न तस्वीर पेश की: तेंदुलकर समिति (MRP आधारित) के अनुसार निर्धनता अनुपात 29.8% (35.47 करोड़ निर्धन) रहा, जबकि रंगराजन समिति (MMRP आधारित) के अनुसार यह कहीं अधिक 38.2% (45.46 करोड़ निर्धन) था।
  • 2011-12 तक तेंदुलकर फार्मूले से अनुपात घटकर 21.9% (26.98 करोड़ निर्धन) तथा रंगराजन फार्मूले से 29.5% (36.3 करोड़ निर्धन) रह गया - तेंदुलकर फार्मूले से अनुपात में 7.9% व संख्या में 8.49 करोड़ की कमी तथा रंगराजन फार्मूले से अनुपात में 8.7% व संख्या में 9.16 करोड़ की कमी आई।
  • 2011-12 में दोनों फार्मूलों के अनुसार छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक गरीब जनसंख्या प्रतिशत रहा (तेंदुलकर 39.9%, रंगराजन 47.9%), जबकि निर्धनों की पूर्ण संख्या में उत्तरप्रदेश दोनों फार्मूलों के अनुसार सबसे आगे रहा।
  • राज्यों में गरीबी रेखा की राशि सर्वाधिक मिजोरम में रही (ग्रामीण 1231.03 रु., शहरी 1703.93 रु.); संघ राज्य क्षेत्रों में ग्रामीण गरीबी रेखा दिल्ली में (1492.46 रु.) व शहरी गरीबी रेखा अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में (1797.69 रु.) सर्वाधिक रही।

📍राजस्थान में निर्धनता

  • राजस्थान के लिए 2011-12 में रंगराजन समिति ने गरीबी रेखा ग्रामीण क्षेत्रों में 1035.97 रु. तथा शहरी क्षेत्रों में 1406.15 रु. प्रतिमाह तय की - इससे कम खर्च करने वाला व्यक्ति निर्धन माना गया।
  • रंगराजन फार्मूले से राजस्थान का कुल निर्धनता अनुपात 2009-10 के 33.5% (225.7 लाख निर्धन) से घटकर 2011-12 में 21.7% (151.5 लाख निर्धन) रह गया - अनुपात में 11.8% व संख्या में 74.2 लाख की कमी; तेंदुलकर फार्मूले से यह इसी अवधि में 24.8% से घटकर 14.7% रह गया।
  • फिर भी NSSO के आँकड़ों के अनुसार देश में गरीबी दर 2011-12 के 21.9% से बढ़कर 2017-18 में 22.8% हो गई, और इसी अवधि में राजस्थान में गरीबी में 0.9% की वृद्धि दर्ज हुई; राज्य की अंतिम बीपीएल सेंसस-2002 सूची 15 सितंबर 2006 को ही जारी हो पाई थी।

🗂️SECC-2011 एवं केरल की चरम-गरीबी-मुक्त उपलब्धि

  • देशभर में कराई गई सामाजिक-आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना (SECC-2011) का उद्देश्य गरीबी का निर्धारण करना नहीं था, बल्कि गरीबी उन्मूलन योजनाओं के लिए पात्र लाभार्थियों की पहचान करना था।
  • 1 नवंबर 2025 को केरलम (केरल) को अत्यधिक (चरम) गरीबी से मुक्त राज्य घोषित किया गया - यह चरम गरीबी समाप्त करने वाला भारत का पहला राज्य बना।

🌍वैश्विक MPI: अर्थ, सूत्र एवं आयाम

  • वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI), जिसे पहले 'मानव गरीबी सूचकांक' कहा जाता था, सर्वप्रथम 2010 में जारी हुआ और UNDP व ऑक्सफोर्ड पॉवर्टी एंड ह्यूमन डेवलपमेंट इनिशिएटिव (OPHI) द्वारा मिलकर तैयार किया जाता है; परिवार व व्यक्तिगत दोनों स्तरों पर प्रकाशित यह सूचकांक 100 से अधिक विकासशील देशों में गहन गरीबी को 0 से 1 के मान पर मापता है, जिसमें उच्च मान अधिक गरीबी दर्शाता है।
  • MPI तीन समान भारित आयामों - स्वास्थ्य, शिक्षा व जीवन स्तर - पर आधारित है और कुल 10 संकेतक शामिल करता है: बाल मृत्यु दर व पोषण; स्कूली वर्ष व स्कूल उपस्थिति; कुकिंग फ्यूल, स्वच्छता, पेयजल, आवास, बिजली व सम्पत्तियाँ।
  • इसकी गणना H × A सूत्र से होती है, जहाँ H गरीबी की व्यापकता (Head Count Ratio) व A औसत गरीबी की तीव्रता है; यह गणना अल्किरे-फोस्टर (AF) पद्धति पर आधारित है।

🌦️वैश्विक MPI 2025: भारत व राजस्थान की स्थिति

  • UNDP ने OPHI के सहयोग से वैश्विक MPI 2025 को 17 अक्टूबर 2025 को जारी किया; इसकी थीम 'अतिव्यापी कठिनाइयाँ: गरीबी और जलवायु खतरे' रही (2024 की थीम 'संघर्ष के बीच गरीबी' थी) और पहली बार इसमें गरीब आबादी की चार जलवायु खतरों - उच्च तापमान, सूखा, बाढ़ व वायु प्रदूषण - के प्रति संवेदनशीलता को भी 109 देशों के आँकड़ों के आधार पर मापा गया।
  • विश्व में सर्वाधिक 23.4 करोड़ गरीब लोग भारत में हैं, उसके बाद पाकिस्तान का स्थान है जहाँ लगभग 9.3 करोड़ गरीब लोग हैं।
  • भारत का राष्ट्रीय MPI 2019-21 में 0.069 रहा, जो 2005-06 के 0.283 व 2015-16 के 0.122 से काफी कम है - इस दौरान गरीबी की व्यापकता (H) 55.1% से घटकर 16.4% तथा तीव्रता (A) 51.33% से घटकर 41.98% रह गई; राज्यों में बिहार 0.154 के MPI के साथ अब भी सबसे गरीब राज्य है।
  • राजस्थान का वैश्विक MPI राष्ट्रीय आँकड़े के करीब 0.068 है, जहाँ राज्य की 6.1% जनसंख्या अति निर्धनता (severe poverty) की 3.6% दर वाली श्रेणी में आती है।

🏛️राष्ट्रीय MPI 2023 (नीति आयोग): भारत की प्रगति

  • नीति आयोग ने राष्ट्रीय बहुआयामी सूचकांक (National MPI) 2023 को 17 जुलाई 2023 को जारी किया (पहला संस्करण 2021 में जारी हुआ था); यह तीन आयामों व 12 संकेतकों पर आधारित है, जिसमें वैश्विक ढाँचे के अलावा मातृ स्वास्थ्य, बाल-किशोर मृत्यु दर व बैंक खाते भी जोड़े गए हैं।
  • 2015-16 से 2019-21 के बीच राष्ट्रीय हेडकाउंट रेशियो 9.89% घटा (24.85% से) तथा गरीबी तीव्रता 2.75% घटी (47.14% से), जबकि राष्ट्रीय MPI मान 0.117 से घटकर 0.066 रह गया - ग्रामीण क्षेत्र में MPI (0.068 अंक) शहरी क्षेत्र (0.016 अंक) से अधिक तेजी से घटा; सर्वाधिक MPI बिहार (0.160) व न्यूनतम केरल (0.002) में रहा।

🗺️राष्ट्रीय MPI 2023: राजस्थान की स्थिति

  • राजस्थान का कुल MPI 2015-16 के 0.137 से घटकर 2019-21 में 0.065 रह गया - 0.071 अंक की कमी के साथ यह देश में 7वें से 10वें स्थान पर आ गया; इसका हेडकाउंट रेशियो 28.86% से घटकर 15.31% रह गया।
  • राज्य में पाली जिले का MPI 2019-21 में सर्वाधिक (0.134) रहा जबकि कोटा का सबसे कम (0.023); बाड़मेर जिले में सबसे तेज सुधार दर्ज हुआ, जिसका MPI 2015-16 के 0.281 से 0.194 अंक घटा।
  • गरीबी तीव्रता में देश में सबसे तेज कमी राजस्थान में दर्ज हुई (4.63 अंक, 47.34% से 42.70%), और ग्रामीण MPI में सुधार की गति के मामले में राजस्थान बिहार के बाद देश में दूसरे स्थान पर रहा।

📈2005-06 से घटती बहुआयामी गरीबी

  • नीति आयोग के 'मल्टी डायमेंशनल पॉवर्टी इन इंडिया सिन्स 2005-06' दस्तावेज़ (15 जनवरी 2024) के अनुसार बहुआयामी गरीबी का हेडकाउंट रेशियो 2005-06 के 55.34% से घटकर 2022-23 में मात्र 11.28% रह गया।
  • 2013-14 से 2022-23 के मात्र नौ वर्षों में लगभग 24.82 करोड़ लोग भारत में बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले - इनमें सर्वाधिक 5.94 करोड़ उत्तरप्रदेश में तथा राजस्थान में 1.87 करोड़, जिससे राजस्थान चौथे स्थान पर रहा।

🔄निर्धनता का दुष्चक्र, कारण एवं उपाय

  • अर्थशास्त्री रागनर नर्कसे की 'निर्धनता के दुष्चक्र' अवधारणा बताती है कि गरीबी इतनी स्थायी क्यों है: निम्न आय से निम्न उत्पादकता व निम्न जीवन स्तर उत्पन्न होता है, जो निम्न कुशलता को जन्म देकर पुनः निम्न आय की ओर ले जाता है - संक्षेप में 'गरीबी का कारण स्वयं गरीबी है'।
  • गरीबी-लक्षित योजनाओं में दो विपरीत त्रुटियाँ देखी जाती हैं: समावेशन त्रुटि में गरीब न होने वाले लोग भी योजनाओं का लाभ ले लेते हैं, जबकि बहिष्करण त्रुटि में वास्तव में गरीब लोग ही योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं।
  • भारत में गरीबी के अनेक कारण हैं - रोजगार व पूँजी की कमी, पिछड़ी तकनीक, कृषि उत्पादन में धीमी वृद्धि, तीव्र जनसंख्या वृद्धि, आय-सम्पत्ति के असमान वितरण के साथ किसानों का ऋणग्रस्त होना, मुद्रा प्रसार व प्राकृतिक प्रकोप भी इसमें शामिल हैं।
  • इसका मुकाबला संसाधनों के पूर्ण उपयोग, बचत-निवेश में वृद्धि, जनसंख्या नियंत्रण, गैर-कृषि रोजगार सृजन, कृषि व औद्योगिक विकास, प्रशासनिक सुधार तथा लक्षित ग्रामीण व शहरी विकास कार्यक्रमों से किया जाता है।
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बेरोजगारी — अवधारणा, प्रकार एवं PLFS आँकड़े

Unemployment — Concepts, Types & PLFS Data

बेरोजगार व्यक्ति की पाठ्यपुस्तकीय परिभाषा से लेकर PLFS के नवीनतम श्रम-बाजार आँकड़ों तक — भारत व राजस्थान में बेरोजगारी को परिभाषित, वर्गीकृत व ट्रैक करने का पूरा खाका।

🙋बेरोजगारी का अर्थ

  • बेरोजगार वह व्यक्ति है जो शारीरिक व मानसिक रूप से काम करने योग्य होते हुए भी काम करना चाहता है परन्तु उसे काम नहीं मिलता या काम से हटा दिया जाता है - भारत में बेरोजगारी एक बड़ी आर्थिक-सामाजिक समस्या है।
  • इसका मूल कारण आर्थिक विकास की धीमी गति के साथ तीव्र जनसंख्या वृद्धि है; श्रम बल में परंपरागत रूप से 15 से 59 वर्ष आयु वर्ग के लोग शामिल किए जाते हैं।

🧮राजस्थान में कार्यशील जनसंख्या (जनगणना 2011)

  • 2011 की जनगणना के अनुसार राजस्थान की जनसंख्या लगभग 6.86 करोड़ थी, जिनमें से मात्र 43.60% लोग किसी काम या आर्थिक गतिविधि में लगे थे जबकि शेष 56.40% कोई काम नहीं करते थे।
  • काम करने वालों में से लगभग 66% कृषि कार्य में लगे थे (55.37% काश्तकार, 10.63% खेतिहर मजदूर), 2.74% पारिवारिक उद्योगों में तथा 31.26% अन्य कार्यों में कार्यरत थे।
  • कार्यशील जनसंख्या के प्रतिशत में राजस्थान में प्रतापगढ़ जिला सबसे आगे (55.46%) रहा, उसके बाद चित्तौड़गढ़ (51.98%), जबकि जयपुर (37.20%) व सीकर (37.59%) में यह प्रतिशत सबसे कम रहा; 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में यह अनुपात 39.80% था, जिस दृष्टि से राजस्थान का 43.60% अनुपात देश में 11वें स्थान पर रहा।

📐PLFS: उद्भव एवं प्रमुख शब्दावली

  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने अप्रैल 2017 में आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) की शुरुआत की, जो रोजगार व बेरोजगारी संबंधी आँकड़ों का आधिकारिक स्रोत है; इसकी नवीनतम रिपोर्ट मार्च 2026 में जारी हुई।
  • PLFS तीन प्रमुख संकेतकों पर आधारित है - श्रम बल भागीदारी अनुपात (LFPR, कुल आबादी में श्रम बल में शामिल लोगों का प्रतिशत), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR, रोजगार प्राप्त व्यक्तियों का कुल जनसंख्या से अनुपात) तथा बेरोजगारी दर (UR, श्रम बल में बेरोजगार व्यक्तियों का प्रतिशत)।

📉PLFS मार्च 2026: राजस्थान बनाम भारत

  • राजस्थान की कुल LFPR 47.9% रही (ग्रामीण 50.5%, शहरी 41.0%) जबकि भारत की 44.9% थी - ग्रामीण व शहरी महिला LFPR में स्पष्ट अंतर दिखा: ग्रामीण महिला LFPR 44.8% रही जबकि शहरी क्षेत्र में मात्र 23.7%।
  • राजस्थान की कुल WPR 45.7% रही (ग्रामीण 49.1%, शहरी 36.9%) जबकि भारत की 43.5% थी।
  • राजस्थान की कुल बेरोजगारी दर 4.4% रही - भारत की 3.1% से काफी अधिक - और यह शहरी क्षेत्र (10.1%, शहरी महिलाओं में 14.6%) में ग्रामीण क्षेत्र (2.7%) से काफी अधिक रही।

📆बेरोजगारी दर प्रवृत्ति: भारत 2024-25

  • भारत की समग्र बेरोजगारी दर 2024 के 3.2% से घटकर 2025 में 3.1% रह गई, और इसी अवधि में 15-29 वर्ष के युवाओं में बेरोजगारी 10.3% से घटकर 9.9% हो गई।
  • माध्यमिक व उससे ऊपर शिक्षित 15+ आयु वर्ग में सामान्य स्थिति में बेरोजगारी दर 7.0% से घटकर 6.5% हो गई - ग्रामीण में 6.0% व शहरी में इससे अधिक 7.2%; लिंग के आधार पर 2025 में ग्रामीण बेरोजगारी पुरुषों में 2.6% व महिलाओं में 2.1% रही, जबकि शहरी बेरोजगारी पुरुषों में 4.2% व महिलाओं में इससे कहीं अधिक 6.4% रही।

🧑‍🌾रोजगार पैटर्न की प्रवृत्ति (PLFS)

  • नियमित वेतन/वेतनभोगी रोजगार में लगे श्रमिकों का अनुपात 2024 के 22.4% से बढ़कर 2025 में 23.6% हो गया, जबकि स्वरोजगार का हिस्सा 2023 के 58.2% से घटकर 2025 में 56.2% रह गया - फिर भी यह ग्रामीण महिलाओं (70.7%) में अब भी हावी है।
  • हर श्रेणी में कार्य-घंटों का लैंगिक अंतर बना हुआ है: शहरी क्षेत्र में स्वरोजगार करने वाले पुरुष अपनी महिला समकक्षों से प्रति सप्ताह लगभग 17.5 घंटे अधिक काम करते हैं (ग्रामीण क्षेत्र में यह अंतर 12.3 घंटे है), जबकि नियमित वेतनभोगी व आकस्मिक श्रम में यह अंतर लगभग 7-8 घंटे है।
  • कृषि क्षेत्र रोजगार का सबसे बड़ा हिस्सा बना हुआ है, यद्यपि यह 2024 के 44.8% से घटकर 2025 में 43.0% रह गया, जबकि विनिर्माण (11.6%→12.1%) व अन्य सेवाएँ (12.2%→13.1%) बढ़ीं और निर्माण क्षेत्र का हिस्सा हल्का घटा (12.3%→12.0%)।

💰रोजगार प्रकार अनुसार औसत आय

  • 2024 से 2025 के बीच नियमित वेतनभोगी रोजगार में पुरुषों की औसत मासिक आय 22,891 रु. से बढ़कर 24,217 रु. (5.8% वृद्धि) तथा महिलाओं की 17,126 रु. से बढ़कर 18,353 रु. (7.2% वृद्धि) हो गई।
  • स्व-रोजगार में पुरुषों की औसत आय 16,893 रु. से बढ़कर 17,914 रु. (6.0%) तथा महिलाओं की कहीं कम स्तर से - 5,861 रु. से बढ़कर 6,374 रु. (8.8%) - हुई, जो लैंगिक आय अंतर को दर्शाता है; आकस्मिक श्रम में दैनिक मजदूरी लगभग स्थिर रही, पुरुषों में करीब 455 रु. व महिलाओं में 315 रु.।

⚖️रोजगार संकेतक 2023-24: राजस्थान बनाम भारत

  • 2023-24 में राजस्थान की कुल LFPR (67.6%) व श्रमिक जनसंख्या अनुपात (64.4%) दोनों राष्ट्रीय आँकड़ों (64.3% व 62.1%) से अधिक रहे, जिसका बड़ा कारण महिला LFPR का कहीं अधिक होना रहा (54.1% बनाम भारत की 45.2%)।
  • फिर भी राजस्थान की बेरोजगारी दर (4.7%) भारत (3.5%) से अधिक रही, चाहे पुरुषों में (4.8% बनाम 3.5%) हो या महिलाओं में (4.5% बनाम 3.4%)।

🏷️बेरोजगारी के दस प्रकार

  • मौसमी बेरोजगारी उन उद्योगों को प्रभावित करती है जो किसी विशेष मौसम से जुड़े होते हैं - चीनी, गुड़, ऊनी वस्त्र या शीतल पेय - जहाँ मौसम बीतने पर माँग घट जाती है, जबकि खुली/दृश्य बेरोजगारी (मुख्यतः शहरी, तीव्र जनसंख्या वृद्धि से प्रेरित) में व्यक्ति काम ढूंढ़ता है पर उसे काम नहीं मिलता।
  • अदृश्य/प्रच्छन्न बेरोजगारी में श्रम की सीमांत उत्पादकता शून्य होती है - यह भारत के अत्यधिक भीड़ भरे कृषि क्षेत्र में आम है, जहाँ व्यक्ति काम पर तो होता है पर उसकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं होता; स्वैच्छिक बेरोजगारी में व्यक्ति स्वयं काम या प्रचलित मजदूरी पर काम करने को तैयार नहीं होता, जबकि अनैच्छिक बेरोजगारी में व्यक्ति प्रचलित दर से कम मजदूरी पर भी काम को तैयार रहता है फिर भी उसे रोजगार नहीं मिलता।
  • घर्षणात्मक/तकनीकी बेरोजगारी उत्पादन तकनीक में तीव्र परिवर्तन से उपजी अल्पकालिक बेरोजगारी है; औद्योगिक बेरोजगारी औद्योगीकरण के दौरान गाँवों से शहरों की ओर श्रम शक्ति के पलायन से उत्पन्न होती है; शिक्षित बेरोजगारी में योग्य व्यक्ति को उसकी योग्यता व इच्छा के अनुरूप काम नहीं मिलता।
  • संरचनात्मक बेरोजगारी पिछड़े आर्थिक ढाँचे व सीमित पूँजी के कारण उत्पन्न दीर्घकालिक बेरोजगारी है, जिसमें अर्थव्यवस्था रोजगार चाहने वालों के लिए पर्याप्त अवसर नहीं बना पाती; चक्रीय बेरोजगारी - जो अधिक विकसित पूँजीवादी अर्थव्यवस्थाओं में देखी जाती है - मंदी के दौरान माँग गिरने से कारखाने बंद होने व श्रमिकों के बेरोजगार होने से उत्पन्न होती है।

🛠️बेरोजगारी के कारण एवं उपाय

  • जनसंख्या में तीव्र वृद्धि, निर्धनता, श्रम की गतिहीनता, धीमी आर्थिक वृद्धि, सार्वजनिक क्षेत्र में कम विनियोग, निम्न पूँजी निर्माण, पिछड़ी कृषि, दोषपूर्ण शिक्षा पद्धति तथा प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव भारत में बेरोजगारी के प्रमुख कारण हैं।
  • उपायों में जनसंख्या नियंत्रण, श्रम की गतिशीलता में वृद्धि, राष्ट्रीय रोजगार नीति, स्व-रोजगार व श्रम-गहन तकनीकों को प्रोत्साहन, सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्योगों व आधारभूत ढाँचे का विकास, शिक्षा को व्यवसायोन्मुखी बनाना तथा औद्योगिक विकास दर, क्षेत्रीय संतुलन व ग्रामीण निर्माण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना शामिल है।
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राजस्थान की रोजगार, युवा एवं कौशल विकास नीतियाँ

Rajasthan's Employment, Youth & Skill Development Policies

1950 के दशक की शिव राव समिति से लेकर व्यापक रोजगार नीति 2026 तक — राजस्थान में रोजगार व कौशल को आकार देने वाली संस्थाएँ, नीतियाँ व योजनाएँ।

🏢शिव राव समिति एवं रोजगार सेवा संगठन

  • बी. शिव राव की अध्यक्षता में 1952 में गठित प्रशिक्षण तथा रोजगार सेवा संगठन समिति ने 1954 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जो व्यावसायिक अनुसंधान, व्यावसायिक निर्देशन व रोजगार बाजार सूचना के क्षेत्र में संगठन के ढाँचे का आधार आज भी बनी हुई है।
  • समिति की सिफारिशों पर 1 नवंबर 1956 से दैनिक प्रशासन राज्य सरकारों को सौंपा गया - इसी दिन राजस्थान में रोजगार सेवा निदेशालय स्थापित हुआ; कौशल नियोजन एवं उद्यमिता विभाग (DSEE) का गठन 4 अगस्त 2015 की राज्य अधिसूचना द्वारा हुआ।

🧭राजस्थान रोजगार नीति 2026

  • 12 जनवरी 2026 को जारी राजस्थान रोजगार नीति 2026 राज्य की रोजगार समस्याओं के समाधान की एक समग्र रूपरेखा प्रस्तुत करती है; राज्य की श्रम बल भागीदारी दर 64.4% पहले से ही राष्ट्रीय औसत से अधिक है।
  • नीति का विजन है हर युवा को सार्थक रोजगार दिलाना और राजस्थान को समावेशी-सतत रोजगार का अग्रणी केंद्र बनाना ताकि राज्य 2030 तक 350 बिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सके; इसका मिशन स्वरोजगार, वेतन आधारित रोजगार व उद्यमशीलता के जरिए मार्च 2029 तक 15 लाख रोजगार अवसर सृजित करना है।

🏗️रोजगार नीति 2026 के चार रणनीतिक स्तंभ

  • पहला स्तंभ प्राथमिक क्षेत्र व ग्रामीण अर्थव्यवस्था के पुनरुत्थान पर केंद्रित है - राजीविका के जरिए महिला-नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों को मजबूत करना, कृषि-उद्यमिता, खाद्य प्रसंस्करण, वन-आधारित आजीविका व इको-टूरिज्म को बढ़ावा देना, तथा नरेगा के कार्यदिवस 125 दिन तक बढ़ाना इसमें शामिल है।
  • दूसरा स्तंभ विनिर्माण व हरित रोजगार को गति देने पर केंद्रित है, जिसमें एमएसएमई नीति 2024 व आरआईपीएस 2024 के जरिए सूक्ष्म-लघु-मध्यम उद्यमों को संबल, ईपीएफ/ईएसआई प्रतिपूर्ति व रोजगार-आधारित प्रोत्साहन, तथा टेक्सटाइल (पीएम-मित्र), हस्तशिल्प (ओडीओपी) व नवीकरणीय ऊर्जा को प्राथमिकता व कुशल श्रमिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय रोजगार शामिल है।
  • तीसरा स्तंभ तृतीयक (सेवा) क्षेत्र के विस्तार से संबंधित है - पर्यटन-आतिथ्य, आईटी/आईटीईएस, स्टार्ट-अप्स, शहरी सूक्ष्म उद्यम व गिग इकोनॉमी को मजबूत करना तथा होम-स्टे, को-वर्किंग स्पेस व डिजिटल प्लेटफॉर्म से स्वरोजगार को बढ़ावा देना।
  • चौथा स्तंभ सार्वजनिक क्षेत्र में रोजगार को मजबूत करने पर केंद्रित है - सरकारी नौकरियों में पारदर्शी व समयबद्ध भर्ती, फिक्स्ड-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर पेशेवरों की नियुक्ति तथा आशा व आंगनबाड़ी जैसी फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को सहयोग देना इसमें शामिल है।

💻राजस्थान रोजगार पोर्टल (ईईएमएस 2.0)

  • नीति के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राजस्थान रोजगार पोर्टल (ईईएमएस 2.0) विकसित किया गया है, जो एक एआई-सक्षम एकीकृत रोजगार मंच है और रोजगार चाहने वालों को सार्वजनिक व निजी नियोक्ताओं से जोड़ता है।

🧑‍🎓राजस्थान युवा नीति 2026

  • राजस्थान युवा नीति 2026, 12 जनवरी 2026 को जारी हुई; इससे पहले मंत्रिमंडल ने युवा नीति 2025 को 4 फरवरी 2025 को मंजूरी दी थी, जिसका विमोचन 29 मार्च 2025 को कोटा में 'मुख्यमंत्री रोजगार उत्सव व युवा सम्मेलन' में हुआ था। यह नीति राज्य के 2.25-2.30 करोड़ (27.2% जनसंख्या) 15-29 वर्षीय युवाओं की क्षमता विकसित करने का रोडमैप देती है।
  • यह कवरेज-आधारित व परिणाम-उन्मुख दृष्टिकोण अपनाती है - कम से कम एक योजना से 90% युवाओं तक तथा बहु-स्तरीय सहयोग से 75% युवाओं तक पहुँच, जिसकी निगरानी जिला योजनाओं व वार्षिक डैशबोर्ड से होगी; इसे 8 भागों में बाँटा गया है - शिक्षा-कौशल, रोजगार-उद्यमिता, स्वास्थ्य, युवा नेतृत्व, सामाजिक न्याय, कला-संस्कृति, पर्यावरण तथा खेल एवं युवा मामलात मंत्री की अध्यक्षता वाला त्रि-स्तरीय संस्थागत तंत्र।

