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REET L1+L2 · संस्कृत

संस्कृत धातु रूप: पठ् और भू धातु के लट् लकार सहित रूप

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धातु रूप यानी क्रिया के मूल रूप (धातु) से पुरुष, वचन और लकार के अनुसार बनने वाले रूप, संस्कृत व्याकरण का वह हिस्सा हैं जहाँ सबसे अधिक गलतियाँ होती हैं क्योंकि हर लकार का अलग पैटर्न याद रखना पड़ता है। इस पेज में पठ् (पढ़ना) और भू (होना) धातु के लट् लकार (वर्तमान काल) के पूरे रूप, तथा अन्य लकारों का संक्षिप्त परिचय दिया गया है।

  • 2024 में सीधा PYQ दर्ज नहीं, पाठ्यक्रम-आधारित
  • कक्षा 6-8 स्तर
  • 10 मिनट पढ़ें

REET में धातु रूप कैसे पूछे जाते हैं

RajStudy के डेटाबेस में इस टॉपिक से जुड़ा कोई REET 2024 प्रश्न अभी दर्ज नहीं है, इसलिए यहाँ प्रश्न-शैली का अनुमान किसी विशेष पिछले प्रश्न पर नहीं बल्कि सीधे आधिकारिक REET पाठ्यक्रम और मानक संस्कृत व्याकरण की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित है — यह ईमानदारी से बता देना जरूरी समझा गया। सामान्यतः किसी धातु का किसी निश्चित पुरुष, वचन व लकार में रूप पहचानने को कहा जाता है — जैसे 'पठ् धातु का लट् लकार, मध्यम पुरुष, एकवचन रूप क्या है?' लट् लकार (वर्तमान काल) सबसे अधिक पूछा जाता है, इसलिए इसे पूरी तरह कंठस्थ रखना सबसे जरूरी है।

पुरुष, वचन और लकार — आधारभूत जानकारी

संस्कृत क्रिया रूप तीन बातों पर निर्भर करता है — पुरुष (प्रथम पुरुष = वह/वे, मध्यम पुरुष = तुम/तुम लोग, उत्तम पुरुष = मैं/हम), वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) और लकार (काल/भाव, जैसे वर्तमान, भूत, भविष्य)। एक धातु के एक लकार में कुल 9 रूप बनते हैं — तीन पुरुष × तीन वचन।

REET पाठ्यक्रम में मुख्यतः पाँच लकार आते हैं — लट् (वर्तमान काल), लङ् (सामान्य भूतकाल), लृट् (सामान्य भविष्यत् काल), विधिलिङ् (चाहिए/संभावना का भाव) और लोट् (आज्ञा/अनुमति)। सभी धातुओं के परस्मैपद रूप बनाने का आधार-ढाँचा (व्यक्ति-प्रत्यय) एक जैसा रहता है, इसलिए एक धातु का लट् लकार अच्छी तरह समझ लेने पर बाकी धातुओं के रूप बनाना आसान हो जाता है।

'पठ्' धातु रूप — लट् लकार (वर्तमान काल, परस्मैपद)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुष (वह पढ़ता है)पठतिपठतःपठन्ति
मध्यम पुरुष (तुम पढ़ते हो)पठसिपठथःपठथ
उत्तम पुरुष (मैं पढ़ता हूँ)पठामिपठावःपठामः

पठ् भ्वादिगण की धातु है; इसका रूप-ढाँचा अधिकांश सामान्य परस्मैपदी धातुओं (गम्, पठ्, पत् आदि) के लिए प्रतिनिधि पैटर्न है।[स्रोत 2]

'भू' धातु रूप — लट् लकार (होना, परस्मैपद)

पुरुषएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथम पुरुषभवतिभवतःभवन्ति
मध्यम पुरुषभवसिभवथःभवथ
उत्तम पुरुषभवामिभवावःभवामः

'भू' (होना) संस्कृत की सबसे अधिक प्रयोग होने वाली और हर पाठ्यपुस्तक में सबसे पहले पढ़ाई जाने वाली धातु है।

लकार-परिचय: 'पठ्' धातु का प्रथम पुरुष, एकवचन रूप हर लकार में

लकारकाल/भावप्रथम पुरुष एकवचन रूप
लट्वर्तमान काल (वह पढ़ता है)पठति
लङ्सामान्य भूतकाल (उसने पढ़ा)अपठत्
लृट्सामान्य भविष्यत् काल (वह पढ़ेगा)पठिष्यति
विधिलिङ्चाहिए/संभावना (उसे पढ़ना चाहिए)पठेत्
लोट्आज्ञा/अनुमति (वह पढ़े)पठतु

पूरी परीक्षा-तैयारी के लिए हर लकार के कम-से-कम प्रथम पुरुष एकवचन रूप याद रखें, फिर लट् लकार जैसी 9-रूप तालिका पर विस्तार करें। द्विवचन-बहुवचन रूपों को अपनी पाठ्यपुस्तक से मिलाकर पुष्टि जरूर करें।

धातु रूप याद रखने की व्यवस्थित विधि

धातु रूप याद रखने की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एक ही धातु के पाँच अलग-अलग लकारों में नौ-नौ रूप, यानी कुल पैंतालीस रूप बन सकते हैं। इसलिए इसे एक साथ रटने की बजाय दो चरणों में तोड़ना बेहतर है — पहले किसी एक धातु (जैसे पठ्) का लट् लकार पूरी तरह पक्का करें, इसके प्रत्यय-ढाँचे (ति-तः-न्ति, सि-थः-थ, मि-वः-मः) को समझें; फिर उसी ढाँचे को बाकी लकारों (लङ्, लृट्, विधिलिङ्) पर लागू करना सीखें, क्योंकि आधार-प्रत्यय काफी हद तक मिलते-जुलते रहते हैं।

दूसरा चरण है — एक बार एक धातु के सभी लकार समझ आ जाएँ, तो दूसरी परिचित धातु (जैसे भू, गम्, पत्, हस्) पर वही तरीका आज़माएँ। REET पाठ्यक्रम में गिनी-चुनी परिचित धातुएँ ही बार-बार आती हैं (पठ्, गम्, कृ, भू, दा, पा, हस्, वद् जैसी), इसलिए इन पर विशेष ध्यान देना समय बचाने वाली रणनीति है।

धातु रूप को वाक्य में इस्तेमाल करके अभ्यास करना भी उतना ही जरूरी है जितना तालिका याद रखना। जैसे 'बालकः पठति' (बालक पढ़ता है), 'बालकौ पठतः' (दोनों बालक पढ़ते हैं) और 'बालकाः पठन्ति' (बालक पढ़ते हैं) — इन तीन वाक्यों को साथ-साथ देखने पर पता चलता है कि कर्ता का वचन बदलते ही क्रिया का रूप भी उसी के अनुरूप बदलना चाहिए, यह शब्द रूप और धातु रूप के बीच का सीधा व्यावहारिक जुड़ाव है।

REET के प्रश्न-पत्र में धातु रूप अक्सर स्वतंत्र प्रश्न के रूप में तो आता ही है, साथ ही अनुवाद व वाक्य-रचना के प्रश्नों के अंदर भी छिपा रहता है, क्योंकि बिना सही क्रिया-रूप के कोई भी वाक्य पूरा नहीं बनता। इसलिए धातु रूप को शब्द रूप, कारक-विभक्ति और अनुवाद-कौशल — इन तीनों टॉपिकों से जोड़कर पढ़ना, अलग-थलग रटने से कहीं अधिक असरदार रणनीति है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि

कक्षा में रोज़मर्रा की क्रियाएँ (पढ़ना, खेलना, खाना) करते हुए बच्चों से उसी क्षण संबंधित धातु रूप बुलवाना (जैसे कोई बच्चा पढ़े तो पूरी कक्षा बोले 'सः पठति') — क्रिया और रूप को जोड़कर याद कराना सबसे असरदार तरीका है।

शिक्षण सहायक सामग्री

पुरुष-वचन की 3x3 तालिका (ग्रिड) बड़े चार्ट पर बनाकर कक्षा में टाँगना, ताकि हर धातु के रूप उसी ढाँचे में भरे जा सकें।

सामान्य भ्रांति

बच्चे प्रायः प्रथम पुरुष और उत्तम पुरुष को उलट देते हैं (हिंदी में क्रम अलग होता है), और मध्यम पुरुष के 'थ/थः/सि' प्रत्ययों को भूल जाते हैं — क्रम को अंग्रेज़ी/हिंदी वाक्य के साथ जोड़कर समझाना उपयोगी है।

आकलन

एक पुरुष-वचन बोलकर बच्चों से 'पठ्' और 'भू' दोनों धातुओं का रूप एक साथ लिखवाना, ताकि पैटर्न की समझ जाँची जा सके।

याद रखने की ट्रिक

लट् लकार के नौ प्रत्यय हमेशा इसी क्रम में याद रखें — प्रथम पुरुष: ति-तः-न्ति, मध्यम पुरुष: सि-थः-थ, उत्तम पुरुष: मि-वः-मः। यह प्रत्यय-ढाँचा लगभग हर परस्मैपदी धातु (पठ्, गम्, भू, पत् आदि) पर एक जैसा लागू होता है, बस धातु का अंतिम अंश जुड़ता है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

'पठ्' धातु का लट् लकार, प्रथम पुरुष एकवचन रूप है

  1. Aपठति
  2. Bपठसि
  3. Cपठामि
  4. Dपठन्ति

व्याख्या

प्रथम पुरुष एकवचन 'वह पढ़ता है' के लिए 'पठति' रूप प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 2

'भू' धातु का लट् लकार, उत्तम पुरुष बहुवचन रूप है

  1. Aभवामः
  2. Bभवामि
  3. Cभवावः
  4. Dभवन्ति

व्याख्या

उत्तम पुरुष बहुवचन 'हम होते हैं' के लिए 'भवामः' रूप प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 3

'पठथः' किस पुरुष व वचन का रूप है?

  1. Aमध्यम पुरुष, द्विवचन
  2. Bप्रथम पुरुष, द्विवचन
  3. Cउत्तम पुरुष, एकवचन
  4. Dमध्यम पुरुष, बहुवचन

व्याख्या

'पठथः' मध्यम पुरुष द्विवचन का रूप है, जिसका अर्थ है 'तुम दोनों पढ़ते हो'।

प्रश्न 4

लट् लकार किस काल को दर्शाता है?

  1. Aवर्तमान काल
  2. Bभूतकाल
  3. Cभविष्यत् काल
  4. Dआज्ञार्थ

व्याख्या

लट् लकार वर्तमान काल (present tense) दर्शाता है — जैसे 'सः पठति' (वह पढ़ता है)।

प्रश्न 5

'पठ्' धातु का मध्यम पुरुष, एकवचन (लट् लकार) रूप है

  1. Aपठसि
  2. Bपठति
  3. Cपठामि
  4. Dपठथ

व्याख्या

मध्यम पुरुष एकवचन 'तुम पढ़ते हो' के लिए 'पठसि' रूप प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 6

एक धातु के एक लकार में कुल कितने रूप बनते हैं?

  1. A9
  2. B6
  3. C3
  4. D12

व्याख्या

तीन पुरुष और तीन वचन के संयोजन से कुल 9 (3×3) रूप बनते हैं।

प्रश्न 7

'भू' धातु का प्रथम पुरुष, द्विवचन (लट् लकार) रूप है

  1. Aभवतः
  2. Bभवति
  3. Cभवथः
  4. Dभवन्ति

व्याख्या

प्रथम पुरुष द्विवचन 'वे दोनों होते हैं' के लिए 'भवतः' रूप प्रयुक्त होता है।

प्रश्न 8

विधिलिङ् लकार किस भाव को दर्शाता है?

  1. Aचाहिए/संभावना का भाव
  2. Bआज्ञा का भाव
  3. Cवर्तमान काल
  4. Dभूतकाल

व्याख्या

विधिलिङ् लकार 'चाहिए' या संभावना का भाव दर्शाता है — जैसे 'सः पठेत्' (उसे पढ़ना चाहिए)।

प्रश्न 9

'पठामः' रूप में 'पठ्' धातु किस पुरुष-वचन में है?

  1. Aउत्तम पुरुष, बहुवचन
  2. Bप्रथम पुरुष, बहुवचन
  3. Cमध्यम पुरुष, बहुवचन
  4. Dउत्तम पुरुष, द्विवचन

व्याख्या

'पठामः' का अर्थ है 'हम पढ़ते हैं', जो उत्तम पुरुष बहुवचन का रूप है।

प्रश्न 10

धातु रूप पढ़ाते समय कक्षा में सबसे प्रभावी तरीका कौन-सा है?

  1. Aकेवल तालिका रटवाना
  2. Bरोज़मर्रा की क्रिया करते हुए उसी क्षण संबंधित रूप बुलवाना
  3. Cसिर्फ पाठ्यपुस्तक से लिखवाना
  4. Dधातु रूप को छोड़ देना

व्याख्या

क्रिया को करते हुए संबंधित रूप बोलने से बच्चों के लिए रूप और अर्थ का संबंध स्वाभाविक रूप से याद रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लकार किसे कहते हैं?+

क्रिया के काल (समय) या भाव (जैसे आज्ञा, संभावना) को दर्शाने वाले व्याकरणिक रूप को 'लकार' कहते हैं। संस्कृत में दस लकार होते हैं, पर REET पाठ्यक्रम में मुख्यतः लट्, लङ्, लृट्, विधिलिङ् और लोट् पढ़ाए जाते हैं।

लट् लकार किसे दर्शाता है?+

लट् लकार वर्तमान काल (present tense) को दर्शाता है — जैसे 'सः पठति' का अर्थ है 'वह पढ़ता है'।

एक धातु के एक लकार में कुल कितने रूप बनते हैं?+

तीन पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और तीन वचन (एक, द्वि, बहु) के संयोजन से एक लकार में कुल 9 रूप बनते हैं।

'सः पठति' में 'पठति' किस पुरुष और वचन का रूप है?+

'पठति' प्रथम पुरुष, एकवचन का रूप है और इसका अर्थ है 'वह पढ़ता है' — प्रथम पुरुष उस व्यक्ति के लिए प्रयोग होता है जिसके बारे में बात हो रही हो (वह/वे)।

परस्मैपद और आत्मनेपद में क्या अंतर है?+

जिन धातुओं के रूप केवल परस्मैपद प्रत्ययों (ति, तः, न्ति आदि) से बनते हैं उन्हें परस्मैपदी कहते हैं (जैसे पठ्, गम्), जबकि कुछ धातुएँ आत्मनेपद प्रत्ययों से भी रूप बनाती हैं — REET पाठ्यक्रम में मुख्यतः परस्मैपदी धातुओं पर ध्यान केंद्रित रहता है।

एक ही धातु के अलग-अलग लकार में रूप इतने अलग क्यों होते हैं?+

हर लकार धातु और व्यक्ति-प्रत्यय के बीच अलग प्रकार का प्रत्यय या आगम (जैसे लङ् में 'अ', लृट् में 'स्य/इष्य') जोड़ता है, जिससे रूप बदल जाता है, भले ही मूल धातु और व्यक्ति-प्रत्यय का ढाँचा मिलता-जुलता रहे।

क्या सभी धातुओं के रूप एक ही पैटर्न पर बनते हैं?+

नहीं, संस्कृत धातुएँ दस गणों (भ्वादि, अदादि, जुहोत्यादि आदि) में बँटी हैं और हर गण का अपना थोड़ा अलग रूप-ढाँचा होता है; पठ् व भू दोनों भ्वादिगण की हैं, इसलिए इनका पैटर्न एक जैसा है, पर अन्य गणों की धातुओं में हल्का अंतर हो सकता है।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. राजस्थान शिक्षा बोर्ड (BSER) — REET आधिकारिक पोर्टल
  2. पारंपरिक संस्कृत व्याकरण संदर्भ (Vyākaraṇa-praveśaḥ)

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए