थार्नडाइक का प्रयास एवं त्रुटि सिद्धांत (Trial and Error Theory)
यह पेज एडवर्ड थार्नडाइक के 'प्रयास व त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) — बिल्ली व पहेली-बक्सा प्रयोग तथा सीखने के तीन नियमों — को सरल हिंदी में समझाता है। REET के CDP खंड में अधिगम के सिद्धांतों से जुड़ा यह एक मूल टॉपिक है।
- REET 2024 में इस टॉपिक से सीधा प्रश्न नहीं आया
- शिक्षक-प्रशिक्षण स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 के 930 डिजिटाइज़ किए गए प्रश्नों में थार्नडाइक के सिद्धांत से सीधा कोई प्रश्न नहीं आया, लेकिन 'अधिगम के सिद्धांत' आधिकारिक CDP पाठ्यक्रम का प्रमुख भाग हैं, इसलिए आगामी परीक्षाओं में इससे प्रश्न पूछे जाने की पूरी संभावना है। पाठ्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार इस टॉपिक से मुख्यतः पहेली-बक्से के प्रयोग की पहचान, तीन नियमों (तत्परता, अभ्यास, प्रभाव) के अर्थ, और सिद्धांत के नाम ('संयोजनवाद'/Connectionism) पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
थार्नडाइक कौन थे?
एडवर्ड ली थार्नडाइक (Edward Lee Thorndike) अमेरिकी मनोवैज्ञानिक थे, जिन्होंने 'प्रयास व त्रुटि सिद्धांत' (Trial and Error Theory) प्रस्तुत किया, जिसे 'संयोजनवाद' (Connectionism) भी कहा जाता है। उनके अनुसार सीखना उद्दीपन (Stimulus) और अनुक्रिया (Response) के बीच बनने वाले संबंध (S-R Bond) पर आधारित है — यानी सीखना एक तरह का 'जोड़' बनाना है, न कि अचानक समझ (insight) से होने वाली घटना।
बिल्ली और पहेली-बक्सा (Puzzle Box) प्रयोग
थार्नडाइक ने एक भूखी बिल्ली को 'पहेली-बक्से' (puzzle box) में बंद किया, जिसके बाहर भोजन रखा था। बक्सा खोलने के लिए बिल्ली को अंदर लगी एक डोरी या लीवर दबाना होता था। शुरुआत में बिल्ली अनेक व्यर्थ प्रयास करती है — उछलना, खरोंचना, काटना — और संयोगवश ही सही क्रिया (लीवर दबाना) कर पाती है।
बार-बार प्रयासों के साथ बिल्ली की गलत क्रियाएँ धीरे-धीरे कम होती गईं और सही क्रिया करने में लगने वाला समय भी घटता गया — पहले प्रयास में जहाँ बक्से से बाहर निकलने में कई मिनट लगे, वहीं बाद के प्रयासों में समय कुछ सेकंड तक सिमट गया। इसी क्रमिक सुधार के आधार पर थार्नडाइक ने निष्कर्ष निकाला कि सीखना अचानक 'सूझ' से नहीं, बल्कि क्रमिक प्रयास व त्रुटि से होता है।
थार्नडाइक के सीखने के नियम (Laws of Learning)
| नियम | अर्थ |
|---|---|
| तत्परता का नियम (Law of Readiness) | सीखने के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से तत्पर (तैयार) होना आवश्यक है; बिना तत्परता के सीखना कठिन व असंतोषजनक होता है |
| अभ्यास का नियम (Law of Exercise) | जिस अनुक्रिया का अधिक अभ्यास/उपयोग होता है वह मज़बूत होती है (Law of Use), और जिसका उपयोग नहीं होता वह कमज़ोर पड़ जाती है (Law of Disuse) |
| प्रभाव का नियम (Law of Effect) | जिस अनुक्रिया के बाद संतोषजनक परिणाम (जैसे पुरस्कार) मिलता है, वह दोहराई जाने की संभावना बढ़ जाती है; असंतोषजनक परिणाम वाली अनुक्रिया कमज़ोर पड़ती है — यह थार्नडाइक का सबसे महत्वपूर्ण नियम माना जाता है |
स्रोत: Simply Psychology, थार्नडाइक के तीन नामित नियमों पर आधारित।[स्रोत 1]
मुख्य बिंदु
- सिद्धांत का नाम
- प्रयास व त्रुटि सिद्धांत (Trial and Error) / संयोजनवाद (Connectionism)
- मूल इकाई
- उद्दीपन-अनुक्रिया संबंध (S-R Bond)
- प्रमुख प्रयोग
- भूखी बिल्ली व पहेली-बक्सा (Puzzle Box)
- सबसे महत्वपूर्ण नियम
- प्रभाव का नियम (Law of Effect)
- सिद्धांत की प्रकृति
- यह एक व्यवहारवादी (Behaviourist) सिद्धांत है, जो बाहरी रूप से देखे जा सकने वाले व्यवहार व उसके परिणाम पर केंद्रित है
शिक्षक के लिए यह जानना क्यों ज़रूरी है
थार्नडाइक का सिद्धांत यह स्पष्ट करता है कि विद्यार्थियों को गलतियाँ करने और उनसे सीखने का अवसर देना सीखने की स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा है — बार-बार सही उत्तर बताकर 'शॉर्टकट' देने से गहरी समझ नहीं बनती। साथ ही, यह सिद्धांत बताता है कि केवल दोहराव (rote repetition) पर्याप्त नहीं है; जब तक सही अनुक्रिया के बाद संतोषजनक परिणाम (प्रशंसा, अंक, सफलता का अनुभव) न मिले, तब तक अभ्यास का असर सीमित रहता है।
इसलिए कक्षा में फीडबैक देने का तरीका सीखने की गुणवत्ता तय करता है — सही प्रयास पर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया देना, और गलत प्रयास पर बिना अपमानित किए सुधार का मार्ग दिखाना, थार्नडाइक के 'प्रभाव के नियम' का व्यावहारिक अनुप्रयोग है।
थार्नडाइक का सिद्धांत एक व्यवहारवादी दृष्टिकोण है, जिसमें सीखने को बाहर से देखे जा सकने वाले व्यवहार व उसके परिणाम के रूप में समझा जाता है, न कि केवल आंतरिक मानसिक प्रक्रिया के रूप में। यही कारण है कि इसे बाद में स्किनर जैसे व्यवहारवादियों के काम की नींव भी माना जाता है, जिन्होंने पुरस्कार व दंड के प्रभाव को और गहराई से अध्ययन किया।
कक्षा में इसका उपयोग
| स्थिति | शिक्षक के लिए संकेत |
|---|---|
| नया कौशल सिखाना (जैसे लिखना, गणित की विधि) | बच्चों को प्रयास करने दें और गलतियों से सीखने का अवसर दें; सही अभ्यास पर सकारात्मक प्रतिक्रिया (प्रशंसा/अंक) दें ताकि 'प्रभाव का नियम' काम करे |
| नई विधि पढ़ाने से पहले | सुनिश्चित करें कि बच्चे शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार हैं (तत्परता का नियम) — थकान या रुचि की कमी में नई अवधारणा न दें |
| अभ्यास कार्य (practice work) देना | केवल दोहराव पर्याप्त नहीं — सही प्रतिक्रिया के साथ पुरस्कार/प्रतिपुष्टि (feedback) दें, तभी अभ्यास असरदार बनेगा |
| बार-बार गलती करने वाले विद्यार्थी को संभालना | गलती पर लज्जित करने के बजाय सही तरीका स्पष्ट रूप से दिखाएँ और अगला सही प्रयास होते ही तुरंत सराहें, ताकि 'गलत' अनुक्रिया धीरे-धीरे कमज़ोर पड़े व सही अनुक्रिया मज़बूत हो |
परीक्षा टिप
तीनों नियमों को याद रखने का क्रम — 'त-अ-प्र' (तत्परता → अभ्यास → प्रभाव)। ध्यान रखें: थार्नडाइक का प्रयोग बिल्ली और पहेली-बक्से पर था, न कि कुत्ते पर (कुत्ते का प्रयोग पावलव से जुड़ा है) — परीक्षा में यह भ्रम अक्सर बनाया जाता है, इसलिए दोनों प्रयोगों को अलग-अलग याद रखें।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
थार्नडाइक का प्रसिद्ध प्रयोग किस पर आधारित था?
- Aकबूतर व लीवर
- Bबंदर व केला
- Cकुत्ता व घंटी
- Dभूखी बिल्ली व पहेली-बक्सा
व्याख्या
थार्नडाइक ने भूखी बिल्ली को पहेली-बक्से में बंद कर उसके प्रयास व त्रुटि से सीखने की प्रक्रिया का अध्ययन किया।
प्रश्न 2
थार्नडाइक के अनुसार सीखने की मूल इकाई क्या है?
- Aसूझ (Insight)
- Bउद्दीपन-अनुक्रिया संबंध (S-R Bond)
- Cअनुकरण (Imitation)
- Dप्रेरणा (Motivation)
व्याख्या
थार्नडाइक के संयोजनवाद सिद्धांत के अनुसार सीखना उद्दीपन व अनुक्रिया के बीच बनने वाले संबंध पर आधारित है।
प्रश्न 3
थार्नडाइक के किस नियम के अनुसार संतोषजनक परिणाम देने वाली अनुक्रिया दोहराई जाने की संभावना बढ़ती है?
- Aप्रभाव का नियम
- Bसमानता का नियम
- Cतत्परता का नियम
- Dअभ्यास का नियम
व्याख्या
प्रभाव का नियम (Law of Effect) बताता है कि संतोषजनक परिणाम वाली अनुक्रिया दोहराई जाने की संभावना बढ़ती है, जबकि असंतोषजनक परिणाम वाली कमज़ोर पड़ती है।
प्रश्न 4
'Law of Use and Disuse' किस नियम का हिस्सा है?
- Aतैयारी का नियम
- Bतत्परता का नियम
- Cअभ्यास का नियम
- Dप्रभाव का नियम
व्याख्या
अभ्यास का नियम (Law of Exercise) में 'उपयोग' (use) से अनुक्रिया मज़बूत होना और 'अनुपयोग' (disuse) से कमज़ोर पड़ना शामिल है।
प्रश्न 5
थार्नडाइक के सिद्धांत को क्या कहा जाता है?
- Aशास्त्रीय अनुबंधन
- Bप्रयास व त्रुटि सिद्धांत (संयोजनवाद)
- Cसूझ का सिद्धांत
- Dक्रियाप्रसूत अनुबंधन
व्याख्या
थार्नडाइक के सिद्धांत को 'प्रयास व त्रुटि सिद्धांत' या 'संयोजनवाद' कहा जाता है।
प्रश्न 6
पहेली-बक्से के प्रयोग में बार-बार प्रयासों के बाद क्या देखा गया?
- Aबिल्ली ने प्रयास करना बंद कर दिया
- Bबिल्ली को बाहर निकलने में लगने वाला समय बढ़ता गया
- Cगलत क्रियाएँ बढ़ती गईं
- Dसही क्रिया करने में लगने वाला समय क्रमशः घटता गया
व्याख्या
बार-बार प्रयासों के साथ बिल्ली की गलत क्रियाएँ घटती गईं और सही क्रिया करने में लगने वाला समय भी क्रमशः घटता गया — यही क्रमिक सुधार प्रयास व त्रुटि सीखने का प्रमाण है।
प्रश्न 7
एक शिक्षक चाहता है कि विद्यार्थी नई वर्तनी सही ढंग से सीखें। थार्नडाइक के सिद्धांत के अनुसार सबसे प्रभावी तरीका क्या होगा?
- Aसही लिखने पर तुरंत सकारात्मक प्रतिक्रिया/प्रशंसा देना
- Bगलती पर कड़ा दंड देना
- Cवर्तनी सिखाना छोड़ देना
- Dकेवल बार-बार वर्तनी लिखवाना, बिना किसी प्रतिक्रिया के
व्याख्या
प्रभाव के नियम के अनुसार सही प्रयास पर मिलने वाली सकारात्मक प्रतिक्रिया उस अनुक्रिया को मज़बूत करती है, जिससे सीखना प्रभावी होता है।
प्रश्न 8
यदि कोई विद्यार्थी थका हुआ व अरुचिपूर्ण है, तो थार्नडाइक के किस नियम के अनुसार नई अवधारणा पढ़ाना उपयुक्त नहीं होगा?
- Aसमानता का नियम
- Bप्रभाव का नियम
- Cतत्परता का नियम
- Dअभ्यास का नियम
व्याख्या
तत्परता का नियम कहता है कि सीखने के लिए शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार होना आवश्यक है; थका या अरुचिपूर्ण विद्यार्थी इस तत्परता की कमी दिखाता है।
प्रश्न 9
थार्नडाइक के अनुसार सीखना मुख्यतः कैसे होता है?
- Aअचानक सूझ (insight) से
- Bक्रमिक प्रयास व त्रुटि से
- Cकेवल अनुकरण से
- Dकेवल भाषा से
व्याख्या
थार्नडाइक के अनुसार सीखना क्रमिक प्रयास व त्रुटि की प्रक्रिया से होता है, अचानक समझ (insight) से नहीं।
प्रश्न 10
निम्न में से कौन-सा थार्नडाइक के तीन नामित नियमों में शामिल नहीं है?
- Aतत्परता का नियम
- Bअभ्यास का नियम
- Cप्रभाव का नियम
- Dपुनर्बलन का नियम
व्याख्या
थार्नडाइक के तीन नामित नियम हैं — तत्परता, अभ्यास और प्रभाव का नियम। 'पुनर्बलन' (reinforcement) एक सामान्य अवधारणा है, पर यह थार्नडाइक के तीन नामित नियमों में शामिल नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
थार्नडाइक के सिद्धांत को और किस नाम से जाना जाता है?+
संयोजनवाद (Connectionism), क्योंकि यह उद्दीपन-अनुक्रिया के बीच बनने वाले संबंध (S-R Bond) पर आधारित है।
थार्नडाइक ने अपना प्रसिद्ध प्रयोग किस जानवर पर किया?+
भूखी बिल्ली पर, पहेली-बक्से (puzzle box) में बंद करके, जहाँ उसे बाहर निकलने के लिए एक लीवर या डोरी दबानी होती थी।
थार्नडाइक के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण नियम कौन-सा है?+
प्रभाव का नियम (Law of Effect) — जिसके अनुसार संतोषजनक परिणाम देने वाली अनुक्रिया दोहराई जाने की संभावना बढ़ती है।
'S-R Bond' का क्या अर्थ है?+
उद्दीपन (Stimulus) और अनुक्रिया (Response) के बीच अभ्यास व परिणाम से बनने वाला संबंध, जो थार्नडाइक के अनुसार सीखने की मूल इकाई है।
REET में इस टॉपिक से किस तरह के प्रश्न पूछे जा सकते हैं?+
मुख्यतः पहेली-बक्से के प्रयोग की पहचान, तीन नियमों के अर्थ और सिद्धांत के नाम पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्न।
क्या केवल दोहराव (repetition) से सीखना मज़बूत होता है?+
थार्नडाइक के अनुसार अकेला दोहराव पर्याप्त नहीं है; जब तक सही अनुक्रिया के बाद संतोषजनक परिणाम न मिले, दोहराव का प्रभाव सीमित रहता है — यही 'अभ्यास' व 'प्रभाव' के नियमों का संयुक्त सार है।
थार्नडाइक व पावलव के सिद्धांतों में मूल अंतर क्या है?+
थार्नडाइक का सिद्धांत सक्रिय प्रयास व त्रुटि पर आधारित है, जिसमें जीव स्वयं क्रिया करता है और परिणाम से सीखता है; जबकि पावलव का शास्त्रीय अनुबंधन एक तटस्थ उद्दीपन को स्वाभाविक उद्दीपन के साथ बार-बार जोड़ने पर आधारित है; दोनों अलग-अलग प्रकार के सीखने की व्याख्या करते हैं।
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बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए