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REET Level 1 · पर्यावरण अध्ययन (EVS)

राजस्थान का खानपान (Traditional Food) — REET EVS नोट्स

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यह पेज REET EVS के 'राजस्थान का परिवेश' खंड में आने वाले खानपान टॉपिक को कवर करता है — प्रमुख पारंपरिक व्यंजन और यह भोजन ऐसा क्यों है, इसका भौगोलिक कारण। रेगिस्तानी जलवायु ने राजस्थान के भोजन को बाकी राज्यों से अलग बनाया है, यही समझ परीक्षा व सामान्य ज्ञान दोनों के लिए उपयोगी है।

  • REET 2024 में 0 प्रश्न
  • कक्षा 1–5 स्तर
  • 8 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Traditional food of Rajasthan — general cultural reference

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में खानपान टॉपिक से सीधा कोई प्रश्न नहीं आया। सिलेबस में यह EVS के 'राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान' खंड का हिस्सा है, जहाँ बच्चों को अपने राज्य के भोजन व उसके पीछे के कारण से परिचित कराया जाता है। परीक्षा में प्रायः किसी व्यंजन का नाम व उसकी मुख्य सामग्री पहचानने जैसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

राजस्थानी भोजन की विशेषता

राजस्थान का अधिकांश भाग शुष्क व अर्ध-शुष्क रेगिस्तानी क्षेत्र है, जहाँ पानी व हरी सब्ज़ियों की उपलब्धता सीमित रहती है। इसी कारण यहाँ का पारंपरिक भोजन कम पानी में बनने वाली, लंबे समय तक टिकने वाली और सूखे मेवा/दाल/बाजरा आधारित सामग्री पर केंद्रित रहा है — जैसे सूखी फलियाँ (सांगरी), बेर (केर) व बाजरा जैसे मोटे अनाज, जो कम पानी में भी उग जाते हैं।

घी व मसालों का उदार उपयोग भी राजस्थानी भोजन की पहचान है, क्योंकि रेगिस्तानी जलवायु में अधिक ऊर्जा व दीर्घायु भंडारण क्षमता वाला भोजन ज़रूरी होता था। यही कारण है कि दाल-बाटी-चूरमा जैसे व्यंजन राजस्थान की पहचान बन गए, जिसमें बाटी को घी में डुबोकर खाया जाता है।

राजस्थान के प्रमुख पारंपरिक व्यंजन

व्यंजनविवरण
दाल-बाटी-चूरमाराजस्थान का सबसे प्रसिद्ध व्यंजन — गेहूँ की कड़क गोल बाटी को घी में डुबोकर, मसालेदार दाल व मीठे चूरमे के साथ खाया जाता है
गट्टे की सब्ज़ीबेसन (चने के आटे) से बने गट्टों को दही आधारित मसालेदार ग्रेवी में पकाया जाता है
केर सांगरीरेगिस्तानी झाड़ी 'केर' के बेर व 'सांगरी' (खेजड़ी वृक्ष की फली) से बनने वाली मारवाड़ क्षेत्र की विशेष सूखी सब्ज़ी
बाजरे की रोटीमोटे अनाज बाजरे से बनी रोटी, जो कम पानी वाले क्षेत्रों में गेहूँ का सस्ता व पौष्टिक विकल्प है
पंचमेल दालपाँच प्रकार की दालों को मिलाकर बनाई जाने वाली पौष्टिक दाल
घेवरतेल/घी में तला हुआ, चाशनी में डुबोया गया विशेष मीठा पकवान, तीज-गणगौर जैसे त्योहारों पर प्रसिद्ध
लाल मांसमेवाड़ क्षेत्र का पारंपरिक तीखा मांसाहारी व्यंजन (गैर-शाकाहारी विकल्प)

REET में प्रायः व्यंजन व उसकी मुख्य सामग्री का मिलान पूछा जा सकता है।

अन्य लोकप्रिय व्यंजन व मिठाइयाँ

मिस्सी रोटी
बेसन व गेहूँ के आटे को मिलाकर मसालों के साथ बनाई जाने वाली पौष्टिक रोटी।
प्याज़ कचौरी
जोधपुर की प्रसिद्ध मसालेदार तली हुई कचौरी, जिसमें प्याज़ की स्टफिंग भरी जाती है।
मावा कचौरी
जोधपुर की मीठी कचौरी, जिसमें खोये (मावे) की स्टफिंग भरी जाती है।
मालपुआ
मैदे व दूध से बना तला हुआ मीठा पकवान, त्योहारों व विशेष अवसरों पर बनाया जाता है।
चक्की की शाक
पानी की कमी वाले वर्षों में सब्ज़ी न मिलने पर गेहूँ के आटे से बनाई जाने वाली विशेष सब्ज़ी, जो राजस्थानी सूझबूझ व संसाधनों के सदुपयोग का उदाहरण है।

भौगोलिक व सांस्कृतिक संबंध

राजस्थान के भोजन में क्षेत्रीय विविधता भी देखने को मिलती है — मारवाड़ (जोधपुर-बीकानेर) क्षेत्र में सूखे व लंबे समय तक टिकने वाले व्यंजन (केर-सांगरी, बाजरे की रोटी) अधिक प्रचलित हैं, जबकि मेवाड़ (उदयपुर) व हाड़ौती (कोटा) क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक विविधता व मांसाहारी व्यंजन भी देखने को मिलते हैं, क्योंकि यहाँ थोड़ी अधिक वर्षा व हरियाली उपलब्ध रहती है।

आज भी राजस्थानी भोजन देश-विदेश में अपनी विशिष्ट स्वाद व संरक्षण तकनीक के लिए पहचाना जाता है — कई व्यंजन (जैसे दाल-बाटी-चूरमा) अब राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय हो चुके हैं और राज्य के पर्यटन को भी बढ़ावा देते हैं।

त्योहारों व विशेष अवसरों पर बनने वाली मिठाइयाँ (घेवर, मालपुआ, फीणी) भी राजस्थान की खानपान परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं — ये अक्सर मौसम के अनुसार बनाई जाती हैं, जैसे घेवर विशेष रूप से मानसून के मौसम में तीज-गणगौर के समय बनता है, जो भोजन व मौसमी चक्र के बीच के जुड़ाव को भी दर्शाता है।

कक्षा में इसका उपयोग

EVS पाठ्यक्रम में भोजन को 'परिवेश व जीवनशैली' के संबंध से जोड़कर पढ़ाना प्रभावी है — बच्चों को यह समझाना कि किसी क्षेत्र का भोजन वहाँ की जलवायु, पानी की उपलब्धता व कृषि पर निर्भर करता है, उन्हें पर्यावरण व मानव जीवन के बीच के संबंध की बुनियादी समझ देता है, जो आगे भूगोल व सामाजिक अध्ययन दोनों में काम आती है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

स्वाद व चर्चा गतिविधि

संभव हो तो बच्चों को घर से कोई पारंपरिक व्यंजन लाने को कहना और कक्षा में उसकी सामग्री व बनाने की विधि पर चर्चा करना।

मानचित्र गतिविधि

राजस्थान के मानचित्र पर मारवाड़, मेवाड़, हाड़ौती क्षेत्र चिह्नित कर वहाँ के प्रसिद्ध व्यंजन जोड़ना एक रोचक गतिविधि है।

सामान्य भ्रांति

बच्चे अक्सर सोचते हैं कि राजस्थानी भोजन केवल मसालेदार है — शिक्षक को समझाना चाहिए कि मुख्य विशेषता कम पानी में बनने वाला व लंबे समय तक टिकने वाला भोजन होना है, न कि केवल तीखापन।

आकलन

चित्र दिखाकर व्यंजन का नाम व उसकी मुख्य सामग्री पूछना एक सरल आकलन तरीका है।

याद रखने की ट्रिक

याद रखें — 'पानी कम, तो अनाज व दाल ज़्यादा' — बाजरा, दाल व सूखी फलियाँ (केर-सांगरी) राजस्थान के भोजन की रीढ़ हैं, क्योंकि ये कम पानी में भी उग व टिक जाते हैं। यह भौगोलिक तर्क हर व्यंजन को समझने की कुंजी है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध पारंपरिक व्यंजन कौन-सा है?

  1. Aइडली-सांभर
  2. Bदाल-बाटी-चूरमा
  3. Cछोले-भटूरे
  4. Dडोसा

व्याख्या

दाल-बाटी-चूरमा राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध व पहचाना जाने वाला पारंपरिक व्यंजन है।

प्रश्न 2

केर-सांगरी में 'सांगरी' किस वृक्ष की फली है?

  1. Aनीम
  2. Bखेजड़ी
  3. Cबरगद
  4. Dआम

व्याख्या

सांगरी खेजड़ी वृक्ष की फली है, जो राजस्थान का राजकीय वृक्ष भी है और रेगिस्तानी क्षेत्र में सहजता से उगता है।

प्रश्न 3

गट्टे की सब्ज़ी की मुख्य सामग्री क्या है?

  1. Aचावल का आटा
  2. Bबेसन (चने का आटा)
  3. Cमैदा
  4. Dबाजरे का आटा

व्याख्या

गट्टे बेसन (चने के आटे) से बनाए जाते हैं, जिन्हें दही आधारित मसालेदार ग्रेवी में पकाया जाता है।

प्रश्न 4

राजस्थान में बाजरे की रोटी अधिक खाने का मुख्य कारण क्या है?

  1. Aयह सबसे महँगा अनाज है
  2. Bबाजरा कम पानी में भी उग जाता है
  3. Cबाजरा केवल शहरों में मिलता है
  4. Dयह केवल त्योहारों पर बनता है

व्याख्या

बाजरा शुष्क जलवायु व कम पानी में भी अच्छी तरह उगता है, इसलिए यह रेगिस्तानी क्षेत्रों में गेहूँ का पौष्टिक व किफायती विकल्प है।

प्रश्न 5

घेवर मिठाई किन त्योहारों पर विशेष रूप से बनाई जाती है?

  1. Aहोली व दीपावली
  2. Bतीज व गणगौर
  3. Cरक्षाबंधन केवल
  4. Dमकर संक्रांति केवल

व्याख्या

घेवर विशेष रूप से तीज व गणगौर के त्योहारों पर बनाया व खाया जाने वाला पारंपरिक मीठा पकवान है।

प्रश्न 6

राजस्थानी भोजन में घी व मसालों का उदार उपयोग किस कारण से हुआ?

  1. Aरेगिस्तानी जलवायु में अधिक ऊर्जा व संरक्षण की ज़रूरत के कारण
  2. Bक्योंकि यहाँ घी बहुत सस्ता है
  3. Cकेवल स्वाद के लिए, कोई भौगोलिक कारण नहीं
  4. Dआधुनिक फैशन के कारण

व्याख्या

रेगिस्तानी जलवायु में अधिक ऊर्जा व दीर्घायु भंडारण क्षमता वाला भोजन ज़रूरी होता था, इसलिए घी व मसालों का उदार प्रयोग हुआ।

प्रश्न 7

प्याज़ कचौरी व मावा कचौरी के लिए राजस्थान का कौन-सा शहर विशेष रूप से प्रसिद्ध है?

  1. Aजोधपुर
  2. Bकोटा
  3. Cअजमेर
  4. Dभरतपुर

व्याख्या

जोधपुर प्याज़ कचौरी व मावा कचौरी जैसे विशेष व्यंजनों के लिए प्रसिद्ध है।

प्रश्न 8

कक्षा में राजस्थान के खानपान को पढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका क्या है?

  1. Aकेवल नाम रटवाना
  2. Bभोजन को जलवायु व भूगोल से जोड़कर समझाना
  3. Cविषय को छोड़ देना
  4. Dकेवल परीक्षा प्रश्न हल करवाना

व्याख्या

भोजन को जलवायु व भूगोल से जोड़कर समझाना बच्चों को कारण-आधारित (why) समझ देता है, न कि केवल रटी हुई जानकारी।

प्रश्न 9

पंचमेल दाल में कितनी प्रकार की दालें मिलाई जाती हैं?

  1. Aतीन
  2. Bचार
  3. Cपाँच
  4. Dछह

व्याख्या

'पंच' का अर्थ पाँच है — पंचमेल दाल पाँच प्रकार की दालों को मिलाकर बनाई जाने वाली पौष्टिक दाल है।

प्रश्न 10

लाल मांस किस क्षेत्र का पारंपरिक व्यंजन माना जाता है?

  1. Aमारवाड़
  2. Bमेवाड़
  3. Cशेखावाटी
  4. Dहाड़ौती

व्याख्या

लाल मांस मेवाड़ (उदयपुर) क्षेत्र का पारंपरिक तीखा मांसाहारी व्यंजन माना जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में खानपान टॉपिक से कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से सीधा प्रश्न नहीं आया, पर व्यंजन-सामग्री मिलान का 1 प्रश्न किसी भी वर्ष आ सकता है।

राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध व्यंजन कौन-सा है?+

दाल-बाटी-चूरमा राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध व पहचाना जाने वाला पारंपरिक व्यंजन है।

केर-सांगरी किससे बनती है?+

केर (रेगिस्तानी झाड़ी के बेर) व सांगरी (खेजड़ी वृक्ष की फली) से बनने वाली यह मारवाड़ क्षेत्र की विशेष सूखी सब्ज़ी है।

राजस्थान में बाजरे की रोटी अधिक क्यों खाई जाती है?+

बाजरा कम पानी व शुष्क जलवायु में भी अच्छी तरह उगता है, इसलिए रेगिस्तानी क्षेत्रों में यह गेहूँ का पौष्टिक व किफायती विकल्प है।

गट्टे की सब्ज़ी किस सामग्री से बनती है?+

गट्टे बेसन (चने के आटे) से बनाए जाते हैं, जिन्हें दही आधारित मसालेदार ग्रेवी में पकाया जाता है।

मिस्सी रोटी किन सामग्रियों से बनती है?+

मिस्सी रोटी बेसन व गेहूँ के आटे को मिलाकर मसालों के साथ बनाई जाती है, यह अपेक्षाकृत पौष्टिक व स्वादिष्ट मानी जाती है।

क्या राजस्थान का पूरा भोजन शाकाहारी है?+

नहीं, अधिकांश पारंपरिक व्यंजन शाकाहारी हैं (जैसे दाल-बाटी-चूरमा, गट्टे की सब्ज़ी), पर लाल मांस जैसे कुछ मांसाहारी व्यंजन भी मेवाड़ क्षेत्र में प्रचलित हैं।

चक्की की शाक किन परिस्थितियों में बनाई जाती है?+

पानी की कमी वाले वर्षों में जब हरी सब्ज़ियाँ उपलब्ध नहीं होतीं, तब गेहूँ के आटे से 'चक्की की शाक' बनाई जाती है — यह संसाधनों के सूझबूझ भरे उपयोग का उदाहरण है।

राजस्थानी भोजन में क्षेत्रीय विविधता क्यों पाई जाती है?+

मारवाड़ जैसे अधिक शुष्क क्षेत्रों में सूखे व टिकाऊ व्यंजन प्रचलित हैं, जबकि मेवाड़-हाड़ौती जैसे अपेक्षाकृत अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भोजन की विविधता अधिक देखने को मिलती है।

दाल-बाटी-चूरमा में 'बाटी' क्या है?+

बाटी गेहूँ के आटे से बनी सख्त गोल रोटी है, जिसे भूनकर या सेंककर घी में डुबोया जाता है और मसालेदार दाल व मीठे चूरमे के साथ परोसा जाता है।

चूरमा किससे बनाया जाता है?+

चूरमा बाटी या गेहूँ के आटे की रोटी को चूरकर, उसमें घी व गुड़/चीनी मिलाकर बनाया जाने वाला मीठा व्यंजन है, जो दाल-बाटी के साथ परोसा जाता है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. Traditional food of Rajasthan — general cultural reference
  2. Rajasthan Tourism — official site

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए