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अंतरिक्ष तकनीक: ISRO रॉकेट, उपग्रह, मिशन | RAS Notes

Space Technology: ISRO Rockets, Satellites, Missions | RAS

⏱ 12 मिनटintermediate✓ अपडेटेड: मार्च 2026· Science and Technology

परिचय एवं परीक्षा प्रासंगिकता

अंतरिक्ष तकनीक आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी का सबसे महत्वपूर्ण और विकासशील क्षेत्र है। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की RAS परीक्षा में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विषय से प्रश्न पूछे जाते हैं, और अंतरिक्ष तकनीक इसका अभिन्न अंग है। यह विषय न केवल भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों की समझ प्रदान करता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास को भी स्पष्ट करता है।

अंतरिक्ष तकनीक के अध्ययन से उम्मीदवारों को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO), उपग्रहों, प्रक्षेपण यानों और अंतरिक्ष अन्वेषण से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। यह विषय सामान्य ज्ञान और राष्ट्रीय विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग मौसम पूर्वानुमान, संचार, सर्वेक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में होता है।

मुख्य अवधारणाएं

1. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO)

इसरो भारत की राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी है, जिसकी स्थापना 1969 में की गई थी। यह संगठन भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम का नेतृत्व करता है और उपग्रहों, प्रक्षेपण यानों तथा अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में कार्य करता है। इसरो के महत्वपूर्ण प्रक्षेपण यान हैं - सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SLV), ऑग्मेंटेड सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (ASLV), पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) और जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV)। इसरो का मुख्यालय बेंगलुरु में स्थित है।

2. कृत्रिम उपग्रह (सैटेलाइट) प्रणाली

कृत्रिम उपग्रह ऐसे उपकरण हैं जो पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा करते हैं और विभिन्न उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं। भारत के प्रमुख उपग्रह हैं - इंडियन नेशनल सैटेलाइट (INSAT) श्रृंखला जिसका उपयोग संचार और मौसम विज्ञान के लिए होता है, इंडियन रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट (IRS) श्रृंखला जिसका उपयोग दूरस्थ संवेदन के लिए होता है। चंद्रयान और मंगलयान उपग्रह नहीं, बल्कि अंतरग्रहीय अन्वेषण मिशन (अंतरिक्ष यान) हैं। उपग्रहों का उपयोग भूमि सर्वेक्षण, जलवायु निरीक्षण, आपदा प्रबंधन और कृषि विकास में किया जाता है।

3. प्रक्षेपण यान (लॉन्च व्हीकल) प्रौद्योगिकी

प्रक्षेपण यान वह वाहन हैं जो उपग्रहों और अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में ले जाते हैं। पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) भारत का सबसे विश्वसनीय और बहुउद्देश्यीय प्रक्षेपण यान है। यह निम्न पृथ्वी कक्षा (Low Earth Orbit) में उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में सक्षम है। जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (GSLV) भारी उपग्रहों को भूतुल्यकालिक/भूस्थिर कक्षा में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इन प्रक्षेपण यानों ने भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया है।

4. मुख्य अंतरिक्ष अभियान (स्पेस मिशन)

भारत ने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। चंद्रयान-1 (2008) भारत का पहला चंद्र अन्वेषण मिशन था जिसके उपकरणों ने चंद्रमा की सतह पर जल-अणुओं की उपस्थिति के प्रमाण दिए। मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन) 5 नवंबर 2013 को प्रक्षेपित हुआ और 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में पहुंचा; भारत पहले ही प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुंचने वाला पहला देश और ऐसा करने वाला पहला एशियाई देश बना। आदित्य-L1 मिशन सूर्य का अध्ययन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सॉफ्ट लैंडिंग की।

5. अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग

अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का व्यावहारिक अनुप्रयोग मानव जीवन के कई क्षेत्रों में देखा जाता है। दूरस्थ संवेदन (Remote Sensing) का उपयोग कृषि, वनीकरण, शहरीकरण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में होता है। कृत्रिम उपग्रहों के माध्यम से दूरसंचार, टेलीविजन प्रसारण और इंटरनेट सेवाएं प्रदान की जाती हैं। मौसम संबंधी उपग्रह मौसम पूर्वानुमान, तूफान की चेतावनी और जलवायु निगरानी में मदद करते हैं। भूमि सर्वेक्षण, नक्शा निर्माण और शहर नियोजन के लिए भी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का विस्तृत उपयोग होता है।

महत्वपूर्ण तथ्य

• ISRO की स्थापना: 1969 में विक्रम साराभाई के नेतृत्व में

• PSLV का पहला सफल प्रक्षेपण: अक्टूबर 1994 (PSLV-D2); 1993 का पहला प्रयास असफल रहा

• मंगलयान की सफलता: 5 नवंबर 2013 को प्रक्षेपण, 24 सितंबर 2014 को मंगल की कक्षा में प्रवेश, कुल बजट लगभग ₹450 करोड़

• चंद्रयान-1 की उपलब्धि: 2008 में प्रक्षेपित; चंद्रमा की सतह पर जल-अणुओं की उपस्थिति के प्रमाण

• भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023: निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने और व्यावसायिक अंतरिक्ष गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए

• भू-स्थिर कक्षा (GEO): पृथ्वी से लगभग 36,000 किमी की दूरी पर स्थित

• निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO): पृथ्वी से 160 से 2000 किमी की दूरी पर स्थित

प्रक्षेपण यानपूरा नामउपयोगपहला प्रयास
SLVसैटेलाइट लॉन्च व्हीकलछोटे उपग्रह, निम्न पृथ्वी कक्षा1979
ASLVऑग्मेंटेड सैटेलाइट लॉन्च व्हीकलनिम्न पृथ्वी कक्षा1987
PSLVपोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकलबहुउद्देश्यीय, निम्न पृथ्वी कक्षा1993 (पहला सफल: 1994)
GSLVजियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकलभारी उपग्रह, भूस्थिर कक्षा2001
भारत के प्रमुख अंतरिक्ष मिशन
  1. 1969इसरो की स्थापना
  2. 2008चंद्रयान-1 का प्रक्षेपण
  3. नवंबर 2013 - सितंबर 2014मंगलयान: प्रक्षेपण से मंगल की कक्षा तक
  4. अगस्त 2023चंद्रयान-3 की सॉफ्ट लैंडिंग
  5. सितंबर 2023आदित्य-L1 का प्रक्षेपण

राजस्थान विशेष

राजस्थान में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका है। राजस्थान की जलवायु और भौगोलिक स्थिति दूरस्थ संवेदन और कृषि अनुप्रयोगों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। राज्य में ISRO के उपग्रहों द्वारा की गई निगरानी से कृषि उत्पादन, जल संसाधन प्रबंधन और मरुस्थलीकरण नियंत्रण में महत्वपूर्ण सहायता मिलती है।

राजस्थान के रेगिस्तानी क्षेत्रों की निगरानी के लिए ISRO के IRS उपग्रहों का व्यापक उपयोग होता है। भूजल संसाधनों की पहचान, मिट्टी की गुणवत्ता का मूल्यांकन और सिंचाई परियोजनाओं की योजना के लिए दूरस्थ संवेदन तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इसरो के राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) का क्षेत्रीय केंद्र RRSC-पश्चिम जोधपुर में स्थित है।

परीक्षा पैटर्न

RPSC RAS परीक्षा में अंतरिक्ष तकनीक से सामान्यतः निम्नलिखित प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं:

1. तथ्यात्मक प्रश्न: ISRO की स्थापना, मिशनों का नाम, प्रक्षेपण यानों की जानकारी और प्रमुख उपग्रहों से संबंधित प्रश्न।

2. वैचारिक प्रश्न: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के सिद्धांतों, कक्षाओं के प्रकार और उपग्रहों की कार्यप्रणाली से संबंधित।

3. अनुप्रयोग आधारित प्रश्न: दूरस्थ संवेदन, कृषि, आपदा प्रबंधन और जलवायु निगरानी में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग।

4. सांस्थानिक प्रश्न: ISRO, INSAT, IRS और अन्य संगठनों की संरचना और कार्य।

5. तुलनात्मक प्रश्न: विभिन्न प्रक्षेपण यानों, कक्षाओं और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कार्यक्रमों की तुलना।

स्मरण युक्तियां

1. संक्षिप्त नाम याद रखें: ISRO, PSLV, GSLV, INSAT, IRS, LEO, GEO जैसे महत्वपूर्ण संक्षिप्त नामों को याद रखें। इन्हें नियमित अभ्यास से बेहतर स्मरण रखा जा सकता है।

2. वर्षों को जोड़ें: विभिन्न मिशनों और प्रक्षेपणों के साथ महत्वपूर्ण वर्षों को संबंधित करें। उदाहरण - 1969 (ISRO), 2008 (चंद्रयान-1), 2013 (मंगलयान), 2023 (चंद्रयान-3)।

3. श्रृंखला विधि: अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विभिन्न पहलुओं को आपस में जोड़कर याद रखें। उदाहरण - ISRO → PSLV/GSLV → उपग्रह → अनुप्रयोग।

4. चार्ट और आरेख बनाएं: कक्षाओं के प्रकार, उपग्रहों की श्रृंखलाएं और मिशनों को चार्ट के माध्यम से दृश्यात्मक रूप में समझें।

5. समाचार और अपडेट्स: ISRO से संबंधित नवीनतम समाचार, नई परियोजनाओं और सफलताओं को नियमित रूप से पढ़ें। यह परीक्षा में सहायक होगा।

6. तुलना तालिका बनाएं: विभिन्न प्रक्षेपण यानों, उपग्रहों और मिशनों की तुलनात्मक तालिका बनाएं जिससे अंतर स्पष्ट हो सके।

अंतरिक्ष तकनीक का विषय आधुनिक भारत की प्रगति का प्रतीक है और RAS परीक्षा के लिए इसकी समझ अत्यंत आवश्यक है। नियमित अध्ययन और व्यावहारिक अनुप्रयोगों की समझ से इस विषय में पूर्ण दक्षता प्राप्त की जा सकती है।

⚡ त्वरित रिवीजन — One-Liners

  • •DNA की खोज 1953 में वॉटसन और क्रिक ने की; यह एक द्विकुण्डलित संरचना है।
  • •ISRO की स्थापना 1969 में हुई; चंद्रयान-3 ने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा पर सफल लैंडिंग की।
  • •भारत ने पहला परमाणु परीक्षण 1974 में 'स्माइलिंग बुद्धा' के नाम से पोखरण में किया।
  • •सुपर कंप्यूटर PARAM 8000 1991 में CDAC द्वारा विकसित किया गया — यह भारत का पहला स्वदेशी सुपर कंप्यूटर था।
  • •डेंगू एडीस मच्छर से फैलता है; वायरस DENV 1-4।
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इस टॉपिक से जुड़े पिछले वर्षों के प्रश्न (PYQ)

आधिकारिक प्रश्नपत्रों के असली प्रश्न, उत्तर सहित।

  1. RAS 2018

    निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: ISRO केन्द्र — स्थान (I) विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र (VSSC) त्रिवेन्द्रम (केरल) (II) यू.आर. राव सैटेलाइट केन्द्र (URSC) बेंगलुरु (कर्नाटक) (III) राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र (NRSC) देहरादून (उत्तराखंड) (IV) भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (IIRS) हैदराबाद (तेलंगाना) उपरोक्त में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

    1. (A) केवल I और II
    2. (B) केवल I, II और III
    3. (C) केवल II, III और IV
    4. (D) I, II, III और IV

    उत्तर: (A) केवल I और II

  2. RAS 2015

    ISRO द्वारा निर्मित कुछ उपग्रहों की सूची उनके प्रक्षेपण तिथि सहित नीचे दी गई है। निम्नलिखित में से कौन-से दो उपग्रह कक्षा तक पहुँचने में विफल रहे- उपग्रह प्रक्षेपण तिथि (I) GSAT-2 8 मई, 2003 (II) GSAT-4 15 अप्रैल, 2010 (III) GSAT-5P 25 दिसंबर, 2010 (IV) GSAT-12 15 जुलाई, 2011

    1. (A) I और II
    2. (B) II और III
    3. (C) III और IV
    4. (D) IV और I

    उत्तर: (B) II और III

  3. RAS 2013

    भारत ने किसका प्रक्षेपण कर अंतरिक्ष युग में प्रवेश किया —

    1. (A) भास्कर I
    2. (B) आर्यभट्ट
    3. (C) एप्पल (Apple)
    4. (D) अग्नि

    उत्तर: (B) आर्यभट्ट

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