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REET L1+L2 · बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र

एरिक्सन का मनोसामाजिक विकास सिद्धांत (Erikson's Psychosocial Theory)

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एरिक्सन ने संपूर्ण जीवनकाल को 8 मनोसामाजिक अवस्थाओं में बाँटा, जिनमें हर अवस्था का अपना द्वंद्व (crisis) व सद्गुण (virtue) है। REET में इस टॉपिक से अवस्था-आयु मिलान व द्वंद्व पहचानने वाले प्रश्न नियमित आते हैं, इसलिए क्रम व आयु-सीमा का सटीक ज्ञान ज़रूरी है।

  • REET 2024 में 1 प्रश्न
  • L1+L2 स्तर
  • 7 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Erikson's Stages of Development — SimplyPsychology

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

2024 का प्रश्न मिलान (matching) प्रकार का था — 4 अवस्थाओं को उनकी सही आयु/काल से जोड़ना था (अहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य, स्वायत्तता बनाम लज्जा-संदेह, आत्मीयता बनाम एकांतता, पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व)। इससे स्पष्ट है कि REET में एरिक्सन की सभी 8 अवस्थाओं के नाम, क्रम व सटीक आयु-सीमा याद होना जरूरी है — मिलान वाले प्रश्न बहुत सामान्य हैं।

एरिक्सन का मनोसामाजिक विकास सिद्धांत

एरिक एरिक्सन (नव-फ्रायडवादी मनोवैज्ञानिक) ने संपूर्ण जीवनकाल — जन्म से वृद्धावस्था तक — को 8 मनोसामाजिक अवस्थाओं में बाँटा। हर अवस्था में एक द्वंद्व (crisis) होता है, जिसका सकारात्मक हल व्यक्ति में एक विशेष सद्गुण (virtue) विकसित करता है; अनसुलझा द्वंद्व व्यक्तित्व में कमी छोड़ सकता है।

एरिक्सन का सिद्धांत फ्रायड के मनोलैंगिक (psychosexual) सिद्धांत से इस मायने में भिन्न है कि यह केवल आंतरिक जैविक इच्छाओं पर नहीं, बल्कि व्यक्ति के परिवार, समाज व संस्कृति के साथ अंतःक्रिया पर केंद्रित है — इसीलिए इसे 'मनोसामाजिक (Psychosocial)' सिद्धांत कहा जाता है। हर अवस्था का द्वंद्व सकारात्मक रूप से हल होने पर व्यक्ति अगली अवस्था के लिए बेहतर तैयार होता है, जबकि नकारात्मक हल भविष्य के विकास में कठिनाई पैदा कर सकता है — फिर भी एरिक्सन मानते थे कि बाद की अवस्थाओं में सुधार की गुंजाइश हमेशा बनी रहती है।

एरिक्सन की 8 मनोसामाजिक अवस्थाएँ

अवस्थाआयुद्वंद्व (Crisis)सद्गुण (Virtue)
10–18 माहविश्वास बनाम अविश्वास (Trust vs Mistrust)आशा (Hope)
218 माह–3 वर्षस्वायत्तता बनाम लज्जा व संदेह (Autonomy vs Shame & Doubt)इच्छाशक्ति (Will) — स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास
33–5/6 वर्षपहल बनाम अपराधबोध (Initiative vs Guilt)उद्देश्य (Purpose) — नई गतिविधियाँ शुरू करने का आत्मविश्वास
46–12 वर्षउद्यमशीलता बनाम हीनता (Industry vs Inferiority)योग्यता (Competence)
512–18 वर्ष (किशोरावस्था)पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व (Identity vs Role Confusion)निष्ठा (Fidelity)
618–40 वर्ष (प्रारंभिक वयस्कता)आत्मीयता बनाम एकांतता (Intimacy vs Isolation)प्रेम (Love)
740–65 वर्ष (मध्य वयस्कता)उत्पादकता बनाम स्थिरता/ठहराव (Generativity vs Stagnation)देखभाल (Care)
865+ वर्ष (उत्तर वयस्कता)अहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य (Ego Integrity vs Despair)प्रज्ञा (Wisdom) — जीवन को पीछे मुड़कर देखने पर संतोष या पछतावे की भावना

[स्रोत 1]

एरिक्सन की 8 अवस्थाएँ — एक नज़र में

  1. 1. विश्वास बनाम अविश्वास (0–18 माह)

    सद्गुण: आशा (Hope)

  2. 2. स्वायत्तता बनाम लज्जा व संदेह (18 माह–3 वर्ष)

    सद्गुण: इच्छाशक्ति (Will)

  3. 3. पहल बनाम अपराधबोध (3–5/6 वर्ष)

    सद्गुण: उद्देश्य (Purpose)

  4. 4. उद्यमशीलता बनाम हीनता (6–12 वर्ष)

    सद्गुण: योग्यता (Competence)

  5. 5. पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व (12–18 वर्ष)

    सद्गुण: निष्ठा (Fidelity)

  6. 6. आत्मीयता बनाम एकांतता (18–40 वर्ष)

    सद्गुण: प्रेम (Love)

  7. 7. उत्पादकता बनाम स्थिरता/ठहराव (40–65 वर्ष)

    सद्गुण: देखभाल (Care)

  8. 8. अहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य (65+ वर्ष)

    सद्गुण: प्रज्ञा (Wisdom)

ऊपर दी गई 8 अवस्थाओं वाली तालिका का दृश्य रूप — क्रम याद रखने में मदद के लिए।

ध्यान देने योग्य बिंदु

REET में दी गई आयु
2024 के PYQ में 'स्वायत्तता बनाम लज्जा-संदेह' को लगभग 1½-3 वर्ष तथा 'प्रारंभिक वयस्कता' को लगभग 20-45 वर्ष बताया गया — विभिन्न स्रोतों में सीमाएँ थोड़ी भिन्न मिल सकती हैं, पर क्रम व नाम हमेशा स्थिर रहते हैं। इसी प्रश्न में 'अहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य' को उत्तर वयस्कता (65+ वर्ष) व 'पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व' को किशोरावस्था (12-20 वर्ष) से मिलाना था, जो दर्शाता है कि REET चारों अवस्थाओं को एक साथ मिला-जुलाकर भी पूछ सकता है
एरिक्सन बनाम फ्रायड
फ्रायड की तरह एरिक्सन ने भी अवस्था-आधारित विकास माना, पर एरिक्सन ने विकास को सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में और संपूर्ण जीवनकाल तक विस्तारित किया
क्रम याद रखना जरूरी
REET में प्रश्न प्रायः अवस्था का नाम देकर आयु पूछते हैं या आयु देकर अवस्था का नाम — इसलिए क्रम याद रखना सबसे उपयोगी रणनीति है
पहल बनाम अपराधबोध (चरण 3)
3-5/6 वर्ष की आयु में बालक स्वयं गतिविधियाँ शुरू करने का प्रयास करता है; बार-बार रोकटोक से अपराधबोध की भावना बन सकती है, जबकि प्रोत्साहन से 'उद्देश्य' नामक सद्गुण विकसित होता है

कक्षा में इसका उपयोग

अवस्था (आयु)कक्षा में शिक्षक की भूमिका
उद्यमशीलता बनाम हीनता (6-12 वर्ष, प्राथमिक कक्षाएँ)बच्चों को छोटे-छोटे प्राप्त करने योग्य कार्य पूरा करने व सफलता का अनुभव दें ताकि वे 'योग्यता' का भाव विकसित करें; बार-बार असफलता बताने से हीनता का भाव बन सकता है
पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व (12-18 वर्ष, माध्यमिक कक्षाएँ)किशोरों को अपनी रुचियाँ व करियर विकल्प खोजने के अवसर दें; कठोर तुलना व लेबलिंग से बचें ताकि पहचान-संकट न बढ़े

REET के लिए क्यों ज़रूरी है

एरिक्सन का सिद्धांत REET अभ्यर्थियों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शिक्षक को हर आयु-वर्ग के छात्र की मनोसामाजिक ज़रूरतों को समझने का ढाँचा देता है — उदाहरण के लिए, कक्षा 6-8 के छात्रों में 'उद्यमशीलता बनाम हीनता' से 'पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व' की ओर संक्रमण देखा जा सकता है, जिससे उनका व्यवहार व रुचियाँ तेज़ी से बदलती हैं। REET परीक्षा में एरिक्सन से जुड़े प्रश्न सामान्यतः याद-आधारित (recall-based) होते हैं, इसलिए आयु-सीमा व द्वंद्व के नामों का सटीक व क्रमबद्ध ज्ञान अंक दिलाने वाला सबसे सीधा तरीका है।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि एरिक्सन के सिद्धांत में हर अवस्था का द्वंद्व पूर्णतः 'सफल' या 'असफल' नहीं होता, बल्कि एक स्पेक्ट्रम की तरह होता है — यानी हर व्यक्ति में सद्गुण व उसकी कमी दोनों की कुछ मात्रा पाई जा सकती है, बस संतुलन अलग-अलग होता है। इसी वजह से REET में कभी-कभी यह भी पूछा जाता है कि किसी विशेष अवस्था में असंतुलन (जैसे अत्यधिक शर्म-संदेह) किस तरह के व्यवहार में दिखाई दे सकता है, इसलिए हर द्वंद्व के सकारात्मक व नकारात्मक दोनों पक्षों को समझना उपयोगी रहता है।

त्वरित रिवीज़न बिंदु

कुल अवस्थाएँ
8 (जन्म से वृद्धावस्था तक पूरा जीवनकाल)
पहली अवस्था
विश्वास बनाम अविश्वास (0-18 माह)
अंतिम अवस्था
अहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य (65+ वर्ष)
स्कूली आयु का प्रमुख द्वंद्व
उद्यमशीलता बनाम हीनता (6-12 वर्ष) व पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व (12-18 वर्ष)

क्रम याद रखने की ट्रिक

आयु के क्रम में यूँ याद करें — विश्वास (शिशु) → स्वायत्तता (टॉडलर) → पहल (प्री-स्कूल) → उद्यमशीलता (प्राथमिक कक्षा) → पहचान (किशोर) → आत्मीयता (युवा वयस्क) → उत्पादकता (मध्य आयु) → सत्यनिष्ठा (वृद्धावस्था)। इन आठ शब्दों को क्रम में रटकर याद पक्का करें।

REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)

प्रश्न 9

एरिकसन के मनोवैज्ञानिक-सामाजिक विकास के सिद्धान्त की अवस्थाओं को उनकी आयु/अवधि/काल के साथ मिलान करें । I. अहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य i. प्रारंभिक वयस्कता (20 से 45 वर्ष) II. स्वायत्तता बनाम लज्जा और संदेह ii. किशोरावस्था (12 से 20 वर्ष) III. आत्मीयता बनाम एकान्तता iii. उत्तर वयस्कता (65 वर्ष से अधिक) IV. पहचान बनाम भूमिका द्वन्द्व iv. 1½ वर्ष से 3 वर्ष आयु सही मिलान का चुनाव करें ।

  1. AI – i, II – ii, III – iii, IV – iv
  2. BI – ii, II – iii, III – i, IV – iv
  3. CI – iii, II – iv, III – i, IV – ii
  4. DI – iv, II – i, III – iii, IV – ii

व्याख्या

एरिकसन (Erikson) की मनोसामाजिक अवस्थाओं में: अहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य – उत्तर वयस्कता (65 वर्ष से अधिक) = iii; स्वायत्तता बनाम लज्जा व संदेह – लगभग 1½ से 3 वर्ष = iv; आत्मीयता बनाम एकान्तता – प्रारंभिक वयस्कता = i; पहचान बनाम भूमिका द्वन्द्व – किशोरावस्था (12–20 वर्ष) = ii। अतः सही मिलान I–iii, II–iv, III–i, IV–ii (विकल्प C) है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

एरिक्सन के अनुसार शैशवावस्था (0-18 माह) में कौन-सा द्वंद्व होता है?

  1. Aस्वायत्तता बनाम लज्जा-संदेह
  2. Bविश्वास बनाम अविश्वास
  3. Cपहल बनाम अपराधबोध
  4. Dउद्यमशीलता बनाम हीनता

व्याख्या

पहली अवस्था (0-18 माह) में शिशु देखभाल करने वालों पर निर्भर होकर विश्वास बनाम अविश्वास के द्वंद्व से गुजरता है।

प्रश्न 2

'पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व' किस आयु-वर्ग से संबंधित है?

  1. Aशैशवावस्था
  2. Bप्रारंभिक बाल्यावस्था
  3. Cकिशोरावस्था
  4. Dवृद्धावस्था

व्याख्या

पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व (12-18 वर्ष) किशोरावस्था की केंद्रीय मनोसामाजिक चुनौती है।

प्रश्न 3

एरिक्सन के अनुसार 'उद्यमशीलता बनाम हीनता' अवस्था से जुड़ा सद्गुण (virtue) क्या है?

  1. Aआशा
  2. Bइच्छाशक्ति
  3. Cयोग्यता
  4. Dप्रेम

व्याख्या

उद्यमशीलता बनाम हीनता (6-12 वर्ष) अवस्था के सफल समाधान से बालक में 'योग्यता' नामक सद्गुण विकसित होता है।

प्रश्न 4

प्रारंभिक वयस्कता (18-40 वर्ष) में एरिक्सन के अनुसार कौन-सा द्वंद्व प्रमुख है?

  1. Aउत्पादकता बनाम स्थिरता
  2. Bआत्मीयता बनाम एकांतता
  3. Cअहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य
  4. Dपहचान बनाम भूमिका द्वंद्व

व्याख्या

प्रारंभिक वयस्कता में व्यक्ति गहरे, आत्मीय संबंध बनाने या एकाकीपन के द्वंद्व से गुजरता है, इसे आत्मीयता बनाम एकांतता कहते हैं।

प्रश्न 5

निम्न में से कौन-सा सही क्रम एरिक्सन की अवस्थाओं का आयु के अनुसार है?

  1. Aपहचान → विश्वास → उद्यमशीलता → स्वायत्तता
  2. Bविश्वास → स्वायत्तता → पहल → उद्यमशीलता
  3. Cउद्यमशीलता → पहल → स्वायत्तता → विश्वास
  4. Dआत्मीयता → पहचान → विश्वास → स्वायत्तता

व्याख्या

सही आयु-क्रम है: विश्वास बनाम अविश्वास (शैशव) → स्वायत्तता बनाम लज्जा-संदेह (टॉडलर) → पहल बनाम अपराधबोध (प्री-स्कूल) → उद्यमशीलता बनाम हीनता (प्राथमिक कक्षा)।

प्रश्न 6

एक शिक्षक चाहता है कि उसकी कक्षा 5 के छात्र 'योग्यता' का भाव विकसित करें। इसके लिए सबसे उपयुक्त तरीका क्या होगा?

  1. Aहमेशा कठिन कार्य देकर असफल करवाना
  2. Bछोटे, प्राप्त करने योग्य कार्य देकर सफलता का अनुभव कराना और सराहना करना
  3. Cछात्रों की तुलना एक-दूसरे से करते रहना
  4. Dकोई कार्य न देना

व्याख्या

एरिक्सन के अनुसार 6-12 वर्ष की अवस्था में सफलतापूर्वक कार्य पूरा करने का अनुभव बालक में 'योग्यता' (उद्यमशीलता) का भाव विकसित करता है; बार-बार असफलता हीनता का भाव पैदा कर सकती है।

प्रश्न 7

मध्य वयस्कता (40-65 वर्ष) में एरिक्सन के अनुसार कौन-सा द्वंद्व होता है?

  1. Aउत्पादकता बनाम स्थिरता/ठहराव
  2. Bआत्मीयता बनाम एकांतता
  3. Cविश्वास बनाम अविश्वास
  4. Dअहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य

व्याख्या

मध्य वयस्कता में व्यक्ति अगली पीढ़ी के लिए योगदान (उत्पादकता) या ठहराव के द्वंद्व से गुजरता है।

प्रश्न 8

उत्तर वयस्कता (65+ वर्ष) में 'अहं-सत्यनिष्ठा बनाम नैराश्य' द्वंद्व के सफल समाधान से कौन-सा सद्गुण विकसित होता है?

  1. Aप्रज्ञा (Wisdom)
  2. Bआशा
  3. Cनिष्ठा
  4. Dदेखभाल

व्याख्या

अंतिम अवस्था में जीवन को सार्थक मानकर संतोष का भाव प्रज्ञा (wisdom) नामक सद्गुण को जन्म देता है।

प्रश्न 9

टॉडलर उम्र (लगभग 18 माह-3 वर्ष) में बच्चा बार-बार 'मैं खुद करूँगा' कहकर स्वयं कार्य करना चाहता है। एरिक्सन के अनुसार यह किस द्वंद्व का हिस्सा है?

  1. Aविश्वास बनाम अविश्वास
  2. Bस्वायत्तता बनाम लज्जा-संदेह
  3. Cपहल बनाम अपराधबोध
  4. Dपहचान बनाम भूमिका द्वंद्व

व्याख्या

इस आयु में बच्चा स्वतंत्र रूप से कार्य करने का प्रयास करता है; उचित समर्थन मिलने पर 'स्वायत्तता' और अत्यधिक रोक-टोक पर 'लज्जा-संदेह' विकसित हो सकता है।

प्रश्न 10

एरिक्सन का सिद्धांत मुख्यतः किस दृष्टिकोण से विकास को देखता है?

  1. Aकेवल जैविक परिपक्वता
  2. Bसामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में संपूर्ण जीवनकाल का विकास
  3. Cकेवल संज्ञानात्मक विकास
  4. Dकेवल शैशवावस्था तक सीमित विकास

व्याख्या

एरिक्सन ने विकास को केवल बचपन तक सीमित न रखकर संपूर्ण जीवनकाल (जन्म से वृद्धावस्था तक) में सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में समझाया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एरिक्सन के मनोसामाजिक विकास सिद्धांत में कुल कितनी अवस्थाएँ हैं?+

एरिक्सन के सिद्धांत में जन्म से वृद्धावस्था तक कुल 8 मनोसामाजिक अवस्थाएँ हैं।

किशोरावस्था (12-18 वर्ष) में एरिक्सन के अनुसार कौन-सा द्वंद्व होता है?+

किशोरावस्था में 'पहचान बनाम भूमिका द्वंद्व' (Identity vs Role Confusion) प्रमुख द्वंद्व है।

एरिक्सन व फ्रायड के सिद्धांत में मुख्य अंतर क्या है?+

फ्रायड ने विकास को मुख्यतः बचपन तक सीमित रखा, जबकि एरिक्सन ने इसे सामाजिक-सांस्कृतिक संदर्भ में संपूर्ण जीवनकाल तक विस्तारित किया।

REET में एरिक्सन से किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं?+

प्रायः अवस्थाओं का उनकी आयु/द्वंद्व से मिलान कराने वाले या किसी द्वंद्व/सद्गुण की पहचान कराने वाले प्रश्न पूछे जाते हैं।

एरिक्सन के सिद्धांत को 'मनोसामाजिक' क्यों कहा जाता है और क्या एरिक्सन की किसी अवस्था का द्वंद्व असफल हल होने पर स्थायी नुकसान होता है?+

क्योंकि यह विकास को केवल आंतरिक जैविक इच्छाओं से नहीं, बल्कि व्यक्ति की परिवार, समाज व संस्कृति के साथ अंतःक्रिया से जोड़कर समझाता है। नहीं, एरिक्सन के अनुसार बाद की अवस्थाओं में भी सुधार की गुंजाइश बनी रहती है, हालाँकि प्रारंभिक अवस्थाओं का सफल समाधान आगे के विकास को आसान बनाता है।

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आधिकारिक स्रोत

  1. Erikson's Stages of Development — SimplyPsychology

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए