भारत के राष्ट्रपति: चुनाव, शक्तियां, महाभियोग
परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता
भारतीय संविधान में राष्ट्रपति (President) भारत के राज्य प्रमुख के रूप में कार्य करते हैं। RPSC RAS परीक्षा में भारतीय संवैधानिक व्यवस्था का विस्तृत अध्ययन आवश्यक है। राष्ट्रपति संबंधित प्रश्न सामान्यतः सामान्य ज्ञान और भारतीय संविधान खंड में पूछे जाते हैं। यह विषय RPSC के प्रारंभिक और मुख्य दोनों परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण है। राष्ट्रपति के कार्य, शक्तियां, निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक भूमिका को समझना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य अवधारणाएं
१. राष्ट्रपति की परिभाषा और संवैधानिक स्थिति
भारतीय संविधान के अनुच्छेद ५२ के अनुसार, भारत का एक राष्ट्रपति होगा। राष्ट्रपति भारतीय राज्य का संवैधानिक प्रमुख होता है। भारत की कार्यपालिका का प्रमुख राष्ट्रपति होता है, परंतु वास्तविक कार्यकारी शक्तियां प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के पास होती हैं। राष्ट्रपति राष्ट्र का प्रतीकात्मक प्रमुख होता है और वह संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करता है।
२. राष्ट्रपति की योग्यताएं एवं नियुक्ति
भारतीय संविधान के अनुच्छेद ५८ के अनुसार, राष्ट्रपति पद के लिए व्यक्ति की योग्यताएं निम्नलिखित हैं: - वह भारत का नागरिक होना चाहिए - न्यूनतम आयु ३५ वर्ष होनी चाहिए - वह लोकसभा के सदस्य होने योग्य होना चाहिए - वह किसी लाभ के पद पर न हो - राष्ट्रपति का निर्वाचन एक निर्वाचन मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के केवल निर्वाचित सदस्य (मनोनीत सदस्य शामिल नहीं) और राज्यों की विधानसभाओं (दिल्ली व पुडुचेरी की विधानसभाओं सहित) के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं; विधान परिषदों के सदस्य इस निर्वाचन मंडल में शामिल नहीं होते।
३. राष्ट्रपति के संवैधानिक कार्य और शक्तियां
राष्ट्रपति के मुख्य संवैधानिक कार्य हैं: - संसद के सत्र को बुलाना, स्थगित करना और भंग करना - प्रधानमंत्री की नियुक्ति करना (आम तौर पर लोकसभा में बहुमत वाले दल के नेता को) - मंत्रियों, न्यायाधीशों और अन्य संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां करना - विधेयकों को स्वीकृति प्रदान करना - क्षमादान और दंड में कमी की शक्तियां - राष्ट्रीय आपातकालीन स्थिति की घोषणा करना - संविधान को संरक्षित रखना
४. राष्ट्रपति का कार्यकाल और निष्कासन
राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच वर्ष होता है। वह अपने कार्यकाल के दौरान दोबारा निर्वाचित हो सकता है। राष्ट्रपति को संविधान के अनुच्छेद ६१ के अनुसार महाभियोग (Impeachment) द्वारा ही हटाया जा सकता है। महाभियोग प्रक्रिया में संसद के किसी भी सदन में प्रस्ताव लाया जा सकता है, परंतु इसके लिए पहले उस सदन के कुल सदस्यों की संख्या के कम से कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर सहित १४ दिन पूर्व सूचना देनी होती है; प्रस्ताव पारित करने के लिए दोनों सदनों में अलग-अलग कुल सदस्यों की संख्या के कम से कम दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
- सूचनाकिसी एक सदन में कुल सदस्यों के 1/4 के हस्ताक्षर सहित प्रस्ताव की 14 दिन पूर्व सूचना
- प्रस्ताव पारितउस सदन में कुल सदस्यों के 2/3 बहुमत से प्रस्ताव पारित
- जांचदूसरे सदन द्वारा आरोपों की जांच (राष्ट्रपति को उपस्थित/प्रतिनिधित्व का अधिकार)
- अंतिम पारणदूसरे सदन में भी कुल सदस्यों के 2/3 बहुमत से पारित होने पर राष्ट्रपति पद से हटाया जाता है
५. राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां
राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण विधायी शक्तियां हैं: - संसद का सत्र बुलाने और भंग करने की शक्ति - विधेयकों को सहमति/स्वीकृति (Assent) देने या पुनर्विचार हेतु लौटाने की शक्ति - संसद का सत्र न चलने की स्थिति में अध्यादेश (अनुच्छेद १२३) जारी करने की शक्ति — संसद के पुनः सत्र में मिलने के ६ सप्ताह के भीतर इसका अनुमोदन आवश्यक है - राष्ट्रपति के नाम पर जारी होने वाले सरकारी आदेशों और अधिसूचनाओं पर हस्ताक्षर (अनुच्छेद ७७) - संवैधानिक संशोधन को स्वीकृति देना - विशेष परिस्थितियों में आपातकालीन शक्तियों का प्रयोग करना
महत्वपूर्ण तथ्य
प्रथम राष्ट्रपति: डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारत के प्रथम राष्ट्रपति थे (१९५०-१९६२)। वह दो बार निर्वाचित हुए और सर्वाधिक समय तक राष्ट्रपति पद पर रहे। वर्तमान राष्ट्रपति: भारत का वर्तमान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू हैं, जो जुलाई २०२२ से इस पद पर कार्यरत हैं। वह भारत की पहली आदिवासी राष्ट्रपति हैं और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं (प्रतिभा पाटिल भारत की पहली महिला राष्ट्रपति, 2007-2012, थीं)। निर्वाचन प्रणाली: राष्ट्रपति का निर्वाचन एक अप्रत्यक्ष प्रणाली द्वारा किया जाता है, जिसमें एकल संक्रमणीय मत पद्धति (Single Transferable Vote) द्वारा समानुपातिक प्रतिनिधित्व और गुप्त मतदान का उपयोग होता है। वेतन और भत्ते: राष्ट्रपति को भारतीय संविधान द्वारा निर्धारित वेतन और विशेषाधिकार प्राप्त हैं। उन्हें आधिकारिक निवास राष्ट्रपति भवन प्रदान किया जाता है। संवैधानिक सहायता: राष्ट्रपति की कार्यवाही में सहायता के लिए सचिवालय (President's Secretariat) होता है। क्षमादान की शक्ति: राष्ट्रपति को अनुच्छेद ७२ के तहत क्षमा (Pardon), लघुकरण (Commutation), परिहार (Remission), विराम (Respite) और प्रविलंबन (Reprieve) — ये पाँच शक्तियां प्राप्त हैं।
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 52 | भारत का एक राष्ट्रपति होगा |
| 53 | संघ की कार्यपालिका शक्ति राष्ट्रपति में निहित |
| 54 | राष्ट्रपति का निर्वाचन मंडल |
| 55 | निर्वाचन की पद्धति (समानुपातिक प्रतिनिधित्व, एकल संक्रमणीय मत) |
| 56 | कार्यकाल (5 वर्ष) |
| 58 | निर्वाचन हेतु योग्यताएं |
| 60 | राष्ट्रपति द्वारा शपथ (मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं) |
| 61 | महाभियोग की प्रक्रिया |
| 72 | क्षमादान की शक्ति |
| 74 | मंत्रिपरिषद की सलाह राष्ट्रपति पर बाध्यकारी |
| 78 | राष्ट्रपति को सूचना देने का प्रधानमंत्री का कर्तव्य |
| 111 | विधेयकों पर स्वीकृति/पुनर्विचार हेतु वापसी |
| 123 | अध्यादेश जारी करने की शक्ति |
| 352/356/360 | आपातकाल की घोषणा (राष्ट्रीय/राष्ट्रपति शासन/वित्तीय) |
राजस्थान विशेष
राजस्थान में राष्ट्रपति के साथ-साथ राज्य के राज्यपाल की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। राजस्थान का राज्यपाल राज्य के स्तर पर राष्ट्रपति की तरह कार्य करता है। RPSC RAS परीक्षा में राजस्थान की राजनीतिक व्यवस्था का भी विस्तृत अध्ययन आवश्यक है। भारत में राज्यों का कोई पृथक संविधान नहीं होता — एक ही संविधान संपूर्ण भारत पर लागू होता है, जिसके अंतर्गत राजस्थान सरकार भी कार्य करती है। राजस्थान विधानसभा के निर्वाचित सदस्य भारतीय राष्ट्रपति के निर्वाचन मंडल में भाग लेते हैं। राजस्थान में कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक राजनीतिक व्यक्तित्व हुए हैं। राजस्थान की राजनीतिक विरासत और वर्तमान राजनीतिक संरचना को समझना अत्यंत आवश्यक है। RPSC परीक्षा में राजस्थान की विधानसभा, जिला प्रशासन और स्थानीय शासन से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं।
परीक्षा पैटर्न
प्रारंभिक परीक्षा: RPSC RAS की प्रारंभिक परीक्षा में भारतीय संविधान के विभिन्न पहलुओं से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं। राष्ट्रपति के कार्य, शक्तियां और निर्वाचन प्रक्रिया से १-२ प्रश्न आते हैं। ये प्रश्न सामान्य ज्ञान खंड में रहते हैं। मुख्य परीक्षा: मुख्य परीक्षा में भारतीय संविधान पर विस्तृत प्रश्न पूछे जाते हैं। राष्ट्रपति की विधायी शक्तियां, क्षमादान की शक्तियां और आपातकालीन शक्तियों पर विस्तृत प्रश्न आ सकते हैं। राष्ट्रपति की संवैधानिक भूमिका को अन्य संवैधानिक पदों के साथ तुलना करते हुए समझना चाहिए। साक्षात्कार: साक्षात्कार में भी भारतीय संविधान और राजनीतिक व्यवस्था से संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। राष्ट्रपति की भूमिका और महत्व को स्पष्ट रूप से समझाना चाहिए।
स्मरण युक्तियां
राष्ट्रपति की योग्यताएं याद रखने के लिए: "भारतीय नागरिक, ३५ वर्ष, लोकसभा योग्य, निर्लाभ पद" - इन चार बातों को याद रखें। राष्ट्रपति के प्रमुख कार्यों के लिए: "संसद सत्र, प्रधानमंत्री नियुक्ति, विधेयक स्वीकृति, क्षमादान, आपातकाल घोषणा" - इन पांचों को याद रखें। अनुच्छेद याद रखें: अनुच्छेद ५२ (राष्ट्रपति का अस्तित्व), ५३ (संघ की कार्यकारी शक्ति), ५८ (अर्हता), ६१ (महाभियोग), ७२ (क्षमादान की शक्ति)। तुलनात्मक अध्ययन: भारतीय राष्ट्रपति की तुलना अन्य देशों के राष्ट्रप्रमुख से करें। यह समझें कि भारत का राष्ट्रपति संसदीय व्यवस्था में कैसे कार्य करता है। केस स्टडी: विभिन्न राष्ट्रपतिों के कार्यकाल में महत्वपूर्ण घटनाओं को याद रखें। इससे व्यावहारिक समझ बढ़ती है। चार्ट बनाएं: राष्ट्रपति के अनुच्छेदों, योग्यताओं और शक्तियों का विस्तृत चार्ट बनाकर अध्ययन करें।
⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners
- •अनुच्छेद 32 को डॉ. अंबेडकर ने 'संविधान की आत्मा' कहा था।
- •DPSP भाग IV में हैं; ये वाद योग्य नहीं हैं किन्तु शासन में मूलभूत हैं।
- •भारतीय संसद की राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य हो सकते हैं; 12 राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत।
- •73वें संविधान संशोधन (1992) द्वारा पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा मिला।
- •सर्वोच्च न्यायालय की स्थापना 28 जनवरी 1950 को हुई; इसके पास मूल, अपील और सलाहकार क्षेत्राधिकार है।