🛠️राज्य कौशल नीति 2025

  • राज्य कौशल नीति 2025 को मंत्रिमंडल ने 8 मार्च 2025 को अनुमोदित किया और इसका विमोचन युवा नीति के साथ कोटा में हुआ; इसका उद्देश्य युवाओं को आधुनिक औद्योगिक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षित कर वैश्विक प्रतिस्पर्धी कार्यबल तैयार करना है।
  • इसके तहत आईटीआई को उन्नत कौशल केंद्रों में बदला जाएगा, हर संभागीय मुख्यालय में मॉडल कैरियर सेंटर बनाकर प्रशिक्षण, परामर्श, इंटर्नशिप व रोजगार सूचना दी जाएगी, तथा युवाओं को ऑटोमेशन, एआई, मशीन लर्निंग, आईओटी, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग व साइबर सुरक्षा जैसे इंडस्ट्री 4.0 क्षेत्रों के लिए तैयार किया जाएगा; इसके साथ ही औद्योगिक क्लस्टरों के निकट रिक्रूट-ट्रेन-डिप्लॉय मॉडल तथा अनुभवी श्रमिकों की री-स्किलिंग व प्रमाणीकरण पर बल दिया जाएगा।

🏫विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय एवं फिनिशिंग स्कूल

  • इस विश्वविद्यालय का आधुनिकीकरण किया जाएगा और इसके लिए विशेष कौशल केंद्र स्थापित होंगे, जबकि श्री विश्वकर्मा कौशल विकास बोर्ड पारंपरिक कारीगरों को उन्नत कौशल और बड़े बाजार तक पहुँच दिलाने का कार्य करेगा।
  • राज्य में फिनिशिंग स्कूल भी खोले जाएंगे जहाँ सॉफ्ट स्किल्स, संप्रेषण क्षमता व उद्योग-विशिष्ट प्रशिक्षण दिया जाएगा, अप्रेंटिसशिप-इंटर्नशिप हेतु अलग योजना बनेगी, तथा प्रवासी श्रमिकों की सहायता हेतु विशेष प्रवासन सहायता केंद्र बनेंगे जो रोजगार, आवास व अन्य सेवाओं में मदद देंगे।

🏙️शहरी चुनौती कोष (UCF)

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 13 फरवरी 2026 को 1 लाख करोड़ रु. के शहरी चुनौती कोष को मंजूरी दी, जिसका लक्ष्य लचीले, उत्पादक, समावेशी व जलवायु-अनुकूल शहरों का निर्माण करना है।
  • यह कोष परियोजना लागत का 25% हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में देता है, बशर्ते कम से कम 50% राशि बाजार से जुटाई जाए; यह वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक चलेगा, जिसे 2033-34 तक बढ़ाया जा सकता है।

🎒प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना

  • केंद्रीय बजट 2024-25 में घोषित इस योजना का मकसद अगले 5 वर्षों में एक करोड़ युवाओं को कीमती कौशल प्रशिक्षण देना है; इसकी पायलट परियोजना 3 अक्टूबर 2024 को शुरू हुई, जिसमें 24 क्षेत्रों में 1.25 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया।
  • 21 से 24 वर्ष के वे भारतीय युवा पात्र हैं जिन्होंने हाईस्कूल/हायर सेकंडरी, आईटीआई या पॉलिटेक्निक डिप्लोमा पास किया हो, या बीए, बीएससी, बी.कॉम, बीसीए, बीबीए, बी.फार्मा जैसी डिग्री रखते हों।
  • प्रशिक्षुओं को 5000 रु. मासिक भत्ता (भागीदार कंपनी से 500 रु., शेष 4500 रु. सरकार DBT से), शामिल होने पर 6000 रु. का एकमुश्त अनुदान, तथा PMJJY व PMSBY के तहत बीमा कवर मिलता है जिसका प्रीमियम सरकार भरती है; 12 मार्च 2025 को राजस्थान के मुख्यमंत्री ने योजना से जुड़ने वालों को बेरोजगारी भत्ते के बदले 6000 रु. मासिक स्टाइपेंड का विकल्प देने की घोषणा की।

🚀पीएम विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम-वीबीआरवाई)

  • रोजगार से जुड़ी प्रोत्साहन (ईएलआई) योजना 1 अगस्त 2025 से 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना' के नाम से लागू हुई; 99,446 करोड़ रु. के व्यय वाली इस योजना का लक्ष्य 2 वर्षों में 3.5 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित करना है, जो 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2027 के बीच सृजित रोजगारों पर लागू होगा।
  • योजना के दो भाग हैं - भाग 'अ' पहली बार रोजगार पाने वालों पर केंद्रित है तथा भाग 'ब' नियोक्ताओं पर; इसका उद्देश्य विनिर्माण क्षेत्र पर खास ध्यान देते हुए नए रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करना है।

🤝मुख्यमंत्री युवा रोजगार प्रोत्साहन योजना

  • 29 मार्च 2025 को जारी क्रियान्वयन निर्देशों के साथ शुरू हुई यह योजना संगठित निजी क्षेत्र में 50 हजार रु. तक मासिक वेतन पाने वाले युवाओं को एकबारीय 10 हजार रु. की सहायता देती है।

💼मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना, 2021

  • 1 फरवरी 2019 से पूरे राज्य में लागू मुख्यमंत्री युवा सम्बल योजना-2019 को 1 जनवरी 2022 से 'युवा सम्बल योजना 2021' के रूप में उन्नत किया गया; यह अधिकतम 2 वर्ष या रोजगार मिलने तक बेरोजगारी भत्ता देती है - पुरुष प्रार्थी को 4000 रु. मासिक तथा ट्रांसजेंडर, महिला व विशेष योग्यजन को 4500 रु. मासिक।
  • पात्रता के लिए परिवार की वार्षिक आय 2 लाख रु. से अधिक नहीं होनी चाहिए, आवेदक राजस्थान स्थित विश्वविद्यालय से स्नातक हो, स्थानीय रोजगार कार्यालय में पूर्व-पंजीकृत हो, तथा आयु सीमा सामान्य के लिए 30 वर्ष (SC/ST, ट्रांसजेंडर, महिला व विशेष योग्यजन के लिए 35 वर्ष) हो; हर साल अधिकतम 2 लाख युवाओं को यह भत्ता मिलता है (एक परिवार से अधिकतम दो), और 1 जनवरी 2022 से सभी लाभार्थियों के लिए न्यूनतम 3 माह (90 दिन) का कौशल प्रशिक्षण/इंटर्नशिप अनिवार्य है, जिसमें प्रतिदिन 4 घंटे सेवा देनी होती है।

🌾ग्रामीण आजीविका मिशन: RSLDC, NRLM एवं राजीविका

  • राजस्थान ने सितंबर 2004 में 'राजस्थान आजीविका मिशन' (RMOL) की शुरुआत कर देश का ऐसा पहला राज्य मिशन स्थापित किया - इसे 2009-10 में 'राजस्थान कौशल एवं आजीविका मिशन' नाम दिया गया तथा मई 2012 में 'राजस्थान कौशल एवं आजीविका विकास निगम' (RSLDC) के रूप में पुनर्गठित किया गया; राज्य में देश का पहला कौशल एवं आजीविका विकास केंद्र 15 अगस्त 2014 को देबारी (उदयपुर) में खुला।
  • राष्ट्रीय स्तर पर राधाकृष्ण समिति (2008) की सिफारिशों पर स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना को पुनर्गठित कर राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) बनाया गया - यह केरल के सफल 'कुडुम्बश्री' मॉडल पर आधारित है और इसका शुभारंभ सोनिया गांधी ने 3 जून 2011 को बांसवाड़ा, राजस्थान से किया; यह 60:40 केंद्र-राज्य हिस्सेदारी में सभी ब्लॉकों में चलता है।
  • मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली स्वायत्त राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद् (RGAVP) अक्टूबर 2010 में स्थापित हुई; 10 अक्टूबर 2022 से राजस्थान ग्रामीण परिवार आजीविका ऋण योजना पात्र ग्रामीण परिवारों को गैर-कृषि गतिविधियों हेतु 25,000 रु. से 2 लाख रु. तक का ब्याजमुक्त ऋण देती है।
  • NRLM का नाम 2014-15 में 'दीनदयाल अंत्योदय योजना-NRLM' रखा गया, जिसके तहत महिला स्वयं सहायता समूह 7% ब्याज पर वार्षिक 3 लाख रु. तक ऋण ले सकते हैं और पात्र समूहों को ब्याज सब्सिडी भी मिलती है; 28 फरवरी 2025 तक यह मिशन 28 राज्यों व 6 संघ राज्य क्षेत्रों के 745 जिलों के 7144 ब्लॉकों में लागू हो चुका है।

🏘️शहरी आजीविका मिशन: DAY-NULM एवं DJAY-S

  • 24 सितंबर 2013 को स्वर्ण जयंती शहरी रोजगार योजना के स्थान पर राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन लागू हुआ, जिसे 2014-15 में 'DAY-NULM' नाम दिया गया (1 अप्रैल 2015 से 60:40 केंद्र-राज्य हिस्सेदारी); यह पहले चरण में राज्य के सभी 33 जिला मुख्यालयों व 7 बड़े कस्बों में तथा 2016-17 से सभी नगरीय निकायों में लागू हुआ, इसका क्रियान्वयन काल 30 सितंबर 2024 को समाप्त हुआ।
  • DAY-NULM के तहत SMID (सोशल मोबिलाइजेशन एंड इंस्टीट्यूशन डेवलपमेंट) शहरी बीपीएल परिवारों (न्यूनतम 70% बीपीएल सदस्यता) के स्वयं सहायता समूह बनाकर आय-अर्जन व्यापार को बढ़ावा देता है, जबकि ESTP (एम्प्लॉयमेंट थ्रू स्किल ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट) शहरी गरीबों को कौशल प्रशिक्षण देकर रोजगार दिलाता है।
  • दीनदयाल जन आजीविका-शहरी (DJAY-S) नामक पायलट परियोजना DAY-NULM के स्थान पर 1 अक्टूबर 2024 से 25 चयनित शहरों में लागू हुई, जो गिग वर्कर्स, परिवहन श्रमिकों, निर्माण श्रमिकों, अपशिष्ट श्रमिकों, देखभाल श्रमिकों व घरेलू कामगारों - इन 6 संवेदनशील व्यावसायिक समूहों पर केंद्रित है ताकि लक्षित राज्य-स्तरीय नीति बन सके।

🎯कौशल प्रशिक्षण: DDU-GKY एवं मॉडल कैरियर सेंटर्स

  • 15 अगस्त 2014 को शुरू हुई दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (DDU-GKY) देश का सबसे बड़ा कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जो 60:40 केंद्र-राज्य हिस्सेदारी में ग्रामीण गरीब युवाओं (15-35 वर्ष, 33% महिला भागीदारी अनिवार्य) को न्यूनतम मजदूरी या उससे अधिक के नियमित रोजगार से जोड़ता है; DDU-GKY 2.0, 1 अप्रैल 2025 से प्रभावी, 2025-26 में 7,957 युवाओं व 83.63 करोड़ रु. के वित्तीय प्रावधान के साथ शुरू हुई।
  • रोजगार कार्यालयों को मॉडल कैरियर सेंटर्स में बदलने की योजना के तहत 100% केंद्रीय सहायता से राज्य के 16 रोजगार कार्यालयों में ये केंद्र क्रियाशील हो चुके हैं, जिनमें जयपुर, कोटा, अलवर, बीकानेर व जोधपुर क्षेत्र के कस्बे शामिल हैं; 1 जनवरी 2017 से चल रही मुख्यमंत्री कौशल ऋण अनुदान योजना युवाओं को कौशल प्रशिक्षण हेतु 1 लाख रु. तक ऋण देती है, जिस पर राज्य सरकार 4-6% ब्याज सब्सिडी देती है।

🧑‍🏫राजस्थान की राज्य कौशल योजनाएँ: MMYKY, MMKVY एवं राजविक

  • 3 फरवरी 2021 से RSLDC 'राजविक, सक्षम व समर्थ' - इन तीन योजनाओं को एक छत्री योजना मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना (MMKVY) के तहत चला रहा है; समर्थ 15-50 वर्ष के युवाओं के लिए 100% राज्य-वित्त पोषित निःशुल्क प्रशिक्षण योजना है, जबकि सक्षम 15-45 वर्ष के युवाओं व महिलाओं को स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार-उन्मुख निःशुल्क कौशल प्रशिक्षण देती है।
  • राजविक रिक्रूट-ट्रेन-डिप्लॉय मॉडल तथा NSQF-मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों के जरिए स्कूल बीच में छोड़ चुके युवाओं (आयु 15-35 वर्ष, महिलाओं व विशेष योग्यजन के लिए 45 वर्ष) की री-स्किलिंग व अपस्किलिंग कर उनकी रोजगार-योग्यता बढ़ाता है।
  • 7 नवंबर 2019 से चल रही मुख्यमंत्री युवा कौशल योजना (MMYKY) 17-30 वर्ष के युवाओं को स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों हेतु जीवन/सॉफ्ट कौशल व डोमेन-आधारित प्रशिक्षण देती है, जिसमें 22 पहचाने गए जॉब रोल तथा अधिकतम 210 घंटे का प्रशिक्षण शामिल है।

🇮🇳राष्ट्रीय कौशल योजनाएँ: कौशल भारत, PMYY एवं संकल्प

  • प्रधानमंत्री ने 'कौशल भारत' (Skill India) कार्यक्रम 15 जुलाई 2015 को शुरू किया, जो पहले 'विश्व युवा कौशल दिवस' का अवसर था।
  • कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय ने प्रधानमंत्री युवा योजना (PMYY) 9 नवंबर 2016 को शुरू की, जो 8वीं पास व 18-35 वर्ष के, 1 लाख रु. वार्षिक से कम पारिवारिक आय वाले युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु प्रशिक्षण देती है।
  • इसी मंत्रालय की संकल्प योजना राष्ट्रीय/राज्य स्तर पर संस्थागत तंत्र व प्रशिक्षकों का दल मजबूत करती है और 60:40 केंद्र-राज्य हिस्सेदारी में चलती है।

🏦प्रधानमंत्री रोजगार योजना (PMRY)

  • 2 अक्टूबर 1993 को शुरू हुई इस केंद्रीय योजना में 18-35 वर्ष (SC/ST व महिलाओं को 10 वर्ष की छूट) के 8वीं पास युवाओं, जिनकी पारिवारिक आय 40,000 रु. वार्षिक से अधिक न हो, को बिना जमानत 1-2 लाख रु. तक का ऋण दिया जाता है, साथ ही स्वीकृत प्रोजेक्ट पर 15% (अधिकतम 15,000 रु.) की सब्सिडी मिलती है; यह जिला उद्योग केंद्रों के जरिए संचालित होती है।

🎯जिला गरीबी पहल परियोजना (DPIP)

  • विश्व बैंक की सहायता से 25 जुलाई 2000 को शुरू हुई DPIP का उद्देश्य सात लक्षित जिलों - बारां, चूरू, दौसा, धौलपुर, झालावाड़, राजसमंद व टोंक - में चयनित बीपीएल परिवारों को स्थायी जीविकोपार्जन व बुनियादी सुविधाओं के जरिए गरीबी रेखा से ऊपर लाना था।
🏠

गरीबी उन्मूलन, आवास एवं वित्तीय समावेशन योजनाएँ

Anti-Poverty, Housing & Financial Inclusion Schemes

भारत व राजस्थान के सबसे निर्धन परिवारों तक छत, बैंक खाता व कार्यशील पूँजी पहुँचाने वाली प्रमुख योजनाओं की सैर।

🏡पं. दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गाँव योजना

  • 'गरीबी मुक्त राजस्थान' की परिकल्पना साकार करने हेतु 12 मार्च 2025 को घोषित यह प्रमुख योजना राज्य के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में लागू होगी और चिन्हित बीपीएल परिवारों को चरणबद्ध रूप से गरीबी रेखा से ऊपर लाएगी; इसके दिशा-निर्देश 27 मार्च 2025 को जारी हुए, और पहले चरण (2025-26) के लिए 300 करोड़ रु. निर्धारित हैं।
  • अपने प्रयासों से गरीबी रेखा से ऊपर आने वाले परिवारों को 21,000 रु. का सम्मान राशि व 'आत्मनिर्भर परिवार कार्ड' दिया जाता है; पहले चरण में राज्य के 5,002 गाँवों में कुल 30,631 बीपीएल परिवार चिन्हित कर उनका भौतिक सर्वे पूरा किया जा चुका है, तथा दूसरे चरण के लिए 5,002 अन्य गाँव चुने गए हैं।
  • बीपीएल परिवारों को स्वरोजगार व आजीविका गतिविधियों हेतु 1 लाख रु. तक की सहायता मिलती है (SHG से जुड़ी महिलाओं को 15,000 रु. तक की कार्यशील पूँजी), तथा तिमाही रैंकिंग के आधार पर श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों को क्रमशः 50 लाख, 35 लाख व 25 लाख रु. के पुरस्कार मिलते हैं।

🏘️प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G)

  • 'सन 2022 तक सबके लिए आवास' के लक्ष्य हेतु इंदिरा आवास योजना को पुनर्गठित कर बनाई गई PMAY-G 1 अप्रैल 2016 से लागू हुई, इसका औपचारिक शुभारंभ प्रधानमंत्री ने 20 नवंबर 2016 को आगरा से किया, तथा राजस्थान में इसकी राज्य स्तरीय शुरुआत 18 मार्च 2017 को बांसवाड़ा से हुई।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 9 अगस्त 2024 को वित्त वर्ष 2024-25 से 2028-29 के लिए 3,06,137 करोड़ रु. के व्यय से 2 करोड़ से अधिक और घरों को मंजूरी दी; राजस्थान के लिए तय 24.97 लाख मकानों के लक्ष्य में से 24.32 लाख स्वीकृत व 19.47 लाख पहले ही बन चुके हैं, राज्य में सबको आवास का लक्ष्य वर्ष 2029 है तथा बजटीय आवंटन 2016-17 के 15,000 करोड़ रु. से बढ़ाकर 2026-27 में 54,916 करोड़ रु. किया गया है।
  • मैदानी क्षेत्रों में प्रति इकाई 1,20,000 रु. तथा पहाड़ी/पूर्वोत्तर राज्यों में 1,30,000 रु. तक का अनुदान मिलता है; लाभार्थी मनरेगा के तहत 90-95 दिन की अकुशल मजदूरी, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत शौचालय निर्माण हेतु 12,000 रु. का अनुदान (कुल 1,20,000 रु. की राशि में से, 3 किस्तों में) भी पाने का हकदार है, और मकान का निर्माण उसे स्वयं एक वर्ष में पूरा करना होता है।

🏙️प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 एवं वित्त पोषण तंत्र

  • 9 अगस्त 2024 को स्वीकृत व 17 सितंबर 2024 को लॉन्च हुई PMAY-U 2.0 का लक्ष्य 5 वर्षों में 6 लाख रु. वार्षिक आय तक के शहरी गरीब व मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए 1 करोड़ घर बनाना है, जिसमें हर पात्र लाभार्थी को 2.50 लाख रु. का अनुदान मिलता है।
  • केंद्र-राज्य वित्त पोषण अनुपात क्षेत्र अनुसार भिन्न है: विधायिका रहित संघ राज्य क्षेत्रों में 100:0, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुड्डुचेरी व हिमालयी राज्यों में 90:10, तथा अन्य राज्यों में 60:40 (केंद्र 1.50 लाख + राज्य 1 लाख रु.); राजस्थान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लाभार्थियों को 25,000 रु. का अतिरिक्त अनुदान देता है, और राज्य ने 9,763 नए आवासों (12 सितंबर 2025) व 5,024 और आवासों (20 मई 2026) को मंजूरी दी।

📢अंगीकार 2025 एवं CLAP पोर्टल

  • 'अंगीकार 2025' लास्ट माइल आउटरीच अभियान PMAY-शहरी 2.0 के तहत 4 सितंबर से 31 अक्टूबर 2025 तक चला, ताकि योजना के साथ-साथ ऋण जोखिम गारंटी निधि ट्रस्ट (CRGFTLIH) के बारे में भी जागरूकता फैले और क्रियान्वयन तेज हो।
  • CLAP एक वेब-आधारित निगरानी प्रणाली है, जिसमें प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का एकीकृत आवास पोर्टल भी शामिल है।

🛖राजस्थान बेघर उत्थान व पुनर्वास नीति, 2022

  • बजट 2022-23 में घोषित यह नीति ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के बेघर लोगों का सर्वे कर उनके जनआधार कार्ड व फार्म-2 पहचान-पत्र बनवाती है (जारीकर्ता एजेंसी को प्रति पहचान-पत्र 100 रु. शुल्क, सर्वे हेतु ग्रामीण में 20 रु. व शहरी में 50 रु. प्रति व्यक्ति मानदेय)।
  • इसमें प्रति व्यक्ति न्यूनतम 50 वर्ग फुट छत सहित पेयजल, चिकित्सा, शिक्षा व सुरक्षा जैसी बुनियादी जरूरतें आश्रय गृहों के माध्यम से सुनिश्चित की जाती हैं।

🔥रसोई गैस सिलेण्डर सब्सिडी योजना

  • 27 दिसंबर 2023 को टोंक में 'विकसित भारत संकल्प यात्रा' के दौरान घोषित 'मुख्यमंत्री रसोई गैस सिलेण्डर सब्सिडी' 1 जनवरी 2024 से लागू हुई, नए दिशा-निर्देशों के तहत 1 सितंबर 2024 से इसे 'रसोई गैस सिलेण्डर सब्सिडी योजना' नाम दिया गया, जो वर्ष में अधिकतम 12 सिलेंडर (माह में एक) 450 रु. प्रति सिलेंडर की दर से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जरिए उपलब्ध कराती है।

🍳प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY)

  • पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने बीपीएल परिवारों को जीवाश्म ईंधन की जगह स्वच्छ एलपीजी उपलब्ध कराने हेतु 1 मई 2016 को बलिया (उत्तर प्रदेश) से इसे शुरू किया; उज्ज्वला 2.0 का शुभारंभ 10 अगस्त 2021 को महोबा से हुआ, और PMUY-3.0 (13 सितंबर 2023 को स्वीकृत, वित्त वर्ष 2023-26) में पहली रिफिल व स्टोव भी मुफ्त मिलता है।
  • 1 अक्टूबर 2025 तक देशभर में लगभग 1032.71 लाख कनेक्शन दिए जा चुके हैं, जिनमें से 73.76 लाख राजस्थान में हैं; 14.2 किग्रा के सिलेंडर पर 300 रु. की सब्सिडी मिलती है और प्रतिवर्ष 9 बार तक रिफिल की सुविधा है।

🍲सामुदायिक रसोइयाँ: अन्नपूर्णा रसोई एवं इंदिरा रसोई (ग्रामीण)

  • 6 जनवरी 2024 से चल रही श्री अन्नपूर्णा रसोई योजना (पूर्व में इंदिरा गांधी रसोई योजना, जिसका शुभारंभ 'कोई भूखा न सोए' के संकल्प के साथ 20 अगस्त 2020 को हुआ था) राज्य के 240 नगरीय निकायों में 1000 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 984 रसोइयां चला रही है, जहाँ 8 रु. प्रति थाली में दो समय का भोजन मिलता है (राज्य सरकार 22 रु. प्रति थाली अनुदान देती है) - हर थाली में 300 ग्राम चपाती, 100 ग्राम दाल, 100 ग्राम सब्जी, 100 ग्राम चावल/मिलेट्स की खिचड़ी व अचार सहित कुल 600 ग्राम भोजन मिलता है।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में इंदिरा रसोई योजना का शुभारंभ 10 सितंबर 2023 को झिलाय (निवाई, टोंक) में हुआ, जिसका संचालन राजीविका के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जाता है।

🛒अन्नपूर्णा भण्डार योजना

  • 31 अक्टूबर 2015 को जयपुर जिले के भम्भौरी गाँव से शुरू हुई इस योजना के साथ राजस्थान कम आय वाले परिवारों को रोजमर्रा की चीजें उचित मूल्य पर देने वाला देश का पहला व एकमात्र राज्य बन गया।

🏦प्रधानमंत्री जन-धन योजना एवं इसके लाभ

  • 15 अगस्त 2014 को घोषित तथा 28 अगस्त 2014 को पूरे देश में शुरू हुई जन-धन योजना का उद्देश्य हर परिवार को बैंकिंग सुविधा से जोड़ना और एक बैंक खाता खुलवाना है।
  • खाताधारकों को PMJJBY व PMSBY के तहत कवर किया जाता है, उन्हें 2 लाख रु. का दुर्घटना बीमा कवर (आयु सीमा 18-65 वर्ष), 30,000 रु. तक का अतिरिक्त जीवन बीमा कवर, तथा 6 माह बाद प्रति परिवार एक खाते में 10,000 रु. तक की ओवरड्राफ्ट सुविधा मिलती है।

💳प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) एवं ऋण श्रेणियाँ

  • 8 अप्रैल 2015 को शुरू हुई (8 अप्रैल 2025 को 10 वर्ष पूरे करने वाली) मुद्रा योजना उन छोटे उद्यमों को बिना जमानत ऋण देती है जिन्हें औपचारिक संस्थानों से ऋण मिलने में कठिनाई होती है, चार श्रेणियों में: शिशु (50,000 रु. तक), किशोर (50,000 रु. से 5 लाख रु. तक), तरुण (5 से 10 लाख रु. तक) व तरुण प्लस (10 से 20 लाख रु. तक, केवल तरुण ऋण चुका चुकों के लिए)।

🛍️पीएम-स्वनिधि एवं मुख्यमंत्री स्वनिधि योजना

  • आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत कोविड-प्रभावित पथ विक्रेताओं की मदद हेतु 1 जून 2020 को शुरू हुई पीएम-स्वनिधि तीन बढ़ती किस्तों में कार्यशील पूँजी ऋण देती है - पहली किस्त 10,000 रु. (बाद में 15,000 रु. की गई), दूसरी किस्त 9 अप्रैल 2021 से 20,000/25,000 रु., व तीसरी किस्त 1 जून 2022 से 50,000 रु. तक - समय पर चुकाने पर 7% वार्षिक ब्याज सब्सिडी, UPI-लिंक्ड रुपे कार्ड (30,000 रु. तक की सीमा), डिजिटल लेनदेन पर 1,600 रु. तक कैशबैक, तथा योजना की अवधि मार्च 2030 तक बढ़ाई गई है।
  • राजस्थान की अपनी मुख्यमंत्री स्वनिधि योजना, जिसका शुभारंभ 15 दिसंबर 2024 को हुआ, इसी तर्ज पर तीन चरणों में ऋण (15,000/25,000/50,000 रु., कुल 90,000 रु. तक, 12/18/36 माह की अवधि) गिग वर्कर्स, परिवहन श्रमिकों, घरेलू व निर्माण श्रमिकों, फेरीवालों, अपशिष्ट श्रमिकों, कबाड़ बीनने वालों व कारीगरों जैसे व्यापक असंगठित श्रमिक वर्ग को देती है।

🐟पीएम मत्स्य योजनाएँ: PM-MKSSY एवं PMMSY

  • 8 फरवरी 2024 को वित्त वर्ष 2023-24 से 2026-27 के लिए स्वीकृत PM-MKSSY का उद्देश्य मत्स्य पालन क्षेत्र को औपचारिक बनाना, इससे जुड़े सूक्ष्म-लघु उद्यमों को समर्थन देना तथा राष्ट्रीय मत्स्य पालन डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाना है।
  • मछुआरों के कल्याण हेतु प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना (PMMSY) का शुभारंभ 10 सितंबर 2020 को पटना (बिहार) से हुआ।
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रोजगार गारंटी योजनाएँ एवं सार्वजनिक वितरण प्रणाली

Employment Guarantee Schemes & the Public Distribution System

गारंटीशुदा ग्रामीण रोजगार का कानूनी अधिकार, इसका व्यापक 2025 का कायाकल्प, तथा वह राशन-दुकान नेटवर्क जो भारत व राजस्थान के निर्धनों के लिए भोजन सुलभ रखता है।

⚖️मनरेगा अधिनियम, 2005: उद्भव एवं प्रमुख प्रावधान

  • अपनी तरह का विश्व का पहला कानून, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (NREGA), 2 फरवरी 2006 को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लागू हुआ तथा आंध्रप्रदेश के अनंतपुर जिले की बंडलपल्ली ग्राम पंचायत से इसका शुभारंभ हुआ; 2 अक्टूबर 2009 से इसका नाम बदलकर 'महात्मा गांधी नरेगा' किया गया, और 1 अप्रैल 2008 से यह पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में लागू हुआ।
  • हर इच्छुक परिवार को अपनी ग्राम पंचायत में पंजीयन कराना होता है, जो पात्र वयस्कों को 15 दिन में निःशुल्क जॉब कार्ड जारी करती है, जो 5 वर्ष तक वैध रहता है और रोजगार के अधिकार का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ माना जाता है; काम आवेदक के घर से 5 किमी के दायरे में देना होता है (अन्यथा 10% अतिरिक्त मजदूरी व यात्रा भत्ता देय है), और रोजगार पाने वालों में कम से कम एक-तिहाई महिलाएँ होनी चाहिए।

🐫राजस्थान में मनरेगा एवं मजदूरी दर

  • राजस्थान में मनरेगा की शुरुआत 2 फरवरी 2006 को मकरवदेव ग्राम पंचायत (झाड़ोल, उदयपुर) से हुई, पहले चरण में यह राज्य के 6 जिलों - बांसवाड़ा, डूंगरपुर, झालावाड़, करौली, सिरोही व उदयपुर - में लागू हुई तथा 1 अप्रैल 2008 से पूरे राज्य में लागू हुई; इसका संचालन ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग करता है और यह 100% शहरी जनसंख्या वाले जयपुर व जोधपुर जिलों में लागू नहीं है।
  • 27 मार्च 2025 की अधिसूचना से राजस्थान में मनरेगा की दैनिक मजदूरी 266 रु. से बढ़ाकर 281 रु. (1 अप्रैल 2025 से प्रभावी) की गई - जो अब भी देश में सर्वाधिक मजदूरी वाले हरियाणा (400 रु. प्रतिदिन) से काफी कम है; इसरो-एनआरएससी के सहयोग से बना जीआईएस-आधारित 'युक्तधारा' पोर्टल अब ग्राम पंचायत स्तरीय मनरेगा योजना को सरल बनाता है।

🆕VB-G RAM-G: नया ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम

  • संसद द्वारा पारित तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की 21 दिसंबर 2025 को स्वीकृति प्राप्त 'विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण' (VB-G RAM-G) अधिनियम 1 जुलाई 2026 से मनरेगा का स्थान लेगा और भारत को विकसित भारत@2047 के अनुरूप एक आधुनिक ग्रामीण आजीविका कानूनी ढाँचा देगा; ई-केवाईसी से सत्यापित मौजूदा मनरेगा जॉब कार्ड नए कार्ड जारी होने तक वैध रहेंगे।
  • यह प्रत्येक वित्त वर्ष में गारंटीशुदा रोजगार 100 से बढ़ाकर 125 दिन करता है, और व्यस्त बुवाई-कटाई मौसम में 60 दिन का कोई-काम-नहीं अवधि रखता है ताकि शेष 305 दिनों में 125 दिन का रोजगार उपलब्ध हो; मजदूरी अब साप्ताहिक या काम पूरा होने के 15 दिन के भीतर (धारा 5(3)) देनी अनिवार्य है, प्रशासनिक व्यय की सीमा बढ़ाकर 9% की गई है, तथा बेरोजगारी भत्ते से अयोग्य ठहराने वाला प्रावधान हटाकर अब निर्धारित समय में काम न मिलने पर 15 दिन बाद भत्ता देय बनाया गया है।
  • वित्त पोषण पूर्ववत् 60:40 केंद्र-राज्य अनुपात में होगा (पूर्वोत्तर/हिमालयी राज्यों में 90:10, विधायिका रहित संघ राज्य क्षेत्रों में 100% केंद्रीय), सभी सृजित परिसंपत्तियाँ बॉटम-अप विकसित ग्राम पंचायत योजनाओं के जरिए विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक से जुड़ी होंगी, और बजट वर्ष 2026-27 में योजना हेतु 4,000 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है।

🌱मुख्यमंत्री ग्रामीण रोजगार गारन्टी योजना (MGRGY)

  • राज्य सरकार MGRGY के तहत उन परिवारों को आगे रोजगार देती है जो मनरेगा के 100 दिन पूरे कर चुके हैं - बजट 2022-23 में सभी के लिए राज्य मद से 25 अतिरिक्त दिन तथा बारां जिले की सहरिया/खैरुआ व उदयपुर जिले की कठौड़ी जनजातियों के साथ विशेष योग्यजन श्रमिकों के लिए 100 अतिरिक्त दिन के रोजगार की घोषणा हुई थी।
  • 8 मार्च 2025 व 19 जनवरी 2026 को जारी दिशा-निर्देशों में सभी जिलों में 25 अतिरिक्त दिन तथा अनुसूचित जनजाति बहुल 8 जिलों के 47 ब्लॉकों में 50 अतिरिक्त दिन के रोजगार का प्रावधान किया गया।

🏙️मुख्यमंत्री शहरी रोजगार गारण्टी योजना

  • बजट 2022-23 में घोषित तथा 9 सितंबर 2022 को खानिया की बावड़ी, जयपुर से शुरू हुई इस योजना ने मनरेगा की तर्ज पर शहरी क्षेत्र के आर्थिक रूप से कमजोर, असहाय व बेरोजगार 18-60 वर्ष आयु के लोगों को 100 दिन का रोजगार दिया - जिसे 1 अप्रैल 2023 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया - इसका प्रशासनिक विभाग स्वायत्त शासन विभाग है, और जॉब कार्ड के आधार पर रोजगार माँगने पर 15 दिन में काम मिलता है।
  • राजस्थान ऐसी शहरी रोजगार गारंटी योजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य है और यह देश की सबसे बड़ी शहरी रोजगार गारंटी योजना है; 25 नवंबर 2024 को इसका नाम 'इंदिरा गांधी शहरी रोजगार गारंटी योजना' से बदला गया, 7 अक्टूबर 2024 के आदेश से श्रम-सामग्री अनुपात 75:25 से बदलकर 70:30 किया गया, और परिवार के पंजीयन हेतु जनआधार कार्ड अनिवार्य है।

📜राजस्थान न्यूनतम आय गारंटी अधिनियम एवं विधेयक

  • राजस्थान विधानसभा ने 21 जुलाई 2023 को यह विधेयक पारित किया, राज्यपाल ने 21 सितंबर 2023 को इसे स्वीकृति दी तथा अगले दिन इसका राजपत्र में प्रकाशन हुआ; इस अधिनियम से राजस्थान सामाजिक सुरक्षा की कानूनी गारंटी देने वाला देश का पहला राज्य बन गया।
  • यह तीन अधिकारों पर आधारित है: न्यूनतम आय की गारंटी (अध्याय 2, नियम 3, जो शहरी क्षेत्रों में IGUEGS व ग्रामीण क्षेत्रों में CMREGS से दी जाती है), रोजगार की गारंटी (अध्याय 3), तथा वृद्धजन, विशेष योग्यजन, विधवा व एकल महिलाओं के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन की गारंटी (अध्याय 4)।

💵राजस्थान में न्यूनतम मजदूरी

  • 13 दिसंबर 2024 को जारी अधिसूचना से न्यूनतम मजदूरी दरों में 26 रु. प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई, जो 1 जनवरी 2023 से प्रभावी मानी गई - अकुशल श्रमिक की मजदूरी 259 रु. से बढ़ाकर 285 रु. प्रतिदिन (7,410 रु. मासिक), अर्द्धकुशल की 271 रु. से 297 रु. (7,722 रु. मासिक), कुशल की 283 रु. से 309 रु. (8,034 रु. मासिक), तथा उच्च कुशल की 333 रु. से 359 रु. प्रतिदिन (9,334 रु. मासिक) की गई।

🧾सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS): संरचना एवं राशन कार्ड

  • बढ़ती खाद्यान्न कीमतों को नियंत्रित करने व अभाव-ग्रस्त क्षेत्रों में आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु केंद्र सरकार ने 1960 में PDS शुरू की; इसमें भारतीय खाद्य निगम किसानों से अनाज खरीदकर उसका भंडारण करता है, राज्यों को आवंटन करता है, और राज्य उचित मूल्य की दुकानों के जरिए हर राशन कार्ड पर तय मासिक कोटे के आधार पर निर्धनों को बहुत कम व अन्य उपभोक्ताओं को बाजार से कम दर पर अनाज वितरित करते हैं।
  • राशन कार्ड तीन प्रकार के होते हैं - अन्त्योदय (निर्धनों में भी सबसे निर्धन के लिए), बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) व एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर) - और 1 जनवरी 2026 तक राजस्थान में 27,494 उचित मूल्य दुकानें संचालित थीं, जिनमें लगी PoS मशीनों से बायोमेट्रिक सत्यापन के बाद ही राशन सामग्री दी जाती है।

🔁PDS का विकास: RPDS से TPDS तक

  • नवीकृत PDS (जून 1992) ने देश के सूखा-प्रवण, आदिवासी, पहाड़ी, मरुस्थलीय व शहरी झुग्गी क्षेत्रों के लगभग 1,775 ब्लॉकों को चिन्हित किया तथा उचित मूल्य दुकानों से अनाज के साथ चाय, साबुन, दाल व आयोडीनयुक्त नमक जैसी वस्तुएँ भी उपलब्ध कराईं।
  • 1 जून 1997 से लागू लक्षित PDS (TPDS) ने भारत में पहली बार गरीब व गैर-गरीब के लिए अलग 'विभेदी मूल्य नीति' अपनाई: 15,000 रु. वार्षिक आय से कम वाले परिवारों को तय मासिक कोटा मिलता था - शुरू में 10 किग्रा, जिसे 1 अप्रैल 2002 से बढ़ाकर 35 किग्रा किया गया - मार्च 2000 में बीपीएल परिवारों के लिए मूल्य FCI की आर्थिक लागत के 50% पर तथा एपीएल परिवारों के लिए पूरी आर्थिक लागत पर तय हुआ।

🍚अंत्योदय अन्न योजना एवं बीपीएल/एपीएल आपूर्ति

  • दिसंबर 2000 में शुरू हुई अंत्योदय अन्न योजना का उद्देश्य 100 लाख सबसे निर्धन परिवारों की पहचान कर उन्हें 2 रु./किग्रा गेहूँ व 3 रु./किग्रा चावल देना था, जिसका मासिक कोटा 1 अप्रैल 2002 से 25 किग्रा से बढ़ाकर 35 किग्रा किया गया - इसी तिथि से बीपीएल परिवारों का कोटा भी 35 किग्रा हुआ।
  • एपीएल परिवारों को आपूर्ति तभी होती है जब अंत्योदय व बीपीएल परिवारों की आवश्यकता पूरी होने के बाद भी अनाज शेष रहता है, और इसका मूल्य FCI की पूरी आर्थिक लागत के बराबर होता है।

🔍PDS की समीक्षा: शांताकुमार एवं वाधवा समितियाँ

  • शांताकुमार समिति (अगस्त 2014) का गठन न्यूनतम समर्थन मूल्य व न्यूनतम खरीद मूल्य की जाँच तथा FCI के कामकाज की समीक्षा हेतु हुआ था, जबकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गठित न्यायमूर्ति डी.पी. वाधवा की अध्यक्षता वाली समिति ने देशभर में PDS के कामकाज की समीक्षा कर अप्रैल 2010 में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।

🪪एक राष्ट्र एक राशन कार्ड (ONORC) एवं मेरा राशन एप

  • अप्रैल 2018 से सभी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों के साथ मिलकर चलाई गई एकीकृत प्रबंधन PDS (IM-PDS) योजना (31 मार्च 2022 तक वैध) ने NFSA के तहत देशव्यापी राशन कार्ड पोर्टेबिलिटी शुरू की - जिससे कार्डधारक देश की किसी भी उचित मूल्य दुकान से अनाज ले सकते हैं; पायलट क्लस्टर योजना अगस्त 2019 में शुरू हुई और अब तक सभी 28 राज्य व 8 संघ राज्य क्षेत्र इससे जुड़ चुके हैं (राजस्थान चतुर्थ क्लस्टर में, अक्टूबर 2019; असम अंत में, 21 जून 2022 को)।
  • NFSA लाभार्थियों को आधार से जोड़ा जा रहा है और अंतर-राज्यीय पोर्टेबिलिटी शुरू की गई है, जबकि 'मेरा राशन' एप (12 मार्च 2021 को शुरू) लाभार्थियों - विशेषकर प्रवासियों - को ONORC पोर्टेबिलिटी का पूरा लाभ लेने में मदद करता है।

📲राजस्थान में PDS तकनीक एवं डिजिटल पहलें

  • उपभोक्ता मामलात विभाग राशन वितरण हेतु आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन लागू करने तथा उत्तर प्रदेश व मध्यप्रदेश की तर्ज पर GATC (वजन-माप) प्रणाली अपनाने की योजना बना रहा है ताकि उपभोक्ताओं के साथ निष्पक्षता व राजस्व दोनों सुनिश्चित हों; बजट 2025-26 में NFSA राशन वितरण करने वाले डीलरों के कमीशन में भी 10% वृद्धि की घोषणा हुई।
  • 20 मई 2025 को केंद्रीय मंत्री ने भारत की PDS को आधुनिक बनाने हेतु तीन डिजिटल पहलें - डिपो दर्पण पोर्टल, अन्न मित्र व अन्न सहायता डिजिटल प्लेटफॉर्म - लॉन्च कीं; खाना पकाने व रोशनी हेतु वितरित नीला केरोसीन दिसंबर 2020 में शून्य उठाव तक पहुँच गया, और जनवरी 2021 से राजस्थान को केरोसीन-मुक्त राज्य घोषित किया जा चुका है।

🚮गिव अप अभियान एवं खाद्य सुरक्षा पोर्टल पुनः प्रारंभ

  • 'अपात्र को लाभ न मिले, पात्र वंचित न रहे' के सिद्धांत पर 1 नवंबर 2024 से 28 फरवरी 2026 तक चला गिव अप अभियान संपन्न लोगों को खाद्य सुरक्षा योजना से स्वेच्छा से नाम हटाने के लिए प्रेरित करता है; सूची में जुड़ने के 3 माह में ई-केवाईसी पूर्ण न करने वालों के नाम स्वतः हटाए जा रहे हैं, तथा शेष अपात्र नामों पर खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग द्वारा जुर्माना व 27 रु./किग्रा की दर से ब्याज सहित अनाज की वसूली होगी।
  • मुख्यमंत्री ने 26 जनवरी 2025 को खाद्य सुरक्षा पोर्टल पुनः शुरू किया, जिसके बाद लगभग 73 लाख पहले वंचित रह गए पात्र लोगों को खाद्य सुरक्षा से जोड़ा गया - इसमें जयपुर (3.17 लाख), बाड़मेर (3.07 लाख) व सीकर (3.04 लाख) सबसे आगे रहे।

🎁प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY)

  • कोविड-19 के आर्थिक झटके से राहत हेतु अप्रैल 2020 में शुरू हुई PMGKAY के तहत लगभग 81.35 करोड़ NFSA लाभार्थियों को नियमित राशन के अतिरिक्त प्रति व्यक्ति प्रतिमाह 5 किग्रा मुफ्त अनाज दिया गया; 28 महीने चलने के बाद सरकार ने 1 जनवरी 2024 से इन्हीं 81.35 करोड़ लाभार्थियों को अगले 5 वर्षों तक यह मुफ्त अनाज जारी रखने का निर्णय लिया।

🥘राजस्थान की खाद्य सुरक्षा योजना एवं राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक

  • राजस्थान ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 के तहत अपनी खाद्य सुरक्षा योजना 2 अक्टूबर 2013 को शुरू की, जो 53% शहरी व 69.09% ग्रामीण जनसंख्या को कवर करती है, तथा अंत्योदय व अन्य पात्र परिवारों के लिए 2,30,818.990 मीट्रिक टन गेहूँ का मासिक आवंटन करती है।
  • सितंबर 2024 में जारी 6वें राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक (SFSI) 2024 में केरल राष्ट्रीय रैंकिंग में शीर्ष पर रहा जबकि राजस्थान 6वें स्थान पर रहा।