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📚 भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एवं शासन

राज्य नीति के निदेशक तत्त्व (अनुच्छेद 36-51)

Directive Principles of State Policy Articles 36-51

15 मिनटadvanced✓ अपडेटेड: मई 2026· Indian Constitution, Political System & Governance

परिचय

भाग IV अनुच्छेद 36-51 में राज्य नीति के निदेशक तत्त्व (DPSP) हैं। आयरलैंड के संविधान से प्रेरित। न्यायालय द्वारा प्रवर्तनीय नहीं (non-justiciable)।

मुख्य DPSP

समाजवादी: अनु. 39 (संसाधनों का न्यायपूर्ण वितरण), 39A (निःशुल्क कानूनी सहायता, 42वें संशोधन से)। गांधीवादी: अनु. 40 (ग्राम पंचायत), 43 (कुटीर उद्योग), 46 (SC/ST कल्याण), 48 (गोवध निषेध)। उदार: अनु. 44 (समान नागरिक संहिता), 48A (पर्यावरण, 42वें संशोधन), 50 (न्यायपालिका-कार्यपालिका पृथक्करण), 51 (अंतर्राष्ट्रीय शांति)। मूल कर्तव्य (अनु. 51A): 11 कर्तव्य, स्वर्ण सिंह समिति 1976।

RAS Prelims में महत्व

DPSP के प्रकार (समाजवादी, गांधीवादी, उदार), मूल कर्तव्यों की संख्या और स्रोत परीक्षा में पूछे जाते हैं।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
  • DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
  • भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
  • 73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
  • सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।
इस टॉपिक को पूरा करने के बाद मार्क करें — सिलेबस प्रगति में जुड़ जाएगा।

✍️ 5 सवाल हल करें

पढ़ने के बाद खुद को परखें — सभी सवाल हल करके अपनी streak बढ़ाएं। 🔥

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1

सूची-X का सूची-Y से मिलान कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए: | सूची-X | सूची-Y | ||| | (A) संविधान सभा के प्रथम उपाध्यक्ष | (i) वी. टी. कृष्णमाचारी | | (B) मूलतः प्रारूप समिति के एकमात्र कांग्रेस सदस्य | (ii) जवाहरलाल नेहरू | | (C) राजस्थान की रियासतों का प्रतिनिधित्व करने वाले संविधान सभा के सदस्य | (iii) के. एम. मुंशी | | (D) संघ संविधान समिति के अध्यक्ष | (iv) एच. सी. मुखर्जी | कूट:

2

संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुसार, धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार किसके अधीन नहीं है:

3

संविधान के अनुच्छेद 356 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: - (i) राज्यों में संवैधानिक तंत्र की विफलता एक वस्तुनिष्ठ वास्तविकता है। - (ii) इस अनुच्छेद के अंतर्गत की गई उद्घोषणा की समीक्षा उच्चतम न्यायालय द्वारा की जा सकती है। - (iii) इस उद्घोषणा के साथ राज्य विधानसभा को भंग किया जा सकता है। - (iv) इस उद्घोषणा का संसद के प्रत्येक सदन द्वारा दो माह के भीतर अनुमोदन किया जाना होता है। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

4

संवैधानिक संशोधनों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: - (i) अनुच्छेद 368 में संवैधानिक संशोधन की दो विधियाँ उल्लिखित हैं। - (ii) संवैधानिक संशोधन विधेयक केवल लोकसभा में ही प्रस्तुत किया जा सकता है। - (iii) संवैधानिक संशोधन विधेयक पर संसद के दोनों सदनों के बीच किसी विवाद की स्थिति में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक बुलाई जा सकती है। - (iv) राष्ट्रपति संवैधानिक संशोधन विधेयक पर वीटो नहीं कर सकते। उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

5

संविधान के अनुसार, निम्नलिखित में से शाब्दिक रूप से कौन-सी भारत के राष्ट्रपति की 'शक्ति' नहीं है?

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