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REET Mains · विद्यालय प्रबंधन एवं शासन

विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) — संरचना व कार्य (REET Mains नोट्स)

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यह पेज विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) की कानूनी बुनियाद (RTE अधिनियम धारा 21-22), संरचना व कार्यों को स्पष्ट करता है। REET Mains में SMC की 75% अभिभावक-भागीदारी, 50% महिला-प्रतिनिधित्व व School Development Plan जैसे तथ्य बार-बार पूछे जाते हैं।

  • आधार REET में शामिल नहीं — REET Mains का टॉपिक
  • विद्यालय शासन स्तर
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16 सितंबर 2026 को सत्यापित · स्रोत: शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 — भारत सरकार

REET Mains में यह टॉपिक कैसे पूछा जाता है

REET 2024 में विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) से कोई प्रश्न नहीं आया, क्योंकि यह आधार REET के सिलेबस में शामिल नहीं है — यह RTE अधिनियम 2009 की धारा 21-22 पर आधारित एक विशुद्ध REET Mains (RSSB) टॉपिक है। यहाँ प्रश्न मुख्यतः SMC की संरचना (कितने प्रतिशत अभिभावक सदस्य, कितनी महिलाएँ), किस पर यह प्रावधान लागू होता है, और SMC के कार्य (जैसे School Development Plan) — इन तीन बिंदुओं पर केंद्रित रहते हैं। सटीक संख्या/अवधि राज्य की नियमावली अनुसार बदल सकती है, इसलिए मूल कानूनी प्रावधान (धारा 21-22) समझना ज़्यादा भरोसेमंद रणनीति है।

SMC क्या है और यह कहाँ अनिवार्य है?

विद्यालय प्रबंधन समिति (School Management Committee, SMC) शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 (RTE Act) की धारा 21 के अंतर्गत गठित एक स्थानीय निकाय है, जिसका उद्देश्य विद्यालय के दैनिक कामकाज में अभिभावकों व समुदाय की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना है। यह प्रावधान सरकारी विद्यालयों तथा सरकारी सहायता प्राप्त (aided) विद्यालयों पर लागू होता है; पूर्णतः निजी गैर-सहायता प्राप्त (unaided) विद्यालयों के लिए SMC गठित करना अनिवार्य नहीं है, हालाँकि कई ऐसे विद्यालय स्वेच्छा से अभिभावक-शिक्षक संघ (PTA) बनाते हैं।

SMC का मूल विचार यह है कि विद्यालय केवल शिक्षा विभाग की संपत्ति नहीं, बल्कि स्थानीय समुदाय की साझी ज़िम्मेदारी है — इसलिए निर्णय-प्रक्रिया में अभिभावकों को बहुमत में रखा गया है, जो भारत के विकेंद्रीकृत शिक्षा-प्रशासन मॉडल की एक अनूठी विशेषता है। यह व्यवस्था विशेष रूप से ग्रामीण व दूरदराज़ क्षेत्रों में उपयोगी सिद्ध होती है, जहाँ स्थानीय अभिभावक ही विद्यालय की वास्तविक ज़रूरतों से सबसे बेहतर परिचित होते हैं।

SMC की संरचना (RTE अधिनियम, धारा 21 के अनुसार)

अभिभावक/संरक्षक सदस्य
कुल सदस्यों का कम से कम 75% भाग उस विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों/संरक्षकों में से चुना जाता है।
शेष सदस्य
स्थानीय निकाय के निर्वाचित प्रतिनिधि, स्थानीय शिक्षाविद/प्रतिष्ठित व्यक्ति, तथा विद्यालय के शिक्षकों में से प्रतिनिधित्व शामिल होता है।
महिला प्रतिनिधित्व
समिति के कुल सदस्यों में कम से कम 50% महिलाएँ होना अनिवार्य है।
वंचित वर्ग का प्रतिनिधित्व
कमज़ोर वर्ग (Weaker Section) व वंचित समूह (Disadvantaged Group) के बच्चों के अभिभावकों को उनकी आनुपातिक संख्या के अनुसार प्रतिनिधित्व दिया जाता है।
अध्यक्ष व सदस्य-सचिव
अध्यक्ष प्रायः अभिभावक-सदस्यों में से चुना जाता है; संस्था-प्रधान (प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य) सामान्यतः पदेन सदस्य-सचिव होता है।

SMC के प्रमुख कार्य (RTE अधिनियम, धारा 22)

कार्यविवरण
विद्यालय के कामकाज की निगरानीउपस्थिति, अवसंरचना, शिक्षण-गुणवत्ता व मध्याह्न भोजन जैसी दैनिक व्यवस्थाओं पर नज़र रखना।
विद्यालय विकास योजना (SDP) तैयार करनाआवश्यकताओं के आधार पर एक वार्षिक/त्रैवार्षिक विकास योजना बनाकर स्थानीय प्राधिकरण को अनुशंसित करना।
अनुदान के उपयोग की निगरानीसरकार, स्थानीय निकाय या किसी अन्य स्रोत से मिले अनुदान का सही उपयोग सुनिश्चित करना।
नामांकन व ठहराव सुनिश्चित करनाक्षेत्र के आयु-वर्ग के सभी बच्चों का नामांकन व नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना, अनामांकित बच्चों की पहचान करना।
अन्य निर्धारित कार्यराज्य सरकार द्वारा समय-समय पर निर्धारित अतिरिक्त उत्तरदायित्व (जैसे शिकायत निवारण में सहयोग)।

ये कार्य RTE अधिनियम की धारा 22 में स्पष्ट रूप से उल्लिखित हैं और SMC को केवल परामर्शदात्री नहीं, बल्कि वैधानिक उत्तरदायित्व वाला निकाय बनाते हैं।

SMC क्यों महत्वपूर्ण है — शासन में समुदाय की भागीदारी

SMC को RTE अधिनियम में शामिल करने के पीछे मूल तर्क यह था कि विद्यालय-स्तरीय निर्णयों में केवल प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि वे अभिभावक भी भागीदार हों जिनके बच्चे वहाँ पढ़ते हैं — क्योंकि उन्हें ज़मीनी समस्याओं (जैसे शौचालय की सफ़ाई, पेयजल, असुरक्षित रास्ता) की सबसे सटीक जानकारी होती है। इससे विद्यालय व समुदाय के बीच पारदर्शिता व जवाबदेही दोनों बढ़ती हैं।

साथ ही, महिला सदस्यों की अनिवार्य 50% भागीदारी यह सुनिश्चित करती है कि बालिका-शिक्षा व सुरक्षा से जुड़े मुद्दे निर्णय-प्रक्रिया में उचित महत्व पाएँ। REET Mains की दृष्टि से यह समझना ज़रूरी है कि SMC कोई सजावटी समिति नहीं, बल्कि कानूनन अनिवार्य व वास्तविक अधिकार-संपन्न निकाय है।

कार्यकाल एवं सीमाएँ

SMC का गठन एक निश्चित अवधि के लिए होता है और अवधि पूरी होने पर पुनर्गठन किया जाता है; सटीक कार्यकाल (सामान्यतः कुछ वर्षों का) राज्य द्वारा बनाई गई अपनी RTE नियमावली में तय किया जाता है, इसलिए राजस्थान के लिए ठीक अवधि जानने हेतु राज्य की नवीनतम नियमावली देखना उचित रहता है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि SMC केवल परामर्शदात्री (advisory) निकाय नहीं है — कानून इसे विद्यालय विकास योजना बनाने व अनुदान-निगरानी जैसे ठोस, वैधानिक उत्तरदायित्व भी सौंपता है।

साथ ही SMC विद्यालय के शैक्षणिक निर्णयों (जैसे पाठ्यक्रम, परीक्षा-प्रणाली) में सीधा हस्तक्षेप नहीं करती — वह क्षेत्र BSER/SIERT जैसी अकादमिक संस्थाओं का है। SMC की भूमिका मुख्यतः प्रशासनिक-सहभागी (governance-participation) प्रकार की है, न कि पाठ्यक्रम-निर्धारक। यह भेद परीक्षा में अक्सर भ्रम पैदा करता है, इसलिए स्पष्ट रूप से समझ लें — SMC 'क्या ज़रूरी है' तय करने में मदद करती है, 'कैसे पढ़ाया जाए' यह तय करना उसका कार्य-क्षेत्र नहीं है।

कक्षा/स्कूल में व्यावहारिक प्रभाव

SMC बैठकों में भागीदारी

संस्था-प्रधान व शिक्षकों को नियमित SMC बैठकों में विद्यालय की स्थिति (उपस्थिति, परिणाम, अवसंरचना) स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करनी होती है।

SDP में योगदान

शिक्षक कक्षा-स्तरीय आवश्यकताओं (जैसे शिक्षण सामग्री, फर्नीचर) की जानकारी देकर विद्यालय विकास योजना को यथार्थवादी बनाने में मदद कर सकते हैं।

अभिभावक-विश्वास निर्माण

SMC के माध्यम से नियमित संवाद से अभिभावकों का विद्यालय पर भरोसा बढ़ता है, जिसका सीधा असर उपस्थिति व सीखने के माहौल पर पड़ता है।

पारदर्शी अनुदान-उपयोग

विद्यालय अनुदान का व्यय SMC बैठक में साझा करने से भविष्य में मिलने वाले अनुदान की स्वीकृति व समुदाय का सहयोग दोनों आसान होते हैं।

याद रखने की ट्रिक

SMC की संरचना याद रखने के लिए '75-50' याद रखें — कम से कम 75% सदस्य अभिभावक/संरक्षक और कम से कम 50% सदस्य महिलाएँ; और याद रखें SMC सरकारी व सरकारी-सहायता प्राप्त विद्यालयों में अनिवार्य है, पूर्णतः निजी (unaided) विद्यालयों में नहीं।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

SMC का गठन RTE अधिनियम, 2009 की किस धारा के अंतर्गत होता है?

  1. Aधारा 12
  2. Bधारा 17
  3. Cधारा 21
  4. Dधारा 30

व्याख्या

RTE अधिनियम की धारा 21 विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) के गठन का प्रावधान करती है, जबकि धारा 22 इसके कार्य निर्धारित करती है।

प्रश्न 2

SMC में अभिभावक/संरक्षक सदस्यों का न्यूनतम प्रतिशत कितना निर्धारित है?

  1. A50%
  2. B60%
  3. C75%
  4. D100%

व्याख्या

RTE अधिनियम के अनुसार SMC के कुल सदस्यों में से कम से कम 75% सदस्य उस विद्यालय के बच्चों के अभिभावक/संरक्षक होने चाहिए।

प्रश्न 3

SMC में महिला सदस्यों का न्यूनतम प्रतिशत कितना होना अनिवार्य है?

  1. A25%
  2. B33%
  3. C50%
  4. D75%

व्याख्या

RTE अधिनियम के अनुसार SMC के कुल सदस्यों में से कम से कम 50% महिलाएँ होना अनिवार्य है।

प्रश्न 4

निम्न में से किस प्रकार के विद्यालय में SMC का गठन RTE अधिनियम के तहत अनिवार्य नहीं है?

  1. Aराजकीय विद्यालय
  2. Bसरकारी सहायता प्राप्त विद्यालय
  3. Cपूर्णतः निजी गैर-सहायता प्राप्त (unaided) विद्यालय
  4. Dस्थानीय निकाय द्वारा संचालित विद्यालय

व्याख्या

RTE अधिनियम की धारा 21 सरकारी व सरकारी-सहायता प्राप्त विद्यालयों पर लागू होती है; पूर्णतः निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए SMC अनिवार्य नहीं है।

प्रश्न 5

SMC का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ी कार्य कौन-सा है?

  1. Aबोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित करना
  2. Bविद्यालय विकास योजना (SDP) तैयार करना
  3. Cशिक्षकों की भर्ती करना
  4. Dपाठ्यपुस्तक छापना

व्याख्या

RTE अधिनियम की धारा 22 के अनुसार SMC का एक प्रमुख कार्य विद्यालय विकास योजना (SDP) तैयार कर अनुशंसित करना है।

प्रश्न 6

SMC में सदस्य-सचिव का पद सामान्यतः किसके पास होता है?

  1. Aज़िला शिक्षा अधिकारी
  2. Bसंस्था-प्रधान (प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य)
  3. Cस्थानीय विधायक
  4. Dअभिभावक अध्यक्ष

व्याख्या

संस्था-प्रधान (प्रधानाध्यापक/प्रधानाचार्य) सामान्यतः SMC का पदेन सदस्य-सचिव होता है, जबकि अध्यक्ष अभिभावक-सदस्यों में से चुना जाता है।

प्रश्न 7

SMC का गठन किस मूल उद्देश्य से किया गया है?

  1. Aकेवल सरकारी निरीक्षण को प्रतिस्थापित करना
  2. Bविद्यालय के कामकाज में अभिभावकों व समुदाय की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करना
  3. Cशिक्षकों के वेतन तय करना
  4. Dपाठ्यक्रम निर्माण करना

व्याख्या

SMC का मूल उद्देश्य विद्यालय की निर्णय-प्रक्रिया में अभिभावकों व स्थानीय समुदाय को सीधे भागीदार बनाना है, ताकि पारदर्शिता व जवाबदेही बढ़े।

प्रश्न 8

SMC में वंचित वर्ग (Disadvantaged Group) के अभिभावकों को प्रतिनिधित्व किस आधार पर दिया जाता है?

  1. Aआयु के आधार पर
  2. Bआनुपातिक संख्या के आधार पर
  3. Cकेवल लॉटरी से
  4. Dवरिष्ठता के आधार पर

व्याख्या

कमज़ोर वर्ग व वंचित समूह के बच्चों के अभिभावकों को उनकी विद्यालय में आनुपातिक संख्या के अनुसार SMC में प्रतिनिधित्व दिया जाता है।

प्रश्न 9

एक शिक्षक के रूप में SMC बैठक में सबसे उपयोगी योगदान क्या होगा?

  1. Aबैठक से अनुपस्थित रहना
  2. Bकक्षा-स्तरीय आवश्यकताओं की स्पष्ट जानकारी देना
  3. Cकेवल सुनना और कुछ न बोलना
  4. DSDP पर आपत्ति जताना बिना कारण

व्याख्या

शिक्षक कक्षा-स्तरीय वास्तविक आवश्यकताओं (सामग्री, फर्नीचर, सीखने की समस्याएँ) की स्पष्ट जानकारी देकर SDP को अधिक यथार्थवादी व उपयोगी बना सकता है।

प्रश्न 10

SMC के कार्यों में 'अनुदान के उपयोग की निगरानी' का क्या अर्थ है?

  1. Aअनुदान को स्वयं खर्च करना
  2. Bसरकार/स्थानीय निकाय से मिले अनुदान का सही व पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करना
  3. Cअनुदान वापस भेजना
  4. Dअनुदान को छिपाना

व्याख्या

SMC का एक कार्य यह सुनिश्चित करना है कि विद्यालय को मिलने वाला अनुदान सही उद्देश्य के लिए व पारदर्शी ढंग से खर्च हो, जिसकी वह निगरानी करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

SMC किस अधिनियम की किस धारा के अंतर्गत गठित होती है?+

SMC का गठन RTE अधिनियम, 2009 की धारा 21 के अंतर्गत होता है, और इसके कार्य धारा 22 में निर्धारित हैं।

SMC में अभिभावक सदस्यों का प्रतिशत कितना होना चाहिए?+

कुल सदस्यों में से कम से कम 75% सदस्य उस विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावक/संरक्षक होने चाहिए।

क्या निजी गैर-सहायता प्राप्त विद्यालयों में SMC बनाना अनिवार्य है?+

नहीं, RTE अधिनियम की धारा 21 का यह प्रावधान सरकारी व सरकारी-सहायता प्राप्त विद्यालयों पर लागू होता है; पूर्णतः निजी (unaided) विद्यालयों के लिए यह अनिवार्य नहीं है।

SMC का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज़ी कार्य क्या है?+

विद्यालय विकास योजना (School Development Plan, SDP) तैयार करना व उसे अनुशंसित करना, जो विद्यालय की अवसंरचना व शैक्षणिक ज़रूरतों की रूपरेखा तय करता है।

क्या SMC पाठ्यक्रम या परीक्षा-प्रणाली तय करती है?+

नहीं, SMC की भूमिका मुख्यतः प्रशासनिक-सहभागी (governance) है; पाठ्यक्रम व परीक्षा-प्रणाली जैसे अकादमिक निर्णय SIERT/RSCERT व BSER जैसी संस्थाओं के अधिकार-क्षेत्र में आते हैं।

SMC का अध्यक्ष कैसे चुना जाता है?+

अध्यक्ष सामान्यतः अभिभावक-सदस्यों में से समिति द्वारा ही चुना जाता है, जबकि संस्था-प्रधान पदेन सदस्य-सचिव के रूप में बैठकों का संचालन व अभिलेखीकरण सँभालता है।

SMC बैठकें कितनी बार होनी चाहिए?+

नियमित अंतराल पर (सामान्यतः प्रतिमाह या तिमाही) SMC बैठकें आयोजित होनी चाहिए ताकि विद्यालय की प्रगति, अनुदान-उपयोग व SDP पर सतत चर्चा हो सके; सटीक आवृत्ति राज्य नियमावली में निर्धारित होती है।

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आधिकारिक स्रोत

  1. शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 — भारत सरकार
  2. इंडिया कोड — केंद्रीय अधिनियम

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए