राजस्थान के प्रमुख मेले एवं त्योहार: स्थान, तिथि और महत्व
इस पेज में राजस्थान के प्रमुख धार्मिक मेले, पशु मेले, लोक-त्योहार और पर्यटन उत्सव उनके स्थान और हिंदी मास-तिथि के साथ तालिकाओं में दिए गए हैं। REET Level 1 EVS में राजस्थान की संस्कृति से सीधे प्रश्न आते हैं — REET 2024 की पहली पाली में ही इस टॉपिक से 2 प्रश्न पूछे गए।
- REET 2024 में 2 प्रश्न
- कक्षा 3–5 स्तर
- 8 मिनट पढ़ें
REET में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है
REET 2024 (Level 1, पहली पाली) में दो सीधे तथ्यात्मक प्रश्न आए: 'पांडुपोल मेला कहाँ लगता है?' (उत्तर: अलवर) और 'कार्तिक मास की अमावस्या को कौन-सा त्योहार मनाया जाता है?' (उत्तर: दिवाली)। यानी दो तरह के प्रश्न बनते हैं — मेला → स्थान/ज़िला, और त्योहार → हिंदी मास व तिथि। गहराई कक्षा 3–5 की पाठ्यपुस्तक से थोड़ी अधिक, राजस्थान GK स्तर की होती है, इसलिए स्थान और तिथि दोनों साथ याद करें।
राजस्थान के प्रमुख धार्मिक एवं लोकदेवता मेले
| मेला | स्थान | समय (हिंदी मास-तिथि) | विशेष बात |
|---|---|---|---|
| पुष्कर मेला | पुष्कर (अजमेर) | कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा | ब्रह्मा जी का प्रसिद्ध मंदिर व पुष्कर सरोवर; ऊँट व पशुओं का बड़ा मेला |
| रामदेवरा मेला | रामदेवरा/रुणिचा (जैसलमेर) | भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी | लोकदेवता बाबा रामदेव; हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक |
| गोगाजी मेला | गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) | भाद्रपद कृष्ण नवमी (गोगा नवमी) के आसपास | लोकदेवता गोगाजी — साँपों के देवता के रूप में पूजे जाते हैं |
| तेजाजी पशु मेला | परबतसर (डीडवाना-कुचामन; पहले नागौर) | श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या (तेजा दशमी भाद्रपद शुक्ल दशमी को) | लोकदेवता वीर तेजाजी के नाम पर पशु मेला |
| कैला देवी मेला (लक्खी मेला) | कैला देवी (करौली) | चैत्र शुक्ल अष्टमी | लाखों श्रद्धालु; लांगुरिया गीत प्रसिद्ध |
| श्री महावीर जी मेला | श्री महावीर जी (करौली) | चैत्र शुक्ल त्रयोदशी से वैशाख कृष्ण प्रतिपदा | जैन धर्म का प्रमुख मेला; रथयात्रा |
| बेणेश्वर मेला | बेणेश्वर धाम (डूंगरपुर) | माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा | सोम-माही-जाखम संगम; 'आदिवासियों का कुंभ' |
| करणी माता मेला | देशनोक (बीकानेर) | वर्ष में दो बार — चैत्र और आश्विन नवरात्र | 'चूहों वाली माता' का मंदिर |
| पांडुपोल मेला | पांडुपोल (अलवर, सरिस्का क्षेत्र) | — | हनुमान जी का मंदिर; पांडवों के अज्ञातवास से जुड़ी मान्यता |
| खाटू श्यामजी मेला | खाटू (सीकर) | फाल्गुन शुक्ल दशमी से द्वादशी | श्याम बाबा के दर्शन हेतु भारी भीड़ |
| चंद्रभागा मेला | झालरापाटन (झालावाड़) | कार्तिक पूर्णिमा | चंद्रभागा नदी तट पर पशु मेला |
| कोलायत मेला | कोलायत (बीकानेर) | कार्तिक पूर्णिमा | कपिल मुनि से जुड़ा; सरोवर स्नान |
| सीताबाड़ी मेला | केलवाड़ा (बारां) | वैशाख पूर्णिमा से ज्येष्ठ अमावस्या | सहरिया जनजाति का प्रमुख मेला |
| मल्लीनाथ पशु मेला | तिलवाड़ा (बालोतरा; पहले बाड़मेर) | चैत्र मास (कृष्ण एकादशी से शुक्ल एकादशी) | लूणी नदी तट पर पशु मेला |
नोट: 2023 और 2024 में राजस्थान में ज़िलों का पुनर्गठन हुआ है; प्रश्न में नया ज़िला पूछे जाने पर विकल्पों को ध्यान से पढ़ें। परीक्षा में स्थान (कस्बे) का नाम सबसे सुरक्षित पहचान है।
राजस्थान के प्रमुख त्योहार — मास और तिथि
| त्योहार | हिंदी मास-तिथि | राजस्थान में विशेषता |
|---|---|---|
| गणगौर | चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से चैत्र शुक्ल तृतीया | कुँवारी कन्याएँ अच्छे वर और विवाहित महिलाएँ सौभाग्य के लिए गौरी (ईसर-गौर) की पूजा करती हैं; जयपुर, उदयपुर, जोधपुर में सवारी |
| हरियाली तीज | श्रावण शुक्ल तृतीया | झूले, मेहंदी, लहरिया; जयपुर में तीज माता की सवारी |
| कजली (बड़ी) तीज | भाद्रपद कृष्ण तृतीया | बूंदी की कजली तीज प्रसिद्ध |
| रक्षाबंधन | श्रावण पूर्णिमा | भाई-बहन का त्योहार |
| दशहरा (विजयादशमी) | आश्विन शुक्ल दशमी | कोटा का दशहरा मेला प्रसिद्ध |
| दीपावली | कार्तिक अमावस्या | लक्ष्मी पूजन; घरों की सफ़ाई और दीप सजावट |
| होली | फाल्गुन पूर्णिमा (होलिका दहन), अगले दिन धुलंडी | लोकनृत्य, चंग और फाग गीत |
| मकर संक्रांति | सूर्य के मकर राशि में प्रवेश पर (प्रायः 14 जनवरी) | पतंगबाज़ी, विशेषकर जयपुर में; दान-पुण्य |
याद रखें: दीपावली अमावस्या को, जबकि होली, रक्षाबंधन, पुष्कर मेला और चंद्रभागा मेला पूर्णिमा को पड़ते हैं।
पर्यटन उत्सव (Tourism Festivals)
- मरु महोत्सव (Desert Festival)
- जैसलमेर — जनवरी या फरवरी में तीन दिन; रेगिस्तानी संस्कृति, ऊँट दौड़, लोक संगीत[स्रोत 2]
- ऊँट उत्सव (Camel Festival)
- बीकानेर — जनवरी में; ऊँटों की सजावट व प्रदर्शन[स्रोत 2]
- पुष्कर मेला (पर्यटन कैलेंडर में)
- अक्टूबर–नवंबर, कार्तिक पूर्णिमा तक; विश्व का प्रसिद्ध ब्रह्मा मंदिर[स्रोत 1]
- मारवाड़ महोत्सव
- जोधपुर — आश्विन मास (सितंबर–अक्टूबर) में[स्रोत 2]
मेलों और त्योहारों का सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व
EVS की दृष्टि से मेले और त्योहार केवल तिथियों की सूची नहीं हैं; ये 'सामाजिक-सांस्कृतिक पर्यावरण' का हिस्सा हैं। राजस्थान के अनेक मेले और त्योहार ऋतु-चक्र और खेती से जुड़े हैं — जैसे वर्षा ऋतु में तीज, फसल के बाद कार्तिक के पशु मेले, और वसंत में गणगौर। पशु मेलों (पुष्कर, तेजाजी, मल्लीनाथ, चंद्रभागा) में ऊँट, बैल, घोड़े आदि का क्रय-विक्रय होता है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
लोकदेवताओं के मेले (रामदेवजी, गोगाजी, तेजाजी) सामाजिक एकता और सद्भाव का संदेश देते हैं; रामदेवरा में सभी धर्मों और जातियों के लोग आते हैं। बेणेश्वर और सीताबाड़ी जैसे मेले जनजातीय संस्कृति को जीवित रखते हैं। मेलों में हस्तशिल्प, लोकनृत्य (घूमर, कालबेलिया, गैर), लोकगीत और पारंपरिक वेशभूषा एक जगह दिखती है, जिससे स्थानीय कारीगरों को रोज़गार और पर्यटन को बढ़ावा मिलता है।
कक्षा 3–5 के बच्चे के लिए मेला सबसे नज़दीकी अनुभव है — लगभग हर बच्चा किसी न किसी मेले में गया होता है। इसलिए शिक्षक इस टॉपिक से भोजन (मेले के पकवान), यात्रा (मेले तक कैसे गए), काम (दुकानदार, कारीगर, पशुपालक) और पानी (सरोवर, नदी तट) जैसे EVS के दूसरे थीम भी आसानी से जोड़ सकता है।
बच्चों को कैसे पढ़ाएँ
कक्षा गतिविधि (कक्षा 3–5)
'हमारा त्योहार कैलेंडर' — कक्षा को 12 हिंदी महीनों के 12 समूहों में बाँटें। हर समूह अपने महीने के त्योहार/मेले का चित्र, तिथि और घर में वह कैसे मनाया जाता है, यह चार्ट पर लगाए। अंत में दीवार पर पूरा वर्ष-चक्र बन जाएगा।
शिक्षण सहायक सामग्री
राजस्थान का रेखा-मानचित्र जिस पर बच्चे मेलों के स्थान पर स्टिकर लगाएँ; मेले की तस्वीरें, स्थानीय बुज़ुर्गों या अभिभावकों से साक्षात्कार, और लोकगीत की ऑडियो क्लिप।
आम भ्रांतियाँ
(1) 'दिवाली पूर्णिमा को होती है' — दिवाली कार्तिक अमावस्या को है। (2) 'पुष्कर मेला केवल पर्यटकों का उत्सव है' — मूल रूप से यह धार्मिक और पशु मेला है। (3) 'रामदेवरा और गोगामेड़ी एक ही ज़िले में हैं' — रामदेवरा जैसलमेर और गोगामेड़ी हनुमानगढ़ में है। (4) बच्चे अक्सर मानते हैं कि उनके घर का तरीका ही 'सही' तरीका है — विविधता का सम्मान सिखाएँ।
आकलन का तरीका
मानचित्र पर 5 मेलों के स्थान चिह्नित करवाना, 'मेले में मैंने क्या देखा' पर चित्र-आधारित अनुभव लेखन, और मिलान कार्य (मेला ↔ स्थान, त्योहार ↔ मास) को रूब्रिक से जाँचें। अपने गाँव के मेले पर छोटी परियोजना पोर्टफोलियो में रखें।
याद रखने की ट्रिक / परीक्षा टिप
भाद्रपद = लोकदेवताओं का महीना: 'गोगा नवमी (कृष्ण), रामदेव द्वितीया से एकादशी (शुक्ल), तेजा दशमी (शुक्ल)'। और कार्तिक पूर्णिमा पर तीन मेले — 'पुष्कर, चंद्रभागा, कोलायत' — याद रखने के लिए 'पुच को' (पुष्कर-चंद्रभागा-कोलायत)।
REET 2024 में पूछे गए प्रश्न (हल सहित)
प्रश्न 125
पांडुपोल मेला कहाँ लगता है ?
- Aजयपुर
- Bअजमेर
- Cअलवर
- Dपण्डेर
व्याख्या
पांडुपोल अलवर जिले में सरिस्का क्षेत्र में स्थित है, जहाँ हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर है और यहाँ पांडुपोल मेला भरता है। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के समय यहाँ समय बिताया था।
प्रश्न 132
निम्नलिखित में से उस त्यौहार को चुनिए, जो कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है ।
- Aहोली
- Bदिवाली
- Cदशहरा
- Dरक्षाबंधन
व्याख्या
दीपावली (दिवाली) कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। होली फाल्गुन पूर्णिमा को, दशहरा आश्विन शुक्ल दशमी को और रक्षाबंधन श्रावण पूर्णिमा को मनाया जाता है।
अभ्यास प्रश्न
प्रश्न 1
'आदिवासियों का कुंभ' कहे जाने वाला बेणेश्वर मेला किस ज़िले में भरता है?
- Aबाँसवाड़ा
- Bडूंगरपुर
- Cउदयपुर
- Dबारां
व्याख्या
बेणेश्वर मेला डूंगरपुर में सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर भरता है। बारां का सीताबाड़ी मेला सहरिया जनजाति से जुड़ा है।
प्रश्न 2
रामदेवरा मेला किस मास में भरता है?
- Aचैत्र
- Bश्रावण
- Cभाद्रपद
- Dकार्तिक
व्याख्या
रामदेवरा (जैसलमेर) में बाबा रामदेव का मेला भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी तक भरता है। कार्तिक में पुष्कर मेला और चैत्र में कैला देवी मेला भरता है।
प्रश्न 3
निम्नलिखित में से कौन-सा मेला कार्तिक पूर्णिमा को नहीं भरता?
- Aपुष्कर मेला
- Bचंद्रभागा मेला
- Cकोलायत मेला
- Dबेणेश्वर मेला
व्याख्या
बेणेश्वर मेला माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक भरता है। पुष्कर, चंद्रभागा (झालरापाटन) और कोलायत (बीकानेर) मेले कार्तिक पूर्णिमा से जुड़े हैं।
प्रश्न 4
गोगामेड़ी का मेला किस लोकदेवता से संबंधित है?
- Aतेजाजी
- Bगोगाजी
- Cपाबूजी
- Dरामदेवजी
व्याख्या
गोगामेड़ी (हनुमानगढ़) में गोगाजी का मेला गोगा नवमी के आसपास भरता है। तेजाजी का मेला परबतसर और रामदेवजी का रामदेवरा में भरता है।
प्रश्न 5
गणगौर का त्योहार किस तिथि को संपन्न होता है?
- Aचैत्र शुक्ल तृतीया
- Bश्रावण शुक्ल तृतीया
- Cभाद्रपद कृष्ण तृतीया
- Dकार्तिक अमावस्या
व्याख्या
गणगौर पूजन चैत्र कृष्ण प्रतिपदा से शुरू होकर चैत्र शुक्ल तृतीया को संपन्न होता है। श्रावण शुक्ल तृतीया हरियाली तीज और भाद्रपद कृष्ण तृतीया कजली तीज है।
प्रश्न 6
कैला देवी का लक्खी मेला किस ज़िले में भरता है?
- Aकरौली
- Bसवाई माधोपुर
- Cधौलपुर
- Dभरतपुर
व्याख्या
कैला देवी मंदिर करौली ज़िले में है, जहाँ चैत्र शुक्ल अष्टमी को लक्खी मेला भरता है। श्री महावीर जी का जैन मेला भी करौली में ही भरता है।
प्रश्न 7
राजस्थान पर्यटन का 'ऊँट उत्सव' कहाँ आयोजित होता है?
- Aजैसलमेर
- Bबीकानेर
- Cबाड़मेर
- Dजोधपुर
व्याख्या
ऊँट उत्सव जनवरी में बीकानेर में आयोजित होता है। जैसलमेर में मरु महोत्सव और जोधपुर में मारवाड़ महोत्सव होता है।
प्रश्न 8
कक्षा 4 के बच्चों को राजस्थान के मेलों के स्थान समझाने के लिए सबसे प्रभावी तरीका कौन-सा है?
- Aमेलों की सूची दस बार लिखवाना
- Bराजस्थान के मानचित्र पर बच्चों से स्थान चिह्नित करवाना और अपने देखे मेले के अनुभव साझा करवाना
- Cकेवल शिक्षक द्वारा व्याख्यान देना
- Dमेलों के नाम की सूची परीक्षा से एक दिन पहले देना
व्याख्या
मानचित्र-कार्य और बच्चों के अपने अनुभव जोड़ने से स्थानिक समझ और रुचि दोनों बनती हैं, जो EVS की अनुभव-आधारित शिक्षण दृष्टि है। रटना और एकतरफ़ा व्याख्यान कम प्रभावी हैं।
प्रश्न 9
'हमारा त्योहार कैलेंडर' परियोजना में एक बच्चा लिखता है कि दीपावली कार्तिक पूर्णिमा को मनाई जाती है। शिक्षक को क्या करना चाहिए?
- Aउत्तर काटकर शून्य अंक देना
- Bपंचांग/कैलेंडर दिखाकर अमावस्या और पूर्णिमा का अंतर खोजने देना कि दीपावली की रात चाँद क्यों नहीं दिखता
- Cगलती को अनदेखा करना
- Dबच्चे को कक्षा के सामने टोकना
व्याख्या
दीपावली कार्तिक अमावस्या को मनाई जाती है। भ्रांति को खोज के अवसर में बदलना — कैलेंडर देखना और चाँद न दिखने से जोड़ना — रचनात्मक आकलन का सही तरीका है; अंक काटना या टोकना सीखने में मदद नहीं करता।
प्रश्न 10
निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है?
- Aकरणी माता मेला — देशनोक
- Bखाटू श्यामजी मेला — सीकर
- Cसीताबाड़ी मेला — केलवाड़ा (बारां)
- Dचंद्रभागा मेला — तिलवाड़ा
व्याख्या
चंद्रभागा मेला झालरापाटन (झालावाड़) में भरता है; तिलवाड़ा में मल्लीनाथ पशु मेला भरता है। बाकी तीनों युग्म सही हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
REET में राजस्थान के मेले एवं त्योहार से कितने प्रश्न आते हैं?+
संख्या तय नहीं है। REET 2024 Level 1 की पहली पाली में इस टॉपिक से 2 प्रश्न आए थे; राजस्थान की संस्कृति, वेशभूषा और लोकदेवता जैसे जुड़े टॉपिक मिलाकर EVS में यह हिस्सा और बढ़ जाता है।
'आदिवासियों का कुंभ' किस मेले को कहते हैं?+
डूंगरपुर के बेणेश्वर मेले को, जो सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर माघ शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक भरता है।
पुष्कर मेला कब और कहाँ लगता है?+
अजमेर ज़िले के पुष्कर में, कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक। यह ब्रह्मा मंदिर और पुष्कर सरोवर के कारण धार्मिक तथा ऊँट-पशु मेले के कारण आर्थिक दोनों दृष्टि से प्रसिद्ध है।
राजस्थान के प्रमुख पशु मेले कौन-से हैं?+
पुष्कर मेला (पुष्कर, कार्तिक), वीर तेजाजी पशु मेला (परबतसर, श्रावण पूर्णिमा से भाद्रपद अमावस्या), मल्लीनाथ पशु मेला (तिलवाड़ा-बालोतरा, चैत्र) और चंद्रभागा पशु मेला (झालरापाटन, कार्तिक पूर्णिमा)। इनमें ऊँट, बैल, घोड़े आदि पशुओं का क्रय-विक्रय होता है।
पांडुपोल मेला कहाँ लगता है?+
अलवर ज़िले में सरिस्का क्षेत्र के पांडुपोल में, जहाँ हनुमान जी का प्रसिद्ध मंदिर है। मान्यता है कि पांडवों ने अज्ञातवास के समय यहाँ समय बिताया था।
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बदलाव लॉग
- 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए