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राजस्थान GK

राजस्थान के प्रमुख व्यक्तित्व

Prominent Personalities of Rajasthan

राजस्थान के इतिहास-निर्माता शासकों व वीरांगनाओं से लेकर सेना के परमवीरों, खेल सितारों और आधुनिक समाज-सुधारकों तक — इस राज्य को गढ़ने वाले प्रमुख व्यक्तित्वों की झलक।

87 टॉपिक87 फ्लैशकार्ड14 MCQ
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ऐतिहासिक शासक व नायक

Historic Rulers & Heroes

योद्धा सामंत, नगर व मंदिर बसाने वाले शासक और इतिहासकार — जिनके निर्णयों व विरासत की छाप आज भी राजस्थान के किलों, नगरों और लोक-कथाओं में जीवित है।

⚔️अमरसिंह राठौड़

  • जोधपुर के महाराजा गजसिंह के सबसे बड़े पुत्र अमरसिंह राठौड़ को बादशाह शाहजहाँ ने 'राव' की उपाधि तथा नागौर परगना प्रदान किया था।
  • 1644 में उन्होंने बीकानेर के राजा कर्णसिंह के विरुद्ध प्रसिद्ध 'मतीरे की राड़' का युद्ध लड़ा; उनकी वीरता आज भी लोकनाट्य 'अमरसिंह रो ख्याल' में जीवित है, जो उन्हें साहस, स्वाभिमान व बलिदान के प्रतीक के रूप में स्मरण करता है।

🏛️सवाई जयसिंह द्वितीय

  • आमेर के कछवाहा शासक सवाई जयसिंह द्वितीय ने 1727 ई. में जयपुर नगर की स्थापना की और वास्तुकार विद्याधर की सहायता से इसकी सुनियोजित गलियाँ बसाईं, जो आज भी विश्वभर में सराही जाती हैं।
  • खगोलशास्त्र में गहरी रुचि रखने वाले जयसिंह ने जयपुर, उज्जैन, दिल्ली, बनारस व मथुरा - पाँच नगरों में जंतर-मंतर वेधशालाएँ बनवाईं, 1725 में 'जीज मोहम्मदशाही' सारणी तैयार करवाई और 'जयसिंह कारिका' नामक ग्रंथ रचा।
  • उन्होंने मराठों के विरुद्ध राजपूत राजाओं को एकजुट करने हेतु हुरड़ा सम्मेलन (17 जुलाई 1734) बुलाया, पर आपसी अविश्वास से यह प्रयास सफल न हो सका; उन्होंने जयपुर का सिटी पैलेस व नाहरगढ़ दुर्ग भी बनवाया और अश्वमेध यज्ञ करने वाले अंतिम हिन्दू नरेश माने जाते हैं।

🏯सवाई प्रतापसिंह 'ब्रजनिधि'

  • सवाई माधोसिंह के पुत्र जयपुर महाराजा सवाई प्रतापसिंह 'ब्रजनिधि' उपनाम से काव्य रचते थे, जो 'ब्रजनिधि ग्रंथावली' में संकलित है; उनके दरबार में 22 विद्वान रहते थे, जिन्हें 'प्रताप बाईसी' या 'गंधर्व बाईसी' कहा जाता था।
  • 1799 ई. में उन्होंने जयपुर का प्रसिद्ध पाँच मंजिला हवामहल बनवाया, जो भगवान श्रीकृष्ण के मुकुट के आकार का माना जाता है और उन्हें समर्पित बताया जाता है, जिसमें 953 खिड़कियाँ हैं; इसके वास्तुकार उस्ताद लालचंद थे।

🐎महाराजा मानसिंह (जोधपुर)

  • जोधपुर के महाराजा मानसिंह मेवाड़ राजकुमारी कृष्णाकुमारी के विवाह-प्रश्न पर हुए 1807 के गिंगोली युद्ध में जयपुर के जगतसिंह से पराजित हुए।
  • नाथ संप्रदाय के पायस देवनाथ को गुरु बनाकर उन्होंने जोधपुर में इस संप्रदाय की प्रमुख पीठ 'महामंदिर' बनवाई और मान पुस्तकालय की स्थापना की, जिसे आज 'मानसिंह पुस्तक प्रकाश केन्द्र' कहा जाता है।

🏅महाराजा गंगासिंह (बीकानेर)

  • महाराजा गंगासिंह अपनी 'गंगा रिसाला सेना' लेकर चीन के बॉक्सर विद्रोह को दबाने गए, जिसके लिए अंग्रेजों ने उन्हें 'चीन युद्ध मेडल' दिया; उन्होंने तीनों गोलमेज सम्मेलनों में भी भाग लिया।
  • उन्होंने 1921 में 'नरेन्द्रमण्डल' (चैम्बर ऑफ प्रिंसेज) की स्थापना कर 1925 तक इसके प्रथम अध्यक्ष रहे, और पंजाब से गंगनहर लाकर सिंचित भूमि पर गंगानगर नगर बसाया।

🛡️राणा हम्मीरदेव (रणथम्भौर)

  • 1282 ई. में राज्यारोहण के बाद राणा हम्मीरदेव ने दिग्विजय की नीति अपनाई और 16 युद्धों के विजेता माने जाते हैं; उन्होंने 1291 में जलालुद्दीन खिलजी के रणथम्भौर आक्रमण को विफल किया।
  • 1301 में अलाउद्दीन खिलजी युद्ध में असफल रहने पर छल से हम्मीर के सेनानायकों रणमल व रतिपाल को अपनी ओर मिला लिया; अपने 17वें युद्ध में लड़ते हुए हम्मीर वीरगति को प्राप्त हुए, और उनकी रानी रंगदेवी के नेतृत्व में महिलाओं ने राजस्थान का पहला ज्ञात जौहर किया।

🏯महाराजा सूरजमल (भरतपुर)

  • बदनसिंह के पुत्र व उत्तराधिकारी महाराजा सूरजमल ने भरतपुर में नया दुर्ग बनवाकर उसे राजधानी बनाया और जाट सत्ता का विस्तार किया; शिक्षा-प्रेम के कारण उन्हें 'जाटों का प्लेटो' भी कहा जाता है।

🎨सावंतसिंह 'नागरीदास' (किशनगढ़)

  • किशनगढ़ महाराजा राजसिंह के पुत्र सावंतसिंह 'नागरीदास' उपनाम से शुद्ध ब्रजभाषा में राधा-कृष्ण की प्रेमलीला पर आधारित रचनाएँ लिखते थे, जो 77 कृतियों के संग्रह 'नागर समुच्चय' में संकलित हैं।
  • किशनगढ़ शैली की विश्वविख्यात चित्रकृति 'बणी-ठणी' उनके दरबार से जुड़ी है और उनकी सबसे प्रसिद्ध कलात्मक विरासत मानी जाती है।

🗺️जॉर्ज थॉमस 'जॉर्ज फिरंगी'

  • आयरलैंड मूल के साहसी सैनिक जॉर्ज थॉमस, जो राजस्थान में 'जॉर्ज फिरंगी' नाम से प्रसिद्ध हुए, ने लगभग 1799 में जयपुर, बीकानेर व मेवाड़ में कई युद्ध लड़े और 1800 में इस क्षेत्र को सर्वप्रथम 'राजपूताना' नाम दिया।

📜कविराज श्यामलदास

  • इतिहासकार कविराज श्यामलदास दधिवाड़िया महाराणा सज्जनसिंह के कृपापात्र थे; उन्हें अंग्रेज सरकार ने 'महामहोपाध्याय' तथा राजनीतिक अभिकर्ता कर्नल इम्पी ने 'केसर-ए-हिन्द' की उपाधि दी।
  • उनका प्रमुख ग्रंथ 'वीरविनोद' मेवाड़ के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है।

📚कर्नल जेम्स टॉड

  • कर्नल जेम्स टॉड 1817 में राजनीतिक अभिकर्ता बनकर उदयपुर आए और 1829 में 'Annals and Antiquities of Rajasthan' रचा; इसके बाद 'Travels in Western India' (1839) व 'On the Religious Establishments of Mewar' (1830) भी लिखीं।
  • टॉड को राजस्थान के इतिहास-लेखन का पितामह कहा जाता है; उन्होंने अपना पहला ग्रंथ अपने साहित्यिक मार्गदर्शक जैन यति ज्ञानचंद जी को समर्पित किया था।

✍️जसवंतसिंह प्रथम (जोधपुर)

  • अमरसिंह राठौड़ के छोटे भाई जोधपुर महाराजा जसवंतसिंह प्रथम डिंगल-पिंगल भाषाओं के प्रकांड विद्वान थे और अपने गुरु सुरति मिश्र के मार्गदर्शन में 'भाषा भूषण', 'आनंद विलास' जैसी रचनाएँ लिखीं।

🏰प्रतापसिंह नरूका (अलवर के संस्थापक)

  • प्रतापसिंह नरूका ने 1775 ई. में अलवर रियासत की स्थापना की; भरतपुर के विरुद्ध मुगल बादशाह की सहायता करने पर उन्हें 1774 में 'रावराजा बहादुर' की उपाधि व पंच हजारी मनसब मिला।

🏷️उपाधियों से स्मरणीय शासक

  • राजस्थान के कई शासकों को विशिष्ट उपाधियों से याद किया जाता है: राव लूणकरण को 'कलयुग का कर्ण', राव करणसिंह को 'जांगलधर बादशाह', राव रायसिंह को 'राजपूताना का कर्ण' तथा विग्रहराज चतुर्थ को 'कवि बांधव' कहा जाता है।

🎩लक्ष्मणसिंह (डूंगरपुर) - शासक से राजनेता

  • डूंगरपुर के शासक (1918-1948) लक्ष्मणसिंह ने 1949 में राजस्थान के गठन के बाद सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया, विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए और राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष बने; वे अपने समय के एक अच्छे क्रिकेटर भी थे।

📊उपाधियों से स्मरणीय व्यक्तित्व — एक नज़र में

व्यक्तिउपाधि
राव लूणकरणकलयुग का कर्ण
राव करणसिंहजांगलधर बादशाह
राव रायसिंहराजपूताना का कर्ण
विग्रहराज चतुर्थकवि बांधव
महाराजा सूरजमलजाटों का प्लेटो
गुलाबरायजोधपुर की नूरजहाँ
कविराज श्यामलदासकेसर-ए-हिन्द / महामहोपाध्याय
लेफ्टिनेंट कर्नल हनूत सिंहफख्र-ए-हिन्द (पाकिस्तान द्वारा)
कर्नल जेम्स टॉडराजस्थान के इतिहास-लेखन का पितामह
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रानियाँ व वीरांगनाएँ

Queens & Women of Valour

जल के लिए बावड़ियाँ खुदवाने वाली रानियों से लेकर अपमान के बजाय तलवार या चिता चुनने वाली वीरांगनाओं तक - राजस्थान का इतिहास राजाओं जितना ही उसकी स्त्रियों से भी गढ़ा गया है।

💔रानी उमादे - 'रूठी रानी'

  • जैसलमेर के रावल लूणकरण की पुत्री व जोधपुर के राव मालदेव की रानी उमादे स्वाभिमानवश जीवनभर अपने पति से अलग रहीं, इसीलिए उन्हें 'रूठी रानी' कहा जाता है।
  • मालदेव की अन्य रानियों ने उन्हें मनाने चारण कवि 'आसा' को भेजा, पर मान-सम्मान पर आधारित एक दोहे ने उनके संकल्प को और दृढ़ कर दिया; 1562 में मालदेव की मृत्यु पर वे सती हो गईं।

⚔️हाड़ी रानी

  • बूंदी के सांगरण सिंह की पुत्री नवविवाहिता हाड़ी रानी सलह कँवर को आशंका हुई कि उनका सौंदर्य पति रावत रतनसिंह (सलूंबर) को औरंगजेब की सेना से युद्ध में विचलित कर देगा - विवाह रस्में पूरी होने से पहले ही उन्होंने अपना सिर काटकर पति के पास भिजवा दिया।
  • यह चिह्न देखकर रतनसिंह के चूंडावत सैनिक क्रोधित होकर मुगल सेना पर टूट पड़े और उसे पराजित किया - इस घटना को कवि मेघराज 'मुकुल' ने अपनी कविता 'सैनानी' में अमर किया।

🛡️पन्ना धाय और चित्तौड़ का जौहर

  • चित्तौड़ के निकट पांडोली में जन्मी पन्ना धाय ने 1536 ई. में राजकुमार उदयसिंह को बचाने के लिए अपने ही पुत्र को उसके बिस्तर पर लिटा दिया, जिसे बनबीर ने मार डाला, और फिर भावी महाराणा को सुरक्षित रूप से प्रतापगढ़ के देवलिया ले गईं।
  • दशकों बाद 1567 ई. में अकबर की चित्तौड़ घेराबंदी में सामंत जयमल राठौड़ व पत्ता सिसोदिया मुगल सेना से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए; उनकी वीरता से प्रभावित होकर अकबर ने आगरा किले में उनकी प्रतिमाएँ स्थापित करवाईं।

🐴गोरा धाय

  • जोधपुर के रतना टाक की पुत्री गोरा धाय ने 1679 ई. में वीर दुर्गादास के साथ मिलकर मारवाड़ के राजकुमार अजीतसिंह को मुगल घेरे से बाहर निकाला; त्याग व स्वामिभक्ति के कारण मारवाड़ के लोकगीत 'धूसा' में आज भी उनका नाम गाया जाता है।

👑गुलाबराय - 'जोधपुर की नूरजहाँ'

  • जोधपुर महाराजा विजयसिंह की प्रेयसी गुलाबराय एक गायिका के परिवार से उठकर लगभग तीस वर्षों तक मारवाड़ की राजनीति की धुरी बनी रहीं, जिसके चलते उन्हें 'जोधपुर की नूरजहाँ' कहा गया - यह उपाधि इतिहासकार श्यामलदास ने भी अपनी कृति 'वीरविनोद' में प्रयोग की।
  • उन्होंने जोधपुर का गुलाब सागर तालाब व उसके किनारे का महल बनवाया, और 1776 में 'महिला बाग का झालरा' भी बनवाया।

👑जयवंता बाई - महाराणा प्रताप की माता

  • पाली के सोंगरा अखैराज की पुत्री रानी जयवंता बाई महाराणा उदयसिंह द्वितीय की रानी थीं और उन्हीं की कोख से मेवाड़ के सर्वाधिक विख्यात योद्धा-नरेश महाराणा प्रताप का जन्म हुआ।

💍चारुमती (किशनगढ़)

  • किशनगढ़ के राजा रूपसिंह की पुत्री चारुमती का विवाह 1660 ई. में मेवाड़ के महाराणा राजसिंह से उन्हीं की इच्छा पर हुआ - यह विवाह औरंगजेब के दबाव से अपने धर्म की रक्षा के लिए किया गया था।

♟️अमर कुँवरी - बूंदी की सत्ता-निर्माता

  • सवाई जयसिंह की बहन व बूंदी के राव बुद्धसिंह हाड़ा की रानी अमर कुँवरी ने दलेलसिंह को हटाकर उम्मेदसिंह को बूंदी का शासक बनाने के लिए मराठों को आमंत्रित किया।
  • मल्हारराव होल्कर को राखी-बद्ध भाई बनाकर उन्होंने अनजाने में राजपूताना की राजनीति में मराठों के गहरे हस्तक्षेप का मार्ग खोल दिया।

🌳अमृता देवी विश्नोई और खेजड़ली बलिदान

  • 1730 ई. में जोधपुर की अमृता देवी विश्नोई ने खेजड़ली आंदोलन का नेतृत्व किया और खेजड़ी वृक्षों की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर कर दिए - इसी की स्मृति में हर भाद्रपद शुक्ल दशमी को खेजड़ली गाँव में विश्व का एकमात्र वृक्ष मेला लगता है।
  • उनकी स्मृति में भारत सरकार ने 1994 से पर्यावरण संरक्षण हेतु अमृता देवी पुरस्कार की शुरुआत की।

🏛️जल-स्थापत्य की रानियाँ

  • राजस्थान की कई रानियों ने जल-स्थापत्य के माध्यम से अपनी छाप छोड़ी: गुमान कुँवरी ने डूंगरपुर की केला बावड़ी, चंपाकंवर ने सिरोही के समीप चंपावती बावड़ी (1582), प्रेमल देवी ने डूंगरपुर की भव्य नौलखा बावड़ी (1586) और बूंदी की रानी नाथावतजी ने 18वीं सदी के आरंभ में 'रानी जी की बावड़ी' बनवाई।
  • अलवर में राव राजा बलवंतसिंह की माता मूसी महारानी की स्मृति तिजारा के 'मूसी महारानी का जनाना महल' व अलवर महल के पीछे स्थित 80 संगमरमरी स्तंभों वाली 'मूसी महारानी की छतरी' में सुरक्षित है; कोटा की अबली मीणी की स्मृति दर्रा के निकट 'अबली मीणी का महल' में है।
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रक्षा क्षेत्र के वीर

Guardians of the Nation

राजस्थान की माटी के वे सैनिक और वायुसैनिक जिन्होंने प्रायः अपने प्राणों की कीमत पर भारत के युद्धों की दिशा बदली और देश के सर्वोच्च वीरता सम्मान अर्जित किए।

🎖️लेफ्टिनेंट कर्नल भवानीसिंह

  • जयपुर राजपरिवार के लेफ्टिनेंट कर्नल सवाई भवानीसिंह ने पैराशूट रेजिमेंट के साथ 1971 युद्ध में चाचरो व विरावाह चौकियों पर चार दिन-रात तक युद्ध किया और शत्रु के अधिकृत बड़े क्षेत्र पर कब्जा किया।
  • इस पराक्रम के लिए 1971 के भारत-पाक युद्ध के बाद उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

💥ब्रिगेडियर रघुवीर सिंह राजावत

  • 1965 के युद्ध में 18 राजपूताना राइफल्स में तैनात ब्रिगेडियर रघुवीर सिंह राजावत की टुकड़ी ने असल उत्तर की लड़ाई में 9 सितंबर 1965 की मध्यरात्रि में पाकिस्तानी टैंकों के हमले में 22 पैटन टैंक नष्ट किए।
  • उनके नेतृत्व में दस दिवसीय अभियान से शत्रु सेना को पीछे हटना पड़ा, जिसके लिए राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने उन्हें महावीर चक्र प्रदान किया।

🏔️मेजर शैतानसिंह - 'बानासर के शहीद'

  • फलोदी के बानासर गाँव में जन्मे मेजर शैतानसिंह ने 1962 के युद्ध में रेजांगला दर्रे पर 13वीं कुमाऊँ रेजिमेंट की चार्ली कंपनी का नेतृत्व करते हुए चीनी सेना का सामना किया - दोनों हाथ लहूलुहान होने पर भी अपनी मशीनगन पैरों में बाँधकर अंतिम साँस तक चलाते रहे।
  • उन्हें 1963 में मरणोपरांत परमवीर चक्र प्रदान किया गया; शहीदों की स्मृति में 'रेजांगला स्मारक' का उद्घाटन 2021 में हुआ।

🚁ग्रुप कैप्टन चंदनसिंह

  • 1971 युद्ध में ग्रुप कैप्टन चंदनसिंह ने सीमित क्षमता वाले हेलीकॉप्टर से 18 बार उड़ान भरकर लगभग 3000 सैनिकों व 40 टन युद्ध-सामग्री को ढाका पहुँचाया, जिसके लिए उन्हें 1972 में महावीर चक्र मिला।

🛡️लेफ्टिनेंट कर्नल हनूत सिंह

  • बाड़मेर के जसोल में जन्मे लेफ्टिनेंट कर्नल हनूत सिंह ने 1971 युद्ध में पूना हॉर्स की कमान संभाली; 16 दिसंबर 1971 को बसंतर नदी पर 700 मीटर आगे बढ़कर लगभग 50 शत्रु टैंक ध्वस्त किए, जिसके लिए उन्हें महावीर चक्र मिला।
  • बाद में पाकिस्तान ने भी उन्हें 'फख्र-ए-हिन्द' की उपाधि से सम्मानित किया; उनका निधन अप्रैल 2015 में हुआ।

🏅पीरू सिंह - राजस्थान के प्रथम परमवीर चक्र विजेता

  • झुंझुनूं के बेरी रामपुरा गाँव के कंपनी हवलदार मेजर पीरू सिंह, जो 6वीं राजपूताना बटालियन में सेवारत थे, को 1948 में मरणोपरांत प्रथम परमवीर चक्र प्रदान किया गया - वे यह सम्मान पाने वाले राजस्थान के प्रथम व्यक्ति थे। (भारत के प्रथम परमवीर चक्र विजेता 1947 में मेजर सोमनाथ शर्मा थे।)

🐫कर्नल उदयसिंह भाटी

  • जोधपुर के शेरगढ़ निवासी कर्नल उदयसिंह भाटी ने 1971 युद्ध में भारत स्काउट्स की तीन टुकड़ियों का नेतृत्व करते हुए दस-दिवसीय अभियान में शत्रु को पीछे हटने पर मजबूर किया, जिसके लिए 26 जनवरी 1972 को उन्हें महावीर चक्र मिला।

🚩नायक दिगेन्द्र कुमार और तोलोलिंग पर तिरंगा

  • सीकर के झाला गाँव में जन्मे नायक दिगेन्द्र कुमार पारासवाल की टुकड़ी ने कारगिल युद्ध में 13 जून 1999 की सुबह 4 बजे तोलोलिंग चोटी पर तिरंगा फहराया, जिसके लिए 15 अगस्त 1999 को उन्हें महावीर चक्र मिला।

🎖️सूबेदार चूनाराम फगेड़िया

  • सीकर के दलमास की ढाणी निवासी सूबेदार चूनाराम फगेड़िया 1948 के भारत-पाक युद्ध में पुंछ-राजौरी सेक्टर में राजपूताना राइफल्स टुकड़ी का नेतृत्व करने पर राजस्थान से महावीर चक्र पाने वाले प्रथम व्यक्ति बने।

🕊️शहीद धोकलसिंह

  • जोधपुर के सेखाला जुनावास निवासी धोकलसिंह, जो 6वीं राजपूताना राइफल्स में सैनिक थे, ने 1948 में उरी की नावला चौकी पर घायल होने के बावजूद पाँच शत्रु सैनिकों को मार गिराया और शहीद हो गए; उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र मिला।

🕯️नायक सुगनसिंह

  • नागौर निवासी नायक सुगनसिंह, जो 7वीं राजपूताना राइफल्स में तैनात थे, 9 दिसंबर 1971 को मैनामती पर हुए हमले में शहीद हो गए; उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र प्रदान किया गया।

🌟सशस्त्र बलों की आधुनिक अग्रदूत

  • अलवर के अनिल कुमार, भारतीय तटरक्षक कमांडो, ने समुद्र की गहराई में तिरंगा फहराया; नम्रता भंडू राजस्थान की प्रथम महिला पायलट बनीं; और विंग कमांडर दीपिका मिश्रा राज्य से भारतीय वायुसेना का वीरता पुरस्कार पाने वाली प्रथम महिला बनीं।

📊राजस्थान के परमवीर व महावीर चक्र विजेता — एक नज़र में

नामगृह जिलायुद्ध/वर्षसम्मान
लेफ्टिनेंट कर्नल भवानीसिंहजयपुर1971महावीर चक्र
ब्रिगेडियर रघुवीर सिंह राजावत—1965महावीर चक्र
मेजर शैतानसिंहफलोदी, जोधपुर1962परमवीर चक्र (मरणोपरांत)
ग्रुप कैप्टन चंदनसिंह—1971महावीर चक्र
लेफ्टिनेंट कर्नल हनूत सिंहजसोल, बाड़मेर1971महावीर चक्र
पीरू सिंहझुंझुनूं1948परमवीर चक्र (मरणोपरांत)
कर्नल उदयसिंह भाटीशेरगढ़, जोधपुर1971महावीर चक्र
नायक दिगेन्द्र कुमारझाला, सीकर1999 (कारगिल)महावीर चक्र
सूबेदार चूनाराम फगेड़ियादलमास की ढाणी, सीकर1948महावीर चक्र
शहीद धोकलसिंहसेखाला जुनावास, जोधपुर1948महावीर चक्र (मरणोपरांत)
नायक सुगनसिंहनागौर1971महावीर चक्र (मरणोपरांत)
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राजस्थान के खेल सितारे

Sportstars of Rajasthan

ओलंपिक व पैरालंपिक पोडियम से लेकर शतरंज के ग्रैंडमास्टर खिताब तक, राजस्थान के खिलाड़ियों ने अनेक खेलों में राज्य का नाम विश्व मंच पर पहुँचाया है।

🥇राज्यवर्धन सिंह राठौड़

  • जैसलमेर के निशानेबाज राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने 2004 एथेंस ओलंपिक में डबल ट्रैप स्पर्धा में भारत का पहला व्यक्तिगत ओलंपिक रजत पदक जीता।
  • उन्होंने 2002 मैनचेस्टर व 2006 मेलबर्न राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक भी जीता; उन्हें पद्मश्री (2005) व खेल रत्न (2004-05) से सम्मानित किया गया, और बाद में वे केंद्रीय मंत्री भी रहे।

🥇देवेन्द्र झाझड़िया

  • चूरू के देवेन्द्र झाझड़िया भाला फेंक स्पर्धा में दो पैरालंपिक स्वर्ण पदक (एथेंस 2004 व रियो 2016) जीतने वाले प्रथम भारतीय पैरा-एथलीट हैं; उन्होंने टोक्यो 2020 में रजत पदक भी जीता।
  • उन्हें खेल रत्न (2017), अर्जुन पुरस्कार (2004) व पद्मभूषण (2022) से सम्मानित किया गया है, और वे वर्तमान में भारतीय पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष हैं।

🎯अवनि लेखरा

  • जयपुर की अवनि लेखरा ने टोक्यो 2020 पैरालंपिक में 10 मीटर एयर राइफल SH-1 में स्वर्ण और 50 मीटर राइफल 3 पोजीशन SH-1 में कांस्य जीता - एक ही पैरालंपिक में दो पदक जीतने वाली प्रथम भारतीय महिला बनकर; पेरिस 2024 में उन्होंने अपना स्वर्ण पदक बचाकर अपनी उपाधि बचाने वाली भारत की प्रथम पैरा-एथलीट बनने का गौरव हासिल किया।
  • उन्हें खेल रत्न (2021) व पद्मश्री (2022) से सम्मानित किया गया; उन्होंने टोक्यो में 249.6 व पेरिस में 249.7 अंकों के लगातार पैरालंपिक रिकॉर्ड बनाए।

🥉मोना अग्रवाल

  • सीकर की मोना अग्रवाल ने पेरिस 2024 पैरालंपिक में महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल SH-1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, 2025 में खेलो इंडिया पैरा गेम्स में स्वर्ण जोड़ा, और 2024 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला।

🏹सुंदर सिंह गुर्जर

  • करौली के सुंदर सिंह गुर्जर ने टोक्यो 2020 व पेरिस 2024 दोनों पैरालंपिक में भाला फेंक (F-46) स्पर्धा में कांस्य पदक जीता, और 2023 एशियाई पैरा गेम्स (हांगझोऊ) में स्वर्ण पदक हासिल किया।

🏸कृष्णा नागर

  • जयपुर के कृष्णा नागर ने टोक्यो 2020 पैरालंपिक में पुरुष एकल SH6 पैरा-बैडमिंटन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, और 2021 में उन्हें खेल रत्न से सम्मानित किया गया।

🏸नितेश कुमार

  • चूरू जिले के बास कीर्तन गाँव में जन्मे (अब हरियाणा में बसे, जहाँ वे बैडमिंटन कोच हैं) नितेश कुमार ने पेरिस 2024 पैरालंपिक में पुरुष एकल SL-3 पैरा-बैडमिंटन स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता, और 2024 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार मिला।

🏹लिम्बाराम

  • तीरंदाज लिम्बाराम ने 1992 के बीजिंग एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप में विश्व रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए व्यक्तिगत स्वर्ण जीता; उन्होंने 1989 के बीजिंग एशिया कप व 1995 की दिल्ली राष्ट्रमंडल तीरंदाजी प्रतियोगिता में टीम स्वर्ण व व्यक्तिगत रजत भी हासिल किया।

🏹रजत चौहान

  • कंपाउंड तीरंदाज रजत चौहान ने 2015 कोपेनहेगन विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप में व्यक्तिगत रजत जीतकर मिश्रित तीरंदाजी में व्यक्तिगत पदक पाने वाले प्रथम भारतीय बने; उन्होंने 2014 इंचियोन एशियाई खेलों में स्वर्ण व 2018 जकार्ता में रजत भी जीता।

🥇बजरंगलाल टाखर

  • सीकर के बजरंगलाल टाखर ने 2010 गुआंगझोऊ एशियाई खेलों में भारत का पहला व्यक्तिगत स्वर्ण जीता; उन्होंने 2006 दोहा में रजत व 2014 इंचियोन में कांस्य भी जीता, और उन्हें अर्जुन पुरस्कार (2008) व पद्मश्री (2013) मिला।

🥇कृष्णा पूनिया

  • चक्का फेंक खिलाड़ी कृष्णा पूनिया ने 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण तथा 2006 दोहा व 2010 गुआंगझोऊ एशियाई खेलों में कांस्य जीता; उन्हें अर्जुन पुरस्कार (2010) व पद्मश्री (2011) मिला।
  • अपने पति वीरेन्द्र पूनिया से प्रशिक्षण पाने वाली कृष्णा पूनिया बाद में सादुलपुर से विधायक रहीं और 2022-23 में राजस्थान खेल परिषद की अध्यक्ष बनीं।

🐎दिव्यकृति सिंह

  • नागौर की दिव्यकृति सिंह ने 2022 हांगझोऊ एशियाई खेलों में इक्वेस्ट्रियन ड्रेसाज टीम स्पर्धा में स्वर्ण जीता, और इक्वेस्ट्रियन खेल में अर्जुन पुरस्कार (2023) पाने वाली प्रथम भारतीय महिला बनीं।

🎯अपूर्वी चंदेला

  • जयपुर की अपूर्वी चंदेला ने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में 2014 ग्लासगो व 2018 गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण तथा 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में कांस्य जीता; उन्होंने रियो 2016 व टोक्यो 2020 दोनों ओलंपिक में भाग लिया।

🎯माहेश्वरी चौहान व अनंतजीत सिंह नरूका

  • जालौर की माहेश्वरी चौहान व जयपुर के अनंतजीत सिंह नरूका की स्कीट निशानेबाजी जोड़ी ने पेरिस 2024 ओलंपिक की मिश्रित टीम स्पर्धा में चौथा स्थान पाया, और बाद में साथ मिलकर राष्ट्रीय स्कीट मिश्रित टीम खिताब भी जीता।

🎯भीमसिंह व भुवनेश्वरी कुमारी (कोटा)

  • कोटा के अंतिम महाराजा भीमसिंह ने 1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक व 1978 बैंकॉक एशियाई खेलों में भारत की ओर से निशानेबाजी की और 1971 में अर्जुन पुरस्कार पाया; उनकी पुत्री भुवनेश्वरी कुमारी ने परिवार की इस निशानेबाजी विरासत को आगे बढ़ाया।

🏆भुवनेश्वरी कुमारी (अलवर) - स्क्वैश चैंपियन

  • अलवर की स्क्वैश खिलाड़ी भुवनेश्वरी कुमारी ने लगातार सोलह वर्षों (1977-1992) तक राष्ट्रीय महिला स्क्वैश चैंपियनशिप जीतकर अनूठा कीर्तिमान बनाया; उन्हें 1982 में अर्जुन पुरस्कार मिला।

♟️अभिजीत गुप्ता - शतरंज ग्रैंडमास्टर

  • भीलवाड़ा के अभिजीत गुप्ता 2008 में विश्व जूनियर शतरंज चैंपियनशिप जीतकर ग्रैंडमास्टर बने; वे राष्ट्रमंडल शतरंज चैंपियनशिप पाँच बार (2013-2019) जीतने वाले प्रथम खिलाड़ी हैं और उन्हें 2013 में अर्जुन पुरस्कार मिला।

🏏सलीम दुर्रानी

  • अफगानिस्तान के काबुल में जन्मे सलीम दुर्रानी ने 1956 से 1978 तक राजस्थान की ओर से प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेला और 1961 में अर्जुन पुरस्कार पाने वाले प्रथम क्रिकेटर बने।
  • 2011 में बीसीसीआई ने उन्हें सी.के. नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया।

🏏दीपक चाहर व रवि विश्नोई

  • राजस्थान के क्रिकेटर दीपक चाहर अंतरराष्ट्रीय टी-20 क्रिकेट में हैट्रिक लेने वाले प्रथम भारतीय बने और जनवरी 2020 में आईसीसी पर्फॉर्मेंस ऑफ द ईयर पुरस्कार जीता; राजस्थान के ही स्पिनर रवि विश्नोई को आईसीसी टीम ऑफ द ईयर 2023 में स्थान मिला।

🥊सागरमल थायल - मुक्केबाजी प्रशिक्षक

  • पाँच बार के राष्ट्रीय चैंपियन मुक्केबाज सागरमल थायल ने 1992 बैंकॉक एशियाई ओलंपिक मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता; बाद में उन्होंने मैरी कॉम व सरिता देवी सहित भारत की महिला मुक्केबाजी टीम को प्रशिक्षित किया और 2016 में द्रोणाचार्य पुरस्कार पाया।

🏊रीमा दत्ता - राजस्थान की 'जलपरी'

  • अजमेर में जन्मी तैराक रीमा दत्ता, जिन्हें राजस्थान की 'जलपरी' कहा जाता है, ने 1960-70 के दशक में राष्ट्रीय तैराकी में दबदबा बनाया और 1966 में अर्जुन पुरस्कार पाने वाली देश की प्रथम महिला तैराक बनीं।

🏑राजस्थान की हॉकी रानियाँ

  • गंगोत्री भंडारी के नेतृत्व में राज्य महिला हॉकी टीम ने पाँच राष्ट्रीय खिताब जीते और 1981 एशियाई चैंपियनशिप व 1982 दिल्ली एशियाड में स्वर्ण पदक हासिल किया; वर्षा सोनी ने 1980 मास्को ओलंपिक व स्वर्ण विजेता 1982 एशियाड टीम में भारत का प्रतिनिधित्व किया और 1981 में अर्जुन पुरस्कार पाया।

🏊भक्ति शर्मा व सुरभि मिश्रा

  • उदयपुर की भक्ति शर्मा 32 किलोमीटर लंबी इंग्लिश चैनल तैरकर पार करने वाली राजस्थान की प्रथम महिला बनीं और उन्हें 2011 में तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार मिला; जयपुर की 'स्क्वैश सेंसेशन' सुरभि मिश्रा ने आगे चलकर विश्व चैंपियनशिप में भारत की जूनियर राष्ट्रीय स्क्वैश टीमों को प्रशिक्षित किया।

🗺️राजस्थान के खिलाड़ी - हर खेल में

  • अपने बड़े नामों से परे, राजस्थान ने लगभग हर खेल में खिलाड़ियों की पीढ़ियाँ दी हैं - क्रिकेट में हनुमंत सिंह व पार्थसारथी शर्मा, हॉकी में दलजिंदर सिंह, फुटबॉल में प्रहलाद सिंह, वॉलीबॉल में सुरेश मिश्रा, कुश्ती में रामपाल जैसे पहलवान और पोलो में रावराजा हनूत सिंह - इन सबने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व किया।

📊राजस्थान के ओलंपिक व पैरालंपिक पदक विजेता — एक नज़र में

खिलाड़ीस्पर्धावर्षपदकगृह जिला
राज्यवर्धन सिंह राठौड़डबल ट्रैप शूटिंग2004 एथेंसरजत (ओलंपिक)जैसलमेर
देवेन्द्र झाझड़ियाभाला फेंक (पैरा)2004 एथेंस, 2016 रियो, 2020 टोक्योस्वर्ण, स्वर्ण, रजतचूरू
अवनि लेखरा10m एयर राइफल / 50m राइफल 3P (पैरा)2020 टोक्यो, 2024 पेरिसस्वर्ण+कांस्य, स्वर्णजयपुर
मोना अग्रवाल10m एयर राइफल (पैरा)2024 पेरिसकांस्यसीकर
सुंदर सिंह गुर्जरभाला फेंक F-46 (पैरा)2020 टोक्यो, 2024 पेरिसकांस्य, कांस्यकरौली
कृष्णा नागरबैडमिंटन SH6 (पैरा)2020 टोक्योस्वर्णजयपुर
नितेश कुमारबैडमिंटन SL-3 (पैरा)2024 पेरिसस्वर्णचूरू
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साहित्यकार, समाजसेवी व सार्वजनिक जीवन

Writers, Reformers & Public Figures

मुख्यमंत्री और संवैधानिक पदाधिकारी, वैज्ञानिक और समाज सुधारक, पत्रकार और कलाकार - आधुनिक राजस्थान के सार्वजनिक जीवन, शिक्षा और विवेक के निर्माता।

🏛️मोहनलाल सुखाड़िया - 'आधुनिक राजस्थान का निर्माता'

  • 1916 में नाथद्वारा में जन्मे मोहनलाल सुखाड़िया 1954 से 1971 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे - राज्य के इतिहास का सबसे लंबा कार्यकाल - और भूमि सुधार व पंचायती राज व्यवस्था लागू करने के कारण उन्हें 'आधुनिक राजस्थान का निर्माता' कहा जाता है।

🗳️टीकाराम पालीवाल - प्रथम निर्वाचित मुख्यमंत्री

  • 1907 में दौसा जिले में जन्मे टीकाराम पालीवाल राजस्थान के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री थे, जिन्हें भूमि सुधारों के अग्रदूत तथा नवगठित राज्य में डकैती व अराजकता पर अंकुश लगाने के लिए याद किया जाता है।

🗳️जगन्नाथ पहाड़िया

  • भरतपुर के भुसावर में जन्मे जगन्नाथ पहाड़िया जून 1980 से जुलाई 1981 तक राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे; उनका निधन मई 2021 में हुआ।

🏛️शोभाराम कुमावत - मत्स्य संघ के प्रथम प्रधानमंत्री

  • अलवर प्रजामंडल से जुड़े अलवर निवासी शोभाराम कुमावत 18 मार्च 1948 को मत्स्य संघ के प्रधानमंत्री बने, और बाद में राजस्थान के सहकारी आंदोलन के अध्ययन हेतु गठित समिति की अध्यक्षता की।

📰करपूरचंद कुलिश

  • टोंक के सोडा गाँव के पत्रकार करपूरचंद कुलिश ने 'राजस्थान पत्रिका' समाचारपत्र की स्थापना की और ग्रामीण जीवन पर आधारित लेखमाला 'मैं देखता चला गया' लिखी; उनके सम्मान में 2012 में डाक टिकट जारी किया गया।

🔬डॉ. दौलतसिंह कोठारी

  • उदयपुर के भौतिकशास्त्री डॉ. दौलतसिंह कोठारी, जो श्वेत वामन तारों व परमाणु आयनीकरण पर अपने कार्य के लिए विख्यात हैं, 1948 में डीआरडीओ के संस्थापक अध्यक्ष बने और 1964-66 में प्रथम राष्ट्रीय शिक्षा आयोग (कोठारी आयोग) की अध्यक्षता की।

🎓मोहनसिंह मेहता

  • भीलवाड़ा में जन्मे शिक्षाविद् मोहनसिंह मेहता ने उदयपुर में 'सेवामंदिर' संस्था की स्थापना की, राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति रहे, और 1969 में उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया।

🎻कोमल कोठारी - लोक-संस्कृति विशेषज्ञ

  • 1929 में चित्तौड़गढ़ के कपासन कस्बे में जन्मे कोमल कोठारी ने राजस्थान की लोक-कलाओं के दस्तावेजीकरण हेतु 1960 में जोधपुर के बोरुंदा में 'रूपायन संस्थान' की स्थापना की; उन्हें पद्मश्री (1983) व पद्मभूषण (2004) से सम्मानित किया गया।

🏵️प्रतिभा पाटिल - राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल

  • महाराष्ट्र के जलगाँव में जन्मी प्रतिभा पाटिल सीकर के शेखावत परिवार में विवाहित हुईं, 1985-90 तक राज्यसभा सदस्य रहीं, और 2004-07 में राजस्थान की प्रथम महिला राज्यपाल बनने के बाद देश की प्रथम महिला राष्ट्रपति चुनी गईं।

🏛️जगदीप धनखड़ - उपराष्ट्रपति

  • झुंझुनूं निवासी जगदीप धनखड़ भारत के 14वें उपराष्ट्रपति रहे।

🕉️संत मावजी - 'निष्कलंक अवतार'

  • 1727 में डूंगरपुर के सबला में जन्मे संत मावजी ने लगभग 12 वर्ष की आयु में स्वयं को भगवान विष्णु के भावी 'कल्कि' अवतार के रूप में घोषित किया; उन्हें 'निष्कलंक अवतार' के रूप में भी पूजा जाता है।

⚖️डॉ. नागेन्द्र सिंह - अंतरराष्ट्रीय न्यायालय

  • डूंगरपुर राजपरिवार के डॉ. नागेन्द्र सिंह अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में दो कार्यकाल (1972-81, 1981-88) रहे और 1988 में इसके मुख्य न्यायाधीश रहते निधन हुआ; उन्होंने 'The Theory of Force in Hindu Polity' पुस्तक लिखी।

📜हरविलास शारदा - बाल विवाह सुधारक

  • अजमेर निवासी हरविलास शारदा अप्रैल 1930 में लागू हुए बाल विवाह निरोधक अधिनियम के प्रमुख शिल्पकार थे, जो एक ऐतिहासिक सामाजिक सुधार कानून बना।

✊अरुणा रॉय - सूचना अधिकार आंदोलन

  • अजमेर के तिलोनिया स्थित सोशल वर्क एंड रिसर्च सेंटर से जुड़ीं अरुणा रॉय ने मजदूर किसान शक्ति संगठन की स्थापना की और 6 अप्रैल 1995 को ब्यावर से सूचना का अधिकार आंदोलन शुरू किया, जिसके परिणामस्वरूप 2005 में आरटीआई अधिनियम बना।
  • वे रेमन मैग्सेसे पुरस्कार पाने वाली राजस्थान की प्रथम महिला बनीं।

🐅कैलाशसिंह सांखला - 'टाइगर मैन'

  • जोधपुर में 1925 में जन्मे पद्मश्री विजेता कैलाशसिंह सांखला ने भारत के 'प्रोजेक्ट टाइगर' की अगुवाई की और 'टाइगर मैन' के रूप में प्रसिद्ध हुए; उनकी पुस्तक 'टाइगर' कई भाषाओं में अनूदित हुई।

📈अरविंद व अशोक पानगड़िया

  • जयपुर के अर्थशास्त्री अरविंद पानगड़िया जनवरी 2015 में नीति आयोग के प्रथम उपाध्यक्ष नियुक्त हुए और उन्होंने 'India: The Emerging Giant' पुस्तक लिखी; उनके भाई, जयपुर के प्रख्यात न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अशोक पानगड़िया का निधन 2021 में हुआ।

💧श्री कँवरसेन - इंदिरा गांधी नहर के अभियंता

  • बीकानेर राज्य के अभियंता श्री कँवरसेन (1899-1979), जिन्होंने इंदिरा गांधी नहर परियोजना की योजना बनाई, 1956 में पद्मभूषण पाने वाले राजस्थान के प्रथम व्यक्ति बने।

🏭घनश्यामदास बिड़ला

  • 1894 में झुंझुनूं के पिलानी में जन्मे उद्योगपति घनश्यामदास बिड़ला ने भारतीय उद्योग जगत में अग्रणी भूमिका निभाई, स्वतंत्रता संग्राम को आर्थिक सहयोग दिया, हिन्दुस्तान टाइम्स समूह की स्थापना की, और 1961 में उन्हें पद्मविभूषण मिला।

💳राजीव महर्षि - भामाशाह योजना के शिल्पकार

  • जयपुर के राजीव महर्षि ने 2009 में राजस्थान के वित्त सचिव रहते हुए बायोमेट्रिक 'भामाशाह' कार्ड की अवधारणा दी - जो आधार का पूर्ववर्ती था - बाद में भारत के 13वें नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक बने और 2022 में उन्हें पद्मभूषण मिला।

🕉️आचार्य तुलसी व आचार्य नानेश मुनि

  • आचार्य तुलसी ने नैतिक संयम को बढ़ावा देने वाले अणुव्रत आंदोलन की स्थापना की, जबकि आचार्य नानेश मुनि समानता पर आधारित संबंधित 'समता दर्शन' से जुड़े हैं।

📖मुनि जिन विजय - विद्वान

  • 1888 में भीलवाड़ा के रूपाहेली में जन्मे किशनसिंह, जिन्हें मुनि जिन विजय के नाम से जाना जाता है, ने 1950 में जोधपुर में 'राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान' तथा चित्तौड़गढ़ में 'सर्वोदय साधना आश्रम' की स्थापना की।

🧵रूमा देवी - हस्तशिल्प कारीगर

  • 1988 में बाड़मेर के रावतसर में जन्मीं रूमा देवी हस्तशिल्प कढ़ाई के जरिए महिला सशक्तिकरण की प्रतीक बनीं; उन्हें 2019 में नारी शक्ति पुरस्कार मिला और 2020 में उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय में कढ़ाई पर व्याख्यान दिया।
  • वे बाड़मेर स्थित एनजीओ 'ग्रामीण विकास एवं चेतना संस्थान' की प्रमुख हैं, और 2019 में वर्ल्ड सीएसआर कांग्रेस ने उन्हें 51 सर्वाधिक प्रभावशाली नवोन्मेषकों में शामिल किया।

💧जल-योद्धा: लक्ष्मणसिंह व श्यामसुंदर पालीवाल

  • दूदू के लापोड़िया गाँव के लक्ष्मणसिंह को जल संरक्षण की 'चौका पद्धति' से तालाबों व चरागाहों के पुनर्जीवन हेतु 2023 में पद्मश्री मिला; श्यामसुंदर पालीवाल को सामाजिक सेवा हेतु 2021 में पद्मश्री प्राप्त हुआ।

🤝मूलचंद लोढ़ा - समाजसेवी

  • डूंगरपुर के मूलचंद लोढ़ा को 2023 में 'जागरण जन सेवा मंडल' के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा व कल्याण सेवाओं के लिए पद्मश्री प्रदान किया गया।

🌟पायल जांगिड़ व चित्रांगदा सिंह

  • अलवर की पायल जांगिड़ को अमेरिका में बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन से 'चेंज मेकर अवॉर्ड' मिला, वहीं फिल्म अभिनेत्री चित्रांगदा सिंह राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय पर्दे पर ले जाती हैं।

🏅हालिया सम्मान: पद्मश्री 2025 व अन्य

  • राजस्थान के 2025 पद्मश्री सम्मान बैजनाथ महाराज (आध्यात्मिकता), बेगम बैतूल (कला) व शिव किशन बिस्सा 'शीन काफ निजाम' (साहित्य व शिक्षा) को मिले।
  • इसके अलावा राजस्थान निवासी वैद्य ताराचंद शर्मा को राष्ट्रीय धन्वंतरि आयुर्वेद पुरस्कार (2024-25) तथा सड़क दुर्घटना प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण देने वाली संस्था 'सहायता' ट्रस्ट की संस्थापक डॉ. माया टंडन को 2024 में पद्मश्री मिला।