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REET L1+L2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

पावलव का अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत (Classical Conditioning)

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यह पेज इवान पावलव के 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) सिद्धांत — कुत्ते व घंटी के प्रसिद्ध प्रयोग तथा उससे जुड़ी शब्दावली (UCS, UCR, CS, CR, विलोपन, सामान्यीकरण) — को सरल हिंदी में समझाता है। यह REET के CDP खंड का एक मूल टॉपिक है।

  • REET 2024 में इस टॉपिक से सीधा प्रश्न नहीं आया
  • शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Classical Conditioning: How It Works – Simply Psychology

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 के 930 डिजिटाइज़ किए गए प्रश्नों में पावलव के सिद्धांत से सीधा कोई प्रश्न नहीं आया, लेकिन 'अधिगम के सिद्धांत' आधिकारिक CDP पाठ्यक्रम का प्रमुख भाग हैं, इसलिए आगामी परीक्षाओं में इससे प्रश्न पूछे जाने की पूरी संभावना है। पाठ्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार इस टॉपिक से मुख्यतः कुत्ते-घंटी प्रयोग की पहचान, UCS/UCR/CS/CR की शब्दावली, तथा विलोपन व सामान्यीकरण जैसी अवधारणाओं पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

पावलव कौन थे?

इवान पावलव (Ivan Pavlov) रूसी शरीरक्रिया वैज्ञानिक (physiologist) थे, जिन्होंने कुत्तों पर पाचन-क्रिया के प्रयोगों के दौरान संयोगवश 'शास्त्रीय अनुबंधन' (Classical Conditioning) की खोज की — इसे 'अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत' (Conditioned Response Theory) भी कहा जाता है।

मूल रूप से पावलव लार-स्राव व पाचन-तंत्र की क्रिया का अध्ययन कर रहे थे। प्रयोग के दौरान उन्होंने देखा कि कुत्ते कुछ समय बाद भोजन देखने से पहले ही, केवल परिचारक के कदमों की आवाज़ सुनकर लार टपकाने लगते हैं — इसी संयोगवश हुए अवलोकन ने उन्हें सीखने की एक नई प्रक्रिया की खोज की ओर प्रेरित किया, जिसे आगे चलकर व्यवस्थित प्रयोगों से 'शास्त्रीय अनुबंधन' के रूप में स्थापित किया गया।

कुत्ते व घंटी का प्रयोग

पावलव ने देखा कि कुत्ते को भोजन देखते ही उसके मुँह से लार टपकने लगती है — यह एक स्वाभाविक, बिना सीखी हुई प्रतिक्रिया है। उन्होंने भोजन देने से ठीक पहले एक घंटी बजानी शुरू की। शुरुआत में घंटी अकेले कुत्ते में लार नहीं टपकाती थी, क्योंकि वह एक तटस्थ (neutral) उद्दीपन थी।

भोजन और घंटी को बार-बार साथ प्रस्तुत करने के बाद, कुत्ता अकेली घंटी की आवाज़ सुनकर भी लार टपकाने लगा — अर्थात एक तटस्थ उद्दीपन (घंटी) ने अनुकूलन (सीखने) के द्वारा प्रतिक्रिया उत्पन्न करने की क्षमता प्राप्त कर ली, जो पहले उसमें नहीं थी।

शास्त्रीय अनुबंधन की मुख्य शब्दावली

अस्वाभाविक/स्वाभाविक उद्दीपन (Unconditioned Stimulus, UCS)
भोजन — जो बिना सीखे स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रिया देता है[स्रोत 1]
स्वाभाविक अनुक्रिया (Unconditioned Response, UCR)
भोजन देखकर लार टपकना — बिना सीखी हुई स्वाभाविक प्रतिक्रिया[स्रोत 1]
अनुकूलित उद्दीपन (Conditioned Stimulus, CS)
घंटी — मूलतः तटस्थ, पर बार-बार भोजन के साथ जोड़े जाने पर प्रतिक्रिया देने लगी[स्रोत 1]
अनुकूलित अनुक्रिया (Conditioned Response, CR)
केवल घंटी सुनकर लार टपकना — सीखी हुई प्रतिक्रिया[स्रोत 1]

अन्य महत्वपूर्ण अवधारणाएँ

अवधारणाअर्थ
विलोपन (Extinction)यदि अनुकूलित उद्दीपन (घंटी) को बार-बार भोजन के बिना प्रस्तुत किया जाए, तो अनुकूलित अनुक्रिया (लार टपकना) धीरे-धीरे कमज़ोर होकर समाप्त हो जाती है
स्वतःस्फूर्त पुनःप्राप्ति (Spontaneous Recovery)विलोपन के बाद कुछ समय के विश्राम पश्चात, अनुकूलित उद्दीपन (घंटी) पुनः प्रस्तुत करने पर अनुकूलित अनुक्रिया (कमज़ोर रूप में ही सही) फिर से प्रकट हो सकती है
सामान्यीकरण (Stimulus Generalization)अनुकूलित उद्दीपन से मिलती-जुलती अन्य उद्दीपनों (जैसे अलग स्वर की घंटी) पर भी वैसी ही प्रतिक्रिया देना
विभेदीकरण (Stimulus Discrimination)केवल विशिष्ट अनुकूलित उद्दीपन पर प्रतिक्रिया देना और मिलते-जुलते अन्य उद्दीपनों में अंतर कर पाना

स्रोत: Simply Psychology, पावलव के शास्त्रीय अनुबंधन प्रयोग पर आधारित।[स्रोत 1]

शिक्षक के लिए यह जानना क्यों ज़रूरी है

शास्त्रीय अनुबंधन सिखाता है कि विद्यालय, विषय या शिक्षक से जुड़े बार-बार के अनुभव बच्चे में स्वतः एक भावनात्मक प्रतिक्रिया बना देते हैं — भले ही वह प्रतिक्रिया कभी सीधे 'सिखाई' न गई हो। यदि कक्षा का माहौल बार-बार सुखद अनुभवों से जुड़ा हो, तो विद्यार्थी विषय के नाम मात्र से सकारात्मक भाव महसूस करने लगते हैं; इसके विपरीत, बार-बार डाँट या अपमान से जुड़ा विषय भय या तनाव का कारण बन सकता है।

इसलिए शिक्षक को यह समझना चाहिए कि उसका व्यवहार केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि विद्यार्थी के मन में विषय व विद्यालय के प्रति दीर्घकालिक भावनात्मक जुड़ाव भी बना रहा होता है, जो आगे चलकर उसकी सीखने की इच्छा व आत्मविश्वास को भी प्रभावित करता है।

कक्षा में इसका उपयोग

स्थितिशिक्षक के लिए संकेत
विद्यालय/विषय के प्रति सकारात्मक जुड़ाव बनानायदि कक्षा का माहौल बार-बार सुखद अनुभवों (प्रशंसा, रोचक गतिविधि) से जुड़ा हो, तो बच्चे स्वतः विद्यालय/विषय के नाम से ही सकारात्मक भाव अनुभव करने लगते हैं, जो सीखने में उनकी रुचि बढ़ाता है
परीक्षा भय (exam phobia) को समझनायदि परीक्षा बार-बार डर या शर्मिंदगी के अनुभवों से जुड़ी हो, तो 'परीक्षा' शब्द मात्र से ही चिंता जागने लगती है — यह नकारात्मक अनुबंधन का उदाहरण है, जिसे शिक्षक को सचेत रहकर टालना चाहिए और परीक्षा को सामान्य, कम-तनावपूर्ण अनुभव बनाने का प्रयास करना चाहिए
नियमित संकेत को गतिविधि से जोड़नाकिसी नियमित संकेत (जैसे घंटी या ताली) को हमेशा एक ही गतिविधि से जोड़ने पर बच्चे स्वतः उस संकेत पर अपेक्षित व्यवहार दिखाने लगते हैं, जिससे कक्षा-प्रबंधन आसान व सुव्यवस्थित होता है
नकारात्मक अनुबंधन को पहचानना व दूर करनायदि कोई विषय या गतिविधि किसी बच्चे में लगातार भय दिखाती है, तो उसे नए, सुखद व सफल अनुभवों से धीरे-धीरे दोबारा जोड़कर पुरानी नकारात्मक प्रतिक्रिया को कमज़ोर किया जा सकता है, जिससे समय के साथ बच्चे का आत्मविश्वास लौट सकता है

परीक्षा टिप

याद रखें: भोजन व लार टपकना — दोनों 'स्वाभाविक/Unconditioned' हैं (सीखे बिना होते हैं); घंटी व घंटी सुनकर लार टपकना — दोनों 'अनुकूलित/Conditioned' हैं (सीखने से बनते हैं)। परीक्षा में अक्सर UCS-UCR और CS-CR को उलट कर पूछा जाता है, इसलिए ध्यान से पढ़ें कि प्रश्न में 'पहले से मौजूद स्वाभाविक' या 'सीखी हुई' प्रतिक्रिया पूछी जा रही है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

पावलव ने अपना प्रसिद्ध प्रयोग किस जानवर पर किया?

  1. Aकुत्ता
  2. Bचूहा
  3. Cकबूतर
  4. Dबिल्ली

व्याख्या

पावलव ने कुत्तों पर पाचन-क्रिया के प्रयोगों के दौरान शास्त्रीय अनुबंधन की खोज की।

प्रश्न 2

पावलव के प्रयोग में 'भोजन' किसका उदाहरण है?

  1. Aविलोपन
  2. Bअनुकूलित उद्दीपन (CS)
  3. Cस्वाभाविक उद्दीपन (UCS)
  4. Dअनुकूलित अनुक्रिया (CR)

व्याख्या

भोजन स्वाभाविक रूप से लार टपकाता है, इसलिए यह अस्वाभाविक/स्वाभाविक उद्दीपन (UCS) का उदाहरण है।

प्रश्न 3

घंटी की आवाज़ सुनकर लार टपकना किसका उदाहरण है?

  1. AUCS
  2. BCR
  3. CCS
  4. DUCR

व्याख्या

केवल घंटी सुनकर लार टपकना एक सीखी हुई प्रतिक्रिया है, इसलिए यह अनुकूलित अनुक्रिया (CR) कहलाती है।

प्रश्न 4

पावलव के सिद्धांत को क्या कहते हैं?

  1. Aप्रयास व त्रुटि सिद्धांत
  2. Bसूझ सिद्धांत
  3. Cक्रियाप्रसूत अनुबंधन
  4. Dशास्त्रीय अनुबंधन

व्याख्या

पावलव के सिद्धांत को शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) कहा जाता है।

प्रश्न 5

बार-बार बिना भोजन के घंटी बजाने पर लार टपकना बंद हो जाना, किस अवधारणा का उदाहरण है?

  1. Aसामान्यीकरण
  2. Bविभेदीकरण
  3. Cविलोपन
  4. Dस्वतःस्फूर्त पुनःप्राप्ति

व्याख्या

जब अनुकूलित उद्दीपन (घंटी) को बार-बार बिना UCS (भोजन) के प्रस्तुत किया जाता है, तो अनुकूलित अनुक्रिया धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है — इसे विलोपन कहते हैं।

प्रश्न 6

विलोपन के बाद विश्राम देकर पुनः घंटी बजाने पर कमज़ोर रूप में लार टपकना दोबारा दिखना, क्या कहलाता है?

  1. Aस्वतःस्फूर्त पुनःप्राप्ति
  2. Bविभेदीकरण
  3. Cनकारात्मक अनुबंधन
  4. Dसामान्यीकरण

व्याख्या

विलोपन के बाद कुछ समय के विश्राम पश्चात अनुकूलित अनुक्रिया के कमज़ोर रूप में पुनः प्रकट होने को स्वतःस्फूर्त पुनःप्राप्ति कहते हैं।

प्रश्न 7

कुत्ते का मिलती-जुलती अन्य घंटियों की आवाज़ पर भी लार टपकाना किसका उदाहरण है?

  1. Aविलोपन
  2. Bपुनर्बलन
  3. Cविभेदीकरण
  4. Dसामान्यीकरण

व्याख्या

मूल अनुकूलित उद्दीपन से मिलती-जुलती अन्य उद्दीपनों पर भी वैसी ही प्रतिक्रिया देना सामान्यीकरण कहलाता है।

प्रश्न 8

एक शिक्षक चाहता है कि बच्चे कक्षा के नाम से ही उत्साहित महसूस करें। पावलव के सिद्धांत के अनुसार इसका सबसे उपयुक्त तरीका क्या है?

  1. Aकक्षा का नाम बार-बार बदलना
  2. Bकक्षा को बार-बार सुखद व रोचक अनुभवों से जोड़ना
  3. Cकक्षा में कठोर अनुशासन रखना
  4. Dकक्षा को परीक्षा से जोड़ना

व्याख्या

शास्त्रीय अनुबंधन के अनुसार बार-बार सुखद अनुभवों से जुड़ाव कक्षा के नाम को ही एक सकारात्मक अनुकूलित उद्दीपन बना देता है।

प्रश्न 9

यदि कोई बच्चा बार-बार डाँट के साथ गणित पढ़ता आया है और अब केवल 'गणित' शब्द सुनकर ही डर जाता है, तो यह किसका उदाहरण है?

  1. Aविभेदीकरण
  2. Bसकारात्मक शास्त्रीय अनुबंधन
  3. Cनकारात्मक शास्त्रीय अनुबंधन
  4. Dप्रयास व त्रुटि सिद्धांत

व्याख्या

बार-बार डाँट के साथ जुड़ने के कारण 'गणित' शब्द भय का अनुकूलित उद्दीपन बन गया है — यह नकारात्मक अनुबंधन का उदाहरण है।

प्रश्न 10

शास्त्रीय अनुबंधन में तटस्थ उद्दीपन (जैसे घंटी) को अनुकूलित उद्दीपन बनने के लिए किसके साथ बार-बार जोड़ा जाता है?

  1. Aस्वाभाविक उद्दीपन (UCS) के साथ
  2. Bअनुकूलित अनुक्रिया के साथ
  3. Cदंड के साथ
  4. Dकेवल किसी अन्य तटस्थ उद्दीपन के साथ

व्याख्या

तटस्थ उद्दीपन को बार-बार स्वाभाविक उद्दीपन (UCS, जैसे भोजन) के साथ प्रस्तुत करने पर ही वह अनुकूलित उद्दीपन (CS) बनता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पावलव ने कौन-सा प्रयोग किया था?+

कुत्ते व घंटी का प्रयोग, जिसके ज़रिए उन्होंने शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) की खोज की, जो मूलतः पाचन-क्रिया के अध्ययन के दौरान संयोगवश सामने आई।

UCS और CS में क्या अंतर है?+

UCS (जैसे भोजन) स्वाभाविक रूप से प्रतिक्रिया देता है, जबकि CS (जैसे घंटी) मूलतः तटस्थ होता है और बार-बार UCS के साथ जोड़े जाने से सीखकर प्रतिक्रिया देने लगता है।

विलोपन (Extinction) क्या है?+

बार-बार बिना UCS (भोजन) के CS (घंटी) प्रस्तुत करने पर अनुकूलित अनुक्रिया (लार टपकना) का धीरे-धीरे कमज़ोर होकर समाप्त हो जाना।

REET में इस टॉपिक से किस तरह के प्रश्न पूछे जा सकते हैं?+

मुख्यतः कुत्ते-घंटी प्रयोग की पहचान, UCS/UCR/CS/CR की शब्दावली और विलोपन-सामान्यीकरण जैसी अवधारणाओं पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्न।

पावलव के सिद्धांत को क्या कहा जाता है?+

शास्त्रीय अनुबंधन (Classical Conditioning) या अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धांत।

सामान्यीकरण और विभेदीकरण में क्या अंतर है?+

सामान्यीकरण में जीव मिलती-जुलती उद्दीपनों पर भी वैसी ही प्रतिक्रिया देता है, जबकि विभेदीकरण में जीव केवल विशिष्ट अनुकूलित उद्दीपन पर प्रतिक्रिया देना सीखता है और मिलती-जुलती अन्य उद्दीपनों में अंतर कर पाता है।

पावलव और थार्नडाइक के सिद्धांतों में क्या अंतर है?+

पावलव का शास्त्रीय अनुबंधन एक तटस्थ उद्दीपन को स्वाभाविक उद्दीपन के साथ बार-बार जोड़ने पर आधारित है, जिसमें जीव अपेक्षाकृत निष्क्रिय रूप से प्रतिक्रिया देता है; जबकि थार्नडाइक का प्रयास व त्रुटि सिद्धांत जीव की सक्रिय क्रिया व उसके परिणाम (प्रभाव) पर आधारित है, जिसमें जीव स्वयं प्रयास करके सीखता है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. Classical Conditioning: How It Works – Simply Psychology

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए