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राजस्थान के वन्यजीव अभयारण्य एवं राष्ट्रीय उद्यान

Wildlife Sanctuaries & National Parks of Rajasthan

13 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: जुलाई 2026· Geography of World and India

परिचय: राजस्थान की वन्यजीव सम्पदा

भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान का पश्चिमी भाग भले ही थार मरुस्थल से आच्छादित हो, फिर भी यहाँ की वन्यजीव संपदा असाधारण रूप से समृद्ध और विविधतापूर्ण है। यह विविधता पूरे राज्य में समान रूप से नहीं फैली है — अधिकांश वन क्षेत्र और वन्यजीव आबादी दक्षिणी व दक्षिण-पूर्वी भाग में केंद्रित है, जहाँ अरावली की पहाड़ियाँ, विंध्य पठार का किनारा और हाड़ौती की आर्द्र पर्णपाती पट्टी पर्याप्त आश्रय व जल उपलब्ध कराती हैं। राज्य के कुल वन क्षेत्र का लगभग आधा भाग मात्र आठ जिलों — उदयपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, बाराँ, अलवर, करौली, सिरोही और बूँदी — में सिमटा हुआ है। इसके विपरीत पश्चिमी व उत्तर-पश्चिमी रेतीले भू-भाग में वनस्पति बहुत विरल है, फिर भी यहाँ गोडावण और चिंकारा जैसी विशिष्ट मरुस्थलीय प्रजातियों ने अपना ठिकाना बना रखा है।

इस क्षेत्र में संगठित वन्यजीव संरक्षण की जड़ें पुरानी हैं। 'राजस्थान वन्य पशु व पक्षी संरक्षण अधिनियम' 23 अप्रैल 1951 को लागू हुआ, जिसने राज्य सरकार को आरक्षित वन्यजीव क्षेत्र घोषित करने का अधिकार दिया; 7 नवम्बर 1955 को पूर्ववर्ती रियासतों के पाँच शिकारगाहों को पहली बार ऐसे आरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया। राष्ट्रीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के राजस्थान में 1 सितम्बर 1973 से प्रभावी होने के साथ ही शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया। आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार वर्तमान में राज्य के संरक्षित क्षेत्र नेटवर्क में राष्ट्रीय उद्यान, 5 टाइगर रिजर्व, 26 वन्यजीव अभयारण्य, 39 कंजर्वेशन रिजर्व, 33 शिकार-निषिद्ध क्षेत्र, 7 डियर पार्क और 4 जैविक उद्यान (जयपुर, उदयपुर, कोटा व जोधपुर में) शामिल हैं।

राजस्थान के राष्ट्रीय उद्यान

राष्ट्रीय उद्यान को अभयारण्य की तुलना में कहीं अधिक कड़ा कानूनी संरक्षण प्राप्त होता है — इसकी सीमा के भीतर चराई, निजी अधिकार या व्यावसायिक दोहन की अनुमति नहीं होती। राजस्थान में चार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान हैं, जिनमें से हर एक एक अलग पारिस्थितिकी तंत्र पर आधारित है।

राष्ट्रीय उद्यानजिला/जिलेक्षेत्रफल (वर्ग किमी)प्रमुख विशेषता
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यानसवाईमाधोपुर282.03बाघ, मगरमच्छ, पद्म व राजबाग झील
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यानभरतपुर28.73प्रवासी पक्षी, साइबेरियन क्रेन, यूनेस्को स्थल
मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यानकोटा, बूँदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़199.55बाघ पुनर्स्थापन स्थल, चम्बल व आहू नदियाँ
राष्ट्रीय मरु उद्यानजैसलमेर, बाड़मेर3162.00गोडावण, चिंकारा, वुड फॉसिल पार्क

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान

राजस्थान का सबसे पुराना और सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान 1955 में वन्यजीव अभयारण्य के रूप में अस्तित्व में आया और 1 नवम्बर 1980 को औपचारिक रूप से राष्ट्रीय उद्यान अधिसूचित हुआ, जिस कारण इसे लोकप्रिय रूप से "टाइगर की भूमि" (Land of Tiger) कहा जाता है। इसके दक्षिण में चम्बल नदी और उत्तर में बनास नदी बहती है; बाघों के अतिरिक्त यहाँ का मगरमच्छ भी दूसरा बड़ा आकर्षण माना जाता है। उद्यान के भीतर जोगी महल और गणेश मंदिर प्रसिद्ध स्थल हैं, तथा पद्म तालाब, मलिक तालाब और राजबाग झील — ये तीन जलाशय इस शुष्क पर्णपाती वन को असाधारण रूप से जल-समृद्ध रूप देते हैं।

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (घना पक्षी अभयारण्य), भरतपुर

1956 में पक्षी अभयारण्य घोषित किया गया केवलादेव 1985 में यूनेस्को की विश्व प्राकृतिक धरोहर सूची में शामिल हुआ और 1 अक्टूबर 1981 को अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर आर्द्रभूमि स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त की। ऐतिहासिक रूप से यहाँ के दलदली क्षेत्र में अजान बांध से पानी पहुँचता था, और बाणगंगा तथा गंभीरी नदियाँ भी इसे सींचती हैं; इसके जलाशयों के किनारे घने कदंब वृक्ष पाए जाते हैं। विश्वभर में "पक्षियों का स्वर्ग" के नाम से प्रसिद्ध इस उद्यान में कभी साइबेरियन क्रेन शीतकाल बिताती थीं, और यह आज भी एशिया के सबसे बड़े जल-पक्षी प्रजनन स्थलों में गिना जाता है। यह राजस्थान का सबसे छोटा राष्ट्रीय उद्यान भी है और प्रसिद्ध गोल्डन ट्राएंगल पर्यटन परिपथ पर स्थित है।

मुकुन्दरा हिल्स राष्ट्रीय उद्यान

9 जनवरी 2012 को अधिसूचित इस उद्यान का नाम प्रकृति-प्रेमी हाड़ौती शासक मुकंदसिंह के नाम पर रखा गया है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग-52 पर स्थित है और इसमें आबली मीणी का महल तथा रावता महल जैसी ऐतिहासिक धरोहरें, बाडोली का शिव मंदिर और सेल्जर घाटी शामिल हैं। यहाँ से चार नदियाँ — चम्बल, आहू, काली और अमझर — गुजरती हैं। इस उद्यान को रणथम्भौर के बाघों के दूसरे बसेरे के रूप में विकसित किया गया है और इसे कभी-कभी बाघों का "जच्चा घर" भी कहा जाता है।

राष्ट्रीय मरु उद्यान (Desert National Park)

जैसलमेर व बाड़मेर जिलों में फैला यह राजस्थान का सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है, जिसका क्षेत्रफल 3,162 वर्ग किमी है और यह थार के वास्तविक पारिस्थितिकी तंत्र — रेत के टीले, खारी अवनमन और झाड़ीदार वनस्पति — का प्रतिनिधित्व करता है। यहाँ अकल वुड फॉसिल पार्क स्थित है, जो अपने जीवाश्म वृक्ष तनों के लिए प्रसिद्ध है, और यही राज्य पक्षी गोडावण तथा राज्य पशु चिंकारा का अंतिम बड़ा गढ़ भी है।

प्रोजेक्ट टाइगर और राजस्थान के टाइगर रिजर्व

भारत में प्रोजेक्ट टाइगर की शुरुआत 1 अप्रैल 1973 को राष्ट्रीय स्तर पर हुई थी, और उसी दिन राजस्थान का रणथम्भौर टाइगर प्रोजेक्ट राज्य की पहली बाघ परियोजना बना। पचास वर्ष बाद, वर्ष 2023 में प्रोजेक्ट टाइगर ने अपने 50 वर्ष पूरे किए — 1973 के शुभारंभ के समय देश में मात्र 268 बाघ और 9 टाइगर रिजर्व थे; वर्ष 2022 की अखिल भारतीय बाघ गणना (परिणाम 29 जुलाई 2023 को जारी) के अनुसार देश में बाघों की संख्या न्यूनतम 3,167, अधिकतम 3,925 और औसतन लगभग 3,682 आंकी गई, जिसमें मध्य प्रदेश 785 बाघों के साथ शीर्ष पर रहा। राजस्थान की 2022 की गणना में 88 बाघ दर्ज किए गए — जिससे राज्य देशभर में 10वें स्थान पर रहा — जो मुख्यतः रणथम्भौर व सरिस्का रिजर्व में केंद्रित हैं। हाल के विभागीय अनुमानों के अनुसार राज्य की बाघ आबादी बढ़कर लगभग 140 हो गई है।

वर्तमान में राजस्थान में पाँच अधिसूचित टाइगर रिजर्व हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 6,434.07 वर्ग किमी है, और कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य को छठे टाइगर रिजर्व के रूप में घोषित करने की प्रक्रिया जारी है।

टाइगर रिजर्वजिलेक्षेत्रफल (वर्ग किमी)घोषणा
रणथम्भौर टाइगर रिजर्वसवाईमाधोपुर, करौली, बूँदी, टोंक1530.371 अप्रैल 1973 (राज्य का पहला)
सरिस्का टाइगर रिजर्वअलवर, कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर1213.341978-79
मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्वकोटा, बूँदी, झालावाड़, चित्तौड़गढ़1135.79अप्रैल 2013
रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्वबूँदी, कोटा, भीलवाड़ा1496.69मई 2022 (चौथा)
धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्वधौलपुर, करौली1057.886 अक्टूबर 2023 (पाँचवाँ, सबसे छोटा)

परीक्षा की दृष्टि से इस क्षेत्र में कई ताज़ा घटनाक्रम महत्वपूर्ण हैं। रणथम्भौर से लाई गई युवा बाघिन RV-8 को उसकी संस्थापक आबादी मजबूत करने हेतु 15 जुलाई 2025 को रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के बाद सरिस्का टाइगर रिजर्व के एक किलोमीटर के दायरे में स्थित सभी खदानों को बंद करने का आदेश दिया गया, और सरिस्का, रामगढ़ विषधारी, कुंभलगढ़ अभयारण्य तथा राष्ट्रीय मरु उद्यान के चारों ओर पारिस्थितिकी संवेदनशील क्षेत्र (Eco-Sensitive Zone) अधिसूचित किए जा रहे हैं। रणथम्भौर टाइगर प्रोजेक्ट के तहत 25 फरवरी 2010 को एक समर्पित टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन की स्थापना की गई थी, और अलवर के कटीघाटी के निकट एक विश्वस्तरीय टाइगर म्यूजियम प्रस्तावित है, जिसे बाघों को समर्पित विश्व का पहला संग्रहालय बताया जा रहा है। सरिस्का में बाघिन ST-2 ("राजमाता") की स्मृति में एक प्रतिमा स्थापित की गई है, जो देश का पहला ऐसा बाघ स्मारक है। 15 अप्रैल 2026 को वन विभाग ने सवाईमाधोपुर-करौली क्षेत्र के दुर्लभ कैराकल (स्याह गोश) के संरक्षण हेतु रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में 'प्रोजेक्ट कैराकल' का शुभारंभ किया। जोधपुर निवासी कैलाश सांखला, जिन्हें "भारत के टाइगर मैन" के रूप में जाना जाता है, प्रोजेक्ट टाइगर के प्रमुख शिल्पकार माने जाते हैं और उन्होंने 'टाइगर' व 'रिटर्न ऑफ द टाइगर' पुस्तकें लिखीं; प्रसिद्ध बाघिन मछली की पुत्री कृष्णा व उसके तीन शावकों पर एस. नल्ला मुथु द्वारा निर्मित वृत्तचित्र 'क्लैश ऑफ टाइगर्स' भी उल्लेखनीय है।

बायोस्फीयर रिजर्व

मध्य व दक्षिण भारत के कई राज्यों के विपरीत, राजस्थान में फिलहाल भारत के आधिकारिक बायोस्फीयर रिजर्व नेटवर्क में शामिल कोई स्थल नहीं है — देश के 18 बायोस्फीयर रिजर्व (जैसे नीलगिरी, सुंदरबन और ग्रेट निकोबार) राज्य से बाहर स्थित हैं। इसके स्थान पर राजस्थान अपनी पारिस्थितिक विविधता की रक्षा राष्ट्रीय उद्यानों, टाइगर रिजर्वों, अभयारण्यों और कंजर्वेशन रिजर्वों के व्यापक जाल के माध्यम से करता है, जो अन्यत्र बायोस्फीयर रिजर्व द्वारा निभाई जाने वाली बफर व कॉरिडोर भूमिका को काफी हद तक पूरा करते हैं।

प्रमुख वन्यजीव अभयारण्य

राजस्थान के 26 वन्यजीव अभयारण्य विशाल अरावली वन पट्टी से लेकर मात्र कुछ वर्ग किलोमीटर के छोटे आर्द्रभूमि टुकड़ों तक फैले हैं। परीक्षा की दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण अभयारण्यों का विवरण नीचे दिया गया है।

  • सरिस्का वन्यजीव अभयारण्य, अलवर (544.22 वर्ग किमी): कंसका-कांकवाड़ी पठार पर फैला यह अभयारण्य बाला किला, भानगढ़, अजबगढ़, पांडुपोल और नीलकंठ महादेव मंदिर जैसी धरोहरों से युक्त है, तथा अपने रीसस बंदरों के लिए प्रसिद्ध है।
  • दर्रा वन्यजीव अभयारण्य, कोटा-झालावाड़ (227.63 वर्ग किमी): गागरोनी तोतों और धोक प्रधान वनों के लिए प्रसिद्ध, ऐतिहासिक गागरोन किला भी यहीं स्थित है।
  • कैलादेवी अभयारण्य, करौली-सवाईमाधोपुर (676.82 वर्ग किमी): मुख्यतः धोंक वन क्षेत्र, जिसके केंद्र में कैलादेवी मंदिर स्थित है।
  • कुंभलगढ़ वन्यजीव अभयारण्य, उदयपुर-पाली-राजसमंद (610.53 वर्ग किमी): अपने भेड़ियों के लिए प्रसिद्ध, इसमें रणकपुर जैन मंदिर व कुंभलगढ़ दुर्ग दोनों समाहित हैं; इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है।
  • फुलवारी की नाल अभयारण्य, उदयपुर (511.41 वर्ग किमी): सोम व मानसी वाकल नदियों का उद्गम स्थल, तथा सागवान की लकड़ी से निर्मित देश का पहला ह्यूमन एनाटॉमी पार्क यहीं स्थित है।
  • टॉडगढ़ रावली अभयारण्य, ब्यावर-पाली-राजसमंद (495.27 वर्ग किमी): मनोरम गोरमघाट ट्रेन सफारी और तेंदुओं की अच्छी संख्या के लिए जाना जाता है।
  • सीतामाता अभयारण्य, चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़-सलूंबर (422.94 वर्ग किमी): चीतल तथा विशेष रूप से दुर्लभ चौसिंगा हिरण का जन्मस्थान माना जाता है; यहाँ उड़न गिलहरी भी पाई जाती है, और आयुर्वेदिक दृष्टि से हिमालय के बाद यह भारत का सबसे समृद्ध औषधीय पादप क्षेत्र माना जाता है।
  • माउंट आबू वन्यजीव अभयारण्य, सिरोही (326.10 वर्ग किमी): राजस्थान की सबसे ऊँची चोटी गुरु शिखर को घेरे हुए, जंगली मुर्गे के लिए विख्यात।
  • राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य (564.03 वर्ग किमी): चम्बल नदी के किनारे राजस्थान, उत्तर प्रदेश व मध्य प्रदेश में फैला यह अभयारण्य गंभीर संकटग्रस्त घड़ियाल को समर्पित है।
  • रामगढ़ विषधारी अभयारण्य, बूँदी (303.05 वर्ग किमी): बूँदी रियासत का पूर्व शिकारगाह, आज बाघ व तेंदुओं की प्रजनन नर्सरी के रूप में मूल्यवान माना जाता है और अब टाइगर रिजर्व का दर्जा प्राप्त कर चुका है।
  • जयसमंद अभयारण्य, उदयपुर-सलूंबर (52.34 वर्ग किमी): तेंदुओं और जलपक्षियों की बस्ती के लिए प्रसिद्ध।
  • ताल छापर अभयारण्य, चूरू (7.19 वर्ग किमी): एक कॉम्पैक्ट घास का मैदान, जो अपने कृष्णमृग (ब्लैकबक) झुंड और शीतकाल में आने वाली कुर्जां (डेमोइज़ेल क्रेन) के लिए प्रसिद्ध है।
  • सज्जनगढ़ अभयारण्य, उदयपुर (5.19 वर्ग किमी): बनसडारा पहाड़ी और जियान सागर झील को समेटे यह अभयारण्य राज्य का पहला जैविक उद्यान (12 अप्रैल 2015) भी है।

इनके अतिरिक्त सवाई मानसिंह व सवाईमाधोपुर (दोनों सवाईमाधोपुर जिले में), भैंसरोड़गढ़ व बस्सी (चित्तौड़गढ़), बंधबारेठा व केसरबाग (भरतपुर/धौलपुर), जवाहरसागर (बूँदी-कोटा-चित्तौड़गढ़), शेरगढ़ (बाराँ), नाहरगढ़ व जमवारामगढ़ (जयपुर) तथा रामसागर व वनविहार (धौलपुर) भी उल्लेखनीय अभयारण्य हैं।

प्रमुख प्रजातियाँ और संरक्षण कार्यक्रम

गोडावण (Great Indian Bustard) — राज्य पक्षी

1981 में राजस्थान का राज्य पक्षी घोषित गोडावण (वैज्ञानिक नाम Ardeotis nigriceps) विश्व के सबसे भारी उड़ने वाले पक्षियों में से एक है और सेवण घास के मैदानों में रहने वाला एक शर्मीला, भूमि पर घोंसला बनाने वाला पक्षी है। IUCN ने 2011 में इसे अपनी रेड डाटा लिस्ट में 'गंभीर संकटग्रस्त' (Critically Endangered) श्रेणी में रखा; विश्वभर में मुश्किल से लगभग 150 पक्षी शेष हैं, जिनमें से लगभग 98% राजस्थान में — मुख्यतः राष्ट्रीय मरु उद्यान (जैसलमेर) में, तथा सोनखलिया (अजमेर) व सोरसन (बाराँ) के छोटे क्षेत्रों में — पाए जाते हैं। इस गिरावट को रोकने हेतु केंद्र व राज्य सरकार ने 5 जून 2013 को राष्ट्रीय मरु उद्यान में 'प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड' का शुभारंभ किया, जिससे राजस्थान समर्पित बस्टर्ड संरक्षण परियोजना चलाने वाला देश का पहला राज्य बना। इस कार्यक्रम ने 22 अक्टूबर 2024 को एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की, जब जैसलमेर के रामदेवरा व सुदासरी प्रजनन केंद्रों में नर पक्षी 'सुदा' और मादा 'टोनी' की सहायता से कृत्रिम गर्भाधान द्वारा भारत का पहला गोडावण चूजा जन्मा। रामदेवरा में एक GIB अंडा संग्रहण व हैचिंग केंद्र तथा सोरसन में एक प्रजनन केंद्र कार्यरत है; गजाई माता, चौहानी, सुदासरी व रामदेवरा में नए संरक्षण बाड़े भी बनाए गए हैं। सर्वेक्षण उत्साहजनक प्रगति दिखाते हैं — मई 2024 के जलाशय सर्वेक्षण में जैसलमेर में कुल 64 गोडावण गिने गए (21 रामदेवरा क्षेत्र में, 43 सुदासरी, गजाई माता, जमरा, चौहानी, सिपला व बाराँ क्षेत्र में), जो 2022 की मात्र 42 की संख्या से काफी अधिक है।

चिंकारा — राज्य पशु

छल्लेदार सींगों वाला छोटा, शर्मीला मृग चिंकारा (Gazella bennettii) 1981 में राजस्थान का राज्य पशु घोषित किया गया; यह राष्ट्रीय मरु उद्यान सहित राज्य के शुष्क भू-भागों में व्यापक रूप से पाया जाता है। ऊँट, हालांकि वन्य प्रजाति नहीं है, फिर भी सितम्बर 2014 में राज्य के आधिकारिक पशु (पशुधन श्रेणी) के रूप में अलग से घोषित किया गया, जो राजस्थान के राजकीय प्रतीकों में व्याप्त मरुस्थलीय थीम को रेखांकित करता है।

तेंदुआ और प्रोजेक्ट लेपर्ड

राजस्थान में 'प्रोजेक्ट लेपर्ड' वर्ष 2017 में शुरू किया गया, जिसके लिए जयपुर का झालाना क्षेत्र समर्पित तेंदुआ सफारी हेतु पहला स्थल चुना गया। झालाना लेपर्ड रिजर्व औपचारिक रूप से 4 अक्टूबर 2018 को उद्घाटित हुआ और आज इसमें 40 से अधिक तेंदुए हैं, जबकि जयपुर का दूसरा — आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व — 22 मई 2022 को लगभग 20 तेंदुओं के साथ खुला। 5 जून 2025 को बीड़ पापड़ वन क्षेत्र में तीसरी सफारी शुरू हुई, जिससे जयपुर में कुल पाँच वन्यजीव सफारी (सिंह, बाघ व तीन तेंदुआ सफारी) हो गईं और इसे अनौपचारिक रूप से "तेंदुओं की राजधानी" (Capital City of Leopards) कहा जाने लगा — कहा जाता है कि सिंह, बाघ व बहु-तेंदुआ सफारी एक साथ उपलब्ध कराने वाला यह विश्व का एकमात्र शहर है। अब झालाना से आमागढ़ होते हुए नाहरगढ़ अभयारण्य और आगे दिल्ली रोड पर अचरोल तक एक निरंतर तेंदुआ गलियारा भी विकसित किया गया है। कुंभलगढ़, टॉडगढ़ रावली, जयसमंद, शेरगढ़ (बाराँ), माउंट आबू, खेतड़ी बंसियाला, जवाई बांध, बस्सी और सीतामाता में भी तेंदुआ आबादी व सफारी विकसित की जा रही है, तथा हाल ही में आमाख महादेव मंदिर (उदयपुर) और गंगा-भैरवी घाटी (अजमेर) में नई तेंदुआ सफारियाँ शुरू हुई हैं।

अन्य उल्लेखनीय प्रजातियाँ

  • कैराकल (स्याह गोश): सवाईमाधोपुर-करौली पट्टी में मिलने वाली एक दुर्लभ, गुप्तचारी जंगली बिल्ली प्रजाति; 15 अप्रैल 2026 को रणथम्भौर टाइगर रिजर्व में 'प्रोजेक्ट कैराकल' शुरू किया गया, और वहाँ एक समर्पित प्रजनन केंद्र प्रस्तावित है।
  • कृष्णमृग (ब्लैकबक): चूरू के ताल छापर अभयारण्य की पहचान बना यह मृग; निकटवर्ती जसवंतगढ़ वन क्षेत्र में एक नया कृष्णमृग बाड़ा विकसित किया गया है, जहाँ घास के मैदान का विस्तार करने हेतु 22 कृष्णमृग स्थानांतरित किए गए।
  • घड़ियाल: चम्बल नदी में विश्व की लगभग 80% घड़ियाल आबादी निवास करती है, जो 2020 के लगभग 900 से बढ़कर 2021 में 954 हो गई; राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य व धौलपुर स्थित वनविहार अभयारण्य में संरक्षण कार्य जारी है।
  • भेड़िया: कुंभलगढ़ अभयारण्य से जुड़ी प्रसिद्ध प्रजाति, जयपुर के नाहरगढ़ जैविक उद्यान में भी इसका समर्पित प्रजनन कार्यक्रम चल रहा है।
  • रीछ (स्लॉथ बीयर): राज्य का पहला भालू अभयारण्य 20 जुलाई 2010 को सुंधामाता (जसवंतपुरा, जालौर-सिरोही के बीच) में अधिसूचित हुआ; नाहरगढ़ में देश का तीसरा रीछ बचाव केंद्र भी स्थित है।
  • सारस व साइबेरियन क्रेन: 43वीं सारस गणना (21 अप्रैल 2026) में भरतपुर-डीग के आर्द्रभूमि क्षेत्रों में संख्या 79 से बढ़कर 81 दर्ज हुई, जबकि उसी सर्वेक्षण में केवलादेव में साइबेरियन क्रेन की संख्या 22 पाई गई।
  • कुर्जां (डेमोइज़ेल क्रेन): प्रत्येक सितम्बर साइबेरिया, यूक्रेन व कज़ाकिस्तान से बड़े झुंडों में उड़कर फलौदी के खींचन गाँव के आसपास पहुँचती है, जो मारवाड़ का सर्वाधिक प्रसिद्ध पक्षी-आहार स्थल है।

जैविक उद्यान, चिड़ियाघर एवं अन्य संरक्षित क्षेत्र

राजस्थान में चार आधुनिक जैविक उद्यान संचालित हैं — सज्जनगढ़ (उदयपुर, 12 अप्रैल 2015 को खुला, राज्य का पहला जैविक उद्यान), नाहरगढ़ (जयपुर, 4 जून 2016, यहीं श्वेत बाघ 'भीम' व स्वर्णिम बाघिन 'स्कंची' का बसेरा है), माचिया (जोधपुर, 20 जनवरी 2016) और अभेड़ा (कोटा, 18 दिसम्बर 2021) — इनके अतिरिक्त पुराने नगरीय चिड़ियाघर जयपुर (सवाई राम सिंह द्वारा 1876 में स्थापित, राज्य का सबसे पुराना व सबसे बड़ा), उदयपुर (1878), बीकानेर (1922) व कोटा (1954) में हैं; मूल जोधपुर चिड़ियाघर (1936) अब माचिया जैविक उद्यान में विलय हो चुका है। इनके अलावा राज्य में 39 कंजर्वेशन रिजर्व हैं, जो उद्यानों व अभयारण्यों को जोड़ने वाले पारिस्थितिक गलियारों के रूप में कार्य करते हैं, तथा 33 शिकार-निषिद्ध क्षेत्र हैं — सबसे बड़ा कोटसर-सांवतसर और सबसे छोटा सैंथलसागर — जिनमें सोनखलिया व सोरसन क्षेत्र गोडावण की सुरक्षा करते हैं। आर्द्रभूमि के मोर्चे पर राजस्थान में वर्तमान में पाँच अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थल हैं: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (1981), साँभर झील (1990), तथा हाल ही में जोड़े गए खींचन व मेनार तालाब (दोनों जून 2025) और सिलीसेढ़ झील, अलवर (दिसम्बर 2025)।

स्मरण ट्रिक — राजस्थान के 5 टाइगर रिजर्व (अधिसूचना क्रम)
'रण सरिता में मुकुंद राम धोए'
शब्दांशटाइगर रिजर्वअधिसूचना
रणरणथम्भौर टाइगर रिजर्व1 अप्रैल 1973 (पहला)
सरि(ता)सरिस्का टाइगर रिजर्व1978-79
मुकुं(द)मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्वअप्रैल 2013
रामरामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्वमई 2022 (चौथा)
धो(ए)धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व6 अक्टूबर 2023 (पाँचवाँ, सबसे छोटा)
नोट: यह क्रम राजस्थान के पाँचों टाइगर रिजर्वों की अधिसूचना तिथि के अनुसार कालानुक्रमिक है (गाइड की तालिका पर आधारित) — सूची/क्रम-आधारित प्रश्नों के लिए उपयोगी।
कन्फ्यूज़न बस्टर — साइबेरियन क्रेन बनाम कुर्जां (डेमोइज़ेल क्रेन)

साइबेरियन क्रेन: केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (भरतपुर) से जुड़ी — यह उद्यान कभी शीतकाल में साइबेरियन क्रेन का बसेरा हुआ करता था; 43वीं गणना (21 अप्रैल 2026) में यहाँ 22 साइबेरियन क्रेन दर्ज की गईं।

कुर्जां (डेमोइज़ेल क्रेन): प्रत्येक सितम्बर साइबेरिया, यूक्रेन व कज़ाकिस्तान से बड़े झुंडों में उड़कर फलौदी के खींचन गाँव के आसपास पहुँचती है — यह मारवाड़ (पश्चिमी राजस्थान) का सर्वाधिक प्रसिद्ध पक्षी-आहार स्थल है।

याद रखें: दोनों प्रवासी क्रेन साइबेरिया की ओर से जुड़ी हैं, पर साइबेरियन क्रेन = केवलादेव (भरतपुर, पूर्वी राजस्थान), जबकि कुर्जां/डेमोइज़ेल क्रेन = खींचन (फलौदी, पश्चिमी राजस्थान) — दो भिन्न प्रजातियाँ, दो भिन्न स्थान, परीक्षा में अक्सर गड्डमड्ड कर दी जाती हैं।

रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान — योजनाबद्ध रेखाचित्र (सांकेतिक, वास्तविक भौगोलिक मानचित्र नहीं)
रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र (सांकेतिक)बनास नदी — उद्यान के उत्तर में बहती हैबनास नदी (उत्तर)चम्बल नदी — उद्यान के दक्षिण में बहती हैचम्बल नदी (दक्षिण)पद्म तालाब (Padam Talab)पद्म तालाबमलिक तालाब (Malik Talab)मलिक तालाबराजबाग झील (Rajbagh Lake)राजबाग झीलजोगी महल (Jogi Mahal)जोगी महलगणेश मंदिर (Ganesh Mandir)गणेश मंदिर
यह एक सांकेतिक (schematic) आरेख है — गाइड में वर्णित तीन झीलों (पद्म तालाब, मलिक तालाब, राजबाग झील), जोगी महल, गणेश मंदिर तथा उद्यान के उत्तर में बनास व दक्षिण में चम्बल नदी की सापेक्षिक स्थिति दर्शाने हेतु; यह सटीक भौगोलिक मानचित्र नहीं है।

त्वरित तथ्य

  • रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान (282.03 वर्ग किमी, सवाईमाधोपुर) राजस्थान का सबसे पुराना व सबसे बड़ा राष्ट्रीय उद्यान है, जो 1 नवम्बर 1980 को अधिसूचित हुआ, और यहीं 1 अप्रैल 1973 को राज्य की पहली बाघ परियोजना शुरू हुई थी।
  • राजस्थान में 6,434.07 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाले 5 टाइगर रिजर्व हैं — रणथम्भौर, सरिस्का, मुकुन्दरा हिल्स, रामगढ़ विषधारी और धौलपुर-करौली (सबसे छोटा) — कुंभलगढ़ अभयारण्य को छठे के रूप में प्रस्तावित किया गया है।
  • 1981 से राज्य पक्षी घोषित गोडावण गंभीर संकटग्रस्त श्रेणी में है; विश्वभर में केवल लगभग 150 शेष हैं, जिनमें से 98% राजस्थान में, मुख्यतः जैसलमेर के राष्ट्रीय मरु उद्यान में हैं।
  • जयपुर 'प्रोजेक्ट लेपर्ड' (2017 में शुरू) के तहत पाँच वन्यजीव सफारी (सिंह, बाघ व तीन तेंदुआ सफारी — झालाना, आमागढ़ व बीड़ पापड़) संचालित करता है, जिससे इसे "तेंदुओं की राजधानी" कहा जाता है।

त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • थार मरुस्थल विश्व का 9वाँ सबसे बड़ा मरुस्थल है; यह राजस्थान के पश्चिमी भाग में है।
  • चंबल नदी राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी है; यह यमुना में मिलती है।
  • भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून जून में केरल पहुंचता है; यह अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों से आता है।
  • कर्क रेखा (23.5°N) राजस्थान के बांसवाड़ा जिले से गुजरती है।
  • मकराना (नागौर) का सफेद संगमरमर ताजमहल में प्रयुक्त।
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1

राजस्थान का कौन-सा टाइगर रिजर्व राज्य का चौथा टाइगर रिजर्व है, जिसकी घोषणा मई 2022 में हुई थी?

2

राजस्थान का राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) मुख्य रूप से किस राष्ट्रीय उद्यान में पाया जाता है?

3

गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. IUCN ने इसे वर्ष 2011 में गंभीर संकटग्रस्त (Critically Endangered) श्रेणी में रखा था। 2. कृत्रिम गर्भाधान द्वारा भारत का पहला गोडावण चूजा 22 अक्टूबर 2024 को रामदेवरा व सुदासरी प्रजनन केंद्रों में जन्मा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

4

सूची-I (टाइगर रिजर्व) को सूची-II (अधिसूचना) से सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए: सूची-I: A. रणथम्भौर टाइगर रिजर्व, B. सरिस्का टाइगर रिजर्व, C. मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व, D. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व। सूची-II: 1. 1978-79, 2. अप्रैल 2013, 3. 1 अप्रैल 1973, 4. मई 2022 (चौथा)।

5

निम्नलिखित टाइगर रिजर्वों को उनकी अधिसूचना तिथि के अनुसार कालानुक्रम (सबसे पुराने से सबसे नए) में व्यवस्थित कीजिए और नीचे दिए गए कूट से सही अनुक्रम चुनिए: 1. मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व, 2. रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व, 3. सरिस्का टाइगर रिजर्व, 4. धौलपुर-करौली टाइगर रिजर्व।

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