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District GK · RAS Prelims

भरतपुर जिला

Bharatpur District · Rajasthan

🏛️ भरतपुर संभाग📐 5,066 km²👥 25,48,462

📊 एक नज़र में

संभागभरतपुर
क्षेत्रफल5,066 km²
जनसंख्या (2011)25,48,462
साक्षरता दर70.11%
लिंगानुपात877

⭐ प्रसिद्ध है

भरतपुर अपने केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना पक्षी विहारUNESCO Heritage 1985) के लिए विश्व प्रसिद्ध है — यहाँ 370+ पक्षी प्रजातियाँ पाई जाती हैंलोहागढ़ दुर्ग (जिसने 1805 में लॉर्ड लेक के आक्रमण झेले)डीग के जलमहलबयाना के कुषाणकालीन अवशेषउषा मंदिर (बयाना)गंगा मंदिर एवं बांकेबिहारी मंदिर प्रमुख दर्शनीय स्थल हैंडीग के जलमहल जयपुर के सिटी पैलेस से भी पहले बने थेयहाँ की जाट-शैली की कुश्ती (दंगल) और भरतपुर का दूध-मक्खन प्रसिद्ध हैगोपालगढ़ का गुड़

इतिहास

भरतपुर रियासत की स्थापना 1722 में महाराजा बदन सिंह ने की। उनके पुत्र महाराजा सूरजमल, जिन्हें "जाटों का प्लेटो" कहा जाता है, ने राज्य का विस्तार किया और 1732 में लोहागढ़ दुर्ग का निर्माण शुरू करवाया। सूरजमल ने 1761 में आगरा पर अधिकार किया; 1763 में उनकी मृत्यु हो गई (दिल्ली पर स्थायी अधिकार नहीं हुआ)। लोहागढ़ दुर्ग ने 1805 में लॉर्ड लेक के 4 आक्रमणों को विफल कर दिया, पर 1826 में अंग्रेजों ने इसे जीत लिया। 1857 के विद्रोह में महाराजा जसवंत सिंह ने अंग्रेजों का साथ दिया। 1948 में भरतपुर रियासत मत्स्य संघ में शामिल हुई और 1949 में राजस्थान में विलय हुआ। बयाना के कुषाण शिलालेख इस क्षेत्र की प्राचीनता दर्शाते हैं।

भूगोल

भरतपुर जिला राजस्थान के पूर्वी भाग में स्थित है तथा यह "राजस्थान का प्रवेश द्वार" कहलाता है। उत्तर में हरियाणा (मेवात), पूर्व में उत्तर प्रदेश (मथुरा, आगरा), दक्षिण में धौलपुर एवं करौली, तथा पश्चिम में अलवर एवं दौसा से सीमा बनाता है। कुल क्षेत्रफल लगभग 5,066 वर्ग किमी है। यह जिला मुख्यतः समतल मैदानी क्षेत्र है — गंगा-यमुना की उपजाऊ जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है। मुख्य नदियाँ बाणगंगा, गंभीरी, रूपारेल और चंबल (दक्षिणी सीमा) हैं। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (UNESCO World Heritage Site) यहाँ स्थित है, जो प्रवासी पक्षियों के लिए विश्व प्रसिद्ध है (साइबेरियन क्रेन ऐतिहासिक रूप से यहाँ आते थे, पर 2002 के बाद से नहीं आ रहे)। जलवायु अर्ध-शुष्क उपोष्णकटिबंधीय है।

अर्थव्यवस्था

भरतपुर की अर्थव्यवस्था कृषि (विशेषकर सरसों) पर आधारित है, और यह क्षेत्र तिलहन उत्पादन के लिए जाना जाता है। केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान के कारण पर्यटन तथा कुछ लघु उद्योग भी आय के स्रोत हैं।

📋 परीक्षा के लिए मुख्य तथ्य

  • •केवलादेव 370+ पक्षी प्रजातियां
  • •सरसों उत्पादन अग्रणी
  • •मत्स्य संघ सदस्य
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