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राजस्थान की नदियाँ — अपवाह तंत्र एवं प्रमुख नदियाँ

Rivers of Rajasthan — Drainage System & Major Rivers

9 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: जुलाई 2026· Geography of World and India

राजस्थान की नदियाँ: जल-अभाव से गढ़ा भूगोल

राजस्थान की नदियाँ राज्य के भूगोल और इतिहास दोनों की कहानी कहती हैं। यहाँ अधिकांश भाग में वर्षा कम और अनिश्चित होने के कारण केवल चम्बल ही बारहमासी नदी है — बाकी सभी नदियाँ मौसमी हैं, जो मानसून में उफान पर रहती हैं और शेष वर्ष क्षीण हो जाती हैं या सूख जाती हैं। राज्य के बीचोंबीच फैली अरावली पर्वतमाला एक बड़ी जल-विभाजक रेखा का काम करती है — इसके पूर्व की नदियाँ चम्बल-यमुना-गंगा तंत्र के जरिये बंगाल की खाड़ी की ओर बहती हैं, जबकि पश्चिम की नदियाँ या तो रेगिस्तान में विलीन हो जाती हैं या अरब सागर की ओर बढ़ती हैं।

चम्बल: राज्य की एकमात्र बारहमासी नदी

चम्बल का उद्गम मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में महू के निकट विंध्याचल की जानापाव पहाड़ी से होता है और यह चौरासीगढ़ के पास राजस्थान में प्रवेश करती है, जहाँ से यह लगभग 252 किमी तक राज्य की मध्यप्रदेश से सीमा बनाती हुई चित्तौड़गढ़, कोटा, बूँदी, सवाई माधोपुर, करौली व धौलपुर से होकर बहती है और अंततः उत्तर प्रदेश में यमुना से मिल जाती है। ऐतिहासिक रूप से चर्मण्यवती नाम से जानी जाने वाली चम्बल राज्य की सर्वाधिक जलराशि ले जाने वाली नदी है और अपने दो बिल्कुल भिन्न भू-रूपों के लिए प्रसिद्ध है — भैंसरोडगढ़ के निकट का शानदार चूलिया जलप्रपात, और धौलपुर, सवाई माधोपुर व करौली का विस्तृत बीहड़ प्रदेश, जो खेती के लिहाज से देश के सबसे कठिन बैडलैंड इलाकों में गिना जाता है। इसके मार्ग पर तीन प्रमुख बाँध हैं — गांधी सागर, राणा प्रताप सागर (रावतभाटा) और जवाहर सागर — जो कोटा बैराज को जल देते हैं। इसकी मुख्य सहायक नदियाँ — बनास, कालीसिंध और पार्वती — दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के बड़े हिस्से का पानी इसमें ले आती हैं।

लूनी तंत्र और मरुस्थलीय नदियाँ

अरावली के पश्चिम में लूनी इस क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण नदी है — और इसकी कहानी चम्बल से लगभग उलट है। अजमेर के निकट नाग पहाड़ियों से 'सागरमती' नाम से निकलने वाली यह नदी पुष्कर की ओर से आने वाली मौसमी सरस्वती के मिलने के बाद ही 'लूनी' कहलाती है। बालोतरा तक इसका पानी मीठा रहता है, फिर नमक-युक्त भूभाग से गुजरते हुए खारा हो जाता है और अंततः कच्छ के रण में समाप्त हो जाता है — समुद्र तक पहुँचे बिना। लूनी राज्य के कुल क्षेत्रफल के लगभग दसवें हिस्से का जल-निकास करती है और पश्चिम की ओर बढ़ते हुए अरावली पर्वतमाला को सीधे काटती है।

लूनी के अतिरिक्त राज्य की शेष नदियों को क्षेत्रीय समूहों में समझना आसान है, इनमें अधिकांश मौसमी हैं:

क्षेत्रनदियाँ
उत्तर व पश्चिमी राजस्थानलूनी, जवाई, खारी, सुकड़ी, बाण्डी, सागी, जोजड़ी, लीलड़ी, मीठड़ी, घग्घर, काकनी, घूगरी
दक्षिण-पश्चिमी राजस्थानपश्चिमी बनास, साबरमती, वाकल, सेई, वेतरक, सीपू
दक्षिणी राजस्थानमाही, सोम, जाखम, अनास, मोरेन, इरू, चाप
दक्षिण-पूर्वी राजस्थान (चम्बल बेसिन)चम्बल, कुनू, पार्वती, कालीसिंध, कुराल, आहू, परवन, नेवज, मेज, बनास, बामनी, बेड़च, गंभीरी, कोठारी, खारी
पूर्वी राजस्थानसाबी, मेंथा, रूपारेल, बाणगंगा, गंभीर, मोरेल, ढूँढ, कालीसिल

एक प्राचीन नदी जो अब नहीं बहती

दर्ज इतिहास से बहुत पहले, भूवैज्ञानिकों के अनुसार एक प्राचीन सरस्वती नदी उत्तरी राजस्थान से होकर बहती थी — जो यमुना से मिलकर स्थानीय रूप से 'हाकड़ा' कहलाती थी — और सदियों पहले सूखकर विलुप्त हो गई। इसके पुराने प्रवाह-मार्ग के अवशेष व दबे हुए अपवाह-चिह्न आज भी पुरातत्व व भूविज्ञान अनुसंधान का विषय बने हुए हैं।

स्मरण ट्रिक: चम्बल पर बने बाँधों का सही क्रम

वाक्य याद रखें: "गांधी ने राणा प्रताप और जवाहर को कोटा बुलाया।"

वाक्य का शब्द किसका संकेत देता है
गांधीगांधी सागर बाँध
राणा प्रतापराणा प्रताप सागर बाँध (रावतभाटा)
जवाहरजवाहर सागर बाँध
कोटाकोटा बैराज — तीनों बाँधों का पानी यहीं इकट्ठा होकर आगे बढ़ता है

नोट: गाइड में चम्बल के तीन प्रमुख बाँध ठीक इसी क्रम में बताए गए हैं — गांधी सागर, राणा प्रताप सागर (रावतभाटा), जवाहर सागर — जो कोटा बैराज को जल देते हैं।

कन्फ्यूज़न बस्टर: चम्बल बनाम लूनी

चम्बल — राज्य की एकमात्र बारहमासी नदी; उद्गम राजस्थान के बाहर (जानापाव पहाड़ी, विंध्याचल, म.प्र.); राज्य की सर्वाधिक जलराशि ले जाती है; अरावली के पूर्व में बहती है और अंततः यमुना में मिल जाती है।

लूनी — पश्चिमी शुष्क राजस्थान की सबसे महत्वपूर्ण (defining) नदी, पर मौसमी है; उद्गम राजस्थान के भीतर ही (नाग पहाड़ियाँ, अजमेर); बालोतरा के बाद पानी खारा हो जाता है; समुद्र तक पहुँचे बिना ही कच्छ के रण में विलीन हो जाती है।

याद रखें: "बारहमासी + सर्वाधिक जलराशि" सुनते ही चम्बल सोचें; "पश्चिमी मरुस्थल की मुख्य नदी जो समुद्र तक नहीं पहुँचती, कच्छ के रण में खत्म होती है" सुनते ही लूनी सोचें।

राजस्थान का अपवाह तंत्र — स्कीमैटिक आरेख (Schematic, not to scale / भौगोलिक रूप से यथार्थ नहीं)
राजस्थान अपवाह तंत्र का स्कीमैटिक आरेख (schematic diagram, not to scale) अरावली पर्वतमाला - जल-विभाजक रेखा (Aravalli Range - the water divide, schematic) अरावली पश्चिम (लूनी तंत्र) नाग पहाड़ियाँ, अजमेर - लूनी का उद्गम, मूल नाम सागरमती (Nag hills, Ajmer - Luni's source, originally named Sagarmati) सागरमती लूनी नदी - बालोतरा तक मीठा जल (Luni river - sweet water till Balotra) लूनी (मीठी) बालोतरा के बाद खारा जल (turns saline after Balotra) खारी कच्छ का रण - लूनी यहीं विलीन हो जाती है, समुद्र तक नहीं पहुँचती (Rann of Kutch - Luni disappears here, never reaches the sea) कच्छ का रण पूर्व (चम्बल तंत्र) जानापाव पहाड़ी, विंध्याचल, म.प्र. - चम्बल का उद्गम (Janapav Hill, Vindhyachal range, MP - Chambal's origin) जानापाव चम्बल राजस्थान में चौरासीगढ़ के पास प्रवेश करती है (Chambal enters Rajasthan near Chaurasigarh) गांधी सागर बाँध (Gandhi Sagar Dam) चम्बल का प्रवाह आगे बढ़ता है (Chambal's course continues) राणा प्रताप सागर बाँध, रावतभाटा (Rana Pratap Sagar Dam, Rawatbhata) चम्बल का प्रवाह आगे बढ़ता है (Chambal's course continues) जवाहर सागर बाँध (Jawahar Sagar Dam) कोटा बैराज की ओर (Towards Kota Barrage) कोटा बैराज - तीनों बाँधों का जल यहाँ इकट्ठा होता है (Kota Barrage - collects water released from all three dams) कोटा बैराज यमुना (उ.प्र.) की ओर, फिर गंगा व बंगाल की खाड़ी (Towards the Yamuna in UP, then the Ganga and Bay of Bengal) → यमुना

त्वरित तथ्य

  • केवल चम्बल बारहमासी है; राजस्थान की बाकी सभी नदियाँ मौसमी हैं।
  • अरावली पर्वतमाला राज्य की बड़ी जल-विभाजक रेखा है।
  • लूनी पश्चिमी शुष्क क्षेत्र की मुख्य नदी है और समुद्र तक पहुँचे बिना कच्छ के रण में विलीन हो जाती है।
  • चम्बल के प्रमुख बाँध — गांधी सागर, राणा प्रताप सागर व जवाहर सागर — कोटा बैराज को जल देते हैं।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • थार मरुस्थल विश्व का 9वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है; यह राजस्थान के पश्चिमी भाग में है।
  • चंबल नदी राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी है; यह यमुना में मिलती है।
  • भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून में केरल पहुंचता है; यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से आता है।
  • कर्क रेखा (23.5°N) राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से गुजरती है।
  • मकराना (नागौर) का सफेद संगमरमर ताजमहल में प्रयुक्त।
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✍️ 5 सवाल हल करें

पढ़ने के बाद खुद को परखें — सभी सवाल हल करके अपनी streak बढ़ाएं। 🔥

5 में से 0 हल किए
1

चम्बल नदी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसका उद्गम मध्यप्रदेश के विंध्याचल पर्वतमाला की जानापाव पहाड़ी से होता है। 2. यह अपनी पूरी यात्रा में पूर्णतः राजस्थान के भीतर ही बहती है और किसी अन्य राज्य से सीमा नहीं बनाती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

2

सूची-I (नदी) को सूची-II (क्षेत्रीय समूह, जिसके अंतर्गत गाइड में इसे रखा गया है) से सुमेलित कीजिए: सूची-I: A. घग्घर B. वाकल C. जाखम D. रूपारेल सूची-II: 1. उत्तर व पश्चिमी राजस्थान 2. दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान 3. दक्षिणी राजस्थान 4. पूर्वी राजस्थान

3

गाइड में वर्णित चम्बल के मार्ग के अनुसार, निम्नलिखित जिलों को उसी क्रम में व्यवस्थित कीजिए जिस क्रम में चम्बल राजस्थान में इनसे होकर गुजरती है: (I) बूँदी (II) चित्तौड़गढ़ (III) धौलपुर (IV) कोटा

4

लूनी नदी अंततः समुद्र में मिलने के बजाय "विलीन" हो जाती है — गाइड में दिए गए विवरण के आधार पर इसका सबसे उपयुक्त कारण क्या है?

5

गाइड के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सी नदी चम्बल की प्रमुख (principal) सहायक नदी के रूप में उल्लिखित नहीं है?

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