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REET Level 1 · पर्यावरण अध्ययन (EVS)

राजस्थान की लोक कलाएँ (Folk Art) — REET EVS नोट्स

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यह पेज REET EVS के 'राजस्थान का परिवेश' खंड में आने वाले लोक कला टॉपिक को कवर करता है — फड़, पिछवाई, कावड़, मांडणा व कठपुतली जैसी परंपरागत कलाएँ, उनके केंद्र व विशेषता के साथ। यह टॉपिक राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान का मूल है, इसलिए लगभग हर राजस्थान परीक्षा में बार-बार पूछा जाता है।

  • REET 2024 में 0 प्रश्न
  • कक्षा 1–5 स्तर
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Folk Arts of Rajasthan — general cultural reference

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में लोक कला टॉपिक से सीधा कोई प्रश्न नहीं आया। सिलेबस में यह EVS के 'राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान' खंड का हिस्सा है, जहाँ बच्चों को राज्य की परंपरागत कलाओं से परिचित कराया जाता है। परीक्षा में प्रायः कला व उसके केंद्र/समुदाय का मिलान या किसी कला की मुख्य विशेषता पहचानने जैसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

राजस्थान की लोक कलाएँ — परिचय

राजस्थान अपनी समृद्ध लोक कला परंपरा के लिए जाना जाता है, जो सदियों से कहानी कहने, धार्मिक आस्था व सामाजिक अभिव्यक्ति का माध्यम रही हैं। ये कलाएँ प्रायः किसी विशेष समुदाय या गाँव से जुड़ी होती हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होती आई हैं, जिससे इनमें क्षेत्रीय व सामुदायिक विशिष्टता बनी रहती है।

इन कलाओं का उद्देश्य केवल सजावट नहीं बल्कि लोकदेवताओं की कथाएँ सुनाना, धार्मिक पूजा में सहायक होना, या घर-आँगन को शुभ अवसरों पर सजाना रहा है। इसी कारण राजस्थान की लोक कलाएँ आज भी सांस्कृतिक पहचान व आजीविका दोनों का महत्वपूर्ण साधन बनी हुई हैं।

प्रमुख लोक कलाएँ और उनकी विशेषता

कलाविवरण व केंद्र
फड़ चित्रकलाकपड़े पर बने लंबे चित्रित स्क्रॉल, जिन पर देवनारायणजी व पाबूजी जैसे लोकदेवताओं की कथाएँ चित्रित होती हैं; भीलवाड़ा ज़िले का शाहपुरा इसका प्रमुख केंद्र है
पिछवाई चित्रकलाश्रीनाथजी की मूर्ति के पीछे टाँगे जाने वाले बड़े कपड़े पर बने चित्र, कृष्ण-लीला दर्शाते हैं; नाथद्वारा (राजसमंद) इसका प्रमुख केंद्र है
कावड़ शिल्पकई दरवाज़ों वाला लकड़ी का छोटा मंदिरनुमा बक्सा, जिस पर चित्रित कथाएँ दरवाज़े खोलते हुए सुनाई जाती हैं; चित्तौड़गढ़ के बस्सी गाँव में बनता है
मांडणाशुभ अवसरों पर घर की दीवारों व आँगन में सफेद खड़िया व लाल गेरू से बनाई जाने वाली ज्यामितीय भित्ति-चित्रकला, मुख्यतः आदिवासी व ग्रामीण समुदायों में प्रचलित
कठपुतली कलाधागों से संचालित लकड़ी की कठपुतलियों द्वारा पारंपरिक लोकगाथाएँ व वीरगाथाएँ प्रस्तुत करने वाला रंगमंच
सांझीअमावस्या के आस-पास लड़कियों द्वारा गोबर व रंगों से दीवार पर देवी पार्वती के प्रतीकात्मक रूप बनाने की परंपरा

REET में प्रायः कला व उसके केंद्र/समुदाय का सही मिलान पूछा जाता है।

लघु चित्रकला शैलियाँ (मिनिएचर पेंटिंग)

मेवाड़ शैली
राजस्थान की सबसे प्राचीन स्वदेशी लघु चित्रकला शैली मानी जाती है, जो उदयपुर क्षेत्र से जुड़ी है।
किशनगढ़ शैली
'बणी-ठणी' चित्र के लिए प्रसिद्ध, जिसे 'भारत की मोनालिसा' भी कहा जाता है।
बूँदी शैली
प्राकृतिक दृश्यों — पेड़-पौधों व वन्य जीवन — के सूक्ष्म व नाज़ुक चित्रण के लिए जानी जाती है।

लोक कलाओं का सामाजिक-आर्थिक महत्व

राजस्थान की लोक कलाएँ न केवल सांस्कृतिक धरोहर हैं बल्कि हज़ारों कारीगर परिवारों की आजीविका का साधन भी हैं। भारतीय लोक कला मंडल (उदयपुर) जैसी संस्थाएँ कठपुतली कला के संरक्षण व प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं, और भारतीय कठपुतली कलाकारों की टोलियों ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी पहचान बनाई है।

आधुनिक समय में पर्यटन व हस्तशिल्प बाज़ार ने इन कलाओं को नई पहचान दी है — फड़ चित्रकला अब कपड़े व दीवार सजावट के उत्पादों में, और मांडणा डिज़ाइन आधुनिक फैशन व गृह सज्जा में भी प्रयोग होने लगे हैं, जिससे परंपरागत कारीगरों को नए बाज़ार मिल रहे हैं।

कक्षा में इसका उपयोग

EVS पाठ्यक्रम में लोक कला को 'हमारी सांस्कृतिक विरासत' के रूप में पढ़ाना बच्चों में स्थानीय पहचान के प्रति गर्व विकसित करता है। इसे केवल तथ्य के रूप में न पढ़ाकर, बच्चों को स्वयं सरल मांडणा डिज़ाइन बनाने या कठपुतली से छोटी कहानी प्रस्तुत करने जैसी गतिविधियों से जोड़ना सीख को स्थायी व रोचक बनाता है।

लोक कलाओं का संरक्षण

समय के साथ शहरीकरण, आधुनिक मनोरंजन साधनों (टीवी, मोबाइल) व बाज़ार की बदलती मांग के कारण कई पारंपरिक कलाओं के सामने अस्तित्व की चुनौती खड़ी हुई है — नई पीढ़ी इन कलाओं को सीखने में उतनी रुचि नहीं दिखाती जितनी पहले होती थी। इसी कारण राज्य सरकार व स्वयंसेवी संस्थाएँ कारीगरों को प्रशिक्षण, GI टैग व प्रदर्शनियों के ज़रिए सहयोग देती हैं, ताकि यह विरासत जीवित रहे।

विद्यालयों में लोक कला को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाना भी संरक्षण की एक महत्वपूर्ण कड़ी है — जब बच्चे बचपन से ही इन कलाओं को देखते, सीखते व सराहते हैं, तो वयस्क होने पर भी वे इस सांस्कृतिक विरासत के प्रति जुड़ाव बनाए रखते हैं, भले ही वे स्वयं कारीगर न बनें।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

मांडणा गतिविधि

बच्चों से कागज़ पर सरल ज्यामितीय मांडणा डिज़ाइन बनवाना एक आसान व रोचक कला-गतिविधि है, जो कल्पनाशक्ति व सांस्कृतिक समझ दोनों बढ़ाती है।

कठपुतली कहानी

कागज़ या कपड़े की सरल कठपुतली बनाकर छोटी लोककथा प्रस्तुत करवाना भाषा व कला दोनों कौशल विकसित करता है।

सामान्य भ्रांति

बच्चे अक्सर फड़ व पिछवाई चित्रकला को एक ही समझते हैं — शिक्षक को स्पष्ट करना चाहिए कि फड़ लोकदेवताओं की कथा (शाहपुरा) से जुड़ी है जबकि पिछवाई श्रीनाथजी की पूजा (नाथद्वारा) से जुड़ी है।

आकलन

चित्र दिखाकर 'यह कला-रूप कौन-सा है और किस उद्देश्य से बनाई जाती है' पूछना एक सरल आकलन तरीका है।

याद रखने की ट्रिक

हर कला को उसकी कहानी के प्रकार से जोड़कर याद रखें — 'फड़ में लोकदेवता, पिछवाई में कृष्ण, कावड़ में दरवाज़ों की कथा, मांडणा में शुभ चिन्ह' — इस तरह उद्देश्य के आधार पर याद रखना केंद्र-वार नाम रटने से आसान है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

फड़ चित्रकला का प्रमुख केंद्र कौन-सा है?

  1. Aशाहपुरा (भीलवाड़ा)
  2. Bनाथद्वारा (राजसमंद)
  3. Cबस्सी (चित्तौड़गढ़)
  4. Dकैथून (कोटा)

व्याख्या

भीलवाड़ा ज़िले का शाहपुरा कस्बा फड़ चित्रकला का प्रमुख केंद्र है, जहाँ देवनारायणजी व पाबूजी जैसे लोकदेवताओं की कथाएँ चित्रित की जाती हैं।

प्रश्न 2

पिछवाई चित्रकला मुख्यतः किस देवता से संबंधित है?

  1. Aदेवनारायणजी
  2. Bश्रीनाथजी (कृष्ण)
  3. Cपाबूजी
  4. Dगणगौर माता

व्याख्या

पिछवाई चित्रकला श्रीनाथजी (कृष्ण रूप) की मूर्ति के पीछे टाँगे जाने वाले कपड़े पर बनाई जाती है, जो नाथद्वारा में प्रसिद्ध है।

प्रश्न 3

कावड़ शिल्प किस ज़िले के गाँव में बनाया जाता है?

  1. Aभीलवाड़ा
  2. Bराजसमंद
  3. Cचित्तौड़गढ़
  4. Dकोटा

व्याख्या

कावड़ शिल्प चित्तौड़गढ़ ज़िले के बस्सी गाँव में बनाया जाता है — यह कई दरवाज़ों वाला लकड़ी का कहानी सुनाने वाला बक्सा है।

प्रश्न 4

मांडणा कला किससे बनाई जाती है?

  1. Aतेल रंग
  2. Bसफेद खड़िया व लाल गेरू
  3. Cकांच का चूरा
  4. Dरेशम के धागे

व्याख्या

मांडणा सफेद खड़िया व लाल गेरू से दीवारों व आँगन में बनाई जाने वाली पारंपरिक ज्यामितीय भित्ति-चित्रकला है।

प्रश्न 5

'बणी-ठणी' चित्र किस चित्रकला शैली से जुड़ा है?

  1. Aमेवाड़ शैली
  2. Bबूँदी शैली
  3. Cकिशनगढ़ शैली
  4. Dजयपुर शैली

व्याख्या

'बणी-ठणी' चित्र किशनगढ़ शैली की प्रसिद्ध कृति है, जिसे 'भारत की मोनालिसा' भी कहा जाता है।

प्रश्न 6

राजस्थान की सबसे प्राचीन स्वदेशी लघु चित्रकला शैली कौन-सी मानी जाती है?

  1. Aकिशनगढ़ शैली
  2. Bबूँदी शैली
  3. Cमेवाड़ शैली
  4. Dजोधपुर शैली

व्याख्या

मेवाड़ शैली को राजस्थान की सबसे प्राचीन स्वदेशी लघु चित्रकला शैली माना जाता है, जो उदयपुर क्षेत्र से जुड़ी है।

प्रश्न 7

धागों से संचालित लकड़ी की पुतलियों द्वारा लोकगाथा प्रस्तुत करने वाली कला को क्या कहते हैं?

  1. Aमांडणा
  2. Bकठपुतली कला
  3. Cसांझी
  4. Dफड़

व्याख्या

कठपुतली कला धागों से संचालित लकड़ी की कठपुतलियों द्वारा पारंपरिक लोकगाथाएँ प्रस्तुत करने वाला रंगमंच है।

प्रश्न 8

कक्षा में लोक कला पढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि कौन-सी है?

  1. Aकेवल नाम रटवाना
  2. Bसरल मांडणा डिज़ाइन बनवाना या कठपुतली कहानी प्रस्तुत करवाना
  3. Cविषय को छोड़ देना
  4. Dकेवल परीक्षा प्रश्न हल करवाना

व्याख्या

हाथों से करने वाली रचनात्मक गतिविधियाँ बच्चों में कला व सांस्कृतिक समझ दोनों स्थायी रूप से विकसित करती हैं।

प्रश्न 9

सांझी कला परंपरागत रूप से कौन बनाता है?

  1. Aलड़कियाँ, अमावस्या के आस-पास दीवार पर
  2. Bकेवल पुरुष कारीगर लकड़ी पर
  3. Cकेवल मंदिर के पुजारी
  4. Dकेवल बुज़ुर्ग महिलाएँ कपड़े पर

व्याख्या

सांझी कला में लड़कियाँ अमावस्या के आस-पास गोबर व रंगों से दीवार पर देवी पार्वती के प्रतीकात्मक रूप बनाती हैं।

प्रश्न 10

निम्न में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?

  1. Aफड़ — शाहपुरा
  2. Bपिछवाई — नाथद्वारा
  3. Cकावड़ — बस्सी
  4. Dमांडणा — कैथून

व्याख्या

मांडणा किसी एक विशेष स्थान से नहीं बल्कि ग्रामीण व आदिवासी समुदायों में व्यापक रूप से प्रचलित भित्ति-चित्रकला है; कैथून तो कोटा डोरिया वस्त्र उद्योग से जुड़ा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में लोक कला टॉपिक से कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से सीधा प्रश्न नहीं आया, पर कला-केंद्र मिलान का 1 प्रश्न किसी भी वर्ष आ सकता है।

फड़ चित्रकला का प्रमुख केंद्र कौन-सा है?+

भीलवाड़ा ज़िले का शाहपुरा कस्बा फड़ चित्रकला का प्रमुख केंद्र है, जहाँ देवनारायणजी व पाबूजी की कथाएँ चित्रित की जाती हैं।

पिछवाई चित्रकला कहाँ बनाई जाती है?+

पिछवाई चित्रकला राजसमंद ज़िले के नाथद्वारा में बनाई जाती है, जो श्रीनाथजी की मूर्ति के पीछे टाँगी जाती है।

मांडणा कला किस अवसर पर बनाई जाती है?+

मांडणा शुभ अवसरों (त्योहार, विवाह) पर घर की दीवारों व आँगन में सफेद खड़िया व लाल गेरू से बनाई जाने वाली ज्यामितीय भित्ति-चित्रकला है।

'बणी-ठणी' चित्र किस चित्रकला शैली से संबंधित है?+

किशनगढ़ शैली से — इसे 'भारत की मोनालिसा' भी कहा जाता है।

बूँदी शैली किस लिए प्रसिद्ध है?+

बूँदी शैली प्राकृतिक दृश्यों — पेड़-पौधों व वन्य जीवन — के सूक्ष्म व नाज़ुक चित्रण के लिए प्रसिद्ध है।

सांझी कला कौन बनाता है और कब?+

सांझी कला में लड़कियाँ अमावस्या के आस-पास गोबर व रंगों से दीवार पर देवी पार्वती के प्रतीकात्मक रूप बनाती हैं, जो विवाह-आशीर्वाद से जुड़ी मानी जाती है।

भारतीय लोक कला मंडल किस कला के संरक्षण से जुड़ी है?+

उदयपुर स्थित भारतीय लोक कला मंडल कठपुतली कला के संरक्षण व प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इसकी पहचान बनी है।

फड़ चित्रकला में किन लोकदेवताओं की कथाएँ चित्रित होती हैं?+

फड़ चित्रकला में मुख्यतः देवनारायणजी व पाबूजी जैसे राजस्थान के प्रसिद्ध लोकदेवताओं की वीरगाथाएँ लंबे कपड़े के स्क्रॉल पर चित्रित की जाती हैं।

मांडणा कला किस समुदाय में विशेष रूप से प्रचलित है?+

मांडणा कला मुख्यतः ग्रामीण व आदिवासी समुदायों में प्रचलित है, जहाँ महिलाएँ घर की दीवारों व आँगन को शुभ अवसरों पर इस कला से सजाती हैं।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. Folk Arts of Rajasthan — general cultural reference
  2. Handmade in Rajasthan — Government of Rajasthan

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए