परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
पर्यावरण (Environment) राजस्थान की अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग है। RPSC RAS परीक्षा में राजस्थान की अर्थव्यवस्था के अध्ययन में पर्यावरणीय कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राजस्थान के सकल घरेलू उत्पाद (GDP), कृषि, पशुपालन, खनन, पर्यटन और ऊर्जा क्षेत्र सभी पर्यावरणीय परिस्थितियों से प्रभावित होते हैं।
राजस्थान एक अर्ध-शुष्क जलवायु वाला राज्य है जहां कम वर्षा, उच्च तापमान और मरुस्थलीय परिस्थितियां व्याप्त हैं। इन परिस्थितियों ने राज्य की आर्थिक गतिविधियों को विशेष रूप से प्रभावित किया है। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों में पर्यावरण, जलवायु और वन्यजीव विषयों से नियमित रूप से प्रश्न आए हैं।
मुख्य अवधारणाएं
१. जलवायु और आर्थिक विकास
राजस्थान की जलवायु मुख्यतः उष्ण और शुष्क है। राज्य का अधिकांश भाग थार मरुस्थल के अंतर्गत आता है। यहाँ की वार्षिक वर्षा मुख्यतः दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है, जो अपर्याप्त और अनियमित होती है। पश्चिम में जैसलमेर में औसत वर्षा बहुत कम (लगभग 15-20 सेमी) है, जबकि राज्य की सर्वाधिक वर्षा दक्षिण में माउंट आबू (सिरोही) में होती है। इस जलवायु परिवर्तनशीलता के कारण कृषि उत्पादन भी अनिश्चित रहता है। राजस्थान के कार्यबल का एक बड़ा भाग कृषि पर निर्भर है, लेकिन सूखा और जल की कमी के कारण कृषि आय अस्थिर रहती है।
२. जल संसाधन और आर्थिक गतिविधियां
जल राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है। राज्य के अनेक क्षेत्रों में भूजल का अत्यधिक दोहन हो रहा है। इंदिरा गांधी नहर, चंबल नदी प्रणाली और अन्य सिंचाई परियोजनाएं कृषि उत्पादन में वृद्धि करती हैं। हालांकि, अनियमित बारिश के कारण जल संकट एक स्थायी समस्या बना हुआ है। जल संरक्षण के अभाव में राजस्थान के आर्थिक विकास में बाधा आती है।
३. वनस्पति और जैव विविधता
राजस्थान में अभिलिखित वन क्षेत्र राज्य के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 9.6 प्रतिशत है, जबकि वास्तविक वन आवरण लगभग 4.9 प्रतिशत (ISFR 2021) है। दक्षिणपूर्वी भाग में उष्णकटिबंधीय सूखे पर्णपाती वन पाए जाते हैं, जबकि पश्चिमी भाग में थार की वनस्पति पाई जाती है। ये वन राजस्थान की अर्थव्यवस्था में लकड़ी, औषधीय पौधे, पशु चारा और अन्य वन उत्पाद प्रदान करते हैं। वनों का संरक्षण पर्यटन और जीवन पद्धति को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।
४. खनिज संसाधन और पर्यावरण
राजस्थान में तांबा, जस्ता, चूना पत्थर, संगमरमर, लोहा अयस्क और अन्य खनिजों का विशाल भंडार है। खनन गतिविधियां राज्य के GDP में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं, किंतु ये पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचाती हैं। खनन से मिट्टी का क्षरण, जल प्रदूषण और वायु प्रदूषण होता है। इसलिए, सतत खनन प्रथाओं को अपनाना आवश्यक है।
५. ऊर्जा और नवीकरणीय संसाधन
राजस्थान सौर ऊर्जा में देश के अग्रणी राज्यों में है, क्योंकि यहां पूरे वर्ष प्रचुर सूर्य प्रकाश मिलता है; पवन ऊर्जा में तमिलनाडु और गुजरात आगे हैं। नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत राजस्थान की अर्थव्यवस्था में एक नया आयाम जोड़ रहे हैं और पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य
वर्षा: राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा ५७.५ सेमी है, जो भारतीय औसत (११७ सेमी) से कम है।
तापमान: ग्रीष्मकाल में पश्चिमी भागों में अधिकतम तापमान 45°C से ऊपर पहुंच जाता है, जबकि शीतकाल में कई स्थानों पर न्यूनतम तापमान शून्य के आसपास तक गिर जाता है।
थार मरुस्थल: राजस्थान के पश्चिमी भाग का अधिकांश हिस्सा थार मरुस्थल का अंग है, जो राज्य के लगभग 60 प्रतिशत (करीब 2 लाख वर्ग किमी) क्षेत्र में फैला है।
जलोढ़ क्षेत्र: उत्तरी व पूर्वी राजस्थान के मैदानों में जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।
वन क्षेत्र: अभिलिखित वन क्षेत्र लगभग 32,737 वर्ग किमी (लगभग 9.6%) तथा वन आवरण लगभग 16,655 वर्ग किमी (लगभग 4.9%, ISFR 2021) है।
वन्य जीवन: राजस्थान में रणथंभौर, सरिस्का और केवलादेव (घना) जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान/टाइगर रिज़र्व हैं।
| संरक्षित क्षेत्र | ज़िला |
|---|---|
| रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान (टाइगर रिज़र्व) | सवाई माधोपुर |
| सरिस्का टाइगर रिज़र्व | अलवर |
| केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना) | भरतपुर |
| मुकुंदरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान (टाइगर रिज़र्व) | कोटा |
| डेजर्ट राष्ट्रीय उद्यान | जैसलमेर और बाड़मेर |
राजस्थान विशेष
पर्यावरणीय चुनौतियां: राजस्थान को मुख्यतः सूखा, भूमि क्षरण, बंजर भूमि की समस्या और भूजल की कमी का सामना करना पड़ता है। राज्य में रेगिस्तान का विस्तार हो रहा है, जिसे वनीकरण कार्यक्रमों से रोका जा रहा है।
सूखा प्रबंधन: राजस्थान सरकार ने सूखा राहत के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई हैं। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGA) राज्य में व्यापक रूप से लागू की गई है।
जल संरक्षण परियोजनाएं: इंदिरा गांधी नहर, चंबल नदी परियोजना और अन्य जल विकास योजनाएं आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
नवीकरणीय ऊर्जा: जैसलमेर जिला पवन और सौर ऊर्जा का प्रमुख केंद्र है। भड़ला सौर पार्क (फलोदी क्षेत्र) विश्व के सबसे बड़े सौर पार्कों में से एक है।
पर्यटन और पर्यावरण: राजस्थान का पर्यटन उद्योग पर्यावरणीय सुंदरता पर आश्रित है। किले, राजमहल, झीलें और वन्यजीव अभयारण्य प्रमुख पर्यटन आकर्षण हैं।
परीक्षा पैटर्न
प्रारंभिक परीक्षा: RAS प्रारंभिक परीक्षा में एक ही वस्तुनिष्ठ प्रश्नपत्र (सामान्य ज्ञान और सामान्य विज्ञान) होता है, जिसमें जलवायु, वनस्पति, वन्यजीवन, मिट्टी और राजस्थान की अर्थव्यवस्था से प्रश्न आ सकते हैं।
मुख्य परीक्षा: सामान्य अध्ययन के वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों में पर्यावरणीय कारकों का आर्थिक विकास पर प्रभाव पूछा जा सकता है।
महत्वपूर्ण विषय: जलवायु परिवर्तन, जल संकट, वन संरक्षण, मरुस्थलीकरण, जीवाश्म ईंधन बनाम नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और पर्यावरण का संबंध।
स्मरण युक्तियां
"वर्षा-जल-खेती" नियम: राजस्थान में वर्षा कम है → जल की कमी है → कृषि पर दबाव है। इस संबंध को याद रखें।
"पश्चिम में सूखा, दक्षिणपूर्व में हरियाली": राजस्थान के पश्चिमी भाग में कम वर्षा (जैसलमेर में लगभग 15-20 सेमी), जबकि दक्षिण-पूर्व में अधिक वर्षा; राज्य में सर्वाधिक वर्षा माउंट आबू (सिरोही) में होती है।
"थार मरुस्थल = खनन + पशुपालन + कृषि": थार क्षेत्र की अर्थव्यवस्था इन तीन गतिविधियों पर आधारित है।
नदियां: चंबल, बनास, लूनी आदि नदियां राज्य की सिंचाई और जल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हैं।
संख्यात्मक स्मरण: राजस्थान की औसत वार्षिक वर्षा लगभग 57.5 सेमी, वन आवरण लगभग 4.9% (ISFR 2021), जलवायु मुख्यतः शुष्क व अर्ध-शुष्क।
मानचित्र आधारित स्मरण: राजस्थान के मानचित्र पर मुख्य नदियां, वन क्षेत्र, खनन क्षेत्र और वन्यजीव अभयारण्यों को चिह्नित करें।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •राजस्थान में बाजरा सर्वाधिक उत्पादित खाद्य फसल है; देश के कुल बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान।
- •राजस्थान सीसा-जस्ता, तांबा, संगमरमर और जिप्सम में देश में प्रथम स्थान पर है।
- •इंदिरा गांधी नहर परियोजना थार मरुस्थल में सिंचाई की सबसे बड़ी परियोजना है; यह व्यास और सतलज नदियों से जल लेती है।
- •राजस्थान भारत के GDP में लगभग 5% योगदान करता है (2023-24)।
- •राजस्थान की अर्थव्यवस्था में कृषि व सम्बद्ध क्षेत्र ~25-26% योगदान देते हैं।