मुख्य सामग्री पर जाएं
REET L1+L2 · संस्कृत

संस्कृत कारक एवं विभक्ति: छह कारकों का पूरा संबंध

Read this in English →

कारक और विभक्ति का सही मेल जाने बिना न तो शब्द रूप समझ आते हैं, न वाक्य-रचना — इसलिए REET में यह टॉपिक व्याकरण की नींव माना जाता है। इस पेज में छह कारकों और उनकी विभक्तियों का संबंध उदाहरण सहित स्पष्ट किया गया है।

  • 2024 में सीधा PYQ दर्ज नहीं, पाठ्यक्रम-आधारित
  • कक्षा 6-8 स्तर
  • 9 मिनट पढ़ें

REET में कारक-विभक्ति कैसे पूछे जाते हैं

RajStudy के डेटाबेस में इस टॉपिक से जुड़ा कोई REET 2024 प्रश्न अभी दर्ज नहीं है, इसलिए यहाँ प्रश्न-शैली का अनुमान किसी विशेष पिछले प्रश्न पर नहीं बल्कि सीधे आधिकारिक REET पाठ्यक्रम और मानक संस्कृत व्याकरण की पाठ्यपुस्तकों पर आधारित है — यह ईमानदारी से बता देना जरूरी समझा गया। सामान्यतः किसी वाक्य में रेखांकित शब्द का कारक पहचानने, या किसी कारक की सही विभक्ति बताने को कहा जाता है — जैसे 'करण कारक में कौन-सी विभक्ति होती है?' संबंध (षष्ठी) को कारक न मानने जैसी बारीकियाँ भी परीक्षा में पूछी जा सकती हैं।

कारक और विभक्ति में अंतर

क्रिया के साथ संज्ञा या सर्वनाम का जो संबंध होता है, उसे 'कारक' कहते हैं — यानी वाक्य में कौन क्या कर रहा है, किसके लिए कर रहा है, किससे कर रहा है, आदि। इस संबंध को शब्द के अंत में जो चिह्न (प्रत्यय) जोड़कर दिखाया जाता है, उसे 'विभक्ति' कहते हैं।

संस्कृत में परंपरागत रूप से छह कारक माने जाते हैं — कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान और अधिकरण। संबंध (षष्ठी विभक्ति) को तकनीकी रूप से कारक नहीं माना जाता क्योंकि वह सीधे क्रिया से नहीं बल्कि दूसरी संज्ञा से जुड़ता है, फिर भी विभक्ति-व्यवस्था में इसे साथ पढ़ाया जाता है।

छह कारक और उनकी विभक्ति

कारकविभक्तिअर्थ/प्रश्नउदाहरण
कर्ताप्रथमाक्रिया करने वाला — 'कौन?'रामः पठति (राम पढ़ता है)
कर्मद्वितीयाजिस पर क्रिया का फल पड़े — 'किसको/क्या?'रामः पुस्तकं पठति (राम पुस्तक पढ़ता है)
करणतृतीयाजिसके द्वारा क्रिया हो — 'किससे/किसके द्वारा?'रामः लेखन्या लिखति (राम कलम से लिखता है)
संप्रदानचतुर्थीजिसके लिए क्रिया हो, दान का पात्र — 'किसके लिए?'रामः दरिद्राय धनं ददाति (राम गरीब को धन देता है)
अपादानपंचमीजिससे अलगाव/दूरी हो — 'कहाँ से?'वृक्षात् पत्रं पतति (वृक्ष से पत्ता गिरता है)
अधिकरणसप्तमीक्रिया का आधार — स्थान या समय — 'कहाँ/कब?'रामः गृहे वसति (राम घर में रहता है)

छह कारक और प्रथमा से सप्तमी तक (चौथी को छोड़कर हर एक अपनी संबंधित विभक्ति) — याद रखने का सबसे आसान तरीका है 'किसके लिए किया जा रहा है' वाला प्रश्न पूछना।[स्रोत 2]

जरूरी अपवाद — जो कारक नहीं हैं

संबंध (षष्ठी विभक्ति)
यह क्रिया से नहीं बल्कि दूसरी संज्ञा से जुड़ता है (जैसे 'रामस्य पुस्तकम्' = राम की पुस्तक), इसलिए तकनीकी रूप से कारक नहीं माना जाता।
संबोधन (प्रथमा का विशेष रूप)
किसी को पुकारने के लिए प्रयुक्त होता है (जैसे 'हे राम!'), इसे भी स्वतंत्र कारक नहीं बल्कि प्रथमा विभक्ति का ही एक विशेष प्रयोग माना जाता है।

कारक-विभक्ति को वाक्य-रचना में कैसे लागू करें

कारक-विभक्ति का असली उपयोग तब दिखता है जब पूरे वाक्य में हर शब्द को उसके कारक के अनुसार सही विभक्ति दी जाए। उदाहरण के लिए 'रामः वृक्षात् पात्रेण फलं मित्राय ददाति' वाक्य में एक साथ चार कारक दिखते हैं — कर्ता (रामः, प्रथमा), अपादान (वृक्षात्, पंचमी — यानी पेड़ से), करण (पात्रेण, तृतीया — यानी पात्र के द्वारा) और संप्रदान (मित्राय, चतुर्थी — यानी मित्र के लिए), साथ ही कर्म (फलं, द्वितीया)। ऐसे संयुक्त वाक्यों का अभ्यास करने पर ही कारक-विभक्ति की वास्तविक समझ बनती है।

REET में अक्सर विद्यार्थियों को यह भ्रम होता है कि विभक्ति का चुनाव हिंदी के परसर्ग (का, को, से, में) को शब्द-दर-शब्द अनुवाद करने से होता है, जबकि असली नियम यह है कि पहले कारक-अर्थ (कौन, किसको, किससे) पहचानना है, फिर उसी के अनुसार विभक्ति चुननी है — क्योंकि कभी-कभी हिंदी का 'से' करण और अपादान दोनों में आ सकता है, इसलिए भाव समझना ज्यादा जरूरी है, शब्द-मिलान नहीं।

कारक और विभक्ति की समझ शब्द रूप व धातु रूप दोनों को जोड़ने वाली कड़ी है — जब तक यह स्पष्ट न हो कि किस कारक के लिए कौन-सी विभक्ति चाहिए, तब तक शब्द रूप की तालिका में से सही रूप चुनना संभव नहीं होता। इसलिए इस टॉपिक को व्याकरण के बाकी सभी टॉपिकों से पहले या कम-से-कम साथ-साथ पक्का करना सबसे बुद्धिमानी भरी रणनीति है।

REET में कारक-विभक्ति के प्रश्न कभी-कभी सीधे परिभाषा पूछने के बजाय एक पूरा वाक्य देकर उसमें से रेखांकित शब्द का कारक पहचानने के रूप में आते हैं, जो अपेक्षाकृत कठिन माने जाते हैं क्योंकि इसके लिए वाक्य का पूरा अर्थ समझना पड़ता है। इसलिए केवल तालिका रटने की बजाय अलग-अलग कारकों वाले कई पूरे वाक्यों का अभ्यास करना ही सबसे भरोसेमंद तैयारी है।

बच्चों को कैसे पढ़ाएँ

गतिविधि

एक सरल संस्कृत वाक्य ('रामः वृक्षात् फलं पात्रेण गृह्णाति' जैसा) श्यामपट्ट पर लिखकर हर शब्द के नीचे उसका कारक-नाम लिखवाना — पूरे वाक्य को कारकों में तोड़कर देखने से संबंध स्पष्ट होता है।

शिक्षण सहायक सामग्री

छह कारकों का एक प्रश्न-आधारित चार्ट ('कौन? किसको? किससे? किसके लिए? कहाँ से? कहाँ?') कक्षा में लगाना, ताकि बच्चे विभक्ति को प्रश्न से जोड़कर याद रखें।

सामान्य भ्रांति

बच्चे प्रायः करण और अपादान (दोनों में 'से' शब्द आता है) को भ्रमित करते हैं — 'साधन से' (करण) और 'अलगाव के अर्थ में से' (अपादान) का अंतर उदाहरण देकर स्पष्ट करना जरूरी है।

आकलन

पाँच हिंदी वाक्य देकर बच्चों से रेखांकित शब्द का कारक व विभक्ति दोनों पहचानने को कहना एक प्रभावी लिखित आकलन है।

याद रखने की ट्रिक

छह कारकों को 'क-क-क-सं-अ-अ' क्रम में याद रखें — कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, अधिकरण — और हर एक की विभक्ति क्रमांक (प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, सप्तमी) साथ जोड़ें; ध्यान रहे कि छठी विभक्ति (षष्ठी) इस क्रम में शामिल नहीं है क्योंकि संबंध कारक नहीं है।

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1

करण कारक में कौन-सी विभक्ति होती है?

  1. Aतृतीया
  2. Bद्वितीया
  3. Cचतुर्थी
  4. Dपंचमी

व्याख्या

करण कारक 'जिसके द्वारा क्रिया हो' दर्शाता है और इसकी विभक्ति तृतीया होती है — जैसे 'लेखन्या लिखति'।

प्रश्न 2

'वृक्षात् पत्रं पतति' वाक्य में 'वृक्षात्' किस कारक का उदाहरण है?

  1. Aअपादान
  2. Bकरण
  3. Cसंप्रदान
  4. Dअधिकरण

व्याख्या

'वृक्षात्' में अलगाव का भाव है (पेड़ से अलग होकर गिरना), इसलिए यह अपादान कारक है और पंचमी विभक्ति है।

प्रश्न 3

संप्रदान कारक की विभक्ति क्या है?

  1. Aचतुर्थी
  2. Bतृतीया
  3. Cषष्ठी
  4. Dसप्तमी

व्याख्या

संप्रदान कारक 'जिसके लिए क्रिया हो' दर्शाता है और इसकी विभक्ति चतुर्थी होती है — जैसे 'दरिद्राय धनं ददाति'।

प्रश्न 4

निम्न में से कौन-सा संस्कृत का कारक नहीं है?

  1. Aसंबंध
  2. Bकरण
  3. Cकर्म
  4. Dअधिकरण

व्याख्या

संबंध सीधे क्रिया से नहीं जुड़ता, इसलिए तकनीकी रूप से इसे कारक नहीं माना जाता, भले ही इसकी षष्ठी विभक्ति होती है।

प्रश्न 5

'रामः गृहे वसति' वाक्य में 'गृहे' किस कारक का उदाहरण है?

  1. Aअधिकरण
  2. Bअपादान
  3. Cसंप्रदान
  4. Dकरण

व्याख्या

'गृहे' क्रिया के स्थान को दर्शाता है, इसलिए यह अधिकरण कारक है और सप्तमी विभक्ति है।

प्रश्न 6

कर्म कारक की विभक्ति क्या है?

  1. Aद्वितीया
  2. Bप्रथमा
  3. Cतृतीया
  4. Dचतुर्थी

व्याख्या

कर्म कारक 'जिस पर क्रिया का फल पड़े' दर्शाता है और इसकी विभक्ति द्वितीया होती है — जैसे 'पुस्तकं पठति'।

प्रश्न 7

कर्ता कारक को पहचानने का प्रश्न कौन-सा है?

  1. Aक्रिया कौन कर रहा है?
  2. Bकिसके लिए किया जा रहा है?
  3. Cकिससे किया जा रहा है?
  4. Dकहाँ किया जा रहा है?

व्याख्या

कर्ता कारक 'क्रिया करने वाला कौन है' यह प्रश्न पूछने से पहचाना जाता है, और इसकी विभक्ति प्रथमा होती है।

प्रश्न 8

करण और अपादान कारक में मुख्य अंतर क्या है?

  1. Aकरण साधन बताता है, अपादान अलगाव/दूरी बताता है
  2. Bदोनों बिल्कुल एक जैसे हैं
  3. Cकरण केवल स्थान बताता है
  4. Dअपादान केवल समय बताता है

व्याख्या

करण 'किसके द्वारा' (साधन) बताता है (तृतीया विभक्ति), जबकि अपादान 'किससे अलग होकर' (दूरी/उत्पत्ति) बताता है (पंचमी विभक्ति)।

प्रश्न 9

कारक-विभक्ति पढ़ाते समय सबसे उपयोगी कक्षा-गतिविधि है

  1. Aपूरे वाक्य को कारकों में तोड़कर हर शब्द का कारक पहचनवाना
  2. Bकेवल विभक्ति के नाम रटवाना
  3. Cकारक-विभक्ति को छोड़ देना
  4. Dकेवल अंग्रेज़ी में समझाना

व्याख्या

पूरे वाक्य को कारकों में तोड़कर देखने से बच्चों को व्यावहारिक समझ बनती है, जो रटने से कहीं अधिक टिकाऊ है।

प्रश्न 10

अधिकरण कारक की विभक्ति क्या है?

  1. Aसप्तमी
  2. Bषष्ठी
  3. Cपंचमी
  4. Dचतुर्थी

व्याख्या

अधिकरण कारक क्रिया के आधार (स्थान/समय) को दर्शाता है और इसकी विभक्ति सप्तमी होती है — जैसे 'गृहे वसति'।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संस्कृत में कुल कितने कारक होते हैं?+

संस्कृत में छह कारक होते हैं — कर्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान और अधिकरण। संबंध (षष्ठी) को तकनीकी रूप से कारक नहीं माना जाता।

करण कारक किसे कहते हैं और इसकी विभक्ति क्या है?+

जिस साधन के द्वारा क्रिया की जाती है, उसे करण कारक कहते हैं और इसकी विभक्ति तृतीया होती है — जैसे 'लेखन्या लिखति' (कलम से लिखता है)।

संबंध को कारक क्यों नहीं माना जाता?+

संबंध सीधे क्रिया से नहीं जुड़ता, बल्कि दो संज्ञाओं के आपसी संबंध (जैसे स्वामित्व) को दर्शाता है — जैसे 'रामस्य पुस्तकम्' में 'राम' की क्रिया से कोई सीधा संबंध नहीं है।

अपादान कारक की पहचान कैसे करें?+

जहाँ किसी वस्तु से अलगाव, दूरी या उत्पत्ति का भाव हो, वहाँ अपादान कारक होता है और पंचमी विभक्ति लगती है — जैसे 'वृक्षात् पत्रं पतति' (पेड़ से पत्ता गिरता है)।

क्या हिंदी के परसर्ग सीधे संस्कृत विभक्ति से मेल खाते हैं?+

हमेशा नहीं। हिंदी का 'से' करण (तृतीया) और अपादान (पंचमी) दोनों में आ सकता है, इसलिए सही विभक्ति चुनने के लिए शब्द नहीं बल्कि वाक्य का वास्तविक भाव (साधन या अलगाव) समझना जरूरी है।

एक वाक्य में एक से अधिक कारक कैसे पहचानें?+

वाक्य को क्रिया के चारों ओर तोड़कर हर संज्ञा-शब्द से अलग-अलग प्रश्न पूछें (कौन, किसको, किससे, किसके लिए, कहाँ से, कहाँ) — जो भी प्रश्न सटीक बैठे, वही उस शब्द का कारक है।

क्या षष्ठी विभक्ति का कोई कारक नहीं होता?+

षष्ठी विभक्ति संबंध दर्शाती है, पर संबंध क्रिया से सीधे न जुड़कर दो संज्ञाओं के बीच होता है, इसलिए परंपरागत व्याकरण में इसे स्वतंत्र कारक नहीं, बल्कि कारक-व्यवस्था के बाहर की विभक्ति माना जाता है।

कारक-विभक्ति सीखने के बाद अगला कदम क्या होना चाहिए?+

कारक-विभक्ति पक्की होने के बाद शब्द रूप और धातु रूप की तालिकाओं को इसी ज्ञान के साथ जोड़कर दोहराना चाहिए, क्योंकि तभी यह समझ आता है कि कौन-सा रूप वाक्य में कहाँ और क्यों प्रयुक्त होगा।

आगे पढ़ें

आधिकारिक स्रोत

  1. राजस्थान शिक्षा बोर्ड (BSER) — REET आधिकारिक पोर्टल
  2. पारंपरिक संस्कृत व्याकरण संदर्भ (Vyākaraṇa-praveśaḥ)

बदलाव लॉग

  • 16 सितंबर 2026 — पेज प्रकाशित — तथ्य स्वतंत्र रूप से जाँचे गए