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REET Level 1 · पर्यावरण अध्ययन (EVS)

राजस्थान की वेशभूषा एवं आभूषण — REET EVS नोट्स

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यह पेज REET EVS के 'राजस्थान का परिवेश' खंड में आने वाले वेशभूषा व आभूषण टॉपिक को कवर करता है — पारंपरिक पहनावे व गहनों के नाम, जो शरीर के किस अंग पर पहने जाते हैं। यह टॉपिक बारीक नामों के कारण भ्रमित करने वाला है, इसलिए शरीर के अंग के अनुसार वर्गीकृत करके याद रखें।

  • REET 2024 में 0 प्रश्न
  • कक्षा 1–5 स्तर
  • 9 मिनट पढ़ें
16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: Rajputi poshak — general reference

REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में वेशभूषा व आभूषण टॉपिक से सीधा कोई प्रश्न नहीं आया। सिलेबस में यह EVS के 'राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान' खंड का हिस्सा है, जहाँ बच्चों को अपने राज्य की परंपरागत पोशाक व गहनों से परिचित कराया जाता है। परीक्षा में प्रायः किसी आभूषण का नाम व वह शरीर के किस अंग पर पहना जाता है, इसका मिलान पूछा जा सकता है।

राजस्थानी वेशभूषा

राजस्थान की पारंपरिक महिला वेशभूषा को 'राजपूती पोशाक' कहा जाता है, जिसमें तीन मुख्य भाग होते हैं — घाघरा (लंबा घेरदार स्कर्ट), कांचली/कुर्ती (ऊपरी वस्त्र) और ओढ़नी (सिर व शरीर ढकने वाला दुपट्टा)। इन वस्त्रों पर बांधनी (बंधेज) व लहरिया जैसी रंगाई-बंधाई तकनीक से रंगीन डिज़ाइन बनाए जाते हैं, जो जोधपुर व जयपुर की विशेष पहचान हैं।

पुरुषों की पारंपरिक वेशभूषा में पगड़ी (सफा), अंगरखा (ऊपरी वस्त्र) और धोती/पायजामा शामिल हैं। पगड़ी बाँधने की शैली क्षेत्र के अनुसार बदलती है — जयपुरी, जोधपुरी (मारवाड़ी), मेवाड़ी व बीकानेरी पगड़ी की अपनी अलग पहचान होती है, और पारंपरिक रूप से पगड़ी का रंग भी अवसर (शादी, शोक, त्योहार) के अनुसार बदलता है।

पारंपरिक आभूषण — शरीर के अंग के अनुसार

शरीर का अंगआभूषण के नाम
सिर/माथाबोरला, रखड़ी, सीसफूल, मांगटीका
नाकनथ (नथनी)
कानझुमका, बाली, कर्णफूल
गला/गर्दनतिमणियां, आड़, कंठी, हाँसली, रानी हार
बाजू/हाथबाजूबंद, चूड़ा/पहुंची (बंगड़ी), हाथफूल
कमरकमरबंद (तगड़ी)
पैरपायल, बिछिया

REET में प्रायः 'यह आभूषण शरीर के किस अंग पर पहना जाता है' पूछा जाता है, इसलिए अंग-वार वर्गीकरण याद रखना सबसे कारगर तरीका है।

कुछ विशेष आभूषण व उनका महत्व

बोरला
माथे के बीचों-बीच पहना जाने वाला गोल घंटी-नुमा आभूषण, विवाहित स्त्री की पहचान माना जाता है।
नथ (नथनी)
बाईं नासिका में पहनी जाने वाली बड़ी नाक की बाली, जो अक्सर चेन से कान से जुड़ी होती है और विवाहित होने का प्रतीक मानी जाती है।
बिछिया
पैर की उंगलियों में पहनी जाने वाली चाँदी की अंगूठी, परंपरागत रूप से विवाहित स्त्री द्वारा पहनी जाती है।
कुंदन व मीनाकारी गहने
जयपुर कुंदन (रत्न जड़ाई) व मीनाकारी (रंगीन एनेमल) तकनीक से बने गहनों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
चूड़ा/बंगड़ी
हाथ की कलाई पर कई-कई चूड़ियाँ एक साथ पहनने की परंपरा (चूड़ा) राजस्थानी महिलाओं की पारंपरिक साज-सज्जा का अभिन्न हिस्सा है।

वेशभूषा व आभूषणों का सांस्कृतिक महत्व

राजस्थान की वेशभूषा व आभूषण केवल सजावट नहीं, बल्कि सामाजिक पहचान का भी माध्यम हैं — पहनावे व गहनों की शैली से कई बार व्यक्ति के वैवाहिक स्तर, क्षेत्र व समुदाय की झलक मिलती है, जैसे नथ व बिछिया परंपरागत रूप से विवाहित महिलाओं से जुड़े मानी जाती हैं। रेगिस्तानी जलवायु के अनुसार ढीले-ढाले व हल्के वस्त्र तथा सिर व चेहरा ढकने वाली ओढ़नी धूप व धूल से बचाव में भी सहायक होती है।

आज भी राजस्थान में शादी-ब्याह व त्योहारों के अवसर पर पारंपरिक वेशभूषा व आभूषण पहनने की परंपरा जीवित है, और यह राज्य के पर्यटन व हस्तशिल्प उद्योग (मीनाकारी, कुंदन, लाख की चूड़ियाँ) को भी बढ़ावा देती है।

कक्षा में इसका उपयोग

प्राथमिक स्तर पर बच्चों को अपने परिवार व आस-पास पहनी जाने वाली पारंपरिक वेशभूषा व गहनों को पहचानना सिखाना EVS के 'परिवेशीय अध्ययन' उद्देश्य से सीधे जुड़ता है। इससे बच्चे अपनी सांस्कृतिक जड़ों व स्थानीय पहचान के प्रति गर्व व जागरूकता दोनों विकसित करते हैं।

क्षेत्रीय व सामाजिक विविधता

राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों व समुदायों में वेशभूषा व आभूषणों में थोड़ी-थोड़ी विविधता देखी जाती है — जैसे मारवाड़ (जोधपुर) क्षेत्र की ओढ़नी व लहरिया शैली मेवाड़ (उदयपुर) से भिन्न होती है, और आदिवासी समुदायों (जैसे भील) के आभूषण व वस्त्र भी अपनी अलग पहचान रखते हैं, जिनमें अक्सर सस्ती धातु व सरल डिज़ाइन का प्रयोग होता है। यह विविधता राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक बहुलता को दर्शाती है।

समय के साथ आभूषणों की सामग्री में भी बदलाव आया है — पारंपरिक रूप से चाँदी व सोने का प्रयोग होता था, पर आज कई ग्रामीण व कामकाजी परिवार हल्के व सस्ते विकल्प (जैसे जर्मन सिल्वर या आर्टिफिशियल ज्वेलरी) भी अपनाते हैं, विशेषकर रोज़मर्रा के उपयोग के लिए, जबकि पारंपरिक भारी गहने विशेष अवसरों के लिए सुरक्षित रखे जाते हैं।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

चित्र पहचान गतिविधि

पारंपरिक वेशभूषा व आभूषणों के चित्र दिखाकर बच्चों से नाम व पहने जाने वाले अंग की पहचान करवाना एक प्रभावी गतिविधि है।

घर से जुड़ाव

बच्चों से अपने घर की दादी/नानी द्वारा पहने जाने वाले पारंपरिक गहनों के बारे में पूछना विषय को व्यक्तिगत अनुभव से जोड़ता है।

सामान्य भ्रांति

बच्चे अक्सर सभी गले के गहनों को एक ही नाम से बुलाते हैं — शिक्षक को तिमणियां, आड़, कंठी व हाँसली के बीच का अंतर (स्तर/लंबाई के अनुसार) स्पष्ट करना चाहिए।

आकलन

चित्र दिखाकर 'यह आभूषण शरीर के किस अंग पर पहना जाता है' पूछना एक सरल व प्रभावी आकलन तरीका है।

याद रखने की ट्रिक

सिर से पैर तक क्रम में याद रखें — 'बोरला-नथ-झुमका-तिमणियां-बाजूबंद-कमरबंद-पायल' — यह क्रम सिर से शुरू होकर पैर तक जाता है, इसलिए शरीर पर हाथ फिराते हुए याद करना सबसे आसान तरीका है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'बोरला' आभूषण शरीर के किस अंग पर पहना जाता है?

  1. Aमाथा
  2. Bकान
  3. Cगला
  4. Dपैर

व्याख्या

बोरला माथे के बीचों-बीच पहना जाने वाला गोल घंटी-नुमा आभूषण है, जो विवाहित स्त्री की पहचान माना जाता है।

प्रश्न 2

राजपूती पोशाक में कौन-सा वस्त्र सिर व शरीर ढकने के लिए प्रयोग होता है?

  1. Aघाघरा
  2. Bकांचली
  3. Cओढ़नी
  4. Dअंगरखा

व्याख्या

ओढ़नी सिर व शरीर ढकने वाला दुपट्टा है, जो राजपूती पोशाक का तीसरा मुख्य भाग है।

प्रश्न 3

नथ (नथनी) शरीर के किस अंग पर पहनी जाती है?

  1. Aकान
  2. Bनाक
  3. Cमाथा
  4. Dगला

व्याख्या

नथ (नथनी) बाईं नासिका (नाक) में पहनी जाती है और परंपरागत रूप से विवाहित स्त्री की पहचान मानी जाती है।

प्रश्न 4

बाजूबंद शरीर के किस अंग पर पहना जाता है?

  1. Aगला
  2. Bऊपरी बाजू
  3. Cकमर
  4. Dपैर

व्याख्या

बाजूबंद ऊपरी बाजू पर पहना जाने वाला आभूषण है, जिसमें अक्सर मीनाकारी का काम होता है।

प्रश्न 5

पुरुषों की पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सिर पर क्या बाँधा जाता है?

  1. Aओढ़नी
  2. Bपगड़ी (सफा)
  3. Cकांचली
  4. Dघाघरा

व्याख्या

पुरुष पारंपरिक रूप से पगड़ी (सफा) बाँधते हैं, जिसकी शैली क्षेत्र (जयपुरी, जोधपुरी, मेवाड़ी) के अनुसार बदलती है।

प्रश्न 6

बिछिया आभूषण किस अंग पर पहना जाता है?

  1. Aहाथ की उंगली
  2. Bपैर की उंगली
  3. Cकान
  4. Dकमर

व्याख्या

बिछिया पैर की उंगलियों में पहनी जाने वाली चाँदी की अंगूठी है, जो परंपरागत रूप से विवाहित स्त्री द्वारा पहनी जाती है।

प्रश्न 7

तिमणियां किस प्रकार का आभूषण है?

  1. Aमाथे का आभूषण
  2. Bगले का चोकर (नेकपीस)
  3. Cपैर का आभूषण
  4. Dकान का आभूषण

व्याख्या

तिमणियां कॉलरबोन के ठीक नीचे पहना जाने वाला ऊँचा गले का चोकर है।

प्रश्न 8

रंगाई-बंधाई की वह तकनीक जिससे कपड़े पर डिज़ाइन बनाई जाती है, क्या कहलाती है?

  1. Aबांधनी/लहरिया
  2. Bमीनाकारी
  3. Cकुंदन
  4. Dथेवा

व्याख्या

बांधनी (बंधेज) व लहरिया रंगाई-बंधाई की तकनीकें हैं जो कपड़े पर विशिष्ट डिज़ाइन बनाती हैं, जबकि मीनाकारी व कुंदन गहनों की तकनीकें हैं।

प्रश्न 9

कक्षा में वेशभूषा व आभूषण पढ़ाने के लिए सबसे उपयुक्त गतिविधि कौन-सी है?

  1. Aकेवल नाम रटवाना
  2. Bचित्र दिखाकर नाम व अंग की पहचान करवाना
  3. Cविषय को छोड़ देना
  4. Dकेवल परीक्षा प्रश्न हल करवाना

व्याख्या

चित्र-आधारित पहचान गतिविधि बच्चों में दृश्य स्मृति व व्यावहारिक समझ दोनों विकसित करती है।

प्रश्न 10

कुंदन व मीनाकारी गहनों के लिए राजस्थान का कौन-सा शहर प्रसिद्ध है?

  1. Aजयपुर
  2. Bबीकानेर
  3. Cअजमेर
  4. Dभरतपुर

व्याख्या

जयपुर कुंदन (रत्न जड़ाई) व मीनाकारी (रंगीन एनेमल) तकनीक से बने गहनों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

REET में वेशभूषा व आभूषण टॉपिक से कितने प्रश्न आते हैं?+

REET 2024 में इस टॉपिक से सीधा प्रश्न नहीं आया, पर आभूषण-अंग मिलान का 1 प्रश्न किसी भी वर्ष आ सकता है, इसलिए तालिका अच्छी तरह याद रखें।

राजपूती पोशाक में कौन-कौन से वस्त्र शामिल हैं?+

घाघरा (स्कर्ट), कांचली/कुर्ती (ऊपरी वस्त्र) और ओढ़नी (दुपट्टा) — इन तीनों को मिलाकर राजपूती पोशाक कहा जाता है।

नथ किस अंग पर पहनी जाती है?+

नथ (नथनी) बाईं नासिका (नाक) में पहनी जाती है और परंपरागत रूप से विवाहित स्त्री की पहचान मानी जाती है।

बोरला व रखड़ी किस अंग के आभूषण हैं?+

बोरला व रखड़ी दोनों माथे पर पहने जाने वाले आभूषण हैं, जो सिर के बीचों-बीच पहने जाते हैं।

पगड़ी बाँधने की शैली क्षेत्र अनुसार क्यों बदलती है?+

राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों (जयपुर, जोधपुर, मेवाड़, बीकानेर) की अपनी सांस्कृतिक परंपरा है, इसलिए वहाँ की पगड़ी की बाँधने की शैली व रंग अलग-अलग होते हैं।

बांधनी व लहरिया में क्या अंतर है?+

दोनों रंगाई-बंधाई की तकनीकें हैं — बांधनी में कपड़े पर बिंदीदार डिज़ाइन बनती है, जबकि लहरिया में तिरछी लहर जैसी धारियाँ बनाई जाती हैं; दोनों जयपुर व जोधपुर में लोकप्रिय हैं।

पारंपरिक भारी गहने कब पहने जाते हैं?+

पारंपरिक भारी सोने-चाँदी के गहने आमतौर पर शादी-ब्याह व त्योहारों जैसे विशेष अवसरों पर पहने जाते हैं, जबकि रोज़मर्रा में हल्के व सस्ते विकल्प प्रचलित हैं।

पगड़ी का रंग किस बात पर निर्भर करता है?+

पारंपरिक रूप से पगड़ी का रंग अवसर के अनुसार बदलता है — जैसे शुभ अवसरों पर चटख रंग व शोक के समय हल्के या सफेद रंग की पगड़ी पहनी जाती है।

ओढ़नी का व्यावहारिक उपयोग क्या है?+

ओढ़नी सिर व शरीर ढकने के साथ-साथ रेगिस्तानी जलवायु में धूप व धूल से बचाव में भी सहायक होती है, इसलिए यह सजावट के साथ व्यावहारिक ज़रूरत भी पूरी करती है।

आदिवासी समुदायों के आभूषण राजपूती गहनों से किस प्रकार भिन्न होते हैं?+

आदिवासी समुदायों (जैसे भील) के आभूषणों में अक्सर सस्ती धातु व सरल डिज़ाइन प्रयोग होता है, जबकि राजपूती परंपरा में सोना-चाँदी व जटिल मीनाकारी-कुंदन कारीगरी अधिक देखने को मिलती है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. Rajputi poshak — general reference
  2. Rajasthani jewellery traditions — general reference

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  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए